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आज का राशिफल (8 नवंबर 2025): मकर राशि के लिए शुभ संकेत, जानें सभी राशियों की भविष्यवाणी

मेष राशि- 8 नवंबर को दिन की शुरुआत ऊर्जा और आत्मविश्वास से होगी। काम में तेजी आएगी, रुके हुए काम दोबारा शुरू होंगे। लेकिन जल्दबाजी से बचें। सोच-समझकर कदम बढ़ाना फायदेमंद रहेगा। ऑफिस में आपके विचारों की सराहना होगी, और किसी वरिष्ठ व्यक्ति से मदद मिल सकती है। आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे मजबूत हो रही है, मगर खर्चों पर नियंत्रण रखें। प्यार में थोड़ा समय और भरोसा दोनों की जरूरत है। शाम को परिवार के साथ कुछ अच्छा समय बिताएं। वृषभ राशि- 8 नवंबर को आपका ध्यान काम और पैसों दोनों पर रहेगा। मेहनत का फल मिलने के योग हैं। किसी पुराने प्रयास का परिणाम आज मिल सकता है। अगर नौकरी बदलने का सोच रहे हैं, तो थोड़ा रुकना बेहतर रहेगा। आने वाले हफ्ते ज्यादा अनुकूल हैं। रिश्तों में स्थिरता रहेगी, लेकिन मन में कुछ पुरानी बातें उभर सकती हैं। सेहत सामान्य रहेगी, बस थकान से बचें। शाम को कुछ मीठा खाने का मन करेगा। मिथुन राशि- 8 नवंबर को दिन संवाद और विचारों का रहेगा। आपकी बातों का असर दूसरों पर पड़ेगा। नए कॉन्टैक्ट बन सकते हैं, जो आगे चलकर काम के साबित होंगे। आर्थिक दृष्टि से दिन संतुलित है। यात्राओं या छोटे ट्रिप का योग बन रहा है। लव लाइफ में कोई नई शुरुआत हो सकती है या पुराने रिश्ते में गर्माहट लौटेगी। ध्यान रखें- एक वक्त में बहुत काम न लें, वरना उलझन बढ़ सकती है। कर्क राशि- 8 नवंबर को आपकी भावनाएं गहरी रहेंगी। किसी प्रिय व्यक्ति से पुरानी बातों पर मन भारी हो सकता है। लेकिन आज चीजें समझने और माफ करने का दिन है। कामकाज में स्थिरता बनी रहेगी, लेकिन निर्णय सोच-समझकर लें। धन के मामले में सतर्क रहें। किसी पर आंख मूँदकर भरोसा न करें। पारिवारिक माहौल थोड़ा संवेदनशील रहेगा। सिंह राशि- 8 नवंबर को आपके आत्मविश्वास की चमक सबको दिखाई देगी। आज का दिन बड़े काम या नए प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए बहुत अच्छा है। ऑफिस में नेतृत्व की भूमिका निभानी पड़ सकती है और आप उसे बखूबी निभाएंगे। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और किसी शुभ समाचार की संभावना है। प्रेम जीवन में जोश रहेगा, लेकिन थोड़ी विनम्रता जरूरी है। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, बस जल की कमी से बचें। कन्या राशि- 8 नवंबर को आपके लिए जिम्मेदारी और अनुशासन का दिन रहेगा। काम में गंभीरता से जुटना पड़ेगा, लेकिन परिणाम अच्छे मिलेंगे। आर्थिक रूप से स्थिरता बनी रहेगी। किसी बड़े अधिकारी या वरिष्ठ से मुलाकात फायदेमंद होगी। रिश्तों में आपको थोड़ा धैर्य रखना होगा। साथी की भावनाएं सुनना जरूरी है। सेहत ठीक रहेगी, बस नींद पूरी लें। तुला राशि- 8 नवंबर को आपको अपनी योजनाओं और व्यवहार दोनों में थोड़ा लचीलापन लाना होगा। ऑफिस में किसी सहयोगी के साथ मतभेद हो सकता है, इसलिए शांत रहना बेहतर होगा। पैसे से जुड़े मामलों में सोच-समझकर कदम उठाएं। प्रेम में संवाद की अहमियत बढ़ेगी। अगर मन में कुछ है तो साफ बोलें। शाम को घर या दोस्तों के साथ हल्का फुल्का समय मन को शांति देगा। सेहत का ध्यान रखें। पाचन से जुड़ी दिक्कत हो सकती है। वृश्चिक राशि- 8 नवंबर को आपका ध्यान रिश्तों और टीमवर्क पर रहेगा। आप दूसरों की मदद करेंगे और बदले में सम्मान पाएंगे। काम में समूह के साथ जुड़ना अच्छा रहेगा। आर्थिक रूप से संतुलन रहेगा, लेकिन निवेश सोच-समझकर करें। प्रेम जीवन में खुलापन और अपनापन दोनों बढ़ेंगे। शाम को मन शांत रहेगा, अगर कोई रचनात्मक काम करें तो संतोष मिलेगा। धनु राशि- 8 नवंबर का दिन संतुलन और सुंदरता का रहेगा। जैसे आपकी राशि का स्वभाव है। आज आप अपने काम में भी आकर्षण और रचनात्मकता ला सकते हैं। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा लेकिन फिजूलखर्ची का ध्यान रखें। रिश्तों में तालमेल बना रहेगा और किसी पुराने दोस्त से मुलाकात खुशी दे सकती है। लव लाइफ में नई उमंग या छोटा सरप्राइज संभव है। सेहत में सुधार के संकेत हैं। मकर राशि- 8 नवंबर को आप रहस्यमय ऊर्जा से भरे रहेंगे। अंदर से कोई नया आत्मविश्वास महसूस होगा। कोई पुराना राज या सच्चाई सामने आ सकती है, जो आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी। आर्थिक मामलों में सुधार के योग हैं। किसी निवेश से फायदा मिल सकता है। प्रेम जीवन में गहराई बढ़ेगी, लेकिन भावनाओं में बहने से बचें। ध्यान और मेडिटेशन से मन को स्थिर करें। कुंभ राशि- 8 नवंबर को भाग्य आपका साथ देगा। नए अवसर सामने आएंगे, खासकर यात्रा या विदेश से जुड़ी योजनाओं में। कामकाज में सफलता और सम्मान दोनों मिल सकते हैं। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा और कोई पुराना उधार लौट सकता है। लव लाइफ में खुलापन रहेगा। अगर दिल में किसी के लिए जगह है तो आज बात आगे बढ़ा सकते हैं। शाम को बाहर घूमना या मूड बदलना फायदेमंद रहेगा। मीन राशि- 8 नवंबर को आप थोड़े भावनात्मक रहेंगे, लेकिन यही आपकी ताकत भी है। आज दिल की बात सुनें, लेकिन हकीकत से जुड़े रहें। काम में रचनात्मक सोच फायदा दिलाएगी। आर्थिक रूप से स्थिर दिन है, मगर फालतू खर्च से बचें। रिश्तों में सुकून और समझ दोनों बढ़ेंगे। अगर किसी बात से मन भारी है, तो ध्यान या संगीत सुनना अच्छा रहेगा।

US नंबर वन’ की हुंकार: ट्रंप ने दिखाई परमाणु शक्ति, दी फिर कड़ी चेतावनी

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दुनिया को तबाह करने के दावे को दोहराते हुए कहा कि अमेरिका के पास पहले से ही इतने परमाणु हथियार हैं कि दुनिया को 150 बार तबाह किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने यही भी कहा कि अमेरिका पूरी दुनिया में नंबर वन है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ मुलाकात को शानदार बताते हुए उन्होंने कहा कि उनका आखिरी लक्ष्य परमाणु निरस्त्रीकरण है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "मुझे लगता है कि परमाणु निरस्त्रीकरण एक बड़ी बात होगी। हम दुनिया को 150 बार तबाह कर सकते हैं।" 'रूस और चीन अमेरिका से काफी पीछे' ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "परमाणु क्षमताओं के मामले में अमेरिका पहले, रूस दूसरे और चीन तीसरे नंबर है। ये काफी पीछे हैं लेकिन अगले पांच सालों में ये लोग बराबरी पर आ जाएंगे। इसकी कोई जरूरत नहीं है, मैंने व्लादिमीर पुतिन और शी चिनफिंग से बात की है और हर कोई उस पैसे को अब दूसरी चीजों पर खर्च करना चाहेगा।" 'दुनिया में शांति चाहता हूं' ट्रंप ने यह भी कहा, "मैं पूरी दुनिया में शांति चाहता हूं।" ट्रंप की यह टिप्पणी पिछले हफ़्ते उनके उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करेगा और उन्होंने पेंटागन को हथियारों का परीक्षण फिर से शुरू करने का निर्देश दिया है। उस समय ट्रंप ने कहा था, "आपको बहुत जल्द पता चल जाएगा। लेकिन हम कुछ परीक्षण करने जा रहे हैं, हां। दूसरे देश ऐसा करते हैं। अगर वे ऐसा करने जा रहे हैं, तो हम भी करेंगे। मैं यहां कुछ नहीं कहूंगा।"  

कौन नहीं, कौन है? बिहार में महिला वोटर तय करेंगी जीत-हार, उम्मीदवार सिर्फ दर्शक!

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में महिलाओं ने एक बार फिर इतिहास रच दिया। रिकॉर्ड 64.66% कुल मतदान में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से कहीं अधिक रही, जो राज्य की राजनीति में उनकी बढ़ती ताकत का प्रमाण है। लेकिन विडंबना यह है कि राजनीतिक दलों ने महिलाओं को टिकट देने में कंजूसी बरती है। कुल 1,314 उम्मीदवारों में महज 122 महिलाएं हैं, जो मात्र 9.28% है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह भागीदारी बनाम प्रतिनिधित्व की गहरी खाई को उजागर करता है, जहां महिलाएं वोटर के रूप में तो निर्णायक हैं, लेकिन उम्मीदवार के रूप में हाशिए पर धकेली जा रही हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक पहले चरण के 121 सीटों पर 3.75 करोड़ मतदाताओं में 1.76 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। मतदान के दौरान महिलाओं की सक्रियता ने कई जिलों में रिकॉर्ड तोड़े। बेगूसराय(67.32%), गोपालगंज(64.96%) और मुजफ्फरपुर (64.63%) में महिलाओं का टर्नआउट पुरुषों से 5-10% अधिक रहा। चुनाव में शानदार रही भागीदारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी विनोद सिंह गुंजि‍याल ने कहा, महिलाओं की भागीदारी शानदार रही। यह बिहार के लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है। अधिकारिक आंकड़ा मतगणना के बाद भी आएगा। यह ट्रेंड 2010 से चला आ रहा है। 2010 में महिलाओं का टर्नआउट 54.49% था (पुरुष: 51.12%), 2015 में 60.48% (पुरुष: 53.32%) और 2020 में 59.7% (पुरुष: 54.5%)। महिलाओं की यह ताकत नीतीश कुमार सरकार की महिला-केंद्रित योजनाओं—जैसे मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना (10,000 रुपये की सहायता)और 35% सरकारी नौकरियों में आरक्षण का नतीजा मानी जा रही है। विपक्षी महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव ने भी महिलाओं के लिए 30,000 रुपये एकमुश्त सहायता का वादा किया है। राजनीतिक विश्लेषक प्रमोद मुकेश कहते हैं, महिलाएं अब जाति से परे वोट दे रही हैं। वे बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा जैसे मुद्दों पर फोकस कर रही हैं। लेकिन पार्टियां उन्हें टिकट देकर सशक्तिकरण की बात तो करती हैं, काम कम करती हैं। सीनियर जर्नलिस्ट ओमप्रकाश अश्क कहते हैं, महिलाओं का वोट सबको चाहिए, मगर टिकट देने के मामले में परिवारवाद और वंशवाद को ही तवज्जो मिल पाता है।  

अवैध परमाणु गतिविधियों पर भारत का बड़ा बयान: ट्रंप के कमेंट को भी लिया गंभीरता से

नई दिल्ली  ट्रंप द्वारा पाकिस्तान के परमाणु परीक्षण के दावों पर भारत ने तगड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि यही तो पाकिस्तान का इतिहास है। उन्होंने कहा कि हम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए पूरी तरह से सतर्क हैं। वह गलत और अवैध तरीके से ही तो सबकुछ करता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दशकों से इसी तरह से तस्करी कर रहा है। निर्यात नियंत्रण का उल्लंघन कर रहा है। गुप-चुप ढंग से साझेदारियां बना रहा है। जायसवाल ने आगे कहा कि हमने हमेशा ही अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस तरफ खींचा है। डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा था गौरतलब है कि पिछले दिनों अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीन दशक के अंतराल के बाद परमाणु हथियारों का परीक्षण फिर से शुरू करने की अपनी योजना को सही ठहराया। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान और चीन उन देशों में शामिल हैं जो परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ट्रंप के इसी बयान का जिक्र कर रहे थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि निश्चित रूप से उत्तर कोरिया परीक्षण कर रहा है। पाकिस्तान भी परीक्षण कर रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले सप्ताह कहा था कि रूस ने पोसाइडन परमाणु-सक्षम ‘सुपर टॉरपीडो’ का परीक्षण किया है। ट्रंप ने अपने वक्तव्य में परमाणु हथियारों के परीक्षण की प्रक्रिया पुनः शुरू करने के अपने निर्णय को दृढ़तापूर्वक उचित ठहराया। उन्होंने कहा कि हथियारों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए परीक्षण आवश्यक है।   अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि दूसरे देश परीक्षण करते हैं, और हम परीक्षण नहीं करते। हमें परीक्षण करना ही होगा। रूस ने भी कुछ दिन पहले थोड़ी धमकी दी थी जब उसने कहा था कि वे कुछ अलग स्तर के परीक्षण करने वाले हैं। लेकिन रूस परीक्षण करता है, चीन परीक्षण करता है, और हम भी परीक्षण करने वाले हैं। इस दौरान रणधीर जायसवाल ने कई अन्य बातों का भी जिक्र किया। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के भारत आने के दावे की भी बात की। प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि ट्रंप कब भारत आएंगे। उन्होंने कहा कि इस बारे में जानकारी मिलते ही वह बताएंगे।  

अब फिरोजपुर से दिल्ली तक सफर होगा फटाफट, वंदे भारत का नया स्टॉप हरियाणा में

अंबाला फिरोजपुर से दिल्ली के बीच चलने वाली आठ कोच वाली नई वंदे भारत एक्सप्रेस 8 नवंबर से पटरी पर दौड़ने को तैयार है। रेलवे ने ट्रेन का नंबर 02461 / 02462 तय कर दिया है, जबकि उद्घाटन के दिन यह ट्रेन विशेष नंबर 02661 / 02662 से चलाई जाएगी। रेलवे ने इन नंबरों को अपने CRIS सॉफ्टवेयर पर अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं, ट्रेन के किराए को लेकर भी मंथन चल रहा है और जल्द ही इसकी जानकारी सिस्टम पर अपलोड कर दी जाएगी। सीटें और कोच संरचना देश में अब तक चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों में 16 कोच होते हैं, लेकिन फिरोजपुर-दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस में केवल 8 कोच होंगे। इनमें 6 चेयर कार (Chair Car) और 2 एक्जीक्यूटिव क्लास (Executive Class) डिब्बे शामिल हैं। प्रत्येक चेयर कार में 78 यात्री, जबकि एक्जीक्यूटिव डिब्बे में 52 यात्री बैठ सकेंगे। इस तरह ट्रेन में कुल 572 सीटें उपलब्ध रहेंगी। अंबाला कैंट स्टेशन पर होगा भव्य स्वागत  नई वंदे भारत एक्सप्रेस का स्वागत अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर किया जाएगा। रेलवे ने प्लेटफार्म नंबर 1 पर स्वागत समारोह के लिए पंडाल लगाने की तैयारी पूरी कर ली है। फिरोजपुर से आने वाली ट्रेन को प्लेटफार्म 1, जबकि दिल्ली से लौटने वाली ट्रेन को प्लेटफार्म 7 पर ठहराव दिया जाएगा। समय-सारणी में हुआ परिवर्तन रेलवे ने 8 नवंबर से ट्रेन के समय में बदलाव किया है। नई समय-सारणी के अनुसार  ट्रेन नंबर 02462 (फिरोजपुर–दिल्ली वंदे भारत) सुबह 8:05 बजे फिरोजपुर से रवाना होगी, 12:18 बजे अंबाला कैंट पहुंचेगी और 3:05 बजे दिल्ली पहुंचेगी। पहले यह ट्रेन सुबह 7:55 बजे फिरोजपुर से चलकर 11:58 बजे अंबाला कैंट और 2:35 बजे दिल्ली पहुंचती थी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह परिवर्तन अन्य ट्रेनों के संचालन को ध्यान में रखते हुए किया गया है। अधिकारी का बयान अंबाला मंडल के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक एन.के. झा ने बताया कि फिरोजपुर-दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस का ठहराव अंबाला कैंट में रहेगा। 8 नवंबर को ट्रेन के आगमन पर स्टेशन पर इसका स्वागत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ट्रेन के समय में बदलाव इसलिए किया गया है ताकि अन्य ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित न हो।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर काशी पहुंचे

पीएम मोदी का काशी दौरा – ‘हर हर महादेव’ के नारों से गूंजा पूरा बनारस – बरेका में मुख्यमंत्री योगी ने किया प्रधानमंत्री का  स्वागत – 8 नवंबर को पीएम देंगे देश को 4 वंदे भारत ट्रेनों की सौगात – वाराणसी-खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस काशीवासियों के लिए बड़ा तोहफा – धार्मिक पर्यटन को नई रफ्तार देगा बनारस-खजुराहो वंदे भारत वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार की शाम दो दिवसीय दौरे पर अपने संसदीय क्षेत्र काशी पहुंचे। शाम करीब पांच बजे प्रधानमंत्री का विशेष विमान लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, बाबतपुर पर उतरा, जहां प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य तथा जनपद के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना, विधायक डॉ अवधेश सिंह, विधायक सुनील पटेल, विधायक टी राम, कमिश्नर एस. राजलिंगम, पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार सहित अन्य लोगों ने किया। जबकि बरेका पहुंचने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भव्य स्वागत किया। काशीवासियों में उत्साह, मार्ग पर उमड़ा जनसैलाब प्रधानमंत्री सड़क मार्ग द्वारा बीएलडब्ल्यू स्थित गेस्ट हाउस के लिए रवाना हुए। उनका काफ‍िला बाबतपुर से हरहुआ होते हुए ग‍िलट बाजार, जेपी मेहता, फुलवरिया फ्लाईओवर होते हुए बरेका पहुंचा। रास्‍ते में कई जगह पर स्थानीय लोगों सहित पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाध‍िकार‍ियों ने उनका स्‍वागत क‍ि‍या। स्‍वागत से अभ‍ि‍भूत पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने भी वाहन से हाथ ह‍िलाकर लोगों का अभ‍िवादन क‍िया। प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में काशीवासियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने अपने सांसद का स्वागत ‘मोदी-मोदी’ और ‘हर हर महादेव’ के नारों से किया। जगह-जगह सांस्कृतिक कार्यक्रमों, पुष्पवर्षा और भारत माता के जयघोष से पूरा मार्ग देशभक्ति के रंग में रंग गया। एयरपोर्ट से बरेका जाते समय प्रधानमंत्री के काफिले पर जगह-जगह फूलों की वर्षा की गई। पूरा मार्ग केसरिया और तिरंगे रंगों की रोशनी से जगमगा उठा।  मुख्यमंत्री ने किया बरेका गेस्ट हाउस पर स्वागत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का शहर के संत अतुलानंद बाईपास, जेपी मेहता के पास, बरेका एफसीआई गोदाम, बरेका गेट के पास आदि अनेकों स्थानों पर स्वागत किया गया। जबकि बरेका पहुंचने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भव्य स्वागत किया। देश को 4 नई वंदे भारत एक्सप्रेस की सौगात देंगे प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री मोदी 8 नवंबर को वाराणसी से देश को चार नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की सौगात देंगे। इनमें सबसे प्रमुख ट्रेन वाराणसी से खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस होगी, जो काशीवासियों और पूर्वांचल के लिए एक बड़ा उपहार मानी जा रही है। प्रधानमंत्री इन ट्रेनों को बनारस (पूर्व मंडुवाडीह) रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री वर्चुअल माध्यम से अन्य तीन वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाएंगे। इनमें लखनऊ से सहारनपुर वंदे भारत एक्सप्रेस, फिरोजपुर से दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस, एर्नाकुलम से बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस, प्रधानमंत्री इस अवसर पर बनारस स्टेशन पर मौजूद गणमान्य लोगों से संवाद भी कर सकते हैं। धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार बनारस–खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस के संचालन से धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को एक नया आयाम मिलेगा। यह ट्रेन वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट और खजुराहो जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को आपस में जोड़ेगी। नई वंदे भारत एक्सप्रेस वर्तमान में चल रही विशेष ट्रेनों की तुलना में करीब 2 घंटे 40 मिनट का समय बचाएगी। इससे यात्रियों को तेज़, आरामदायक और आधुनिक यात्रा का अनुभव मिलेगा। साथ ही यह ट्रेन यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल खजुराहो तक श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुगम पहुँच प्रदान करेगी, जिससे पर्यटन उद्योग को नया आयाम और आर्थिक गति मिलेगी।

विदेश में चमका पंजाब का लाल! अमृतधारी सिख की उपलब्धि पर जश्न

जालंधर अमेरिका के कनेक्टिकट शहर में हुए स्थानीय चुनावों में जालंधर के स्वर्णजीत सिंह खालसा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर न सिर्फ सिख समुदाय, बल्कि पूरे पंजाब का नाम रोशन किया है। वह कनेक्टिकट के पहले सिख मेयर बने हैं। चुनाव में उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार पीटर नाइस्ट्रम की जगह लेते हुए नॉरविच शहर की कमान संभाल ली है। स्वर्णजीत सिंह ने 2,458 वोट पाकर जीत हासिल की, जबकि उनके मुकाबले ट्रेसी गॉल्ड को 2,250 और स्वतंत्र प्रत्याशी मार्शिया विल्बर को केवल 110 वोट मिले। इस जीत से डैमोक्रेटिक पार्टी को भी नॉरविच में महत्वपूर्ण बढ़त मिली, जहां पहले लंबे समय तक रिपब्लिकन का प्रभाव रहा था।   संघर्ष से नेतृत्व तक का सफर स्वर्णजीत सिंह खालसा का परिवार 1984 के सिख नरसंहार के दौरान विस्थापित हुआ था। बाद में परिवार फिर पंजाब में बसा और फिर स्वर्णजीत 2007 में रोज़गार और अपने नए भविष्य की तलाश में अमेरिका पहुंचे। नॉरविच में उन्होंने शुरुआत में गैस स्टेशन चलाया और बाद में रियल एस्टेट कारोबार में भी पहचान बनाई। 2021 में वह नॉरविच सिटी काउंसिल में चुने गए, जो कनेक्टिकट में किसी सिख समुदाय का पहला प्रतिनिधित्व था। अब 2025 में, वह शहर के मेयर बन गए हैं — यह सिख समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है। लोगों के बीच भरोसा और काम का असर चुनाव प्रचार के दौरान स्वर्णजीत ने स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखा, जिनमें किफायती आवास, स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा, समुदाय में एकजुटता प्रमुख रहे। खालसा अब शहर के बुनियादी ढांचे और डाऊनटाऊन विकास को आगे बढ़ाने के लिए नगर विकास एजैंसी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इससे स्थानीय व्यापारियों, जिनमें पंजाबी और भारतीय समुदाय भी शामिल हैं, के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। उनके समर्थन में न सिर्फ पंजाबी या एशियाई समुदाय आए, बल्कि स्थानीय अमेरिकी परिवारों ने भी उन पर भरोसा जताया। कांग्रेसी सदस्य जो कोर्टनी ने उनके साथ डोर-टू-डोर जाकर प्रचार किया। पहचान और मूल्यों से जुड़ी छवि एक अमृतधारी सिख होने के नाते उन्होंने समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने का काम भी किया। उन्होंने स्कूलों में जाकर बच्चों को सिख इतिहास और पगड़ी की गरिमा के बारे में समझाया और नफरत अपराधों के खिलाफ आवाज उठाई। एफ.बी.आई. भी कर चुकी है सम्मानित स्वर्णजीत सिंह खालसा ने यू.एस. में स्थानीय कानून प्रवर्तन एजैंसियों के साथ मिलकर पुलिस अधिकारियों को सिख धर्म, पगड़ी और किरपान की वास्तविकता व महत्व के बारे में शिक्षित किया। उनके काम के सकारात्मक प्रभाव को देखते हुए एक अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजैंसी ने उनका नामांकन किया था और उन्हें एफ.बी.आई. लीडरशिप अवार्ड से सम्मानित किया गया।  9/11 के बाद अमेरिका में कई बार सिखों, मुसलमानों और अरब समुदायों को गलत पहचान के कारण निशाना बनाया गया। स्वर्णजीत सिंह खालसा ने न केवल सिखों के लिए, बल्कि उन सभी समुदायों के लिए आवाज उठाई, जिन्हें किसी और की हिंसा और नफरत की कीमत चुकानी पड़ी। अपने अभियानों में वे पुलिस और नागरिकों को बताते रहे हैं कि पगड़ी पहचान है, हथियार नहीं। पगड़ी सिख की शान है, उसकी असल पहचान किरपान कोई हथियार नहीं, बल्कि धार्मिक अनुशासन और सत्य की रक्षा का प्रतीक है।   पिता परमिंदरपाल सिंह खालसा भी हैं राजनीति से जुड़े  बेटे सरवनजीत सिंह के मेयर बनने पर उनके पिता परमिंदरपाल सिंह खालसा बेहद खुश हैं। वह पंजाब में राजनीति से जुड़े हैं। शिरोमणि अकाली दल के जिला यूथ प्रधान से लेकर पार्टी के राष्ट्रीय सीनियर उपाध्यक्ष के पद पर भी वह रहे। राजनीति के साथ-साथ सिख सेवक सोसायटी के साथ मिल कर वह लोक सेवा का काम कर रहे हैं। वह सोसाइटी के भारत में प्रमुख की भूमिका निभा रहे हैं। कोरोना से लेकर पंजाब में बाढ़ के हालात में उनकी सोसाइटी की तरफ से प्रभावित लोगों को हर प्रकार की सहायता दी जा रही है, जिसमें भोजन से लेकर बीज और मकान बना कर दिए जाने की योजना भी शामिल है।  

जनजातीय गौरव दिवस पर समूचे प्रदेश में 1 से 15 नवम्बर तक मनाया जाएगा जनजातीय गौरव पखवाड़ा

धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर होंगे विशेष आयोजन रायपुर भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार इस वर्ष 15 नवम्बर 2025 को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में समूचे देश में “जनजातीय गौरव दिवस” भव्य रूप से मनाया जाएगा। इस अवसर पर 1 नवम्बर से 15 नवम्बर 2025 तक “जनजातीय गौरव पखवाड़ा” का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश के सभी जिलों में प्रभारी मंत्री, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि एवं प्रभारी सचिवों की उपस्थिति में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिला स्तरीय समारोह में जनजातीय संस्कृति, लोककला, व्यंजन, हस्तशिल्प और विकास प्रदर्शनी के साथ-साथ भारत सरकार एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का भी प्रदर्शन किया जाएगा। कार्यक्रमों में शहीद वीर नारायण सिंह लोक कला महोत्सव एवं उत्तर छत्तीसगढ़ जनजातीय लोक नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही आश्रम-छात्रावासों, शासकीय संस्थानों और जनजातीय ग्रामों में प्रभातफेरी, जन-जागरूकता यात्राएँ, वृक्षारोपण, निबंध, वाद-विवाद एवं चित्रकला प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएँगी। जनजातीय नायक-नायिकाओं के जीवन और योगदान पर संगोष्ठियाँ भी होंगी। इस पखवाड़े के दौरान विशेष लाभार्थी संतृप्ति शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, जनधन खाता, सिकल सेल जांच, स्वास्थ्य परीक्षण, जाति प्रमाणपत्र वितरण, पीएम किसान सम्मान निधि एवं किसान क्रेडिट कार्ड जैसी सेवाएँ प्रदान की जाएँगी। जिले के “आदि सेवा केन्द्रों” में भी गौरव दिवस का आयोजन किया जाएगा। जिला स्तरीय मुख्य कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों, जनजातीय समुदाय के प्रमुखों, प्रतिभावान बच्चों एवं उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों का सम्मान किया जाएगा। साथ ही पी.एम. जनमन, आदि कर्मयोगी तथा धरतीआबा योजनाओं से संबंधित लघु फिल्में प्रदर्शित की जाएँगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का संदेश-पाठ (पाती वाचन) भी किया जाएगा। जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर यह आयोजन प्रदेश के आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, संघर्ष और गौरवगाथा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का अवसर बनेगा। "धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती हम सबके लिए गर्व और प्रेरणा का अवसर है। भगवान बिरसा मुंडा ने अपने अदम्य साहस, संघर्ष और त्याग से जनजातीय समाज को स्वाभिमान और स्वतंत्रता का संदेश दिया। जनजातीय गौरव पखवाड़ा न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत के उत्सव का प्रतीक है, बल्कि यह आदिवासी समाज के उत्थान, सम्मान और सशक्तिकरण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है। मैं सभी प्रदेशवासियों  से आग्रह करता हूँ कि वे इस पखवाड़े में उत्साहपूर्वक भाग लें और हमारी जनजातीय संस्कृति, परंपरा एवं मूल्यों को आगे बढ़ाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ।"- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल : बैगा गुनिया हड़जोड़ सम्मान के लिए चिन्हित व्यक्तियों को मिलेगी प्रोत्साहन राशि

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा के अनुरूप अनुसूचित जनजाति वर्ग के बैगा, गुनिया एवं हड़जोड़ के चिन्हित व्यक्तियों को प्रति वर्ष 5,000 रुपए की सम्मान सह-प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इस योजना को ‘मुख्यमंत्री बैगा गुनिया हड़जोड़ सम्मान योजना (अनुसूचित जनजाति) वर्ष 2025’ के नाम से जाना जाएगा। योजना के संबंध में 6 नवम्बर को आदिम जाति विकास विभाग द्वारा विस्तृत अधिसूचना जारी की गई है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय बाहुल्य ग्रामीण क्षेत्रों में परंपरागत रूप से वनौषधीय चिकित्सा संबंधी कार्यों में संलग्न बैगा, गुनिया एवं हड़जोड़ लोगों की परंपरागत वनौषधीय चिकित्सा पद्धति को प्रोत्साहित करने और उनके सेवा एवं योगदान को मान्यता देने के उद्देश्य से, जनजातीय गौरव दिवस 15 नवम्बर 2024 के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा प्रति चिन्हित व्यक्ति को प्रतिवर्ष 5,000 रुपए की सम्मान सह-प्रोत्साहन निधि प्रदान करने की घोषणा की गई थी। आदिम जाति विकास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में उल्लेखित है कि ‘मुख्यमंत्री बैगा, गुनिया-हड़जोड़ सम्मान योजना’ का उद्देश्य जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के अंतर्गत परंपरागत रूप से वनौषधियों के ज्ञान में दक्ष बैगा, गुनिया और हड़जोड़ व्यक्तियों के पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करना, उसे आगामी पीढ़ियों तक हस्तांतरित करना और उनके वनौषधीय चिकित्सकीय अनुभवों का अभिलेखीकरण कर उनकी आजीविका एवं सेवा को सुदृढ़ बनाना है। अधिसूचना में यह भी उल्लेख किया गया है कि जनजाति समाजों में वनौषधीय चिकित्सा संबंधी अनुभव परिवारों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होते हैं। अनुसूचित क्षेत्रों के ग्रामों में ऐसे बैगा, गुनिया एवं हड़जोड़ व्यक्ति जो विगत तीन वर्षों से वनौषधीय चिकित्सा सेवा कार्य में संलग्न हैं, उन्हें संरक्षित करने और सम्मानित करने के उद्देश्य से प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिवर्ष 5,000 रुपए की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। छत्तीसगढ़ राज्य के अनुसूचित जनजाति वर्ग के स्त्री, पुरुष एवं तृतीय लिंग (ट्रांसजेंडर) व्यक्ति, जो बैगा, गुनिया या हड़जोड़ के रूप में कम से कम 30 वर्षों से अपने स्थानीय क्षेत्र में सेवाएँ दे रहे हैं तथा जिनके परिवार में कम से कम दो पीढ़ियों से वनौषधीय चिकित्सा का ज्ञान स्थानांतरित हुआ है, पात्र माने जाएंगे। साथ ही, जो व्यक्ति पादप औषधि बोर्ड, आयुष विभाग, वन विभाग या लघु वनोपज संघ जैसी पंजीकृत संस्थाओं से जुड़े हुए हैं, उनका चयन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ग्राम स्तर पर किया जाएगा। ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायत द्वारा प्रेषित नामों की अनुशंसा ग्राम स्तर पर ग्राम सचिव, सरपंच, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन तथा प्राथमिक अथवा माध्यमिक शाला के प्रधानपाठक द्वारा अनुमोदित की जाएगी। इस अनुशंसा के आधार पर संबंधित जिले के सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास स्तर पर गठित समिति — जिसमें संबंधित जनपद अध्यक्ष, अनुसूचित जनजाति वर्ग के एक जनपद सदस्य, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जनपद पंचायत) एवं मंडल संयोजक शामिल होंगे — द्वारा अनुशंसित नामों का परीक्षण और सत्यापन किया जाएगा। सत्यापित सूची आयुक्त, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास कार्यालय को प्रेषित की जाएगी। समिति द्वारा किसी मान्यता प्राप्त संस्था से प्रशिक्षण प्राप्त सदस्यों का विशेष रूप से उल्लेख किया जाएगा। ग्राम सभा/ग्राम पंचायत से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर तथा जनपद स्तर पर गठित समिति की अनुशंसा के उपरांत सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास द्वारा कलेक्टर से अनुमोदन प्राप्त कर प्रस्ताव आयुक्त, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास को भेजा जाएगा। प्राप्त प्रस्तावों के अनुसार जिलों को आवश्यक धनराशि का आबंटन किया जाएगा। तत्पश्चात सहायता राशि का वितरण जिला कलेक्टर द्वारा किया जाएगा तथा सम्मान निधि प्राप्त व्यक्तियों की सूची संबंधित ग्राम सभा में सार्वजनिक रूप से पढ़ी जाएगी। "छत्तीसगढ़ की जनजातीय परंपराएं हमारे सांस्कृतिक वैभव और प्राचीन ज्ञान का जीवंत प्रतीक हैं। बैगा, गुनिया और हड़जोड़ हमारे समाज के वे सम्मानित जन हैं, जिन्होंने सदियों से वनौषधीय चिकित्सा की लोकपरंपरा को जीवित रखा है। उनकी इस अनमोल सेवा और ज्ञान को सम्मान देने के लिए राज्य सरकार ने “मुख्यमंत्री बैगा गुनिया हड़जोड़ सम्मान योजना” प्रारंभ की है। इस योजना के माध्यम से हम न केवल उनके योगदान को मान्यता दे रहे हैं, बल्कि उनकी परंपरागत चिकित्सा प्रणाली को संरक्षित करते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प भी निभा रहे हैं।" – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

वंदे मातरम को बाँटना ही विभाजन की शुरुआत थी: पीएम मोदी

नई दिल्ली वंदे मातरम को भारत की शाश्वत संकल्पना बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने पर वर्ष भर चलने वाले स्मरणोत्सव का शुभारंभ विशेष डाक टिकट और सिक्के के विमोचन के साथ किया। वंदे मातरम की गौरव गाथा को विभिन्न उपमाओं-अलंकरणों से स्पंदन देते हुए पीएम मोदी ने इससे जुड़े इतिहास के एक काले पन्ने को पलटने के साथ ही बिना किसी का नाम लिए वर्तमान चुनौतियों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा- 'आजादी की लड़ाई में वंदे मातरम की भावना ने पूरे राष्ट्र को प्रकाशित किया था, लेकिन दुर्भाग्य से 1937 में वंदे मातरम के महत्वपूर्ण पदों को, उसकी आत्मा के एक हिस्से को अलग कर दिया गया था। वंदे मातरम के टुकड़े किए गए थे। इस विभाजन ने देश के विभाजन के बीज भी बो दिए थे।'   'विभाजनकारी सोच देश के लिए आज भी चुनौती' पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्र निर्माण का इस महामंत्र के साथ ये अन्याय क्यों हुआ? ये आज की पीढ़ी को भी जानना जरूरी है, क्योंकि वही विभाजनकारी सोच देश के लिए आज भी चुनौती बनी हुई है। नई दिल्ली में शुक्रवार को आयोजित वंदे मातरम स्मरणोत्सव के शुभारंभ समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमें इस सदी को भारत की सदी बनाना है। ये साम‌र्थ्य भारत के 140 करोड़ लोगों में है। हमें इसके लिए खुद पर विश्वास करना होगा। उन्होंने चेताया कि इस संकल्प यात्रा में हमें पथभ्रमित करने वाले भी मिलेंगे। नकारात्मक सोच वाले लोग हमारे मन में शंका-संदेह पैदा करने का प्रयास भी करेंगे। तब हमें आनंद मठ का वो प्रसंग याद करना है, जिसमें जब संतान भवानंद वंदे मातरम गाता है तो एक दूसरा पात्र तर्क-वितर्क करता है। वह पूछता है कि तुम अकेले क्या कर पाओगे? तब वंदे मातरम से प्रेरणा मिलती है, जिस माता के इतने करोड़ पुत्र-पुत्री हों, उसके करोड़ों हाथ हों, वो माता अबला कैसे हो सकती है? 'वंदे मातरम एक ऊर्जा है' इस प्रसंग के साथ ही भारत के जन-बल का महत्व रेखांकित करते हुए पीएम ने कहा कि आज तो भारत माता की 140 करोड़ संतान हैं। उसके 280 करोड़ भुजाएं हैं। इनमें से 60 प्रतिशत से भी ज्यादा नौजवान हैं। दुनिया का सबसे बड़ा जनसांख्यिकीय लाभ हमारे पास है। ये साम‌र्थ्य इस देश का है, ये साम‌र्थ्य मां भारती का है। ऐसा क्या है, जो आज हमारे लिए असंभव है? ऐसा क्या है, जो हमें वंदे मातरम के मूल सपने को पूरा करने से रोक सकता है? प्रधानमंत्री ने राष्ट्र गीत को मंत्र बताते हुए देशवासियों को ऊजीकृत करने का प्रयास किया। कहा कि वंदे मातरम एक ऊर्जा है, एक स्वप्न है, एक संकल्प है। ये एक शब्द मां भारती की साधना है। ये आत्मविश्वास से भर देता है और हमारे भविष्य को नया हौसला देता है कि ऐसा कोई संकल्प नहीं, जिसकी सिद्धि न हो सके। ऐसा कोई लक्ष्य नहीं, जो हम भारतवासी पा ना सकें। देश बांटने का अंग्रेजों का खतरनाक प्रयोग था बंगाल विभाजन प्रधानमंत्री ने वंदे मातरम के सहारे इतिहास के कुछ पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई का शायद ही ऐसा कोई अध्याय होगा, जिससे वंदे मातरम किसी न किसी रूप से जुड़ा नहीं था। 1896 में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने कलकत्ता अधिवेशन में वंदे मातरम गाया। 1905 में बंगाल का विभाजन हुआ। ये देश को बांटने का अंग्रेजों का एक खतरनाक प्रयोग था, लेकिन वंदे मातरम उन मंसूबों के आगे चट्टान बनकर खड़ा हो गया। बंगाल के विभाजन के विरोध में सड़कों पर एक ही आवाज थी- वंदे मातरम। उन्होंने कहा कि बरिसाल अधिवेशन में जब आंदोलनकारियों पर गोलियां चलीं, तब भी उनके होंठों पर वही मंत्र था। भारत के बाहर रहकर आजादी के लिए काम कर रहे वीर सावरकर जैसे स्वतंत्र सेनानी जब आपस में मिलते थे तो उनका अभिवादन वंदे मातरम से ही होता था। पीएम ने महात्मा गांधी, श्री अरबिंदो और भीकाजी कामा का भी उल्लेख किया।