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मसूरी में IAS अफसरों की ट्रेनिंग, 39 कलेक्टरों का सिलेक्शन और प्रशासनिक तैयारियां

भोपाल  लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (LBSNAA) मसूरी में मिड करियर ट्रेनिंग आयोजित करेगा। यह ट्रेनिंग 5 जनवरी से 30 जनवरी तक चलेगी। इसमें 122 आईएएस अफसर शामिल होंगे। इसके साथ ही, इसमें एमपी के 39 कलेक्टरों समेत अन्य अधिकारियों को बुलाया गया है। मुख्य सचिव अनुराग जैन को पत्र भेजकर रजिस्ट्रेशन कराने को कहा गया है। हालांकि, प्रदेश के 39 कलेक्टरों को लेकर पेंच फंस गया है। क्या है कारण… चलिए बताते हैं। चुनाव आयोग के आदेशों से बनी परेशानी     इस ट्रेनिंग के दौरान चुनाव आयोग के सख्त निर्देशों की वजह से 39 कलेक्टरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चुनाव आयोग ने SIR के कारण प्रशासनिक फेरबदल पर रोक लगा दी है।     इससे इन कलेक्टरों को ट्रेनिंग में शामिल होने की मंजूरी मिलने की संभावना कम हो गई है। इसलिए, इन 39 कलेक्टरों का मिड करियर ट्रेनिंग में शामिल होना अब मुश्किल नजर आ रहा है। प्रदेश के 39 कलेक्टरों का सिलेक्शन लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशिक्षण अकादमी मसूरी में मिड करियर ट्रेनिंग के लिए किया गया है इसमें उज्जैन संभागायुक्त के अलावा भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, सागर, रीवा जैसे बड़े शहरों के कलेक्टर शामिल है इसके साथ ही मंत्रालय और अलग-अलग विभागों में विभाग प्रमुख के उप सचिव और सचिव के रूप में काम करने वाले आईएएस अधिकारियों को भी ट्रेनिंग के लिए सिलेक्ट किया गया है 24वें मिड करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम के शेड्यूल जारी करते हुए मुख्य सचिव को पत्र लिखा है पांच जनवरी 2026 से 30 जनवरी तक चलने वाले मिड करियर प्रशिक्षण कार्यक्रम के फेज थ्री के लिए 2010 बैच के अधिकारियों का चयन मामला दर मामला के आधार पर किया गया है जबकि 2016 बैच के अधिकारियों के लिए यह तीसरा और अंतिम अवसर है 2017 बैच के अफसरों के लिए दूसरा और वर्ष 2018 बैच के अफसरों के लिए पहला प्रशिक्षण अवसर है ये कलेक्टर ट्रेनिंग के लिए चयनित जिन कलेक्टरों का चयन ट्रेनिंग के लिए किया गया है उसमें भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, ग्वालियर कलेक्टर रूचिका चौहान, धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल, बड़वानी कलेक्टर जयति सिंह, झाबुआ कलेक्टर नेहा मीना, अलीराजपुर कलेक्टर कलेक्टर नीतू माथुर, खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता, बुरहानपुर कलेक्टर हर्ष सिंह, उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह शामिल है साथ ही देवास कलेक्टर ऋतु राज, शाजापुर कलेक्टर रितु बाफना, आगर मालवा कलेक्टर प्रीति यादव, मंदसौर कलेक्टर अदिति गर्ग, नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा, दतिया कलेक्टर स्वन्प्रिल जी वानखेड़े, मुरैना कलेक्टर लोकेश रामचंद्र जांगिड़, श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा को ट्रेनिंग के लिए चुना गया है इसके अलावा रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल, सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी, सतना कलेक्टर सतीश कुमार एस, अनूपपुर कलेक्टर हर्षल पंचोली, उमरिया कलेक्टर धरणेंद्र कुमार जैन, सागर कलेक्टर संदीप जी आर दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर, छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल निवाड़ी कलेक्टर जमुना भिडे सीहोर कलेक्टर बालागुरू के रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा राजगढ़ कलेक्टर गिरीश कुमार मिश्रा विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता नर्मदापुरम कलेक्टर सोनिया मीना हरदा कलेक्टर सिद्थार्थ जैन बैतूल कलेक्टर नरेंद्र कुमार सोमवंशी नरिसंहरपुर कलेक्टर रजनी सिंह छिंदवाड़ा कलेक्टर हरेंद्र नारायण सिवनी कलेक्टर शीतला पटले बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीना, और पांढ़ुर्णा कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ का भी चयन किया गया है 12 दिसंबर तक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा इसमें कहा गया है कि ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए सिलेक्ट किए गए अधिकारियों का रजिस्ट्रेशन 12 दिसंबर तक ऑनलाइन कराने की कार्रवाई कराएं। साथ ही अधिकारियों से कहा गया है कि 19 दिसंबर तक प्रस्तावित प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए संबंधित अधिकारियों के नामांकन की स्वीकृति भेंजे सभी अफसरों को 4 जनवरी को लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी मसूरी के लिए भेजना सुनिश्चित करें इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए उन अधिकारियों का चयन किया गया है जो 31 दिसंबर 2029 के पहले सेवानिवृत्त नहीं हो रहे है भोपाल कलेक्टर, उज्जैन कमिश्नर को भी बुलाया मिड करियर ट्रेनिंग के लिए 2010 बैच के एमपी कैडर को दो आईएएस अधिकारी चुने गए है इनमें भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, उज्जैन कमिश्नर आशीष सिंह शामिल है वीएस चौधरी कोलसानी रुचिका चौहान हरिजिंदर सिंह बी विजय दत्ता अनुग्रह पी चंद्रमौलि शुक्ला नीरज कुमार सिंह पंकज जैन अजय कटेसरिया निधि निवेदिता स्वरोचिष सोमवंशी प्रवीण सिंह अधयक अनुराग वर्मा प्रतिभा पाल फटिंग राहुल हरिदास राजीव रंजन मीना बक्की कार्तिकेयन अवधेश शर्मा कुमार पुरुषोत्तम सुभाष कुमार द्विवेदी धरणेंद्र कुमार जैन नरेंद्र कुमार सोमवंशी राजेश बाथम संतोष कुमार वर्मा अरूण कुमार परमार गिरीश कुमार मिश्रा शिवम वर्मा ,सोनिया मीना हर्ष दीक्षित रजनी सिंह प्रियंक मिश्रा मयंक अग्रवाल अनूप कुमार सिंह संतीष कुमार एस नीरज कुमार वशिष्ठ अमर बहादुर सिंह संदीप जीआर पवन कुमार जैन रिजु बाफना आशीष वशिष्ठ साकेत मालवीय शीतला पटले रिषव गुप्ता लोकेश रामचंद्र जांगिड़ अंकित अष्ठाना नेहा मीना अरुण कुमार विश्वकर्मा भव्या मित्तल क्षितिज सिंघल दीलीप कुमार कापसे बुध्देश कुमार वैद्य अभय कुमार बेडेकर सुधीर कुमार कोचर नीतू माथुर जमुना भिडे अंजू अरुण कुमार परीक्षित संजयराव झाड़े सौरभ संजय सोनवड़े भारसत योगेश तुकाराम राहुल नामदेव धोटे अंकिता धाकरे शेर सिंह मीना अभिलाष मिश्रा देंवेंद्र कुमार नागेंद्र गुरु प्रसाद कुमार सत्यम संजय कुमार जैन राखी सहाय हर्ष सिंह अदिति गर्ग हर्षल पंचोली रितु राज संस्कृति जैन मृणाल मीना पार्थ जायसवाल हिमांशु चंद्रा अर्पिता वर्मा बालागुरू के जे रीभा रौशन कुमार मनोज कुमार सरियाम हरेंद्र नारायण प्रीति यादव जयति सिंह सिध्दार्थ जैन अंशुल गुप्ता स्वन्प्रिल वानखेड़े संजना जैन जगदीश कुमार गोमे अनुराग सक्सेना प्रताप नारायण यादव संघमित्रा गौतम कीर्ति खुरासिया अजीजा सरसार जफर संपना पंकज सोलंकी आशीष सांगवान राजेश कुमार जैन सुचिस्मिता सक्सेना दिशा प्रणय नागवंशी गजेंद्र सिंह नागेश मलिका निगम नागर मंजूषा विक्रांत राय संघ प्रिय शिशिर गेमावत अभिषेक चौधरी तपस्या परिहार सिध्दार्थ जैन प्रथम कौशिक श्याम वीर अमन वैष्णव हरसिमरन प्रीत कौर अंजलि जोसेफ अक्षय कुमार तेम्रवाल रामप्रकाश अहिरवार अर्चना सोलंकी संदीप केरकट्टा अभय सिंह ओहरिया वंदना वर्मा रेखा राठौर नवीन कुमार ध्रुर्वे

किन देशों में महिलाओं की आबादी पुरुषों से अधिक? जानें आंकड़ों के साथ

नई दिल्ली वर्षों से वैश्विक लैंगिक विमर्श शिक्षा, रोजगार और राजनीति में समानता पर केंद्रित रहा है। लेकिन इसी दौरान एक और महत्वपूर्ण बदलाव धीरे-धीरे आकार ले रहा है। जनसंख्या में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ रही है। कई देशों में अब पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक हैं। यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि आबादी के बूढ़े होने, प्रवासन और जीवनशैली में बदलाव के चलते धीरे-धीरे विकसित हुआ है। संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक मामलों विभाग (UN DESA) और विश्व बैंक के 2024 के जनसंख्या आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी यूरोप, एशिया के कुछ हिस्सों और दक्षिणी अफ्रीका में महिलाओं की संख्या स्पष्ट रूप से पुरुषों से अधिक है। यूरोप में यह असंतुलन सबसे अधिक दिखाई देता है। लातविया, लिथुआनिया और यूक्रेन जैसे देशों में हर 100 पुरुषों पर 116 से 118 महिलाएं हैं। यह दुनिया में सबसे अधिक है। इसके पीछे प्रमुख कारण पुरुषों की औसतन कम आयु, रोजगार के लिए पुरुषों का बड़े पैमाने पर प्रवास और उम्रदराज आबादी में महिलाओं की अधिक हिस्सेदारी है। रूस और बेलारूस में स्थिति इससे मिलती-जुलती है। वहीं पुर्तगाल, फ्रांस और जर्मनी जैसे पश्चिमी यूरोपीय देशों में भी महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक है, हालांकि अंतर अपेक्षाकृत कम है। इसका कारण मुख्य रूप से महिलाओं की औसतन 4-6 वर्ष अधिक आयु है। एशिया में नेपाल और हांगकांग में स्पष्ट रुझान नेपाल में बड़ी संख्या में पुरुष विदेशों में रोजगार के लिए जाते हैं, जिससे देश की आबादी में महिलाओं का अनुपात बढ़ जाता है। हांगकांग में महिलाओं की लंबी आयु और पुरुषों की कम सर्वाइवल दर के चलते वर्षों से यह लैंगिक अंतर बना हुआ है। अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका लेसोथो और नामीबिया में पुरुषों का दक्षिण अफ्रीका की खदानों और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने जाना आम है। इससे घरेलू आबादी में महिलाएं बहुसंख्यक हो जाती हैं। अर्जेंटीना और उरुग्वे जैसे दक्षिण अमेरिकी देशों में उम्रदराज आबादी के कारण बुजुर्ग आयु वर्ग में महिलाओं की संख्या पुरुषों से कहीं अधिक है। दुनियाभर में कुल मिलाकर पुरुषों और महिलाओं की संख्या लगभग बराबर है। हर 100 महिलाओं पर लगभग 101 पुरुष हैं। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यह संतुलन पूरी तरह महिलाओं की ओर झुक जाता है। विशेष रूप से 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में अधिकांश देशों में महिलाओं की संख्या स्पष्ट रूप से अधिक है। यह जनसांख्यिकीय परिवर्तन समाज और अर्थव्यवस्था दोनों पर गहरा प्रभाव डालता है। इन आंकड़ों के पीछे सच्चाई यह है कि महिलाएं अधिक समय तक जीवित रहती हैं और कई देशों में वे आबादी की संरचना को नया आकार दे रही हैं।  

सुरक्षा बलों का अभियान तेज, नक्सलियों के लिए प्रोत्साहन योजनाओं के साथ पहली प्राथमिकता सरेंडर

मंडला  नक्सलियों को जड़ से खत्म करने के लिए व्यापक और सख्त अभियान शुरू किया गया है. मार्च 2026 तक नक्सल समस्या पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य तय किया गया है. इसके साथ ही राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए कई आकर्षक योजनाओं की घोषणाएं भी की हैं. मंडला जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है. नक्सलवाद खत्म करने का रोडमैप तैयार एसपी रजत सकलेचा ने बताया "नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का रोडमैप तैयार है. इसके तहत पुलिस और सुरक्षा बल लगातार जंगल के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं. इस बार अभियान में सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं की ताकत भी जुड़ गई है." राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए लुभावनी पुनर्वास नीति लागू की है. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को 20 हज़ार से लेकर 4 लाख 50 हज़ार रुपए तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी. सरेंडर करने वाले नक्सलियों को आर्थिक मदद एसपी रजत सकलेचा ने बताया "सरेंडर करने वाले नक्सलियों को जमीन खरीदने के लिए 20 लाख रुपए तक की मदद दी जाएगी. प्रोत्साहन राशि के रूप में न्यूनतम 5 लाख रुपए, नए जीवन की शुरुआत के लिए 1 लाख 50 हज़ार रुपए,और विवाह करने पर 50 हज़ार रुपए की विशेष सहायता राशि प्रदान की जाएगी. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को फ्री खाद्यान्न भी दिया जाएगा ताकि वे समाज की मुख्यधारा में दोबारा जुड़ सकें. राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए लुभावनी पुनर्वास नीति लागू की है." अन्य नक्सलियों की जानकारी देने पर सरकारी जमीन मिलेगी अगर कोई नक्सली पुलिस को दूसरे नक्सली के आत्मसमर्पण या मूवमेंट की जानकारी देता है, तो उसे सरकारी नौकरी देने पर भी विचार किया जा सकता है. हम चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा नक्सली हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटें. मार्च 2026 तक मंडला को नक्सल मुक्त बनाने का हमारा लक्ष्य है. इस योजना की जानकारी जनता तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने मीडिया, सोशल मीडिया और स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से व्यापक प्रचार अभियान शुरू कर दिया है. सरकार की योजनाएं नक्सलियों तक पहंचाने की अपील सरकार का उद्देश्य साफ है कि जंगलों में छिपे हर नक्सली तक यह संदेश पहुंचे कि अब सरकार सज़ा नहीं, सुधार का मौका दे रही है. मंडला पुलिस और प्रशासन का मानना है कि अगर यह अभियान सफल रहा तो न केवल जिले बल्कि पूरे प्रदेश में शांति और विकास की राह और मजबूत होगी.