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सोलर दीदी योजना से महिला सशक्तीकरण को मिल रही नई दिशा

सोलर दीदी योजना से महिला सशक्तीकरण को मिल रही नई दिशा सौर तकनीक की ट्रेनिंग लेकर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं गांवों में सौर बिजली संबंधी समस्याओं का मिल रहा जल्द समाधान रोजगार और आय के नए अवसरों से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में “सोलर दीदी” योजना ग्रामीण विकास और महिला सशक्तीकरण का मजबूत आधार बनकर उभर रही है। इस पहल के माध्यम से गांवों की महिलाओं को सौर ऊर्जा से जुड़ी तकनीकी ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। अब महिलाएं सिर्फ घरेलू कार्यों तक सीमित नहीं रहकर ऊर्जा क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रहीं हैं और गांवों में बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। योजना के तहत महिलाओं को सोलर लैंप, सोलर पैनल, चार्जिंग यूनिट और अन्य सौर उपकरणों की स्थापना, संचालन और रखरखाव का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके साथ ही उन्हें तकनीकी खराबियों को ठीक करने और उपकरणों की बिक्री से जुड़ी जानकारी भी दी जाती है। परिणामस्वरूप, जहां पहले ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की कमी एक बड़ी चुनौती थी, वहीं अब “सोलर दीदी” गांव-गांव में ऊर्जा का भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरीं हैं। इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के रूप में देखने को मिल रहा है। सोलर उत्पादों की बिक्री और सेवाओं के माध्यम से महिलाएं नियमित आय अर्जित कर रहीं हैं। कई महिलाएं अपने परिवार की आय में महत्वपूर्ण योगदान दे रहीं हैं और आत्मविश्वास के साथ समाज में अपनी अलग पहचान बना रहीं हैं। सोलर दीदियां न केवल तकनीकी कार्य कर रहीं हैं, बल्कि वे जागरूकता अभियान का भी अहम हिस्सा हैं। वे ग्रामीणों को सौर ऊर्जा के फायदे समझाकर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इससे ऊर्जा की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से यह योजना लगातार विस्तार पा रही है। आने वाले समय में अधिक से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ने की योजना है, ताकि हर गांव ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके। “सोलर दीदी” पहल न केवल गांवों में रोशनी फैला रही है, बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाकर सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नई दिशा भी दे रही है।

उत्तर प्रदेश का सोलर अभियान: 2025-26 में 3.47 लाख संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य

सोलर इंस्टॉलेशन में उत्तर प्रदेश की बड़ी छलांग, 2025-26 में रिकॉर्ड 3.47 लाख संयंत्र स्थापित मार्च में सर्वाधिक 52,729 इंस्टॉलेशन, कुल क्षमता 1161 मेगावाट के पार अप्रैल से मार्च तक इंस्टालेशन में हुई लगातार बढ़ोतरी, अंतिम तिमाही में जबरदस्त उछाल ग्रीन एनर्जी की ओर तेजी से बढ़ता प्रदेश, कुल क्षमता 1524 मेगावाट से अधिक लखनऊ उत्तर प्रदेश ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए रिकॉर्ड 3,47,729 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए हैं। इस दौरान राज्य की कुल स्थापित क्षमता 1161.756 मेगावाट तक पहुंच गई, जो प्रदेश की ग्रीन एनर्जी की दिशा में तेजी को दर्शाता है।    माहवार आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष की शुरुआत अप्रैल 2025 में 15,836 इंस्टॉलेशन से हुए थे, जो मई और जून में बढ़कर क्रमशः 18,509 और 18,494 तक पहुंच गए। जुलाई से इस रफ्तार में बड़ी उछाल देखने को मिली, जहां 29,850 संयंत्र स्थापित हुए और क्षमता 100 मेगावाट के पार पहुंच गई। अगस्त और सितंबर में भी यह गति बरकरार रही, जबकि अक्टूबर में थोड़ी गिरावट के बाद नवंबर और दिसंबर में फिर से तेजी आई। नवंबर में 30,894 और दिसंबर में 31,164 इंस्टॉलेशन दर्ज किए गए।     वास्तविक तेजी वर्ष के अंतिम तीन महीनों में देखने को मिली। जनवरी 2026 में 33,314, फरवरी में 35,804 और मार्च में रिकॉर्ड 52,729 संयंत्र स्थापित किए गए, जो पूरे वर्ष का सर्वाधिक आंकड़ा रहा। केवल मार्च माह में ही 173.84 मेगावाट क्षमता जोड़ी गई, जो किसी एक माह में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि है।    यूपीनेडा के डायरेक्टर इंद्रजीत सिंह ने बताया कि अंतिम तिमाही में आई यह तेजी सरकार की प्रभावी नीतियों, सब्सिडी योजनाओं और जमीनी स्तर पर मजबूत क्रियान्वयन का परिणाम है। इससे न केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ा है, बल्कि उपभोक्ताओं को सस्ती और स्वच्छ बिजली भी उपलब्ध हो रही है।    इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश देश में सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में तेजी से उभर रहा है। उत्तर प्रदेश पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में नंबर वन राज्य बन गया है। कुल मिलकर उत्तर प्रदेश में कुल 4,48,233 सोलर रूफटॉप इंस्टॉल किए जा चुके हैं, जिससे रोजाना 1524  मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। लगातार बढ़ती इंस्टॉलेशन दर यह संकेत देती है कि आने वाले समय में प्रदेश ग्रीन एनर्जी और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को और तेजी से हासिल करेगा।

योजना के तहत ₹3,500 करोड़ से अधिक की सब्सिडी डीबीटी से हस्तांतरित, लगभग 4 लाख परिवार लाभान्वित

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत यूपी में रिकॉर्ड इंस्टॉलेशन, फरवरी में 35,804 रूफटॉप प्लांट स्थापित योजना के तहत ₹3,500 करोड़ से अधिक की सब्सिडी डीबीटी से हस्तांतरित, लगभग 4 लाख परिवार लाभान्वित सूर्य घर योजना से 60,000 से अधिक रोजगार सृजित, रोजाना ₹20-25 करोड़ का सौर कारोबार लखनऊ प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा विस्तार का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रूफटॉप सोलर को जन-आंदोलन का रूप देते हुए प्रदेश ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। राष्ट्रीय पोर्टल के अनुसार राज्य में अब तक 11,64,038 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 3,93,293 रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन पूर्ण हो चुके हैं। इसके माध्यम से 3,98,002 परिवार सीधे लाभान्वित हुए हैं। प्रदेश में कुल स्थापित सौर क्षमता 1,343.5 मेगावाट तक पहुंच चुकी है।  ₹3,500 करोड़ से अधिक की सब्सिडी हस्तांतरित प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश न केवल स्वच्छ ऊर्जा अपनाने में अग्रणी बन रहा है, बल्कि रोजगार सृजन, आर्थिक गतिविधियों के विस्तार, भूमि संरक्षण और डिजिटल ऊर्जा भविष्य की दिशा में भी एक नए युग का नेतृत्व कर रहा है। इस योजना के अंतर्गत ₹2,663.57 करोड़ की केंद्रीय सरकार की सब्सिडी तथा लगभग ₹920 करोड़ की राज्य सरकार की सब्सिडी लाभार्थियों के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से सीधे हस्तांतरित की गई है। उत्तर प्रदेश जुलाई 2025 से लगातार देश में इंस्टॉलेशन के मामले में शीर्ष दो राज्यों में बना हुआ है, जो राज्य की निरंतर प्रगति और मजबूत क्रियान्वयन क्षमता को दर्शाता है।        रिकॉर्ड 35,804 रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित यूपीनेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि फरवरी माह 2026 में उत्तर प्रदेश के लिए सौर ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियों का माह साबित हुआ। इस एक माह के भीतर रिकॉर्ड 35,804 रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किए गए। साथ ही 28 फरवरी 2026 को एक ही दिन में 2,211 इंस्टॉलेशन कर उत्तर प्रदेश ने पूरे भारत में किसी भी राज्य द्वारा एक दिन में किए गए सर्वाधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन का राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया। यह उपलब्धि राज्य की तीव्र कार्यक्षमता और मिशन मोड में चल रहे क्रियान्वयन का प्रमाण है।       60,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार इस योजना ने प्रदेश में व्यापक सौर ऊर्जा अर्थव्यवस्था को जन्म दिया है। वर्तमान में 4,500 से अधिक वेंडर्स सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जिससे 60,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है। प्रतिदिन औसतन 4 से 5 मेगावाट रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन किए जा रहे हैं, जिससे राज्य में प्रतिदिन लगभग ₹20 से ₹25 करोड़ का व्यवसाय उत्पन्न हो रहा है। रूफटॉप सोलर के माध्यम से प्रतिदिन 60 लाख यूनिट से अधिक मुफ्त बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिसका अनुमानित आर्थिक मूल्य लगभग ₹4 करोड़ प्रतिदिन है।    5000 एकड़ से अधिक भूमि की बचत रूफटॉप सोलर मॉडल का एक महत्वपूर्ण लेकिन अप्रत्यक्ष लाभ भूमि संरक्षण के रूप में सामने आया है। इस योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश में 5000 एकड़ से अधिक भूमि की बचत हुई है। यदि यही क्षमता ग्राउंड-माउंटेड सोलर प्लांट्स के माध्यम से स्थापित की जाती, तो विशाल भू-भाग की आवश्यकता होती। अब यह भूमि औद्योगिक, वाणिज्यिक, कृषि तथा अन्य विकासात्मक गतिविधियों के लिए उपलब्ध रह सकती है।     कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी तेजी से बढ़ते इंस्टॉलेशन ने सौर उद्योग से जुड़े उपकरणों जैसे मॉड्यूल, इन्वर्टर, स्ट्रक्चर और केबल की मांग को भी बढ़ाया है, जिससे प्रदेश में एक मजबूत सप्लाई चेन विकसित हुई है। साथ ही, सौर ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि से कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आ रही है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उत्तर प्रदेश अब सौर ऊर्जा को भविष्य के डिजिटल ऊर्जा व्यापार मॉडल से जोड़ने की दिशा में भी अग्रसर है। यूपीनेडा से जुड़े वेंडर्स ऊर्जा उत्पादन को यूनिफाइड एनर्जी इंटरफेस जैसे प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

हरियाणा सरकार की बड़ी पहल: सरकारी इमारतों में सौर ऊर्जा, किसानों के लिए बनेगी समर्थन नीति

पंचकूला  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने  करीब एक दर्जन सरकारी विभागों के बजट खर्च और जरूरी विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जरूरी दिशा निर्देश दिए। बिजली विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए सीएम ने अधिकारियों से कहा कि खेती के लिए पंपों को सोलर आधारित करने के कार्य में तेजी लाई जाए। प्रधानमंत्री कुसुम योजना को समय पर लागू किया जाए। राज्य की सभी सरकारी इमारतों पर रूफटाप सोलर सिस्टम लगाने में तेजी लाई जाए। बस स्टैंड, हैफेड गोदाम और दूसरे सरकारी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी रूफटाप सोलर पैनल लगाए जाएं। बैठक में अधिकारियों ने कहा कि पांच हजार सरकारी इमारतों का सर्वे पूरा कर लिया गया है और रूफटाप सोलर पैनल लगाने का काम चल रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को खराब हालत वाले बस स्टैंड की पहचान करने और उनकी मरम्मत एवं रखरखाव करने के निर्देश दिए। कनीना, बरवाला, टोहाना और निगदू में बस स्टैंड के कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं, जबकि बादली, नीलोखेड़ी, बहल और दूसरे स्थानों पर काम चल रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एमएमएमई के तहत छोटे उद्योगों को अधिक प्रोत्साहन देने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि राज्य में दालों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए। दालों की खेती करने वाले किसानों को बढ़ावा देने के लिए एक विषेष नीति बनाने के निर्देश दिए। सीएम ने अधिकारियों से कहा कि खैर के पेड़ों की गैर-कानूनी कटाई के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने अरावली क्षेत्र में कंजर्वेशन की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि विदेश में पढ़ने या काम करने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों को विदेशी भाषा सिखाने के कार्यक्रम भी चलाए जाएं उन्होंने निर्देश दिये कि ज्यादा से ज्यादा ‘हर हित स्टोर’ सीएम पैक्स खोले जाएं और स्वयं सहायता समूहों को सौंपे जाएं।बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा समेत अधिकारी मौजूद रहे।

सीईईडब्ल्यू की रिपोर्ट: सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से 2047 में खुल सकता है विशाल रीसाइक्लिंग व्यवसाय

नई दिल्ली खराब या प्रयोग से बाहर हो चुके सौर पैनलों से सामग्रियों को निकालना और उन्हें दोबारा इस्तेमाल करना 2047 में 3,700 करोड़ रुपये का बाजार अवसर हो सकता है। यह जानकारी काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) के दो नए स्वतंत्र अध्ययनों से सामने आई है, जिन्हें आज जारी किया गया है। इनमें बताया गया है कि यदि यह संभावित क्षमता हकीकत बनती है तो सौर कचरे से सिलिकॉन, तांबा, एल्यूमीनियम और चांदी जैसी मूल्यवान सामग्रियों को दोबारा निकाला जा सकता है और इससे 2047 तक क्षेत्र की विनिर्माण जरूरतों का 38 प्रतिशत हिस्सा पूरा किया जा सकता है। साथ में, नई सामग्री की जगह पर पुनर्चक्रित सामग्री के उपयोग से 37 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन भी बचाया जा सकता है। भारत का सोलर मॉड्यूल रीसाइक्लिंग मार्केट अभी बहुत प्रारंभिक चरण में है, जिसमें कुछ कमर्शियल रीसाइक्लर्स काम कर रहे हैं। सीईईडब्ल्यू के दोनों अध्ययन एक घरेलू सोलर रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए भारत की पहली व्यापक रूपरेखा उपलब्ध कराते हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा और विनिर्माण में आत्मनिर्भरता, दोनों का ही समर्थन करता है।  अनुमान है कि 2047 तक, भारत की स्थापित सौर क्षमता से 11 मिलियन टन से अधिक सौर कचरा निकल सकता है, जिसका अधिकांश हिस्सा क्रिस्टलीन-सिलिकॉन मॉड्यूल से होगा। इसके प्रबंधन के लिए देश भर में लगभग 300 रीसाइक्लिंग प्लांट्स और 4,200 करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी। ऋषभ जैन, फेलो, सीईईडब्ल्यू, ने कहा, “भारत की सौर क्रांति एक नए हरित औद्योगिक अवसर को ताकत दे सकती है। अपनी स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों में सर्कुलैरिटी (चक्रीयता) को शामिल करके, हम महत्वपूर्ण खनिजों को दोबारा हासिल कर सकते हैं, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बना सकते हैं, और हरित नौकरियां (green jobs) सृजित कर सकते हैं, साथ में, संभावित कचरे को स्थायी मूल्य में बदल सकते हैं। इस सर्कुलर इकोनॉमी (circular economy) का निर्माण भारत के लचीले और जिम्मेदारीपूर्ण विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।” सीईईडब्ल्यू अध्ययन यह भी रेखांकित करता है कि सौर पैनलों की रीसाइक्लिंग (solar recycling) की एक औपचारिक व्यवस्था आज भी अव्यवहार्य है, क्योंकि रीसाइक्लर्स को प्रति टन 10,000-12,000 रुपये का नुकसान हो रहा है। बड़े परिचालन खर्चों में बेकार या प्रयोग से बाहर हो चुके सोलर मॉड्यूल को दोबारा खरीदना है, जो कुल खर्च का लगभग दो-तिहाई (लगभग 600 रुपये प्रति पैनल) होता है। इसके बाद प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग), संग्रहण (कलेक्शन) और निपटान (डिस्पोजल ) की लागत आती है। सौर पैनल रीसाइक्लिंग को लाभदायक बनाने के लिए, खराब मॉड्यूल की कीमत 330 रुपये से कम होनी चाहिए, या रीसाइक्लर्स को ईपीआर सर्टिफिकेट ट्रेडिंग, टैक्स राहत और सिलिकॉन व चांदी की कुशल पुनर्प्राप्ति के लिए शोध एवं विकास निवेश के जरिए मदद दी जानी चाहिए। आकांक्षा त्यागी, प्रोग्राम लीड, सीईईडब्ल्यू, ने कहा, “सोलर रीसाइक्लिंग भारत की स्वच्छ ऊर्जा और विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं के बीच पुल बन सकती है। कचरा प्रबंधन से आगे, यह सरलता से सामग्री निकालने के लिए उपयुक्त पैनल डिजाइन करके, सामग्री की शुद्धता में सुधार लाकर और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए नई वैल्यू चेन बनाकर, इनोवेशन का अवसर भी देता है। ईपीआर लक्ष्यों को लाने, सर्कुलर उत्पादों के लिए मांग पैदा करने, डेटा पारदर्शिता में सुधार लाने और रीसाइक्लिंग को ध्यान में रखकर उत्पादों को डिजाइन करने जैसे उपायों से भारत की सौर कचरे की चुनौती एक हरित उद्योग अवसर में बदल सकती है।” रिसाइक्लिंग को विस्तार देने के लिए, सीईईडब्ल्यू के अध्ययन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के नेतृत्व में ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के तहत संग्रहण और पुनर्प्राप्ति (collection and recovery) के लिए ईपीआर लक्ष्यों को लाने, और नीति, वित्त और उद्योग कार्रवाई में समरूपता के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत एक सर्कुलर सोलर टास्कफोर्स बनाने का सुझाव देते हैं। इममें वेस्ट हॉटस्पॉट का पता लगाने के लिए एक केंद्रीकृत सोलर इन्वेंट्री बनाने का भी सुझाव दिया गया है और निर्माताओं से सामग्री के आंकड़े साझा करने और आसानी से रिसाइकिल होने वाले मॉड्यूल बनाने का आग्रह किया गया है। एक साथ मिलकर ये कदम एक मजबूत संग्रह प्रणाली बनाएंगे, सामग्री को दोबाारा हासिल में अनुसंधान व विकास को बढ़ावा देंगे, और भारत के अक्षय ऊर्जा मिशनों में सर्कुलरिटी को भी शामिल करेंगे, ताकि स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन संसाधनों के मामले में लचीला और आत्मनिर्भर बना रहे।

रायपुर: पीएम सूर्यघर योजना से सपन मंडावी बने ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर, बिजली बिल हुआ शून्य

रायपुर के सपन मंडावी की सफलता कहानी, सोलर पैनल से बने आत्मनिर्भर, अब बिजली बिल नहीं आता पीएम सूर्यघर योजना से बिजली बिल हुआ जीरो रायपुर प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से मध्यम एवं गरीब वर्ग के परिवारों को महंगे बिजली के बिल से निजात दिलाया जा रहा है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना  से ग्रीन एनर्जी मिशन को बढावा देकर पर्यावरण को संतुलन बनाए रखने में मदद मिल रही है, साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर बिजली योजना का लाभ आज जिले के दूरस्थ वनांचल तक भी पहुंच रही है। यह योजना अब जिले के सुदूर ग्रामीण परिवारों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना रही है। इसी कड़ी में कोण्डागांव जिले के माकड़ी विकासखंड के ग्राम शामपुर निवासी सपन राम मंडावी ने इस योजना का लाभ उठाकर अपने घर को न सिर्फ रोशन किया, बल्कि बिजली मामले में आत्मनिर्भर हो गया है।   बिजली बिल से मिली मुक्ति            सपन मंडावी ने बताया कि उन्हें इस योजना की जानकारी सबसे पहले अखबार के माध्यम से मिली। जानकारी प्राप्त करने के बाद उन्होंने स्थानीय बिजली विभाग से संपर्क किया और अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित कराया। इस पहल के बाद अब उनके घर की सभी बिजली की आवश्यकताएँ पूरी हो रही हैं और अतिरिक्त बिजली का उत्पादन भी हो रहा है। श्री मंडावी ने बताया कि पूर्व में हर महीने 400 से 500 रुपये तक बिजली बिल आता था, लेकिन अब उनका पूरा बिल शून्य हो गया है। इतना ही नहीं, उनके द्वारा उत्पन्न अतिरिक्त ऊर्जा सीधे विद्युत ग्रिड में भेजी जा रही है, जिससे भविष्य में उन्हें अतिरिक्त आय का लाभ मिलेगा।           सपन ने इस योजना को शासन की अत्यंत लाभकारी बताते हुए कहा कि इससे घरेलू बिजली उपभोक्ता न केवल ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर हो सकते हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत बन सकते हैं।  मंडावी को इस योजना के अंतर्गत कुल 1 लाख 8 हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई, जिसमें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये और राज्य सरकार से 30 हजार रुपये की सहायता शामिल है। इस मदद से सौर संयंत्र लगाने की कुल लागत में बहुत राहत मिली है। दूर दराज के क्षेत्र व ऐसे क्षेत्र जहां बिजली बहुत ज्;ादा आ रहा है, ऐसे लोगों को इस योजना का भरपूर फायदा मिल रहा है। शासन से मिल रहा है डबल अनुदान      इस योजना के तहत विभिन्न क्षमता वाले संयंत्रों के लिए सब्सिडी की राशि तय की गई है। 1 किलोवाट के संयंत्र, जिसकी लागत लगभग 65 हजार रुपये होती है, जिस पर केंद्र सरकार 30 हजार और राज्य सरकार 15 हजार रुपये की सब्सिडी देती है। इसी प्रकार 2 किलोवाट क्षमता वाले संयंत्र पर 60 हजार रुपये की सहायता एवं 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता वाले प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना पर केंद्र से 78 हजार और राज्य से 30 हजार रुपये की अनुदान राशि मिलती है। इसके साथ ही किसानों और ग्रामीणों के लिए ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे और अधिक लोग इसका लाभ ले सकें।            जिले में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का लाभ उठाने कई हितग्राही आगे आ रहे हैं और पंजीयन करा रहे हैं। इच्छुक उपभोक्ता इस योजना का लाभ विद्युत विभाग की मदद से या फिर वेब पोर्टल https://pmsuryaghar.gov.in और मोबाइल एप के माध्यम से पंजीकरण कर आसानी से उठा सकते हैं।

रायगढ़ में उपभोक्ता बन रहे ऊर्जा उत्पादक – बचत भी, कमाई भी

रायपुर : प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से बदल रही जिंदगी रायगढ़ में उपभोक्ता बन रहे ऊर्जा उत्पादक – बचत भी, कमाई भी बिजली का बिल हुआ अतीत, सूरज की रोशनी बनी आत्मनिर्भरता का जरिया रायपुर सूरज की किरणें अब केवल जीवनदायिनी शक्ति ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती का नया स्रोत भी बन चुकी हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने आम उपभोक्ताओं को ऊर्जा उपभोक्ता से ऊर्जा उत्पादक बना दिया है। रायगढ़ जिले में यह योजना सैकड़ों परिवारों के जीवन को नई रोशनी दे रही है। अब तक जिले में 300 से अधिक घरों की छत पर सौर पैनल लगाए जा चुके हैं। इस योजना का लाभ उठाने वाले परिवारों के अनुभव ही इसकी असली सफलता की कहानी बयां कर रही हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से बदल रही जिंदगी लोहरसिंह गांव के ईश्वर प्रसाद नायक ने बताया कि 3 किलोवॉट का सोलर प्लांट लगाने के बाद अप्रैल में 267 यूनिट बिजली उत्पन्न हुई। उन्हें 577 रुपए की छूट मिली। मई में उनका पूरा उपभोग सौर ऊर्जा से पूरा हुआ और बिल शून्य हो गया। रायगढ़ के प्रदीप मिश्रा और प्रदीप पटेल ने बताया गया कि इस योजना ने उन्हें आर्थिक राहत के साथ मानसिक शांति और आत्मनिर्भरता का अहसास भी कराया। हीरापुर कोतरा रोड के राजेंद्र चौरसिया ने बताया कि जुलाई में उनके 3 किलोवॉट प्लांट से 507 यूनिट बिजली उत्पन्न हुई। उन्हें 4,178 रुपए की छूट मिली। वे अब अतिरिक्त बिजली ग्रिड में देकर हर महीने हजारों रुपये की बचत कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आम उपभोक्ताओं को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का एक सशक्त माध्यम है। उपभोक्ता न केवल घरेलू जरूरतें पूरी कर सकते हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी अर्जित कर सकते हैं। विभागीय टीमें गांव-गांव जाकर नागरिकों को योजना का लाभ समझा रही हैं। यह योजना केवल सस्ती बिजली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उपभोक्ताओं को बचत और अतिरिक्त कमाई का अवसर देती है। परिवारों को आर्थिक सशक्तिकरण प्रदान करती है। पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देती है।   आकर्षक सब्सिडी और आसान प्रक्रिया विभागीय अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 1 किलोवाट प्लांट से प्रतिमाह लगभग 120 यूनिट बिजली उत्पादन होता है। इसमें केंद्र सरकार 30 हजार रुपए एवं राज्य सरकार 15 हजार रुपए सब्सिडी प्रदान करती है। 2 किलोवाट प्लांट से प्रतिमाह लगभग 240 यूनिट बिजली उत्पादन होता है। इसमें केंद्र सरकार 60 हजार रुपए एवं राज्य सरकार 30 हजार रुपए सब्सिडी देती है। 3 किलोवाट प्लांट से प्रतिमाह लगभग 360 यूनिट बिजली उत्पादन होता है। इसमें केंद्र सरकार 78 हजार रुपए एवं राज्य सरकार 30 हजार रुपए सब्सिडी देती है। शेष राशि उपभोक्ता स्वयं वहन करेंगे, जिसे बैंक ऋण सुविधा के माध्यम से भी प्राप्त किया जा सकता है। योजना का लाभ पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से दिया जा रहा है। उपभोक्ता चउेनतलंहींत.हवअ.पद पोर्टल, पीएम सूर्यघर मोबाइल ऐप, सीएसपीडीसीएल वेबसाइट, मोर बिजली ऐप अथवा टोल-फ्री नंबर 1912 पर कॉल कर आवेदन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त नजदीकी सीएसपीडीसीएल कार्यालय से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उपभोक्ता स्वयं ही ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से वेंडर का चयन कर सकते हैं।

रायपुर: पीएम सूर्यघर योजना से हर घर में पहुंचेगी सूरज की रोशनी, बिजली बनेगी, ज़िंदगी बदलेगी

रायपुर देश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने और हर घर तक स्वच्छ, सस्ती एवं निरंतर बिजली पहुँचाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना शुरू की गई है। यह महत्वाकांक्षी योजना न केवल नागरिकों को बिजली बिल से हमेशा के लिए राहत दिला रही है, बल्कि परिवारों को आत्मनिर्भर बनाते हुए पर्यावरण संरक्षण में भी क्रांतिकारी योगदान दे रही है। छत्तीसगढ़ में इस योजना का क्रियान्वयन मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में अत्यंत प्रभावी और संवेदनशील ढंग से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में सौर ऊर्जा को अपनाने की गति तेज हुई है।  देश की “पावर कैपिटल” कहलाने वाले कोरबा जिले में प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना का प्रभाव विशेष महत्व रखता है। यहाँ अनेक परिवार इस योजना का लाभ उठाकर हर महीने बचत कर रहे हैं और बिजली बिल आने जाने के झमेले से मुक्त हो रहे हैं। इन्हीं में से एक प्रेरक उदाहरण हैं नकटीखार, कोरबा निवासी रंजीत कुमार है, जिन्होंने अपने परिवार के जीवन में ऊर्जा क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया है।  रंजीत कुमार जो एसईसीएल, कुसमुंडा में डंपर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत हैं, मेहनतकश व्यक्ति हैं।  हर महीने आने वाला बिजली बिल, परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें और बच्चों की पढ़ाई के खर्चों के बीच बिजली बिल अक्सर उनके बजट को बिगाड़ देते थे। यही कारण था कि जब प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना की जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत आवेदन कर इसका लाभ उठाने का निश्चय किया। दो माह पहले आवेदन करके उन्होंने अपने घर की छत पर सोलर पैनल सिस्टम लगवाया। जिसकी कुल लागत लगभग 2 लाख 10 हजार रुपए रही, 78 हजार रुपए केंद्र सरकार की सब्सिडी पहले ही मिल चुकी है। शेष राशि में उन्होंने सस्ती व आसान दर पर लोन लेकर तथा कुछ नकद भुगतान देकर किया। सिर्फ कुछ हफ्तों में ही यह निवेश उनके जीवन के लिए सबसे बड़ा वरदान साबित हुआ। पहले जहां उनके घर का बिजली बिल हर महीने एक हजारों रुपए तक पहुँच जाया करता था, वहीं अब सौर ऊर्जा से चल रहे घर का मासिक बिल मात्र 130 रुपए आ रहा है। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना केवल परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और पर्यावरण की भी बड़ी मित्र है। सौर ऊर्जा से न केवल कोयला और डीज़ल जैसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम होती है, बल्कि वायु प्रदूषण में भी भारी कमी आती है। कोरबा जैसे औद्योगिक जिले में, जहाँ कोयला आधारित बिजली उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है, वहां सौर ऊर्जा का बढ़ता उपयोग पर्यावरण संरक्षण में ऐतिहासिक योगदान है। परिवारों को बिजली बिल से मुक्तिमिल रही है, घरों में रोशनी और उपकरणों का संचालन संभव हो रहा है, लोग ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।  कुमार और उनके परिवार ने बताया “अब हमें बिजली बिल की चिंता नहीं रहती। सौर पैनल ने हमारी जिंदगी आसान बना दी है। बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होती और घर के उपकरण भी बिना रुकावट चलते हैं।  आज उनका घर न केवल रोशन है बल्कि ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक आदर्श भी बन गया है। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के सशक्त क्रियान्वयन से आमजन का जीवन बदल रहा है। यह योजना उन हजारों परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो अब तक बिजली का स्थाई उपाय ढूंढ रहें थे। पीएम सूर्यघर योजना ने उन्हें आत्मनिर्भरता, आर्थिक मजबूती और स्वच्छ ऊर्जा की राह दिखाई है।

रायपुर: पीएम सूर्यघर योजना से छत्तीसगढ़ के हितग्राहियों को मुफ्त बिजली का लाभ

राज्य सरकार की अतिरिक्त सब्सिडी से उपभोक्ताओं को मिल रहा दोगुना फायदा, बिजली बिल में राहत और पर्यावरण संरक्षण की सौगात रायपुर पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से छत्तीसगढ़ के हितग्राही हो रहे लाभान्वितप्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत न केवल बिजली बिल में भारी बचत हो रही है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सब्सिडी के साथ अब राज्य सरकार द्वारा भी अतिरिक्त सब्सिडी दिए जाने से यह योजना आम उपभोक्ताओं के लिए और भी लाभप्रद सिद्ध हो रही है। योजना के अंतर्गत 5 किलोवाट तक के सोलर रूफटॉप सिस्टम पर केंद्र सरकार द्वारा 78 हजार रुपए और राज्य सरकार द्वारा 30 हजार रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है। इस पहल से आमजन के बिजली बिल लगभग शून्य हो रहे हैं और अतिरिक्त बिजली उत्पादन से आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है। सक्ती जिले के ग्राम पोरथा निवासी श्री कुलदीप कुमार राठौर ने अपने घर की छत पर 2 किलोवाट का सोलर पैनल स्थापित कराया। इसकी कुल लागत लगभग 1 लाख 40 हजार रुपए रही, जिसमें उन्हें केंद्र सरकार से 60 हजार रुपए की सब्सिडी प्राप्त हुई। श्री राठौर का कहना है कि राज्य सरकार की सब्सिडी मिलना उपभोक्ताओं के लिए अत्यंत लाभप्रद है। अब उनके घर का बिजली बिल पहले की तुलना में काफी कम हो गया है, जिससे आर्थिक बोझ घटा है और वे बचत की राशि अन्य जरूरी कार्यों में उपयोग कर पा रहे हैं। इसी तरह महासमुंद जिले के पीटियाझर निवासी श्री महेश पाल, जो राज्य पुलिस विभाग में कार्यरत हैं, ने अपने घर की छत पर 5 किलोवाट क्षमता का सौर पैनल सिस्टम स्थापित कराया। पिछले दो माह से उनका बिजली बिल शून्य हो गया है और उन्हें क्रेडिट यूनिट का भी लाभ मिल रहा है। श्री पाल का कहना है कि यह योजना न केवल आर्थिक रूप से राहत दे रही है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान करने का अवसर प्रदान कर रही है। प्रदेश में अब तक हजारों उपभोक्ता इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं। केवल महासमुंद जिले में ही 583 उपभोक्ता योजना का लाभ ले रहे हैं। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना छत्तीसगढ़ में तेजी से लोकप्रिय हो रही है और बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ रहे हैं।

रायपुर : पीएम सूर्य घर योजना: सूरज की रोशनी से रोशन हुए घर, बिजली बिल शून्य

रायपुर ऊर्जा आत्मनिर्भरता और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई “पीएम सूर्य घर योजना” से प्रदेश के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। योजना के अंतर्गत घरों की छत पर रूफटॉप सोलर पैनल लगने से अब लोग न केवल अपनी बिजली की जरूरतें पूरी कर रहे हैं, बल्कि ऊर्जा उत्पादक भी बन रहे हैं। मुंगेली जिले के विकासखण्ड पथरिया के सरगॉव ग्राम निवासी श्री लक्की पाड़े इसका उदाहरण बने हैं। उन्होंने योजना का लाभ उठाकर अपने घर पर 3 किलोवॉट का सोलर पैनल स्थापित किया। इससे उनका बिजली बिल शून्य हो गया। श्री पाड़े ने बताया कि पहले हर माह बिजली बिल की चिंता रहती थी, लेकिन अब सूरज की रोशनी से घर रोशन हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और प्रशासन का आभार व्यक्त किया। विद्युत विभाग के अधिकारियों ने बताया कि योजना में उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये और राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा आसान किश्तों में बैंक फाइनेंस और कम ब्याज दर पर ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है। योजना से न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिल रही है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। प्रदेश में इस योजना का तेजी से विस्तार हो रहा है और लोग ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।