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टॉम क्रूज की बेटी सूरी की लेटेस्ट तस्वीरें वायरल, मां केटी संग दिखीं बेहद ग्लैमरस

लॉस एंजिल्स हॉलीवुड सुपरस्‍टार टॉम क्रूज जहां इन दिनों उम्र में 26 साल छोटी खूबसूरत एक्‍ट्रेस एना डे अर्मास संग डेटिंग को लेकर चर्चाओं में हैं, वहीं सोशल मीडिया पर उनकी बेटी सूरी की नई तस्‍वीरें जंगल में आग की तरह वायरल हो रही हैं। सूरी 19 साल की हैं। वह टॉम क्रूज और केटी होम्स की बेटी हैं। सूरी को हाल ही अपनी मां के साथ 'हैप्‍पी आवर्स' के सेट पर नजर आई हैं। यह भी कम दिलचस्‍प नहीं है कि इस फिल्‍म में केटी के साथ जोशुआ जैक्सन हैं, जिन्‍हें वह 1998-1999 के बीच एक साल डेट कर चुकी हैं। 'डॉसन क्रीक' में अपनी भूमिकाओं के लिए मशहूर केटी होम्स और जोशुआ जैक्सन की 'हैप्पी आवर्स' एक नई फ्रेंचाइज है, जो तीन पार्ट में बन रही है। न्‍यूयॉर्क में इन दिनों इस सीरीज की शूटिंग चल रही है, जहां टॉम और केटी की बेटी सूरी होम्स भी गुरुवार को सेट नजर आईं। सूरी की तस्‍वीरें जैसे ही सामने आईं, 19 साल की इस लाडली पर फैंस दिल हारने लगे। मां-बेटी की प्‍यारी जोड़ी देख फैंस हुए निहाल सूरी होम्‍स की सोशल मीडिया पर बचपन के दिनों से ही तगड़ी फैन फॉलोइंग रही है। लिहाजा उनकी यह नई तस्‍वीरें माइक्रो ब्‍लॉगिंग वेबसाइट X पर फैन पेजों द्वारा खूब शेयर की जा रही हैं। 'रेडिट' पर भी सूरी की तस्‍वीरों पर खूब चर्चा चल रही है। इनमें वह मां केटी होम्‍स के साथ बहुत खुश नजर आ रही हैं। केटी और जोशुआ के वीडियो ने भी मचाई खलबली इससे पहले सेट से केटी और जोशुआ का एक वीडियो भी सामने आया था। वह जोशुआ के कंधे पर अपनी बाहें डाली हुई थीं और जोशुआ उन्हें जमीन से उठा रहे थे। अब सेट पर सूरी को देख फैंस भी काफी खुश हैं। तस्‍वीरों में सूरी ने सफेद टॉप और बैगी ट्राउजर पहन रखा है। एक यूजर ने लिखा- हे भगवान, सूरी कितनी खूबसूरत हैं! इन तस्वीरों पर कॉमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा है, 'ऐसा लगता है कि मां-बेटी सेट पर बहुत मस्‍ती कर रही हैं। हे भगवान, सूरी कितनी खूबसूरत हैं!' एक फैन ने केटी और जोशुआ को फिर से साथ देखकर भी खुशी जाहिर की है और लिखा है, 'क्‍या मैं अकेला हूं, जो चाहता है कि ये दोनों फिर से एक-दूसरे को डेट करें?' टॉम क्रूज की तीसरी बीवी बनी थीं केटी होम्‍स, छह साल बाद हुआ था तलाक जानकारी के लिए बता दें कि मिमी रॉजर्स और निकोल किडमैन से तलाक के बाद टॉम क्रूज ने साल 2006 में केटी होम्‍स से शादी की थी। उसी साल बेटी सूरी का भी जन्‍म हुआ। हालांकि, इसके छह साल बाद ही यह रिश्‍ता टूट गया। जून 2012 में केटी ने तलाक के लिए अर्जी दायर की और टॉम ने अलग होने का फैसला किया। अगस्त 2012 में दोनों के तलाक पर मुहर लग गई।

बस्तर दशहरा की तैयारी तेज, भूमिगत बिजली लाइन से रथ परिक्रमा मार्ग होगा जगमग

जगदलपुर बस्तर के विश्व प्रसिद्ध दशहरा पर्व में अब रथ परिक्रमा मार्ग अंधेरे में नहीं, बल्कि रोशनी से जगमगाएगा. 07 करोड़ 16 लाख रुपये की लागत से भूमिगत विद्युत लाइन बिछाने के बहुप्रतीक्षित कार्य का आज टाऊन हॉल स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागार में भूमिपूजन किया गया. इस कार्य के तहत सिरहासार चौक से लालबाग आमागुड़ा चौक तक भूमिगत केबल डाली जाएगी, जिससे दशहरा के दौरान रथ परिक्रमा मार्ग पर बिजली कटने की समस्या हमेशा के लिए खत्म होगी. रथ परिक्रमा के ऐतिहासिक मार्ग दंतेश्वरी मंदिर, सिरहासार चौक, गोलबाजार, टेकरी हनुमान मंदिर, बाहर-भीतर रैनी, स्टेट बैंक चौक, सिटी कोतवाली, लालबाग और कुम्हड़ाकोट अब निरंतर बिजली सप्लाई के साथ रथ के भव्य संचालन के साक्षी बनेंगे. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव ने बताया कि यह बस्तरवासियों की वर्षों पुरानी मांग थी, जिसे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वीकार कर स्वीकृति प्रदान की. उन्होंने विभाग को समय सीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि इस वर्ष के दशहरा पर्व में ही लोग बिना रुकावट रोशनी का आनंद ले सकें. महापौर संजय पांडे ने इसे जगदलपुर के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम बताया और कहा कि इस परियोजना से न केवल दशहरा की गरिमा बढ़ेगी, बल्कि शहर की आधारभूत सुविधाओं में भी स्थायी सुधार होगा. भूमिपूजन कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, निगम अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति ने इस पल को और खास बना दिया. बस्तर दशहरा की सांस्कृतिक भव्यता में यह परियोजना अब नई रोशनी और नई ऊर्जा का संचार करेगी.

छत्तीसगढ़ में फीका रहा विश्व आदिवासी दिवस, पूर्व मंत्री बोले – राजनीति में दब गया उत्सव

 सरगुजा विश्व आदिवासी दिवस को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासत तेज हो गई है. पूर्व कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत ने भाजपा सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस लेकर कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने स्वयं को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजन से किनारा किया. छत्तीसगढ़ में आदवासी मुख्यमंत्री रहते हुए यहां कोई बड़ा आयोजन नहीं किया गया. अमरजीत भगत ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक आदिवासी बाहुल्य राज्य है और इस राज्य का मुखिया या कहें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं. ऐसे में सरकार के मंत्री और जिला प्रशासन द्वारा इस आयोजन से किनारा करते दूरी बनाए रखने से आदिवासी समाज में काफी नाराजगी है, जिसका असर आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा. उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस राजनीति की भेंट चढ़ गया, जिसके कारण ना किसी का सम्मान हुआ ना ही प्रदेश में कोई बड़ा आयोजन हुआ. ऐसे में अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं. आखिर ऐसा क्यों हुआ. इन तमाम बातों को लेकर अमरजीत भगत ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर ना तो मुख्यमंत्री कोई कार्यक्रम में गए ना उनका मंत्रीमंडल का कोई मंत्री गया. छत्तीसगढ़ आदिवासियों की उपेक्षा हुई है.

औषधि वाटिका विकास के लिए एम.पी. ट्रांसको में पौधारोपण

भोपाल मध्यप्रदेश शासन के बिजली कंपनियों में चल रहे पौधारोपण अभियान के अंतर्गत, मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) के नयागांव परिसर में औषधीय पौधारोपण किया गया। पहले चरण में मुख्य वित्तीय अधिकारी मुकुल मेहरोत्रा सहित विभिन्न अधिकारियों ने त्रिफला चूर्ण निर्माण में प्रयुक्त आंवला, बहेड़ा और हरड़ जैसे औषधीय पौधे रोपे। इस अवसर पर सभी अधिकारियों ने पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण की शपथ ली। मुख्य अभियंता राजेश द्विवेदी ने बताया कि आगामी चरणों में अन्य औषधीय प्रजातियों का भी रोपण किया जाएगा। ऊर्जा विभाग द्वारा दिए गए पौधारोपण लक्ष्य की पूर्ति के लिए, जबलपुर मुख्यालय सहित प्रदेश भर में एम.पी. ट्रांसको के सभी कार्यालयों, सबस्टेशनों और ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस मुख्यालयों में चरणबद्ध तरीके से यह अभियान संचालित होगा। पौधारोपण कार्यक्रम में प्रबंध संचालक सुनील तिवारी, मुख्य अभियंता संदीप गायकवाड़ सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।  

MP में निर्यात ने तोड़ा रिकॉर्ड, 6% बढ़कर पहुंचा 66,218 करोड़ – जानें किन देशों में सबसे ज्यादा

भोपाल  मध्य प्रदेश ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में निर्यात के क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल की है। फेडेरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य का कुल निर्यात 6 प्रतिशत बढ़कर 66,218 करोड़ रुपये हो गया। यह अब तक का सबसे अधिक है। निर्यात में यह वृद्धि मुख्यतः फार्मास्यूटिकल, इंजीनियरिंग गुड्स और सोया आधारित उत्पादों के कारण हुई है।  रिपोर्ट के अनुसार, मर्केंडाइज एक्सपोर्ट में 66,218 करोड़ रुपये का योगदान रहा, जबकि स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) से आईटी कंपनियों ने 4,038 करोड़ रुपये का निर्यात किया। आर्थिक विकास और निर्यात बढ़ोतरी की बदौलत राष्ट्रीय रैंकिंग में मध्य प्रदेश 15वें से 11वें स्थान पर पहुंच गया है। फार्मास्यूटिकल निर्यात सबसे ज्यादा पिछले वर्ष तक राज्य के शीर्ष निर्यात सेक्टर में फार्मास्यूटिकल, एनिमल फीड, मशीनरी, एल्युमिनियम और टेक्सटाइल शामिल थे। इस साल फार्मास्यूटिकल का निर्यात 11,968 करोड़, एनिमल फीड 6,062 करोड़, एल्युमिनियम 4,795 करोड़ और मशीनरी 5,497 करोड़ रुपये रहा। अमेरिका, बांग्लादेश, फ्रांस, यूएई और नीदरलैंड प्रमुख निर्यात बाजार रहे।  र‍िपोर्ट के अनुसार फार्मास्यूटिकल, इंजीनियरिंग गुड्स और सोया आधारित कृषि उत्पाद म‍िलाकर मध्यप्रदेश ने विश्व बाजार के प्रत‍िमानों के अनुसार न‍िर्यात रैंकिंग में बढ़ोतरी की है. न‍िवेश म‍ित्र औद्योगिक व‍िकास की नीत‍ियां, औद्योगिकरण का बढ़ता आधार मध्यप्रदेश का निर्यात बढ़ने का प्रमुख कारण है. इसके अलावा न‍िर्यात को प्रोत्साह‍ित करने वाली अधोसंरचना में बढ़ोतरी होना और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों का मध्यप्रदेश की ओर आकर्षित होने को भी प्रमुख है. पिछले साल तक फार्मास्यूटिकल, एनिमल फीड, मशीनरी, एल्यूमिनियम और टेक्सटाइल पांच ऐसे न‍िर्यात सेक्टर थे. जो प्रथम पांच न‍िर्यातकों में शाम‍िल थे. मुख्य रूप से बांग्लादेश, फ्रांस, यूएई और नीदरलैंड में मध्यप्रदेश को न‍िर्यात का बड़ा मार्केट म‍िला है. फार्मास्यूटिकल और मशीनरी के निर्यात में मध्यप्रदेश के लिए सबसे बड़ा मार्केट यूएस है. पीथमपुर के कारण धार जिला सबसे आगे जिला स्तर पर पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के कारण धार 17,830 करोड़ रुपये के निर्यात के साथ सबसे आगे रहा, जबकि इंदौर ने 13,500 करोड़ रुपये और उज्जैन ने 2,288 करोड़ रुपये का निर्यात किया। पिछले छह वर्षों से राज्य का निर्यात लगातार बढ़ा है। 2019-20 में 37,692 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 66,218 करोड़ रुपये तक पहुंचा। सरकार की निवेश मित्र नीतियों, औद्योगिक आधार के विस्तार, निर्यात प्रोत्साहन अधोसंरचना और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मजबूत संबंधों को इस उपलब्धि का मुख्य कारण माना जा रहा है। FIEO की है रिपोर्ट फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश से 62,180 करोड़ रुपए का माल निर्यात हुआ। इसके अलावा, IT कंपनियों ने भी निर्यात में योगदान दिया है। ये कंपनियां विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में काम करती हैं। इनका योगदान 4,038 करोड़ रुपये रहा। वैश्विक बाजार में मजबूत हो रही स्थिति रिपोर्ट में बताया गया है कि मध्य प्रदेश ने फॉर्मा, इंजीनियरिंग और सोया उत्पादों के कारण वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत की है। राज्य सरकार की नीतियों और बेहतर बुनियादी ढांचे ने भी इसमें मदद की है। इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों ने भी मध्य प्रदेश में रुचि दिखाई है। पिछले साल मध्य प्रदेश से सबसे ज्यादा निर्यात फॉर्मा, पशु आहार, मशीनरी, एल्यूमीनियम और टेक्सटाइल का हुआ था। बांग्लादेश, फ्रांस, UAE और नीदरलैंड प्रमुख बाजार थे। संयुक्त राज्य अमेरिका फार्मा और मशीनरी के लिए सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। सबसे अधिक फॉर्मा सेक्टर में निर्यात 2024-25 में मध्य प्रदेश ने 11,968 करोड़ रुपए की फार्मास्युटिकल्स, 6,062 करोड़ रुपए का पशु आहार, 4,795 करोड़ रुपए का एल्यूमीनियम, 4,656 करोड़ रुपए का टेक्सटाइल और 5,497 करोड़ रुपए की मशीनरी का निर्यात किया। धार रहा पहले नंबर पर धार जिला निर्यात में पहले स्थान पर रहा। यहां से 17,830 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ। इसके बाद इंदौर का नंबर आता है। इंदौर से 13,500 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ। इंदौर फॉर्मा, ऑटोमेशन और फूड प्रोसेसिंग पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उज्जैन ने भी 2,288 करोड़ रुपए के निर्यात के साथ अपना रिकॉर्ड तोड़ा है। यहां से औद्योगिक, कृषि और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों का निर्यात होता है। जानिए कब कितना हुआ निर्यात मध्यप्रदेश से वर्ष 2024-25 में 11,968 करोड रुपए के फार्मास्यूटिकल्स, 6062 रुपए के एनिमल फीड, 4795 करोड रुपए के एल्युमिनियम, 4656 रुपए का न‍िर्यात और 5497 रुपए की मशीनरी का निर्यात हुआ. प‍िछले छह वर्षों से मध्यप्रदेश का न‍िर्यात लगातार बढ़ रहा है. वर्ष 2019-20 में 37,692 करोड रुपए, 2020-21 में 47,959 करोड रुपए, 2021-22 में 58,407 करोड रुपए, 2022-23 में 65,878 करोड रुपए, 2023-24 में 65,255 करोड़ रुपए और 2024-25 में 66,218 करोड रुपए का निर्यात मध्यप्रदेश से हुआ. इसमें स्पेशल इकोनामिक जोन से हुए निर्यात के आंकड़े भी शामिल है. धार जिला निर्यात में प्रथम है. यहां से 17,830 करोड रुपए का निर्यात हुआ, जबकि इंदौर से 13,500 करोड रुपए का निर्यात हुआ. यहां से फार्मास्यूटिकल, ऑटोमेटिक और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर से निर्यात हुआ. उज्जैन ने भी अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ते हुए 2,288 करोड रुपए का निर्यात किया, जिसमें इंडस्ट्रियल, कृष‍ि आधार‍ित उत्पाद और खाद्य प्रसंस्करण उत्पाद शामिल हैंय राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक विकास पर फोकस रखते हुए और व्यापारिक संबंधों को मजबूत बनाने से यह उपलब्धि हासिल हुई है. इससे न सिर्फ राज्य की आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद मिली है बल्कि देश के कुल निर्यात में भी मध्यप्रदेश का योगदान बढ़ा है.  प‍िछले छह वर्षों से मध्यप्रदेश का निर्यात     2019-20: 37,692 करोड़ रुपए     2020-21: 47,959 करोड़ रुपए     2021-22: 58,407 करोड़ रुपए     2022-23: 65,878 करोड़ रुपए     2023-24: 65,255 करोड़ रुपए     2024-25: 66,218 करोड़ रुपए स्पेशल इकोनामिक जोन से हुए निर्यात के आंकड़े     धार- 17,830 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ।     इंदौर- 13,500 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ। यहां से फार्मास्यूटिकल, ऑटोमेटिक और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर से निर्यात हुआ।     उज्जैन- 2,288 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ। इसमें इंडस्ट्रियल, कृष‍ि आधार‍ित उत्पाद और खाद्य प्रसंस्करण उत्पाद शामिल हैं।   

माइक्रो फाइनेंस बैंक पर डकैतों का धावा, 12 किलो सोना और ₹5 लाख कैश गायब

 जबलपुर जबलपुर जिले के सिहोरा के खितौला में सोमवार की सुबह पांच बदमाशों ने कट्टे की नोक पर स्माल फायनेंस बैंक (इसाफ बैंक) को लूट लिया। बदमाशों ने बैंक के स्ट्रांग रूम को खुलवाया और उसमें रखा 12 किलो सोना और नकदी लूट कर ले गए। प्रारंभिक जानकारी है कि चार बदमाश बैंक के अंदर गए और उनका एक साथी बैंक के बाहर पहरेदारी कर रहा था। पूरी प्लानिंग से घटना को अंजाम दिया गया। आरोपियों को पकड़ने के लिए आस-पास के सभी थानों को सूचना भेज दी है। जगह-जगह नाकेबंदी की गई है। सिहोरा के खितौला स्थित इसाफ बैंक सुबह 9.30 बजे खुल गया था। कामकाज शुरू हुआ था, उसी समय दो बाइक पर पांच बदमाश पहुंचे। बैंक के भीतर प्रवेश करने के साथ ही चारों बदमाशों ने कट्टा निकाल लिया था। बैंक कर्मचारियों और उपभोक्ताओं को धमकाते हुए बैंक में एक कमरे में बंद कर दिया। बैंक के मैनेजर की कनपटी पर कट्टा रख दिया था और जान से मार देने की धमकी देते हुए स्ट्रांग रूम खोलने का दबाव बनाया था। स्ट्रांग रूम खुलवाकर उसमें रखा करीब 12 किलो ग्राम सोना आरोपी ने अपने थैले में भर लिया, सोने के साथ लगभग पांच लाख से अधिक के नोट भी थैले में रख लिए। इसके बाद आरोपी कट्टा लहराते हुए भाग गए। कैसे हुई वारदात? जबलपुर जिले के खितौला (सिहोरा) में यह घटना सुबह करीब 9:30 बजे हुई है। पुलिस के मुताबिक, बदमाश दो बाइकों पर सवार होकर बैंक पहुंचे थे। चार लोग बैंक में घुसे और एक बाहर पहरेदारी करता रहा। बदमाशों ने बैंक में मौजूद कर्मचारियों और ग्राहकों को डरा धमकाकर कमरे में बंद कर दिया और मैनेजर की कनपटी पर कट्टा रखकर स्ट्रांग रूम खोलने को कहा। वहां से 12 किलो सोना और ₹5 लाख नकदी थैलों में भरकर फरार हो गए। पुलिस की कार्रवाई घटना के बाद पुलिस ने बदमाशों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं। आसपास के थानों को अलर्ट कर जगह-जगह नाकेबंदी शुरू कर दी है। लुटेरों के भागने के रूट पर चेकिंग की जा रही है। आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में खुलासे पुलिस का मानना है कि वारदात पूरी तरह से प्री-प्लान्ड थी। बदमाशों को बैंक के खुलने का समय और स्ट्रांग रूम का लोकेशन पहले से पता था। उनके पास बैंक की रूटीन गतिविधियों की भी पूरी जानकारी थी। यही कारण है कि इतनी आसानी से वह वारदात कर निकल गए। स्थानीय लोगों में दहशत दिनदहाड़े हुई इस डकैती से इलाके में दहशत और आक्रोश है। बैंक के ग्राहकों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं और पुलिस से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। शुरुआत में जावकारी सामने आई थी कि, अज्ञात डकैतों ने बैंक से करीब 12 किलो सोना और 5 लाख 70 हजार नकद की लूट की है। लेकिन अब मामले में पुलिस ने पुष्टि करते हुए बताया है कि, 12 नहीं 14 किलो 800 गराम सोना और कुल पांच लाख की लूट हुई है। इस प्रकार बैंक से लूटे गए सोने की अनुमानित कीमत करोड़ों में बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि, सभी आरोपी अलग-अलग बइकों पर सवार होकर बैंक परिसर तक आए थे। सभी ने हेलमेट लगा रखा था। साथ ही, चेहरे को भी मास्क लगे थे, साथ ही उनके हाथ तक कवर थे। फिलहाल, पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है। पुलिस कार्यप्रणाली पर उठे सवाल वारदात की जानकारी लगते ही मौके पर खितौला और सिहोरा पुलिस की टीमें पहुंची और छानबीन शुरू कर दी है। वहीं बैंक में लगे सभी सीसीटीवी कैमरे और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। खास बात ये है कि, किसी को ये नहीं पता कि, वारदात को अंजाम देकर पांचों बदमाश किस तरफ भागे हैं। लूट की इस सॉनसनीखेज वारदात ने एक बार फिर शहर की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। क्योंकि, जिले के खितौला या सिहोरा में लगभग हर महीने चोरी की एक न एक वारदात होती रहती है। हाल ही में सिहोरा के बड़े धार्मिक के रूप में पहचान रखने वाले ज्वालामुखी मंदिर में दो दिन पहले ही चोरी की वारदात हुई है, जिसकी जांच अभी चल रही है।  

सिंधिया का जवाब: भारत को डेड इकोनॉमी कहने वालों को दिखाया प्रगति का आईना

भोपाल  केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तथ्यों के साथ विपक्षी दल कांग्रेस को घेरते रहते हैं। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के हालिया बयानों पर उन्होंने पलटवार किया है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने डेड इकोनॉमी से लेकर चुनाव आयोग पर हो रहे हमलों तक का जवाब दिया है। देश आगे बढ़ गया है… वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बिना किसी के नाम लिए हुए कहा कि जो लोग भारत को मृत अर्थव्यवस्था कह रहे हैं, उन्हें शुभकामनाएं। देश आगे बढ़ गया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आगे कहा कि मुझे उन लोगों से बात नहीं करने दीजिए जो देश के बाहर हैं क्योंकि हर किसी की अपनी राय होती है। लेकिन मुझे लगता है कि यदि आप एक भारतीय हैं और यदि आप एक देशभक्त हैं और आप एक ही शब्द से परिभाषित होते हैं, जिसका उपयोग आप अपने देश के भीतर हर संस्थान के लिए और यहां तक कि अपने देश के लिए भी करते हैं।उन्होंने कहा कि आप चुनाव आयोग की आलोचना करते हैं और इसे मृत कहते हैं, आप हमारी सशस्त्र बलों की क्षमता को कम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं, आप न्यायपालिका का उपहास करते हैं, आप चुनाव आयोग का उपहास उड़ाते हैं। सिंधिया परिवार समर्पण के लिए जाना जाता वहीं, अपने और परिवार पर लगने वाले आरोपों पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मुझे, या मेरे पिता, या उनसे पहले मेरी दादी को कभी भी महत्वाकांक्षा से परिभाषित नहीं किया गया है। सिंधिया परिवार को हमेशा हमारे समर्पण, कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता से परिभाषित किया गया है। मेरा दृढ़ विश्वास है कि आपको जो भी भूमिका सौंपी जाती है, उसे पूरी लगन और क्षमता के साथ निभाना महत्वपूर्ण है। मैंने अपने पूरे करियर में ऐसा किया है, चाहे मैं पहले कांग्रेस में था या आज भाजपा में। सिंधिया ने कहा कि सिंधिया परिवार को हमेशा समर्पण, कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता से परिभाषित किया गया है। उन्हें जो भी भूमिका सौंपी जाती है, उसे पूरी लगन और क्षमता के साथ निभाना महत्वपूर्ण है।

उज्जैन होटल कांड: मौलाना और युवती की गंदी तस्वीरों से सामने आया छिपा रिश्ता

उज्जैन  उज्जैन में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। महाकाल मंदिर इलाके में एक युवक और युवती संदिग्ध हालत में मिले हैं। बताया जा रहा है कि युवक राजस्थान के कोटा का रहने वाला है। उसका नाम सादिक उर्फ मौलाना है। वह बिना पहचान पत्र के होटल में कमरा लेना चाहता था। हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने उसे पकड़ा और पुलिस को सौंप दिया। उसके मोबाइल में कई आपत्तिजनक तस्वीरें मिली हैं। हिंदू युवती के साथ मौलाना आरोपी मौलाना को महाकाल मंदिर क्षेत्र से पकड़ा गया है। वह हिंदू युवती के साथ आया था। वहीं, एक होटल में कमरा नहीं मिलने पर सादिक ने कई होटलों में पूछताछ कर रहा था। वह बिना आईडी प्रूफ के कमरा चाहता था। आखिरकार, महाकाल मार्ग पर स्थित होटल डिमांड ने उसे कमरा दे दिया। यह होटल लोहे के पुल के पास है। युवक और युवती दोनों उसी कमरे में रुक गए। पुलिस ने कमरे से दोनों को पकड़ा वहीं, इस बात की खबर हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं को लग गई। उन्होंने तुरंत होटल पहुंचकर पुलिस को बुलाया। पुलिस ने कमरे में जाकर युवक और युवती को पकड़ा। पहले खुद को भाई बताया पुलिस के अनुसार, जब उन्होंने युवक को पकड़ा तो उसने खुद को युवती का भाई बताया। उसने अपना नाम सादिक बताया और यह भी कहा कि वह 'मौलाना' है। लेकिन, पुलिस को उनके रिश्ते पर शक हुआ। पुलिस ने उसका मोबाइल फोन चेक करने की बात कही। अश्लील तस्वीरें मिली युवक पहले तो मोबाइल देने में आनाकानी कर रहा था। लेकिन, दबाव बनाने पर उसने मोबाइल दे दिया। पुलिस ने जब मोबाइल चेक किया तो उसमें युवती के साथ ही अन्य महिलाओं के अश्लील फोटो और वीडियो मिले। यह देखकर युवक और युवती दोनों चुप हो गए। वन स्टॉप सेंटर भेज दिया उज्जैन पुलिस ने युवती को वन स्टॉप सेंटर भेज दिया है। युवक से अभी भी पूछताछ जारी है। पुलिस होटल डिमांड के प्रबंधन की भी जांच कर रही है। उन्होंने बिना आईडी प्रूफ के कमरा क्यों दिया, यह पता लगाया जा रहा है। होटल डिमांड पर आरोप है कि उसने बिना आईडी प्रूफ के युवक को कमरा दिया। पुलिस इस मामले की भी जांच कर रही है।

खुले आसमान के नीचे कक्षा: छात्रों की सुरक्षा और शिक्षा पर सवाल

रायपुर अभनपुर विकासखंड के हसदा 2 गांव के शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय इस समय बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। यहां कक्षा 6वीं से 12वीं तक के छात्र-छात्राएं खुले आसमान के नीचे, कैंटीन या लैब में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल भवन की छत और खंभे जर्जर होकर गिर चुके हैं, जिससे बच्चों की जान को खतरा बना रहता है। स्कूल के छात्रो ने बताया कि बारिश के दिनों में क्लास रोककर छुट्टी दे दी जाती है, क्योंकि खुले में बैठना और जर्जर छत के नीचे पढ़ना खतरनाक है। खंडहर बना स्कूल भवन 1981 में बना यह भवन आज खंडहर में बदल चुका है, 2012-13 में जनसहयोग से लैब और चार कमरे बने, लेकिन वे भी पर्याप्त नहीं हैं, 90% अंक लाने वाले छात्र कहते हैं कि खुले में पढ़ाई से ध्यान भटकता है। कभी सड़क से गुजरते वाहन, कभी कुत्ते-बंदर, तो कभी बारिश का पानी कई छात्रों के परिणाम 20-30% तक गिर गए हैं, स्कूल के एक छात्र ने कहा, 'हमारे पास किताबें हैं, टीचर हैं, लेकिन भवन नहीं है,डर हमेशा बना रहता है कि कहीं छत गिरकर जान न लेले।' खुले में, कैंटीन या लैब में लगती है क्लास प्रिंसिपल रामकृष्ण निषाद ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्हें खुले में, कैंटीन या लैब में क्लास लेनी पड़ती है। 'हमने कई बार नए भवन के लिए प्रस्ताव दिया है, सांसद-विधायक तक गुहार लगाई है, लेकिन अभी तक मंजूरी नहीं मिली'। गांव के सरपंच ने बताया कि 1981 से अब तक, यानि 44 साल में, कई बार शासन को नए भवन की मांग भेजी गई,15 साल से लगातार पत्राचार और आश्वासन का सिलसिला चल रहा है, जनवरी में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने एक साल में नया भवन देने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। 'दिया तले अंधेरा' की मिसाल बना स्कूल सरकार स्मार्ट क्लास, नई शिक्षा नीति और विकास के दावे करती है, लेकिन हसदा का स्कूल 'दिया तले अंधेरा' की मिसाल है, यहां न बिजली की सही व्यवस्था है, न सुरक्षित क्लासरूम, बच्चे और शिक्षक दोनों खतरे में हैं, और शिक्षा का माहौल बदतर हो चुका है, गांववाले और अभिभावक सरकार से अपील कर रहे हैं कि जल्द से जल्द नया भवन बनाया जाए, ताकि बच्चों की जान सुरक्षित रहे और पढ़ाई प्रभावित न हो।  

स्व सहायता समूहों ने लगाया हरियाली का जाल, शहरी इलाकों में 2.5 लाख पौधे रोपे, पौधरोपण में रचा रिकॉर्ड

शहरी क्षेत्र में वीमेन फॉर ट्रीज अभियान में 7 हजार स्व सहायता समूहों का योगदान, अब तक हुआ ढ़ाई लाख पौधरोपण शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की हरियाली क्रांति, 2.5 लाख पौधे लगा चुकीं 7 हजार महिला समूह स्व सहायता समूहों ने लगाया हरियाली का जाल, शहरी इलाकों में 2.5 लाख पौधे रोपे, पौधरोपण में रचा रिकॉर्ड भोपाल प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में हरियाली को बढ़ाने के लिये नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग केन्द्र सरकार के निर्देश पर ‘वीमेर फॉर ट्रीज’ अभियान संचालित कर रहा है। पौधरोपण के बाद उनकी देखभाल की जिम्मेदारी स्व सहायता समूहों की महिलाओं को सौंपी गयी है। इसके लिये विभाग ने एक करोड़ 14 लाख रूपये की राशि जारी की है। यह कार्यक्रम ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत लिया गया है। प्रदेश में इस कार्य के लिये 7 हजार स्व सहायता समूहों की महिलाओं को जिम्मेदारी दी गई है। ‘वीमेर फॉर ट्रीज’ में 2 लाख 30 हजार पौधरोपण किया जा चुका है। स्व सहायता समूहों की महिलाएं लगाये गये पौधों के रख-रखाव की जिम्मेदारी आगामी 2 वर्ष तक सुनिश्चित करेंगी। इस कार्यक्रम में स्व सहायता समूहों की महिलाओं के साथ नागरिकों, शैक्षणिक संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम, नर्सरी स्थापना और मास्टर ट्रेनर्स भी तैयार किये जा रहे हैं। पर्यावरण और मातृत्व को समर्पित पहल प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के लिये विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून से "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान की शुरूआत की गई। यह केवल एक पौधरोपण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि मातृत्व के सम्मान और पृथ्वी के संरक्षण की एक भावनात्मक, प्रतिकात्मक और सामाजिक पहल है, जिसमें नागरिक अपनी माँ के नाम पर एक पेड़ लगाकर प्रकृति से जुड़ते हैं। अमृत हरित महा अभियान प्रदेश के 418 नगरीय निकायों में पौधरोपण के लिये 13 जून 2025 से अमृत हरित महा अभियान की शुरूआत की गई। इसके लिये प्रदेश में 2500 नोड़ल कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। अब तक विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा शहरी क्षेत्रों में 41 लाख 65 हजार पौधरोपण किया गया है। इसके साथ ही नगरीय निकायों द्वारा 6 लाख 80 हजार पौधरोपण किया गया है। शहरी क्षेत्रों में अब तक 48 लाख 44 हजार पौधों का रोपण किया जा चुका है। शहरी क्षेत्रों में इस वर्ष 15 अगस्त तक 50 लाख पौधे लगाने का कार्यक्रम तैयार किया गया है।