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अनोखा गैजेट लॉन्च: Acer का मोबाइल हॉटस्पॉट, साथ में 16 डिवाइस जुड़ेंगी बिना झंझट

नई दिल्ली जाने-माने लैपटॉप ब्रैंड एसर ने भारत में एक खास डिवाइस एसर कनेक्‍ट एम4 5जी वाई-फाई मोबाइल हॉटस्‍पॉट को लॉन्‍च किया है। पहली नजर में यह देखने पर कॉम्‍पैक्‍ट स्‍मार्टफोन या फोन जैसा लगेगा पर है नहीं। इसे आप पॉकेट राउटर की तरह समझ सकते हैं, जिसमें नैनो सिम, ई सिम या वी सिम को लगाया जा सकता है। उसके साथ यह दूसरी डिवाइसेज को बहुत तेजी से इंटरनेट कनेक्‍ट‍िविटी से जोड़ सकता है। दावा कि इस हॉटस्‍पॉट को 135 से ज्‍यादा देशों में इस्‍तेमाल किया जा सकता है। वाईफाई 6 की मदद से यह एकसाथ 16 डिवाइस में इंटरनेट चला सकता है। Acer Connect M4 5G Mobile Wi-Fi Mobile hotspot के भारत में प्राइस इस डिवाइस की कीमत 19 हजार 999 रुपये है और इसे एमेजॉन के अलावा एसर इंडिया के ऑनलाइन व ऑफलाइन स्‍टोर्स से ल‍िया जा सकता है।   Acer Connect M4 के फीचर्स, स्‍पेसिफ‍िकेशंस Acer Connect M4 को इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि इसे टफ कंडीशंस में भी इस्‍तेमाल किया जा सके। यह आईपी68 रेटिंग के साथ आता है और धूल व पानी से होने वाले नुकसान से बचा रहता है। इसमें 3जीबी LPDDR4X रैम दी गई है। साथ में 8GB eMMC स्‍टोरेज मिलता है। इसकी 8000mAh की बैटरी के साथ इस हॉटस्‍पॉट को 28 घंटों तक यूज किया जा सकता है और टाइप-सी पोर्ट के जरिए चार्ज किया जा सकता है। पावर बैंक की तरह भी कर सकते हैं इस्‍तेमाल होने को यह एक मोबाइल हॉटस्‍पॉट डिवाइस है, लेकिन किसी पावर बैंक की तरह भी इस्‍तेमाल में लाई जा सकती है। इसमें WPA3 इन्‍क्र‍िप्‍शन मिलता है। साथ में सिम लॉक और बिल्‍ट-इन वीपीएन भी है, जिससे डेटा की सुरक्षा बनी रहती है। इस डिवाइस में ऑटौमेटिक सॉफ्टवेयर और फर्मवेयर अपडेट आते हैं, जिससे इसे अपडेट रखने का झंझट नहीं रहता। रिपोर्ट के अनुसार, इस डिवाइस को 20 जीबी डेटा पैक के साथ लाया गया है। डेटा की वैलिड‍िटी 6 महीने है। अगर आप कामकाज के सिलस‍िले में देश से बाहर जाते हैं तो यह डिवाइस अपने आप लोकल मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर के साथ कनेक्‍ट हो जाएगा। आपको किसी मैनुअल सेटअप की जरूरत नहीं होगी। सिम के झंझट में नहीं फंसना होगा और किसी तरह की रोमिंग भी नहीं चाहिए होगी, ऐसा एक रिपोर्ट में एसर की तरफ से कहा गया है। इसमें 2.4 इंच का टचस्‍क्रीन डिस्‍प्‍ले मिल जाता है, जिससे आप डिवाइस को ऑपरेट कर पाएंगे। परफॉर्मेंस के लिए इसमें मीडियाटेक का चिपसेट लगाया गया है।

फ्लाईओवर विवाद में नया खुलासा, HC में रिपोर्ट से सामने आया ब्रिज का 119 डिग्री ढलान

भोपाल  हाईकोर्ट में भोपाल के ऐशबाग क्षेत्र स्थित फ्लाईओवर ब्रिज को लेकर महत्वपूर्ण रिपोर्ट पेश की गई। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT) के प्रोफेसर ने जांच रिपोर्ट दाखिल की। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ब्रिज का मोड़ 90 डिग्री नहीं, बल्कि 118 से 119 डिग्री के बीच है। याचिकाकर्ता मेसर्स पुनीत चड्ढा की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि उनकी कंपनी को बिना सुनवाई का अवसर दिए सरकार ने ब्लैकलिस्ट कर दिया। याचिका में कहा गया कि फ्लाईओवर निर्माण का ठेका 2021-22 में कंपनी को मिला था और कार्य सरकारी एजेंसी द्वारा जारी जीएडी (जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग) के आधार पर किया गया। बाद में 2023 और 2024 में जीएडी में संशोधन भी किया गया। गौरतलब है कि ब्रिज में 90 डिग्री का मोड़ होने की खबरें सामने आने के बाद सरकार ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति ने पाया कि मोड़ वाले हिस्से के नीचे से रेलवे ट्रैक गुजरता है और राज्य सरकार तथा रेलवे विभाग के बीच समन्वय की कमी रही। साथ ही, ब्रिज के खंभे भी निर्धारित दूरी पर नहीं लगाए गए थे। हाईकोर्ट ने प्रोफेसर को ब्रिज की तकनीकी जांच का जिम्मा सौंपा था और इसके लिए याचिकाकर्ता को एक लाख रुपये फीस देने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता का दावा सही पाया जाता है तो वह फीस की राशि वसूलने का हकदार होगा। साथ ही, फिलहाल कंपनी के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने रिपोर्ट के आधार पर कंपनी के खिलाफ की गई कार्रवाई को निरस्त करने के लिए समय मांगा। युगलपीठ ने यह आग्रह स्वीकार कर लिया और अगली सुनवाई 17 सितंबर को निर्धारित की है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ कुमार शर्मा और प्रवीण दुबे ने पैरवी की। 

कपड़ा उद्योग में बड़ा निवेश: कोलकाता से आए 14,600 करोड़ के प्रस्ताव, पीएम मित्रा पार्क बनेगा गेम-चेंजर

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को कोलकाता के जे.डब्ल्यू. मैरियट होटल में आयोजित इन्वेस्ट इन एमपी इंटरैक्टिव सेशन में उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन चर्चा की। इस दौरान प्रदेश को 14,600 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले। मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत को भरोसा दिलाया कि मध्यप्रदेश अपार संभावनाओं, स्थिरता और निवेशक-हितैषी माहौल के साथ आदर्श निवेश स्थल है।  सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वीकृत सात पीएम मित्रा पार्कों में पहला भूमिपूजन 17 सितंबर को मध्य प्रदेश के धार जिले में होने जा रहा है। यह पार्क प्रदेश को टेक्सटाइल सेक्टर में वैश्विक पहचान दिलाएगा। 2,158 एकड़ में विकसित होने वाले इस पार्क में लगभग 3 लाख रोजगार अवसर (1 लाख प्रत्यक्ष और 2 लाख अप्रत्यक्ष) पैदा होंगे। इसमें अत्याधुनिक अधोसंरचना, ग्रीन एनर्जी और प्लग-एंड-प्ले यूनिट्स जैसी सुविधाएं निवेशकों को उपलब्ध कराई जाएंगी। मध्य प्रदेश निवेशकों का भरोसेमंद साथी  डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से कहा कि मध्य प्रदेश की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, बेहतर कनेक्टिविटी, विश्वस्तरीय आधारभूत ढांचा और औद्योगिक शांति इसे निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बनाती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादन क्षमता राज्य को विशेष पहचान देती है। पीएम मित्रा पार्क से टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर को नई ऊंचाइयां मिलेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में निवेश केवल व्यावसायिक विस्तार नहीं, बल्कि सतत विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भागीदारी है। प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया और विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में प्रदेश हर संभव योगदान देगा। रुइया ग्रुप  4,000 करोड़ का निवेश करेगा रुइया ग्रुप के सीएमडी पवन कुमार रुइया ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को देश के सबसे शिक्षित और दूरदर्शी नेताओं में से एक बताते हुए कहा कि मध्य प्रदेश आज औद्योगिक प्रगति का नया केंद्र बन रहा है। उन्होंने एलान किया कि रुइया ग्रुप प्रदेश में अपने निवेश का विस्तार करेगा, जिससे रोजगार और कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा। इसी तरह, श्याम मेटालिक्स के चेयरमैन पुष्कर अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश में कृषि, खनन और ऊर्जा क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का नया निवेश करने की घोषणा की। प्रताप ग्रुप के हर्ष अग्रवाल ने कहा कि मध्य प्रदेश की नीतियां और अधोसंरचना इसे देश में सबसे आकर्षक निवेश स्थल बनाती हैं। निवेशक-हितैषी नीतियां और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड इन्वेस्टमेंट प्रमोशन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने सेशन में कहा कि मध्यप्रदेश में 1 लाख एकड़ से अधिक का इंडस्ट्रियल लैंड बैंक, सस्ती बिजली (4.50/यूनिट), मजबूत हवाई और रेल कनेक्टिविटी और सुरक्षित श्रम वातावरण उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि प्रदेश कॉपर, मैंगनीज और डायमंड का सबसे बड़ा उत्पादक है, साथ ही सीमेंट उत्पादन में अग्रणी है। नर्मदापुरम के पास औद्योगिक क्षेत्र को 880 एकड़ तक विस्तारित किया गया है। सरकार ग्रीन इंडस्ट्रीज़ को 100% छूट और एक्सपोर्ट यूनिट्स को 50% प्रोत्साहन जैसी सुविधाएं दे रही है। सांस्कृतिक जुड़ाव और निवेश का नया उत्साह सीएम डॉ. यादव ने कोलकाता की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शहर विवेकानंद, नेताजी सुभाषचंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महापुरुषों की धरती है, जिन्होंने देश को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक और बौद्धिक केंद्र से संवाद करना मध्यप्रदेश में निवेश को नई ऊर्जा और गति देगा। सेशन में मुख्यमंत्री ने 12 से अधिक उद्योगपतियों से अलग-अलग मुलाकात की। कुल 300 से अधिक प्रतिभागियों ने इस संवाद में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में निवेश अवसरों, नीतियों और अधोसंरचना पर आधारित शॉर्ट फिल्म भी प्रदर्शित की गई। पीएम मित्रा पार्क से रोजगार और औद्योगिक प्रगति धार जिले में विकसित हो रहा पीएम मित्रा पार्क 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से स्थापित होगा। इसमें CETP, सोलर प्लांट, महिला कर्मचारियों के लिए आवास, प्लग-एंड-प्ले यूनिट्स, SCADA नियंत्रित यूटिलिटीज़ जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी। यह परियोजना प्रदेश को वैश्विक वस्त्र महाशक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार सिद्ध होगी। 

हाईकोर्ट की सख्ती: इंदौर हॉस्पिटल में चूहा कांड के बाद पेस्ट कंट्रोल कंपनी का एग्रीमेंट होगा खत्म

इंदौर एमवाय अस्पताल में हुए चूहा कांड में जांच में देरी और ठोस कार्रवाई नहीं होने पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ बुधवार को स्वयं संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की। हाईकोर्ट ने राज्य शासन से 15 सितंबर तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।  न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति जे.के. पिल्लई की युगल पीठ ने इस गंभीर मामले को नवजातों के मौलिक अधिकारों और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अस्पताल की सफाई और पेस्ट कंट्रोल की जिम्मेदारी निभा रही निजी कंपनी एजाइल सिक्योरिटी के खिलाफ अभी तक कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, जबकि उसी की लापरवाही के कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ। ऐसे में जनहित याचिका दर्ज होने के बाद, प्रमुख सचिव (लोक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा) की ओर से एजाइल कंपनी को हटाने के निर्देश जारी किए गए। साथ ही पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. बृजेश लाहोटी को पद से हटा दिया गया, जबकि प्रभारी एचओडी डॉ. मनोज जोशी को सस्पेंड कर दिया गया है। स्टेटस रिपोर्ट में हाई कोर्ट ने मांगे ये जवाब     सरकार यह बताए कि मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?     वर्तमान स्थिति क्या है?     इस पूरे प्रकरण में अब तक किन-किन जिम्मेदारों पर क्या-क्या कार्रवाई की गई है? चार सदस्यीय जांच समिति ने सौंपी थी रिपोर्ट 3 सितंबर को गठित चार सदस्यीय जांच समिति ने मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर तरुण राठी को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके आधार पर प्रमुख सचिव संदीप यादव ने एचएलएल इंफ्राटेक सर्विसेज (HITES) को एजाइल सिक्योरिटी का अनुबंध रद्द करने के निर्देश दिए। एजाइल को अस्पताल की सफाई, सुरक्षा और पेस्ट कंट्रोल की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मामले को शुरू से दबाने की कोशिश मामले में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा शुरू से ही तथ्यों को दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने यह दावा किया कि नवजातों की मौत गंभीर बीमारी के कारण हुई है, न कि चूहों के काटने से। बताया गया कि बच्चों के अंग पूरी तरह विकसित नहीं थे। धार निवासी एक दंपती के नवजात की मौत को लेकर भी गलत जानकारी दी गई। तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह और मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर तरुण राठी को भी गलत फीडबैक देकर गुमराह किया गया कि पोस्टमॉर्टम हो गया है और रिपोर्ट में चूहे के काटने का जिक्र नहीं है। इसी आधार पर दोनों अधिकारियों ने मीडिया को गलत जानकारी दी। खुलासे से सामने आया सच मामले की सच्चाई सामने तब आई जब 'दैनिक भास्कर' ने डिजिटल सबूत जुटाकर सीएमओ रूम में वीडियो के जरिए से यह स्पष्ट किया कि नवजात का पोस्टमॉर्टम हुआ ही नहीं था। इसके बाद 6 सितंबर को परिजनों के आने पर पोस्टमॉर्टम कराया गया। सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब परिजन देर रात शव लेकर गांव पहुंचे और पैकिंग खोलने पर देखा कि चूहे उसके एक हाथ की चार उंगलियां पूरी तरह खा चुके थे। एजाइल पर पहले सिर्फ मामूली जुर्माना लगाया शुरुआत में एजाइल सिक्योरिटी पर केवल 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न होने की चेतावनी दी गई। जबकि कंपनी शुरू से ही सवालों के घेरे में थी, इसके बावजूद उसका एमओयू रद्द नहीं किया गया और संवेदनशील जिम्मेदारी के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। छोटे कर्मचारियों पर गिरी गाज, जिम्मेदार एजेंसी बचाई गई पूर्व में डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने दो नर्सिंग ऑफिसरों को सस्पेंड किया था, जबकि नर्सिंग सुपरिटेंडेंट जोसेफ को हटाया गया और छह अन्य को शोकॉज नोटिस जारी किए गए। इन कर्मचारियों में नाराजगी थी कि मुख्य जिम्मेदारी एजाइल की थी, लेकिन उसे बचाते हुए निचले स्तर के स्टाफ को निशाना बनाया गया। इसके बाद डॉ. महेश कछारिया को असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट के रूप में नियुक्त किया गया। मामले में कांग्रेस और जयस शुरू से ही विरोध कर रहे थे और मांग कर रहे थे कि डीन और सुपरिटेंडेंट को सस्पेंड किया जाए और एजाइल कंपनी पर कठोर कार्रवाई हो। सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव ने 11 सितंबर को स्वास्थ्य खराब होने का हवाला देकर 15 दिन की छुट्टी मांगी और बुधवार को उन्हें अवकाश पर भेजते हुए डॉ. बसंत निंगवाल को कार्यवाहक सुपरिटेंडेंट नियुक्त किया गया। हालांकि चर्चाएं हैं कि उन्हें छुट्टी के नाम पर हटाया गया है। इसके साथ ही डॉ. मनोज जोशी (प्रभारी एचओडी, पीडियाट्रिक सर्जरी) को सस्पेंड कर दिया गया है। अब तक हुई नई कार्रवाई     डॉ. बृजेश कुमार लाहोटी को एचओडी, पीडियाट्रिक सर्जरी के पद से हटाया गया।     डॉ. अशोक कुमार लाढा को विभाग का प्रभार सौंपा गया।     डॉ. बसंत निंगवाल को प्रभारी सुपरिटेंडेंट नियुक्त किया गया।     डॉ. सुमित सिंह को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की देखरेख की जिम्मेदारी दी गई।     डॉ. रामू ठाकुर को एचओडी, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग बनाया गया। पेस्ट कंट्रोल पर निगरानी के लिए बनी पांच सदस्यीय समिति इस मामले बुधवार को एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने कॉलेज के अधीन संचालित सभी अस्पतालों और विभागों में पेस्ट कंट्रोल कार्यों की मॉनिटरिंग और समस्याओं के समय-समय पर निराकरण के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति में शामिल सदस्य:     डॉ. शैनल कोठारी     डॉ. राजीव लोहोकारे     डॉ. योगिता दीक्षित     डॉ. प्रियंका कियावत     डॉ. पंकज पाराशर देवास की नवजात की मौत पर परिवार को 5 लाख रु. की सहायता उधर, देवास की नवजात बच्ची (रेहाना की बेटी) की चूहों के कुतरने से हुई मौत के मामले में भी प्रशासन ने आर्थिक सहायता दी है। बुधवार को जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट लोकेश मुजाल्दा अपने कार्यकर्ताओं और मृत नवजात के परिजनों के साथ कलेक्टर शिवम वर्मा से मिले और आर्थिक सहायता की मांग की। उन्होंने बताया कि इससे पहले धार के नवजात के परिवार को 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी गई थी। उसी तर्ज पर देवास की बच्ची के परिवार को भी सहायता दी जाए। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर एडीएम रोशन राय ने सहायता राशि जारी करने की प्रक्रिया पूरी की। परिवार को 2 लाख रु. रेडक्रॉस सोसायटी से और 3 लाख रु. अस्पताल प्रशासन की ओर से चेक के जरिए दिए गए।

औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती पर नियंत्रण, एमपी सरकार ने तय की नई सीमा

 भोपाल  मध्य प्रदेश के सभी औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती के कारण कोई व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए अब एक माह में अधिकतम पांच बार या फिर पांच घंटे ही बिजली कटौती की जा सकेगी। इसको लेकर मध्य प्रदेश विद्युत विनियामक आयोग ने औद्योगिक क्षेत्र और 11 केवी फीडर में बिजली कटौती की संख्या व घंटे के मानक तय किए हैं। इसमें संभाग मुख्यालय, जिला मुख्यालय और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मापदंड हैं। संभाग मुख्यालय और जिला मुख्यालयों में महीने में 25 बार और अधिकतम 15 घंटे तक कटौती तय की गई है। तय मानकों के अनुसार वर्ष 2026-27 तक यह प्रयास किए जा रहे हैं कि बड़े शहरों में उपभोक्ताओं को सालभर में 90 बार ही कटौती की समस्या से रूबरू होना पड़े, वह भी सिर्फ 60 घंटे से ज्यादा नहीं। बिजली कटौती के मानक नए सिरे से तय किए बता दें कि आयोग ने वर्ष 2012 में पहली बार वितरण प्रदर्शन मानक तय किए थे। इसमें वर्ष 2021 में संशोधन किया गया था। अब एक बार फिर आयोग ने बिजली कटौती के मानक नए सिरे से तय कर दिए हैं, जिसका पालन करने के निर्देश बिजली कंपनियों को दिए हैं। बिजली कंपनियों को तय मानकों को पूरा करने के लिए अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की भी अनुशंसा की गई है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि बिजली कंपनियां इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करें, तकनीक और प्रशिक्षित मानव संसाधन का उपयोग करें, ताकि तय मानकों को हासिल किया जा सके। आवश्यकता पड़ने पर पूंजीगत व्यय प्रस्ताव आयोग के पास अनुमोदन के लिए भेजे जाएं। एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए ऐसा रहेगा रोडमैप प्रदेश के एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए आयोग ने तीन साल का रोडमैप तय किया है। इसके मुताबिक वर्ष 2024-25 के लिए अधिकतम बिजली कटौती 120 बार और 90 घंटे तय है। इसे साल 2025-26 तक साल में अधिकतम 90 बार और 60 घंटे तक समिति करने का लक्ष्य दिया गया है। हालांकि बिजली कंपनियों को प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, तूफान या फिर ऐसे कारण जिनके लिए आयोग की अनुमति लेना पड़े और वितरण व्यवस्था फेल हो जाए, में इन निर्धारित मानकों से छूट दी गई है।

कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई: फर्जी रजिस्ट्री मामले में पांच सर्विस प्रोवाइडर के लाइसेंस रद्द

शहडोल शहडोल। संभागीय मुख्यालय के सुहागपुर उप पंजीयन के द्वारा अपनी सेवानिवृत्ति की आखिरी दिन 28 अगस्त को गलत तरीके से की गई रजिस्ट्री की जांच मामले में पांच सर्विस प्रोवाइडर के लाइसेंस निलंबित किए गए। जांच के दौरान 250 से अधिक ऐसी रजिस्ट्री मिली है जो बिना अनुमति या गलत तरीके से कराई गई हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने कार्रवाई की है और अभी मामले की आगे जांच भीचल रही है। 28 अगस्त को ही इस मामले की कलेक्टर की यहां शिकायत की गई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि उप पंजीयक ने पैसे लेकर गलत तरीके से बिना अनुमति रजिस्ट्री की है। उसके बाद कलेक्टर ने एक जांच टीम का गठन किया था और उसकी पहली रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की शुरुआत की गई है।जिले में भू माफियाओं और अवैध रजिस्ट्री कराने वाले सर्विस प्रोवाइडरों पर जिला प्रशासन ने पहली बार कार्रवाई की है। सर्विस प्रोवाइडर्स की मिलीभगत उजागर कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट डॉ. केदार सिंह ने ज़मीन की रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा, प्रतिबंधित भूमि की खरीद-बिक्री और मृत व्यक्तियों की जगह दूसरे लोगों को खड़ा कर रजिस्ट्री कराने जैसे घोटालों में संलिप्त पाए गए ई-पंजीयन सर्विस प्रोवाइडरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई 10 सितंबर को देर शाम को की गई है। जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जिले में राजस्व प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन होने, पावर आफ अटार्नी निरस्त होने, प्रतिबंधित भूमि या मृतक की जमीन बेचने जैसी अवैधानिक रजिस्ट्रियों के गंभीर प्रमाण सामने आए हैं। इन घोटालों में कई बार ग्राम पंचायतों, दलालों और सर्विस प्रोवाइडरों की मिलीभगत भी उजागर हुई है। इन सर्विस प्रोवाइडरों पर कार्रवाई मोहम्मद सैफ अंसारी पर कार्रवाई की गई है। इसके ऊपर आरोप है कि मृतक भोलानाथ अहिरवार की जगह समान शक्ल के व्यक्ति को खड़ा कर दस्तावेज तैयार कराकर रजिस्ट्री कराई है। अभिषेक कुमार गुप्ता ने ग्राम हड़हा, तहसील बुढ़ार की खसरा नंबर 42 से 58 तक की रजिस्ट्री उच्च न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन होने के बावजूद रजिस्ट्री करा दिया। साथ ही, ग्राम बुढ़ार और ग्राम कंचनपुर की जमीनों की रजिस्ट्री कलेक्टर की अनुमति और पावर ऑफ निरस्त होने के बावजूद रजिस्ट्री कराया। गंगा सागर सिंह ने ग्राम बुढ़ार और ग्राम कंचनपुर की प्रतिबंधित भूमि का अवैध पंजीयन कराया। प्रीति शुक्ला ने ग्राम सोहागपुर वार्ड नं. 17 में मुख्तियारनामा न होने के बावजूद विक्रय पत्र तैयार कर रजिस्ट्री करा दिया। स्वरूप सरकार ने ग्राम वासिन वीरान पचगांव (विशिष्ट ग्राम) की भूमि का अवैधानिक पंजीयन कराया है। जमीन हड़पने की साजिश कलेक्टर डॉ. सिंह ने इन पांचो पर कार्रवाई करते हुए अपने आदेश में कहा है कि इस तरह की घटनाएं न केवल मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 और अन्य कानूनी प्रावधानों का खुला उल्लंघन हैं, बल्कि ये किसानों और भोली-भाली जनता की जमीन हड़पने की साजिश का हिस्सा हैं। इसलिए लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने वाले सभी सर्विस प्रोवाइडर निलंबित किए जाते हैं और इनके विरुद्ध आगे कड़ी कार्रवाई भी प्रस्तावित है। शहडोल जिले में लगातार ऐसे आवेदन प्राप्त हो रहे थे, जिनमें विक्रेताओं की सहमति के बिना जमीन बेचे जाने, प्रतिबंधित भूमि के पंजीयन और मृतक के नाम पर रजिस्ट्री होने की शिकायतें दर्ज की गई। जांच में इनकी पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने फर्जीवाड़े पर काला कदम उठाया है।

संजय पाठक के वकील का बड़ा कदम, केस से खुद को किया अलग और सोशल मीडिया पर दी जानकारी

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा द्वारा विधायक संजय पाठक द्वारा फोन किए जाने के बाद खुद को उस मामले से अलग किए जाने के बाद नया मोड आया है। अब पाठक के वकील अंशुमान सिंह ने भी खुद को केस से अलग कर लिया है। उन्होंने साफ किया है कि मैंने कोर्ट को लिखा है कि आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन और निर्मला मिनरल्स, जिन दो कंपनियों के केस की मैं पैरवी कर रहा था, उनके किसी रिलेटिव ने जस्टिस मिश्रा को कॉल किया। इस बात का जस्टिस मिश्रा ने एक सितंबर के आदेश में जिक्र किया। इसकी वजह से मैं ये केस छोड़ रहा हूं और मैंने इस बारे में अपने क्लाइंट को बता दिया है। अधिवक्ता सिंह ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि जिन दो कंपनियों की वो पैरवी कर रहे थे, उसमें विधायक संजय पाठक का कितना शेयर है। उनका संजय पाठक से सीधा सरोकार नहीं है। वो कई सारी कंपनियों के केस लड़ते हैं, ऐसे में हर केस के क्लाइंट का किससे क्या रिलेशन है, इस बात की जांच नहीं करेंगे।  

अजीबोगरीब बीमारी: राजगढ़ में महिला का पेट नहीं भरता, हर दिन खाती है 70 तक रोटियां

राजगढ़ मध्य प्रदेश के राजगढ़ में एक महिला को खाने की अजीब बीमारी हो गई है. सुबह से रात तक 60 से 70 रोटियां खाने के बावजूद महिला कमजोरी ही महसूस करती रहती है. महिला की बीमारी ने उसके ससुराल और मायकेवालों को भी परेशानी में डाल दिया है. ससुराल वालों ने राजस्थान के कोटा, झालावाड़, इंदौर, भोपाल, राजगढ़ और ब्यावरा में इलाज करवाया, फिर मायके वालों ने कोटा और राजगढ़-ब्यावरा में उपचार करवाया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली. महिला आज भी रोजाना 60 से 70 रोटियां खा रही है. राजगढ़ जिले के सुठालिया कस्बे के पास नेवज गांव की रहने वाली मंजू सौंधिया (28) पहले स्वस्थ थी. तीन साल पहले उसे यह अजीब बीमारी हुई. मंजू के दो बच्चे हैं. पहले वह घर-परिवार के काम करती थी, लेकिन इस बीमारी ने उसका जीना मुश्किल कर दिया. मंजू की दिनचर्या ऐसी है कि वह हर पल रोटी खाती और पानी पीती है. कुछ देर बाद फिर रोटी खाने लगती है.  डॉ. कोमल दांगी ने बताया कि छह महीने पहले मंजू उनके पास आई थी. उसे घबराहट थी, इसलिए उसे भर्ती कर उपचार किया गया. बाद में वह दोबारा आई और कमजोरी की शिकायत की. उसे मल्टीविटामिन दवाएं दी गईं.  डॉक्टर बोले- साइकियाट्रिक डिसऑर्डर है  डॉ. दांगी ने बताया कि यह साइकियाट्रिक डिसऑर्डर है, जिसमें मंजू को लगता है कि उसने खाना नहीं खाया. वह मन को शांत करने के लिए बार-बार रोटी खाती और पानी पीती है. मनोचिकित्सक बोले- कोई मानिसक बीमारी नहीं डॉ. दांगी ने मंजू को भोपाल के मनोचिकित्सक आरएन साहू के पास जाने की सलाह दी. लेकिन जब मनोचिकित्सक को दिखाया गया तो उन्होंने कहा कि कोई मानसिक बीमारी नहीं है. परिवार अब मदद की उम्मीद में इंतजार कर रहा है. रोटी खाने की आदत छुड़ाएं  बताया गया कि अन्य दवाएं लेने पर मंजू को लूज मोशन की समस्या होती है, इसलिए वह दवाएं नहीं ले पा रही. डॉ. दांगी ने परिवार को सलाह दी कि मंजू की रोटी खाने की आदत छुड़ाएं और उसे खिचड़ी, फल या अन्य खाद्य पदार्थ दें ताकि उसकी मानसिक आदत में सुधार हो. पहले मंजू को टाइफाइड हुआ था मंजू के भाई चंदरसिंह सौंधिया ने बताया कि मंजू का विवाह सिंगापुरा के राधेश्याम सौंधिया से हुआ था. उसके 6 वर्ष की बेटी और 4 वर्ष का बेटा है. बच्चे ससुराल में हैं और मंजू मायके-ससुराल आती-जाती रहती है. पहले उसे टाइफाइड हुआ था, जिससे वह ठीक हो गई, लेकिन तीन साल से यह अजीब रोटी खाने की बीमारी उसे सता रही है. कभी वह 20-30 तो कभी 60-70 रोटियां खा लेती है. आर्थिक स्थिति खराब परिजन ने बताया कि ससुराल और मायके वालों ने इलाज करवाया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली. इलाज में आर्थिक स्थिति खराब हो गई और अब तक कोई सरकारी मदद नहीं मिली. अब इलाज के लिए पैसे भी नहीं बचे.

सीएम विष्णुदेव साय का ऐलान: आदिवासी क्षेत्रों के विकास में संसाधनों की नहीं होगी कमी

रायपुर : आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं होगी – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण का बजट 50 करोड़ से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपये किया गया रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज कोरबा  कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक आयोजित हुई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के पुनर्गठन के बाद आज की यह प्रथम बैठक एक नए संकल्प और दृष्टिकोण के साथ आयोजित हो रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के कल्याण और समग्र विकास के लिए सरकार सभी ठोस कदम उठा रही है। विकास कार्यों के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं होगी।  मुख्यमंत्री साय ने मध्य क्षेत्र अंतर्गत निवासरत अनुसूचित जनजाति समुदाय के बेहतर विकास के लिए प्राधिकरण की बजट राशि 50 करोड़ से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपये करने की घोषणा की। जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने प्राधिकरणों का पुनर्गठन मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर, सरगुजा और मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरणों के साथ-साथ अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण तथा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरणों का गठन कर समावेशी विकास की दिशा में मजबूत कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इन प्राधिकरणों का उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देना, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और जनसुविधाओं को हर गाँव, हर परिवार तक पहुँचाना है। पूर्व सरकार की लचर कार्यप्रणाली के कारण प्राधिकरणों के कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी रही। निगरानी के अभाव में कई योजनाएँ धरातल पर नहीं उतर पाईं। हमारी सरकार ने इस स्थिति को बदलने के लिए प्राधिकरणों का पुनर्गठन किया है। प्राधिकरण में जनप्रतिनिधित्व को और व्यापक बनाने के लिए सदस्यों की संख्या में वृद्धि की गई है। अब प्राधिकरण क्षेत्र के राज्यसभा और लोकसभा सांसद, जिला पंचायत अध्यक्ष और अन्य महत्वपूर्ण जनप्रतिनिधि इसके सदस्य बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, आदिवासी विकास के क्षेत्र में कार्यरत दो समाजसेवियों और विशेषज्ञों को प्राधिकरण का सदस्य मनोनीत करने का निर्णय लिया गया है, ताकि उनके अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ विकास योजनाओं को मिल सके।  पीएम जनमन योजना ने खोलीं नई संभावनाएँ मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के क्षेत्र में आदिवासी समुदायों के लिए विशेष योजनाएँ लागू करने पर सरकार विशेष जोर दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में शुरू की गई धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और पीएम जनमन योजना ने छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएँ खोली हैं। इन योजनाओं के तहत आवास, सड़क, बिजली, पानी और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे बुनियादी ढाँचों का विकास तेजी से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मध्य क्षेत्र में आदिवासी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए स्व-सहायता समूहों को और मजबूत करने पर बल दिया जा रहा है। इन समूहों के माध्यम से महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण, ऋण सुविधाएँ और बाजार से जोड़ने की पहल की जाएगी, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। मध्य क्षेत्र के युवाओं के लिए तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार और स्व-रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति समृद्ध है। हमें जनजातीय संस्कृति एवं परंपरा को संरक्षित रखने की दिशा में कार्य करना होगा। विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि की व्यवस्थाओं में प्राधिकरण मुख्य भूमिका निभाएगा। उन्होंने आदिवासी समाज के लोगों को शराब छोड़ने के लिए प्रेरित करने हेतु पुनर्वास केंद्र, प्रारंभिक शिक्षा, खेल और विशेष पिछड़ी जनजातियों के किसानों के खेतों में सिंचाई हेतु स्थायी पंप कनेक्शन उपलब्ध कराने के सुझाव दिए। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं पूरी सरकार के साथ बैठक करने कोरबा आए हैं। 30 नवंबर 2019 के बाद यह बैठक नहीं हुई थी। मुख्यमंत्री स्वयं अनुसूचित क्षेत्र में जाकर बैठक कर रहे हैं। यह उनकी प्रतिबद्धता दर्शाता है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रणव कुमार मरपच्ची ने कहा कि बजट राशि बढ़ाए जाने से आदिवासी बहुल क्षेत्र में विकास कार्यों में वृद्धि होगी। शिक्षा, खेल, पर्यटन और सिंचाई को मिली सौगात मुख्यमंत्री साय ने आदिवासी बच्चों और युवाओं की प्रतिभा को निखारने के लिए विशेष घोषणाएँ कीं। उन्होंने कोरबा में बालक-बालिका क्रीड़ा परिसर के निर्माण और संचालन के लिए 10-10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए। इसी तरह विशेष पिछड़ी जनजातियों के खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने के लिए दो बालक-बालिका खेल परिसरों हेतु 10-10 करोड़ रुपये की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने विशेष पिछड़ी जनजाति के विद्यार्थियों के लिए आवासीय विद्यालय स्थापित करने हेतु 5 करोड़ रुपये स्वीकृत करने की भी घोषणा की। आधारभूत संरचना और पर्यटन मुख्यमंत्री साय ने कोरबा शहर में आवागमन को सुव्यवस्थित करने के लिए महत्वपूर्ण सुनालिया पुल निर्माण हेतु 9 करोड़ रुपये की घोषणा की। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बुका-सतरेंगा पर्यटन प्रोजेक्ट पर तेजी से काम करने के निर्देश वन विभाग के अधिकारियों को दिए। उन्होंने वन विभाग को 2 माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2015 से पहले की 115 अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 2,800 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर लगभग 76 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। मध्य क्षेत्र आदिवासी प्राधिकरण के अंतर्गत वर्ष 2021-22 में 32 करोड़ 67 लाख रुपये के 544 विकास कार्य स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 539 कार्य पूर्ण हो चुके हैं। इसी प्रकार वर्ष 2022-23 में 32 करोड़ 72 लाख रुपये के कुल 491 स्वीकृत कार्यों में से 482 कार्य पूर्ण हो गए। वर्ष 2023-24 में 32 करोड़ 67 लाख रुपये के कुल 464 स्वीकृत कार्यों में से 424 कार्य पूर्ण हुए। वर्ष 2024-25 में 48 करोड़ 28 लाख रुपये के कुल 508 स्वीकृत कार्यों में से 123 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं तथा शेष कार्य प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने सभी अधूरे कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में मंत्रीगण रामविचार नेताम, दयालदास बघेल, केदार कश्यप, लखनलाल देवांगन, श्याम बिहारी जायसवाल, ओ.पी. चौधरी, टंकराम वर्मा, गजेंद्र यादव, गुरु खुशवंत साहेब, राजेश अग्रवाल, सांसद लोकसभा  संतोष पांडेय सहित विधायकगण, जिला पंचायत अध्यक्ष एवं सदस्यगण, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, अतिरिक्त … Read more

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश में अजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप योजना का किया शुभारंभ

रायपुर : बेटियों की शिक्षा से पीढ़ियाँ होती हैं शिक्षित : मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश में अजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप योजना का किया शुभारंभ प्रदेश के शासकीय विद्यालयों से 10वीं और 12वीं उत्तीर्ण करने वाली बालिकाओं को उच्च शिक्षा हेतु मिलेगी वित्तीय सहायता देश के किसी भी संस्थान में पढ़ाई के लिए बालिकाओं को मिलेंगे वार्षिक 30 हजार रुपए बेटियों की उच्च शिक्षा को मिलेगी नई उड़ान, आर्थिक दिक्कतें नहीं बनेंगी बाधा रायपुर बेटियों को शिक्षा मिलने से हमारी पीढ़ियाँ शिक्षित होती हैं। प्रदेश सरकार बेटियों की उच्च शिक्षा के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से अजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप योजना के शुभारंभ अवसर पर यह बात कही। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को बधाई देते हुए कहा कि इस छात्रवृत्ति योजना से हजारों बेटियों को अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ का चहुंमुखी विकास हुआ है और इसमें बेटियों ने भी अपनी भूमिका निभाकर प्रदेश का मान बढ़ाया है। बेटियाँ आर्थिक दिक्कतों के कारण अपनी पढ़ाई अधूरी न छोड़ें—इसी उद्देश्य से यह पहल की गई है। यह योजना प्रदेश में बालिकाओं की उच्च शिक्षा में नामांकन दर को और अधिक बढ़ाने में सहायक होगी। साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ संकल्प को यह स्कॉलरशिप आगे बढ़ाएगी। इसके माध्यम से शासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाली निम्न आय वर्ग की छात्राओं को विशेष रूप से मदद मिलेगी और वे अपनी उच्च शिक्षा जारी रख पाएँगी।  बेटियों की शिक्षा से पीढ़ियाँ होती हैं शिक्षित : मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री ने कहा कि जब बेटियाँ पढ़ती हैं तो वे केवल दो परिवारों को ही नहीं बल्कि पूरी पीढ़ियों को शिक्षित करती हैं। उन्होंने सभी महाविद्यालयों में इस योजना की जानकारी व्यापक रूप से पहुँचाने के निर्देश दिए। उल्लेखीय है कि इस योजना के तहत प्रदेश के शासकीय विद्यालयों से 10वीं एवं 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाली नियमित छात्राएँ पात्र होंगी। जो छात्राएँ शैक्षणिक सत्र 2025-26 में स्नातक के प्रथम वर्ष अथवा डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के प्रथम वर्ष में देश के किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में प्रवेश लेंगी, उन्हें छात्रवृत्ति का लाभ मिलेगा।योजना का लाभ पाने के लिए वेबसाइट https://azimpremjifoundation.org/what-we-do/education/azim-premji-scholarship पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए कोई शुल्क नहीं लगेगा। साथ ही, क्यूआर कोड स्कैन कर भी आवेदन किया जा सकता है। आवेदन दो चरणों में स्वीकार किए जाएँगे—पहला चरण 10 सितम्बर से 30 सितम्बर 2025 तथा दूसरा चरण 10 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक। फाउंडेशन द्वारा छात्रवृत्ति योजना की पूरी प्रक्रिया नि:शुल्क संचालित की जाएगी। यदि योजना से संबंधित किसी प्रकार की धोखाधड़ी या शिकायत की जानकारी हो, तो उसे scholarship@azimpremjifoundation.org पर प्रेषित किया जा सकता है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वन मंत्री केदार कश्यप, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, आयुक्त उच्च शिक्षा संतोष देवांगन, संचालक तकनीकी शिक्षा विजय दयाराम के., तथा अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के स्टेट हेड सुनील शाह उपस्थित थे।