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बाढ़ की आशंका पर प्रशासन अलर्ट, प्रिंसिपल और हेडमास्टर्स को मिले नए दिशा-निर्देश

लुधियाना  पिछले कुछ दिनों से लगातार कहर बरसा रहा रावी दरिया अपनी हदें पार कर गया है। पंजाब के गुरदासपुर, पठानकोट जिले बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इन हालातों से जूझने के लिए डी.ई.ओ. गुरदासपुर ने जिले के डी.एम.ओ., प्रिंसिपल, हेडमास्टर्स, मिडल स्कूल इंचार्ज को एक संदेश जारी किया है। उन्होंने अपील की है जिन स्कूलों में राहत केंद्र बने हैं वहां शिक्षा विभाग की ओर से डटकर मदद करनी चाहिए।   उन्होंने कहा कि उक्त सभी इंचार्जों को अपने स्टाफ की दो घंटे की ड्यूटी लगाई जाए तो कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा ने हमें जीवन दिया है तो इंसान होने के नाते किसी के काम आना चाहिए। अगर स्कूल में किसी को रात रहना या किसी के गांव में पानी भर गया है तो उनकी मदद के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी प्रिंसिपल, हेडमास्टर्स यानी शिक्षा विभाग से संबंधित सभी को डटकर सामने आना चाहिए। दीनानगर साइड बहुत पानी है। डी.ई.ओ. गुरदासपुर ने कहा कि उन्हें प्रशासन की चिट्ठी के इंतजार में नहीं रहना चाहिए। बिना कहे इंसान होने के नाते मदद कर सकते हैं। शिक्षा विभाग से निवेदन है कि बच्चों को ऑनलाइन काम देना है तो उनके व्हाट्स ग्रुप बने हुए हैं उनके व्हाट्स ग्रुप से जुड़े। गौरतलब है कि पंजाब में हालात यह बन गए हैं कि धुस्सी बांध कई जगहों से टूट गया है और कई जगह रावी दरिया का पानी धुस्सी के ऊपर से होकर गांवों तक पहुंच गया है।  सीमा के पास के गांवों में हालात बद से बदतर हो गए हैं और लोगों के घरों में पानी भर गया है। गुरदासपुर और पठानकोट जिले में माधोपुर से शुरू होता यह कहर आगे रावी के पास के गांवों में बड़ा नुकसान कर रहा है। 

नवोदय स्कूल में बाढ़ से फंसे बच्चे, प्रशासन पर भड़के पैरेंट्स

चंडीगढ़  बीते कई दिनों से जारी भारी बारिश और हिमाचल एवं जम्मू-कश्मीर से होकर आने वाली नदियों के उफान पर आने से पंजाब के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हैं। गुरदासपुर जिले में तो एक जवाहर नवोदय विद्यालय ही अचानक बाढ़ की चपेट में आ गया। पूरे परिसर में पानी भर गया और ग्राउंड फ्लोर पर बने क्लासरूम में बड़े पैमाने पर पानी भरा हुआ है। यह नवोदय विद्यालय गुरदासपुर से करीब 12 किलोमीटर दूर डाबुरी गांव में स्थित है। हालात यह हैं कि स्कूल में 400 छात्र और करीब 40 स्टाफ मेंबर्स फंसे हुए हैं। यह स्कूल गुरदासपुर से दोरांगला जाने वाली सड़क पर है। सड़कों को भी भारी नुकसान पहुंचा है और आसपास के इलाके में सैलाब आ गया है। ऐसी स्थिति में यहां पहुंचना भी मुश्किल हो रहा है। ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार बचाव कार्य में इसलिए भी देरी हो रही है क्योंकि दिनानगर संभाग में सीएम भगवंत मान जा रहे हैं। इसी संभाग में गुरदासपुर जिला आता है और फिलहाल अधिकारी उनके आयोजन में बिजी हैं। कहा जा रहा है कि इसके चलते बचाव कार्य शुरू करने में देरी हो रही है। यह स्कूल भी दिनानगर सब-डिविजन में आता है। डिप्टी कमिश्नर ही हैं स्कूल के पदेन चेयरमैन, फिर भी रेस्क्यू का इंतजार जवाहर नवोदय विद्यालय केंद्र सरकार द्वारा फंडिंग से चलने वाला सरकारी स्कूल है। गुरदासपुर के डिप्टी कमिश्नर इसके चेयरमैन के तौर पर कामकाज देखते हैं। इस मामले में प्रशासन की शिथिलता को देखते हुए बच्चों के पैरेंट्स में भी नाराजगी देखी जा रही है। एक पैरेंट ने कहा कि आखिर जब सैलाब के चलते स्थिति खराब हो रही थी तो फिर बच्चों को पहले ही क्यों नहीं भेजा गया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को तो तीन दिन से पता है कि बाढ़ आ रही है और स्थिति और बिगड़ सकती है। उन्होंने कहा कि जब प्रशासन ने पूरे गुरदासपुर जिले में सभी स्कूलों की तीन दिन के लिए छुट्टी कर दी है तो फिर यहां से बच्चों को घर क्यों नहीं भेजा गया। आवासीय विद्यालय होने के चलते बच्चे नहीं भेजे गए थे घर बता दें कि जवाहर नवोदय विद्यालय आवासीय स्कूल होते हैं और बच्चे यहां रहकर ही पढ़ते हैं। सूत्रों का कहना है कि स्कूल के बगल में एक नाला बहता है, जिसकी कई सालों से सफाई नहीं हुई है। इसके कारण भी पानी का बहाव बस्तियों की ओर होने लगा है। पंजाब में 1988 में भी भारी बाढ़ आई थी। कहा जा रहा है कि फिलहाल आई बाढ़ ने उस लेवल को भी पार कर लिया है।  

पितृपक्ष मेला गया : श्रद्धालुओं को मिलेगी सुविधाएं, प्रशासन ने शुरू की तैयारी

गयाजी गयाजी में पितृपक्ष मेले के आयोजन को लेकर सरकारी तैयारी शुरू हो गई हैं। पितरों को मोक्ष दिलाने का महापर्व पितृपक्ष मेला- 2025 दस दिनों के बाद शुरू होगा। एक पखवाड़े तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध मेला का उद्घाटन 6 सितंबर को होगा। गयाजी के विष्णु नगरी में मेला के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों से पिंडदानियों का आना शुरू हो जाएगा। 6 सितंबर गया जी में गोदावरी तालाब या पटना जिले के पुनपुन नदी से पिंडदान शुरू होगा। विष्णु नगरी में मुख्य रूप से 7 सितंबर को फल्गु नदी में स्नान और तर्पण के साथ त्रिपाक्षिक गया श्राद्ध शुरू होगा। जो 22 सितंबर को गायत्री घाट पर मातामाह श्राद्ध के साथ समाप्त होगा। साथ ही पिंडदान से लेकर तीर्थ यात्रियों के लिए प्रशासन द्वारा की जानें वाली सुविधाओं के बारे में भी आपको बता रहे हैं। इन तारीखों में पिंडदान 06 सितंबर            पुनपुन या गोदावरी श्राद्ध। 07 सितंबर            फल्गु श्राद्ध। 08 सितंबर            ब्रह्मकुंड, प्रेतशिला, रामकुंड, रामशिला, कागबलि श्राद्ध। 09 सितंबर            उत्तर मानस, उदिची, कनखल, दक्षिण मानस, जिह्वालोल। 10 सितंबर            बोधगया के मातंगवापी, धर्मारण्य और सरस्वती।   11 सितंबर            ब्रह्मसत, कागवलि, आम्रसचेन। 12 से 14 सितंबर        विष्णुपद, सोलह वेदी। 15 सितंबर            सीताकुंड और रामगया। 16 सितंबर            गयासिर और गया कूप। 17 सितंबर            मुंडपृष्ठा, आदि गया, धौतपद। 18 सितंबर            भीमगया, गो प्रचार, गदालोल। 19 सितंबर            फल्गु में दूध तर्पण व पितरों की दीपावली। 20 सितंबर            वैतरणी श्राद्ध, गौदान। 21 सितंबर            अक्षयवट, शैय्या दान, सुफल। 22 सितंबर            गायत्री घाट, मातामाह श्राद्ध व आचार्य विदाई। कुंभ की तर्ज पर होगी मेले की सफाई पितृपक्ष मेले को यादगार पल बनाने के लिए जिला प्रशासन के साथ-साथ निगम प्रशासन ने भी कमान संभाल लिया है। कुंभ की तर्ज पर विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले में साफ सफाई की व्यवस्था होगी। इस दौरान सफाई  के लिए तीन एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई है। निजी आवास और धर्मशाला में ठहरने से पहले होगी जांच गयाजी के डीएम शशांक शुभंकर ने बताया कि पितृपक्ष मेला के दौरान श्रद्धालुओं को घरों में ठहरने के लिए 134 और निजी धर्मशाला की तरफ से 525 आवेदन मिले हैं। उन्होंने बताया कि लाइसेंस देने से पहले इसका भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। सभी मानकों की जांच के बाद ही लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। मेले में निगम करेगी 12 करोड़ रुपये खर्च राजकीय पितृपक्ष मेला की तैयारी पर गया जी नगर निगम 12 करोड़ रुपये खर्च करेगी। जिसमें पेयजल, रोड, नाली, ढक्कन, रंग रोगन, साफ सफाई समेत विभिन्न बुनियादी जरूरत पर खर्च करेगी। खुला कंट्रोल रूम मिलेगी सुविधाएं पितृपक्ष मेला के दौरान देश-विदेश से आने वाले पिंडदानियों की सुविधाओं को लेकर डीएम शशांक शुभंकर द्वारा विष्णुपद मंदिर के समीप स्थित संवाद सदन कार्यालय में कंट्रोल रूम बनाया गया है। पितृपक्ष मेला में आने वाले तीर्थ यात्रियों को महत्वपूर्ण जानकारी तथा सुविधाओं से संबंधित भी जानकारी उपलब्ध कराया जाएगा। नियंत्रण कक्ष 24 घंटे कार्यरत रखा जाएगा। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने तीर्थ यात्रियों की सुविधा के लिए फोन नंबर 92666 28168, 0631-2222500 और 0631-2222253/59 जारी किया गया है। टेंट सिटी में तीर्थ यात्रियों को निःशुल्क ठहरने की सुविधा पितृपक्ष मेला में आने वाले तीर्थ यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए जिला प्रशासन द्वारा टेंट सिटी का निर्माण कराया जा रहा है। जो गया जी के गांधी मैदान में 25 सौ क्षमता वाली टेंट सिटी बनाया जा रहा है। जहां तीर्थ यात्रियों को ठहरने के लिए निशुल्क दिया जाएगा। वहीं उक्त टेंट सिटी में शुद्ध पेयजल, शौचालय, स्नानगृह और बिजली की व्यवस्था होगी। साथी तीर्थ यात्रियों के मनोरंजन के लिए जगह-जगह एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी। अधिकारियों ने संभाली मेले की कमान पितृपक्ष मेला 2025 को यादगार पल बनाने के लिए प्रमंडलीय आयुक्त डॉ. सफीना एएन, आईजी छात्रनील सिंह, डीएम शशांक शुभंकर और नगर आयुक्त कुमार अनुराग समेत अन्य आलाधिकारियों ने मेला की कमान संभाल लिया है। प्रतिदिन जिला के अधिकारी मेल क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं। ताकि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।

छात्र आत्महत्या प्रकरण: सच्चाई उजागर करने समिति करेगी जांच

पूर्वी सिंहभूम झारखंड में पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने जमशेदपुर के एक निजी मेडिकल कॉलेज में तृतीय वर्ष के छात्र की मौत के मामले की जांच के लिए बीते मंगलवार को एक समिति गठित की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि समिति की अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी (कानून-व्यवस्था) भागीरथ प्रसाद करेंगे तथा उप प्रभागीय दंडाधिकारी (धालभूम) चंद्रजीत सिंह और उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) (मुख्यालय-1) भोला प्रसाद इसके सदस्य होंगे। उन्होंने बताया कि मणिपाल मेडिकल कॉलेज के छात्रावास के कमरे में 21 अगस्त को कथित तौर पर जहर खाने से 21 वर्षीय दिव्यांशु पांडे की मौत हो गई थी। मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने शनिवार को परिसर के बाहर प्रदर्शन किया और बिहार के समस्तीपुर निवासी पांडे की मौत के मामले में प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया। छात्रों ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन ने एंबुलेंस की व्यवस्था करने में देरी की तथा एक वरिष्ठ अधिकारी पर उन्हें परेशान करने का आरोप लगाया। उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने समिति को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। कॉलेज ने घटना के बाद कहा कि उसने परिवहन प्रभारी कर्मचारी को निलंबित कर दिया है और आरोपों की जांच के लिए एक आंतरिक समिति गठित की है।  

हंगामा खत्म, सैयदा हमीद ने बदली अपनी राय, बांग्लादेशियों को वापस भेजने का फैसला टला

नई दिल्ली  बांग्लादेशियों के पक्ष में बयान देकर विवादों में घिरीं सामाजिक कार्यकर्ता और योजना आयोग की पूर्व सदस्य सैयदा हमीद ने अब अपनी ही बात पर यू-टर्न ले लिया है और कहा है कि अवैध रूप से घुसे बांग्लादेशियों को देश से बाहर किया जाना चाहिए। हमीदा की ताजा टिप्पणी भारी विरोध और सियासी विवादों के बाद आई है। उन्होंने मंगलवार को एक कार्यक्रम में अपने बयान पर यू-टर्न लिया। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हमीद ने स्वीकार किया कि उनकी टिप्पणी से हलचल मच गई थी। सैयदा हमीद ने कहा, "असम का मेरा अनुभव बेहद खूबसूरत है… 1997 से महिला आयोग और योजना आयोग का हिस्सा रहते हुए, मैं असम के हर हिस्से में गई हूँ। लेकिन मुझे कभी इस बात का एहसास नहीं हुआ कि मैं एक मुसलमान और एक महिला हूँ… अचानक, मेरा नाम पूरे भारत में गूंजने लगा… बांग्लादेशी अब एक अपशब्द बन गया है। यह अब एक भयावह शब्द बन गया है।" उन्होंने आगे कहा, “अगर कुछ बांग्लादेशी भी आ गए हैं, तो उनके साथ बैठिए, उनसे बातचीत कीजिए और उन्हें वापस भेजिए।” सैयदा हमीद ने पहले क्या कहा था? इससे पहले सैयदा हमीद ने रविवार को कहा था, "बांग्लादेशी भी इंसान हैं; धरती बहुत बड़ी है, बंगलादेशी भी यहाँ रह सकते हैं… अल्लाह ने यह धरती इंसानों के लिए बनाई है, शैतान के लिए नहीं। किसी इंसान को इतनी बेरहमी से क्यों निकाला जाए।" इसके साथ ही उन्होंने असम की हिमंता विस्वा सरमा सरकार पर बेदखली अभियानों के दौरान अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ अमानवीय कृत्य करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि असम सरकार मुसलमानों को बंगलादेशी बता रही है। असम में मच गया था सियासी भूचाल हमीद के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि हमीद अवैध घुसपैठियों का समर्थन कर रही हैं और उनके बयान को इसका सबूत बताया था। सरमा ने कहा था कि ऐसे लोग ही ‘‘असम को पाकिस्तान का हिस्सा बनाने के जिन्ना के सपने को साकार करने’’ की कोशिश करते हैं। उन्होंने दावा किया कि हमीद जैसे लोगों के मौन समर्थन के कारण असमिया लोगों की पहचान विलुप्त होने के कगार पर है। मुख्यमंत्री सरमा ने मानवाधिकार कार्यकर्ता हमीद को गांधी परिवार का करीबी और विश्वासपात्र भी बताया था। हिंदू सेना का विरोध-प्रदर्शन विवाद मचने के बाद हिंदू सेना के कार्यकर्ताओं ने सैयदा हमीद की हालिया टिप्पणी के खिलाफ मगलवार को प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि वह असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों का बचाव कर रही हैं। यह विरोध प्रदर्शन दिल्ली के ‘कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब’ में हुआ, जहां हमीद ने नागरिक मंच असम नागरिक सम्मेलन द्वारा आयोजित ‘असम के विशेष संदर्भ में राष्ट्र की स्थिति’ विषय पर एक संगोष्ठी में शिरकत की थी। संगोष्ठी में हमीद ने असम में मुसलमानों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर चिंता व्यक्त करते हुए कथित तौर पर कहा था कि उन्हें अक्सर बांग्लादेशी करार दिया जाता है।

अब कफ सिरप खरीदना हुआ मुश्किल, फोन नंबर दर्ज करना होगा जरूरी

जयपुर राजस्थान में टीबी  यानी क्षय रोग के मरीजों की वास्तविक संख्या सरकार कागजों में रजिस्टर्ड टीबी के मरीजों के आंकड़े से कहीं ज्यादा है। यह चौंकाने वाली जानकारी  इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के सर्वे में सामने आई है। यहां टीबी के इलाज के लिए लोग बड़ी संख्या में कफ सिरप काम में ले रहे हैं। जबकि इस बीमारी का इलाज लंबे समय तक चलता है और विशेष प्रकार की दवाइयां इस रोग  को खत्म करने के लिए उपयोग में लाई जाती है। ऐसे में अब राजस्थान में टीबी के मरीजों की असल संख्या जानने के लिए ICMR की तरफ से एक पॉयलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है।  इस प्रोजेक्ट के तहत सर्वे कराया जा रहा है,जिसमें मरीजों को दिए जाने वाले कफ सिरप से टीबी की संभावना का पता लगाया जाएगा।  राजस्थान में इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही डॉ कलिका का कहना है की इस प्रोजेक्ट में पहले फेज में राजस्थान के 33 जिलों से कफ सिरप का डेटा तैयार किया जा रहा है ताकि पता लग सके कि कफ सिरप की बिक्री कितनी मात्रा में हो रही है,यह डेटा प्रदेश के लगभग सभी मेडिकल स्टोर से जुटाया जा रहा है,इसमें चिकित्सा विभाग का ड्रग डिपार्टमेंट सक्रिय भूमिका निभा रहा है, टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है, क्योंकि प्रदेश में अब भी बड़ी संख्या में मरीज या तो देर से रिपोर्ट करते हैं या फिर अपनी बीमारी को छुपा रहे है और इसके कारण संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। 7 गुना ज्यादा डॉ कलिका ने बताया कि जब हमने सर्वे किया तो सामने आया कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग है जो कफ सिरप खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा की राजस्थान में जितने टीबी के रजिस्टर्ड मरीज है उनसे सात गुना ज्यादा संख्या टीबी मरीजों की है, और यह कफ सिरप की की खरीद के आंकड़ों से सामने आया है। सर्वे में पता चला है कि  मेडिकल स्टोर्स पर कफ सीरप की खपत बहुत ज़्यादा बढ़ गई है,इसे लेकर चिकित्सा विभाग के ड्रग डिपार्टमेंट के साथ मिलकर टीबी के मरीजों की पहचान की जाएगी, राजस्थान में प्रोजेक्ट सफल रहने पर  ICMR  इसे पूरे देश में चलाएगा । कफ सिरप के लिए अब देना होगा मरीज को फोन नम्बर एड्रेस मामले को लेकर राजस्थान के ड्रग कंट्रोलर राजा राम शर्मा का कहना है कि ICMR के साथ मिलकर टीबी रोगियों की पहचान की जाएगी, इसे लेकर डिपार्टमेंट एक आदेश जारी करने जा रहा है जिसके तहत मेडिकल स्टोर्स से कफ सिरप खरीद करने वालो का रिकॉर्ड रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि जयपुर से पायलेट प्रोजेक्ट की शुरुआत हो रही है। अब  कफ सिरप की खरीद करने पर मरीज को फोन नम्बर एड्रेस देना होगा। इसके लिए प्रदेश की मेडिकल स्टोर्स को भी निर्देश जारी किए जाएगे। राजस्थान में फिलहाल करीब 60 हजार मेडिकल स्टोर्स हैं।  राजाराम शर्मा का कहना है की इसको लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है,प्रदेश में टीबी को ख़त्म करने के लिए चिकित्सा लगातार प्रयास कर रहा है इसे लेकर ड्रग विभाग के अधिकारियो को ट्रेनिंग भी दी जाएगी, एक बार रिकॉर्ड मिलने के बाद ऐसे मरीज़ों के घर जाकर स्क्रीनिंग की जाएगी और उसके सैंपल लिए जाएंगे जानकारी नहीं दे रहे मरीज हाल ही में चिकित्सा विभाग द्वारा टीबी मुक्त ग्राम पंचायत अभियान के तहत वर्ष 2024 में राजस्थान की 3,355 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या 586 थी। लेकिन फिर भी टीबी जैसी गंभीर बीमारी के बारे में अभी भी लोग जानकारी नहीं दे रहे हैं।  लोग सीधे मेडिकल स्टोर से कफ सिरप ख़रीद कर बीमारी का इलाज करने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि इस बीमारी का इलाज लंबे समय तक चलता है और विशेष प्रकार की दवाइयां इस रोग  को खत्म करने के लिए उपयोग में लाई जाती है। टीबी बीमारी क्या है टीबी यानि क्षय रोग एक संक्रामक रोग है, जो कीटाणु के कारण होता है। टीबी बैक्टीरिया से संक्रमित लोगों को टीबी से बीमार होने का जोखिम जीवन भर 5-10% रहता है।टीबी के लक्षणों की बात करें तो * तीन सप्ताह से ज्यादा खांसी * बुखार विशेष तौर से शाम को बढने वाला बुखार * छाती में दर्द * वजन का घटना * भूख में कमी * बलगम के साथ खून आना टीबी होने के कारण * धूम्रपान करना * वायु प्रदुषण के कारण * कुपोषित या ऐसे लोग जिनकी इम्युनिटी कमजोर है * जिन्हें मधुमेह है * एचआईवी और एड्स ग्रसित मरीजों को अन्य अंगो को प्रभावित टी.बी रोग विशेषकर (85 प्रतशित) फेंफडों को ग्रसित करता है।  करीब 15 प्रतिशत मामलों में शरीर के अन्य अंग जैसे, मस्तिष्क,  आंतें,  गुर्दे,  हड्डी व जोड इत्यादि भी रोग से ग्रसित होते हैं। टीबी रोग के निदान के लिये एक्स-रे करवाना, बलगम की जांच करवाना होता है। कई मामलों में इसकी जांच के लिए एक्स-रे व अन्य जॉंच जैसे FNAC, Biopsy, CT Scan की आवश्यकता हो सकती है।

दुर्घटना में व्यापारी परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, 2 की मौत, 4 घायल

बागपत वैष्णो देवी मार्ग पर हुए भूस्खलन में मुजफ्फरनगर के कार्तिक के अलावा बागपत के एक व्यापारी की पत्नी और साली की भी मौत हो गई है। यह परिवार बागपत के खेकड़ा से माता वैष्णो देवी दर्शन के लिए गया था। हादसे में व्यापारी समेत चार लोग घायल हो हैं। घायलों का जम्मू के अस्पताल में उपचार चल रहा है। वहीं हादसे की जानकारी मिलने के बाद से व्यापारी के परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिवार के लोग जम्मू के लिए रवाना हो गए हैं। बागपत के खेकड़ा के छोटा बाजार में व्यापारी मयंक गोयल परिवार के साथ रहता है। मयंक गोयल की बाजार में खिलौनों की दुकान है। गत 22 अप्रैल को मयंक की शादी गाजियाबाद निवासी चांदनी से हुई थी। बताया कि तीन दिन पहले मयंक गोयल पत्नी चांदनी, मां गीता गोयल, गाजियाबाद निवासी साढू अमित, साली नीरा ओर साली की बेटी विधि के साथ मां वैष्णो देवी दर्शन के लिए गया था। व्यापारी मयंक गोयल के छोटे भाई वंश गोयल ने बताया कि वैष्णो देवी मार्ग पर अचानक से भूस्खलन हो गया, जिसकी चपेट में पूरा परिवार आ गया। भाभी चांदनी ओर भाभी की बहन नीरा की हादसे में मौत हो गई, जबकि भाई मयंक, मां गीता गोयल, भाई का साढू अमित ओर उनकी बेटी विधि हादसे में घायल हुई है। बताया कि हादसे की सूचना भाई ने फोन पर दी। जिसके बाद परिवार के लोग जम्मू के लिए रवाना हो गए है। वहीं, हादसे की जानकारी मिलने के बाद से व्यापारी के परिवार में कोहराम मचा हुआ है। खेकड़ा कस्बे में भी शोक की लहर दौड़ी हुई है। मुजफ्फरनगर के कार्तिक की भी गई जान माता वैष्णो देवी मंदिर मार्ग पर हुए भूस्खलन की घटना में मुजफ्फरनगर के 22 वर्षीय कार्तिक की मृत्यु हो गई जबकि उसके माता-पिता और दो बहनें घायल हैं। घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में उपचार चल रहा है। घटना की सूचना मिलने पर मंत्री कपिलदेव अग्रवाल मृतक के घर पहुंचकर सांत्वना दी। आगरा धौलपुर के पांच दोस्त भूस्खलन में बहे आगरा और धौलपुर से वैष्णो देवी के दर्शन करने गए पांच दोस्त मंगलवार को हुए भूस्खलन में बह गए। इनमें से दो को बचा लिया गया है, जबकि तीन लापता युवकों की तलाश जारी है। भूस्खलन के बाद लापता युवक आगरा के खेरागढ़ निवासी शिव बंसल (20), उसके दो ममेरे भाई प्रांशु मित्तल और यश मित्तल हैं। साथ गए दो दोस्त दीपक मित्तल और आदित्य परमार को सुरक्षित बचा लिया गया है।खेरागढ़ निवासी विनोद बंसल का बेटा शिव बंसल 23 अगस्त को धौलपुर के सैंपऊ कस्बा निवासी अपने मामा के बेटों व दोस्तों के साथ वैष्णो देवी दर्शन को गया था। दर्शन के बाद मंगलवार को कटरा के पास स्थित अन्य मंदिरों में जाने के लिए टैक्सी लेकर निकले थे। इसी दौरान किशनपुर–डोमेल रोड पर गरनई लोटा के पास भूस्खलन से हुए तेज बहाव में सभी फंस गए। एनडीआरएफ समेत अन्य रेस्क्यू टीम तीनों की तलाश कर रही हैं।  

लगातार मूसलाधार बारिश से बस्तर बेहाल, SDRF-वायुसेना कर रही रेस्क्यू

जगदलपुर/रायपुर पहाड़ों और घने जंगलों की खूबसूरती के लिए चर्चित बस्तर इन दिनों बाढ़ जैसी स्थिति का सामना करना है. हालात इतने गंभीर हैं कि विदेश दौरे के बीच मुख्यमंत्री साय ने राहत और बचाव कार्य की जानकारी ली. इस बार बस्तर में बारिश का 94 साल का रिकॉर्ड टूट गया है. एक दिन में 210 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है. यहां सोमवार रात से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. मौसम विभाग के डेटा के अनुसार, बस्तर में 94 साल रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई है. 24 घंटे में 217 मिमी बारिश हुई है. इससे पहले 1931 में इतनी बारिश हुई थी. बाढ़ जैसी स्थिति, जनजीवन अस्त-व्यस्त मूसलाधार बारिश के कारण जिले के नदी-नाले उफान पर हैं. कई गांवों का सम्पर्क भी टूट गया है. जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है. वहीं जगदलपुर में इंद्रावती की सहायक गोरिया बाहर नाला उफान पर है, जिसकी वजह से सांसद निवास कलचा सहित दर्जनों गांवों का संपर्क जगदलपुर शहर से टूट गया है. जगदलपुर शहर के आधा दर्जन वार्ड भी पानी की चपेट में आ चुके हैं, कई घरों में पानी घुस गया है. इस बीच, गोरिया बाहर नाला में तीजा पर्व पर पूजा के सामान के विसर्जन के लिए महिलाएं, पुरुष और बच्चे पहुंच रहे हैं. जलस्तर कभी भी बढ़ सकता है, फिर भी वहां सुरक्षा व्यवस्था नहीं है और लोग जान जोखिम में डालकर विसर्जन कर रहे हैं. बारिश का सबसे ज्यादा असर लोहंडीगुड़ा के मांदर गांव में देखने को मिला, जहां बाढ़ से 85 परिवारों को विस्थापित होना पड़ा. वायुसेना के हेलीकॉप्टर से राहत और बचाव कार्य बाढ़ जैसी स्थिति से प्रभावित क्षेत्रों में वायुसेना के हेलीकॉप्टर की मदद से राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है.  पांच हेलिकॉप्टर से 5 लोगों को रेस्क्यू कर बचाया गया. वहीं रेस्क्यू में एसडीआरएफ की टीम भी जुटी हुई है. एसडीआरएफ की टीम ने 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है. जगदलपुर में दर्दनाक हादसा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में एनएच 30 पर दरभा के पास एक दुखद हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई. मृतकों में पति-पत्नी और उनके दो बच्चे शामिल हैं. हादसा उस समय हुआ जब परिवार की स्विफ्ट डिजायर कार बाढ़ के पानी में बह गई. जानकारी के अनुसार तमिलनाडु का यह परिवार बस्तर घूमने आया था. कार में सवार ड्राइवर ने तैरकर अपनी जान बचाई, लेकिन परिवार के चार सदस्य पानी के तेज बहाव में फंस गए. एडिशनल एसपी महेश्वर नाग ने घटना की पुष्टि की है.

झारखंड में कोयला उद्योग को लेकर उच्च स्तरीय बैठक, सीएम हेमंत ने रखी अपनी मांगें

रांची झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बीते मंगलवार को केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे के साथ बैठक कर खनन क्षेत्रों में प्रभावित स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा करने की पुरजोर वकालत की। एक अधिकारी ने बताया कि बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने विस्थापन, पारिस्थितिकी असंतुलन और इन क्षेत्रों में पर्याप्त बुनियादी ढांचे की कमी के बारे में चिंता जताई। अधिकारी के अनुसार सोरेन ने सुझाव दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर खनन क्षेत्रों में प्रभावित परिवारों का पुनर्वास सुनिश्चित करें, रोजगार के अवसर पैदा करें और पर्यावरण संतुलन बहाल करें। एक अधिकारी ने कहा, “मुख्यमंत्री ने कहा कि खनन कार्यों के पूरा होने के बाद, खनन उद्देश्यों के लिए अधिग्रहित भूमि मूल भूस्वामियों (रैयतों) को वापस कर दी जानी चाहिए।” सोरेन ने केंद्र सरकार से ऐसी भूमि राज्य को वापस स्थानांतरित करने का आह्वान किया, ताकि स्थानीय समुदायों को स्वामित्व वापस मिल सके।  

‘वोट चोरी’ पर नया सवाल, राहुल गांधी ने अमित शाह से पूछा BJP का भविष्य

पटना कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर कथित तौर पर ‘वोट चोरी’ के आरोप को लेकर नया सवाल उठाया है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को कैसे मालूम है, जो वो बार-बार कहते हैं कि भाजपा की सरकार 40 से 50 साल चलने वाली है। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ वोटर अधिकार यात्रा कर रहे गांधी ने एक दिन पहले कहा था कि 65 लाख नाम काटे गए लेकिन भाजपा ने एक शिकायत नहीं की क्योंकि भाजपा और चुनाव आयोग में वोट चोरी के लिए पार्टनरशिप है। राहुल गांधी ने मंगलवार को मधुबनी में कहा- “अमित शाह ने बयान दिया। एक बार नहीं अनेक बार। अब बीजेपी सरकार 40-50 साल चलेगी। मैं सोच रहा था कि ये कैसे कह सकते हैं, इनको कैसे मालूम कि बीजेपी सरकार 40-50 साल चलेगी। जनता क्या करेगी, जनता के दिल में क्या होता है, जनता ही जानती है। तो ऐसा बयान देना कि अब हमारी सरकार 40-50 साल चलेगी। ये अजीब सा बयान है। उस टाइम मैंने सोचा था कि इनको कैसे मालूम कि 40-50 साल चलेगी।” राहुल ने ‘वोट चोरी’ के आरोप पर अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस के संदर्भ में आगे कहा- "अब सच्चाई देश के सामने आ गई है। वो ये बात इसलिए कह सकते हैं क्योंकि वो वोट चोरी करते हैं। चोरी इन्होंने अभी नहीं चालू की। चोरी सालों से हो रही है। ये चोरी गुजरात में पहले शुरू हुई और उसके बाद 2014 में नेशनल लेवल पर आई। उसके बाद चुन-चुनकर ये लोग स्टेट जीतते हैं और हरवाते हैं। पहले ये बात मैं नहीं कहता था, क्योंकि मेरे पास सबूत नहीं था। मैं वही बोलता हूं, जिसके बारे में पूरी जानकारी हो। मुझे लगा कि कुछ ना कुछ तो गड़बड़ है। मैंने कहा कि जिस दिन तक सबूत नहीं मिलेगा, उस दिन तक खुलकर नहीं कहूंगा कि वोट चोरी होती है।” राहुल ने मधुबनी में ही एक दूसरी सभा में ऊपर कही गई बातों को दोहराते हुए कहा- “बीजेपी ने चुनाव आयोग की मदद से महाराष्ट्र का चुनाव चोरी किया। हरियाणा का चुनाव चोरी किया। उससे पहले मध्य प्रदेश का चुनाव चोरी किया। लोकसभा में कर्नाटक में हमने उनको पकड़ा। और हमारा एक ही मैसेज है कि बिहार में वोट चोरी नहीं होने देंगे। … हमने वोट चोरी पकड़ ली है। अब बीजेपी सरकार नहीं रहेगी।”