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आर्थिक तंगी में विवेक अग्निहोत्री, बोले- फिल्म प्रमोशन के लिए पैसों का लिया कर्ज

नई दिल्ली  डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री हमेशा लीक से हटकर सब्जेक्ट पर फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं। फिर चाहे वो उनकी 'द कश्मीर फाइल्स', 'द ताशकंद फाइल्स' हो फिर 'द वैक्सीन वॉर' हो। इन सभी फिल्मों को लेकर काफी विवाद देखने को मिला है। इन दिनों विवेक अपनी हालिया रिलीज फिल्म 'द बंगाल फाइल्स' को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं। ये फिल्म 5 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। रिलीज के पहले से ही इसको लेकर काफी विवाद हुआ। ऐसे में अब विवेक ने खुलासा किया है कि वो आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। यही नहीं, फिल्म के प्रचार के लिए भी उन्हें दिल्ली जाने के लिए पैसे उधार लेने पड़े। विवेक अग्निहोत्री ने आर्थिक तंगी स्वीकार की विवेक अग्निहोत्री ने Galatta Plus को अपना इंटरव्यू दिया। इस दौरान उन्होंने बताया कि 'द कश्मीर फाइल्स' से उन्होंने जो भी पैसा कमाया, वह 'द बंगाल फाइल्स' बनाने में लगा दिया। विवेक ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि इसके बाद मेरे साथ क्या होगा। समस्या यह है कि हमारी महत्वाकांक्षा कुछ ऐसा बनाने की है, जिसकी कीमत 100 करोड़ रुपये हो, लेकिन हमारे पास बहुत कम पैसा है, इसलिए हमें हर पैसे का ध्यान रखना होगा और चीजों को तेजी से करना होगा ताकि हम कम दिनों में शूटिंग पूरी कर सकें।' आर्थिक समस्याएं आज भी जारी हैं विवेक ने आगे कहा कि जब से उन्होंने अपनी फिल्मों के माध्यम से सच बताना शुरू किया है, तब से वह संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने 'बुद्धा इन ए ट्रैफिक जाम', 'द ताशकंद फाइल्स' और 'द कश्मीर फाइल्स' के साथ चुनौतियों का सामना करने को याद करते हुए कहा कि आर्थिक समस्याएं आज भी जारी हैं। विवेक ने बताया कि हाल ही में वह इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि दिल्ली जाकर 'द बंगाल फाइल्स' का प्रचार करने के लिए भी कैसे पैसे उधार लिए जाएं। बनेगा 'द बंगाल फाइल्स' का सीक्वल विवेक ने बताया कि 'द बंगाल फाइल्स' फिल्म का सीक्वल इसके बॉक्स ऑफिस परफॉर्मेंस पर निर्भर करता है, लेकिन उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर यह 'थोड़ी कमाई' भी करती है, तो भी वह इसके दूसरे भाग पर काम करेंगे। 'द बंगाल फाइल्स' बॉक्स ऑफिस 5 सितंबर को विवेक अग्निहोत्री की 'द बंगाल फाइल्स' रिलीज हुई है। इसमें मिथुन चक्रवर्ती, पल्लवी जोशी, अनुपम खेर जैसे कलाकार लीड रोल में हैं। ओपनिंग डे पर 'द बंगाल फाइल्स' ने 1.75 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था। वहीं, Sacnilk की अर्ली रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को 'द बंगाल फाइल्स' ने 2.15 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर लिया है। इस तरह इंडियन बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का अभी तक का कुल कलेक्शन 3.9 करोड़ रुपये हो गया है।

वैज्ञानिकों का दावा: रूस की कैंसर वैक्सीन ने सभी ट्रायल में सफलता दर्ज की

रूस  रूस ने कैंसर के खिलाफ लड़ाई में एक नई सफलता हासिल की है. वहां की फेडरल मेडिकल एंड बायोलॉजिकल एजेंसी (FMBA) FMBA ने कैंसर की वैक्सीन तैयार की है. FMBD प्रमुख वेरोनिका स्क्वोर्त्सोवा ने कहा कि रूसी एंटरोमिक्स कैंसर वैक्सीन अब इस्तेमाल के लिए तैयार है. mRNA-बेस्ड इस वैक्सीन ने सभी प्रीक्लिनिकल टेस्ट को सफलतापूर्वक पार कर लिया है जिससे इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता साबित हो गई है. इस टीके का प्रारंभिक लक्ष्य कोलोरेक्टल कैंसर (कोलन कैंसर) होगा.  वैक्सीन ने पार किए सभी ट्रायल्स रिपोर्ट के अनुसार, रूस के कैंसर वैक्सीन ने शानदार प्रदर्शन किया है और FMBA की प्रमुख वेरोनिका स्क्वोर्त्सोवा ने ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम (EEF) में इसकी घोषणा की है.  वैज्ञानिकों को अब अप्रूवल का इंतजार स्कवोर्त्सोवा ने कहा, 'यह शोध कई वर्षों तक चला जिसमें से पिछले तीन साल सिर्फ मैंडेटरी प्रीक्लिनिकल स्टडीज को ही समर्पित थे. वैक्सीन अब इस्तेमाल के लिए तैयार है. हम आधिकारिक स्वीकृति की प्रतीक्षा कर रहे हैं.' उन्होंने कहा कि प्रीक्लिनिकल ट्रायल्स टीके की सुरक्षा, बार-बार इस्तेमाल के बावजूद इसकी प्रभावशीलता की पुष्टि करते हैं. शोधकर्ताओं ने इस दौरान ट्यूमर के आकार में कमी और ट्यूमर के विकास में कमी देखी. इसके अलावा अध्ययनों ने टीके के कारण मरीज की जीवित रहने की दर में वृद्धि का भी संकेत दिया. कई और प्रकार के कैंसर के टीकों पर भी काम जारी इस टीके का शुरुआती टार्गेट कोलोरेक्टल कैंसर होगा. इसके अलावा ग्लियोब्लास्टोमा (ब्रेन कैंसर) और विशिष्ट प्रकार के मेलेनोमा जिनमें ऑक्यूलर मेलेनोमा (एक प्रकार का आंख का कैंसर) के लिए टीके विकसित करने में उम्मीद बांधने वाली प्रगति हुई है जो वर्तमान में अपनी एंडवांस स्टेज पर हैं.

जापान के PM का बड़ा फैसला: पार्टी टूटने से रोकने के लिए छोड़ा पद

टोक्यो  जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इशिबा ने सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) में फूट से बचने के लिए यह कदम उठाया। जापानी मीडिया NHK ने इसकी पुष्टि की है। दरअसल, इशिबा की गठबंधन सरकार जुलाई में हुए ऊपरी सदन (हाउस ऑफ काउंसलर्स) के चुनाव में हार गई थी। इसके लिए इशिबा ने हाल ही में माफी मांगी थी और कहा था कि वह इस्तीफे पर विचार करेंगे। गौरतलब है कि चुनावी हार के बाद LDP में 'इशिबा को हटाओ' आंदोलन जोर पकड़ गया था। पार्टी के कुछ नेताओं और सांसदों ने उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद से पार्टी के भीतर विरोध और तेज हो गया था। बता दें कि ऊपरी सदन के चुनाव परिणामों ने शिगेरू इशिबा की पार्टी पर उनकी पकड़ को कमजोर कर दिया था। इसके बावजूद उन्होंने कहा था कि वह अपने पद पर बने रहेंगे। उस समय जापान और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर बातचीत चल रही थी। वहीं, अमेरिका ने जापान पर टैरिफ को 25 से घटाकर 15 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था। गौरतलब है कि पिछले साल इशिबा की पार्टी का निचले सदन में चुनावी प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। यह पार्टी का 15 साल में सबसे खराब प्रदर्शन था। इसके बाद जुलाई में ऊपरी सदन के चुनाव हुए, जहां पार्टी को एक बार फिर खराब प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। तब इशिबा ने कहा था कि अभी अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण चर्चा चल रही है। ऐसे में इस चर्चा को बाधित करना बड़ी भूल हो सकती है।  

जब पीएम मोदी ने निर्मला सीतारमण को फोन कर जीएसटी पर सलाह दी, पढ़िए क्या हुआ आगे

नई दिल्ली  जीएसटी में व्यापक सुधार रातों-रात नहीं हुआ, बल्कि इसकी शुरुआत माल एवं सेवा कर परिषद की पिछले साल दिसंबर में जैसलमेर में हुई बैठक से पहले ही हो गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को फोन कर जीएसटी को व्यवसायों के लिए सुविधाजनक बनाने और दरों को युक्तिसंगत बनाने को कहा था, जिसके बाद इस पर काम तेजी से आगे बढ़ा। यह बात स्वयं सीतारमण ने बताई है। इसके चलते बेहद सरल जीएसटी प्रणाली का रास्ता साफ हुआ जिसमें कर की दरें कम हैं। इससे एक तरफ जहां कंपनियों के लिए पालन का बोझ कम हुआ है, वहीं रोजमर्रा के इस्तेमाल के समेत लगभग 400 वस्तुओं पर कर दरें कम हुई हैं। निर्मला सीतारमण ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘वास्तव में जीएसटी में व्यापक सुधारों का काम पहले ही शुरू हो चुका था। राजस्थान के जैसलमेर में हुई पिछली जीएसटी परिषद की बैठक से पहले ही प्रधानमंत्री ने मुझे फोन किया था। उन्होंने कहा, ‘एक बार आप जीएसटी को देख लो, व्यवसायों के लिए सुविधाजनक बनाओ और दरों पर इतने सारे भ्रम की स्थिति क्यों है? मुझे लगता है कि 9 महीने पहले हुई जैसलमेर बैठक से पहले की बात है।’ उन्होंने कहा, ‘फिर बजट के दौरान जब हम आयकर उपायों पर चर्चा कर रहे थे, तो उन्होंने मुझे याद दिलाया कि आप जीएसटी के ऊपर काम कर रही हैं न। यह एक चीज थी।’ पीएम ने फोन पर क्या कहा सीतारमण ने कहा, ‘दूसरा, मंत्री समूह डेढ़ साल से काम कर रहे थे। मैं उनमें से प्रत्येक की सराहना करती हूं कि उन्होंने रिपोर्ट तैयार करने के लिए बहुत मेहनत की और उनके सुझाव सामने आए।’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की बात सुनने के बाद मैंने यह फैसला लिया कि अब समय आ गया कि हम GST के सभी पहलुओं की गहन समीक्षा करें। न केवल दरों की, न केवल स्लैब की संख्या की, बल्कि इस दृष्टिकोण से भी देखें कि एक व्यवसाय, लघु या मझोले व्यवसाय के लिए यह कितना और बेहतर होगा।’ वित्त मंत्री ने कहा कि हमने इन सब बातों पर गौर किया। वस्तुओं के वर्गीकरण को देखा जिससे काफी भ्रम पैदा हो रहा था। स्वभाविक रूप से दर पर भी गौर किया। 1 फरवरी, 2025 से लेकर लगभग 15 मई तक हम इसकी अध्ययन समीक्षा आदि का काम करते रहे।’ वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, ‘मई के मध्य में मैं प्रधानमंत्री के पास गई। उन्हें जानकारी दी और बताया कि हम कदम उठाने के करीब हैं। यह एक प्रस्ताव का रूप ले सकता है और उनसे समय देने का अनुरोध किया। उसके बाद उन्होंने कहा कि आप देखिए इसे कैसे जीएसटी परिषद में ले जा सकती हैं। फिर मैं टीम के साथ बैठी और तय किया कि यह केंद्र का प्रस्ताव होगा, जो जीओएम को भेजा जाएगा क्योंकि जीओएम में राज्यों के मंत्री हैं। मैं वहां नहीं हूं। वास्तव में हम चाहते थे कि यह स्पष्ट हो जाए कि हम जीओएम की ओर से किए गए सभी कार्यों का सम्मान करते हैं। लेकिन यहां एक प्रस्ताव विशेष रूप से केंद्र की ओर से आ रहा है, जो परिषद में एक-तिहाई भागीदार है।’ GST को लेकर किस तरह की चर्चा सीतारमण ने कहा, ‘हमने मंत्री समूहों को प्रस्ताव दिया और मंत्री समूहों ने उस पर विचार करना शुरू कर दिया। इस बीच और उससे भी पहले जैसलमेर में वित्त राज्यमंत्री को क्षतिपूर्ति उपकर पर गठित मंत्री समूह का चेयरमैन बनाया गया था। वह उस पर विचार कर रहे थे। लेकिन वहां भी क्षतिपूर्ति उपकर के बाद, अगर वह उसे समाप्त करने का फैसला लेते हैं, तो उन मदों का क्या होगा जो क्षतिपूर्ति उपकर के अंतर्गत आती हैं? अब वे कहां जाएंगी? यह दरों को युक्तिसंगत बनाने का मामला है। इसलिए मंत्रिसमूह ने यह निर्णय लिया कि उपकर और उसे समाप्त करने के संबंध में, उन्हें हर नियम व शर्तों पर काम करना होगा। इसके अलावा, दरें तय करने के लिए गठित मंत्रियों का समूह दरों को युक्तिसंगत बनाने पर विचार कर रहा था। इसलिए मंत्रिसमूह के सदस्यों की सहमति से यह तय किया गया कि उपकर पर काम कर रहे सदस्य भी दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समूह समिति में भाग लेंगे।’ इसके बाद दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समिति (जिसकी शुरुआत वास्तव में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बासवराज सोमप्पा बोम्मई से हुई थी और जिसका नेतृत्व बाद में बिहार के उपमुख्यमंत्री ने किया) ने मंत्रिसमूह के कार्यों के अलावा, केंद्र की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर भी विचार किया। निर्मला सीतारमण के अनुसार, वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि बेहतर होगा कि यह पूरा मामला परिषद में ही रखा जाए, बजाय इसके कि वे इस प्रस्ताव पर आगे विचार करें। फिर यह सब परिषद के पास आया और परिषद ने इसे स्वीकार कर लिया। जीएसटी परिषद ने पिछले सप्ताह बुधवार को माल एवं सेवा कर के 4 स्लैब की जगह 2 स्लैब करने का फैसला किया। अब कर की दरें पांच और 18 प्रतिशत होंगी। विलासिता और सिगरेट जैसी अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की विशेष दर लागू होगी। सिगरेट, तंबाकू और अन्य संबंधित वस्तुओं को छोड़कर नई कर दरें 22 सितंबर से प्रभावी हो जाएंगी। दरों को युक्तिसंगत बनाए जाने के तहत टेलीविजन व एयर कंडीशनर जैसे उपभोक्ता उत्पादों के अलावा खानपान और रोजमर्रा के कई सामान समेत करीब 400 वस्तुओं पर दरें कम की गई हैं। सीतारमण ने कहा कि ऐतिहासिक जीएसटी सुधार लोगों के लिए सुधार है।  

आंखों में आंसू और लफ्जों में दर्द… हार के बाद लवलीना का फूटा दर्द

नई दिल्ली  ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप के पहले दौर से बाहर होने के बाद ट्रेनिंग के कम अवसरों पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें हमेशा वह ट्रेनिंग नहीं मिलती जो उन्हें वास्तव में चाहिए। एक साल से अधिक समय बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में वापसी करने वाली टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता लवलीना शनिवार को 75 किग्रा वर्ग के राउंड ऑफ 16 मुकाबले में तुर्की की बुसरा इस्लिदार के खिलाफ 0-5 की हार के दौरान लय में नहीं दिखी। लवलीना ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘एक साल बाद मैंने अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। मैं अपने पहले ही मुकाबले में हार गई… इससे पीड़ा पहुंचती है। मुझे खेद है कि मैं इस बार ऐसा नहीं कर पाई। लेकिन सभी जानते हैं – मैं कभी भी किसी और चीज के लिए नहीं लड़ती, सिर्फ अपनी ट्रेनिंग के लिए। मैं कभी विलासिता की चीजें नहीं मांगती। मैं सिर्फ अच्छी ट्रेनिंग मांगती हूं।’’ इस 27 वर्षीय भारतीय मुक्केबाज ने पेरिस ओलंपिक और उसके बाद के मुकाबलों के लिए तैयारी के दौरान कम अनुभव मिलने पर अफसोस जताया और टोक्यो खेलों से पहले मिली सहयोग प्रणाली से तुलना की। उन्होंने कहा, ‘‘टोक्यो ओलंपिक से पहले हमारे पास अच्छे अंतरराष्ट्रीय शिविर थे। मैं ट्रेनिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय स्परिंग जोड़ीदार के लिए अनुरोध करती थी लेकिन पेरिस ओलंपिक से पहले मुझे बहुत कम प्रतियोगिताएं और बहुत कम अंतरराष्ट्रीय शिविर का मौका मिला।’’ लवलीना ने कहा, ‘‘अच्छे जोड़ीदार के बिना मैं खुद को कैसे बेहतर बना सकती हूं? पेरिस ओलंपिक में भी मैं अकेली थी। मुझे खुद को बार-बार साबित करना पड़ता है। और सभी जानते हैं कि खेल में मानसिक शक्ति उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी शारीरिक शक्ति।’’ उन्होंने कहा, ‘‘फिर भी अपने देश के लिए सब कुछ देने के बाद भी मुझे हमेशा वह ट्रेनिंग या कोच नहीं मिलता जो मुझे सच में चाहिए। मैं हर लड़ाई में अकेले ही मुश्किलों का सामना करती हूं। मुझे बताओ… क्या यह सही है कि मैं हमेशा अपना सिर झुकाए रखूं, सब कुछ होने के बावजूद चुपचाप ट्रेनिंग करती रहूं?’’ लवलीना ने हालांकि स्पष्ट किया कि वह मौजूदा कोच की आलोचना नहीं कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं मौजूदा कोच और टीम के सदस्यों को दोष नहीं दे रही। उन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया है और मेरी मदद करने की कोशिश की है। लेकिन हां… कुछ नया सीखने में हमेशा थोड़ा और समय लगता है।’’ इस साल लवलीना ने अनुरोध किया था कि राष्ट्रीय शिविर में उनके निजी कोच को शामिल किया जाए और यूरोप में ट्रेनिंग का मौका दिया जाए लेकिन दोनों अनुरोध खारिज कर दिए गए।

CM सैनी का संदेश: आपदा में राजनीति नहीं, सेवा में दिखे पक्ष-विपक्ष और जनता की एकजुटता

हरियाणा  मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जलभराव की आपदा में पक्ष, विपक्ष और आमजन को मिलकर धैर्य के साथ सेवा करने की जरूरत है, ताकि सभी मिलकर इस आपदा से निजात पा सकें। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे पानी कम हो रहा है और समस्याओं भी कम हो रही हैं। पहाड़ों से आए ज्यादा पानी से प्रदेश के करीब 3000 गांव प्रभावित हुए हैं। इन गांवों में फसल और अन्य नुकसान की भरपाई के लिए प्रदेश सरकार ने ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला हुआ है, जहां पर अब तक 1,69,738 किसानों ने 9,96,701 एकड़ फसल के खराबे का आवेदन किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शनिवार को शाहाबाद रेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इससे पहले मुख्यमंत्री ने जलभराव से प्रभावित गांवों के जन प्रतिनिधियों से बातचीत की और एक एक गांव की स्थिति, नुकसान के बारे में बारीकी से पूछा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मार्कण्डेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना की और साथ ही जलभराव प्रभावित क्षेत्र से शिफ्ट किए हुए नागरिकों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को जाना और आश्वासन दिया कि प्रदेश सरकार नागरिकों के साथ हर स्थिति में मदद के लिए तैयार है।  मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र से ज्यादा पानी आने की वजह से प्रदेश के गांवों जलभराव से प्रभावित हुए हैं। पानी ज्यादा बह रहा है। जिन लोगों के घर तक पानी पहुंचा है, उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है। उनके लिए रहने, खाने-पीने और अन्य सुविधाएं पहुंचाई गई है। इसके अलावा पशुओं के चारे का भी प्रबंध किया जा रहा है। वर्ष 2023 में भी प्रदेश के अंदर ऐसी स्थिति पैदा हुई थी। प्रदेश में अधिकारी व्यवस्था बनाने के लिए लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने आमजन के खराबी की भरपाई के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला गया है, जिस पर आमजन रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। पानी धीरे-धीरे कम होगा और प्रदेश की स्थिति नॉर्मल होगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि सभी नहर, नदी, नालों और बाढ़ राहत के लिए बनाई गई व्यवस्थाओं की साफ सफाई की जाती है। पहाड़ों से पानी आने के कारण इस बार स्थिति गड़बड़ा गई है। ऐसी आपदा की स्थिति में विपक्ष का राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस स्थिति में विपक्ष ने सरकार को सुझाव और सहयोग देना चाहिए। उन्होंने जनता से आग्रह किया कि प्रदेश के नागरिकों को जलभराव आपदा में सहयोग करे।   मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मारकंडा को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि मारकंडा में 25000 क्यूसिक पानी की क्षमता है। इस बार लगभग 40,000 क्यूसिक पानी पहुंचा है, जो ओवरफ्लो होकर खेतों और आसपास के क्षेत्र में जल भराव की स्थिति को पैदा कर रहा है।  मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा स्वयं उत्तरी भारत में जल प्रभावित प्रदेशों की निगरानी रखे हुए हैं। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर को लेकर केंद्र से विशेष निर्देश दिए गए हैं। पंजाब प्रदेश में हरियाणा से ज्यादा जल का प्रभाव हुआ है। केंद्र की तरफ से हरियाणा को पंजाब की मदद करने में के लिए आदेश प्राप्त हुए हैं। इस पर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पंजाब की अलग-अलग जगहों पर सहयोग पहुंचा जा रहा है। हरियाणा की तरफ से पंजाब में खाने, पीने और पशुओं के लिए चारा भेजा जा रहा है।

क्या गाजा युद्ध जल्द खत्म होगा? जानें इजरायल की बंधक रिहाई की मांग

गाजा इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने गाजा युद्ध को लेकर रविवार को यरुशलम में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि गाजा में चल रहा युद्ध तब समाप्त हो सकता है, जब बंधकों को रिहा कर दिया जाए। साथ ही, फिलिस्तीनी उग्रवादी समूह हमास अपने हथियार डाल दे। यह बयान हमास की ओर से अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग को दोहराए जाने के एक दिन बाद आया है, जिसमें उसने कहा था कि वह सभी बंधकों को रिहा कर देगा, बशर्ते इजरायल युद्ध समाप्त करने और गाजा शहर से अपनी सेना वापस बुलाने पर सहमत हो। गिदोन सार का यह बयान इजरायल-हमास संघर्ष के बीच शांति स्थापना की दिशा में अहम कदम हो सकता है, क्योंकि यह युद्ध को समाप्त करने की शर्तों को स्पष्ट करता है। हालांकि, यह बयान दोनों पक्षों की परस्पर विरोधी मांगों को भी उजागर करता है, क्योंकि हमास की शर्तें इजरायल की मांगों से पूरी तरह भिन्न हैं। यह बयान क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को तेज कर सकता है, क्योंकि इससे मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयासों के लिए नई संभावनाएं खुलती हैं। यह दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास को भी दर्शाता है, जो शांति वार्ता को और जटिल बना सकता है। शहर को खाली करने का निर्देश इस बीच, इजरायल की सेना ने गाजा शहर के फिलिस्तीनियों को निर्देश दिया कि वे शहर को खाली कर दें और दक्षिण स्थित मानवीय क्षेत्र में चले जाएं। इजरायल ने शनिवार को इसी के साथ शहर की बहुमंजिला इमारतों को निशाना बनाया। सहायता समूहों ने चेतावनी दी कि गाजा से बड़े पैमाने पर लोगों को निकालने से मानवीय संकट की स्थिति और विकराल हो सकती है। खाद्य संकट के मद्देनजर दुनिया के अग्रणी संगठन ने शहर को अकालग्रस्त घोषित कर दिया है। अधिकांश परिवार लगभग 2 वर्ष से चल रहे इजराइल-हमास युद्ध के कारण कई बार विस्थापित हो चुके हैं। उनका कहना है कि उनके पास जाने के लिए कोई स्थान नहीं बचा है, क्योंकि इजरायली सेना ने बार-बार उन शिविरों पर बमबारी की है, जिन्हें उसने मानवीय क्षेत्र घोषित किया था।  

ऋतुराज गायकवाड़ की बड़ी पारी और बड़ा दर्द: 184 रन के बावजूद टीम लक्ष्य से दूर

नई दिल्ली   ऋतुराज गायकवाड़ ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने चोट के कारण मिले करीब पांच महीने के ब्रेक का फायदा उठाया और लाल गेंद के क्रिकेट पर काम किया लेकिन इस भारतीय बल्लेबाज का मानना ​​है कि सत्र की शानदार शुरुआत के बावजूद उन्हें खेल के पारंपरिक प्रारूप में अभी लंबा रास्ता तय करना है। सलामी बल्लेबाज ऋतुराज गायकवाड़ को अप्रैल की शुरुआत में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ खेलते हुए कोहनी में चोट लग गई थी, जिसके कारण वह चेन्नई सुपर किंग्स के लिए आईपीएल 2025 में नहीं खेल पाए और फिर एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी से पहले इंग्लैंड लायंस के खिलाफ भारत ए टीम का हिस्सा नहीं बन पाए। उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए यॉर्कशर के साथ काउंटी अनुबंध से भी हटने का फैसला किया। गायकवाड़ ने मध्य क्षेत्र के खिलाफ दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल के पहले दिन पश्चिम क्षेत्र के लिए 184 रन बनाने के बाद कहा, ‘‘मेरे पास तैयारी के लिए अच्छा समय था, विशेषकर भारत ए सीरीज का हिस्सा नहीं होने के बाद और उसके बाद वापस आकर मैंने लाल गेंद के क्रिकेट में अपने खेल पर काम करने का फैसला किया। इसे कुछ समय दिया और मैं अब भी इस पर काम कर रहा हूं, अभी भी लंबा रास्ता तय करना है। ’’ लेकिन उन्होंने अपने खेल में जो भी मेहनत की है, उसका फल उन्हें मिलता दिख रहा है। गायकवाड़ ने चेन्नई में बुची बाबू आमंत्रण टूर्नामेंट में हिमाचल प्रदेश के खिलाफ शतक जड़कर लगातार दूसरा शतक जड़ा। ऋतुराज गायकवाड़ ने की शतकीय पारी के दम पर पश्चिम क्षेत्र ने गुरुवार को दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल के पहले दिन मध्य क्षेत्र के खिलाफ छह विकेट पर 363 रन बनाकर वापसी की।दिन के स्टार गायकवाड़ रहे जिन्होंने पिछले महीने बुची बाबू टूर्नामेंट में हिमाचल प्रदेश के खिलाफ महाराष्ट्र के लिए 133 रन की पारी खेलने के बाद लगातार दूसरा शतक जड़ा। उन्होंने अपनी पारी में 206 गेंद का सामना किया। गायकवाड़ मध्यक्रम में तब बल्लेबाजी के लिए आए जब पश्चिम क्षेत्र की टीम जायसवाल (04 रन) और हार्विक देसाई (01) के विकेट गंवाने के बाद दो विकेट पर 10 रन बनाकर संघर्ष कर रही थी। जायसवाल को तेज गेंदबाज खलील अहमद ने आउट किया जबकि हार्विक ने दीपक चाहर की गेंद पर पहली स्लिप में यश राठौड़ को आसान कैच थमा दिया। गायकवाड़ ने इसके बाद आर्य देसाई के साथ तीसरे विकेट के लिए 90 रन की उपयोगी साझेदारी की और पश्चिम क्षेत्र की टीम को वापसी दिलाने की कोशिश की। गायकवाड़ ने अर्धशतक 85 गेंद में पूरा किया लेकिन दोपहर के सत्र में उन्होंने 131 गेंद में 100 रन पूरे किए और इस तरह दूसरा अर्धशतक केवल 51 गेंद में पूरा हुआ।

तरावड़ी के गोदामों में सीएम फ्लाइंग की रेड, सरकारी गेहूं की लाखों की चोरी पकड़ी गई

करनाल  मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने डीएसपी सुशील कुमार के नेतृत्व में तरावड़ी के खाद्य आपूर्ति विभाग के कई गोदामों में चेकिंग की। इस दौरान कई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही सामने आई। एक गोदाम में गेहूं के करीब 20 हजार से ज्यादा अतिरिक्त बैग मिले, जिनका मौके पर रिकाॅर्ड नहीं मिला। जिसके बाद हड़कंप मच गया। मामला सामने आने के बाद करनाल के डीएफएससी अनिल कुमार ने बताया कि सीएम फ्लाइंग टीम जो अतिरिक्त गेहूं के बैग बता रही है, उनका पूरा रिकाॅर्ड विभाग के पास उपलब्ध है।  यही नहीं गेहूं की पूरी जानकारी हेड क्वार्टर के पास रेगुलर तौर पर भेजी जाती रही है। ये स्टॉक 2020-21 का है। सीएम फ्लाइंग के डीएसपी सुशील कुमार ने बताया कि सूचना मिली थी कि तरावड़ी के अंदर खाद्य आपूर्ति विभाग के गोदामों में 2025-26 में खरीदे गये गेहूं के स्टॉक में नियमों की पालना नहीं की गई। इसके अलावा सरप्लस गेहूं भी पड़ा है। जिसके बाद छापेमारी की गई, इस दौरान कई हैरान करने वाली बातें भी सामने आईं। छापेमारी में विभाग के 4 अधिकारियों की लापरवाही व सरकार को नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया। जिनके खिलाफ केस दर्ज करने के लिए हेड क्वार्टर को लिखा गया है।  जांच में सामने आया कि करीब 6 लाख बैग 2 माह तक खुले में रखे गए, जिन्हें अगस्त में एफसीआई ने उठाने से मना कर दिया था, क्योंकि इनमें नमी 12 की बजाए 14 प्रतिशत पाई गई। इसके अलावा करीब 666 बैग बिल्कुल खराब हो चुके हैं। इसके अलावा 1500 बैग अतिरिक्त मिले है, जो 2020-21 के हैं। इन सबकी जांच के बाद हेड क्वार्टर को केस दर्ज करने के लिए लिखा जा चुका है। वहीं एक गोदाम जो विभाग की सूची में नहीं था, वहां 20 हजार गेहूं के भरे बैग मिले, जो कि पुराने बारदाने में नया गेहूं भरा हुआ था। इसका कोई रिकाॅर्ड नहीं मिला। डीएफएससी अनिल कुमार ने कहा कि जिस 20 हजार बैग गेहूं की बात की जा रही है, वो एफसीआई के पुल से बाहर हो चुका है। ये गेहूं 2020-21 का है, जिसे बैगों में भरकर रखा जा रहा है, इसमें नए व पुराने बैग हो सकते हैं। गेहूं के रिकाॅर्ड की जानकारी खाद्य आपूर्ति विभाग के हेड क्वार्टर के पास है। जल्द गेहूं के स्टॉक का ऑक्शन करवाकर सारा पैसा सरकारी खंजाने में जमा करवा दिया जाएगा।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा- सुमन सखी चैटबॉट नागरिक-केंद्रित सुशासन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम

प्रारंभिक चरण में फोकस मातृ स्वास्थ्य पर अगले चरण में समस्त स्वास्थ्य सेवाओं में होगा विस्तार भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया विज़न के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाओं में नवीनतम तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रदेश में जल्द ही सुमन सखी चैटबॉट सेवा प्रारंभ की जा रही है। सुमन सखी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैटबॉट होगा, जो नागरिकों को गर्भावस्था के दौरान देखभाल, उच्च जोखिम कारकों की जानकारी, तथा महिलाओं से संबंधित सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और सेवाओं की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रदेश में नागरिक-केंद्रित सुशासन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। यह सेवा न केवल योजनाओं की जानकारी और सेवाओं तक त्वरित पहुँच उपलब्ध कराएगी, बल्कि शासन की पारदर्शिता और जनविश्वास को भी मज़बूत करेगी। मिशन डायरेक्टर एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना ने बताया कि सुमन सखी चैटबॉट राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्यप्रदेश द्वारा मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमपीएसईडीसी) के सहयोग से विकसित किया गया है। सुमन सखी चैटबॉट 24×7 उपलब्ध रहेगा और हिंदी भाषा में होगा, ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाएँ भाषा की किसी भी बाधा के बिना इसका लाभ उठा सकें। प्रारंभिक चरण में इसका फोकस मातृ स्वास्थ्य सेवाओं पर होगा और धीरे-धीरे अन्य प्रमुख योजनाएँ भी इसमें शामिल की जाएँगी। नागरिक इसे व्हाट्सएप के माध्यम से उपयोग कर सकेंगे।