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रॉस टेलर की धमाकेदार वापसी, टी20 वर्ल्ड कप में खेलते दिखेंगे 4 साल बाद

वेलिंग्टन न्यूजीलैंड के दिग्गज पूर्व क्रिकेटर रॉस टेलर ने टी20 वर्ल्ड कप के लिए संन्यास का फैसला वापस ले लिया है। उन्होंने करीब 4 साल पहले क्रिकेट को अलविदा कहा था लेकिन अब एक बार फिर वह क्रिकेट के मैदान पर चौके-छक्के जड़ते दिखाई देंगे। टेलर ने सोशल मीडिया पर संन्यास तोड़ने का ऐलान करते हुए कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी वापसी को लेकर रोमांचित हैं। न्यूजीलैंड नहीं, समोआ की तरफ से खेलेंगे टेलर रॉस टेलर ने न्यूजीलैंड के लिए खेलने के लिए संन्यास का फैसला वापस नहीं लिया है। वह अपनी मां के मूल देश समोआ की तरफ से खेलेंगे और उनका लक्ष्य टीम को आने वाले टी20 वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई कराना है। समोआ की बात करें तो यह एक द्वीपीय देश है जो दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित है। यह न्यूजीलैंड और हवाई के बीच में स्थित है। ये देश दो मुख्य द्वीपों उपोलू और सवाई से बना है। इसके अलावा भी इसमें कई छोटे-छोटे द्वीप हैं और कुछ पर तो आबादी भी नहीं रहती। टेलर ने संन्यास तोड़ने को लेकर क्या कहा? रॉस टेलर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ऐलान किया, ‘यह आधिकारिक है- मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि मैं क्रिकेट में समोआ का प्रतिनिधित्व करूंगा। यह मेरे प्यारे खेल में सिर्फ वापसी तक सीमित नहीं है। अपनी विरासत, संस्कृति, गांव और परिवार का प्रतिनिधित्व करने का यह बहुत बड़ा सम्मान है। मैं क्रिकेट में वापसी का मौका मिलने, स्क्वाड में शामिल होने और मैदान के भीतर और उससे बाहर अपने अनुभवों को साझा करने को लेकर रोमांचित हूं।’ अक्टूबर में वर्ल्ड कप क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में खेलेंगे टेलर न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान 41 साल के रॉस टेलर अगले महीने अक्टूबर में वर्ल्ड कप एशिया-पैसिफिक क्वालीफाइंग सीरीज में समोआ का प्रतिनिधित्व करेंगे। ये क्वालीफाइंग सीरीज ओमान में खेली जाएगी जिसमें मेजबान टीम के अलावा समोआ और पापुआ न्यू गिनी टी20 वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई करने की रेस में शामिल होंगे। क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में तीन-तीन टीमों के तीन ग्रुप रहेंगे। हर ग्रुप की टॉप 2 टीमें सुपर सिक्स के लिए क्वालीफाई करेंगी। टूर्नामेंट की टॉप 3 टीमें 2026 में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई करेंगी जो भारत और श्रीलंका में होना है। संन्यास के ठीक बाद समोआ के लिए क्यों नहीं खेल सकते थे टेलर? रॉस टेलर ने 2022 की शुरुआत में आखिरी बार न्यूजीलैंड के लिए क्रिकेट खेला था। संन्यास के बाद वह राष्ट्रीय टीम बदल नहीं सकते थे क्योंकि इसके लिए एक निश्चित वेटिंग पीरियड है। ये वेटिंग पीरियड अप्रैल में खत्म हुआ जिसके बाद टेलर न्यूजीलैंड से इतर किसी अन्य देश के लिए खेलने के लिए अर्ह हो गए थे। अब उन्होंने समोआ की तरफ से खेलने का ऐलान किया है। रॉस टेलर का अंतरराष्ट्रीय करियर रॉस टेलर ने न्यूजीलैंड के लिए 112 टेस्ट मैच खेले हैं जिनमें उनके नाम 19 शतकों और 35 अर्धशतकों के साथ 7683 रन हैं। टेस्ट में उनका औसत 44.66 है। इसके अलावा वह 236 ओडीआई खेले हैं जिनमें 47.55 के शानदार औसत से 8607 रन बनाए हैं। वनडे में उनके नाम 21 शतक और 51 अर्धशतक शामिल हैं। टेलर ने अपने करियर में 102 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेले हैं। इनमें उनके नाम 1909 रन है। टी20 इंटरनेशनल में उन्होंने 7 अर्धशतक लगाए हैं। इस फॉर्मेट में उनका औसत 26.15 और स्ट्राइक रेट 122.37 है।

विधायक से टकराव के बाद भिंड कलेक्टर को क्षत्रिय समाज का साथ, मंच से उठाई तलवार

भिंड एमपी में भिंड कलेक्टर और विधायक के बीच चल रहे विवाद के बीच अब हालात दिलचस्प मोड़ ले रहे हैं। जहां एक ओर जिले के कुछ लोग कलेक्टर का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके समर्थन में भी लोग खुलकर सामने आने लगे हैं। क्षत्रिय समाज और सर्व समाज के प्रतिनिधि कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव का जोरदार स्वागत किया। इस दौरान उन्हें तलवार भेंट की गई है। कलेक्टर ने भी ऑफिस में चमचमाती तलवार लहराई है। क्षत्रिय समाज ने कलेक्टर को किया सम्मानित कलेक्टर के चैंबर में पहुंचकर समाज के लोगों ने पहले उन्हें फूल मालाएं पहनाईं, उसके बाद पारंपरिक पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया। इसके साथ ही मंत्रोच्चारण के बीच उन्हें तलवार भेंट की गई। बताया जाता है कि कलेक्टर ने अपने चैंबर में ही इस तलवार को म्यांन (खोल) से बाहर निकाला, औपचारिक रूप से हाथ में लिया और फिर वापस म्यांन में रख दिया। शक्ति प्रदर्शन है यह कलेक्टर द्वारा तलवार निकालना कुछ लोगों के बीच शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर उस समय जब कलेक्टर और स्थानीय विधायक के बीच विवाद गहराया हुआ है। इस विवाद के बाद जिले में प्रशासन और राजनीति के बीच टकराव का माहौल बन गया है। विधायक और कलेक्टर दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ पुलिस में शिकायतें दर्ज कराई थीं, जिसके बाद से जिले में सियासी हलचल तेज है। इस सम्मान समारोह में मौजूद क्षत्रिय समाज के पदाधिकारी और अधिवक्ता अशोक सिंह भदौरिया ने कहा कि कलेक्टर साहब ने जो काम किया, जो निर्णय लिए, वह जनहित में थे। समाज हमेशा उनके साथ खड़ा है। तलवार सम्मान का प्रतीक है, इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं। हालांकि, जिले के कुछ लोग इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग राय रख रहे हैं। विरोध करने वाले कुछ लोगों का मानना है कि अधिकारी को राजनीतिक मामलों में संयमित रहना चाहिए और ऐसी गतिविधियां प्रशासन की निष्पक्ष छवि पर सवाल खड़े कर सकती हैं। दो धड़ों में बंट रहा जिला कुल मिलाकर, विधायक-कलेक्टर विवाद के बीच भिंड में माहौल दो हिस्सों में बंटता नजर आ रहा है। एक पक्ष जहां कलेक्टर को गलत ठहरा रहा है, वहीं दूसरा पक्ष उनके सम्मान में आगे आकर समर्थन दे रहा है। तलवार भेंट और पगड़ी पहनाने जैसी परंपरागत रस्मों के बीच प्रशासन और राजनीति के टकराव ने जिले में हलचल बढ़ा दी है। यह हुआ था विवाद गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले भिंड कलेक्टर के आवास के बाहर विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान कलेक्टर के साथ उनकी नोकझोंक हो गई थी। विधायक ने कलेक्टर पर मुक्का तान दिया था। साथ ही विधायक ने भी उन्हें उंगली दिखाई थी। वीडियो वायरल होने के बाद भिंड कलेक्टर ने पुलिस में शिकायत भी दी है। इसके बाद विधायक ने भी शिकायत की थी।

राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हुई सोनीपत की शिक्षिका सुनीता, राष्ट्रपति ने दी प्रशंसा

सोनीपत हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली टीचर सुनीता ढुल को शुक्रवार को राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय शिक्षक मिला है। शिक्षक दिवस के मौके पर दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम सुनीता धुल को सम्मानित किया गया है। सुनीता हरियाणा की इकलौती टीचर हैं, जिन्हें इस बार नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया. सोनीपत के गांव नसीरपुर की सुनीता ढुल वर्तमान में मुरथल अड्डे पर स्थिति पीएम श्री राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में सामाजिक विज्ञान पढ़ाती हैं। पढ़ाने के साथ-साथ सुनीता ढुल एक कुशल मास्टर ट्रेनर भी हैं। वे रेडक्रॉस में राष्ट्रीय मास्टर ट्रेनर के रूप में काम करते हुए अब तक करीब 14 हजार बच्चों को फर्स्ट एड और जीवन रक्षक कौशल का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। वे पिछले डेढ़ साल से 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान में बच्चों से पौधे लगवाती हैं। जानिये…कैसे पिता की सोच ने बदली बेटी की राह ​सुनीता ढुल का सफर आसान नहीं रहा। पिता आर्मी राज सिंह दहिया में थे। फिर बिजली निगम में काम करने लगे। सुनीता तीन बहनों और दो भाइयों में सबसे छोटी हैं। उस दौर में लड़कियों की पढ़ाई को खास महत्व नहीं दिया जाता था। खासकर ग्रामीण इलाकों में। पिता ने जब बेटियों को पढ़ाना शुरू किया तो लोग ताने देते-“बेटियों को क्यों पढ़ा रहे हो, आखिरकार इन्हें दूसरे घर जाना है।” पिता ने कभी समाज की परवाह नहीं की। उनका जवाब हमेशा यही होता – “बेटी भी पढ़-लिखकर बदलाव की सोच के साथ काम करेगी।” यही सोच सुनीता की सबसे बड़ी ताकत बनी। मां रोज सुबह 3 बजे उठतीं, ताकि बच्चों को पढ़ने के लिए जगा सकें मां सुखदेई रोज सुबह 3 बजे उठ जातीं और बच्चों को 4 बजे पढ़ाई के लिए जगातीं। उस समय गांव की कम ही बेटियां स्कूल जाती थीं, लेकिन मां-बाप की लगन ने सुनीता और उनकी बहनों को शिक्षा के उजाले तक पहुंचाया। शिक्षा के प्रति उनकी लगन बचपन से ही थी। गांव से कॉलेज का आना-जाना 14 किलोमीटर दूर था। सुनीता साइकिल चलाकर जाती थीं। अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया ताकि वे अपनी आगे की पढ़ाई का खर्च उठा सकें। बीएड एंट्रेंस की थर्ड टॉपर बनीं साल 1996 में सुनीता बीएड एंट्रेंस टेस्ट में तीसरी टॉपर रहीं। सरकारी नौकरी से पहले उन्होंने 1996 से 2013 तक निजी शिक्षण संस्थानों में शिक्षिका और प्रिंसिपल के रूप में भी सेवाएं दीं। 2014 में उन्हें गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, समालखा में नौकरी मिली। फिलहाल वे पीएम श्री स्कूल, मुरथल अड्डा में सामाजिक विज्ञान पढ़ाती हैं। ​बतौर टीचर 5 बातों पर जोर दिया 1. ​टाइम टेबल का महत्व: सुनीता ने विद्यार्थियों को टाइम टेबल का पालन करना सिखाया, जिससे वे अपनी पढ़ाई और अन्य गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से कर सकें। 2. ​स्टूडेंट कमेटी का गठन: साल 2017 में उन्होंने एक स्टूडेंट कमेटी बनाई। हर महीने होने वाली मीटिंग में वे बच्चों से यह राय लेती थीं कि उनका स्कूल कैसा होना चाहिए। बच्चों को स्कूल से जुड़ाव महसूस हुआ और उनकी संख्या 275 से बढ़कर 450 हो गई।​ 3. व्यावहारिक ज्ञान पर जोर: साल 2014 से वे बच्चों के लिए प्रदर्शनियां लगाती आ रही हैं। वे समय-समय पर बच्चों को शैक्षिक भ्रमण पर ले जाती हैं। ताकि किताबी ज्ञान के अलावा बाहरी दुनिया की जानकारी मिले। 4. ​तकनीक का उपयोग: कोविड-19 महामारी के दौरान जब ऑनलाइन पढ़ाई चल रही थी, सुनीता द्वारा बनाई गई 12वीं कक्षा की भूगोल विषय की वीडियो पूरे हरियाणा में हरियाणा सरकार के एजुसेट चैनल पर चलाई गईं। 5. ​सामाजिक और नैतिक मूल्यों का विकास: वे स्कूल में विभिन्न भारतीय पर्वों का आयोजन और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं भी कराती हैं। ताकि बच्चों में सामाजिक और नैतिक मूल्यों का विकास हो सके। सख्त टीचर के रूप में पहचान को बदला​ शुरुआती दिनों में एक सख्त टीचर के रूप में पहचान बनाने वाली सुनीता ने बाद में अपनी शिक्षण शैली में बदलाव किया। उन्होंने मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया और बच्चों के साथ संवाद स्थापित करने पर जोर दिया। वे बच्चों की समस्याओं को सुनकर उन्हें सुलझाने की कोशिश करती हैं।​सुनीता कहती हैं-शिक्षा सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने का एक शक्तिशाली माध्यम है। सुनीता कहती हैं-पिता ने बेटियों को बोझ नहीं समझा, यह सोच जरूरी सुनीता के बेटे अध्ययन ऑस्ट्रेलिया में नौकरी कर रहे हैं। बेटी वंशिका अशोका यूनिवर्सिटी से मनोविज्ञान की पढ़ाई कर रही हैं। मां सुखदेई 96 वर्ष की आयु में आज भी उनकी प्रेरणा हैं। पति पवन ढुल भी हौसला बढ़ाते हैं। सुनीता कहती हैं-“पिता ने बेटियों को बोझ नहीं समझा। उनकी सोच और मां का समर्पण ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है। यही सोच-समर्पण जरूरी है। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार सिर्फ उनका सम्मान नहीं है, बल्कि उस सोच का सम्मान है जो कहती है कि शिक्षा ही समाज में असली बदलाव की चाबी है।” National Teachers award 2025 List 1-सुनीता – सोनीपत 2-शशि पॉल – हिमाचल प्रदेश 3-नरिंदर सिंह – लुधियाना 4-अवधेश कुमार झा – उत्तर पश्चिम दिल्ली 5-मंजूबाला – चम्पावत 6-परवीन कुमारी – चंडीगढ़ 7-नीलम यादव – खैरथल तिजारा 8-भाविनीबेन दिनेशभाई देसाई – दमन 9-विलास रामनाथ सातारकर – उत्तरी गोवा 10-हितेश कुमार प्रवीणचंद्र भुंडिया – राजकोट National Teachers award 2025 List 11-हिरेनकुमार हसमुखभाई शर्मा – गांधीपुरा खेड़ा 12-शीला पटेल – दमोह 13-भेरूलाल ओसारा – आगर मालवा 14-डॉ. प्रज्ञा सिंह – दुर्ग 15-कुलदीप गुप्ता – राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जिंद्राह 16-राम लाल सिंह यादव – भदोही 17-मधुरिमा तिवारी – मिर्जापुर 18-कुमारी निधि – किशनगंज 19-दिलीप कुमार – सुपौल 20-सोनिया विकास कपूर – मुंबई 21-कंधन कुमारेसन – एबरडीन 22-संतोष कुमार चौरसिया – कोरबा 23-डॉ. प्रमोद कुमार – नालंदा 24-तरुण कुमार दाश – कोरापुट 25-बसंत कुमार राणा – मल्कानगिरी 26-तनुश्री दास – मेदिनीपुर पश्चिम 27-नांग एकथानी मौंगलांग – पापुम पारे 28-पेलेनो पेटेनिलहु – कोहिमा 29-कोइजाम मचासन – इम्फाल पश्चिम 30-कर्मा टेम्पो एथेनपा – मंगन 31-डॉ. हेइपोर यूनी बैंग – पूर्वी जयंतिया हिल्स 32-बिदिशा मजूमदार – गोमती 33-देबजीत घोष – डिब्रूगढ़ 34-श्वेता शर्मा – देवघर 35-डॉ. शेख मोहम्मद वाकियोद्दीन शेख हामिदोद्दीन – नांदेड़ 36-डॉ. संदीपन गुरुनाथ जगदाले – लातूर 37-इब्राहिम एस – मूला एंड्रोथ 38-मधुरिमा आचार्य – कोलकाता 39-मदबाथुला थिरुमाला श्रीदेवी – विशाखापत्तनम 40-मरम पवित्रा – सूर्यापेट 41-रेवती परमेश्वरन – चेन्नई 42-विजयलक्ष्मी वी – तिरुपूर 43-किशोरकुमार एम.एस. – तिरुवनंतपुरम 44-डॉ. वी रेक्स उर्फ राधाकृष्णन … Read more

दंतेवाड़ा-नारायणपुर सीमा पर मुठभेड़, कई नक्सली ढेर होने की खबर

नारायणपुर- दंतेवाड़ा नारायणपुर और दंतेवाड़ा सीमा पर सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच जबर्दस्त मुठभेड़ चल रही है. STF, DRG कोबरा और नारायणपुर की टीम के जॉइंट ऑपरेशन में कई नक्सलियों के मारे जाने और घायल होने की खबर हे. यह मुठभेड़ नारायणपुर और दंतेवाड़ा की सीमा पर पूर्व बस्तर इलाके में चल रही है. दंतेवाड़ा एसपी गौरव रॉय ने सुरक्षा बलों के संयुक्त ऑपरेशन की पुष्टि की है उन्होंने बताया कि मुठभेड़ नारायणपुर और दंतेवाड़ा की सीमा पर चल रही है, जिसमें कई नक्सलियों के मारे जाने की सूचना है और कई नक्सली मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी मिली है. गौरतलब है छ्तीसगढ़ में एंटी नक्सल ऑपरेशन के तहत केंद्र और राज्य की ओर से लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं. केंद्रीय मंत्री गृह मंत्री अमित शाह ने पूरे देश से नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए 31 मार्च, 2026 की तारीख मुकर्रर की है. सुरक्षा बलों के संयुक्त ऑपरेशन से नक्सली हलकान है और लगातार सरेंडर कर रहे हैं.

यात्रियों के लिए खुशखबरी, मऊ से उधना तक स्पेशल ट्रेन की शुरुआत, मिलेगा खास ठहराव

रतलाम  त्योहारी सीजन के दौरान ट्रेनों में अतिरिक्त यात्रियों की भीड़ को समायोजित करने के लिए रेल मंडल के विभिन्न स्टेशनों पर ठहराव के साथ मऊ से उधना के मध्य स्पेशल ट्रेन का संचालन किया जा रहा है। यह ट्रेन दोनों दिशाओं में छह-छह फेरे चलेंगी। 05017 मऊ-उधना स्पेशल मऊ से 27 सितंबर से एक नवंबर तक चलेंगी। यह ट्रेन मऊ से प्रति शनिवार सुबह 5.30 बजे चलकर अगले दिन रविवार दोपहर 12 बजे उधना पहुंचेंगी। इस ट्रेन का नागदा तड़के 4.28 बजे तथा रतलाम 6.15 बजे आगमन होगा। इसी प्रकार 05018 उधना-मऊ स्पेशल उधना से 28 सितंबर से दो नवंबर तक प्रति रविवार को चलेंगी। यह ट्रेन उधना से प्रति रविवार दोपहर तीन बजे चलकर अगले दिन सोमवार रात 10.30 बजे मऊ रेलवे स्टेशन पहुंचेंगी। इस ट्रेन का रतलाम में रात 9.30 बजे तथा नागदा 10.40 बजे प्रति रविवार को आगमन होगा। यह ट्रेन सेकंड एसी, थर्ड एसी, स्लीपर व सामान्य श्रेणी कोच के साथ चलेंगी। इस ट्रेन का दोनों दिशाओं में बेलथरा रोड, सलेमपुर, भटनी, देवरिया सदर, गोरखपुर, खलिलाबाद, बस्ती, गोंडा, बाराबंकी, बादशाहनगर, ऐशबाग, कानपुर सेंट्रल, टूंडला, इदगाह, बयाना, गंगापुर सिटी, भवानी मंडी, शामगढ़, नागदा, रतलाम व वड़ोदरा रेलवे स्टेशन पर ठहराव दिया गया है। गौतमपुरा रोड स्टेशन पर जोधपुर-इंदौर एक्सप्रेस का प्रायोगिक ठहराव यात्रियों की मांग व सुविधा को ध्यान में रखकर रेल मंडल के गौतमपुरा रोड रेलवे स्टेशन पर जोधपुर-इंदौर एक्सप्रेस का ठहराव दिया जा रहा है। पांच सितंबर, को सांसद शंकर लालवानी अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में हरी झंडी दिखाकर ट्रेन के ठहराव का शुभारंभ करेंगे। पांच सितंबर से जोधपुर से चलने वाली 14801 जोधपुर-इंदौर एक्सप्रेस का गौतमपुरा रोड रेलवे स्टेशन पर आगमन/प्रस्थान रात 9.50/9.52 बजे होगा। इसी प्रकार छह सितंबर से इंदौर से चलने वाली 14802 इंदौर-जोधपुर एक्सप्रेस का गौतमपुरा रोड रेलवे स्टेशन पर आगमन/प्रस्थान सुबह 5.17/5.19 बजे होगा। रतलाम-नागदा खंड में ब्लाक के कारण तीन ट्रेनें निरस्त रेल मंडल के रतलाम-नागदा खंड में आटोमेटिक ब्लाक सिग्नलिंग प्रणाली को लागू करने के लिए शीघ्रता से कार्य जारी है। रतलाम-नागदा खंड में आटोमेटिक ब्लाक सिग्नलिंग सिस्टम को कार्यान्वित करने के लिए छह सितंबर को प्रस्तावित ब्लाक के कारण मंडल की चार ट्रेनें प्रभावित होंगी। 59318 उज्जैन-नागदा पैसेंजर, 59346 नागदा-उज्जैन पैसेंजर, 59345 रतलाम-नागदा पैसेंजर निरस्त रहेंगी। नागदा से चलने वाली 19341 नागदा-बीना एक्सप्रेस उज्जैन से चलेंगी तथा नागदा से उज्जैन के मध्य निरस्त रहेंगी।

महापुरुषों का अपमान: हजारीबाग में प्रतिमा तोड़ने से मचा बवाल

हजारीबाग हजारीबाग में महापुरुषों का अपमान थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर की चौक चौराहा पर स्थापित किए गए महापुरुषों की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। दो दिन पहले मंगलवार की रात पीडब्ल्यूडी कार्यालय के सामने स्वतंत्रता सेनानी सिदो कान्हू की प्रतिमा को खंडित कर दिया गया था। जिससे आदिवासी समाज आंदोलन हो उठा था। सड़क जामकर आंदोलन की चेतावनी दी थी। यह मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि बुधवार की रात बदमाशों ने सदर प्रखंड मुख्यालय के सामने शहीद नीलांबर पीतांबर की प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास किया। अराजक तत्वों ने नीलांबर पीतांबर प्रतिमा को गिराने का बहुत प्रयास किया, लेकिन 26 जुलाई की रात पूर्व मुख्यमंत्री केबी सहाय और सिदो कान्हू की प्रतिमा क्षतिग्रस्त किए जाने के बाद हाल के दिनों में नवनिर्माण मे मजबूती के कारण बदमाश सफल नहीं हो पाए। तब उनके हाथ के तीर धनुष को क्षतिग्रस्त कर चलते बने। जैसे ही सदर पुलिस को इस घटना की जानकारी मिली। पुलिस के होश फाख्ता हो गए। प्रतिमा तोड़ने के रोकने के प्रयास असफल हो गए। सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए तो वह खराब निकले। मामले की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन के अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया। किसी भी विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सदर अंचल अधिकारी और सदर थाना की पुलिस घटनास्थल पर जमी रही। शहर में स्थापित प्रतिमाओ को देखभाल करने वाला कोई नहीं महापुरुषों या देश के शहीदों के प्यार और सम्मान में लोग क्या-क्या नहीं करते हैं। उनके नाम पर संस्थाएं, मेमोरियल सड़क के नाम रखे जाते हैं। चौक चौराहा पर प्रतिमा स्थापित कर दी जाती है। शहर के दर्जनों स्थान में जोश खरोश के साथ बस स्टैंड के पास झारखंड के वीर बिरसा, झील पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, इंद्रपुरी चौक पर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, सर्किट हाउस के पास महाराणा प्रताप, पोस्ट ऑफिस चौक के पास वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा स्थापित कर दी गई है। जैसे ही उनके प्रशंसकों का जोश ठंडा हो गया और अब वह स्थापित प्रतिमाएं को कुव्यवस्था की शिकार हो रही है। जिन लोगों ने प्रतिमा स्थापित करने के लिए जोश ओ खरोश दिखाया था। यह प्रतिमाएं उनके लिए वह अतीत बन गया है। वहां साफ सुथरा और देखभाल करने की जिम्मेदारी उठाने वाला कोई नहीं है। इन महापुरुषों के मूर्तियों के ऊपर शेड भी नहीं है। जिसके कारण धूप हो या बरसात, सालों पर प्रतिमाएं प्रकृति की मार झेलती रहती है। शेड नहीं रहने से पक्षियों के बीट इन प्रतिमाओं को खराब कर रहे हैं। उसमें यूरिक एसिड व अन्य रासायनिक यौगिक होते हैं। जो अम्लीय होते हैं जिस प्रतिमा का रंग उड़ रहा है। उसमें दाग लग रहा है। प्रतिमा का क्षरण भी हो रहा है। अब उनके प्रशंसकों प्रशासन और राजनेताओं का ध्यान इस और नहीं जाता है। जब आयोजन होता है। वहां साफ सुथरा कर माला पहना दी जाती है। लेकिन विडंबना है कि इन प्रतिमाओं के उचित प्रबंधन की ओर ध्यान नहीं जाता है। दोषियों को चिह्नित कर कठोर कार्रवाई की जाए : कांग्रेस झारखंड की धरती के महान क्रांतिकारी शहीद निलांबर–पीतांबर भोगता की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने का असामाजिक तत्वों का प्रयास अब जिले की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। गुरुवार को पूर्व सदर विधानसभा प्रत्याशी मुन्ना सिंह ने इस घटना को इतिहास और बलिदान की विरासत पर हमला बताते हुए गहरी नाराज़गी जताई। सूचना मिलते ही मुन्ना मौके पर पहुँचे और प्रतिमा की स्थिति का निरीक्षण किया। प्रतिमा में लगे धनुष को आंशिक रूप से तोड़ने का प्रयास किया गया था। उन्होंने तुरंत ही जिला उपायुक्त और पुलिस कप्तान से फोन पर बातचीत कर विस्तृत जानकारी साझा की और दोषियों को शीघ्र चिन्हित कर कठोर कार्रवाई की मांग की। महापुरुषों की प्रतिमा की सुरक्षा पुलिस के लिए बनी चुनौती जानकारी मिलते ही हेल्पिंग ट्रस्ट इंडिया हजारीबाग के अध्यक्ष शाहिद हुसैन अपने समर्थकों के साथ नीलांबर पीतांबर चौक पहुंचे। उन्होंने महापुरुषों की प्रतिमा लगातार तोड़े जाने पर चिंता जताते जिला प्रशासन के खिलाफ आंदोलन चलाने की बात कही। वही महापुरुषों की प्रतिमा को सुरक्षा प्रदान करना पुलिस के लिए भी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद उन्होंने कोर्रा थाना प्रभारी से इस संबंध में बात की तो उन्होंने वहां पर सीसीटीवी कैमरे खराब रहने की बात कही उन्होंने कहा कि कंट्रोल रूम में जहां से पूरे जिले मे कानून-व्यवस्था को नियंत्रित किया जाता है। वहां अव्यवस्था की स्थिति है। सीसीटीवी मॉनिटरिंग के लिए लगाए गए कई टीवी खराब पड़े हैं। शहर में मात्र 48 सीसीटीवी कैमरे चालू हैं। जबकि दर्जनों खराब पड़े है। इसके कारण शहर में अपराध बढ़ रहे हैं।  

घग्गर-मारकंडा के उफान से हरियाणा के गांव जलमग्न, ट्रेनों का संचालन रद्द

हिसार  हिसार, फतेहाबाद, सिरसा और चरखी दादरी जिलों में लगातार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। ड्रेन और नहरों के टूटने से कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, फसलें डूब गई हैं और कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है। हिसार में ड्रेन टूटने से भारी नुकसान हिसार जिले में घिराय, पातन और भिवानी रोहिल्ला के पास घग्गर ड्रेन के टूटने से करीब 300 एकड़ क्षेत्र में जलभराव हो गया। जिले में अब तक 61 हजार एकड़ फसलें जलमग्न हो चुकी हैं। 28 गांवों की बाहरी बस्तियों और ढाणियों में पानी भरा हुआ है, जबकि 34 स्कूलों के परिसर में जलभराव की स्थिति है। रामगढ़ में जलभराव से नाराज ग्रामीणों ने हिसार-सिवानी रोड पर जाम लगाकर विरोध जताया। फतेहाबाद में मजदूर की मौत फतेहाबाद के भट्टूकलां में गांव रामसरा के पास हिसार मल्टीपर्पज चैनल ड्रेन टूटने से 700 एकड़ फसलें डूब गईं। करीब 15 ढाणियों में भी पानी भर गया। बचाव कार्य के दौरान ढिंगसरा गांव के मजदूर निगेह सिंह (42) की हार्टअटैक से मौत हो गई। भूना में बाढ़ जैसे हालात हैं, जहां दहमान गांव के 300 घरों में पानी घुस गया और 15 परिवारों को दूसरी जगह शरण लेनी पड़ी। खंचाजी मोहल्ला में एक मकान की छत और पुरानी तहसील चौक व गांव गाजूवाला में दीवारें गिर गईं। सिरसा में घग्गर नदी खतरे के निशान से ऊपर सिरसा के गांव चामल के पास ढाणी सुखचैन और मल्लेवाला में घग्गर नदी के तटबंध में दरारें आ गईं। चोपटा क्षेत्र में पांच घंटे की बारिश से कई गांवों में जलभराव हो गया। घग्गर नदी का जलस्तर 18,600 क्यूसेक से बढ़कर 21,000 क्यूसेक हो गया, जो खतरे के निशान को पार कर चुका है। शक्करमंदोरी और दड़बा कलां के स्कूलों में पानी भर गया, जबकि लुदेसर का शहीद स्मारक भी जलमग्न हो गया। चरखी दादरी में 7600 एकड़ फसल प्रभावित चरखी दादरी के 15 गांवों में जलभराव से 7600 एकड़ फसलें प्रभावित हुई हैं। गांव चांग और सागवान में आबादी क्षेत्र में पानी भरने से लोग सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। बुधवार को गांव अचीना के पास बास माइनर टूटने से छह एकड़ फसल जलमग्न हो गई। गांव कलिंगा में तीन नाबालिग लड़कियों की मौत के बाद प्रशासन ने ग्राम पंचायतों के जरिए मुनादी कराकर प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।फतेहाबाद में भी घग्गर का जलस्तर बढ़ा फतेहाबाद में घग्गर नदी का जलस्तर 14,700 क्यूसेक तक पहुंच गया है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। स्कूलों में अवकाश हिसार और सिरसा में 6 सितंबर तक स्कूल बंद रहेंगे। फतेहाबाद के रतिया, भूना, टोहाना और जाखल खंडों में भी स्कूल 6 सितंबर तक बंद रहेंगे। प्रशासन और स्थानीय टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं, लेकिन बारिश और जलभराव ने किसानों और ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अंबाला के 144 गांव जलमग्न, करंट लगने से एक शख्स की मौत, चार घरों की छत गिरी बारिश और नदियों के उफान ने अंबाला के अधिकांश क्षेत्रों को प्रभावित किया है। बुधवार रात्रि को घग्गर, टांगरी और मारकंडा नदी में अत्यधिक पानी आने से अंबाला के 146 से अधिक गांव जलमग्न हो गए। हालात इतने खराब हुए कि कालपी ओवरब्रिज के पास टूटे तार के कारण करंट लगने से एक युवक की मौत हो गई, वहीं जिले में चार घरों की छत गिर गईं। हालांकि घर की छत गिरने से लोग बाल-बाल बच गए, इनमें तीन घर बराड़ा में तो एक घर अंबाला छावनी के मोहड़ा में स्थित है, इसके साथ ही साहा में गंदे पानी की सप्लाई से साहा के बिहटा गांव निवासी 14 वर्षीय नैन्सी की मौत हो गई। बच्ची को दो दिन से उल्टी व दस्त हो रहे थे। दूसरी तरफ अंबाला के इंडस्ट्रियल एरिया में 9 फुट तक पानी भर गया, जिसमें 175 से अधिक लोग फंस गए। जिन्हें रेस्क्यू करने का अभियान एसडीआरएफ ने सुबह चार बजे से ही शुरू कर दिया था, इसमें से 150 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया, इसके साथ ही अंबाला साहा राजमार्ग, अंबाला-यमुनानगर राजमार्ग पर टांगरी व मारकंडा नदी का पानी आ गया जिससे एक तरफ का ही मार्ग चला। चंडीगढ़ दिल्ली राजमार्ग को भी हिसार बाईपास से डायवर्ट किया गया। वोडाफोन का नेटवर्क ठप होने से बचाया छावनी के इंडस्ट्रियल एरिया में मोबाइल नेटवर्क सेवा प्रदाता कंपनी वोडाफोन का प्रदेशस्तरीय कार्यालय है। यहीं से प्रदेश में नेटवर्क तकनीक को संचालित किया जाता है। बुधवार रात्रि को टांगरी का पानी क्षेत्र में आने से यह कार्यालय भी डूब गया। यहां कर्मचारी भी फंस गए। उन्होंने प्रशासन से मदद मांगी तो वीरवार सुबह प्रशासन ने एसडीआरएफ को भेजकर कुछ कर्मचारियों को निकाला तो वहीं कुछ कर्मचारियों को खाने का सामान भी पहुंचाया, इसके साथ ही डीजल की सप्लाई भी की गई ताकि जेनरेटर चलते रहे। सबसे अधिक अंबाला छावनी का हुआ नुकसान इस आपदा में सबसे अधिक नुकसान अंबाला छावनी और साहा क्षेत्र को हुआ है, इसके बाद अंबाला सिटी के ग्रामीण क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार उप-तहसील साहा के सभी गांवों में पानी भर गया है। इसके अलावा, कुछ आवासीय क्षेत्रों जैसे विकास विहार, अग्रसेन नगर, कीर्ति नगर, शंकर पार्क, गणेश विहार, और सत्संग विहार के साथ-साथ टांगरी बांध से सटे क्षेत्रों में भी जलभराव की समस्या रही। हलका धन्यौरा और ठरवा माजरी के गांवों में टांगरी नदी का पानी खेतों में घुस गया। खोजकीपुर, प्रधान, नगल, सरसाहेड़ी, सलरेहड़ी, माजरी, धन्यौरा, मोहड़ा, बब्याल, और बाड़ा गांवों के खेतों में भी पानी भर गया है, इसके अलावा, टैगोर गार्डन, पूजा विहार, प्रभु प्रेम आश्रम, ईस्ट सोनिया कॉलोनी, कमल कॉलोनी, करधान, और अर्जुन नगर जैसे इलाकों में भी जलभराव रहा। अंबाला शहर में ये क्षेत्र रहे प्रभावित शहर के कई रिहायशी इलाकों में पानी घरों में घुस गया, इनमें भानोखेड़ी, सोंतली, मलौर, सपेरा, केसरी, गोला, गगनेहरी, पपलोथा, महताबगढ़, अलापुर, लांडा, हलदरी, राजौली, हेमा माजरा, मुलाना, बुधियों, शेरपुर, और सुलखनी शामिल हैं। इन्को चौक अंडरपास, मनमोहन नगर, कपड़ा मार्केट, और टीवी अस्पताल रोड जैसे प्रमुख स्थानों पर भी जलभराव रहा। बराड़ा और मुलाना में ये क्षेत्र डूबे बराड़ा और मुलाना तहसील के खेतों में जलभराव की समस्या है। सैहला, सरदाहेड़ी, डुलियानी, गगनपुर, होली, मुलाना, घेलड़ी, हेमामाजरा, उगाला, … Read more

बालाघाट में बढ़ा बाघ का आतंक, लगातार हमलों से ग्रामीण सहमे

बालाघाट/ कटंगी  वन परिक्षेत्र कटंगी के कन्हड़गांव सर्किल अंतर्गत अंबेझरी-देवरी सड़क मार्ग पर गुरुवार की शाम साढ़े चार से पांच बजे के बीच बाघ ने एक किसान पर हमला कर दिया। उसे इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटंगी में भर्ती किया गया। जहां से हालत नाजुक देख जिला अस्पताल रेफर किया गया था। यहां रात्रि साढ़े 11 बजे इलाज के दौरान मौत हो गई। इस परिक्षेत्र में बाघ के हमले से आठ माह के भीतर यह पांचवीं मौत है। घटना के बाद ग्रामीण आक्रोशित है। जानकारी के अनुसार, ग्राम अंबेझरी निवासी किसान सेवकराम पिता रामाजी गौपाले 61 वर्ष रोजाना की तरह खेत में बैल और मवेशी चराने के लिए गया था। जिन्हें चराने के बाद उन्हें लेकर घर लौट रहा था। तभी वह अंबेझरी-देवरी सड़क पहुंचा था कि उस पर बाघ ने पीछे से हमला कर घायल कर दिया। इस हमले को देख अन्य किसानों ने शोर मचाया तो बाघ जंगल के अंदर भाग गया। किसान किसी तरह से घर पहुंचा और स्वजनों को जानकारी दी गई। घटना में सेवकराम के गर्दन, चेहरे पर गंभीर चोटें आई थी। 21 दिन पूर्व में दूसरा हमला बाघ के हमले से 21 दिन पूर्व 14 अगस्त को ग्राम अंबेझरी निवासी विठ्ठल आसटकर अपने घर की गाय व भैंस चराने जंगल के पास गया था। उस समय बाघ ने हमला कर घायल कर दिया था। ऐसे में अब बाघ और मानव के बीच बढ़ते द्वंद को लेकर लोग भयभीत नजर आ रहे है। इस क्षेत्र के लोगों की मांग है कि खेत किनारे जंगल में फेंसिंग लगाई जाए। ताकि बाघ का प्रवेश सड़क व खेतों में आने से रूक सके। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो लगातार बाघ के लोग निवाले बनते जाएंगे और घायल होते रहेंगे। आठ माह के भीतर बाघ ने पांच लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। मृतक के परिजनों को दिलाया जाएगा मुआवजा     ग्राम अंबेझरी निवासी सेवकराम गौपाले का खेत जंगल से सौ मीटर दूरी पर है। वह अपने बैल सहित अन्य मवेशी को चराने के बाद शाम को घर लौट रहा था कि बाघ ने उस पर हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल को कटंगी से बालाघाट रेफर कर दिया गया था। जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक के स्वजनों को विभाग की तरफ से आठ लाख रुपए का मुआवजा दिलवाया जाएगा। जिसकी कार्यवाही डीएफओ कार्यालय से होगी।– बाबूलाल चढार, वन परिक्षेत्र अधिकारी कटंगी।  

रेणु देवी की नजर बेतिया से छठवीं जीत पर, कांग्रेस झोंक रही पूरी ताकत

बेतिया बिहार के पश्चिम चंपारण जिले का बेतिया विधानसभा क्षेत्र अपने दामन में समृद्ध इतिहास समेटे हुए है। बेतिया ने इतिहास और समय के साथ सियासत को बदलते हुए भी देखा है। बेंत के जंगलों की वजह से इसका नाम बेतिया पड़ा था। मुगल काल में बेतिया राज की जमींदारी मशहूर थी, जिसके अधीन करीब 15000 एकड़ भूमि थी। आजादी के बाद लगातार 11 चुनावों में यह कांग्रेस का गढ़ बना रहा, जिसे 1990 में भाजपा के मदन प्रसाद जायसवाल ने ध्वस्त कर भगवा झंडा लहराया। तब से सिर्फ दो चुनावों को छोड़कर भाजपा ही जीतती रही है। वर्तमान में यहां की विधायक पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन मंत्री रेणु देवी हैं। वह पांच बार यहां का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। रेणु देवी पहली बार वर्ष 2000 के चुनाव में जीती थीं। 2015 में जब जदयू और भाजपा का गठबंधन टूटा तो कांग्रेस के मदनमोहन तिवारी (कांग्रेस) ने रेणु देवी (भाजपा) को 2320 मतों के मामूली अंतर से हराया था। तब राजद एवं कांग्रेस के साथ जदयू भी महागठबंधन में था। लेकिन, 2020 के चुनाव में उन्होंने मदन मोहन तिवारी को पराजित कर फिर से यह सीट अपने नाम कर ली। रेणु देवी 16 नवंबर 2020 से 9 अगस्त 2022 तक राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री भी रहीं। बेतिया नगर निगम और मझौलिया प्रखंड को मिलाकर बनाए गए इस विधानसभा क्षेत्र की सियासत भाजपा और कांग्रेस के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है। अब तक हुए चुनाव में 12 बार कांग्रेस, एक बार जनता दल एवं पांच बार भाजपा ने जीत दर्ज की है। 1995 में जनता दल के बीरबल यादव ने यहां से जीत दर्ज की। इस बार चुनाव में भाजपा की रेणु देवी जीत का छक्का लगाने को लेकर सक्रिय हैं। उधर, एक बार फिर कांग्रेस अपनी खोई जमीन वापस पाने की तैयारी में जोरदार तैयारी कर रही है। जन सुराज ने भी क्षेत्र में पूरा जोर लगाया है। प्रशांत किशोर ने पदयात्रा की शुरुआत चंपारण से की थी। वह जिले का कई बार दौरा कर चुके हैं। कई गांवों में जन सुराज का जनसंवाद भी हुआ है। एक बड़े व्यवसायी भी निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। कभी मिनी चंबल कहलाता था बेतिया बेतिया (पश्चिम चंपारण) जिला कभी मिनी चंबल के नाम से खौफ का पर्याय था। मगर बीते दो दशक में पटना, यूपी एवं दिल्ली से रेल-सड़क संपर्कता बेहतर हुई है। अस्पताल में भी इलाज की सुविधा बढ़ी है। हालांकि शहर की जर्जर सड़कें और जल जमाव की समस्या हल होना बाकी है। बेतिया विधानसभा सीट एक नजर में- इस विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या 299915 है। इनमें 158877 पुरुष, 141028 महिला और 10 थर्ड जेंडर वोटर हैं। बेतिया विधानसभा सीट के पूरब में सुगौली (पूर्वी चंपारण), पश्चिम में चनपटिया एवं योगापट्टी, उत्तर में सिकटा एवं चनपटिया और दक्षिण में नौतन पड़ता है। पांच साल में दिखे ये बदलाव- ⦁ पॉलिटेक्निक कॉलेज बना ⦁ गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज का भवन बनकर तैयार हुआ ⦁ घरों में बिजली पहुंची, विस क्षेत्र में 35 से अधिक सड़कें बनीं ⦁ गांव में पशु चिकित्सा वैन पहुंच रही, मवेशियों के इलाज में सुविधा ⦁ बरवत में एक लाख लीटर क्षमता वाले दूध शीतक केंद्र की मिली मंजूरी वादे जो पूरे नहीं हुए 1. बरवत-जीएमसीएच फोरलेन व जगदीशपुर-भरपटिया बाइपास सड़क नहीं बनी 2. बेतिया शहर की मुख्य सड़कों का निर्माण नहीं हो सका 3. बेतिया नगर निगम क्षेत्र में नई शामिल पंचायतों में सड़क-नाली नहीं बनी 4. हर घर नल का जल का लाभ बेतिया शहरी क्षेत्र के अधिकतर लोगों को नहीं मिला इस बार के चुनावी मुद्दे ⦁ शहर की जर्जर सड़कों की मरम्मत ⦁ नगर निगम में नए शामिल मोहल्लों में सड़क-नाला निर्माण ⦁ स्ट्रीट लाइट एवं शुद्ध पेयजल की सुविधा नहीं ⦁ बेतिया में सरकारी महिला डिग्री कॉलेज की स्थापना ⦁ चंद्रावत, कोहरा और अन्हरी-चन्हरी नदी का अतिक्रमण एवं उसमें गाद भरना बेतिया से विधायक और पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन मंत्री रेणु देवी का दावा है कि क्षेत्र में 35 से अधिक सड़कें बनी हैं। बरवत-जीएमसीएच सड़क चौड़ीकरण, जगदीशपुर-भरपटिया बाइपास, खीरी के पेड़-कमलनाथनगर से सुप्रिया रोड, चीनी मिल समेत तमाम सड़क एवं पुल के लिए टेंडर हो चुका है। महिला कॉलेज के भवन का शिलान्यास हो चुका है। पूर्व कांग्रेस विधायक मदन मोहन तिवारी का आरोप है कि बेतिया नगर निगम क्षेत्र में जलजमाव की समस्या खत्म नहीं हुई। चंद्रावत में शहर का पानी गिरता है, उस पर अतिक्रमकण है और बची नदी में गाद भर गई है। शहरी क्षेत्र की सभी सड़कें जर्जर हैं। महना-मझौलिया सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। जमीन माफिया के आतंक से रैयत त्राहिमाम कर रहे हैं। आधा दर्जन से अधिक पुल-पुलिया नहीं बने। बेतिया विधानसभा सीट पर कब कौन जीता 1951 : प्रजापति मिश्र, कांग्रेस 1952 : केतकी देवी, कांग्रेस 1957 : जय नारायण प्रसाद, कांग्रेस 1957 : जगन्नाथ प्रसाद स्वतंत्र, कांग्रेस 1962 : जय नारायण प्रसाद, कांग्रेस 1967 : एचपी सहाय, कांग्रेस 1969 : गौरीशंकर पांडेय, कांग्रेस 1972 : कृष्ण मोहन पांडेय, कांग्रेस 1977 : गौरीशंकर पांडेय, कांग्रेस 1980 : गौरीशंकर पांडेय, कांग्रेस 1985 : गौरीशंकर पांडेय, कांग्रेस 1990 : मदन प्रसाद जायसवाल, भाजपा 1995 : बीरबल यादव, जनता दल 2000 : रेणु देवी, भाजपा 2005 (फरवरी) : रेणु देवी, भाजपा 2005 (अक्टूबर) : रेणु देवी, भाजपा 2010 : रेणु देवी, भाजपा 2015 : मदन मोहन तिवारी, कांग्रेस 2020 : रेणु देवी, भाजपा

इंदौर एजुकेशन हब: IIT की रैंकिंग में उछाल, DAVV को फायदा, IIM यथावत

इंदौर  शिक्षा मंत्रालय द्वारा NIRF (नेशनल इंस्टीट्यूशनल फ्रेम वर्क) रैंकिंग-2025 गुरुवार को जारी की गई। सूची में IIT इंदौर की रैंकिंग में चार स्थान का सुधार हुआ है। वहीं IIM इंदौर की रैंकिंग में कोई सुधार नहीं आया है, वह पिछले दो बार से 8वें नंबर पर ही बना हुआ है।  NIRF रैंकिंग-2025 रिपोर्ट में IIM इंदौर ने देशभर के मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में 8वीं रैंक हासिल की है। IIM इंदौर को पिछले साल यानी 2024 और 2023 में भी यही रैंक मिली थी। जबकि 2022 में IIM इंदौर को 7वीं रैंक हासिल हुई थी। वहीं इंजीनियरिंग कैटेगरी में IIT इंदौर की रैंकिंग पिछले साल की तुलना में इस साल सुधरी है। IIT इंदौर इस साल 12वें स्थान पर पहुंच गया है। 2024 में IIT इंदौर को 16वां स्थान मिला था। 2023 में IIT इंदौर को 14वां स्थान मिला था। 2022 में भी इसे 16वां स्थान मिला था। ओवरऑल कैटेगरी में भी हुआ सुधार यही नहीं IIT इंदौर को ओवर ऑल कैटेगरी में भी फायदा हुआ है। इस साल ओवरऑल रैंकिंग में आईआईटी इंदौर को 6 पायदान का फायदा हुआ है। ओवर ऑल रैंकिंग में IIT इंदौर इस साल 27वें स्थान पर है। पिछले साल यानी 2024 में IIT इंदौर को ओवर ऑल कैटेगरी में 33वां स्थान मिला था। इसके पहले साल यानी 2023 में IIT इंदौर को ओवर ऑल कैटेगरी में 28वां स्थान मिला था। बता दें कि 2022 में IIT इंदौर की ओवरऑल रैंकिंग 30वीं थी। अंकों में नहीं हुआ सुधार इस साल IIT को रैंकिंग में सुधार हुआ है, लेकिन अंकों में गिरावट आई है। IIT को 66.65 अंक प्राप्त हुए हैं। पिछले साल IIT को 64.72 अंक प्राप्त हुए थे। वहीं पिछले साल इंदौर को ओवरऑल कैटेगरी में जहां 57.31 अंक मिले थे। इस साल 60.13अंक मिले हैं। IIM की बात करें तो इसे 75.68 अंक मिले हैं। जबकि IIM इंदौर को NIRF रैंकिंग 2024 में 73.53 अंक मिले थे। इस साल IIT और IIM दोनों के अंक में नुकसान हुआ है। अब हो रहा रैंकिंग में सुधार NIRF रैंकिंग में IIT और IIM इंदौर की रैंक पिछले साल तक लगातार गिरती जा रही थी, लेकिन अब इस साल से इसमें सुधार होना शुरू हुआ है। IIM इंदौर की 2019 में अब तक की सबसे बेहतर 5वीं रैंक आई थी, 2020 में यह गिरकर 7 नंबर पर आ गई। इसके बाद IIM इंदौर ने 2021 में फिर 6वीं रैंक हासिल की थी। पिछले तीन साल से IIM इंदौर की रैंकिंग लगातार गिरती जा रही थी। वहीं पिछले दाे साल से IIM इंदौर की पिछली रैंक ही बरकरार है। स्टेट कैटेगरी में देअविवि को फायदा इस साल देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी को स्टेट कैटेगरी में टॉप-100 यूनिवर्सिटी में इस साल 49वें नंबर पर जगह मिली है। वहीं पिछले साल यानी 2024 में देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी को स्टेट कैटेगरी में 50वें स्थान पर रखा गया था। वहीं यूनिवर्सिटी को इस साल 50.41 पांइट मिले हैं। जानकारों का कहना है कि 2026 की रैंकिंग में गिरावट आ सकती है। यूनिवर्सिटी में हाल ही में रैगिंग की शिकायतों में बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। डेंटल कॉलेज इस साल भी सूची से बाहर डेंटल कैटेगरी में शहर के गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज की रैंकिंग में दो साल से लगातार नुकसान हो रहा है। देश के शीर्ष डेंटल कॉलेजों की सूची में इंदौर शासकीय डेंटल कालेज 2023 में 32वें स्थान पर था। वहीं 2024 में वह टॉप 40 की सूची से बाहर हो गया था। इस साल भी वह टॉप 40 की सूची से बाहर है। वहीं इंदौर आईआईटी को रिसर्च रैंकिंग में भी इस साल 24वां स्थान मिला है।