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CPL 2025 में रोमारियो शेफर्ड ने किया कमाल, एक ओवर में बटोरे 20 रन

नई दिल्ली  वेस्टइंडीज के स्टार ऑलराउंडर रोमारियो शेफर्ड ने कैरेबियन प्रीमियर लीग (CPL) 2025 में गजब कर दिया। गुयाना अमेजन वॉरियर्स का हिस्सा शेफर्ड ने सेंट लूसिया किंग्स के खिलाफ मैच में एक लीगल डिलीवरी बॉल पर 20 रन बटोरे। उन्होंने एक गेंद पर तीन सिक्स लगाए। उन्होंने यह करिश्मा सेंट लूसिया किंग्स के तेज गेंदबाज ओशेन थॉमस के विरुद्ध किया। आईपीएल में आरसीबी के लिए खेलने वाले शेफर्ड ने मुकाबले में तूफानी अर्धशतकीय पारी खेली। सातवें नंबर पर आए शेफर्ड ने 34 गेंदों में नाबाद 73 रन बनाए, जिसमें पांच चौके और सात छक्के शामिल हैं। उन्होंने वॉरियर्स को 202/6 के स्कोर तक पहुंचाया। शेफर्ड ने 15वें ओवर में 20 रन बटोरने का कारनामा किया। थॉमस अपनी लाइन से भटक रहे थे और अक्सर ओवरस्टेप कर रहे थे। उन्होंने दूसरी गेंद नो बॉल फेंकी। इसके बाद उन्होंने वाइड गेंद की। थॉमस ने फिर एक और नो बॉल फेंकी जो डीप मिडविकेट की दिशा में छक्के के लिए गई। अगली गेंद भी नो बॉल थी। शेफर्ड ने इसे डीप स्क्वायर लेग के ऊपर से छक्का जड़ा। थॉमस एक लीगल बॉल फेंकने में कामयाब रहे। हालांकि, शेफर्ड ने फिर अपने तेवर दिखाए और गेंद को डीप स्क्वायर लेग की दिशा में सिक्स के लिए भेजा। उन्होंने इफ्तिखार अहमद (27 गेंदों में 33) के साथ छठे विकेट के लिए 102 रनों की साझेदारी की। हालांकि, शेफर्ड की तूफानी पारी पर पानी फिर गया। सेंट लूसिया किंग्स ने 203 रनों का लक्ष्य 18.1 ओव में 6 विकेट के नुकसान पर आसानी से चेज कर लिया। एकीम ऑगस्टे ने उसके लिए सर्वाधिक 73 रन बनाए। एकीम ने 35 गेंदों की अपनी पारी में 6 चौके और 4 छक्के जड़े। उन्होंने टिम सीफर्ट के साथ दूसरे विकेट के लिए 87 रनों की पार्टनरशिप की। विकेटकीपर-बल्लेबाज सीफर्ट ने 24 गेंदों में 37 रन जुटाए। टिम डेविड ने 22 गेंदों में 25 रनों का योगदान दिया। उनके बल्ले से दो चौके और एक छक्का निकला। कप्तान डेविड विसे 10 और खारी पियरे 4 रन बनाकर नाबाद लौटे। विसे ने विजयी चौका लगाया।  

यूपी में सख्ती: हेलमेट न पहनने वालों को पेट्रोल पंप पर मिलेगा बड़ा झटका

लखनऊ  यूपी में यातायात नियमों को पालन कराने को लेकर योगी सरकार सरकार सख्त है। सरकार पूरे प्रदेश में 1 से 30 सितम्बर तक ‘नो हेलमेट, नो फ्यूल' विशेष सड़क सुरक्षा अभियान चलाने जा रही है। पेट्रोल पंप बिना हेलमेट के तेल नहीं मिलेगा। यह अभियान जिलाधिकारी के नेतृत्व तथा जिला सड़क सुरक्षा समिति (DRSC) के समन्वय से चलाया जाएगा, ताकि जनपद स्तर पर सभी संबंधित विभाग एक साथ नागरिक सुरक्षा के इस उद्देश्यमूलक प्रयास को आगे बढ़ाएं। इस अवधि में पुलिस, राजस्व/जिला प्रशासन तथा परिवहन विभाग के अधिकारी प्रवर्तन की मुख्य जिम्मेदारी निभाएंगे। योगी सरकार ने आमजन से अपील की है कि वे इन प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पूर्ण सहयोग करें। यह पहल पूर्णतः विधिसम्मत एवं जनहितैषी है। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 129 दोपहिया चालक तथा पिलियन के लिए हेलमेट को अनिवार्य करती है, जबकि धारा 194D उल्लंघन पर दंड का प्रावधान करती है। सर्वोच्च न्यायालय की सड़क सुरक्षा समिति द्वारा भी राज्यों को हेलमेट अनुपालन को प्राथमिकता देने का परामर्श दिया गया है। योगी सरकार ने कहा कि ‘नो हेलमेट, नो फ्यूल' का उद्देश्य दण्डित करना नहीं, बल्कि नागरिकों को कानून के अनुरूप सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना है—ईंधन तभी, जब हेलमेट सिर पर हो। परिवहन आयुक्त ने कहा कि अभियान पूरी तरह से सार्वजनिक हित में है। पूर्व के अनुभव बताते हैं कि दोपहिया वाहनस्वामी शीघ्र ही हेलमेट के साथ आने की आदत विकसित कर लेते हैं। इससे ईंधन बिक्री पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। तेल विपणन कंपनियां—IOCL, BPCL और HPCLतथा सभी पेट्रोल पम्प संचालकों से अनुरोध है कि वे इस प्रयास में सक्रिय सहयोग दें। खाद्य एवं रसद विभाग के माध्यम से पेट्रोल पंप स्तर पर आवश्यक समन्वय/निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। सूचना एवं जनसम्पर्क तंत्र जन-जागरूकता के प्रसार में सहयोग करेगा। नागरिक, उद्योग और प्रशासन मिलकर ही सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु एवं गंभीर चोटों को कम करने के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर ठोस कदम बढ़ा सकते हैं। उत्तर प्रदेश परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह ने बताया कि 'नो हेलमेट, नो फ्यूल' दण्ड नहीं, बल्कि सुरक्षा का संकल्प है। यह अभियान 1 से 30 सितम्बर तक जिलाधिकारी के नेतृत्व, DRSC के समन्वय और पुलिस-प्रशासन-परिवहन अधिकारियों के प्रवर्तन के साथ चलेगा। सभी नागरिकों, पेट्रोल पम्प संचालकों और तेल कंपनियों से अपील है कि वे इसमें पूर्ण सहयोग दें। 'हेलमेट पहले, ईंधन बाद में' को नियम बनाएं, क्योंकि हेलमेट पहनना जीवन का सबसे सरल बीमा है।  

वेतन-भत्तों को लेकर हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, विधायकों को मिलेगा फायदा

हरियाणा  हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को विधायकों के लिए एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित किया गया। इस विधेयक के तहत विधायकों के विशेष यात्रा भत्ते में बदलाव किया गया है। हरियाणा विधान सभा ने सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम में संशोधन किया है। पहले विधायकों को विशेष यात्रा भत्ते के तहत मासिक पेंशन और महंगाई राहत की कुल राशि एक लाख रुपए तक सीमित थी। इसमें प्रति माह अधिकतम 10,000 रुपए का विशेष यात्रा भत्ता शामिल था। विधायकों ने अध्यक्ष से संपर्क कर बताया कि वर्तमान मुद्रास्फीति को देखते हुए यह सीमा उचित नहीं है। उन्होंने एक लाख रुपए की सीमा हटाने का सुझाव दिया। साथ ही विधायक या उनके परिवार के सदस्यों को भारत में कहीं भी यात्रा के लिए प्रति माह 10,000 रुपए का विशेष यात्रा भत्ता जारी रखने की मांग की। विधानसभा ने इस सुझाव को स्वीकार करते हुए 1975 के अधिनियम की धारा 7ग में संशोधन कर दिया है। अब विधायकों को एक लाख रुपए की सीमा से मुक्त कर दिया गया है। वे प्रति माह 10,000 रुपए का विशेष यात्रा भत्ता प्राप्त कर सकेंगे।

रायपुर में 28 अगस्त से शुरू हो रही 24वीं राज्य स्तरीय निशानेबाजी प्रतियोगिता

रायपुर  छत्तीसगढ़ राज्य निशानेबाजी संघ के तत्वावधान में  24वीं राज्य स्तरीय निशानेबाजी प्रतियोगिता का शुभारंभ 28 अगस्त से होगा माना स्थित चौथी बटालियन के शूटिंग रेंज में किया जाएगा। यह प्रतियोगिता लगातार पिछले 23 वर्षों से सफलतापूर्वक जिंदल समूह के सौजन्य से आयोजित की जा रही है।   इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से महिला एवं पुरुष निशानेबाज, जूनियर और सीनियर वर्ग में भाग लेंगे। प्रतियोगिता में निम्नलिखित वर्गों के मुकाबले आयोजित किए जाएंगे  10 मीटर राइफल एवं पिस्टल शूटिंग  25 मीटर पिस्टल शूटिंग 50 मीटर राइफल एवं पिस्टलशूटिंग   विभिन्न प्रतियोगिता के हर मैच व हर वर्ग में भारतीय राष्ट्रीय रायफल संघ द्वारा निर्धारित न्यूनतम अंक अर्जित करने पर  निशानेबाजों को ईस्ट ज़ोन,ऑल इंडिया जी.वी मावलंकर जो कि प्री-नेशनल है इस प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा।  पंजीकरण की प्रक्रिया  प्रतियोगिता में भाग लेने के इच्छुक खिलाड़ी अपना पंजीकरण राष्ट्रीय रायफल संघ (NRAI) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर 28 अगस्त 2025 तक कर सकते हैं।सभी छत्तीसगढ़ के मूलनिवासी इस प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं।निवास प्रमाणपत्र के लिए  वोटर आईडी कार्ड ,पासपोर्ट , पुलिस वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट की आवश्यकता होगी । यह प्रतियोगिता छत्तीसगढ़ के युवा निशानेबाजों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में एक अहम भूमिका निभाएगी।

राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े की सख्ती: बीकानेर-जोधपुर विश्वविद्यालय के कुलगुरु को हटाया

जयपुर बीकानेर-जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अरुण कुमार को बर्खास्त कर दिया गया है। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने बर्खास्तगी का आदेश जारी किया है। डॉ कुमार पर शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप साबित हुआ है। जांच में निधि का दुरुपयोग और अवैधानिक नियुक्तियां उजागर हुई हैं। डॉ. अरुण कुमार के विरुद्ध काफी समय से शिकायतें आ रही थीं। इसके बाद उनकी जांच के लिए संभागीय आयुक्त, जोधपुर को निर्देशित किया गया था। संभागीय आयुक्त, जोधपुर द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में डॉ. अरुण कुमार द्वारा के विरूद्ध  अधिनियम के प्रावधानों का कार्यान्वयन करने में जानबूझकर लोप करने, प्रदत्त शक्तियों का दुरूपयोग करने, विश्वविद्यालय को वित्तीय हानि पहुंचाने आदि के कृत्य प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाये गये। किसी विश्वविद्यालय के कुलपति को कैसे बर्खास्त किया जा सकता है? किसी कुलपति के खिलाफ भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, कदाचार, या प्रशासनिक लापरवाही जैसे गंभीर आरोप लगाए जाते हैं तो कुलपति को नियमानुसार जांच करवाकर हटाया जा सकता है। शिकायतें छात्रों, कर्मचारियों, या अन्य हितधारकों द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन, राज्य सरकार, या राज्यपाल (जो विश्वविद्यालय के कुलाधिपति होते हैं) को लिखित रूप में की जा सकती हैं और कुलपति के खिलाफ कार्रवाई की दिशा में कदम बठाया जा सकता है।  शिकायत मिलने पर, राज्यपाल या विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के निर्देश पर प्रारंभिक जांच शुरू की जाती है। यदि प्रारंभिक जांच में आरोपों में सत्यता पाई जाती है, तो एक औपचारिक जांच समिति गठित की जा सकती है। जांच समिति अपनी रिपोर्ट कुलाधिपति (राज्यपाल) को सौंपती है। यदि कुलपति दोषी पाए जाते हैं, तो समिति बर्खास्तगी या निलंबन की सिफारिश कर सकती है।

मणिमहेश यात्रा संकट में, हिमाचल में बारिश और सिग्नल कटने से परिजन परेशान

शिमला हिमाचल प्रदेश में बीते 72 घंटे में मौसम ने जमकर कहर ढाया है. हालांकि, गनीमत रही कि फ्लेश फ्लड और लैंडस्लाइड (Himachal Landslide) में कहीं किसी की मौत नहीं हुई, लेकिन संपति का काफी नुकसान हुआ है. चंडीगढ़ मनाली नेशनल हाईवे एक बार फिर से 2023 में आई आपदा की तरह टूट गया है और कुल्लू से मनाली के बीच में जगह जगह ब्यास नदी हाईवे को बहा ले गई है. ऐसे में इसे बनाने में लंबा वक्त लग सकता है. हालांकि राहत की बात है कि प्रदेश में बुधवार को धूप खिली है और कुल्लू मनाली में भी बारिश थम गई है. अब ब्यास नदी का जलस्तर धीरे धीरे कम होने लगा है. जानकारी के अनुसार, बीते 24 घंटे में कुल्लू और मनाली में ब्यास नदी की वजह से रेस्टोरेंट, दुकान और कई पुल बह गए. कुल्लू के अखाड़ा बाजार के पास एक दुकान नदी में समा गई. वहीं, ओल्ड मनाली को जोड़ने वाला पुल टूट गया. लेफ्ट बैंक में ट्रक और जीप नदी में बह गई. बुधवार को कुल्लू के मनाली, बंजार और सदर में स्कूल कॉलेज बंद रहेंगे. चंबा में हजारों लोग फंस चंबा के भरमौर में मणिमहेश यात्रा पर गए हजारों लोग वहां फसें हैं. यहां पर मोबाइल नेटवर्क उड़ गए हैं. हिमाचल प्रदेश लाइसेंस सेवा क्षेत्र (HP LSA), दूरसंचार विभाग के अपर महानिदेशक टेलीकॉम ने सूचित किया है कि चंबा शहर और भरमौर उप मंडल , जिला चंबा में इंट्रा-सर्कल रोमिंग (ICR) सुविधा7 दिनों के लिए, अर्थात 01 सितम्बर 2025 तक के लिए सक्रिय कर दी गई है/ यह पहल प्रभावित क्षेत्र में मोबाइल कनेक्टिविटी को बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है. इस क्षेत्र के मोबाइल उपभोक्ता अपने डिवाइस की सेटिंग्स में जाकर किसी भी उपलब्ध मोबाइल नेटवर्क का मैन्युअल रूप से चयन कर सकते हैं, चाहे वह उनके मूल सेवा प्रदाता का नेटवर्क न हो. ICR सुविधा की अवधि के दौरान उपभोक्ता किसी भी ऐसे टेलीकॉम ऑपरेटर के नेटवर्क से जुड़कर सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे जिसकी उस क्षेत्र में कवरेज उपलब्ध है. इस अस्थायी व्यवस्था का उद्देश्य बादल फटने और अचानक आई बाढ़ के कारण उत्पन्न व्यवधान के दौरान निर्बाध मोबाइल संचार सुनिश्चित करके सहायता प्रदान करना है. 4 नेशनल हाइवे और 677 सड़कें बंद हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश से हालात बिगड़ गए हैं. राज्य भर में सड़क और मोबाइल नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, प्रदेश में 4 नेशनल हाइवे और 677 सड़कें बंद हो गई हैं. कुल्लू–मनाली मार्ग पूरी तरह कट गया है. चंडीगढ़–मनाली नेशनल हाईवे–21 मंडी में कई स्थानों पर अवरुद्ध है. मंडी–पठानकोट एनएच–154 भी बंद पड़ा है. एनएच–305 कुल्लू के बंजार क्षेत्र में और एनएच–03 किन्नौर के बिगुलसरी में बाधित है. जिला वार स्थिति देखें तो बिलासपुर में 13, हमीरपुर में 5, कांगड़ा में 67, किन्नौर में 1, कुल्लू में 131, मंडी में 342, शिमला में 45, सिरमौर में 36, सोलन में 19 और ऊना में 18 सड़कें बंद हैं. वहीं चंबा और लाहौल–स्पीति से नेटवर्क बाधित होने के कारण रिपोर्ट नहीं मिल पाई है. भारी बारिश के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और प्रशासन लगातार हालात पर नज़र बनाए हुए है. मंगलवार शाम को आपदा प्रबंधन ने यह जानकारी सांझा की है.

मुख्यमंत्री साय ने विदेश से फ़ोन कर बस्तर की बाढ़ का लिया अपडेट

राहत एवं बचाव कार्यों में पूरी मुस्तैदी बरतने के निर्देश रायपुर, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने जापान प्रवास के दौरान छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में हुई अतिवृष्टि से उत्पन्न बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने राजस्व सचिव एवं आपदा राहत आयुक्त श्रीमती रीना बाबासाहेब कंगाले और बस्तर संभाग आयुक्त श्री डोमन सिंह से दूरभाष पर चर्चा कर राहत एवं बचाव कार्यों की प्रगति जानी और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। राजस्व सचिव श्रीमती कंगाले ने मुख्यमंत्री को बताया कि दंतेवाड़ा, बीजापुर और बस्तर जिले में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा, दरभा और तोकापाल विकासखंडों में प्रशासन लगातार राहत कार्य संचालित कर रहा है। लोहंडीगुड़ा विकासखंड के ग्राम  मांदर से 21 ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला गया है। वहीं, लोहंडीगुड़ा क्षेत्र में हेलीकॉप्टर और नाव की सहायता से ग्रामीणों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया। बीते 24 घंटों में 68 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि एसडीआरएफ को हाई अलर्ट पर रखा जाए और राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए। उन्होंने संभाग के सभी कलेक्टरों को निचले इलाकों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क करने और सुरक्षित स्थानों पर शीघ्र पहुँचाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री श्री साय ने राहत कार्यों में जुटे प्रशासनिक अमले, एसडीआरएफ और पुलिस बल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार आम जनता की सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनता की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मैंने प्रशासनिक अधिकारियों और एसडीआरएफ को हाई अलर्ट पर रहने और आवश्यकता अनुरूप प्रभावितों को सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

पंजाब बाढ़ अपडेट: हेलिकॉप्टर रेस्क्यू, 90 ट्रेनें प्रभावित, स्कूल 30 अगस्त तक बंद

अमृतसर  पंजाब में हो रही मूसलाधार बारिश और उसके कारण उत्पन्न बाढ़ जैसे हालात के चलते राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की है कि राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को 27 से 30 अगस्त तक बंद रखा जाएगा. यह निर्णय छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. राज्य में बाढ़ प्रभावित सात जिलों में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इन जिलों के करीब 130 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं और यहां तीन से दस फीट तक पानी भर गया है। ऐसे हालात राज्य के सभी तीन बांधों रणजीत सागर, पौंग और नंगल से लगातार पानी छोड़े जाने और लगातार हो रही वर्षा के कारण बने हैं। मौसम विभाग की और से राज्य के कई जिलों में आगामी दिनों में भारी वर्षा का रेड तो कही येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग विज्ञान चंडीगढ़ ने कल सुबह 8:30 बजे तक 5 जिलों पठानकोट, गुरदासपुर, बरनाला, संगरूर और मनसा में बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। उधर, 7 जिले बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। रणजीत सागर डैम और भाखड़ा डैम से लगातार पानी छोड़े जाने से रावी, सतलुज और ब्यास नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। तरनतारन और फिरोजपुर में हरिके हेडवर्क्स से छोड़े गए पानी के कारण बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। ब्यास नदी पर बने चक्की रेलवे पुल के नीचे से मिट्‌टी धंसने से पठानकोट-जालंधर रेलवे रूट बंद कर दिया गया है। इससे 90 ट्रेनें प्रभावित हुईं। कुछ को पठानकोट-अमृतसर-जालंधर रूट से रवाना किया जा रहा है। पठानकोट के कजला गांव से 6 लोग ध्रुव हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू किए गए। रावी नदी में आई बाढ़ के कारण लोग फंस गए थे, जिन्हें NDRF लगातार बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी। बाद में सेना बुलानी पड़ी।     मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर कहा, “राज्य में पिछले कुछ दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है और मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी भारी बारिश की चेतावनी दी है. ऐसे में सभी प्राथमिक, माध्यमिक और सीनियर सेकेंडरी स्कूल 27 अगस्त से 30 अगस्त तक बंद रहेंगे.” कई ज़िलों में जलभराव, जीवन अस्त-व्यस्त भारी बारिश के कारण पंजाब के प्रमुख बांधों — भाखड़ा, पौंग और रंजीत सागर — में जलस्तर खतरे के निशान तक पहुँच गया है. नतीजतन, सतलुज, व्यास और रावी नदियों में हजारों क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे पठानकोट, कपूरथला, मोगा, तरनतारन, फाजिल्का, फिरोज़पुर, अमृतसर और होशियारपुर जैसे ज़िले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं. मुख्यमंत्री ने किया ट्वीट (X (पूर्व में ट्विटर)) सैकड़ों गांवों में पानी भर चुका है, फसलें डूब गई हैं और सड़कों पर आवाजाही ठप हो गई है. कई जगहों पर स्कूल भवनों में भी पानी भर गया है, जिससे विद्यार्थियों के लिए स्कूल पहुँचना मुश्किल हो गया है. सरकार ने गिरदावरी और मुआवज़े की प्रक्रिया शुरू की मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि बाढ़ से प्रभावित इलाकों में विशेष गिरदावरी कराई जाएगी, जिसके अंतर्गत किसानों और आम नागरिकों को हुई फसल और संपत्ति की क्षति का आकलन कर मुआवज़ा दिया जाएगा. प्रशासन हाई अलर्ट पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA), एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं. वहीं, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिनों में और बारिश की चेतावनी दी है, जिससे राज्य सरकार और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है. भारी बारिश ने पंजाब में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है. ऐसे में स्कूल बंद करने का निर्णय आवश्यक और समयानुकूल प्रतीत होता है, ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. बारिश से जुड़े बड़े अपडेट्स..     सतलुज का जलस्तर बढ़ गया है। फिरोजपुर के कई गांवों से लोगों ने पलायन शुरू कर दिया है।     रणजीत सागर डैम से छोड़े गए पानी की वजह से रावी उफान पर है, जिससे पठानकोट व गुरदासपुर में हालात बिगड़ गए।     गुरदासपुर में मकोड़ा पत्तन के 7 गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट गया। प्रशासन ने गुरदासपुर के लिए स्पेशल हेल्पलाइन नंबर जारी किए।     सुल्तानपुर लोधी में धुसी बांध टूट गया। पिछले 11 घंटों से किसान उस बांध को टूटने से बचाने में लगे थे।     बाढ़ जैसी स्थिति को देखते हुए शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने मोगा में 31 अगस्त को होने वाली रैली को स्थगित कर दिया है।     अमृतसर में तीन मंजिला तीन इमारतें एक साथ गिर गईं। बिल्डिंग लंबे समय से खाली थी। जिसके चलते जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है।     होशियारपुर के भंगी चो में पानी चढ़ गया है। लोगों को हिदायत है कि उसे पार करने की कोशिश ना करें।     बरनाला धनौली में नाले का किनारा टूटने से खेतों में पानी आ गया है। इससे आस-पास के गांवों में खतरा मंडराने लगा है।

हाहाकार: राजस्थान की नदियों में बह गए 15 लोग, बचाव कार्य चल रहा, 10 लोग डूबने की आशंका

जयपुर  राजस्थान में चितौड़गढ़ और जालोर जिले में एक साथ दो बड़े हादसे हो गए हैं. यहां बनास और सूकड़ी नदी में 15 लोग बह गए हैं. इनमें से पांच लोगों को बच गए हैं. लेकिन 10 लोग अभी लापता हैं. उनके नदियों डूब जाने की आशंका है. नदियों में समाए इन लोगों की तलाश के लिए दोनों ही जगह रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. लेकिन लापता लोगों का अभी तक कोई सुराग नहीं लग पाया है. पुलिस प्रशासन रेस्क्यू टीमों के साथ वहां डेरा जमाए हुए बैठा है. दोनों ही घटनास्थलों पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा है. लापता हुए लोगों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो रखा है. जानकारी के अनुसार पहला हादसा मंगलवार देर शाम को जालोर के सायला थाना इलाके में हुआ. हाल ही में हुई जोरदार बारिश के कारण इलाके के आसाणा गांव के पास से गुजर रही सुकड़ी नदी में पानी का बहाव जोरों पर था. उस समय कुछ लोगों को नदी किनारे एक बोलेरो खड़ी दिखाई दी. इस गाड़ी के पास छह जोड़ी चप्पल और जूते पड़े हुए थे. इस पर लोगों को आशंका हुई तो उन्होंने पुलिस प्रशासन को सूचना दी. सूचना पर वह एसडीएम, तहसीलदार और थाना पुलिस मौके पर पहुंची. ग्रामीणों ने आशंका जताई कि जीप सवार लोग संभवतया नहाने के लिए नदी में उतरे थे लेकिन वापस नहीं निकल पाए. 5-6 लोगों को नदी में उतरते हुए दिखे थे जीप काफी समय से खड़ी हुई और कोई इसे लेने नहीं आया. प्रशासन ने जब इसकी जांच पड़ताल की तो पता चला कि एक ग्रामीण ने 5-6 लोगों को नदी में उतरते हुए भी देखा था. जांच में सामने आया कि आसाणा गांव के 6 लोग लापता हैं. इस पर प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया. उसके बाद रात साढ़े आठ बजे रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. यह ऑपरेशन मंगलवार को रातभर चला. लेकिन किसी का कोई भी सुराग नहीं लग पाया है. ऑपरेशन अभी चल रहा है. बनास नदी में बह गई कार दूसरा हादसा मंगलवार आधी रात को चित्तौड़गढ़ जिले के राशमी इलाके में बनास नदी में हुआ. वहां एक वेगन आर कार बनास नदी में बह गई. इस कार में 9 लोग सवार थे. उनमें से पांच लोग तो जैसे-तैसे करके बाहर आ गए लेकिन चार लोग नदी में बह गए. नदी में बहने वालो में दो बच्चे और दो महिला शामिल बताई जा रही है. यह हादसा उपरेड़ा सेमी मार्ग पर बहने वाली पुलिया पर हुआ. यहां भी हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा. उसने गोताखोरों की मदद से लापता हुए चार लोगों को ढूंढ़ने का प्रयास किया. लेकिन उनका बुधवार को सुबह तक कोई सुराग नहीं लग पाया है. सवाई भोज कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहे थे लोग बताया जा रहा है कि भारी बारिश के कारण मातृकुण्डिया बांध के गेट खोले जाने से बनास नदी में उफान आया हुआ था. उसकी उफान में यह कार बह गई. कार सवार लोग भीलवाड़ा से भूपाल सागर के काना खेड़ी जा रहे थे. काना खेड़ा गांव का यह भीलवाड़ा के सवाई भोज में धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेने गया हुआ था. वहां से आधी रात को वापस अपने गांव लौट रहे थे. उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं लग पाया कि पुलिया पर पानी कितना है और उन्होंने उस पर कार को चढ़ा दिया. बहरहाल यहां भी रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है.

करतारपुर साहिब पर आफत: रावी नदी के उफान से बाढ़ का खतरा

पंजाब  सागर बांध से रावी नदी में अत्यधिक पानी छोड़े जाने के कारण बाढ़ आ गई है। इस बाढ़ से करतारपुर साहिब गुरुद्वारा परिसर में पानी भर गया है। यह गुरुद्वारा सिखों के प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी का अंतिम विश्राम स्थल है। गुरुद्वारे में 5 से 7 फीट तक पानी भर गया है, लेकिन गुरु ग्रंथ साहिब सुरक्षित हैं। भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित यह गुरुद्वारा, करतारपुर कॉरिडोर खुलने के बाद पहली बार बाढ़ से प्रभावित हुआ है। कॉरिडोर वर्तमान में भारत की ओर से बंद है। लंगर हॉल, परिक्रमा, सरोवर और सराय में पानी जानकारी के मुताबिक, रावी नदी का जल स्तर बढ़ने से गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के लंगर हॉल, परिक्रमा, सरोवर और सराय में पानी भर गया है। गुरु ग्रंथ साहिब को दूसरी मंजिल पर सुरक्षित रखा गया है, और अन्य धार्मिक पुस्तकें भी सुरक्षित हैं। बाढ़ के कारण जीरो लाइन क्षेत्र भी पानी में डूब गया है। रावी नदी का पानी धुसी बांध के ऊपर से बह रहा है, जिससे आसपास के खेतों में पानी भर गया है। बांध में एक दरार भी आ गई है, जिससे डेरा बाबा नानक शहर में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। गौरतलब है कि गुरुद्वारा भारत-पाकिस्तान सीमा से 4 किलोमीटर दूर है। 2023 में भी डूबी थी जीरो लाइन उल्लेखनीय है कि जुलाई 2023 में रावी नदी में बाढ़ आई थी, जब जीरो लाइन डूब गई थी और कॉरिडोर पांच दिनों तक बंद रहा था। हालांकि, तब स्थिति इतनी गंभीर नहीं थी। इस बार गुरुद्वारा परिसर में भी पानी भर गया है। गुरुद्वारा प्रबंधन ने बताया कि पवित्र स्वरूप गुरु ग्रंथ साहिब शुरू से ही गुरुद्वारे की दूसरी मंजिल पर सम्मानपूर्वक स्थापित है, इसलिए यह पूरी तरह सुरक्षित है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद कॉरिडोर बंद बता दें कि करतारपुर कॉरिडोर को गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती पर नवंबर 2019 में खोला गया था। इसका उद्देश्य भारतीय श्रद्धालुओं को बिना वीजा के गुरुद्वारा दर्शन की सुविधा प्रदान करना था। इसे 'दक्षिण एशिया में शांति का गलियारा' भी कहा जाता है। यह कॉरिडोर पाकिस्तान के गुरुद्वारे को पंजाब के डेरा बाबा नानक से जोड़ता है। इस कॉरिडोर से तीर्थयात्रियों का आखिरी जत्था 7 मई को गया था। जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले के बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया, जिसके बाद कॉरिडोर को बंद कर दिया गया।