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MP की लड़कियों का जलवा WPL 2026 में, 12 खिलाड़ियों के नाम हुए शामिल

इंदौर  डब्लूपीएल 2026 के ऑक्शन में एमपी की खिलाड़ियों का जलवा देखने को मिलने वाला है। इस सीजन की ऑक्शन लिस्ट में राज्य की 12 खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। इनमें से तीन खिलाड़ी नेशनल लेवल और नौ डोमेस्टिक लेवल की हैं। यह ऑक्शन कल यानी 27 नवंबर को नई दिल्ली में होगा जहां इन खिलाड़ियों पर बड़ी बोली लगने की संभावना जताई जा रही हैं। कैप्ड खिलाड़ियों पर रहेगी नजर इस बार, ऑक्शन लिस्ट में तीन ऐसे प्लेयर्स के नाम हैं जिन्होंने इंडिया के लिए इंटरनेशनल मैच खेले हैं। उन्हें लिस्ट में कैप्ड प्लेयर्स के तौर पर शामिल किया गया है, जिसका मतलब है कि उनका बेस प्राइस ज़्यादा होगा। इस लिस्ट में सबसे बड़ा नाम तेज़ बॉलर क्रांति गौड़ (Kranti Gaud) का है, जो विमेंस ODI वर्ल्ड कप 2025 विनिंग टीम की मेंबर हैं। क्रांति का बेस प्राइस 50 लाख रखा गया है। वह पिछली बार उत्तर प्रदेश वॉरियर्स के लिए खेली थीं। लिस्ट में एक और बड़ा नाम पूजा वस्त्रकार (Pooja Vastrakar) का है। पूजा चोट की वजह से पिछले सीज़न में WPL में नहीं खेल पाई थीं। हालांकि, इस बार उन पर बड़ी बोली लगने की उम्मीद है। कैप्ड ग्रुप में तीसरी बड़ी एंट्री 19 साल की तेज़ बॉलर शुचि उपाध्याय (Shuchi Upadhyay) की है, जिन्होंने इंग्लैंड टूर पर शानदार परफॉर्म किया था। लिस्ट के लिए बेस प्राइस 30 लाख रखा गया है। घरेलू खिलाड़ियों के लिए MPL परफॉर्मेंस बना क्राइटेरिया मिली जानकारी के मुताबिक, MPL विमेंस 2025 टूर्नामेंट में उनके परफॉर्मेंस के आधार पर अनकैप्ड खिलाड़ियों को ऑक्शन लिस्ट में शामिल किया गया है। जिसमें टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली आयुषी शुक्ला और सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली प्रियंका कौशल भी शामिल हैं।  ये है खिलाड़ियों की पूरी लिस्ट कैप्ड खिलाड़ी     क्रांति गौड़ – (छतरपुर) – बेस प्राइस 50 लाख     पूजा वस्त्रकार- (शहडोल) – बेस प्राइस 50 लाख     शुचि उपाध्याय- (मंडला)- बेस प्राइस 30 लाख अनकैप्ड खिलाड़ी     संस्कृति गुप्ता- (शहडोल)- बेस प्राइस 20 लाख     प्रियंका कौशल- (इंदौर)-बेस प्राइस 10 लाख     राहिला फिरदौस-(भोपाल)- बेस प्राइस 10 लाख     अनुष्का शर्मा- (ग्वालियर) -बेस प्राइस 10 लाख     वैष्णवी शर्मा -(ग्वालियर)- बेस प्राइस 10 लाख     आयुषी शुक्ला- (इंदौर)- बेस प्राइस 10 लाख     सौम्या तिवारी- (भोपाल)- बेस प्राइस 10 लाख     निकिता सिंह – (रीवा)-बेस प्राइस 10 लाख     अनादि तागड़े – (इंदौर) – बेस प्राइस 10 लाख

निर्धारित समयावधि में 4 लाख 56 हजार से अधिक उपभोक्‍ताओं को मिले नये बिजली कनेक्शन

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के सभी श्रेणी के उपभोक्‍ताओं के लिये सरल और सुविधाजनक तरीके से त्‍वरित नवीन बिजली कनेक्‍शन प्रदान किए जा रहे हैं। इसके लिए उपभोक्‍ताओं को सरल संयोजन पोर्टल के माध्‍यम से आवेदन करते ही निर्धारित समयावधि में घर बैठे ही नवीन कनेक्‍शन उपलब्‍ध कराये जा रहे हैं।   गौरतलब है कि कंपनी द्वारा विगत जुलाई 2023 से शुरू किये गये ऑनलाइन सरल संयोजन पोर्टल के माध्‍यम से अब तक भोपाल शहर में 65 हजार से अधिक नए कनेक्‍शन प्रदान किए जा चुके हैं, जबकि पूरे कंपनी कार्यक्षेत्र में 4 लाख 56 हजार से अधिक नए कनेक्‍शन सरल संयोजन पोर्टल के माध्‍यम से सफलतापूर्वक प्रदान किये गए हैं। इनमें 10 किलोवॉट तक के अस्थायी कनेक्शन भी शामिल हैं।   मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल ने बताया है कि कंपनी के सरल संयोजन पोर्टल पर आवेदन करते ही निर्धारित समयावधि में तत्काल नया बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। नये कनेक्‍शन लेने के लिये उपभोक्‍ताओं को बिजली कंपनी के पोर्टल https://saralsanyojan.mpcz.in:8888/home अथवा UPAY ऐप पर जाकर जरूरी दस्‍तावेज अपलोड कर समस्‍त औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए निर्धारित शुल्‍क का ऑनलाइन भुगतान करना होगा। आवेदक द्वारा विधिवत ऑनलाइन आवेदन और भुगतान प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत बिजली कंपनी द्वारा सर्वे एवं अन्‍य औपचारिकताएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कर उपभोक्ता के परिसर में नया कनेक्शन उपलब्‍ध करा दिया जाएगा।

सरकार को नीति आयोग की चेतावनी—अधिकारियों का लाइसेंस मांगना और इंस्पेक्शन राज रोकें

नई दिल्ली देश में व्यापार शुरू करना और चलाना अक्सर कागज़ी झंझट, परमिट, लाइसेंस और अचानक आने वाले निरीक्षणों (Inspection) की वजह से लोगों के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है. इसी परेशानी को खत्म करने के लिए नीति आयोग (NITI Aayog) की एक उच्च स्तरीय कमिटी ने बड़ा कदम सुझाया है, जो इंस्पेक्शन राज का खात्मा कर देगा. नीति आयोग की प्लानिंग कहती है कि लोगों और कारोबारियों पर भरोसा दिखाते हुए नियमों को आसान बनाया जाए, ताकि व्यापार बढ़े, सरकारी दखल कम हो और देश की अर्थव्यवस्था अधिक मजबूत बन सके. अब जानते हैं कि असल में इस प्रस्ताव में क्या है और लोगों को इससे क्या फायदा होगा? नीति आयोग की एक उच्च स्तरीय समिति ने देश के नियम-कानूनों में बड़ा सुधार लाने की सलाह दी है. इस कमेटी का नेतृत्व सदस्य और पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गौबा (Rajiv Gauba) कर रहे हैं. समिति का मानना है कि देश में वर्षों से चली आ रही लाइसेंस, परमिट और NOC की भारी-भरकम व्यवस्था अब लोगों के लिए बोझ बन चुकी है. इसलिए रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि इन अनावश्यक मंज़ूरियों को काफी हद तक खत्म किया जाए और इंस्पेक्टर राज का अंत हो. उनका कहना है कि जहां कानून स्पष्ट रूप से मना नहीं करता, वहां अनुमति की ज़रूरत भी नहीं होनी चाहिए. छोटे-मोटे काम बिना अनुमति लिए हों हमारी सहयोगी वेबसाइट मनीकंट्रोल ने इस पर एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट छापी है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, समिति ने यह भी साफ किया कि लाइसेंस तभी मांगा जाए जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा, जन स्वास्थ्य, पर्यावरण या बहुत बड़े सार्वजनिक हित से जुड़ा हो. छोटे-मोटे कामों के लिए पहले से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होनी चाहिए. इससे आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर पड़ने वाला समय और पैसों का बोझ काफी कम होगा. रिपोर्ट में बताया गया कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी बिल्कुल आसान होनी चाहिए. यह केवल रिकॉर्ड रखने या डेटा मैनेजमेंट के लिए हो, न कि लोगों को रोके रखने के लिए. खुद से रजिस्ट्रेशन (Self-registration) करने का विकल्प सामान्य रूप से उपलब्ध होना चाहिए, और लाइसेंस की वैधता सामान्य तौर पर हमेशा के लिए (perpetual) हो. केवल खास परिस्थितियों, जैसे सुरक्षा या पर्यावरण, में ही 5 से 10 साल की वैधता रखी जा सकती है. अधिकारी अचानक फैक्ट्री में पहुंचकर जांच न करें इंस्पेक्शन को लेकर समिति का सुझाव सबसे अलग और आधुनिक है. उनका कहना है कि अब अधिकारी अचानक दुकान या फैक्ट्री में पहुंचकर जांच नहीं करें. इसके बजाय कंप्यूटर आधारित सिस्टम से रैंडम सिलेक्शन की मदद ली जाए, और जांच का काम एक्रेडिटेड थर्ड पार्टी को दिया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे. रिपोर्ट ने यह भी आग्रह किया कि सरकार साल में एक तय तारीख रखे, जिस दिन नियमों में बदलाव लागू हों. इससे कारोबारियों को अचानक नियम बदलने से बचाया जा सके. नई नीतियों को लागू करने से पहले सभी हितधारकों से बातचीत करना और उन्हें तैयारी का समय देना भी जरूरी बताया गया है. एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि अब सरकार सभी नियमों का रेगुलेटरी इम्पैक्ट असेसमेंट करेगी. इसका सीधा मतलब है कि किसी नए नियम को लागू करने से पहले यह देखा जाएगा कि उसे मानने में कारोबारियों पर कितना खर्च आएगा और सरकार को उसे लागू कराने में कितनी मेहनत और लागत लगेगी. इससे अनावश्यक और महंगे नियम बनने से बचा जा सकेगा. सजा को लेकर भी बदलावों का सुझाव सजा को लेकर भी बड़े बदलाव सुझाए गए हैं. समिति का स्पष्ट कहना है कि “छोटी तकनीकी गलतियों पर जेल या आपराधिक सजा नहीं होनी चाहिए.” जेल या भारी जुर्माना केवल उन्हीं मामलों में हो जहां मानव स्वास्थ्य, राष्ट्रीय सुरक्षा या पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है. इसके अलावा सभी पुराने कानूनों में मौजूद सजा संबंधी धाराओं की आधुनिक जरूरतों के अनुसार समीक्षा की जानी चाहिए. सबसे अहम बदलाव है कि पूरी व्यवस्था का डिजिटल रूप से सक्षम होना. यानी सभी दस्तावेज़ ऑनलाइन जमा हों, विभागों के बीच डेटा साझा किया जा सके, और एक बार दिया गया डेटा दोबारा न मांगा जाए. इसके लिए मंत्रालयों को API जारी करनी होंगी, ताकि सरकारी डेटाबेस आसानी से एक-दूसरे से जुड़ सकें. रिपोर्ट के अनुसार, इन सभी सुझावों का मकसद सरकार और नागरिकों के बीच विश्वास बढ़ाना है. समिति का दावा है कि अगर इन सुधारों को अपनाया गया तो देश में कारोबार करना पहले से कहीं आसान हो जाएगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और आधुनिक नियामक ढांचा तैयार होगा जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत आधार देगा.

सरकार ने 29 श्रम कानूनों को घटाकर 4 नए कोड किए लागू, कर्मचारियों को मिलेगा अतिरिक्त मुनाफा

 नई दिल्‍ली भारत में नए कानूनों को लागू कर दिया गया है, जिसके बाद सबसे बड़ी चर्चा सैलरी को लेकर शुरू हुई है. ऐसा माना जा रहा है कि इससे कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी घट जाएगी, लेकिन सोशल सिक्‍योरिटी जैसे- पीएफ, ग्रेच्‍युटी और पेंशन आदि में कंट्रीब्‍यूशन बढ़ जाएगा.  इसी को लेकर टैक्सबडी डॉट कॉम के संस्थापक सुजीत बांगर ने बताया है कि कैसे आपकी सैलरी प्रभावित हो सकती है और PF में कंट्रीब्‍यूशन बढ़ने से आपका रिटायरमेंट फंड करोड़ों रुपये में बदल जाएगा. लिंक्डइन पर एक पोस्ट में बांगर ने बताया कि किस प्रकार नए लेबर कोड के तहत कर्मचारियों के वेतन संरचना को बदल रहे हैं, जिससे भविष्य निधि (PF) और राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) योगदान के माध्यम से कर्मचारियों को बढ़ावा मिल रहा है. अपनी पोस्‍ट में एक्‍सपर्ट ने कहा कि पहले बेसिक सैलरी कंपनी की कुल कॉस्‍ट (CTC) का करीब 35 फीसदी होता था, जिससे एक बड़ा हिस्‍स टैक्‍स अनुकूल अलाउंस में जाता था, जबकि पीएफ और एनपीएस कटौती कम रहती थी. बांगर ने कहा कि पुराने इंफ्रा में जानबूझकर पीएफ कम रखा जाता था.  लेकिन संशोधित नियमों के बाद अब बेसिक सैलरी सीटीसी का कम से कम 50% होना चाहिए, जिससे पीएफ और एनपीएस दोनों का योगदान बढ़ जाएगा, क्योंकि दोनों की गणना बेसिक सैलरी के प्रतिशत के रूप में की जाती है.  कैसे बन जाएंगे करोड़ों रुपये?  ₹12 लाख सीटीसी वाले 30 वर्षीय कर्मचारी के लिए, मंथली पीएफ कंट्रीब्‍यूशन (नियोक्ता और कर्मचारी दोनों की ओर से) करीब ₹7,200 से बढ़कर ₹12,000 हो जाएगा. यह ₹4,800 मंथली ग्रोथ, 30 साल में चक्रवृद्धि होने पर, ₹1.24 करोड़ की अतिरिक्त पीएफ बचत में बदल जाती है. रिटायरमेंट में कुल पीएफ अमाउंट 3.11 करोड़ रुपये हो जाएगा.  इसी तरह, एनीपीएस में कंट्रीब्‍यूशन बढ़ेगा यानी 30 साल में ₹1.07 करोड़ और जुड़ेगा . कुल मिलाकर, कुल रिटारमेंट फंड 30 सालों में अनुमानित ₹3.46 करोड़ से बढ़कर ₹5.77 करोड़ हो जाता है. लॉन्‍गटर्म सेफ्टी देती है ये योजना  बांगर ने जोर देकर कहा कि रिटायरमेंट फंड का यह चक्रवृद्धि ब्याज ज्‍यादातर बचत योजनाओं से बेहतर है. उन्होंने लिखा कि म्यूचुअल फंड एसआईपी आमतौर पर 3-5 साल में टूट जाते हैं. एफडी का भुगतान हो जाता है, लेकिन पीएफ और एनपीएस, अनिवार्य, कटौती-आधारित हैं और इसीलिए वे जीवन भर की संपत्ति बनाते हैं. हालांकि शॉट टर्म में घर ले जाने वाले वेतन में कमी आ सकती है, लेकिन बांगर का तर्क है कि नई व्यवस्था लागू बचत अनुशासन के माध्यम से दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है.

SIR प्रक्रिया में पश्चिम बंगाल के 14 लाख नाम कटने के अंदेशा, फॉर्म जमा करने की अंतिम तारीख एक हफ्ते में

 कोलकाता चुनाव आयोग ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अब तक करीब 14 लाख SIR गिनती के फॉर्म 'अनकलेक्टेबल' के तौर पर पहचाने गए हैं. एक अधिकारी ने कहा कि ये फॉर्म 'अनकलेक्टेबल' हैं क्योंकि वोटर या तो गैर-हाज़िर थे, डुप्लीकेट थे, मर चुके थे या हमेशा के लिए कहीं और चले गए थे. सोमवार को यह आंकड़ा 10.33 लाख था. उन्होंने कहा, " दोपहर तक, यह संख्या 13.92 लाख थी. हमें उम्मीद है कि जैसे-जैसे और अपडेट आएंगे, यह आंकड़ा रोज़ बढ़ता रहेगा." पूरे राज्य में बूथ लेवल ऑफिसर (BLOs) को घरों से डेटा इकट्ठा करने का काम सौंपा गया है. वे फॉर्म बांटने और ज़रूरी जानकारी इकट्ठा करने में एक्टिव रूप से लगे हुए हैं. अब तक 3 बीएलओ की मौत अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम बंगाल में रिवीजन के काम के लिए 80,600 से ज़्यादा BLOs, करीब 8,000 सुपरवाइज़र, 3,000 असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर और 294 इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर को लगाया गया है. अभी तक, चल रहे SIR के बीच राज्य में तीन BLOs की मौत हो चुकी है. बीजेपी को ममता बनर्जी की चेतावनी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को BJP पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी सेंट्रल पोल बॉडी को अपनी शर्तें थोप रही है और आने वाले SIR प्रोसेस में लिस्ट से किसी भी असली वोटर का नाम हटाने के खिलाफ चेतावनी दी. बीजेपी के बिहार कैंपेन की ओर इशारा करते हुए, ममता ने आरोप लगाया कि वहां कोई भी पड़ोसी राज्य में पार्टी के 'गेम' को नहीं देख सकता और कहा कि बंगाल में ऐसा नहीं होगा. उन्होंने BJP को यह भी चेतावनी दी कि अगर बंगाल में उन्हें या उनके लोगों को टारगेट किया गया तो वह पूरे देश में सड़कों पर उतरेंगी और पूरे देश को हिला देंगी. उन्होंने कहा, "अगर आप मुझे बंगाल में टारगेट करते हैं और मैं अपने लोगों पर किसी भी हमले को पर्सनल अटैक मानती हूं, तो मैं पूरे देश को हिला दूंगी. मैं चुनाव के बाद पूरे देश का दौरा करूंगी."

MP में रेल विकास: देवास-मक्सी लाइन के दोहरीकरण के लिए फाइनल सर्वे का टेंडर मंजूर

देवास  देवास-मक्सी के बीच 36 किमी की रेलवे लाइन के दोहरीकरण के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है। दोहरीकरण के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे (final location survey) के लिए टेंडर प्रक्रिया हो गई है। इस दौरान देवास से मक्सी के बीच ड्रोन व ग्राउंड लेवल पर सर्वे किया जाएगा। सर्वे के बाद डीपीआर बनाकर रेलवे मंत्रालय को भेजी जाएगी। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद रेलवे लाइन के दोहरीकरण का कार्य शुरु किया जाएगा। बताया जा रहा है कि मार्च तक कंपनी द्वारा सर्वे किया जाएगा। भोपाल को उत्तर भारत से जोड़ेगी ये लाइन उल्लेखनीय है कि उक्त रेलवे लाइन देवास से मक्सी होते हुए भोपाल और उत्तर भारत को जोड़ने वाले मार्ग के लिए महत्वपूर्ण है। दोहरीकरण से ट्रेनों की रफ्तार और क्षमता में वृद्धि होगी जिससे यातायात आसान होगा और माल ढुलाई में मदद मिलेगी। 110 किमी गति से दौड़ेगी ट्रेनें उल्लेखनीय है कि वर्तमान में मक्सी से देवास के बीच रेलवे ट्रैक काफी पुराना है। देवास-मक्सी के बीच काली मिट्टी होने से ट्रैक का फॉरमेशन कमजोर था। ऐसे में पूर्व में यहां 45 किमी प्रतिघंटा की स्पीड से ट्रेनें निकाली जाती थी। इसके बाद करीब 14 साल पहले कुछ क्षेत्र में ट्रैक को मजबूत कर नई पटरियां डाली गई थी। उसके बाद यहां ट्रेनों की स्पीड 75 किमी प्रतिघंटा हो गई थी। दोहरीकरण के बाद रेलवे की इस ट्रैक पर 110 किमी की रफ्तार से ट्रेर्ने संचालित करने की योजना है। अभी क्रॉसिंग के समय रुकती है ट्रेनें उल्लेखनीय है कि देवास और मक्सी होकर करीब 17 ट्रेनें विभिन्न रुट पर आती-जाती है। ऐसे में कॉसिंग के दौरान ट्रेनों को विभिन्न स्टेशन पर रोकना पड़ता है। इससे समय भी अधिक लगता है। दोहरीकरण होने के बाद ट्रेनों को कॉसिंग के दौरान स्टॉपेज नहीं देना होगा। ऐसे में समय की बचत होगी और देवास-मक्सी के बीच आने-जाने में कम समय लगेगा। सर्वे स्वीकृत हो गया देवास-मक्सी रेलवे लाइन के दोहरीकरण के लिए सर्वे स्वीकृत हो गया है। सर्वे होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। दोहरीकरण होने के बाद ट्रेनों की गति भी बढ़ेगी।- अश्वनी कुमार, डीआरएम, पश्चिम रेलवे, रतलाम मंडल