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‘बिहार अंधकार में’, नड्डा ने तेजस्वी पर साधा निशाना, जंगलराज और तुष्टिकरण को बताया जिम्मेदार

पटना बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तापमान चढ़ गया है। केंद्रीय मंत्री और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शनिवार को बिहार की राजधानी पटना में विपक्ष पर तीखा हमला बोला। जेपी नड्डा ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि स्वार्थी नेतृत्व और जंगलराज ने बिहार को अंधकार में धकेल दिया है। बिहार को पीछे ले जाने का आरोप नड्डा ने कहा कि बिहार, जो कभी देश को दिशा देता था, आज कुछ लोगों के गलत नेतृत्व और स्वार्थी प्रयासों के कारण पीछे चला गया। जंगलराज, तुष्टिकरण और जातिवाद ने बिहार को जकड़ लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जंगलराज का इतिहास भूलने वाला नहीं है, भले ही विपक्ष इसे भुलाने की बात कहे। नड्डा ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी नीतियों ने बिहार की प्रगति को बाधित किया।   मोदी-नीतीश के नेतृत्व में बदला बिहार भाजपा अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 20 साल के शासन की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा, मोदी और नीतीश के नेतृत्व में बिहार ने विकास की नई ऊंचाइयां छुई हैं। सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हुआ है। नड्डा ने दावा किया कि एनडीए ने बिहार को जंगलराज के अंधेरे से निकालकर प्रगति की राह पर लाया। विपक्ष की निम्न राजनीति पर हमला नड्डा ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस और आरजेडी पर राजनीति को निम्न स्तर पर ले जाने का आरोप लगाया। उन्होंने हाल ही में कांग्रेस द्वारा जारी एक कथित वीडियो का जिक्र किया, जिसमें पीएम मोदी की मां के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल हुआ। नड्डा ने कहा कि ऐसे अपशब्दों का उपयोग और फिर पछतावा न करना विपक्ष के चरित्र को दर्शाता है। यह उनकी सोच का निम्न स्तर दिखाता है। चुनावी माहौल में नड्डा की हुंकार नड्डा का यह बयान बिहार में चुनावी माहौल को और गरमा सकता है। तेजस्वी यादव की बिहार अधिकार यात्रा के जवाब में नड्डा ने एनडीए की उपलब्धियों को जनता के सामने रखने की रणनीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता विकास चाहती है, न कि जंगलराज की वापसी। वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शनिवार को कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बेबाक राय व्यक्त की। इस दौरान उन्होंने 16 सितंबर से शुरू होने वाली बिहार अधिकार यात्रा के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

बच्‍चे पर अपराध करने वाला 60 साल का आरोपी विदिशा में 20 साल जेल भेजा गया

विदिशा डेढ़ वर्ष की अबोध बच्ची के साथ दुष्कृत्य करने वाले 60 वर्षीय आरोपित को कुरवाई की अदालत ने कठोर सजा सुनाई है। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आनंद गौतम ने शुक्रवार को दिए फैसले में आरोपी को पॉक्सो सहित विभिन्न धाराओं में कुल 20 वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया।   यह है पूरा मामला मामला थाना पठारी क्षेत्र का है। फरियादिया की बुआ ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 12 नवंबर 2024 की सुबह उसकी भतीजी बरामदे में खेल रही थी। तभी उनके रिश्ते के जीजा ने बच्ची के साथ छेड़छाड़ की। बच्ची के रोने पर जब वह पहुंची तो आरोपी भाग खड़ा हुआ। इस संबंध में थाना पठारी में बीएनएस की धारा 64(2), 65(2), 332(ए) एवं पॉक्सो एक्ट की धारा 5(एम)/6 और 5(एन)/6 के तहत मामला दर्ज किया गया था। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसपी रोहित काशवानी ने सहायक अभियोजन अधिकारी मनीष कथोरिया को विशेष पैरवी हेतु नियुक्त किया। विचारण के दौरान प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों के बयानों को अदालत ने प्रमाणित मानते हुए आरोपी को दोषी ठहराया। न्यायालय ने बीएनएस की धारा 64(2) और 65(2) में 10-10 वर्ष का कठोर कारावास, धारा 332(ए) में एक वर्ष का कारावास तथा पॉक्सो की धारा 5(एम)/6 और 5(एन)/6 में 20-20 वर्ष का कठोर कारावास दिया है। इस प्रकरण की विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी विमलेशा राय ने की थी। पैरवी एडिशनल डीपीओ मनीष कथोरिया ने की, जबकि मार्गदर्शन सहायक उपनिदेशक जे.एस. तोमर का रहा। पांच साल की सजा काट चुका है आरोपित एसपी रोहित काशवानी ने बताया कि इस घटना का आरोपित पहले भी एक साढ़े चार वर्ष की बालिका से दुष्कृत्य कर चुका है। उसे न्यायालय ने इस मामले में पांच साल की सजा भी सुनाई थी। काशवानी ने बताया कि वर्ष 2017 में त्योंदा थाना क्षेत्र में आरोपित ने साढ़े चार वर्ष की बालिका से दुराचार किया था। पीड़िता की मां की शिकायत पर प्रकरण दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। इस मामले में आरोपित को न्यायालय ने पांच साल की सजा सुनाई थी। आरोपित पांच साल की सजा काटकर वर्ष 2021 में जेल से रिहा हुआ था।

श्रीलंका ने टॉस जीतकर किया गेंदबाजी का फैसला, प्लेइंग 11 में वापसी की ये बड़ी खबर

आबू धाबी एशिया कप 2025 का पांचवां मुकाबला आबू धाबी में खेला जा रहा है, जहां श्रीलंका और बांग्लादेश की टीमें आमने सामने हैंछ श्रीलंका के कप्तान चरिथ असालंका ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। श्रीलंका का यह पहला मुकाबला है तो बांग्लादेश दूसरे मैच में उतर रही है और जीत के साथ सुपर 4 का टिकट हासिल करना चाहेगी। आबू धाबी की पिच का हाल इस पिच के आंकड़ों की बात कि जाए तो यहां रन चेज करना आसान होता है। यही वजह है कि चरिथ असलांका ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। पिच पर थोड़ी घास है, मतलब बैक-लेंथ गेंदबाज़ी करने से बल्लेबाज़ों की मुश्किल बढ़ सकती है। पिच पर बल्लेबाज़ों को बड़े शॉट खेलने में आसानी होती है। टॉस हारने के बाद लिट्टन दास ने कहा, "पहले बल्लेबाज़ी करने में कोई दिक्कत नहीं है, विकेट अच्छा लग रहा है। हमने पहले मैच में अच्छा क्रिकेट खेला था, हमें कुछ क्षेत्रों में सुधार करने की जरूरत है। मैच जीतने के लिए आपको सब कुछ सही करना होगा। तस्कीन नहीं खेल रहे हैं और शोरीफुल की वापसी हुई है।   श्रीलंका ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया, कप्तान चारिथ असलांका ने कहा, "हम गेंदबाज़ी करेंगे, पिच नई लग रही है, इसलिए हम गेंदबाज़ी करना चाहते हैं। हम इस लय को बरकरार रखना चाहते हैं। एक कप्तान के तौर पर यह एक अच्छी चुनौती है और हमारे पास अच्छे खिलाड़ी हैं। तीन ऑलराउंडरों के साथ 7-4 का कॉम्बो है। हसरंगा आज का मैच खेल रहे हैं। श्रीलंका की प्लेइंग इलेवन पथुम निसांका, कुसल मेंडिस (विकेटकीपर), कामिल मिशारा, कुसल परेरा, चरिथ असलांका (कप्तान), दासुन शनाका, कामिंडु मेंडिस, वानिंदु हसरंगा, दुशमंथा चमीरा, मथीशा पथिराना और नुवान तुषारा। बांग्लादेश की प्लेइंग इलेवन परवेज़ हुसैन इमोन, तंज़ीद हसन तमीम, लिटन दास (विकेटकीपर और कप्तान), तौहीद हृदोय, जेकर अली, शमीम हुसैन, महेदी हसन, रिशाद हुसैन, तन्ज़ीम हसन साकिब, शोरफुल इस्लाम और मुस्तफिजुर रहमान।

शिवपाल यादव का हमला सरकार पर, कहा- जनता अब नहीं सह सकती महंगाई, सपा ग्राम सभा चुनाव से बाहर

लखनऊ  समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने शनिवार को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इटावा के बसरेहर ब्लॉक के गोरा दयालपुर में स्व. पूर्व प्रधान की प्रतिमा का अनावरण करते हुए मीडिया से बातचीत में कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पिछले 14 सालों में जनता को लूटकर महंगाई लगातार बढ़ाई गई है। जीएसटी के नाम पर लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है और आम आदमी परेशान है। जनता अब इन बेइमानों को बख्शने वाली नहीं है। PM मोदी के मणिपुर दौरे पर सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मणिपुर दौरे पर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आते ही सौगातों की घोषणाएं शुरू हो जाती हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गुजरात की कंपनियां पहुंचकर सब कुछ लूट लेती हैं। उन्होंने जनता से सतर्क रहने की अपील की। राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए शिवपाल ने कहा कि आज प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है। महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं, आए दिन रेप और सामूहिक दुष्कर्म की घटनाएं सामने आ रही हैं। भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है और स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बदहाल हो चुकी हैं। उन्होंने जल जीवन मिशन को पूरी तरह असफल बताते हुए कहा कि आज भी टंकियों में पानी नहीं है और बनी-बनाई सड़कों को खोद दिया गया है, लेकिन उन्हें बनाने के लिए धन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। "2047 तक विकसित यूपी" सपना है झूठा योगी सरकार के 2047 तक विकसित प्रदेश के संकल्प को झूठा करार देते हुए शिवपाल बोले कि हकीकत में प्रदेश का विकास नहीं हो रहा, बल्कि सत्ताधारी लोग अपने घर, कॉलेज और यूनिवर्सिटी खड़ी करने में लगे हैं। चुनावी रणनीति को लेकर उन्होंने साफ किया कि समाजवादी पार्टी ग्राम सभा, प्रधान और बीडीसी चुनाव में भाग नहीं लेगी। जिला पंचायत और ब्लॉक प्रमुख चुनावों में पार्टी प्रत्याशी जरूर उतारेगी। उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।

9 अक्टूबर से शुरू होने वाले दिवाली मेले में शामिल होने का न्योता, जेसोवा के प्रतिनिधि ने CM हेमंत से किया स्वागत

रांची झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं विधायक कल्पना सोरेन से मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में झारखंड आईएएस ऑफिसर्स वाइव्स एसोसिएशन (जेसोवा) के प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने जेसोवा की ओर से राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में 9 अक्टूबर से 13 अक्टूबर – 2025 तक आयोजित होने वाले दिवाली मेला में सम्मिलित होने के लिए मुख्यमंत्री को सपरिवार आमंत्रित किया। उन्होंने 5 दिनों तक चलने वाले इस दिवाली मेले के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों से भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया। प्रतिनिधि मंडल ने जेसोवा के द्वारा किए जा रहे सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यों कार्यक्रमों और गतिविधियों की भी जानकारी मुख्यमंत्री को दी। मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वालों में जेसोवा की अध्यक्ष प्रीति कुमारी, सचिव मनु झा, कोषाध्यक्ष शिवानी सिंह, कार्यकारिणी समिति सदस्य रंजना कुमार एवं ज्योति मंजू शामिल थीं।  

सामान्य अस्पताल में ताला लगा शौचालय, 11 लाख खर्च होने के बावजूद सुविधा नहीं

जींद जींद के सामान्य अस्पताल में शव गृह के समीप बने शौचालय पर ताला लगा होने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह शौचालय वर्ष 2011 में जिला योजना स्कीम के तहत 11 लाख रुपये की लागत से बनाया गया था, लेकिन अब यह उपयोग के लायक नहीं रहा। अस्पताल में आने वाले लोगों, विशेषकर महिलाओं, ने शौचालय बंद होने की शिकायत की है।  जुलाना के झमोला गांव के प्रदीप, जो अपने गांव के एक युवक की मृत देह लेकर अस्पताल आए थे, ने बताया, "हमारे साथ आईं महिलाओं को शौचालय की जरूरत थी, लेकिन ताला लगा होने के कारण वे परेशान हैं। क्या महिलाएं अब खुले में शौच करें? 11 लाख रुपये से बना शौचालय बेकार पड़ा है।" इसके अलावा, अस्पताल में पीने के पानी की व्यवस्था न होने की भी शिकायत सामने आई है। अस्पताल प्रशासन के डॉ. रघुवीर पुनिया ने बताया कि यह शौचालय लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा बनाया गया था और अब यह जर्जर हालत में है। उन्होंने कहा, "सुरक्षा के लिए ताला लगाया गया है ताकि कोई हादसा न हो। हमने PWD को इस बारे में पत्र लिखा है।"हाल ही में कुरुक्षेत्र के एक अस्पताल में हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने महिला शौचालय पर ताला देखकर तत्काल दरवाजा तुड़वाने का आदेश दिया था। लेकिन जींद में यह समस्या वर्षों से अनसुलझी बनी हुई है, जिससे आम जनता को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

मेडिकल कॉलेज की लेबर रूम बनी जंग का अखाड़ा, महिला डॉक्टरों में हाथापाई

शहडोल बिरसा मुंडा शासकीय मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर डॉक्टरों की फूहड़ता सामने आई है। शुक्रवार की रात में यहां के लेबर रूम में इंटर्न महिला डॉक्टरों ने हंगामा किया। मरीजों के सामने डॉक्टर आपस भिड़ गए और एक दूसरे के साथ मारपीट करने लगे। जहां डाक्टर लड़ रहे थे वहां गर्भवती महिलाओं का वार्ड है। डॉक्टरों की हंगामेदार लड़ाई से वहां भर्ती महिलाएं डर गई थीं। घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद जानकारी के अनुसार एक महिला डॉक्टर शिवानी लाखिया ने लिखित शिकायत में आरोप लगाया कि उसकी सहपाठी इंटर्न डॉक्टर ने उसके बाल पकड़कर उसे जमीन पर पटक दिया और कपड़े फाड़ दिए। जान से मारने की धमकी भी दी है। इस पूरे घटनाक्रम को नर्सिंग स्टाफ, गार्ड और अन्य मेडिकल कर्मियों ने देखा जिनके नाम गवाहों में दर्ज हैं। वहीं पूरी घटना वहां के लेबर रूम के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।   इंटर्न डॉक्टर का यह पहला विवाद नहीं इतना ही नहीं, इस घटना का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। प्रसारित वीडियो के बाद कॉलेज प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग में हलचल मची है। सूत्रों के अनुसार इंटर्न डॉक्टर का यह पहला विवाद नहीं है। इससे पहले भी वह नफीस बस विवाद और महादेव प्रकरण जैसी कई घटनाओं में शामिल रही है। इसके बाद एक और वीडियो प्रसारित हो रहा है, जिसमें प्रसव कराते समय डॉक्टर पर हमला करते हुए कैमरा छीन लिया गया है। डॉक्टरों की सुरक्षा पर उठे सवाल पीड़िता और स्टाफ ने आरोपित इंटर्न डॉक्टर के निलंबन के साथ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराकर कार्रवाई की मांग की गई है। इधर कॉलेज प्रबंधन और पुलिस पर मामले को दबाने के आरोप भी लग रहा है। मारपीट कांड ने मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था और महिला डॉक्टरों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कॉलेज में इलाज कराने आई महिलाओं और उनके परिजनों का कहना है कि जिस जगह पर जीवन बचाने की जिम्मेदारी है, वहां खुद डॉक्टर ही हिंसक हो जाएं तो क्या स्थिति बनेगी। मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों का विवाद हुआ। जांच कमेटी बना दी गई है और विवाद करने वाले डॉक्टरों के अभिभावकों भी बुलाया गया है। लड़ने वाले डॉक्टर बाहर के हैं। सोमवार तक जांच रिपोर्ट आ जाएगी और अभिभावक भी आ जाएंगे। लापरवाही हुई है कार्रवाई होगी। डीन अभी बाहर हैं। वे भी सोमवार को आ जाएंगे और कार्रवाई होगी। डॉ.नागेंद्र सिंह,अधीक्षक मेडिकल कालेज शहडोल।

मान सरकार ने शुरू किया पंजाब को पटरी पर लाने का मिशन

पंजाब  पंजाब को दोबारा पटरी पर लाने के लिए आम आदमी पार्टी की मान सरकार ने एक बड़ा अभियान छेड़ दिया है। बाढ़ का पानी कई इलाकों से उतर चुका है, लेकिन गांव-गांव में अभी भी सिल्ट, गंदगी और मलबा फैला हुआ है। जनजीवन सामान्य करने और बीमारियों से बचाव के लिए सरकार ने सफाई से लेकर स्वास्थ्य और किसानों की मदद तक का व्यापक प्लान बनाया है। मान सरकार ने कहा है कि 2300 से ज़्यादा गांव और वार्ड में सफाई का महाअभियान चलेगा। हर गांव में जेसीबी, ट्रैक्टर- ट्रॉली और मज़दूरों की टीमें भेजी जा रही हैं। ये टीमें मलबा और सिल्ट हटाएंगी, मरे हुए जानवरों को नष्ट करेंगी और इसके बाद हर गांव में फॉगिंग होगी ताकि कोई बीमारी न फैले। इस काम के लिए ₹100 करोड़ का फंड रखा गया है। हर गांव को तुरंत ₹1 लाख दिया गया है और ज़रूरत पड़ने पर अतिरिक्त पैसा भी मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि 24 सितंबर तक गाँवों से मलबा हट जाए, 15 अक्टूबर तक सामाजिक जगहों की मरम्मत पूरी हो और 22 अक्टूबर तक तालाबों की सफाई हो जाए।स्वास्थ्य सेवाओं को भी प्राथमिकता दी जा रही है। बाढ़ प्रभावित 2303 गांवों में मेडिकल कैंप लगाए जाएंगे। जिन 596 गांवों में पहले से आम आदमी क्लिनिक हैं, वहाँ ये कैंप चलेंगे। बाकी 1707 गांवों में स्कूल, धर्मशाला, आंगनवाड़ी या पंचायत भवन में कैंप लगेंगे। हर कैंप में डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ और दवाइयाँ मौजूद होंगी। इसके अलावा 550 एंबुलेंस भी तैनात की जा रही हैं, ताकि लोगों को तुरंत इलाज मिल सके। पशुधन को बचाने के लिए भी सरकार ने मोर्चा संभाला है। रिपोर्ट के मुताबिक़ 713 गांवों में करीब 2.5 लाख पशु प्रभावित हुए हैं। इसके लिए वेटनरी डॉक्टरों की टीमें गांवों में पहुंच चुकी हैं। खराब चारा हटाया जा रहा है, किसानों को पोटाशियम परमैगनेट दिया जा रहा है और 30 सितंबर तक सभी प्रभावित पशुओं का टीकाकरण पूरा किया जाएगा। किसानों की सबसे बड़ी चिंता फसल बेचने की है। मान सरकार ने इस बार खरीद जल्दी शुरू करने का फ़ैसला किया है। 16 सितंबर से मंडियों में खरीद शुरू होगी। जिन मंडियों को बाढ़ से नुकसान हुआ है, वहां तेज़ी से सफाई और मरम्मत हो रही है, ताकि 19 सितंबर तक सभी मंडियाँ किसानों की फसल खरीदने के लिए तैयार हो जाएं।मान सरकार का कहना है कि यह सिर्फ़ राहत का काम नहीं, बल्कि पंजाब को दोबारा खड़ा करने का संकल्प है। सरकार ने लोगों से भी अपील की है कि एनजीओ, यूथ क्लब और समाजसेवी संस्थाएँ इस काम में हाथ बंटाएं। पंजाब ने हर संकट में मिलकर लड़ाई लड़ी है, इस समय संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, जब सरकार अपने लोगों के साथ खड़ी हो—तब हर पंजाबी दिल से कह उठता है, ‘ए मान सरकार साडे नाल खड़ी  

सुल्तानगंज विधानसभा: नीतीश कुमार की पकड़ आज भी मजबूत

सुल्तानगंज सुल्तानगंज विधानसभा सीट भागलपुर जिले में स्थित है…यह विधानसभा क्षेत्र बांका लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यह सीट साल 1951 से ही अस्तित्व में है। 2008 से पहले तक यह भागलपुर लोकसभा का हिस्सा हुआ करता था, लेकिन 2008 में हुए परिसीमन के बाद यह क्षेत्र बांका लोकसभा के अंतर्गत आ गया। साल 1951 में पहली बार इस सीट पर चुनाव हुए और 1967 तक कांग्रेस का ही कब्जा रहा। 1951 में कांग्रेस के राश बिहारी लाल, 1957 में सरस्वती देवी तो 1962 में देबी प्रसाद महतो चुनाव जीते थे। 1967 में इस सीट पर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के बी.पी.शर्मा विधायक चुने गए थे। 1969 और 1972 में इस सीट पर एक बार फिर से कांग्रेस ने कब्जा जमाया और राम रक्षा प्रसाद यादव लगातार दो बार विधायक चुने गए थे।   1977 में यह सीट जनता पार्टी के खाते में गई और जागेश्वर मंडल विधायक बने थे। 1980 और 1985 में भी कांग्रेस का ही कब्जा रहा। 1980 में नंद कुमार मांझी और 1985 में उमेश चंद्र दास विधायक चुने गए थे। 1990 और 1995 में यह सीट जनता दल के पास रही और फणींद्र चौधरी लगातार दो बार विधायक बने। साल 2000 में इस सीट पर समता पार्टी के गणेश पासवान विधायक चुने गए थे। 2005 में जेडीयू की टिकट पर सुधांशु शेखर भास्कर यहां से विधायक बने। वहीं 2010 और 2015 में लगातार दो बार यहां से जेडीयू उम्मीदवार सुबोध राय ने जीत हासिल की थी। 2020 में जेडीयू की तरफ से ललित नारायण मंडल ने फिर से सुल्तानगंज में तीर को निशाने पर ही मारा था।   वहीं 2020 के चुनाव में सुल्तानगंज सीट पर जेडीयू उम्मीदवार ललित नारायण मंडल ने जीत हासिल की थी। ललित नारायण मंडल को 72 हजार आठ सौ 23 वोट मिला था तो कांग्रेस उम्मीदवार ललन कुमार को 61 हजार दो सौ 58 वोट ही मिला था। इस तरह से ललित नारायण मंडल ने ललन कुमार को 11 हजार पांच सौ 65 वोट के अंतर से हरा दिया था। वहीं एलजेपी कैंडिडेट नीलम देवी 10 हजार दो सौ 22 वोट लाकर तीसरे स्थान पर रहीं थीं।   वहीं 2015 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर जेडीयू कैंडिडेट सुबोध राय ने जीत हासिल की थी। सुबोध राय ने बीएलएसपी के हिमांशु पटेल को 14 हजार 33 वोटों से हराया था। सुबोध राय को कुल 63 हजार तीन सौ 45 वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे हिमांशु पटेल को कुल 49 हजार तीन सौ 12 वोट मिले थे तो वहीं तीसरे स्थान पर रहे निर्दलीय कैंडिडेट ललन कुमार को कुल 14 हजार 73 वोट मिले थे।   वहीं 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में सुल्तानगंज सीट पर जेडीयू उम्मीदवार सुबोध राय ने जीत हासिल की थी। सुबोध राय ने आरजेडी कैंडिडेट रामावतार मंडल को 4 हजार आठ सौ 45 वोट के अंतर से हराया था। सुबोध राय को कुल 34 हजार छह सौ 52 वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे रामावतार मंडल को कुल 29 हजार आठ सौ सात वोट मिले थे तो वहीं तीसरे स्थान पर रहे एलटीएसडी के ओमदत्त चौधरी को कुल 9 हजार 20 वोट ही मिले थे।   वहीं 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में सुल्तानगंज सीट पर जेडीयू कैंडिडेट सुधांशु शेखर भास्कर ने जीत हासिल की थी। सुधांशु शेखर भास्कर ने आरजेडी कैंडिडेट गणेश पासवान को 11 हजार छह सौ 87 वोटों से हराया था। सुधांशु शेखर भास्कर को कुल 48 हजार 63 वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे गणेश पासवान को कुल 36 हजार तीन सौ 76 वोट मिले थे तो वहीं तीसरे स्थान पर रहे सीपीआई कैंडिडेट विजय कुमार पासवान को कुल 6 हजार पांच सौ आठ वोट मिले थे।   सुल्तानगंज विधानसभा सीट के चुनावी नतीजों को तय करने में कुशवाहा, यादव, ब्राह्मण और मुस्लिम वोटरों की अहम भूमिका रही है। सुल्तानगंज सीट को जेडीयू का गढ़ माना जाता है…इसलिए इस बार तेजस्वी यादव को कुछ नया करना होगा। अगर तेजस्वी यादव ने सुल्तानगंज में कुछ नया दांव नहीं चला तो यहां फिर से ‘तीर’ निशाने पर लग सकता है।

215 फीट का विशाल रावण कोटा में, रिमोट बटन दबाते ही होगा जलाया

कोटा कोटा का दशहरा मेला… नाम सुनते ही रोशनी, भीड़ और आतिशबाजी की तस्वीर दिमाग में उभर आती है लेकिन इस बार यहां का नजारा और भी निराला रहने वाला है। मैदान में एक ऐसा रावण खड़ा किया जा रहा है, जिसे देख लोग दंग रह जाएंगे। 215 फीट ऊंचा, 12 टन वजनी और लोहे से बना ये रावण अब तक का सबसे विशालकाय पुतला होगा। दशहरे के मैदान में सुबह से लेकर रात तक हथौड़ों की ठक-ठक और वेल्डिंग की चिंगारियां गूंज रही हैं। हरियाणा के अंबाला से आए तेजेंद्र चौहान और उनकी टीम पिछले चार महीने से इस रावण को गढ़ रहे हैं। चौहान मुस्कुराते हुए कहते हैं- 'रावण की हड्डियों में 9500 किलो लोहा है। इतना लोहा तो किसी छोटे पुल में भी नहीं लगता।' रावण का सिर ही अपने आप में अजूबा है। 25 फीट ऊंचा मुख्य सिर, बाकी नौ सिर 3×6 फीट के। चेहरे को फाइबर से ढाला गया है, वजन 300 किलो का। इस बार मूंछें भी घनी और ऊपर की ओर मुड़ी हुईं, बिलकुल वैसी जैसे किसी फिल्मी खलनायक की। मुकुट अपने आप में खास है। 60 फीट ऊंचा, चार हिस्सों में बना और एलईडी लाइट्स से जगमगाता हुआ। रात के अंधेरे में जब ये मुकुट चमकेगा तो पूरा मैदान रोशनी से नहा जाएगा। रावण की तलवार 50 फीट लंबी और जूतियां 40 फीट की। कुंभकरण और मेघनाथ भी रावण से पीछे नहीं हैं। 60-60 फीट के पुतले, जिनके चेहरे 10 फीट लंबे और 80 किलो वजनी। इतना बड़ा पुतला खड़ा करना आसान नहीं। इसके लिए 6 फीट गहरा और 25 फीट चौड़ा फाउंडेशन बनाया गया है। दो क्रेन, जेसीबी और सौ मजदूरों की मदद से रावण को तीन घंटे में खड़ा कर दिया जाएगा। मैदान में मौजूद एक मजदूर कहता है, “इतना ऊंचा रावण पहली बार देख रहे हैं। जब खड़ा होगा, तो लोग आसमान की तरफ गर्दन उठाकर ही देख पाएंगे।” इस बार दहन का तरीका भी अलग ही होगा। अब न मशाल, न तीर, अबकि बार रावण का विनाश रिमोट से होगा। पुतले में 20 जगह सेंसर लगाए गए हैं। जैसे ही बटन दबेगा, पहले छत्र जलेगा, फिर मुकुट के हिस्से और फिर पूरी देह आतिशबाजी के धमाकों में सुलग उठेगी। हालांकि इस बार रावण मूवमेंट नहीं करेगा। न तलवार घूमेगी, न आंखें चलेंगी लेकिन भव्यता इतनी होगी कि किसी को उसकी कमी महसूस नहीं होगी। रावण का चेहरा बनाने में ही एक महीना लग गया है, बाकी हिस्सों को तैयार करने में दो महीने और फिर दो ट्रकों से इन्हें कोटा लाया गया। फाइबर ग्लास से बने चेहरों पर रेजिन केमिकल की परत चढ़ाई गई है ताकि मजबूती बनी रहे। 2 अक्टूबर की शाम जब कोटा का आसमान रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाएगा, तब यह विशाल रावण सिर्फ एक पुतला नहीं रहेगा। यह दशहरे की परंपरा, कारीगरों की मेहनत और कोटा की शान का प्रतीक होगा।