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रायपुर विशेष: महतारियों के सशक्तिकरण में छत्तीसगढ़ सरकार ने स्थापित की एक नई मिसाल

रायपुर स्त्री पुरुष समानता के मामले में छत्तीसगढ़ की मिसाल पूरे देश में रही है लेकिन आर्थिक समानता में फिर भी पुरुषों का पलड़ा अब तक भारी होता था। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी की सरकार आने के बाद इस आर्थिक विषमता को दूर करने का रास्ता भी खुल गया है। अब छत्तीसगढ़ की हर माँ और बहन आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है। अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए वे स्वयं निर्णय ले सकती हैं। महतारी वंदन योजना जैसी योजनाएं महिलाओं को उनके श्रम और भागीदारी के लिए सम्मानित करती हैं वहीं साय सरकार की आजीविकामूलक योजनाओं से महिलाओं को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने की राह मिली है। आधी आबादी को सशक्त कर मुख्यमंत्री ने विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला रख दी है। छत्तीसगढ़ ने पिछले 19 महीनों में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है। राज्य सरकार ने महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक और स्वास्थ्य के हर मोर्चे पर मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और त्वरित लाभ पहुंचाने की व्यवस्था स्थापित की गई है, जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। आर्थिक स्वावलंबन – महतारी वंदन योजना आत्मनिर्भर महिला की ओर कदम  1 मार्च 2024 से लागू इस महत्वाकांक्षी योजना ने राज्य की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में क्रांति ला दी है। विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए सीधे बैंक खाते में हस्तांतरित किए जा रहे हैं।मार्च 2024 से सितम्बर 2025 तक 69.15 लाख से अधिक महिलाओं को 12,376.19 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।यह राशि महिलाओं की आत्मनिर्भरता, पोषण और मूलभूत जरूरतों की पूर्ति में सहायक है।चालू वित्तीय वर्ष में इस योजना के लिए 5, 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।  179 महतारी सदन के निर्माण के लिए 52.20 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। प्रत्येक सदन 2,500 वर्गफुट में 29.20 लाख रुपए की लागत से बनेगा, जो महिलाओं के लिए प्रशिक्षण, बैठक और सामुदायिक गतिविधियों का केंद्र होगा। स्वरोजगार और उद्यमिता का विस्तार साय सरकार ने महिला श्रमिकों और स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं: जिसमें मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना के तहत 18 से 50 वर्ष की पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को 7,900 रुपए की सहायता एक सिलाई मशीन के लिए दी जा रही है।दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना से 3 वर्ष से पंजीकृत महिला श्रमिकों को 1 लाख रुपए की अनुदान राशि प्रदान की जा रही है। मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत गर्भवती महिला श्रमिकों को 20,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि उन्हें पौष्टिक आहार मिल सके। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना ने पंजीकृत श्रमिकों को अपनी 18-21 वर्ष की अविवाहित पुत्रियों के पढ़ाई लिखाई तथा अन्य आवश्यक खर्चों के लिए 20,000 रुपए की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त  और आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी साय सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिसमें महतारी शक्ति ऋण योजना के माध्यम से  उन्हें बिना जमानत के 25,000 रुपए का ऋण देकर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है।सक्षम योजना – 2 लाख से कम वार्षिक आय वाली महिलाओं को 3% ब्याज पर 2 लाख रुपए तक ऋण भी दिया जा रहा है।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) – 800 करोड़ रुपए का प्रावधान, “लखपति महिला” और “ड्रोन दीदी” जैसी नवाचारी पहलें भी योजनाओं में शामिल है।इन योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ, उन्हें रोजगार के स्थायी अवसर भी प्रदान किए जा रहे हैं। साय सरकार ने महिला सुरक्षा को नीति के केंद्र में रखा है। नवाबिहान योजना से घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को कानूनी, चिकित्सा, परामर्श और आश्रय सुविधा प्रदान की जाती है।इसके लिए 20 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ सखी वन-स्टॉप सेंटर में SOP लागू करने वाला देश में पहला राज्य बन गया है। 27 जिलों में सेंटर संचालित, 24×7 सेवा उपलब्ध है।महिला हेल्पलाइन 181 और डायल 112 द्वारा संकट में फंसी महिलाओं को त्वरित सहायता और पुलिस समन्वय की सुविधा प्रदान की जाती है।  शुचिता योजना के तहत 2,000 स्कूलों में नैपकिन वेंडिंग मशीनें, 3 लाख से अधिक किशोरियों को स्वच्छता सामग्री प्रदान की जा रही है जिसके लिए 13 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान है।हाई स्कूल छात्राओं के लिए साइकिल वितरण योजना के लिए 50 करोड़ रुपए का प्रावधान है।  गर्भवती और धात्री महिलाओं को पौष्टिक आहार, स्वास्थ्य पूरक और पोषण पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से सहायता दी जा रही है।   नवा रायपुर में 200 करोड़ रुपए की लागत से यूनिटी मॉल का निर्माण किया जा रहा है,जहाँ महिला समूहों के उत्पादों की बिक्री होगी।जशप्योर ब्रांड  जशपुर जिला में निवासरत आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित वन-आधारित उत्पाद है,जो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पहचान बना रहा है, साथ ही“वोकल फॉर लोकल” का सफल उदाहरण भी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में महिला एवं बाल विकास विभाग को 8,245 करोड़ रुपए का बजट आबंटित किया गया है। इसमें महतारी वंदन, पोषण, स्वास्थ्य, ऋण और सुरक्षा योजनाओं का विस्तार शामिल है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का मानना है कि महिला सशक्तिकरण केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि धरातल पर वास्तविक बदलाव लाने से संभव है। वहीं, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि हर योजना का लाभ पात्र महिलाओं तक समय पर और पारदर्शी ढंग से पहुँचे।     डॉ. दानेश्वरी संभाकर     सहायक संचालक

खरसिया के 29 एकल शिक्षकीय और शिक्षक विहीन शालाओं में हुई शिक्षकों की व्यवस्था

रायपुर वर्षों से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे  रायगढ़ जिले के खरसिया विकासखंड की विद्यालयों में अब नई उम्मीद दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग की युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया ने न केवल एकल शिक्षकीय व शिक्षकविहीन विद्यालयों की दशा सुधरी है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में ठोस पहल भी साबित हो रही है। प्राथमिक शाला धांगरपारा सरवानी, जहाँ लंबे समय से शिक्षक नहीं थे, अब दो शिक्षकों की तैनाती से बच्चों की पढ़ाई नए उत्साह के साथ शुरू हो चुकी है। इसी प्रकार खरसिया विकासखंड के 29 एकल शिक्षकीय शालाओं में भी शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई है, जिससे इन स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था मजबूत हुई है।         युक्तियुक्तकरण से सिर्फ प्राथमिक ही नहीं, बल्कि उच्च स्तरीय शिक्षा व्यवस्था भी सुदृढ़ हुई है। हाईस्कूल पामगढ़, छोटे मूड़पार और नगरपालिका कन्या हायर सेकेंडरी विद्यालय जो वर्षों से विषयवार शिक्षकों की कमी से जूझ रहे थे, अब व्याख्याता शिक्षकों की पदस्थापना से लाभान्वित हो रहे हैं। इससे विद्यालय के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुलभ हो रही है। शासन की इस महत्वपूर्ण पहल से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के सैकड़ों विद्यालयों में आवश्यकता अनुरूप शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। इससे छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित हुआ है।            गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और प्रत्येक विद्यार्थी को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। इस पहल से दूरस्थ, आदिवासी व ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता का नया संतुलन कायम हो रहा है। यह पहल न केवल खरसिया, बल्कि पूरे रायगढ़ जिले की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। युक्तियुक्तकरण के लिए पालकों एवं छात्रों ने शासन-प्रशासन के प्रति जताया आभार युक्तियुक्तकरण से पालकों और विद्यार्थियों में उत्साह का माहौल। ग्राम कोलम चितवाही के पालकों का कहना है कि लंबे समय से जिस बदलाव की प्रतीक्षा थी, वह अब पूरी हो गई है। इससे बच्चों को न केवल नियमित शिक्षा मिल रही है, बल्कि बेहतर वातावरण और सुविधाएँ भी उपलब्ध हो रही है। पालक महेश अगरिया ने बताया कि उनकी दो बालिकाएं है, वे दोनों ग्राम के शासकीय स्कूल में अध्ययन के लिए जाती है। पहले शिक्षक के कमी के कारण उनके दोनों बच्चों की पढ़ाई काफी प्रभावित हो रही थी, लेकिन युक्तियुक्तकरण से स्कूल में शिक्षकों की पदस्थापना के फलस्वरूप उनकी बच्चियों की पढ़ाई में काफी सुधार आया है। वहीं बालिकाओं ने बताया कि स्कूल में शिक्षक के आ जाने से सभी कक्षाएं नियमित रूप से लग रही है और उन्हें विषयवार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो रही है। उन्होंने स्कूल में बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।

सरकारी स्कूल के बच्चों में पोषाहार के बाद तबियत बिगड़ी, 120 छात्र प्रभावित

दौसा जिले के चूड़ियावास राजकीय सीनियर सेकंडरी स्कूल में शनिवार को पोषाहार खाने के बाद 120 से अधिक बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। सुबह 10 बजे बच्चों को दूध पिलाया गया था और दोपहर के खाने में आलू-टमाटर की सब्जी व रोटी दी गई थी। इसके कुछ देर बाद कई बच्चों को उल्टी व पेट दर्द की शिकायत होने लगी। देखते ही देखते बीमार बच्चों की संख्या 100 के पार हो गई, जिससे स्कूल प्रशासन और शिक्षकों के हाथ-पांव फूल गए। बच्चों को तुरंत जीप, जुगाड़ और मोटर साइकिलों से नांगल राजावतान स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। अस्पताल में बेड कम होने के कारण बच्चों का इलाज फर्श पर बिछाकर शुरू किया गया। करीब 20 बच्चों की हालत गंभीर होने पर उन्हें दौसा जिला अस्पताल रैफर करना पड़ा। सूचना मिलते ही शिक्षा विभाग व पुलिस अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे। घटना की जानकारी लगते ही परिजन भी बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचे और हंगामा मच गया। नर्सिंगकर्मियों व डॉक्टरों ने बच्चों को ड्रिप और इंजेक्शन देकर उपचार शुरू किया। जिला शिक्षा अधिकारी अशोक शर्मा और सीबीईओ सत्यनारायण मीणा ने मौके पर पहुंचकर स्कूल और अस्पताल दोनों जगह के हालातों का जायजा लिया और दूध व रोटी-सब्जी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे।   बताया गया कि सुबह दूध पीने और दोपहर का भोजन करने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़नी शुरू हुई, जबकि  शिक्षकों ने भी वही भोजन किया था। फिलहाल बच्चों की तबीयत स्थिर बताई जा रही है, हालांकि फूड पॉइजनिंग की असल वजह जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

दंतेवाड़ा: आदि कर्मयोगी अभियान के लिए जिला स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त, क्रियान्वयन होगा तेज

दंतेवाड़ा: आदि कर्मयोगी अभियान के लिए जिला स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त, क्रियान्वयन होगा तेज आदि कर्मयोगी अभियान में दंतेवाड़ा जिला को मिली नोडल अधिकारी नियुक्ति, अभियान को मिलेगा नया प्रोत्साहन कलेक्टर द्वारा आदि पर्व सेवा के रूपरेखा के संबंध में अधिकारियों को दिए गए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश आदि कर्मयोगी अभियान का मूल उद्देश्य जनजातीय गांवों में विजन निर्माण एवं परिवर्तनकारी प्रक्रिया, मूलभूत सेवा प्रदाय को उत्कृष्ट बनाने के लिए नोडल अधिकारी गंभीरता से दायित्वों का निर्वहन करें-कलेक्टर दुदावत इसके अंतर्गत आदि सेवा पर्व 17 सितंबर से 02 अक्टूबर तक चलेगा दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ शासन, आदिम जाति विकास विभाग, अनुसूचित जाति विकास विभाग पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग के द्वारा सभी ग्रामों में आदि कर्मयोगी अभियान अंतर्गत कलस्टर का आयोजन कर शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं को प्रत्येक ग्राम के जन तक पहुंचाना है। ज्ञात हो कि अभियान के अतंर्गत  आदिसेवा पर्व/पखवाड़ा (17 सितंबर से 02 अक्टूबर) जिले के सभी ग्राम पंचायतों में मनाया जायेगा। शासन के निर्देशानुसार जिला कार्यालय द्वारा अभियान के सुचारू क्रियान्वयन के तहत जिला स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त कर दायित्व सौंपे गए है। इस संबंध में संपूर्ण अभियान की रूपरेखा निर्धारण के संबंध में कलेक्टर कुणाल दुदावत द्वारा आज जिला पंचायत सभाकक्ष में महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया था। बैठक में अभियान पर प्रकाश डालते हुए कलेक्टर ने कहा कि जनजातीय गांवों में विजन निर्माण एवं परिवर्तनकारी प्रक्रिया है जो जनजातीय समुदायों को अपनी आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करने अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और विकास की दिशा में एक स्थायी मार्ग निर्धारित करने में सक्षम बनाती है। इसमें सामूहिक लक्ष्यों की पहचान करने, स्थानीय चुनौतियों का समाधान करने और प्रगति के लिए पारंपरिक ज्ञान का लाभ उठाने हेतु सहभागी संवाद को बढ़ावा देना शामिल है। इसके तहत ब्लॉक टीम का गठन, गांव के दौरे के लिए रोस्टर,सामुदायिक लामबंदी के लिए जिले के द्वारा सीएसओ की पहचान, सीएसओ द्वारा प्रवेश बिंदु गतिविधि,ट्रांसेक्ट वॉक की घोषणा, प्रारूप भरना, संसाधन मानचित्रण, विजन निर्माण तथा सीएसओ और ब्लॉक टीम द्वारा गांव की जरूरतों को सारणीबद्ध किये जाने जैसे व्यापक चरण शामिल रहेगें। नागरिक समाज संगठन (सीएसओ) इस प्रक्रिया में सुविधा प्रदाता के रूप में कार्य करके, समुदायों और बाहरी संसाधनों के बीच के अंतरालों को पाटकर और समावेशी नीतियों की हिमायत (एडवोकेसी) करके महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। क्षमता निर्माण पहलों, जागरूकता सृजन और सहयोगात्मक साझेदारियों के माध्यम से, नागरिक समाज संगठन जनजातीय गाँवों को आत्मनिर्भर, समतामूलक और सांस्कृतिक रूप से निहित विकास योजनाओं की कल्पना करने और उन्हें साकार करने के लिए सशक्त बनाएंगे। गांव के मानचित्रण के तहत आवास,पानी,बिजली जैसे सेवाओं की उपलब्धता, सामुदायिक संस्थान,पहुंच सेवाएं,आजीविका के संसाधन को सम्मिलात किया जायेगा। जल संसाधन के तहत झरने, तालाब, नदी,नाला,कुएं,बावड़ी, बांध, सिंचाई में सुधार की संभावनाएं परिवर्तन को प्रमुखता से इंगित किये जायेगे। साथ ही आवास,जलापूर्ति,स्वास्थ्य एवं पोषण देखभाल, शिक्षा,सड़क एवं परिवहन, बिजली,सामुदायिक एवं धार्मिक सुविधाएं, संचार, बाजार और व्यापार जैसी मूलभूत सेवाओं में आगामी 5 वर्षों में महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी फीडबैक पर भी नोडल अधिकारियों के सुझाव भी शामिल होगें। इसके साथ ही कलेक्टर दुदावत ने कहा कि आदि कर्म योगी अभियान वस्तुतः स्थानीय समुदाय के परिकल्पना को आदर्श ग्राम के रूप में साकार करना है। क्योकि परिवर्तन में शहरी क्षेत्र में जो विकास के उच्च स्तर के मानक है भविष्य में वे ग्रामीण क्षेत्रों के मानक होगें। अतः इसके लिए नियुक्त नोडल अधिकारी द्वारा ग्राम पंचायतों में जाकर दिये गए विकास के बिंदुओं की गहन जांच पड़ताल करके प्रारूप को भरे जायेगे। कुल मिलाकर यह व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की कोशिश है ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा प्रदाय सेवाओं को उत्कृष्ट बनाया जा सके। बैठक के दौरान अपर कलेक्टर राजेश पात्रे, आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त राजीव नाग सहित जिला प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।

बीएसएफ का बड़ा ऑपरेशन: नक्सली नागेश का विशाल स्मारक जमींदोज

कांकेर कांकेर जिले में नक्सल मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में 47 बटालियन बीएसएफ पखांजूर के जवानों ने एक और बड़ी कार्रवाई की है. जवानों ने भारी बारिश और दुर्गम रास्तों की चुनौती के बीच परतापुर थाना क्षेत्र के गांव वाट्टेकल व परालमस्पी के घने जंगलों में नक्सलियों के बनाए गए लगभग 14 फीट ऊंचे स्मारक को ध्वस्त कर दिया गया है. जानकारी के अनुसार, 47 बटालियन कमांडेंट विजेंद्र नाथ गंगोली के निर्देश पर विशेष ऑपरेशन की योजना बनाई गई थी. 12 जुलाई 2025 की रात को विभिन्न टीमें वालेर नदी और कठिन नालों को पार करते हुए अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पहुंची. गश्त के दौरान जवानों को मृत नक्सली नागेश का बनाया स्मारक मिला, जिसे मौके पर ही उखाड़कर नष्ट कर दिया गया. गौरतलब है कि नक्सली अपने मारे गए साथियों की याद में जगह-जगह स्मारक खड़े करते हैं. इन्हीं स्मारकों के जरिए वे ग्रामीणों पर प्रभाव जमाने और अपनी विचारधारा फैलाने की कोशिश करते हैं.

रायपुर : पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: सूरज की रोशनी से आत्मनिर्भरता की राह पर बाबा साहू

रायपुर रायगढ़ निवासी बाबा साहू की कहानी सिर्फ एक घर को रोशन करने की नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के जरिए आत्मनिर्भरता और हरित भविष्य की एक मिसाल है। अगस्त 2025 में बाबा साहू ने अपने घर की छत पर 5 किलोवाट का सोलर प्लांट स्थापित करके इसकी शुरुआत की। बाबा साहू ने बताया कि सरकारी बैंक से उन्हें लोन की सुविधा आसानी से मिल गई और छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने कुछ ही दिनों में प्लांट का संचालन शुरू कर दिया। इस सरल और पारदर्शी प्रक्रिया ने योजना पर उनका भरोसा और भी मजबूत किया। आज उनके सोलर प्लांट से प्रतिदिन 20-25 यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिससे उनके मासिक बिजली बिल में 80-90 प्रतिशत तक की भारी कमी आई है। बाबा साहू ने बताया कि सोलर प्लांट रख-रखाव बहुत कम है। वे बताते हैं कि यह योजना सिर्फ बिजली बिल कम करने का साधन नहीं है, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने का एक सशक्त माध्यम भी है। बाबा साहू शहरवासियों से कहते हैं कि हर परिवार को अपनी छत को ऊर्जा उत्पादन का साधन बनाना चाहिए, ताकि वे न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बनें, बल्कि एक हरित और सशक्त भविष्य के निर्माण में भी योगदान दे सकें।

रायपुर : पीएम सूर्य घर योजना: सूरज की रोशनी से रोशन हुए घर, बिजली बिल शून्य

रायपुर ऊर्जा आत्मनिर्भरता और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई “पीएम सूर्य घर योजना” से प्रदेश के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। योजना के अंतर्गत घरों की छत पर रूफटॉप सोलर पैनल लगने से अब लोग न केवल अपनी बिजली की जरूरतें पूरी कर रहे हैं, बल्कि ऊर्जा उत्पादक भी बन रहे हैं। मुंगेली जिले के विकासखण्ड पथरिया के सरगॉव ग्राम निवासी श्री लक्की पाड़े इसका उदाहरण बने हैं। उन्होंने योजना का लाभ उठाकर अपने घर पर 3 किलोवॉट का सोलर पैनल स्थापित किया। इससे उनका बिजली बिल शून्य हो गया। श्री पाड़े ने बताया कि पहले हर माह बिजली बिल की चिंता रहती थी, लेकिन अब सूरज की रोशनी से घर रोशन हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और प्रशासन का आभार व्यक्त किया। विद्युत विभाग के अधिकारियों ने बताया कि योजना में उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये और राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा आसान किश्तों में बैंक फाइनेंस और कम ब्याज दर पर ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है। योजना से न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिल रही है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। प्रदेश में इस योजना का तेजी से विस्तार हो रहा है और लोग ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

अम्बेडकर अस्पताल के सर्जरी विभाग में विदेशी युवती का सफल उपचार, मरीज ने जताई कृतज्ञता

रायपुर: अम्बेडकर अस्पताल में जनरल सर्जरी विभाग ने विदेशी युवती का सफल ऑपरेशन किया अम्बेडकर अस्पताल के सर्जरी विभाग में विदेशी युवती का सफल उपचार, मरीज ने जताई कृतज्ञता रायपुर के अम्बेडकर अस्पताल में एक और विदेशी युवती का सफल ऑपरेशन, डॉक्टरों की प्रशंसा 20 वर्षीय युवती के ब्रेस्ट के बेनाइन फाइब्रो एपिथीलियल ट्यूमर की सफल सर्जरी ईस्ट अफ़्रीका के देश रवांडा की रहने वाली है मरीज इससे पहले लाइटलेम्बा, क्रिसेंट (दक्षिण अफ्रीका) की युवती का हो चुका है सफल उपचार रायपुर प्रदेश का सबसे बड़ा पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं इससे संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय लगातार अपनी उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं से न केवल प्रदेश और देश बल्कि विदेशों से आए मरीजों का भी भरोसा जीत रहा है। अनुभवी डॉक्टरों की टीम एवं उपचार प्राप्त करने की सरलतम प्रक्रिया के कारण यह अस्पताल सर्वाधिक विश्वसनीय संस्थान के रूप में अपनी पहचान व्यापक स्तर पर दर्ज कर चुका है। इसी क्रम में हाल ही में अस्पताल के जनरल सर्जरी विभाग में रवांडा (ईस्ट अफ़्रीका) की 20 वर्षीय युवती के लेफ्ट ब्रेस्ट के बेनाइन फाइब्रो एपिथीलियल ट्यूमर का सफल ऑपरेशन किया गया। जनरल सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू सिंह के नेतृत्व में हुए इस ऑपरेशन की विशेषता यह रही कि ब्रेस्ट के ट्यूमर को निकालने के बाद मरीज के भावी जीवन, विशेषकर मातृत्व अवस्था पर इस सर्जरी का कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।  डॉ. मंजू सिंह के अनुसार वर्तमान में युवती पूरी तरह ठीक है और उसे अस्पताल से छुट्टी भी दी जा रही है। ऑपरेशन के संदर्भ में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि एक 20 वर्षीय विदेशी युवती लेफ्ट ब्रेस्ट में दर्द की समस्या के साथ अस्पताल के ब्रेस्ट क्लिनिक में आई थी। जहां पर जांच के बाद पता चला कि उसके ब्रेस्ट में बेनाइन फाइब्रो एपिथेलियल ट्यूमर है। मरीज की बायोप्सी हुई। उसके बाद ब्रेस्ट की कॉस्मेसिस (Cosmesis) मेंटेन करते हुए ऑपरेशन किया गया ।  ब्रेस्ट के ट्यूमर एवं उसके आसपास के टिश्यू को हटाते हुए वाईड लोकल एक्सीजन किया गया। इस बात का ध्यान रखा गया कि ब्रेस्ट के शेप और साइज में कोई अंतर नहीं आये। साथ ही साथ सर्जरी के बाद निशान (scar) भी दिखाई नहीं दे।  पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी के कहा है कि चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के लिए यह गर्व की बात है कि यहाँ न केवल देश बल्कि विदेश से भी मरीज उपचार हेतु आ रहे हैं और स्वस्थ होकर लौट रहे हैं। जनरल सर्जरी विभाग द्वारा युवती का सफल उपचार हमारी चिकित्सा टीम की दक्षता, निष्ठा और समर्पण का प्रमाण है। मैं पूरी टीम को इस सफलता के लिए बधाई देता हूँ और विश्वास दिलाता हूँ कि हमारा संस्थान आगे भी इसी तरह उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करता रहेगा। अम्बेडकर अस्पताल के सर्जरी विभाग की इन उपलब्धियों ने यह साबित कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों की सेवाएँ न केवल सुलभ और किफायती हैं बल्कि उच्चस्तरीय गुणवत्तापरक भी हैं। यही कारण है कि अब विदेशी मरीज भी यहाँ उपचार के लिए आ रहे हैं। अम्बेडकर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने जानकारी देते हुए कहा है कि अम्बेडकर अस्पताल के जनरल सर्जरी विभाग की ओपीडी में ब्रेस्ट क्लीनिक का संचालन नियमित तौर पर किया जा रहा है। यहां पर प्रतिमाह 300 से 400 ब्रेस्ट से संबंधित समस्याओं के केस महिला डॉक्टरों के द्वारा देखे जाते हैं। आवश्यकतानुसार जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन भी किया जाता है। वर्तमान में यहां जनरल सर्जरी विभाग में ब्रेस्ट की रीडक्शन सर्जरी भी की जा रही है जिसमें स्तनों के असामान्य आकार को ऑपरेशन के जरिए सामान्य स्थिति में लाया जाता है।  मरीज का ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. मंजू सिंह के साथ डॉ. अमित अग्रवाल, डॉ. मनीष साहू, डॉ. कृतिका एवं डाॅ. तपिश, एनेस्थीसिया से डॉ. प्रतिभा शाह एवं डॉ. मंजुलता टंडन एवं अन्य शामिल रहे।  गौरतलब है कि इससे पहले भी जनरल सर्जरी विभाग में दक्षिण अफ्रीका की एक युवती का सफल उपचार किया जा चुका है।

सैनिकों पर खूनी हमला, TTP ने हमले की जिम्मेदारी ली

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के अशांत उत्तर-पश्चिमी इलाके में शनिवार तड़के पाकिस्तानी तालिबान (टीटीपी) द्वारा किए गए एक घातक हमले में कम से कम 12 सैनिक मारे गए, जबकि चार अन्य घायल हो गए। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा अधिकारियों ने इस हमले की पुष्टि समाचार एजेंसी एएफपी को की है। जानकारी के अनुसार, यह हमला दक्षिण वजीरिस्तान जिले में सुबह लगभग 4 बजे उस समय हुआ जब सेना का एक काफिला इलाके से गुजर रहा था। स्थानीय सरकारी अधिकारी ने बताया कि “दोनों ओर से भारी हथियारों से फायरिंग की गई, जिसमें 12 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई और चार घायल हुए।” हमलावर मौके से सेना का हथियार-सामान भी लेकर फरार हो गए। इलाके के सुरक्षा प्रभारी ने भी हताहतों की संख्या की पुष्टि करते हुए कहा कि हमला बेहद योजनाबद्ध और तीव्र था। पाकिस्तानी तालिबान ने ली जिम्मेदारी हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन पाकिस्तानी तालिबान ने ली है जिसे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) भी कहा जाता है। हाल के महीनों में यह हमला खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सबसे घातक घटनाओं में से एक माना जा रहा है। टीटीपी कभी इस क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति रखता था, लेकिन 2014 में पाकिस्तानी सेना के बड़े अभियान के बाद उन्हें पीछे हटना पड़ा था। हालांकि, अफगानिस्तान में 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से सीमावर्ती इलाकों में आतंकी गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है। अफगानिस्तान से तनाव भले ही टीटीपी और अफगान तालिबान अलग-अलग संगठन हैं, लेकिन दोनों के बीच नजदीकी रिश्ते माने जाते हैं। पाकिस्तान लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान अपनी जमीन पर सक्रिय आतंकियों को खत्म करने में नाकाम रहा है, जो बाद में पाकिस्तान में हमले करते हैं। वहीं, काबुल प्रशासन इन आरोपों से इनकार करता रहा है। लोगों में बढ़ी आशंका हाल ही में खैबर पख्तूनख्वा के कई जिलों में इमारतों की दीवारों पर टीटीपी का नाम लिखे पोस्टर और नारे (ग्रैफिटी) दिखाई दिए हैं, जिससे आम नागरिकों में भय और यह आशंका बढ़ी है कि कहीं फिर से वह दौर न लौट आए जब तालिबान ने इस क्षेत्र पर कब्ज़ा कर लिया था। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने एएफपी को बताया कि पिछले कुछ महीनों में टीटीपी लड़ाकों की आवाजाही और हमलों की आवृत्ति में काफी वृद्धि हुई है। बढ़ती हिंसा के आंकड़े एएफपी के रिकॉर्ड के मुताबिक, 1 जनवरी 2025 से अब तक खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में करीब 460 लोग आतंकी हमलों में मारे जा चुके हैं जिनमें अधिकतर सुरक्षा बलों के जवान शामिल हैं। वहीं, इस्लामाबाद स्थित सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज के अनुसार, पिछले वर्ष पाकिस्तान ने लगभग एक दशक की सबसे घातक अवधि झेली थी, जब 1,600 से अधिक लोग हिंसा में मारे गए। इनमें से लगभग आधे सैनिक और पुलिसकर्मी थे।  

गगनजीत भुल्लर ने रचा इतिहासए बने पहले आईजीपीएल इनविटेशनल चैंपियन

चंडीगढ़ लगभग दो दशक के अनुभवए शुरुआती ईगल और अंतिम चरण में शानदार बर्डी की बदौलत गगनजीत भुल्लर ने 2.अंडर 70 का स्कोर किया और इतिहास रचते हुए पहले आईजीपीएल इनविटेशनल चैंपियन बने। 11 एशियन टूर खिताब जीत चुके भुल्लर ने तीन राउंड में 70.71.70 का कार्ड बनाया और कुल 5.अंडर स्कोर के साथ दो शॉट की बढ़त से खिताब अपने नाम किया। उन्होंने चंडीगढ़ गोल्फ क्लब में हुए इस मुकाबले में एमण् धर्मा को पीछे छोड़ा। भुल्लर ने जीत के बाद कहाए श्यह जीत इतिहास के पन्नों में दर्ज होगी। कई और आईजीपीएल चैंपियन आगे आएंगेए लेकिन पहला हमेशा मैं रहूंगा।श् इस जीत के साथ भुल्लर ने 22ण्50 लाख रुपये की इनामी राशि हासिल की। उपविजेता रहे धर्मा को 15 लाख रुपये मिलेए जबकि वीर गणपतिए कार्तिक शर्मा और शौर्य बीनू ने लगभग 8ण्7.8ण्7 लाख रुपये साझा किए। धर्मा ने अंतिम राउंड में शानदार बैक नाइन खेला और कुल 70.75.68 का स्कोर कियाए लेकिन शुरुआती नौ में दो बोगी ने उन्हें पीछे कर दिया। वहींए डेब्यू कर रहे बाएं हाथ के खिलाड़ी वीर गणपति ;72.72.70द्धए कार्तिक शर्मा ;73.73.68द्ध और शौर्य बीनू ;69.72.73द्ध संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहे। अनुभवी कपिल कुमार और युवा नील जॉली संयुक्त रूप से छठे स्थान पर रहे। केवल सात खिलाड़ी ही पूरे टूर्नामेंट में अंडर पार स्कोर बना सके। महिला खिलाड़ियों में वापसी कर रहीं जहान्वी बक्षी ने 73.71.75 के स्कोर के साथ 19वां स्थान हासिल किया और वे शीर्ष महिला खिलाड़ी रहीं। आईजीपीएल के सीईओ उत्तम सिंह मुंडी ने कहाए श्आईजीपीएल को हम गोल्फ का नया युग कहते हैं और यह अब शुरू हो चुका है। गगनजीत इसके उपयुक्त विजेता हैं और युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा देंगे। भुल्लर ने कहाए श्पहले आईजीपीएल चैंपियन बनकर मैं गर्व महसूस कर रहा हूं। यह टूर युवा खिलाड़ियोंए महिला खिलाड़ियों और शौकिया खिलाड़ियों को एक मंच पर लाता है। मैं चाहता हूं कि नए खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करें।श् अगला आईजीपीएल टूर्नामेंट 17 से 19 सितम्बर 2025 तक ग्रेटर नोएडा के जेपी ग्रीन्स में खेला जाएगा।