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छत्तीसगढ़ में नक्सली दहशत: सुकमा में हुई निर्मम हत्याओं की हकीकत

बस्तर  बस्तर एक बार फिर माओवादी हिंसा की चपेट में आ गया है. छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले में रविवार देर रात हथियारबंद नक्सलियों ने दो ग्रामीणों की निर्मम हत्या कर दी. यह घटना केरलापाल थाना क्षेत्र के सिरसेटी के नंदापारा में हुई. मृतकों की पहचान पदम पोज्जा और पदम देवेंद्र के रूप में हुई है. सूचना पर पुलिस दल मौके पर पहुंच गए हैं और बस्तर पुलिस जल्द ही आधिकारिक बयान जारी करेगी. सुकमा में एक हफ़्ते के भीतर माओवादियों से जुड़ी यह दूसरी हत्या है. इससे पहले जगरगुंडा के सिलगेर गांव में शिक्षादूत लक्ष्मण बारसे की हत्या कर दी गई थी.   पिछले एक पखवाड़े में माओवादियों ने बस्तर में नागरिकों पर हमले तेज़ कर दिए हैं. कांकेर में स्वतंत्रता दिवस पर एक माओवादी स्मारक पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद 25 वर्षीय ग्रामीण मनीष नुरेती का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई थी. खबरों के अनुसार, उसकी फांसी से पहले एक "जन अदालत" का आयोजन किया गया था. एक अन्य मामले में सुकमा के पोलमपल्ली में 40 वर्षीय सोदी देवा की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. बीते दिनों तीन नक्सलियों को किया गया था गिरफ्तार नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है. बीते रविवार को सुकमा जिले में विस्फोटकों के साथ तीन नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तार नक्सलियों की पहचान पोडियम जोगा (25), माडवी मासा (25) और पोज्जा माडवी (29) के रूप में हुई थी. ये तीनों प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के मिलिशिया सदस्य हैं. इनके पास से लगभग 3 किलोग्राम वजन का एक टिफिन बम, पांच डेटोनेटर, पांच जिलेटिन रॉड, चार पेंसिल सेल, बिजली के तार और डेटोनेटिंग कॉर्ड बरामद किए गए थे.

दुर्घटना ने बदली खुशियों की शाम, रायसेन में विसर्जन के दौरान दो भाइयों की गई जान

रायसेन मध्य प्रदेश के रायसेन में गणेश विसर्जन के दौरान बड़ा हादसा हो गया. घाटखेड़ा गांव में दो भाई डूब गए जिससे उनकी मौत हो गई. पांच लोग विसर्जन के लिए गए थे, तभी फिसलकर दो नाबालिग गहरे पानी में समा गए. एक को निकालकर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. इस घटना से गांव में मातम पसरा है और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है.   मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के घाटखेड़ा गांव में गणेश विसर्जन के दौरान दर्दनाक हादसा सामने आया है. शनिवार रात करीब 8 बजे गणेशोत्सव की समाप्ति पर घर से गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए निकले पांच युवकों में से दो की डूबने से मौत हो गई. प्रतिमा विसर्जन के दौरान हादसा जानकारी के अनुसार, उमरावगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस गांव में एक ही परिवार के पांच युवक विसर्जन के लिए नजदीकी नाले में गए थे. सभी किशोर प्रतिमा विसर्जन के बाद एक पत्थर पर खड़े होकर पानी देख रहे थे, तभी नीचे की मिट्टी धंस गई और वो पानी में गिर पड़े. इस हादसे में 16 साल के अनुज साहू और 17 साल के नितिन साहू गहरे पानी में बह गए. दो भाइयों की डूबने से मौत गांववालों ने तुरंत शोर सुनकर बचाव कार्य शुरू किया. करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद अनुज का शव बरामद हुआ. वहीं नितिन को निकालकर सीपीआर (CPR) दिया गया और तत्काल भोपाल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. पुलिस के मुताबिक, अन्य तीन लोग किसी तरह तैरकर सुरक्षित बाहर आ गए. हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया.  उमरावगंज थाना प्रभारी शैलेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि घटना के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. उन्होंने कहा कि यह एक दुखद हादसा है और परिजनों को ढांढस बंधाया गया है. गांववालों ने कहा कि हर साल यहां विसर्जन के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं, लेकिन पानी की गहराई का अंदाजा नहीं होने की वजह से यह हादसा हो गया. 

सरकारी कर्मचारियों के लिए जरूरी खबर: समय खत्म होने से पहले करें यह फैसला

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने कर्मचारियों को यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) से नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) में लौटने का अवसर दिया है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल एक बार मिलेगी और इसके बाद दोबारा UPS में लौटना संभव नहीं होगा। सरकार ने कहा कि पात्र कर्मचारी और रिटायर कर्मचारी इस विकल्प का इस्तेमाल 30 सितंबर 2025 तक कर सकते हैं। तय समय सीमा के बाद यदि कोई कर्मचारी कदम नहीं उठाता है, तो उसे डिफॉल्ट रूप से UPS के अंतर्गत ही माना जाएगा। बता दें कि यह कदम उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है जो तय लाभ वाली UPS योजना से हटकर बाजार-आधारित NPS में जाना चाहते हैं। UPS निश्चित पेंशन, DA से जुड़ा महंगाई समायोजन, ग्रेच्युइटी और पारिवारिक पेंशन जैसे लाभ देता है, जबकि NPS कर्मचारियों को अधिक रिटर्न और निवेश में लचीलापन प्रदान करता है, लेकिन इसमें बाजार जोखिम भी शामिल रहता है। क्या हैं शर्तें बता दें कि केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के लिए UPS से NPS में बदलाव को लेकर स्पष्ट शर्तें तय की हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह विकल्प केवल एक बार ही इस्तेमाल किया जा सकेगा और कर्मचारी इसके बाद दोबारा (UPS) में वापस नहीं लौट पाएंगे। बदलाव का निर्णय भी समय से पहले लेना होगा। कर्मचारी को यह विकल्प अपनी सेवानिवृत्ति से कम से कम एक वर्ष पहले या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) से कम से कम तीन महीने पहले, जो भी पहले हो, चुनना होगा। इसके अलावा, जिन कर्मचारियों पर हटाए जाने, बर्खास्तगी, दंडस्वरूप अनिवार्य सेवानिवृत्ति जैसी कार्रवाई चल रही हो, या जिनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित हो, वे इस सुविधा का लाभ नहीं ले पाएंगे। कौन सा विकल्प चुने कर्मचारी वित्त मंत्रालय द्वारा पेश किए गए पेंशन विकल्पों को लेकर अब स्पष्ट तुलना सामने आ गई है। जानकारों का कहना है कि UPS कर्मचारियों के लिए एक कम जोखिम वाला, सरकारी गारंटी वाला विकल्प है। इसमें पेंशन के साथ ग्रेच्युइटी और पारिवारिक पेंशन जैसी सुविधाएँ भी मिलती हैं। हालांकि, इसकी सीमाएं भी हैं—जैसे कि निवेश में लचीलापन कम होना, एकमुश्त निकासी का हिस्सा छोटा होना और ऊंचे रिटर्न की संभावना अपेक्षाकृत कम रहना। वहीं, नेंशनल पेंशन स्कीम (NPS) एक डिफाइंड कंट्रिब्यूशन स्कीम है, जिसमें निवेश इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटी में किया जाता है। इससे कर्मचारियों को निवेश आवंटन पर ज्यादा नियंत्रण और बेहतर ग्रोथ की संभावना मिलती है। NPS में कर्मचारी अपनी पेंशन राशि में से 60% हिस्सा एकमुश्त निकाल सकते हैं, जबकि बाकी 40% से अनिवार्य रूप से एन्युइटी खरीदनी पड़ती है। इसमें कर लाभ भी शामिल हैं, जैसे धारा 80C और 80CCD के तहत छूट। लेकिन चूंकि यह बाजार से जुड़ा है, इसलिए इसमें जोखिम बना रहता है और UPS की तरह मुद्रास्फीति समायोजन या पारिवारिक पेंशन की सुविधा नहीं मिलती। तुलनात्मक रूप से देखें तो, UPS एक डिफाइंड बेनिफिट प्लान है, जिसमें पेंशन की गारंटी और DA से जुड़ा महंगाई भत्ता मिलता है। UPS में कर्मचारी को बेसिक वेतन + DA का 10% योगदान करना होता है, जबकि नियोक्ता (सरकार) 18.5% योगदान करती है। दूसरी ओर, NPS एक डिफाइंड कंट्रिब्यूशन प्लान है, जिसमें कर्मचारी भी 10% योगदान करते हैं लेकिन नियोक्ता का हिस्सा 14% होता है। UPS में पारिवारिक पेंशन और ग्रेच्युइटी उपलब्ध हैं, जबकि NPS में ये दोनों सुविधाएं नहीं हैं। इसके बदले NPS अधिक रिटर्न और निवेश की आजादी देता है, लेकिन जोखिम और अनिश्चितता भी साथ लाता है।

जोस बटलर को चाहिए महज 43 रन, बड़ी उपलब्धि अपने नाम करने से बस एक कदम दूर

साउथेम्प्टन (यूके)  इंग्लैंड के विकेटकीपर-बल्लेबाज जोस बटलर साउथेम्प्टन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपने तीसरे वनडे से पहले अपने देश के लिए 12,000 अंतरराष्ट्रीय रन बनाने से 43 रन दूर हैं। अगर बटलर इस मुकाम तक पहुंच जाते हैं, तो वह ऐसा करने वाले केवल सातवें अंग्रेजी बल्लेबाज होंगे। वर्तमान में 387 मैचों में बटलर ने 36.12 की औसत, 95.49 के स्ट्राइक रेट, 14 शतकों और 73 अर्द्धशतकों के साथ 11,957 रन बनाए हैं। वह इंग्लैंड के अब तक के सातवें सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मौजूदा श्रृंखला में बटलर ने पिछले दो वनडे मैचों में 15 और 61 रन बनाए थे। इस साल 20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में बटलर ने 35.50 की औसत, 113 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट, 4 अर्धशतकों और 96 के सर्वश्रेष्ठ स्कोर के साथ 639 रन बनाए हैं। इंग्लैंड के लिए 57 टेस्ट मैचों में बटलर ने 100 पारियों में 31.94 की औसत, 2 शतकों और 18 अर्द्धशतकों के साथ 2,907 रन बनाए हैं जिसमें 152* का सर्वश्रेष्ठ स्कोर शामिल है। इंग्लैंड के लिए उनका आखिरी टेस्ट 2022 में आया था, लेकिन वह हमेशा से ही सीमित ओवरों के क्रिकेट में थ्री लायंस के लिए लगातार रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे हैं।  उन्होंने 193 एकदिवसीय मैचों में 39.05 की औसत और 115 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट से 5,350 रन बनाए हैं जिसमें 11 शतक और 28 अर्द्धशतक शामिल हैं और उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 162* है। इसके अलावा बटलर टी20आई में इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं, जो उनके सबसे महान सीमित ओवरों के दिग्गजों में से एक होने की उनकी स्थिति को और पुख्ता करता है। 137 मैचों और 126 पारियों में उन्होंने 35.92 की औसत और 147.05 के स्ट्राइक रेट से 3,700 रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक और 27 अर्द्धशतक शामिल हैं। उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 101* है। वह टी20आई इतिहास में चौथे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं।  इंग्लैंड के रन-स्कोरिंग चार्ट में सबसे ऊपर जो रूट हैं जिनके नाम 49.62 की औसत, 57 शतक और 114 अर्धशतकों के साथ 21,637 अंतर्राष्ट्रीय रन हैं। श्रृंखला की बात करें तो इंग्लैंड पहले ही इसे 2-0 से हार चुका है और अपने सम्मान के लिए अंतिम वनडे जीतने का लक्ष्य रखेगा।  तीसरे वनडे के लिए प्लेइंग इलेवन इंग्लैंड : जेमी स्मिथ, बेन डकेट, जो रूट, हैरी ब्रुक (कप्तान), जोस बटलर (विकेट कीपर), जैकब बेथेल, विल जैक्स, जेमी ओवरटन, ब्रायडन कार्स, जोफ्रा आर्चर, आदिल राशिद  दक्षिण अफ्रीका : एडेन मार्करम, रयान रिकेल्टन (विकेट कीपर), टेम्बा बावुमा (कप्तान), मैथ्यू ब्रीट्ज़के, ट्रिस्टन स्टब्स, डेवाल्ड ब्रेविस, वियान मुल्डर, कॉर्बिन बॉश, केशव महाराज, कोडी यूसुफ, नंद्रे बर्गर   

संस्कृत हमारी विरासत का आधार, इसे संरक्षित करना सबकी जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री

रायपुर भारतीय संस्कृति की आत्मा संस्कृत में निहित है, जो हमें विश्व पटल पर एक विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। संस्कृत भाषा व्याकरण, दर्शन और विज्ञान की नींव है, जो तार्किक चिंतन को बढ़ावा देती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के संजय नगर स्थित सरयूपारीण ब्राह्मण सभा भवन में आयोजित विराट संस्कृत विद्वत्-सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संस्कृत शिक्षा आधुनिक युग में भी प्रासंगिक और उपयोगी है। संस्कृत भाषा और साहित्य हमारी विरासत का आधार हैं, जिन्हें हमें संरक्षित और संवर्धित करना चाहिए।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि देववाणी संस्कृत पर चर्चा के साथ यह सम्मेलन भारतीय संस्कृति, संस्कार और राष्ट्र को सुदृढ़ बनाने का एक महान प्रयास है। मुख्यमंत्री साय ने संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संस्कृत भारती छत्तीसगढ़ और सरयूपारीण ब्राह्मण सभा छत्तीसगढ़ द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा उन्हें बधाई और शुभकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक शिक्षा में संस्कृत भाषा को शामिल करने से विद्यार्थियों का बौद्धिक विकास सुनिश्चित होगा। संस्कृत में वेद, उपनिषद और पुराण जैसे ग्रंथों का विशाल भंडार है, जो दर्शन, विज्ञान और जीवन-मूल्यों का संदेश देते हैं। वेदों में वर्णित आयुर्वेद, गणित और ज्योतिष आज भी प्रासंगिक हैं और शोध का विषय हो सकते हैं। इन ग्रंथों में कर्म, ज्ञान और भक्ति के सिद्धांत स्पष्ट रूप से प्रतिपादित हैं, जो आधुनिक जीवन में शांति और संतुलन ला सकते हैं।ऐसे में संस्कृत शिक्षा आधुनिक युग में भी उतनी ही प्रासंगिक और उपयोगी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वेदों और उपनिषदों के ज्ञान को अपनाकर हम अपनी विरासत को संजोने के साथ-साथ अपने जीवन को भी समृद्ध बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें युवाओं को संस्कृत साहित्य से जोड़ने के लिए प्रेरित करना होगा, ताकि वे इस ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुँचा सकें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि तकनीक के माध्यम से संस्कृत शिक्षा को आकर्षक और प्रासंगिक बनाया जा सकता है। राज्य में संस्कृत विद्वानों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी से इस दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि इस सम्मेलन के माध्यम से हमें संस्कृत विद्या के प्रचार-प्रसार और अगली पीढ़ी को जोड़ने का संकल्प लेना चाहिए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने सरयूपारीण ब्राह्मण सभा, छत्तीसगढ़ के प्रचार पत्रक का विमोचन भी किया। विराट संस्कृत विद्वत्-सम्मेलन का आयोजन संस्कृत भारती छत्तीसगढ़ एवं सरयूपारीण ब्राह्मण सभा छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।  सम्मेलन को संबोधित करते हुए संस्कृत भारती के प्रांताध्यक्ष डॉ. दादू भाई त्रिपाठी ने कहा कि इतिहास में ऐसे अनेक प्रमाण मिलते हैं, जिनसे सिद्ध होता है कि एक समय संस्कृत जनभाषा के रूप में प्रचलित थी। छत्तीसगढ़ी भाषा का संस्कृत से सीधा संबंध है। छत्तीसगढ़ी में पाणिनि व्याकरण की कई धातुओं का सीधा प्रयोग होता है। उन्होंने यह भी बताया कि सरगुजा क्षेत्र में सर्वाधिक आदिवासी विद्यार्थी संस्कृत की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में सरयूपारीण ब्राह्मण समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया। इनमें गठिया रोग विशेषज्ञ डॉ. अश्लेषा शुक्ला, उत्कृष्ट तैराक अनन्त द्विवेदी तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला शामिल थे। सम्मेलन को दंडी स्वामी डॉ. इंदुभवानंद महाराज, सरयूपारीण ब्राह्मण सभा छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. सुरेश शुक्ला और अखिल भारतीय संस्कृत भारती शिक्षण प्रमुख डॉ. श्रीराम महादेव ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर डॉ. सतेंद्र सिंह सेंगर, अजय तिवारी, बद्रीप्रसाद गुप्ता सहित बड़ी संख्या में संस्कृत शिक्षकगण, सामाजिक प्रतिनिधि और गणमान्यजन उपस्थित थे।

UP में शिक्षा जगत में भूचाल! सुप्रीम कोर्ट ने TET को किया चुनौतीपूर्ण आदेश, कांग्रेस ने BJP पर बोला हमला

लखनऊ सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया है कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से कम शेष है, उनके लिए टीईटी पास करना अनिवार्य नहीं होगा. लेकिन जिनकी सेवा 5 साल से अधिक है, उन्हें परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले यूपी के 2 लाख शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडराता नजर आ रहा है. वहीं इस फैसले से देश के 10 लाख से ज्यादा शिक्षक प्रभावित होंगे. ऐसे में इस मामले को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधा है. यूपी कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से कम शेष है, उनके लिए टीईटी पास करना अनिवार्य नहीं होगा, लेकिन जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से अधिक शेष है, उनके लिए टीईटी पास करना आवश्यक होगा. आगे कांग्रेस ने कहा, प्रदेश के 2 लाख से अधिक तो देश के 10 लाख से ज़्यादा शिक्षकों पर इस फैसले का सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि उनके लिए टीईटी परीक्षा पास करना शायद अब संभव न हो. हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन भाजपा की डबल इंजन सरकार से अपेक्षा करते हैं कि वह इस आदेश को लागू करने का तरीका मानवीय और व्यावहारिक बनाए. कांग्रेस पार्टी शिक्षकों के अधिकार और सम्मान की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

सुरक्षा बलों की कार्रवाई: अमित हांसदा मारा गया, 10 लाख का इनाम खत्म

झारखंड देश को नक्सलमुक्त बनाने के लिए सुरक्षा बलों का अभियान लगातार जारी है. झारखंड-छत्तीसगढ़ बॉर्डर के नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस, झारखंड जगुआर, कोबरा बटालियन और सीआरपीएफ के जवान बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं. इन्हीं प्रयासों के तहत पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा क्षेत्र में रविवार सुबह सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई. इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए नक्सली संगठन के कुख्यात जोनल कमांडर अमित हांसदा को ढेर कर दिया. उस पर झारखंड सरकार ने 10 लाख रुपये का इनाम रखा था। यह मुठभेड़ गोइलकेरा थाना क्षेत्र के रेलापराल जंगल और बुरजूवा पहाड़ी के पास हुई। इसके बाद छत्तीसगढ़ से सटे सीमावर्ती इलाकों में सर्च अभियान को और तेज कर दिया गया है। इस ऑपरेशन को नक्सल विरोधी अभियानों में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिसने माओवादी संगठन के मनोबल को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुठभेड़ की पूरी कहानी चाईबासा एसपी को सूचना मिली थी कि गोईलकेरा थाना क्षेत्र के आराहासा पंचायत अंतर्गत रेलापराल गांव के पास नक्सली संगठन के कुछ सदस्य इकट्ठा हुए हैं. बताया गया कि ये नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे थे. इस जानकारी के आधार पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की कोबरा इकाई, झारखंड पुलिस, और अन्य सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने रविवार सुबह 6:30 बजे एक सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जैसे ही सुरक्षा बल जंगल में पहुंचे, नक्सलियों ने उन पर अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने भी तुरंत जवाबी कार्रवाई की और दोनों ओर से भीषण गोलीबारी हुई। कोबरा कमांडो और झारखंड पुलिस की भारी जवाबी फायरिंग के दबाव में नक्सली पीछे हटने लगे और घने जंगल का सहारा लेकर भागने की कोशिश की। इस दौरान जोनल कमांडर अमित हांसदा मुठभेड़ में मारा गया। खबर है कि, फोर्स द्वारा घेरे मुठभेड़ खत्म होने के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया, जिसमें हांसदा का शव बरामद हुआ। उसके पास से एक सेल्फ-लोडिंग राइफल, कारतूस, माओवादी पर्चे, और अन्य सामग्री भी जब्त की गई। कौन था अमित हांसदा? अमित हांसदा उर्फ अपटन भाकपा (माओवादी) का एक प्रमुख जोनल कमांडर था, जो पिछले एक दशक से पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, और खूंटी जिलों में सक्रिय था। वह कई हिंसक वारदातों, सुरक्षा बलों पर हमलों, सड़क निर्माण और सरकारी परियोजनाओं में बाधा डालने, और लेवी वसूली जैसे मामलों में वांछित था। उसकी गतिविधियों ने क्षेत्र में लंबे समय तक तनाव बनाए रखा था। झारखंड सरकार ने उसकी गिरफ्तारी या जानकारी के लिए 10 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की थी। पुलिस के अनुसार, हांसदा का मारा जाना माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि वह संगठन की रणनीति और ऑपरेशंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। उसकी मौत से क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगने की उम्मीद है।

देवतालाब, बनारस और प्रयागराज धार्मिक क्षेत्र का अनूठा त्रिकोण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कहा है कि शिव मंदिर देवतालाब अदभुत है। यहां पांच तत्वों का आभास होता है। ऐसा अद्भुत मंदिर केवल विश्वकर्मा जी ही बना सकते हैं। देवतालाब, बनारस और प्रयागराज महत्वपूर्ण धार्मिक त्रिकोण हैं। देवतालाब आस्था, इतिहास और आनंद का संगम है। यह श्रृंगी ऋषि की तपोभूमि है। ऐसी मान्यता है कि देवतालाब के शिव का दर्शन करने पर ही चारधाम की यात्रा का फल मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को मऊगंज के देवतालाब स्टेडियम में आयोजित विकास कार्यों के लोकार्पण-शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने 241 करोड़ 33 लाख रूपये के विकास कार्यों का लोकार्पण-शिलान्यास कर विभिन्न योजनाओं में हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किये और मऊगंज को विकास की अनेक सौगातें देते हुए घोषणाएं भी कीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्यापूजन कर मऊगंज के संयुक्त जिला कार्यालय भवन का शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि हमारे गांव स्वावलम्बन की अद्भुत मिसाल हैं। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में स्वदेशी को अपनाते हुए आत्मनिर्भरता और स्वावलम्बन के लिए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूरा देश एकजुट है। हमारी इस सामर्थ्य के परिणामस्वरूप ही देश की कीर्ति गाथा सम्पूर्ण विश्व में गूंज रही है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का कथन की "21वीं सदी भारत की होगी" साकार हो रहा है। गर्व का विषय है कि स्वामी विवेकानंद अर्थात श्रद्धेय नरेन्द्र नाथ दत्त की भावना को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने चरितार्थ किया है। देश के गरीब, युवा, अन्नदात और महिलाओं का कल्याण तथा विकास तपोनिष्ट प्रधानमंत्री  मोदी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सौभाग्य का विषय है कि प्रधानमंत्री  मोदी ने इसी माह प्रदेश आगमन के लिए स्वीकृति प्रदान की है। राज्य सरकार ने प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में विकास और जनकल्याण के लिए कभी भी संसाधनों की कमी नहीं होने दी, इसी का परिणाम है कि प्रदेश में चहुंओर विकास का परचम लहरा रहा है। जबकि अन्य दलों की सरकारें विकास के लिए सदैव संसाधनों के अभाव का बहाना बनाती रहीं। विश्व की सभी महत्वपूर्ण नीतियों के निर्धारण में भारत है केंद्र बिंदु मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रयागराज और काशी विश्वनाथ के बीच बसा यह स्थान देवताओं की अभिरूचि की अभिव्यक्ति है। उनके स्वयं के लिए भी देवतालाब आगमन सदैव सुखद और भाग्यशाली रहा है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति ने विश्व को मानवता का विचार देते हुए जीवन जीने का सही मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में भी प्रधानमंत्री  मोदी की प्रभावशीलता के परिणाम स्वरूप विश्व की सभी महत्वपूर्ण नीतियों के निर्धारण में भारत केंद्र बिंदु बना हुआ है। यह हम सबके लिए गर्व-गौरव और स्वाभिमान का विषय है कि अमेरिका हो या दुनिया का कोई भी अन्य बड़ा देश, सभी प्रधानमंत्री  मोदी की स्वीकार्यता के लिए उत्सुक हैं। खेत में किसान और सीमा पर जवान का सम्मान हमारी सरकार की प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खेत में किसान और सीमा पर जवान दोनों का सम्मान हमारी सरकार के लिए सर्वोपरि है। किसान सम्मान निधि तथा अन्य प्रोत्साहन गतिविधियों के माध्यम से राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए निरंतर प्रयत्नशील है। पर्याप्त सिंचाई और बिजली की उपलब्धता प्रदेश के सभी क्षेत्रों में सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में हनुमना उद्वहन सिंचाई परियोजना मंजूर की गई है। जिससे रीवा, सीधी, सिंगरौली और मऊगंज जिलों की एक लाख 40 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। रीवा के सोलर प्लांट की बिजली से दिल्ली की मेट्रो रेल दौड़ रही है। मऊगंज के घुरेहटा में बाबा रामदेव के पतंजलि संस्थान द्वारा एक हजार करोड़ रुपए की लागत से कृषि पर आधारित उद्योगों का विकास किया जा रहा है। इससे लाखों किसान लाभान्वित होंगे। उज्ज्वला गैस योजना से 64 हजार से अधिक गैस के कनेक्शन दिए गए हैं। मऊगंज में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में 44 हजार गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्के आवास मिले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली बहनों के खाते में जारी की जा रही राशि दीपावली के बाद से 1500 रुपए प्रतिमाह की जाएगी, जिसे वर्ष 2028 तक प्रतिमाह 3 हजार रुपए किया जायेगा। मऊगंज को दी अनेक सौगातें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मऊगंज जिले और देवतालाब विधानसभा क्षेत्र को अनेक सौगातें दीं। मुख्यमंत्री ने देवतालाब शिव मंदिर में शिवलोक के निर्माण और नईगढ़ी एवं देवतालाब में तहसील भवन निर्माण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवतालाब के अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन किया जायेगा। देवतालाब के शासकीय महाविद्यालय में ऑडिटोरियम और अतिरिक्त कक्षों का निर्माण किया जाएगा। अनुसूचित जाति और जनजाति विद्यार्थियों के लिए दो छात्रावास भवन बनाए जाएंगे। बहुती जल प्रपात को पर्यटन विकास निगम के माध्यम से विकसित किया जायेगा। अष्टभुजी माता मंदिर में सौंदर्यीकरण और जनजाति अंचल में टीपा बदोर से गढ़वा रोड तक 11 किलोमीटर की सड़क बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में बनारस से आये लोक कलाकारों द्वारा दी गई सांगीतिक प्रस्तुति की सराहना की और लोक कलाकारों को 25 हजार रुपए प्रदान करने की घोषणा की। लोक नृत्य प्रस्तुत करने वाले दल के प्रत्येक सदस्य को 5-5 हजार रूपए और स्वागत गीत गाने वाली लोक गायिका राखी द्विवेदी को 50 हजार रूपए देने की घोषणा की। उप मुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश ने 2 साल से कम समय में जो विकास किया है वह ऐतिहासिक है। उन्होंने विकास योजनाओं के लिए धन की कोई कमी नहीं आने दी। आज मऊगंज को 241 करोड़ रुपए की सौगात मिली है। क्षेत्र में सड़क, नहर और माइक्रो इरिगेशन परियोजना से विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने हनुमना उद्वहन सिंचाई परियोजना के लिए 6 हजार करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। इससे मऊगंज जिले के हर खेत में पानी पहुंचेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीवा में इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव और पर्यटन कान्क्लेव का आयोजन कर पूरे विंध्य में विकास के नए द्वार खोले हैं। प्रारंभ में विधायक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष  गिरीश गौतम ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं अतिथियों का स्वागत किया और क्षेत्र के विकास के लिये विभिन्न प्रस्ताव रखे। कार्यक्रम में जिले के प्रभारी और पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  लखन पटेल, सांसद  जनार्दन मिश्र और विधायक मऊगंज  प्रदीप पटेल, विधायक त्योंथर  सिद्धार्थ तिवारी, विधायक … Read more

सांसदों में टकराव: रूडी ने निशिकांत दुबे पर साधा निशाना, जताई नाराजगी

नई दिल्ली भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी ने साथी सांसद निशिकांत दुबे के ऊपर बड़ा हमला किया है। उन्होंने निशिकांत दुबे को अहंकारी बताया है। इतना ही नहीं, राजीव प्रताप रूडी ने यहां तक कहा कि संसद के अंदर सरकार से इतर निशिकांत दुबे खुद में सरकार हैं। लेकिन मैं उनकी सरकार का हिस्सा नहीं हूं। मैं इंडिपेंडेंट हूं। राजीव प्रताप रूडी ने यह बातें कही हैं। रूडी से दिल्ली कांस्टीट्यूशन क्लब चुनाव को लेकर सवाल पूछे गए थे। सवाल के जवाब में भाजपा सांसद ने कहा कि निशिकांत दुबे अकेले दम पर ही संसद चलाना चाहते हैं। गौरतलब है कि दिल्ली कांस्टीट्यूशन क्लब चुनाव में निशिकांत दुबे रूडी के सामने खड़े भाजपा के ही संजीव बालियान का प्रचार कर रहे थे। राजीव प्रताप रूडी से दिल्ली कांस्टीट्यूशन क्लब के चुनाव को लेकर सवाल पूछा जा रहा था। इसमें उनसे पूछा गया कि इस चुनाव में उनकी पार्टी ही उनके खिलाफ थी। आगे पूछा गया कि क्या ऐसा भी था कि गृहमंत्री अमित शाह ने उनके खिलाफ प्रचार किया? इसके जवाब में राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि यह गलत सूचना एक व्यक्ति द्वारा फैलाई गई, जो सोचते हैं कि वह बतौर सांसद संसद को नियंत्रित करते हैं। वह संसद में ऐसे ही शो चलाते हैं। इन्हीं शख्स से गृहमंत्री का नाम इस मामले में उछाला था। इस पर इंटरव्यू करने वाला रूडी से पूछता है कि क्या आप निशिकांत दुबे की बात कर रहे हैं। इस पर रूडी कहते हैं कि आपको कैसे पता कि मैं दुबे की बात कर रहा हूं? फिर आगे वह कहते हैं कि मुझे लगता है आप सही हैं। राजीव प्रताप रूडी आगे कहते हैं कि कभी-कभी कुछ लोग अहंकारी हो जाते हैं। फिर पूछा जाता है कि वह एक साथी सांसद हैं और आपकी ही पार्टी के हैं। इस पर रूडी कहते हैं कि वह संसद में शो चलाते हैं। वह इस बात का दावा करते हैं। उन्होंने ही तय किया था कि मुझे दिल्ली कांस्टीट्यूशन क्लब का चुनाव नहीं जीतना चाहिए। इसके आगे रूडी से पूछा जाता है कि आखिर निशिकांत दुबे को आपसे प्रॉब्लम क्या है? इसके जवाब में भाजपा सांसद कहते हैं कि उनकी समस्या है कि वह शो चलाना चाहते हैं। सरकार से इतर वह खुद में एक सरकार हैं और मैं उनकी इस सरकार का हिस्सा नहीं हूं। रूडी ने आगे कहा कि दिल्ली कांस्टीट्यूशन क्लब चुनाव में उन्हें अमित शाह से लेकर जेपी नड्डा का पूरा समर्थन हासिल था। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ उम्मीदवार खड़ा करके गलत तरीके से विवाद पैदा करने की कोशिश की। इसके पीछे निशिकांत दुबे ही थे।  

डॉक्टर भी चौंके: गाय की सर्जरी में पेट से 28 किलो प्लास्टिक और 41 कीलें बाहर निकलीं

ऊना हिमाचल प्रदेश में हैरान कर देने वाली एक घटना सामने आई है। डॉक्टरों ने सर्जरी करने के बाद एक गर्भवती गाय के पेट से 28 किलो प्लास्टिक, 41 कीलें, कपड़े और रस्सियां निकालीं। गाय ने पिछले चार-पांच दिनों से खाना-पीना बंद कर दिया था। हिमाचल प्रदेश के ऊना में एक सरकारी पशु चिकित्सालय के डॉक्टरों ने एक गर्भवती गाय के पेट से 28 किलो प्लास्टिक और 41 धातु की कीलें समेत अन्य चीजें निकाली हैं। यह जटिल सर्जरी शनिवार को बरनोह स्थित क्षेत्रीय पशु चिकित्सालय में अस्पताल प्रभारी डॉ. निशांत रनौत के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक टीम द्वारा की गई। गाय के पेट से निकली इतनी सारी चीजें देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गए। डॉ. रनौत ने कहा कि सर्जरी के बाद गाय के स्वास्थ्य में सुधार सुनिश्चित करने के लिए वेटनरी डॉक्टर सात दिनों तक उसकी निगरानी करेंगे। गर्भवती गाय को कलरुही निवासी विपिन कुमार और अन्य स्थानीय लोग अस्पताल लाए थे। डॉ. रानौत ने बताया कि गाय ने पिछले चार-पांच दिनों से खाना-पीना बंद कर दिया था। शुरुआती जांच के दौरान डॉक्टरों को उसके पेट में अप्राकृतिक वस्तुएं होने का संदेह हुआ। कई जांचें की गईं और सर्जरी करने का फैसला किया गया। उन्होंने बताया कि गाय के पेट से 28 किलो प्लास्टिक, कपड़े, रस्सियां और 41 कीलों समेत धातु के कई टुकड़े निकाले गए। उन्होंने कहा कि अब तक इस पशु चिकित्सालय में बड़े डायाफ्रामिक हर्निया जैसी 53 जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं। यहां हर प्रकार की पशु सर्जरी, रक्त जांच और अल्ट्रासाउंड जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह अस्पताल बड़े पशुओं के उपचार के लिए क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। ऊना स्थित पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. वीरेंद्र पटियाल ने इस सफल ऑपरेशन के लिए डॉक्टरों की टीम को बधाई दी। साथ ही लोगों से प्लास्टिक कचरा, धातु की कीलें और अन्य सामग्री खुले में न फेंकने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोगों को कचरे का उचित निपटान करना चाहिए ताकि पशुओं और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।