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क्लीन ट्रांसपोर्ट को मिलेगी नई रफ्तार, इंदौर में EV-ग्रीन एनर्जी कॉन्क्लेव; निवेशकों ने दिखाई रुचि

इंदौर  इंदौर में आयोजित कॉन्क्लेव ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए। शेराटन ग्रैंड पैलेस में आयोजित इस कॉन्क्लेव में देशभर से आए निवेशकों, स्टार्टअप संस्थापकों। ह्युन्स ऑफ ईवी द्वारा आयोजित इस सकॉन्क्लेव में 200 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी, निवेशक और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। इंदौर नगर निगम ने सिटी होस्ट पार्टनर के रूप में आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे शहर की स्वच्छ और टिकाऊ विकास के प्रति प्रतिबद्धता भी सामने आई। कॉन्क्लेव में ईवी इकोसिस्टम, बैटरी एवं ऊर्जा प्रबंधन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे विषयों पर एक्सपर्टस ने विस्तृत चर्चा की। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और निवेशकों ने इन क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों और निवेश की संभावनाओं पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण चयनित स्टार्टअप्स की लाइव पिच प्रस्तुति रही। लगभग 2,400 आवेदनों में से बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद नौ स्टार्टअप्स को निवेशकों के समक्ष अपने नवाचार और बिजनेस मॉडल प्रस्तुत करने का अवसर मिला। इस दौरान स्टार्टअप्स और निवेशकों के बीच कई महत्वपूर्ण व्यावसायिक चर्चाएं और नेटवर्किंग सत्र भी आयोजित किए गए। सम्मेलन में कईअग्रणी कंपनियों की भागीदारी रही। आयोजन ने उद्योग, निवेशकों और नवाचार आधारित स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ावा देने का मंच प्रदान किया। एचईवी सीईओ डॉ. ललित सिंह ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और स्वच्छ परिवहन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और ऐसे मंच नवाचार तथा निवेश को नई गति प्रदान करते हैं। वहीं, सलाहकार स्वप्निल बंसल ने कहा कि इंदौर जैसे शहरों में होने वाले ऐसे आयोजन टियर-2 और टियर-3 शहरों के स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय पहचान और निवेश के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। डायरेक्टर आभा सिंह और एडिटर दिव्या ठक्कर ने कहा कि यह कॉन्क्लेव इस बात का प्रमाण है कि स्वच्छ ऊर्जा और ईवी आधारित नवाचार अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं हैं। मध्य भारत भी तेजी से इस बदलाव का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है।  

योगी सरकार में घरेलू रूफटॉप सोलर क्षमता में 2 गीगावाट का ऐतिहासिक आंकड़ा किया पार

बड़ी उपलब्धिः देश के प्रतिष्ठित 2 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्लब में उत्तर प्रदेश हुआ शामिल योगी सरकार में घरेलू रूफटॉप सोलर क्षमता में 2 गीगावाट का ऐतिहासिक आंकड़ा किया पार सोलर विस्तार से उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत मिलने के साथ पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में आई कमी लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में घरेलू रूफटॉप सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 2 गीगावाट (GW) स्थापित क्षमता का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश देश के प्रतिष्ठित "2 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्लब में शामिल हो गया है, जहाँ अब तक केवल गुजरात और महाराष्ट्र जैसे अग्रणी राज्यों की उपस्थिति थी।    यह उपलब्धि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रदेश में सौर ऊर्जा को लेकर बढ़ती जनभागीदारी का परिणाम मानी जा रही है। योजना के अंतर्गत बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने अपने घरों की छतों पर सौर संयंत्र स्थापित कर स्वच्छ एवं सस्ती ऊर्जा को अपनाया है। इस दौरान यूपी नेडा रविंदर सिंह ने बताया कि ऊर्जा क्षेत्र में यह उपलब्धि केवल एक सांख्यिकीय मील का पत्थर नहीं है, बल्कि प्रदेश में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों का प्रतीक है। घरेलू रूफटॉप सोलर के विस्तार से उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत मिलने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में भी मदद मिल रही है।     प्रदेश की इस सफलता में यूपीनेडा के इम्पैनल्ड वेंडर्स, विद्युत विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, बैंकिंग संस्थानों तथा लाखों उपभोक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विभिन्न विभागों और संस्थाओं के समन्वित प्रयासों ने सौर ऊर्जा को जन-आंदोलन का स्वरूप देने में योगदान दिया है।      प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश में घरेलू सौर ऊर्जा क्षेत्र में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की जा रही है। वर्तमान प्रगति को देखते हुए प्रदेश अब देश में शीर्ष राज्यों की श्रेणी में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में अग्रसर है। अधिकारियों का मानना है कि यदि वर्तमान गति बनी रही तो आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश घरेलू रूफटॉप सोलर स्थापना के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों को चुनौती देते हुए नई ऊंचाइयां प्राप्त कर सकता है। उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि राज्य के हरित ऊर्जा भविष्य और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

रायपुर : सोलर पैनल अपनाकर देवश्री साहू बनीं आत्मनिर्भर, बिजली बिल से मिली पूर्ण मुक्ति

रायपुर : सोलर पैनल अपनाकर देवश्री साहू बनीं आत्मनिर्भर, बिजली बिल से मिली पूर्ण मुक्ति रायपुर पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से न केवल बिजली बिल से राहत मिल रही है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी भागीदारी का अवसर दे  रहा है। सोलर पैनल अपनाकर लोग आत्मनिर्भर बन रहे हैं।बलौदाबाजार की शिक्षिका देवश्री साहू ने भी योजना के तहत अपने मकान के छत पर सोलर पैनल लगवाया जिससे अब मुफ्त बिजली का लाभ मिल रहा है।  ग्राम खैरघटा निवासी और पेशे से शिक्षिका  देवश्री साहू  ने बताया कि सोलर पैनल लगाने की प्रेरणा उन्हें अपने भाई के घर से मिली, जहाँ उन्होंने पहली बार इस तकनीक को देखा और इसके फायदों के बारे में विस्तार से समझा। शासन की इस लोक-कल्याणकारी योजना से प्रभावित होकर उन्होंने जून 2025 में अपने घर की छत पर 3 किलोवाट का सोलर पैनल स्थापित करवाया। सोलर पैनल लगने के बाद देवश्री के घर की बिजली व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आया है। उन्होंने हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि पहले जिस बिजली बिल के भुगतान की चिंता बनी रहती थी, वह अब लगभग शून्य हो गया है। साथ ही इसे लगाने पर केंद्र और राज्य सरकार से सब्सिडी भी मिली है। एक शिक्षिका होने के नाते वे समाज में जागरूकता के महत्व को समझती हैं और अब वे अपने आस-पड़ोस के लोगों को भी सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।आज क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।   देवश्री ने अपनी इस आर्थिक बचत और सहूलियत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का हृदय से आभार व्यक्त किया है। उनका मानना है कि यह योजना न केवल पर्यावरण संरक्षण में मददगार है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और उन्हें बिजली के खर्चों से मुक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में 'पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना' का क्रियान्वयन जिस तेजी से हो रहा है, उसका सीधा लाभ देवश्री जैसे मध्यमवर्गीय परिवारों को मिल रहा है।

इंदौर में सफाईकर्मियों के 9 हजार घरों में सोलर ऊर्जा, 270 करोड़ रुपये की बचत का दावा

इंदौर  सस्टेनेबल लिविंग सिटी प्रोग्राम के तहत इंदौर में 9 हजार सफाईकर्मियों के घर सोलर से रोशन करने के लिए नगर निगम और यूनिटी ऑफ नेशनल एक्शन फॉर क्लाइमेट चेंज काउंसिल के बीच एमओयू हुआ है। अगले माह से घरों में सोलर सिस्टम लगाने का काम शुरू होगा  इसके लिए काउंसिल ने सर्वे भी किया है। 180 देशों में काम कर रही इस संस्था ने देश के सबसे साफ शहर इंदौर को इस प्रोजेक्ट के लिए चुना है।  काउंसिल के प्रबंध निदेशक अभिजीत खेमकर ने बताया कि दो से तीन किलोवाट के सिस्टम घरों में लगाए जाएंगे। बाजार में इस सिस्टम की लागत दो से ढाई लाख तक आती है, लेकिन हम इन परिवारों को 1.48 लाख में ही यह सिस्टम लगाकर दे रहे हैं, ताकि कम बिजली बिलों के कारण उनकी बचत हो सके। सिस्टम लगाने पर खर्च होने वाली राशि भी बैंकों से लोन के रूप में मिलेगी। एक परिवार को पांच सौ रुपये महीना की किस्त भरना होगी।   25 साल में 270 करोड़ की बचत काउंसिल के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सफाईकर्मी अपने घरों पर सोलर सिस्टम लगाते हैं तो 25 साल में 270 करोड़ रुपये की बचत इन परिवारों को होगी। केंद्र सरकार की हर घर सोलर योजना के तहत इन परिवारों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत चुना गया है, क्योंकि सफाईकर्मियों के कारण इंदौर स्वच्छता में कई वर्षों से सिरमौर रहा है। काउंसिल की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष शिशिर पंडित ने कहा कि हमारी कोशिश है कि इंदौर देश का पहला सस्टेनेबल नेट-जीरो शहर बने। यह शहर सोलर सिटी में तब्दील हो सकता है।

सोलर दीदी योजना से महिला सशक्तीकरण को मिल रही नई दिशा

सोलर दीदी योजना से महिला सशक्तीकरण को मिल रही नई दिशा सौर तकनीक की ट्रेनिंग लेकर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं गांवों में सौर बिजली संबंधी समस्याओं का मिल रहा जल्द समाधान रोजगार और आय के नए अवसरों से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में “सोलर दीदी” योजना ग्रामीण विकास और महिला सशक्तीकरण का मजबूत आधार बनकर उभर रही है। इस पहल के माध्यम से गांवों की महिलाओं को सौर ऊर्जा से जुड़ी तकनीकी ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। अब महिलाएं सिर्फ घरेलू कार्यों तक सीमित नहीं रहकर ऊर्जा क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रहीं हैं और गांवों में बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। योजना के तहत महिलाओं को सोलर लैंप, सोलर पैनल, चार्जिंग यूनिट और अन्य सौर उपकरणों की स्थापना, संचालन और रखरखाव का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके साथ ही उन्हें तकनीकी खराबियों को ठीक करने और उपकरणों की बिक्री से जुड़ी जानकारी भी दी जाती है। परिणामस्वरूप, जहां पहले ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की कमी एक बड़ी चुनौती थी, वहीं अब “सोलर दीदी” गांव-गांव में ऊर्जा का भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरीं हैं। इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के रूप में देखने को मिल रहा है। सोलर उत्पादों की बिक्री और सेवाओं के माध्यम से महिलाएं नियमित आय अर्जित कर रहीं हैं। कई महिलाएं अपने परिवार की आय में महत्वपूर्ण योगदान दे रहीं हैं और आत्मविश्वास के साथ समाज में अपनी अलग पहचान बना रहीं हैं। सोलर दीदियां न केवल तकनीकी कार्य कर रहीं हैं, बल्कि वे जागरूकता अभियान का भी अहम हिस्सा हैं। वे ग्रामीणों को सौर ऊर्जा के फायदे समझाकर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इससे ऊर्जा की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से यह योजना लगातार विस्तार पा रही है। आने वाले समय में अधिक से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ने की योजना है, ताकि हर गांव ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके। “सोलर दीदी” पहल न केवल गांवों में रोशनी फैला रही है, बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाकर सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नई दिशा भी दे रही है।

उत्तर प्रदेश का सोलर अभियान: 2025-26 में 3.47 लाख संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य

सोलर इंस्टॉलेशन में उत्तर प्रदेश की बड़ी छलांग, 2025-26 में रिकॉर्ड 3.47 लाख संयंत्र स्थापित मार्च में सर्वाधिक 52,729 इंस्टॉलेशन, कुल क्षमता 1161 मेगावाट के पार अप्रैल से मार्च तक इंस्टालेशन में हुई लगातार बढ़ोतरी, अंतिम तिमाही में जबरदस्त उछाल ग्रीन एनर्जी की ओर तेजी से बढ़ता प्रदेश, कुल क्षमता 1524 मेगावाट से अधिक लखनऊ उत्तर प्रदेश ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए रिकॉर्ड 3,47,729 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए हैं। इस दौरान राज्य की कुल स्थापित क्षमता 1161.756 मेगावाट तक पहुंच गई, जो प्रदेश की ग्रीन एनर्जी की दिशा में तेजी को दर्शाता है।    माहवार आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष की शुरुआत अप्रैल 2025 में 15,836 इंस्टॉलेशन से हुए थे, जो मई और जून में बढ़कर क्रमशः 18,509 और 18,494 तक पहुंच गए। जुलाई से इस रफ्तार में बड़ी उछाल देखने को मिली, जहां 29,850 संयंत्र स्थापित हुए और क्षमता 100 मेगावाट के पार पहुंच गई। अगस्त और सितंबर में भी यह गति बरकरार रही, जबकि अक्टूबर में थोड़ी गिरावट के बाद नवंबर और दिसंबर में फिर से तेजी आई। नवंबर में 30,894 और दिसंबर में 31,164 इंस्टॉलेशन दर्ज किए गए।     वास्तविक तेजी वर्ष के अंतिम तीन महीनों में देखने को मिली। जनवरी 2026 में 33,314, फरवरी में 35,804 और मार्च में रिकॉर्ड 52,729 संयंत्र स्थापित किए गए, जो पूरे वर्ष का सर्वाधिक आंकड़ा रहा। केवल मार्च माह में ही 173.84 मेगावाट क्षमता जोड़ी गई, जो किसी एक माह में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि है।    यूपीनेडा के डायरेक्टर इंद्रजीत सिंह ने बताया कि अंतिम तिमाही में आई यह तेजी सरकार की प्रभावी नीतियों, सब्सिडी योजनाओं और जमीनी स्तर पर मजबूत क्रियान्वयन का परिणाम है। इससे न केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ा है, बल्कि उपभोक्ताओं को सस्ती और स्वच्छ बिजली भी उपलब्ध हो रही है।    इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश देश में सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में तेजी से उभर रहा है। उत्तर प्रदेश पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में नंबर वन राज्य बन गया है। कुल मिलकर उत्तर प्रदेश में कुल 4,48,233 सोलर रूफटॉप इंस्टॉल किए जा चुके हैं, जिससे रोजाना 1524  मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। लगातार बढ़ती इंस्टॉलेशन दर यह संकेत देती है कि आने वाले समय में प्रदेश ग्रीन एनर्जी और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को और तेजी से हासिल करेगा।

योजना के तहत ₹3,500 करोड़ से अधिक की सब्सिडी डीबीटी से हस्तांतरित, लगभग 4 लाख परिवार लाभान्वित

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत यूपी में रिकॉर्ड इंस्टॉलेशन, फरवरी में 35,804 रूफटॉप प्लांट स्थापित योजना के तहत ₹3,500 करोड़ से अधिक की सब्सिडी डीबीटी से हस्तांतरित, लगभग 4 लाख परिवार लाभान्वित सूर्य घर योजना से 60,000 से अधिक रोजगार सृजित, रोजाना ₹20-25 करोड़ का सौर कारोबार लखनऊ प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा विस्तार का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रूफटॉप सोलर को जन-आंदोलन का रूप देते हुए प्रदेश ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। राष्ट्रीय पोर्टल के अनुसार राज्य में अब तक 11,64,038 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 3,93,293 रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन पूर्ण हो चुके हैं। इसके माध्यम से 3,98,002 परिवार सीधे लाभान्वित हुए हैं। प्रदेश में कुल स्थापित सौर क्षमता 1,343.5 मेगावाट तक पहुंच चुकी है।  ₹3,500 करोड़ से अधिक की सब्सिडी हस्तांतरित प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश न केवल स्वच्छ ऊर्जा अपनाने में अग्रणी बन रहा है, बल्कि रोजगार सृजन, आर्थिक गतिविधियों के विस्तार, भूमि संरक्षण और डिजिटल ऊर्जा भविष्य की दिशा में भी एक नए युग का नेतृत्व कर रहा है। इस योजना के अंतर्गत ₹2,663.57 करोड़ की केंद्रीय सरकार की सब्सिडी तथा लगभग ₹920 करोड़ की राज्य सरकार की सब्सिडी लाभार्थियों के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से सीधे हस्तांतरित की गई है। उत्तर प्रदेश जुलाई 2025 से लगातार देश में इंस्टॉलेशन के मामले में शीर्ष दो राज्यों में बना हुआ है, जो राज्य की निरंतर प्रगति और मजबूत क्रियान्वयन क्षमता को दर्शाता है।        रिकॉर्ड 35,804 रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित यूपीनेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि फरवरी माह 2026 में उत्तर प्रदेश के लिए सौर ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियों का माह साबित हुआ। इस एक माह के भीतर रिकॉर्ड 35,804 रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किए गए। साथ ही 28 फरवरी 2026 को एक ही दिन में 2,211 इंस्टॉलेशन कर उत्तर प्रदेश ने पूरे भारत में किसी भी राज्य द्वारा एक दिन में किए गए सर्वाधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन का राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया। यह उपलब्धि राज्य की तीव्र कार्यक्षमता और मिशन मोड में चल रहे क्रियान्वयन का प्रमाण है।       60,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार इस योजना ने प्रदेश में व्यापक सौर ऊर्जा अर्थव्यवस्था को जन्म दिया है। वर्तमान में 4,500 से अधिक वेंडर्स सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जिससे 60,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है। प्रतिदिन औसतन 4 से 5 मेगावाट रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन किए जा रहे हैं, जिससे राज्य में प्रतिदिन लगभग ₹20 से ₹25 करोड़ का व्यवसाय उत्पन्न हो रहा है। रूफटॉप सोलर के माध्यम से प्रतिदिन 60 लाख यूनिट से अधिक मुफ्त बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिसका अनुमानित आर्थिक मूल्य लगभग ₹4 करोड़ प्रतिदिन है।    5000 एकड़ से अधिक भूमि की बचत रूफटॉप सोलर मॉडल का एक महत्वपूर्ण लेकिन अप्रत्यक्ष लाभ भूमि संरक्षण के रूप में सामने आया है। इस योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश में 5000 एकड़ से अधिक भूमि की बचत हुई है। यदि यही क्षमता ग्राउंड-माउंटेड सोलर प्लांट्स के माध्यम से स्थापित की जाती, तो विशाल भू-भाग की आवश्यकता होती। अब यह भूमि औद्योगिक, वाणिज्यिक, कृषि तथा अन्य विकासात्मक गतिविधियों के लिए उपलब्ध रह सकती है।     कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी तेजी से बढ़ते इंस्टॉलेशन ने सौर उद्योग से जुड़े उपकरणों जैसे मॉड्यूल, इन्वर्टर, स्ट्रक्चर और केबल की मांग को भी बढ़ाया है, जिससे प्रदेश में एक मजबूत सप्लाई चेन विकसित हुई है। साथ ही, सौर ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि से कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आ रही है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उत्तर प्रदेश अब सौर ऊर्जा को भविष्य के डिजिटल ऊर्जा व्यापार मॉडल से जोड़ने की दिशा में भी अग्रसर है। यूपीनेडा से जुड़े वेंडर्स ऊर्जा उत्पादन को यूनिफाइड एनर्जी इंटरफेस जैसे प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

हरियाणा सरकार की बड़ी पहल: सरकारी इमारतों में सौर ऊर्जा, किसानों के लिए बनेगी समर्थन नीति

पंचकूला  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने  करीब एक दर्जन सरकारी विभागों के बजट खर्च और जरूरी विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जरूरी दिशा निर्देश दिए। बिजली विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए सीएम ने अधिकारियों से कहा कि खेती के लिए पंपों को सोलर आधारित करने के कार्य में तेजी लाई जाए। प्रधानमंत्री कुसुम योजना को समय पर लागू किया जाए। राज्य की सभी सरकारी इमारतों पर रूफटाप सोलर सिस्टम लगाने में तेजी लाई जाए। बस स्टैंड, हैफेड गोदाम और दूसरे सरकारी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी रूफटाप सोलर पैनल लगाए जाएं। बैठक में अधिकारियों ने कहा कि पांच हजार सरकारी इमारतों का सर्वे पूरा कर लिया गया है और रूफटाप सोलर पैनल लगाने का काम चल रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को खराब हालत वाले बस स्टैंड की पहचान करने और उनकी मरम्मत एवं रखरखाव करने के निर्देश दिए। कनीना, बरवाला, टोहाना और निगदू में बस स्टैंड के कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं, जबकि बादली, नीलोखेड़ी, बहल और दूसरे स्थानों पर काम चल रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एमएमएमई के तहत छोटे उद्योगों को अधिक प्रोत्साहन देने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि राज्य में दालों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए। दालों की खेती करने वाले किसानों को बढ़ावा देने के लिए एक विषेष नीति बनाने के निर्देश दिए। सीएम ने अधिकारियों से कहा कि खैर के पेड़ों की गैर-कानूनी कटाई के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने अरावली क्षेत्र में कंजर्वेशन की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि विदेश में पढ़ने या काम करने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों को विदेशी भाषा सिखाने के कार्यक्रम भी चलाए जाएं उन्होंने निर्देश दिये कि ज्यादा से ज्यादा ‘हर हित स्टोर’ सीएम पैक्स खोले जाएं और स्वयं सहायता समूहों को सौंपे जाएं।बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा समेत अधिकारी मौजूद रहे।

सीईईडब्ल्यू की रिपोर्ट: सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से 2047 में खुल सकता है विशाल रीसाइक्लिंग व्यवसाय

नई दिल्ली खराब या प्रयोग से बाहर हो चुके सौर पैनलों से सामग्रियों को निकालना और उन्हें दोबारा इस्तेमाल करना 2047 में 3,700 करोड़ रुपये का बाजार अवसर हो सकता है। यह जानकारी काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) के दो नए स्वतंत्र अध्ययनों से सामने आई है, जिन्हें आज जारी किया गया है। इनमें बताया गया है कि यदि यह संभावित क्षमता हकीकत बनती है तो सौर कचरे से सिलिकॉन, तांबा, एल्यूमीनियम और चांदी जैसी मूल्यवान सामग्रियों को दोबारा निकाला जा सकता है और इससे 2047 तक क्षेत्र की विनिर्माण जरूरतों का 38 प्रतिशत हिस्सा पूरा किया जा सकता है। साथ में, नई सामग्री की जगह पर पुनर्चक्रित सामग्री के उपयोग से 37 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन भी बचाया जा सकता है। भारत का सोलर मॉड्यूल रीसाइक्लिंग मार्केट अभी बहुत प्रारंभिक चरण में है, जिसमें कुछ कमर्शियल रीसाइक्लर्स काम कर रहे हैं। सीईईडब्ल्यू के दोनों अध्ययन एक घरेलू सोलर रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए भारत की पहली व्यापक रूपरेखा उपलब्ध कराते हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा और विनिर्माण में आत्मनिर्भरता, दोनों का ही समर्थन करता है।  अनुमान है कि 2047 तक, भारत की स्थापित सौर क्षमता से 11 मिलियन टन से अधिक सौर कचरा निकल सकता है, जिसका अधिकांश हिस्सा क्रिस्टलीन-सिलिकॉन मॉड्यूल से होगा। इसके प्रबंधन के लिए देश भर में लगभग 300 रीसाइक्लिंग प्लांट्स और 4,200 करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी। ऋषभ जैन, फेलो, सीईईडब्ल्यू, ने कहा, “भारत की सौर क्रांति एक नए हरित औद्योगिक अवसर को ताकत दे सकती है। अपनी स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों में सर्कुलैरिटी (चक्रीयता) को शामिल करके, हम महत्वपूर्ण खनिजों को दोबारा हासिल कर सकते हैं, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बना सकते हैं, और हरित नौकरियां (green jobs) सृजित कर सकते हैं, साथ में, संभावित कचरे को स्थायी मूल्य में बदल सकते हैं। इस सर्कुलर इकोनॉमी (circular economy) का निर्माण भारत के लचीले और जिम्मेदारीपूर्ण विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।” सीईईडब्ल्यू अध्ययन यह भी रेखांकित करता है कि सौर पैनलों की रीसाइक्लिंग (solar recycling) की एक औपचारिक व्यवस्था आज भी अव्यवहार्य है, क्योंकि रीसाइक्लर्स को प्रति टन 10,000-12,000 रुपये का नुकसान हो रहा है। बड़े परिचालन खर्चों में बेकार या प्रयोग से बाहर हो चुके सोलर मॉड्यूल को दोबारा खरीदना है, जो कुल खर्च का लगभग दो-तिहाई (लगभग 600 रुपये प्रति पैनल) होता है। इसके बाद प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग), संग्रहण (कलेक्शन) और निपटान (डिस्पोजल ) की लागत आती है। सौर पैनल रीसाइक्लिंग को लाभदायक बनाने के लिए, खराब मॉड्यूल की कीमत 330 रुपये से कम होनी चाहिए, या रीसाइक्लर्स को ईपीआर सर्टिफिकेट ट्रेडिंग, टैक्स राहत और सिलिकॉन व चांदी की कुशल पुनर्प्राप्ति के लिए शोध एवं विकास निवेश के जरिए मदद दी जानी चाहिए। आकांक्षा त्यागी, प्रोग्राम लीड, सीईईडब्ल्यू, ने कहा, “सोलर रीसाइक्लिंग भारत की स्वच्छ ऊर्जा और विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं के बीच पुल बन सकती है। कचरा प्रबंधन से आगे, यह सरलता से सामग्री निकालने के लिए उपयुक्त पैनल डिजाइन करके, सामग्री की शुद्धता में सुधार लाकर और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए नई वैल्यू चेन बनाकर, इनोवेशन का अवसर भी देता है। ईपीआर लक्ष्यों को लाने, सर्कुलर उत्पादों के लिए मांग पैदा करने, डेटा पारदर्शिता में सुधार लाने और रीसाइक्लिंग को ध्यान में रखकर उत्पादों को डिजाइन करने जैसे उपायों से भारत की सौर कचरे की चुनौती एक हरित उद्योग अवसर में बदल सकती है।” रिसाइक्लिंग को विस्तार देने के लिए, सीईईडब्ल्यू के अध्ययन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के नेतृत्व में ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के तहत संग्रहण और पुनर्प्राप्ति (collection and recovery) के लिए ईपीआर लक्ष्यों को लाने, और नीति, वित्त और उद्योग कार्रवाई में समरूपता के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत एक सर्कुलर सोलर टास्कफोर्स बनाने का सुझाव देते हैं। इममें वेस्ट हॉटस्पॉट का पता लगाने के लिए एक केंद्रीकृत सोलर इन्वेंट्री बनाने का भी सुझाव दिया गया है और निर्माताओं से सामग्री के आंकड़े साझा करने और आसानी से रिसाइकिल होने वाले मॉड्यूल बनाने का आग्रह किया गया है। एक साथ मिलकर ये कदम एक मजबूत संग्रह प्रणाली बनाएंगे, सामग्री को दोबाारा हासिल में अनुसंधान व विकास को बढ़ावा देंगे, और भारत के अक्षय ऊर्जा मिशनों में सर्कुलरिटी को भी शामिल करेंगे, ताकि स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन संसाधनों के मामले में लचीला और आत्मनिर्भर बना रहे।

रायपुर: पीएम सूर्यघर योजना से सपन मंडावी बने ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर, बिजली बिल हुआ शून्य

रायपुर के सपन मंडावी की सफलता कहानी, सोलर पैनल से बने आत्मनिर्भर, अब बिजली बिल नहीं आता पीएम सूर्यघर योजना से बिजली बिल हुआ जीरो रायपुर प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से मध्यम एवं गरीब वर्ग के परिवारों को महंगे बिजली के बिल से निजात दिलाया जा रहा है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना  से ग्रीन एनर्जी मिशन को बढावा देकर पर्यावरण को संतुलन बनाए रखने में मदद मिल रही है, साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर बिजली योजना का लाभ आज जिले के दूरस्थ वनांचल तक भी पहुंच रही है। यह योजना अब जिले के सुदूर ग्रामीण परिवारों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना रही है। इसी कड़ी में कोण्डागांव जिले के माकड़ी विकासखंड के ग्राम शामपुर निवासी सपन राम मंडावी ने इस योजना का लाभ उठाकर अपने घर को न सिर्फ रोशन किया, बल्कि बिजली मामले में आत्मनिर्भर हो गया है।   बिजली बिल से मिली मुक्ति            सपन मंडावी ने बताया कि उन्हें इस योजना की जानकारी सबसे पहले अखबार के माध्यम से मिली। जानकारी प्राप्त करने के बाद उन्होंने स्थानीय बिजली विभाग से संपर्क किया और अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित कराया। इस पहल के बाद अब उनके घर की सभी बिजली की आवश्यकताएँ पूरी हो रही हैं और अतिरिक्त बिजली का उत्पादन भी हो रहा है। श्री मंडावी ने बताया कि पूर्व में हर महीने 400 से 500 रुपये तक बिजली बिल आता था, लेकिन अब उनका पूरा बिल शून्य हो गया है। इतना ही नहीं, उनके द्वारा उत्पन्न अतिरिक्त ऊर्जा सीधे विद्युत ग्रिड में भेजी जा रही है, जिससे भविष्य में उन्हें अतिरिक्त आय का लाभ मिलेगा।           सपन ने इस योजना को शासन की अत्यंत लाभकारी बताते हुए कहा कि इससे घरेलू बिजली उपभोक्ता न केवल ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर हो सकते हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत बन सकते हैं।  मंडावी को इस योजना के अंतर्गत कुल 1 लाख 8 हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई, जिसमें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये और राज्य सरकार से 30 हजार रुपये की सहायता शामिल है। इस मदद से सौर संयंत्र लगाने की कुल लागत में बहुत राहत मिली है। दूर दराज के क्षेत्र व ऐसे क्षेत्र जहां बिजली बहुत ज्;ादा आ रहा है, ऐसे लोगों को इस योजना का भरपूर फायदा मिल रहा है। शासन से मिल रहा है डबल अनुदान      इस योजना के तहत विभिन्न क्षमता वाले संयंत्रों के लिए सब्सिडी की राशि तय की गई है। 1 किलोवाट के संयंत्र, जिसकी लागत लगभग 65 हजार रुपये होती है, जिस पर केंद्र सरकार 30 हजार और राज्य सरकार 15 हजार रुपये की सब्सिडी देती है। इसी प्रकार 2 किलोवाट क्षमता वाले संयंत्र पर 60 हजार रुपये की सहायता एवं 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता वाले प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना पर केंद्र से 78 हजार और राज्य से 30 हजार रुपये की अनुदान राशि मिलती है। इसके साथ ही किसानों और ग्रामीणों के लिए ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे और अधिक लोग इसका लाभ ले सकें।            जिले में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का लाभ उठाने कई हितग्राही आगे आ रहे हैं और पंजीयन करा रहे हैं। इच्छुक उपभोक्ता इस योजना का लाभ विद्युत विभाग की मदद से या फिर वेब पोर्टल https://pmsuryaghar.gov.in और मोबाइल एप के माध्यम से पंजीकरण कर आसानी से उठा सकते हैं।