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बस परमिट नियमों में होगा बड़ा बदलाव, 899 बसों पर लटकी तलवार, समय सीमा के साथ जांच के आदेश

भोपाल राज्य सरकार बस परमिट नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी कर रही है। अब किसी भी बस को उसके रूट के लिए उतनी ही अवधि का परमिट दिया जाएगा, जितनी उसकी निर्धारित आयु है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी बस का संचालन निर्माण तिथि से 15 वर्ष तक ही संभव है, तो परमिट भी अधिकतम 15 वर्ष तक का ही होगा। वर्तमान व्यवस्था में परमिट पांच-पांच वर्ष की अवधि के लिए जारी किए जाते हैं, जिसके कारण कई मामलों में बसों के परमिट 15 वर्ष से भी अधिक अवधि के लिए वैध दिखाई देते हैं। जबकि राज्य के भीतर बस संचालन की अधिकतम सीमा 15 वर्ष और अंतरराज्यीय संचालन की सीमा 10 वर्ष तय है।   हाल ही में परिवहन सचिव मनीष सिंह ने परिवहन आयुक्त को पत्र लिखकर उन 899 बसों की सूची भेजी है जिनके परमिट 15 वर्ष से अधिक अवधि के लिए जारी किए गए हैं। सचिव ने आशंका जताई है कि ये बसें संभवतः अभी भी चल रही होंगी, इसलिए इनकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। इस पत्र के बाद परिवहन आयुक्त कार्यालय ऐसे नियम लागू करने की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत बसों के परमिट उनकी अधिकतम आयु की अवधि के भीतर ही सीमित रहेंगे। अधिकारियों के अनुसार, परमिट वाहन मालिक के नाम पर जारी होता है, जिसमें बस नंबर और रूट का उल्लेख रहता है। पांच वर्ष का परमिट इसलिए दिया जाता था ताकि बस की 15 वर्ष की अवधि पूरी होने पर मालिक उसी रूट पर अनुमति लेकर दूसरी बस संचालित कर सके और नया परमिट लेने की आवश्यकता न पड़े। लेकिन अब नई व्यवस्था में यह समयसीमा बस की अधिकतम आयु से आगे नहीं जाएगी।  

ध्यान दें यात्रीगण! घने कोहरे की चेतावनी के बीच 32 ट्रेनें 1 दिसंबर से रद्द

अंबाला  सर्दियों का मौसम शुरू होते ही कई क्षेत्रों में सुबह के समय घना कोहरा छाने लगा है। इसी को ध्यान में रखते हुए अंबाला रेल मंडल तथा उत्तरी रेलवे ने अपनी तैयारियां समय से पहले ही पूरी कर ली हैं। अंबाला रेल मंडल ने 1 दिसंबर से लगभग 32 ट्रेनों को रद्द करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही 20 ट्रेनों के संचालन की अवधि में भी कटौती की गई है। जानकारी देते हुए अंबाला रेल मंडल के सीनियर डीसीएम नवीन कुमार ने बताया कि यात्रियों की सुविधा को देखते हुए स्टेशन लेवल पर इंतजाम किए गए हैं। वहीं, हर बार लास्ट मोमेंट पर ट्रेन कैंसिल होती थी, लेकिन इस बार पहले से ही शेड्यूल जारी कर दिया है कौन सी ट्रेन रद्द रहेंगे। इस बारे में जानकारी देते हुए अंबाला रेल मंडल के सीनियर डीसीएम नवीन ने बताया कि बदलते मौसम को देखते हुए लगभग 32 ट्रेनों को रद्द किया गया है और 20 ट्रेनों के संचालन में भी कटौती की गई है। पहले अक्सर ये होता था की लास्ट मोमेंट पर ट्रेन कैंसिल होती थी, जिसकी वजह से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था लेकिन अब पहले से ही कई ट्रेनों को रद्द किया गया है। वहीं, यात्रियों की सुविधा को देखते हुए स्टेशन लेवल पर भी पूरे इंतजाम किया जाते हैं।  

बिहार विधानसभा का अध्यक्ष के लिए प्रेम कुमार और तारकिशोर आगे

पटना बिहार विधानसभा का अध्यक्ष बनने के लिए एनडीए के घटक दलों में लंबी कतार है। जदयू भी अध्यक्ष पद पर दावा कर रहा है, लेकिन भाजपा निश्चिंत है। भाजपा के वरिष्ठ विधायक प्रेम कुमार और पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद का नाम आगे चल रहा है। कुमार नौंवी बार गया शहर से विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। वे विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं। निवर्तमान मंत्रिमंडल में सहकारिता मंत्री हैं। वे अति पिछड़ी जाति से आते हैं। तारकिशोर प्रसाद पांचवीx बार कटिहार से भाजपा उम्मीदवार की हैसियत से चुनाव जीते हैं। वे 2020-22 के बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री रहे हैं। सामाजिक समीकरण के हिसाब से वे वैश्य बिरादरी के हैं, जिन्हें भाजपा का कोर वोटर माना जाता है। इनके अलावा दानापुर के भाजपा विधायक रामकृपाल यादव को भी इस पद के योग्य माना जा रहा है।रामकृपाल केंद्र सरकार में राज्यमंत्री रहे हैं।वे उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें लोकसभा, राज्यसभा, विधान परिषद और विधानसभा सदस्य बनने का अवसर मिला है। वे पटना नगर निगम के डिप्टी मेयर भी रह चुके हैं। अगर यह पद जदयू के हिस्से में जाता है तो 17वीं विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव को अध्यक्ष पद पर बिठाया जा सकता है। सहज और मृदुभाषी नरेंद्र नारायण यादव मधेपुरा जिला के आलमनगर विधानसभा क्षेत्र से लगातार आठवीं बार विधायक चुने गए हैं। नेतृत्व का हरेक निर्णय स्वीकार्य: प्रेम कुमार भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार ने कहा है कि केंद्रीय नेतृत्व का हरेक निर्णय उन्हें स्वीकार्य है। विधानसभा अध्यक्ष बनने के प्रश्न पर मंगलवार को उन्होंने कहा-नेतृत्व अगर निर्देश देता है तो वे इस भूमिका को सहर्ष स्वीकार करेंगे। उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा उनसे मिलने पहुंचे थे। सिन्हा ने कहा कि प्रेम कुमार ने पार्टी की ओर से दी गई हरेक भूमिका का निर्वहन गंभीरता से किया किया है। कृषि और सहकारिता मंत्री के रूप में उनकी सेवा यादगार है।

अयोध्या में लहराया राजवंश का प्रतीक केसरिया ध्वज, ‘ऊँ’ और सूर्य चिन्ह बना आकर्षण

अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पर लगने वाले दिव्य केसरिया ध्वज को तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री चंपत राय ने राम राज्य की आदर्श परिकल्पना, समाज में निर्भय वातावरण के निर्माण, और 'राम सबके और सबके राम' की भावना का जीवंत प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि इस ध्वजारोहण का उद्देश्य परंपरा का निर्वाह करने के साथ-साथ सनातन संस्कृति के उस विराट स्वरूप का पुनर्स्मरण है, जो राष्ट्र को एकजुट करता है। चंपत राय ने बताया कि अयोध्या में आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक आयोजन में आमंत्रित अतिथियों में से लगभग तीन हजार केवल अयोध्या जनपद के हैं, जबकि शेष अतिथि पूरे उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों से आमंत्रित किए गए हैं। उन्होंने पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा कि यह कार्यक्रम अयोध्या की सांस्कृतिक धरोहर और भारतीय आस्था के वैश्विक प्रभाव का प्रतीक बनने जा रहा है। श्रीराम मंदिर का ध्वजारोहण धार्मिक आस्था के उत्सव के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक परंपरा, राजवंशीय गौरव और सनातन मूल्यों का अद्वितीय संगम है। यह अयोध्या की धरती से राष्ट्रभर में एक नई प्रेरणा प्रसारित करेगा। उन्होंने ध्वज पर अंकित प्रतीकों का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि केसरिया रंग ज्वाला, प्रकाश, त्याग और तप का प्रतीक है। मंदिर के 161 फीट ऊंचे शिखर के ऊपर 30 फीट का बाहरी ध्वजदंड लगाया गया है, जिससे ध्वज कुल 191 फीट की ऊंचाई पर लहराएगा। उन्होंने बताया कि केसरिया ध्वज पर अंकित सूर्य प्रभु श्रीराम के सूर्यवंश का द्योतक है, जबकि 'ऊँ' परमात्मा का प्रथम नामाक्षर है, जो चेतना और शाश्वत सत्य का प्रतिनिधित्व करता है। ध्वज पर अंकित कोविदार वृक्ष के संबंध में भी उन्होंने विस्तृत जानकारी दी। यह वृक्ष अयोध्या के राजवंशीय चिह्न के रूप में प्रतिष्ठित रहा है और इसका उल्लेख वाल्मीकि रामायण व हरिवंश पुराण दोनों में मिलता है। ज्ञानीजन इसे पारिजात और मंदार के संयोग से बना बताते हैं। उन्होंने बताया कि मान्यता के अनुसार यह संसार का पहला हाइब्रिड पौधा था। परंपरा में वर्णित है कि इसी कोविदार वृक्ष पर चढ़कर लक्ष्मण ने भरत को सेना सहित वन की ओर आते देखा था।

भारत दौरा अधर में? बांग्लादेश के हालात बिगड़े, महिला क्रिकेट टीम का टूर टल सकता है

नई दिल्ली आईसीसी फ्यूचर टूर प्रोग्राम के तहत दिसंबर में बांग्लादेश के खिलाफ भारत की आगामी घरेलू सीरीज कथित तौर पर बांग्लादेश में महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण स्थगित हो सकती है। भारत और बांग्लादेश की महिला टीमों के बीच इस सीरीज में 3 वनडे और 3 टी20 मैच शामिल हैं। दोनों देशों के बीच इन मुकाबलों के लिए विशिष्ट तिथियों और स्थानों की घोषणा नहीं की गई थी, लेकिन इस सप्ताह बांग्लादेश में हुए राजनीतिक घटनाक्रम से पहले ही दौरे का कार्यक्रम अनिश्चित था। 'ईएसपीएनक्रिकइन्फो' के अनुसार, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से एक पत्र मिला है, जिसमें कहा गया है कि सीमित ओवरों की सीरीज को बाद की तारीख के लिए पुनर्निर्धारित किया जाएगा।  भले ही इसके पीछे का कोई विशेष कारण नहीं बताया गया, लेकिन माना जा रहा है कि भारत और बांग्लादेश के बीच जारी राजनीतिक तनाव ने सीरीज के स्थगित होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दोनों देशों के बीच इस सीरीज के मुकाबले कोलकाता और कटक में होने वाले थे। वनडे मुकाबले दोनों टीमों के लिए महिला वनडे चैंपियनशिप के नए चरण की शुरुआत का प्रतीक थे। इससे पहले, भारतीय पुरुष टीम का बांग्लादेश में सीमित ओवरों की सीरीज के लिए दौरा अगस्त 2025 में होना था, लेकिन इसे सितंबर 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया गया। बता दें कि बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने 'मानवता के खिलाफ अपराध' मामले में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाई है। 78 वर्षीय शेख हसीना को पिछले साल छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। यह सजा शेख हसीना की अनुपस्थिति में सुनाई गई और संयुक्त राष्ट्र ने भी इस सजा का विरोध किया है। फिलहाल शेख हसीना भारत में हैं और बांग्लादेश उनकी वापसी पर अड़ा हुआ है। पिछले कुछ समय से दोनों पड़ोसी देशों के बीच राजनयिक संबंध प्रभावित हुए हैं।  

शनि के मार्गी होते ही बदलेंगे हालात, इन राशियों को आर्थिक मोर्चे पर रहना होगा बेहद सतर्क

नई दिल्ली  हिंदू ज्योतिष के अनुसार शनि ग्रह न्याय के देवता माने जाते हैं। वे हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। 28 नवंबर 2025 को शनि देव मीन राशि में मार्गी (direct) गति आरंभ करेंगे। जब शनि वक्री से मार्गी होते हैं तो उनका प्रभाव अत्यंत शक्तिशाली हो जाता है यानी अब वे अपने न्याय का सीधा परिणाम देंगे। यह परिवर्तन कई राशियों के लिए शुभ अवसर लेकर आएगा लेकिन 3 राशियां ऐसी हैं, जिनको यह समय तनाव, आर्थिक चुनौतियां और करियर में उतार-चढ़ाव दे सकता है।   मेष राशि (Aries) – साढ़ेसाती की कड़ी परीक्षा मेष राशि के जातक वर्तमान में शनि की साढ़ेसाती से गुजर रहे हैं। शनि के मार्गी होते ही जीवन की परिस्थितियां एक परीक्षा की तरह सामने आ सकती हैं। करियर: कार्यस्थल पर आलोचना या देरी का सामना करना पड़ सकता है। धन: अचानक खर्च या निवेश में नुकसान संभव है। सुझाव: सोच-समझ कर निर्णय लें और दूसरों पर अंधा विश्वास न करें। उपाय: प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें और मंगलवार को हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएं। सिंह राशि (Leo) – स्वास्थ्य और परिवार में सावधानी सिंह राशि के जातक इस समय शनि की ढैय्या झेल रहे हैं। शनि का मार्गी होना इनके लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण रहेगा। सेहत: पुराने रोग उभर सकते हैं, स्वास्थ्य जांच अवश्य कराएं। परिवार: रिश्तों में तनाव या संवाद की कमी दिख सकती है। करियर: प्रयासों के बाद भी अपेक्षित परिणाम देर से मिलेंगे। उपाय: सोमवार या शनिवार को भगवान शिव को जल चढ़ाएं और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें।   मीन राशि (Pisces) – शनि का सीधा प्रभाव आपकी राशि पर अब शनि देव स्वयं मीन राशि में मार्गी होंगे इसलिए इसका सीधा असर इसी राशि पर पड़ेगा। कार्यस्थल: अचानक बदलाव, ट्रांसफर या नौकरी से संबंधित परेशानी आ सकती है। धन: कर्ज बढ़ सकता है, अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाएं। कानूनी जोखिम: गलत लोगों की संगति से दूर रहें। उपाय: शनिवार को शनि देव के बीज मंत्र “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का 108 बार जप करें और तिल के तेल का दीपक जलाएं। 28 नवंबर 2025 का शनि मार्गी गोचर इन तीन राशियों के लिए आत्मचिंतन, अनुशासन और धैर्य का समय है। यदि आप कर्मपथ पर ईमानदारी से चलेंगे, तो यही शनि आपके जीवन में स्थिरता और सफलता भी लाएंगे। याद रखें शनि सज़ा नहीं देते, केवल सुधार करते हैं।  

पंजाब के यात्रियों की बल्ले-बल्ले! नकोदर हाईवे अब दिल्ली–कटरा एक्सप्रेसवे से होगा कनेक्ट

पंजाब  जालंधर जिले के कंग साहबू से करतारपुर तक 29 किलोमीटर का सफर करने वाले लोग अब नई हाइवे कनेक्टिविटी का बड़ा फायदा उठा सकेंगे।  दरअसल, भारत माला प्रोजेक्ट के तहत तैयार किए जा रहे अमृतसर दिल्ली कटरा एक्सप्रैस वे का काम कई राज्यों व जिलों में अंतिम चरण पर है, जो नए साल पर शुरू हो जाएगा।  नकोदर हाईवे को सीधे दिल्ली–कटरा एक्सप्रेस-वे से जोड़ दिया जाएगा। इससे अमृतसर की दूरी काफी कम हो जाएगी और सफर सिर्फ डेढ़ घंटे में पूरा हो सकेगा। ऐसे में अगर कोई दिल्ली, पटियाला, लुधियाना से फिल्लौर होते हुए कंग साहबू की तरफ जाएगा और अमृतसर रूट पकड़ेगा तो 75 किलोमीटर का सफर बच जाएगा। यह लाइन एयरपोर्ट रोड से कनेक्ट है ताकि लोगों को एयरपोर्ट और श्री दरबार साहिब अमृतसर में पहुंचने में आसानी हो। फिल्लौर से जालंधर नहीं आना पड़ेगा अब फिल्लौर के रास्ते जालंधर आने की ज़रूरत नहीं होगी। नया रूट कंग साहब होते हुए सीधे नकोदर हाईवे से जुड़ जाएगा। इससे ट्रैफिक की परेशानी भी कम होगी। 80% काम पूरा, 2026 तक पूरा प्रोजेक्ट तैयार नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने बताया कि हाईवे का लगभग 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट 2026 तक पूरी तरह चालू हो जाएगा। 16 गांवों को बड़ा फायदा फिल्लौर के पास से निकलने वाले नए हाइवे के कारण आस-पास के 16 गांवों को अच्छी कनेक्टिविटी मिलेगी। इनमें शामिल हैं: गन्ना पिंड, अकालपुर, प्रतापबुरा, बकापुर, मोवाई, नागरा, रूपोवाल, कंदोला, खुर्द, फरवाला, सैदोवाल, रारा, गुमताली, नवां पिंड, बीर पिंड, लितड़ा, मीरपुर, इन्हें भी होगा फायदा: लुधियाना, जालंधर, नकोदर, करतारपुर के साथ ही दिल्ली और चंडीगढ़ से आने वाले लोगों को फायदा होगा। 

जंक फूड का दिमाग पर कंट्रोल! अध्ययन में खुलासा—4 दिन में ही कमज़ोर होने लगती है मेमोरी

नई दिल्ली ब्रिटेन में प्रोसेस्ड जंक फूड के इंसानी दिमाग पर पड़ने वाले असर से संबंधित रिसर्च में सामने आया कि इस तरह के खाने का ज़्यादा सेवन इंसान के दिमाग के ऐसे हिस्सों में बदलाव कर सकता है जो खाने के व्यवहार को नियंत्रित करते हैं। ऐसा खाना दिमाग के कुछ अहम हिस्सों जैसे – हाइपोथैलेमस, एमीग्डाला और न्यूक्लियस अक्कम्बेन्स में बदलाव कर सकता है। ये हिस्से भूख, संतुष्टि और खाने के प्रति भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। ओवरईटिंग की भी होती है समस्या इस रिसर्च से यह भी पता चलता है कि प्रोसेस्ड जंक फूड का ज़्यादा सेवन दिमाग के उन क्षेत्रों में संरचनात्मक परिवर्तनों से जुड़ा है जो खाने के व्यवहार को नियंत्रित करते हैं। इससे ओवरईटिंग की भी समस्या होती है। बढ़ रही बीमारियाँ, सेवन पर ध्यान देने की ज़रूरत इस रिसर्च से यह सवाल भी उठता है कि क्या अब प्रोसेस्ड जंक फूड पर कड़ी नीतियाँ बनानी चाहिए? वैज्ञानिकों का मानना है कि ज़्यादा प्रोसेस्ड जंक फूड पहले से ही कई बीमारियों जैसे डायबिटीज़, हृदय रोग और मानसिक विकारों से जुड़ा हुआ है। अब दिमाग पर इनके प्रभाव को देखते हुए इनके सेवन पर ध्यान देने की ज़रूरत है। सिर्फ 4 दिन लगातार खाया जंक फूड तो याददाश्त हो सकती है कमजोर क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो प्री वीकेंड और पोस्ट वीकेंड सेलिब्रेशन के लिए जंक फूड को तरजीह देते हैं? अगर ऐसा है तो ये खबर आपके लिए है. इन फैटी फूड्स का अगर 4 दिन भी आप नियमित तौर पर सेवन करते हैं तो सतर्क हो जाइए क्योंकि ऐसा कर आप अपने शरीर को ही नहीं ब्रेन को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं. स्टडी बताती है कि इससे कॉग्निटिव डिसफंक्शन (सोचने-समझने की क्षमता पर नकारात्मक असर) का रिस्क बढ़ता है और धीरे-धीरे याददाश्त कमजोर पड़ने लगती है. स्टडी में क्या पाया गया? अमेरिका स्थित उत्तरी कैरोलिना विश्वविद्यालय (यूएनसी) के शोध से पता चलता है कि फैटी जंक फूड वजन बढ़ाने या आपको डायबीटिक बनाने से बहुत पहले ही ब्रेन को अटैक करता है यानि इनके नियमित सेवन से सोचने-समझने की क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ता है. ये रिजस्ट चेताते और बताते हैं कि हमे मोटापे और याददाश्त को कमजोर करने वाले कारकों पर प्रहार करना चाहिए. जिनमें सबसे पहले नाम आता है वेस्टर्न-स्टाइल जंक फूड का. न्यूरॉन पत्रिका में प्रकाशित फाइंडिंग से पता चला है कि हिप्पोकैम्पस में ब्रेन सेल्स का एक ग्रुप, जिसे सीसीके इंटरन्यूरॉन्स कहा जाता है, हाई फैट डाइट (एचएफडी) खाने के बाद बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाता है. सीसीके इंटरन्यूरॉन्स की सक्रियता का कारण ब्रेन के ग्लूकोज लेने की क्षमता का कमजोर होना है. यूएनसी स्कूल ऑफ मेडिसिन में चीफ इनवेस्टिगेटर और फार्माकोलॉजी के प्रोफेसर जुआन सोंग ने कहा कि यह हाइपरएक्टिविटी हिप्पोकैम्पस द्वारा मेमोरी प्रोसेसिंग करने के तरीके को बाधित करती है. ये हाइपरएक्टिविटी हाई फैट डाइट (एचएफडी) लेने के कुछ दिनों बाद तक भी जारी रहती है. इस खोज से यह भी पता चला है कि पीकेएम2 नामक एक प्रोटीन इस समस्या को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाता है. दरअसल, ये प्रोटीन ब्रेन सेल्स द्वारा एनर्जी के उपयोग को कंट्रोल करता है. यूएनसी न्यूरोसाइंस सेंटर के सदस्य सोंग ने कहा, "हम जानते थे कि डाइट और मेटाबॉलिज्म ब्रेन हेल्थ को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन हमें उम्मीद नहीं थी कि हिप्पोकैम्पस में मौजूद सीसीके इंटरन्यूरॉन्स (मस्तिष्क कोशिकाओं के विशिष्ट और कमजोर समूह) मिलेंगे." सोंग ने आगे कहा, "हमें सबसे ज्यादा आश्चर्य इस बात का हुआ कि ग्लूकोज की कमी होने के बाद इन कोशिकाओं ने तेजी से अपनी एक्टिविटी बदल दी और यह बदलाव ही याददाश्त कमजोर करने के लिए काफी था." टीम ने ये परीक्षण चूहों पर किया. उन्हें फैटी जंक फूड जैसे हाई फैट वाली डाइट पर रखा. हाई फैट वाली डाइट खाने के 4 दिनों के भीतर परिणामों से पता चला कि मेमोरी के सेंटर में सीसीके इंटरन्यूरॉन्स असामान्य रूप से सक्रिय हो गए. शोध यह भी दर्शाता है कि ब्रेन में ग्लूकोज को रिलीज करने से वास्तव में एक्स्ट्रा एक्टिव न्यूरॉन्स शांत हो गए और चूहों की स्मृति संबंधी समस्याएं ठीक हो गईं. अध्ययन से पता चलता है कि मोटापा संबंधित न्यूरोडीजेनेरेशन रोकने और ब्रेन हेल्थ को बनाए रखने के लिए खान-पान में बदलाव और कुछ औषधियां सहायक सिद्ध हो सकती हैं. शोधकर्ताओं ने पाया कि हाई-फैट-डाइट के बाद इंटरमिटेंट फास्टिंग से भी फायदा पहुंच सकता है. इससे सीसीके इंटरन्यूरॉन्स सामान्य होते हैं और मेमोरी सुधरती है.

कोटा का अनोखा रिकॉर्ड: देश का पहला शहर जहां ट्रैफिक लाइट नहीं, फिर भी व्यवस्थित ट्रैफिक

कोटा  अगर क‍िसी शहर में रेड स‍िग्‍नल न हो और एकदम ट्रैफ‍िक फ्री हो तो सोच‍िए आपको कैसा महसूस होगा? जी हां, इसकी कल्‍पना द‍िल्‍ली- एनसीआर वालों से बेहतर कौन कर सकता है. द‍िल्‍ली-एनसीआर में पीक टाइम के दौरान सड़क के ट्रैफ‍िक और भीड़भाड़ के बीच आपको एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में काफी समय लग जाता है. लेक‍िन इन सबके बीच देश का एक शहर ऐसा भी है, जो एकदम से ट्रैफ‍िक फ्री है. इतना ही नहीं, इस शहर की सड़कों पर आप फर्राटे से भागे चले जाते हैं. कारण सड़कों पर काफी कम ट्रैफ‍िक होना है. शहर में हर द‍िन आते हैं लाखों स्‍टूडेंट हम ज‍िस शहर की बात कर रहे हैं, वो है राजस्थान का कोचिंग हब बन चुका कोटा. जी हां, कोटा देश का पहला ऐसा शहर बन गया है जहां एक भी ट्रैफिक लाइट नहीं है. इस शहर में हर द‍िन लाखों लोग और हजारों स्टूडेंट्स आते-जाते हैं, फ‍िर भी इस शहर की सड़कों पर जाम नहीं लगता. कोटा अर्बन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (UIT) की तरफ से इस चमत्कार को कर द‍िखाया गया है. अर्बन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (UIT) ने पूरे शहर में आपस में जुड़े हुए र‍िंग रोड्स का जाल बिछा दिया. अब आप कोटा में हर व्यस्त चौराहे को बाइपास कर सकते हो. यहां गाड़ी कभी रुकती नहीं. 24 से ज्यादा फ्लाईओवर और अंडरपास शहर में इस समय 24 से ज्यादा फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए गए हैं. इनके जर‍िये आप मुख्य जंक्शन पर भी बिना ब्रेक लगाए सीधे न‍िकल सकते हैं. इस सबके कारण शहर में यात्रा का समय घटकर आधा रह गया है. इस बदलाव के बाद शहर में हादसों की संख्‍या में भी अबड़ी ग‍िरावट आई है. इतना ही नहीं शहर के अंदर पेट्रोल-डीजल की खपत में भी कमी आई है और प्रदूषण भी घट गया है. कोटा में यह सब पॉस‍िबल हुआ है सोची-समझी प्लानिंग और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर से. यहां पुराने स‍िग्‍नल सिस्टम को पूरी तरह खत्म किया जाने की तैयारी है. कोटा शहर पूरे देश के लिए मिसाल बन गया है. जाम से परेशान दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों के ल‍िए यह शहर नया मॉडल बन गया है. स्मार्ट अर्बन डिजाइन और सही निवेश से ट्रैफिक की समस्या हमेशा के लिए खत्म की जा सकती है. लाखों लोग, हजारों कोचिंग स्टूडेंट्स, फिर भी कहीं रुकने की जरूरत नहीं, बस गाड़ी चलती रहती है. कोटा ने इस सब बदलाव के साथ कर द‍िखाया क‍ि देश में 'नॉन-स्टॉप सिटी' बनाना मुमकिन है. इसके बाद इस तरह का बदलाव लाने की बारी दूसरे शहरों की है.  

एमपी जेलों में 46 हजार कैदियों के बीच एनआरआई भी पड़ सकते हैं परेशान, एसआईआर ने बढ़ाई टेंशन

भोपाल  मध्य प्रदेश समेत देश के 12 राज्यों में मतदाताओं का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान यानि एसआईआर शुरू हो गया है. इसमें बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं की वोटर लिस्ट का मिलान कर रहे हैं. लेकिन मिलान साल 2003 की मतदाता सूची से किया जा रहा है. ऐसे में कई लोगों को अगले चुनाव में मताधिकार से वंचित रहना पड़ सकता है. इस समस्या को लेकर अब तक सरकार ने कोई दिशा-निर्देश भी जारी नहीं किया है. ऐसे समझें एसआईआर की प्रक्रिया एसआईआर का मतलब है मतदाता सूची का विशेष गहन निरीक्षण यानि मतदाता सूची को अपडेट कर वास्तविक मतदाताओं की पहचान करना. इसके लिए बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना पत्र वितरित कर रहे हैं. मतदाताओं द्वारा इस फार्म को भरकर बीएलओ को वापस लौटाना अनिवार्य है. अन्यथा मतदाता सूची से नाम काटा जा सकता है. एसआईआर में यहां उलझ रहा पेंच दरअसल प्रत्येक मतदाता को जो फार्म दिया गया है, उसमें जन्मतिथि, माता-पिता का नाम, आधार नंबर, मोबाइल नंबर भरना है. इसके साथ ही पुरानी वोटर लिस्ट का एपीआईसी नंबर भी दर्ज करना होगा. फार्म के साथ एक पासपोर्ट साइज फोटो भी लगानी है. खास बात यह है कि वर्तमान वोटर लिस्ट को वर्ष 2003 की लिस्ट से मिलाया जा रहा है. लेकिन कई लोग ऐसे हैं, जो साल 2003 में किसी और स्थान पर थे, लेकिन अब कहीं और निवास कर रहे हैं, ऐसे में उन लोगों के लिए एसआईआर प्रक्रिया चुनौती बन सकती है. सरकारी और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को टेंशन कर्मचारी नेता उमाशंकर तिवारी ने बताया कि सेंट्रल गवर्नमेंट और राज्य के लाखों ऐसे कर्मचारी हैं, जो साल 2003 में किसी और जिले में पदस्थ थे. उन्होंने उस समय कहीं और वोट डाला था. लेकिन आप ट्रांसफर के बाद किसी और जिले में पदस्थ हो गए हैं या फिर ऐसे सेवानिवृत्त कर्मचारी जो सेवाकाल में किसी और शहर में थे और रिटायरमेंट के बाद किसी और शहर में बस गए हैं. ऐसे लोगों को साल 2003 की मतदाता सूची से वोटर लिस्ट का मिलान कराना बड़ी कठिनाई प्रक्रिया होगी. 46 हजार कैदियों का सत्यापन अधर में जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया में व्यक्ति की प्रत्यक्ष मौजूदगी जरूरी नहीं होती है. वह व्यक्ति कहीं भी रहे, लेकिन उसके परिजन या प्रतिनिधि साल 2003 की मतदाता सूची के साथ वर्तमान सूची का मिलान कर फार्म भरकर बीएलओ को दे सकते हैं. लेकिन मध्य प्रदेश की जेलों में बंद करीब 46 हजार कैदियों लिए यह काम काफी कठिन है. यही कठिनाई एनआरआई या प्रवासियों के साथ है. क्योंकि इन लोगों के परिजन या रिश्तेदार यदि दूसरे राज्यों में रहते हैं, तो उन्हें फार्म भरने और जमा करने में काफी संघर्ष करना पड़ सकता है. ऑनलाइन फार्म भर सकते हैं एनआरआई जो लोग लंबे समय से विदेश में रह रहे है, उनके परिजनों को गणना प्रपत्र में उनकी जानकारी देना होगी. 2003 की वोटर लिस्ट में अगर उनका या उनके माता-पिता का नाम है तो वह यह फार्म भर सकते है. यदि उन्होंने दूसरे देश की नागरिकता ले ली है तो वे वोटिंग लिस्ट से बाहर कर दिए जाएंगे. हालांकि यदि फिजिकल फार्म नहीं भर सकते, तो ऐसी परिस्थिति में एनआरआई ऑनलाइन फार्म भी भर सकते है. अधिकारी भी नहीं दे रहे जबाव इस मामले में जब गोविंदपुरा एसडीएम रवीश श्रीवास्तव से बात की गई, तो उन्होंने जानकारी नहीं होने की बात कही. वहीं डिप्टी डीईओ भी इसका जबाव नहीं दे सके. वहीं इस मामले में जेल डीजी वरुण कपूर का कहना है कि इलेक्शन कमीशन से अभी जेलों में बंद कैदियों के एसआईआर को लेकर कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है. इस संबंध वही जानकारी दे पाएंगे.