samacharsecretary.com

भारत-इंग्लैंड मैच में पाकिस्तानी अंपायर: लाहौर में आतंकी हमले से बचे थे बाल-बाल

  मैनचेस्टर  भारतीय टीम ओल्ड ट्रैफर्ड के मैदान पर इंग्लैंड का सामना कर रही है। 5 मैचों की सीरीज का यह चौथा मुकाबला है। बेन स्टोक्स ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। इस मैच में पूरा अंपायर पैनल बदल गया है। मैदानी अंपायर की भूमिका में रोड टकर के साथ अहसान रजा हैं। वहीं थर्ड अंपायर की जिम्मेदारी श्रीलंका के कुमार धर्मसेना निभा रहे हैं। वहीं जेफ क्रो मैच रेफरी की भूमिका में हैं। भारत के मैच में पाकिस्तानी अंपायर भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते ठीक नहीं चल रहे हैं। पहलगाम में आंतकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया। वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स में भारत और पाकिस्तान का मैच रद्द कर दिया गया। सोशल मीडिया पर विरोध की वजह से मैच नहीं खेला गया। अब भारत और इंग्लैंड के मैच में पाकिस्तानी अंपायर मैदान पर अंपायरिंग कर रहा है। रोड टकर ऑस्ट्रेलिया तो एहसान रजा पाकिस्तान के हैं। कौन हैं अहसान रजा? आईसीसी एलीट पैनल में अहसान रजा का नाम शामिल है। 2023 में उन्हें इस पैनल में जगह मिली थी। 51 साल के अहसान रजा ने पाकिस्तान में घरेलू क्रिकेट खेले चुके हैं। उन्होंने 21 फर्स्ट क्लास और 4 लिस्ट ए मैच खेले। यह टेस्ट मैच में अंपायर के रूप में उनका 35वां मुकाबला है। इस दौरान 22 बार वह मैदान पर रहे जबकि 13 बार टीवी अंपायर की भूमिका निभाई। इसके अलावा 83 वनडे और 111 टी20 इंटरनेशनल में अंपायरिंग कर चुके हैं। उन्होंने 34 महिला इंटरनेशनल मैचों में भी अंपायरिंग की जिम्मेदारी संभाली है। आतंकी हमले में लगी थी गोल 3 मार्च 2009 को लाहौर में श्रीलंकाई क्रिकेट टीम पर हुए हमले में अहसान रजा घायल हो गए। उन्हें दो गोलियां लगीं और वे लाहौर के एक अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती थे। वह 2010 से इंटरनेशनल क्रिकेट में अंपायरिंग कर रहे हैं। अहसान टी20 इंटरनेशनल में 50 मुकाबलों में मैदानी अंपायर की भूमिका निभाने वाले पहले ऑफिशियल हैं। रजा 2023 विश्व कप और 2024 टी20 विश्व कप में भी अंपायर की भूमिका में थे।

HTET परीक्षा की तैयारी पूरी, 30-31 जुलाई को एग्जाम, एडमिट कार्ड डाउनलोड करें

चंडीगढ़ हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (BSEH) ने हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (HTET 2025) के एडमिट कार्ड आधिकारिक वेबसाइट bseh.org.in पर जारी कर दिए हैं। इस बार बोर्ड ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि परीक्षा केंद्र पर एडमिट कार्ड की सेंटर कॉपी और कैंडिडेट कॉपी दोनों का कलर प्रिंट आउट अनिवार्य रूप से लाना होगा। HTET 2025: एग्जाम शेड्यूल तारीख परीक्षा स्तर समय परीक्षार्थी की संख्या परीक्षा केंद्रों की संख्या 30 जुलाई 2025 Level-3 (PGT) शाम 3:00 से 5:30 बजे 1,20,943 399 31 जुलाई 2025 Level-2 (TGT) सुबह 10:00 से 12:30 बजे 2,01,517 673 31 जुलाई 2025 Level-1 (PRT) शाम 3:00 से 5:30 बजे 82,917 280 लाखों अभ्यर्थी होंगे शामिल हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा तीनों स्तरों यानी पीआरटी, टीजीटी और पीजीटी परीक्षा दो दिनों में आयोजित की जाएगी। इस बार राज्य भर के 673 परीक्षा केंद्रों पर कुल 4,05,377 अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित होंगे। 30 जुलाई को लेवल-3 (PGT) की परीक्षा शाम 3:00 से 5:30 बजे तक होगी, जिसमें 120,943 अभ्यर्थी 399 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा देंगे। इसके बाद 31 जुलाई को TGT और PRT स्तर की परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा केंद्र पर क्या-क्या प्रतिबंधित है? HTET परीक्षा में सुरक्षा और अनुशासन को प्राथमिकता देते हुए कई चीजों पर रोक लगाई गई है: धातु की वस्तुएं जैसे- अंगूठी, झुमके, पेन, हार, ब्रोच आदि मोबाइल, ब्लूटूथ, कैमरा, स्मार्ट वॉच, पेजर, कैलकुलेटर लॉग टेबल, पर्स, प्लास्टिक पाउच, किसी प्रकार के नोट्स या कागज महिला अभ्यर्थियों को बिंदी, सिंदूर व मंगलसूत्र पहनने की अनुमति होगी। परीक्षा केंद्र पर कब पहुंचें? एचटीईटी 2025 परीक्षा में शामिल होने वाले सभी अभ्यर्थियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे परीक्षा शुरू होने से कम से कम 2 घंटे 10 मिनट पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंच जाएं। इसका उद्देश्य यह है कि समय रहते सभी अनिवार्य प्रक्रियाएं जैसे मेटल डिटेक्टर के माध्यम से सुरक्षा जांच, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, अंगूठे के निशान की पहचान और अन्य आवश्यक जांच प्रक्रियाएं बिना किसी देरी के पूरी की जा सकें। निर्धारित समय के बाद पहुंचने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी, इसलिए समय की पाबंदी अत्यंत आवश्यक है। HTET Admit Card 2025: कैसे डाउनलोड करें? सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट bseh.org.in पर जाएं। होम पेज पर “HTET Admit Card 2025” लिंक पर क्लिक करें। अपनी रजिस्ट्रेशन ID या मोबाइल नंबर व पासवर्ड डालकर लॉग इन करें। स्क्रीन पर आपका एडमिट कार्ड दिखाई देगा। कलर प्रिंट आउट निकालें और सेंटर व कैंडिडेट कॉपी दोनों साथ रखें।

24 जुलाई को राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करेंगे CM डॉ. यादव, वन विकास निगम की होगी विशेष बैठक

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने पर 24 जुलाई को स्वर्ण जयंती वर्ष का उद्घाटन एवं राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे।वे ‘विजन डॉक्यूमेंट-2047’ का विमोचन एवं प्रदर्शनी का उद्घाटन भी करेंगे। कार्यक्रम में निगम के उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारी को सम्मानित भी किया जायेगा। वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री श्री दिलीप सिंह अहिरवार, अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री असीम श्रीवास्तव भी उपस्थित रहेंगे। गुरुवार 24 जुलाई को प्रात: 10:30 बजे से भारतीय वन प्रबंधन संस्थान नेहरू नगर भोपाल के ऑडिटोरियम में होने वाले कार्यक्रम के संबंध में प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम श्री व्ही.एन. अम्बाड़े ने जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, तेलंगाना और कर्नाटक राज्य के वन विकास निगम के प्रबंध संचालक द्वारा विभिन्न विषयों जैसे थिनिंग व फेलिंग, जनरल प्लानटेशन, मियॉवाकी प्लानटेशन, डिपॉजिट वर्क, थीम वर्क, ईको टूरिज्म विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया जायेगा। कार्यशाला का उद्देश्य मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा विगत 50 वर्षों में किये गये वानिकी, वन एवं वन्य जीव संरक्षण कार्य को रेखांकित किया जाना है। कार्यक्रम में वन विकास निगम के कार्यों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया जायेगा। वनीकरण में निगम की अनेक उपलब्धियां मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम की स्थापना 24 जुलाई 1975 को हुई थी। निगम की स्थापना का उद्देश्य निम्न कोटि के वन क्षेत्रों को तेजी से बढ़ने वाली बहुमूल्य तथा बहु उपयोगी प्रजातियों के रोपण द्वारा उच्च कोटि के वन क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता एवं गुणवत्ता में सुधार लाना है। निगम का कार्य प्रदेश के 22 जिलों में संचालित है। निगम अंतर्गत कुल 13 काष्ठगार एवं 15 स्थाई रोपणियां स्थापित हैं। निगम को लगभग 4.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें से वर्ष 2025 तक 3.90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का उपचारण किया जा चुका है एवं 3.14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रोपण किया गया है। विगत 2 वर्षों में निगम द्वारा 2 करोड़ 48 लाख पौधों का रोपण किया गया है। निगम की रोपणियों में वर्ष 2025 में कुल 1 करोड़ 70 लाख सागौन रूटशूट सागौन का उत्पादन हुआ है। टाइगर रिजर्व में चुनौती पूर्ण कार्य वन विकास निगम की अधिकांश परियोजना मंडल टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्य क्षेत्र बफर जोन से लगे हैं। इन क्षेत्रों में बाघ, तेंदुआ, भालू एवं हिरण आदि वन्य जीवों के विचरण की उपस्थिति दर्ज की गई है। वन्य जीवों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिये निगम द्वारा बोरीबंधान, तालाब निर्माण एवं झिरियां निर्माण का कार्य किया जाता है। वर्ष 2024-25 में लगभग 60 हजार घनमीटर इमारती काष्ठ एवं 3100 टन बांस का उत्पादन किया गया। जैव विविधता के साथ साथ जलगंगा संवर्धन भी निगम ने व्यावसायिक वृक्षारोपण के साथ जैव विविधता संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य भी किया जा रहा है। निगम द्वारा ‘जल गंगा संवर्धन’ एवं ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अंतर्गत लगभग 125 करोड़ पौधों का रोपण वृहद स्तर पर किया जा रहा है। निगम को वित्तीय वर्ष 2024-25 में 170 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है।   

पाट जात्रा पूजा विधान के साथ होगी विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व की गुरूवार से विधिवत शुरूआत

परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है बस्तर दशहरा रायपुर, छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में कल गुरुवार को हरेली अमावस्या के मौके पर पाट जात्रा पूजा विधान के साथ विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व की शुरुआत होगी। इस दौरान पारम्परिक मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी, पटेल, नाईक-पाईक, सेवादार रथ निर्माण के लिए औजार बनाने ठुरलू खोटला रस्म अदा करेंगे। इस अवसर पर बस्तर दशहरा समिति द्वारा मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी, पटेल, नाईक-पाईक, सेवादारों सहित गणमान्य नागरिकों एवं ग्रामीणों को उपस्थित होकर पाट जात्रा पूजा विधान में शामिल होने का आग्रह किया गया है।       जात्रा पूजा विधान के साथ ही बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को समर्पित इस 75 दिवसीय ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व में शुक्रवार 05 सितम्बर को डेरी गड़ाई पूजा विधान, रविवार 21 सितम्बर को काछनगादी पूजा विधान, सोमवार 22 सितम्बर को कलश स्थापना पूजा विधान, मंगलवार 23 सितम्बर को जोगी बिठाई पूजा विधान सहित बुधवार 24 सितम्बर से सोमवार 29 सितम्बर 2025 तक प्रतिदिन नवरात्रि पूजा एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, सोमवार 29 सितम्बर को सुबह 11 बजे बेल पूजा, मंगलवार 30 सितम्बर को महाअष्टमी पूजा विधान एवं निशा जात्रा पूजा विधान, बुधवार 01 अक्टूबर को कुंवारी पूजा विधान, जोगी उठाई पूजा विधान एवं मावली परघाव, गुरुवार 02 अक्टूबर को भीतर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, शुक्रवार 03 अक्टूबर को बाहर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, शनिवार 04 अक्टूबर को सुबह काछन जात्रा पूजा विधान के पश्चात दोपहर में मुरिया दरबार का आयोजन होगा। वहीं रविवार 05 अक्टूबर को कुटुम्ब जात्रा पूजा विधान में ग्राम्य देवी-देवताओं की विदाई की जाएगी और मंगलवार 07 अक्टूबर को मावली माता की डोली की विदाई पूजा विधान के साथ ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व सम्पन्न होगी।,

2156 करोड़ रुपए की ‘अवतार 3’ का खलनायक आया सामने , Varang का पोस्टर हुआ रिलीज

लॉस एंजिल्स फिल्म प्रोड्यूसर जेम्स कैमरून की मोस्ट अवेटेड मूवी 'अवतार: फायर एंड ऐश' में पैंडोरा की आगे की कहानी देखने के लिए तैयार हो जाइये। 'अवतार 3' से फिल्म के विलेन 'वारांग' की पहली झलक दिखा दी गई है। मेकर्स ने ये भी ऐलान कर दिया है कि इसका ट्रेलर कब रिलीज होगा। इसका बजट 25 crores USD यानी 21,56,28,58,750 भारतीय रुपये बताया जा रहा है। 'अवतार' फ्रैंचाइजी का नया चैप्टर इसी साल रिलीज होगा। ये 19 दिसंबर 2025 को ग्लोबली रिलीज होगी। मेकर्स ने तीसरे पार्ट की पहली झलक शेयर कर दी है, जिसने फैंस की धड़कनों को बढ़ा दिया है। पहले पोस्टर में विलेन वारांग का चेहरा है। ये किरदार ऊना चैपलिन निभा रहे हैं। वारांग को मंगक्वान कबीले या ऐश पीपल की नेता कहा जा रहा है। नावी वॉलकैनो (ज्वालामुखी) के पास फायरी एरिया में रहते हैं, जो पैंडोरा के वातावरण में एक नया आयाम जोड़ती है। वारांग का किरदार कहानी में एक अनोखी मुश्किलें लाने के लिए तैयार है। 'अवतार 3' का पहला पोस्टर 'अवतार 3' का ट्रेलर कब आएगा? मेकर्स ने पहले पोस्टर के साथ ही ये भी बता दिया है कि फिल्म का ट्रेलर कब रिलीज होगा। उन्होंने पोस्टर शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, 'अवतार: फायर एंड ऐश में वारांग से मिलिए। इस वीकेंड थिएटर्स में स्पेशली 'द फैंटास्टिक फोर: फर्स्ट स्टेप्स' के साथ ट्रेलर देखने वाले पहले लोगों में शामिल हों।' बता दें कि 25 जुलाई 2025 को ट्रेलर इस फिल्म की रिलीज के साथ लॉन्च होगा। यहां दिखाया गया ट्रेलर, ये है कहानी रिपोर्ट के अनुसार, 'अवतार 3' का ट्रेलर हाल ही में डिज्नी के लॉस एंजिल्स और न्यूयॉर्क ऑफिस में दिखाया गया। इसमें विलेन वारांग को लाल और काले रंग की हेडड्रेस पहने दिखाया गया है। वो जेक और नेयतिरी की बेटी किरी को बंधक बना लेती है और कहती है, 'तुम्हारी देवी का यहां कोई प्रभुत्व नहीं है।'

भोपाल में 400 करोड़ के निवेश से लगेगा रोजगार का मेला, 1500 युवाओं को मिलेगा लाभ

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार युवाओं और बहनों के रोजगार के लिए संकल्पित है। इस दिशा में राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। गुरुवार 24 जुलाई को भोपाल जिले के औद्योगिक क्षेत्र अचारपुरा में पांच औद्योगिक इकाइयों का भूमि-पूजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने हाल ही में स्पेन और दुबई की यात्रा में अनेक निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया है। मध्यप्रदेश में वर्ष 2025 उद्योग और रोजगार वर्ष है। गांव से लेकर शहरों तक समृद्धि लाना, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए निर्णायक भूमिका निभा कर मध्यप्रदेश ने नए औद्योगिक युग की शुरूआत की है। पांच इकाईयों का होगा भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव 24 जुलाई को अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में 12.88 हेक्टेयर में 400 करोड़ से अधिक निवेश और लगभग 1500 व्यक्तियों को रोजगार देने वाली 5 इकाइयों का भूमि-पूजन करेंगे। इनमें गारमेंट सेक्टर में गोकुलदास एक्सपोर्टस, टेक्सटाइल सेक्टर में इंडो एकॉर्ड अप्पेरल्स, हाई टेक इलेक्ट्रानिक में एसेडस प्राइवेट लिमिटेड, फार्मा सेक्टर में सिनाई हेल्थ केयर और कृषि उपकरण में समर्थ एग्रीटेक इकाइयां शामिल हैं। मुख्यमंत्री  ने  कहा है कि राज्य सरकार युवाओं और बहनों के रोजगार के लिए संकल्पित है। इस दिशा में राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। गुरुवार 24 जुलाई को भोपाल जिले के औद्योगिक क्षेत्र अचारपुरा में पांच औद्योगिक इकाइयों का भूमि-पूजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने हाल ही में स्पेन और दुबई की यात्रा में अनेक निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया है।  मध्यप्रदेश में वर्ष 2025 उद्योग और रोजगार वर्ष है। गांव से लेकर शहरों तक समृद्धि लाना,  स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए निर्णायक भूमिका निभा कर मध्यप्रदेश ने नए औद्योगिक युग की शुरूआत की है।    

विकसित भारत @2047 अंतर्गत रोजगार आधारित शिक्षा: रुझान एवं नए अवसर राष्ट्रीय कार्यशाला में राज्यपाल और मुख्यमंत्री हुए शामिल

भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं को पहचान कर विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम तैयार करें। उन्होंने प्रदेश में देश विदेश से निवेश प्रस्ताव प्राप्त करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल की सराहना की है। अपेक्षा की है कि निवेश परियोजना क्रियान्वयन के साथ ही उद्योग में रोजगार के लिए उपयुक्त अभ्यर्थी उपलब्ध कराने के लिए कोर्स प्रारम्भ करें, जिससे परियोजना शुरू होने के साथ ही आवश्यकता अनुसार स्थानीय स्तर के युवा उपलब्ध हो सकें। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज करेंसी का जमाना है, लेकिन स्किल (कौशल) ही करेंसी है, भारत इसे अच्छी तरह समझता है। इसीलिए हम नवाचार करते हुए कौशल विकास की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। मध्यप्रदेश एक कृषि प्रधान और तेजी से बढ़ता राज्य है। इसीलिए हम खेती की पढ़ाई को सामान्य महाविद्यालयों तक लेकर गए हैं। अगर कोई युवा खेती में करियर बनाना चाहे तो उसे आधुनिक तकनीक की जानकारी होनी चाहिए। विश्वविद्यालयों के दायरे विस्तृत होने चाहिए। सभी कोर्स यहां से संचालित होने चाहिए। राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उक्त विचार उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विकसित मध्यप्रदेश @2047 ‘रोजगार आधारित शिक्षा-रूझान एवं नए अवसर’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही है। कार्यशाला का आयोजन बुधवार को  कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में किया गया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय रोजगार आधारित शिक्षा-रूझान एवं नए अवसर कार्यशाला समय की आवश्यकता है। भविष्य की तैयारी का सशक्त मंच है। रोजगार केन्द्रित शिक्षा और विकसित भारत के निर्माण में प्रदेश के योगदान को बढ़ाने की प्रभावी पहल है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि शिक्षा समाज की रीढ़ है। यह समय के साथ तालमेल बैठाने, नवाचारों को अपनाने और नवीन अवसरों का लाभ उठाने के लिए व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को सक्षम बनाती है। इसलिए हमारी शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जो विद्यार्थियों को रोजगार के अवसरों तक सुलभ पहुंच देने के साथ ही उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बनाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिक्षा से मनुष्य का समग्र विकास होता है। यह आयोजन को बदलते दौर में रोजगार आधारित शिक्षा और अवसरों का विकास करने के क्रम किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर सबसे पहले 1968 और उसके बाद 1988 में मंथन हुआ। अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर तीसरी बार मंथन हो रहा है। लेकिन आजादी के बाद 2020 से पहले कभी भी लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति से बाहर आकर विचार नहीं किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल शासन की मंशा को समझने वाले दृष्टा थे। इसी भाव से उन्होंने सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करते हुए देश की जड़ों को मजबूत करने का कार्य किया। महात्मा गांधी ने अहिंसा के अस्त्र का उपयोग करते हुए देश के गांव-गांव तक स्वतंत्रता की अलख जगाई थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुनिया, भारत के साथ आने के लिए लालायित है। आक्रांताओं ने भारतीय संस्कृति पर आक्रमण करने के लिए हमारी शिक्षा के बड़े केंद्रों तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला को तोड़ने और जलाने का कार्य किया। मध्य प्रदेश 64 कलाओं की शिक्षा वाली भूमि है। इसीलिए भगवान श्रीकृष्ण शिक्षा ग्रहण करने के लिए उज्जैन के सांदीपनि आश्रम आए थे। हम उस देश के वासी हैं, जहां होठों पर सच्चाई रहती है और जो होठों पर सच्चाई लेकर आए वही शिक्षा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में शासकीय और निजी मिलाकर 70 से अधिक विश्वविद्यालय हैं। भारत विश्वगुरु है और गुरु वह जो हमारे जीवन में अंधकार हटाकर उसे प्रकाशमय कर दे। जेएनयू ने भी मध्यप्रदेश की कुलगुरु परंपरा को आत्मसात कर लिया है। सरकार प्रदेश में 10 हजार से अधिक शैक्षणिक संस्थाओं में एनईपी लागू करने पर आगे बढ़ चुकी है। प्रदेश में 220 से अधिक सांदीपनि विद्यालयों की शुरुआत की गई है। यहां विद्यार्थियों के लिए आधुनिक कंप्यूटर कोडिंग लैब स्थापित की गई हैं। शिक्षा केवल कागज की डिग्री लेने के लिए न हो, बल्कि वह भविष्य की चुनौतियों से लड़ने और उसे समझने में समर्थ हो। इसीलिए प्रदेश के विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्युटिंग और बायोटेक्नोलॉजी जैसे कोर्स शुरू किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश दूध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है। हमने शीर्ष स्तर पर पहुंचने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में 6 करोड़ से अधिक पशुधन है, इसीलिए राज्य सरकार प्रदेश में वेटेनरी कॉलेज की संख्या बढ़ाने पर जोर दे रही है। हम सिंचाई के रकबे के साथ-साथ मत्स्य उत्पादन को भी बढ़ाने के लिए संकल्पित हैं। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षा हर काल में सर्वोच्च रही है। भारतीय संस्कृति में संस्कारों को आगे बढ़ाते हुए रोजगार देने की परंपरा थी। बिना संस्कारों के हम श्रेष्ठ और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक नहीं बना सकते हैं। प्रदेश में नई शिक्षा नीति और कार्य की जवाबदेही तय करने की पहल देश भर में स्थान बनाएगी और प्रदेश के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी। कार्यक्रम के प्रारंभ में राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन कर किया। राज्यपाल पटेल का उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने पौधा, श्रीफल, अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। कार्यशाला में विषय -विशेषज्ञ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) नई दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और आई.ई.यू.ए.सी. के निदेशक डॉ. ए.सी. पांड़े ने विचार रखे। राष्ट्रीय कार्यशाला के प्रारंभ में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने स्वागत उद्बोधन दिया। मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. भरत शरण सिंह ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता, उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त प्रबल सिपाहा, प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, वरिष्ठ प्राध्यापक और विषय-विशेषज्ञ उपस्थित रहे।  

रंजिश में चॉइस सेंटर संचालक पर हमला, हालत गंभीर

बालोद छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में अपराधियों के हौंसले बुलंद है. पुरानी रंजिश में चॉइस सेंटर संचालक पर जानलेवा हमले के मामला सामने आया है. आरोपियों ने चाकू से ताबड़तोड़ वार किया, जिससे युवक गंभीर रूप से घायल है. मामला गुंडरदेही थाना सेहतर के डौकीडीह गांव का है. जानकारी के मुताबिक, डौकीडीह गांव के एक चॉइस सेंटर में दो लोग पहुंचे और पुरानी बातों को लेकर विवाद करने लगे. इसी दौरान संचालक पर धारदार चाकू से हाथ, जांघ और कमर पर बेरहमी से हमला कर दिया. वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी फरार हो गए हैं. घायल युवक का अस्पताल में इलाज जारी है. पुलिस ने शिकायत के बाद मामला दर्ज कर आरोपियों की पतासाजी में जुट गई है.

दिल्ली पुलिस का आतंक पर वार: प्रतिबंधित संगठन का आतंकी पकड़ा गया

नई दिल्ली दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बार फिर से अपनी प्रभावी कार्रवाई के जरिए आतंकवाद के खतरे को चुनौती दी है. बुधवार को पुलिस ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल  से जुड़े एक वांछित अपराधी को गिरफ्तार किया. इस व्यक्ति की पहचान आकाशदीप के रूप में हुई है, जो कई गंभीर मामलों में संलिप्त रहा है. ग्रेनेड हमले से दिल्ली तक हथियारों की तस्करी आकाशदीप का नाम पंजाब के बटाला में 7 अप्रैल को किला लाल सिंह पुलिस स्टेशन पर हुए भयानक ग्रेनेड हमले से जुड़ा हुआ है. इसके अलावा, वह दिल्ली में अपराधियों को अवैध हथियारों की आपूर्ति करने के धंधे में भी शामिल था. सूत्रों के अनुसार, यह व्यक्ति आतंकवादी गतिविधियों में कुशल था और लंबे समय से पुलिस की निगरानी में था. स्पेशल सेल की मुस्तैदी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अपनी चतुराई और मेहनत से आकाशदीप को गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी आतंकवाद के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता है और दिल्ली तथा पंजाब में अपराध की दुनिया पर एक गंभीर प्रहार भी है. पुलिस अब इस मामले की गहन जांच कर रही है ताकि आकाशदीप के नेटवर्क और अन्य संदिग्धों की पहचान की जा सके. बब्बर खालसा इंटरनेशनल क्या है बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) एक सिख अलगाववादी संगठन है, जिसे पाकिस्तान का समर्थन प्राप्त है. इसे भारत, कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, जापान और मलेशिया जैसे कई देशों द्वारा आतंकवादी संगठन के रूप में मान्यता दी गई है. इस संगठन का मुख्य उद्देश्य भारत के पंजाब क्षेत्र में खालिस्तान नामक एक स्वतंत्र सिख राज्य की स्थापना करना है.

छत्तीसगढ़ में स्पॉन्सरशिप योजना बनी बच्चों के भविष्य की मजबूत आधारशिला

रायपुर, छत्तीसगढ़ में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित मिशन वात्सल्य (एकीकृत बाल संरक्षण योजना) के अंतर्गत स्पॉन्सरशिप योजना जरूरतमंद बच्चों के जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है। विशेष रूप से उन बच्चों के लिए, जो माता-पिता के संरक्षण से वंचित हैं या जिनकी देखरेख और शिक्षा में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं, यह योजना आर्थिक सहारा बन रही है। कोरबा जिले में जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति और महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से अब तक 122 बच्चों को इस योजना के तहत शामिल किया गया है। इन सभी बच्चों को प्रतिमाह 4000 रुपए की आर्थिक सहायता सीधे उनके अभिभावकों या संरक्षकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से प्रदान की जा रही है। यह सहायता राशि बच्चों के पोषण, देखरेख, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मूलभूत जरूरतों की पूर्ति में सहयोग कर रही है। जिला प्रशासन के नेतृत्व में इस योजना को प्रभावशाली रूप से लागू किया जा रहा है। कलेक्टर के मार्गदर्शन में और जिला कार्यक्रम अधिकारी तथा जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी की देखरेख में स्पॉन्सरशिप कमेटी की सक्रिय भूमिका से जरूरतमंद बच्चों को चिह्नित कर उन्हें योजना से जोड़ा गया है। यह योजना किशोर न्याय अधिनियम और आदर्श नियमों के अनुरूप संचालित की जा रही है, जिसके अंतर्गत संस्थागत और गैर-संस्थागत सेवाएं प्रदान की जाती हैं। कोरबा जिले में गैर-संस्थागत सेवाओं के माध्यम से ऐसे बच्चों को उनके परिवार या संरक्षकों के साथ रहकर बेहतर जीवन की दिशा में अग्रसर करने का प्रयास किया जा रहा है। कलेक्टर कोरबा ने अपील की है कि समाज के सभी नागरिक यदि अपने आसपास ऐसे बच्चों की जानकारी रखते हैं जिन्हें देखरेख, संरक्षण या शिक्षा की आवश्यकता है और जो माता-पिता से वंचित हैं, तो उन्हें बाल कल्याण समिति अथवा जिला बाल संरक्षण इकाई के समक्ष प्रस्तुत करें। राज्य सरकार का यह प्रयास यह सुनिश्चित कर रहा है कि कोई भी बच्चा सिर्फ माता-पिता की अनुपस्थिति के कारण अपने भविष्य से वंचित न रह जाए। स्पॉन्सरशिप योजना न केवल आर्थिक मदद है, बल्कि यह समाज के संवेदनशील दायित्व की पूर्ति की दिशा में एक सशक्त कदम भी है।