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यूपी के प्रमुख डैम और जलाशयों पर एडवेंचर और वॉटर स्पोर्ट्स की सुविधाएं विकसित होंगी, जिससे इको टूरिज्म को नई पहचान मिलेगी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए नई पहल शुरू की गई है। इसके तहत यूपी इको टूरिज्म बोर्ड और सिंचाई विभाग के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख बांधों और जलाशयों पर एडवेंचर और वॉटर स्पोर्ट्स आधारित पर्यटन सुविधाओं का विकास प्रस्तावित है। इस योजना से पर्यटन अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। योजना के तहत झांसी की गढ़मऊ झील, बांदा का नवाब टैंक, महोबा का अर्जुन डैम, सोनभद्र का ढंढरौल डैम, हमीरपुर का मौदहा डैम, चित्रकूट का गुंता डैम और सिद्धार्थनगर का मझौली सागर इको टूरिज्म हब के रूप में विकसित किए जाएंगे। इन स्थानों पर प्रवेश द्वार, कॉटेज, टिकट काउंटर, कैंटीन, चिल्ड्रन प्ले एरिया, इंटरप्रिटेशन सेंटर, लैंडस्केपिंग, सोलर लाइटिंग और सेल्फी प्वाइंट जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही बोटिंग, फिशिंग, वॉटर स्पोर्ट्स और एक्वा प्रेशर वॉकवे जैसी गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित करेंगी। इनमें सिद्धार्थनगर का मझौली सागर सबसे बड़ी परियोजना है, जहां 88.2 हेक्टेयर क्षेत्र में इंटरप्रिटेशन सेंटर, फ्लोटिंग जेट्टी, टॉय ट्रेन, कॉटेज और रेस्टोरेंट सहित कई सुविधाओं का विकास प्रस्तावित है। सोनभद्र के ढंढरौल डैम क्षेत्र में फसाड लाइटिंग, पार्किंग, जेट्टी और सूचना केंद्र, बांदा के नवाब टैंक में म्यूजिकल फाउंटेन और वाटर स्क्रीन, महोबा के अर्जुन डैम में सन मंदिर क्षेत्र में नई पर्यटक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसी क्रम में चित्रकूट के गुंता डैम में प्रवेश द्वार और बच्चों के लिए सुविधा क्षेत्र, झांसी की गढ़मऊ झील में पाथवे और कैफेटेरिया तथा मौदहा डैम में ओपन एयर थिएटर, वॉच टावर और पार्क विकसित करने की योजना है। पर्यटन विभाग ने बताया कि इन परियोजनाओं से जिन क्षेत्रों में पहले से धार्मिक, प्राकृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन मौजूद है, वहां पर्यटकों को नए अनुभव मिलेंगे और पर्यटन श्रृंखला और मजबूत होगी। परियोजनाओं को सिंचाई विभाग की स्वीकृति के बाद आगे बढ़ाया जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होते ही इन क्षेत्रों में पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है, जिससे प्रदेश के राजस्व और स्थानीय रोजगार दोनों में वृद्धि सुनिश्चित होगी।

SIR डेडलाइन बढ़ाने की अपील: पीसीसी चीफ ने सरकार को लिखा पत्र, बताई लोगों की दिक्कतें

रायपुर छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में SIR की प्रक्रिया जारी है. इस महाभियान को पूरा करने के लिए एक महीने का लक्ष्य रखा गया, जो बेहद करीब नजर आ रहा है. डिजिटाइजेशन का कार्य भी धड़ल्ले से चल रहा है. इसी बीच आज PCC चीफ ने प्रेसवार्ता के दौरान SIR की अंतिम तिथि को बढ़ाने की मांग भी कर दी है. बता दें, छत्तीसगढ़ में SIR 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है. लेकिन अब अंतिम तारीख को कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं. ऐसे में पीसीसी चीफ बैज ने कहा कि प्रदेश में BLO परेशान है. इतने दिनों में काम पूरा नहीं हुआ है. 6 दिनों में और क्या होगा. उन्होंने कहा कि 4 दिसंबर तक SIR करना संभव नहीं है. चुनाव आयोग को डेट आगे बढ़ाना चाहिए. हमारा कंट्रोल रूम का स्तर में बनाने का मकसद यही है, कि कोई व्यक्ति परेशान हैं तो वहां कॉल करके मदद ले सकते हैं. वहीं जमीन गाइडलाइन को लेकर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि जमीन गाइडलाइन को बढ़ा दी गई है. 10 गुना जमीन की रेट बढ़ा दी है. इससे छोटे लोगों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. गरीब लोगों का घर-जमीन सपना रह गया है. उन्होंने कहा कि गाइडलाइंस सुधार नहीं हुआ, तो कांग्रेस पार्टी बड़ा आंदोलन करेगी.

डाइट में जरुर शामिल करें पालक का जूस, फायदे है कमाल के

इस बात से तो हर कोई वाकिफ है कि फल व सब्जियों के रस का सेवन स्वास्थ्यवर्धक होता है। अगर आप भी अपनी डाइट में किसी जूस को शामिल करने का मन बना रहे हैं तो शुरूआत पालक के जूस से कीजिए। पालक के जूस में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, साथ ही यह सेहत के लिए भी कई मायनों में लाभकारी होता है। तो चलिए जानते हैं पालक के जूस का सेवन करने से होने वाले लाभों के बारे में-   पोषक तत्वों से भरपूर पालक को यदि एक सुपरफूड कहा जाए तो गलत नहीं होगा। इसके जूस का सेवन करने से व्यक्ति को कई तरह के पोषक तत्व जैसे विटामिन ए, सी तो मिलता है ही, साथ ही इसमें आयरन, प्रोटीन मैग्नीशियम, कैल्शियम, खनिज आदि पोषक तत्व भी होते हैं, जो शरीर के लिए बेहद आवश्यक होते हैं। एक बेहतरीन एंटी-एजिंग जो लोग लंबे समय तक जवां दिखने की चाहत रखते हैं, उन्हें पालक के जूस को अपनी डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स होने के साथ-साथ कुछ ऐसे तत्व भी पाए जाते हैं जो बढ़ती उम्र की निशानियों को बेहद आसानी से कम करते हैं। यह ढीली त्वचा में कसावट व झुर्रियों को कम करने के साथ-साथ आपके चेहरे का निखार भी बढ़ाने में मदद करता है। पाचन तंत्र के लिए वरदान अधिकतर बीमारियों की जड़ व्यक्ति का पेट ही होता है। अगर पाचन तंत्र सुचारू रूप से कार्य करे तो व्यक्ति एक खुशहाल व निरोगी जीवन जी सकता है और आपकी पाचन क्रिया की प्रणाली को बेहतर बनाने में पालक का जूस फायदेमंद साबित हो सकता है। यह न सिर्फ विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालता है, बल्कि इसमें पाया जाने वाला फाइबर पेट संबंधी समस्याओं जैसे कब्ज, अपच, एसिडिटी आदि को भी दूर करता है।   महिलाओं के लिए लाभदायक पालक का जूस महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभदायी है। दरअसल, भारत में करीबन 70 प्रतिशत महिलाएं आयरन की कमी से जूझ रही हैं। लेकिन अगर वह अपनी डाइट में पालक के जूस को शामिल करती हैं, तो इससे उनके शरीर की आयरन की आवश्यकता पूरी होगी। इतना ही नहीं, गर्भावस्था में भी महिला को पालक के जूस का सेवन अवश्य करना चाहिए।   वजन कम करने में सहायक अगर आप अपना वजन कम करने की फिराक में हैं तो भी पालक का जूस आपके लिए फायदेमंद साबित होगा। दरअसल, पालक के जूस में कैलोरी की मात्रा काफी कम होती है, जिसके कारण इसका सेवन बेफिक्र होकर किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त इसमें प्रोटीन भी पाया जाता है जो वजन कम करने और मसल्स को बिल्डअप करने में सहायक होता है।  

श्वेता त्रिपाठी अपने पहले हॉरर फ़िल्म ‘नावा’ का निर्माण करेंगी

मुंबई,  अभिनेत्री-निर्माता श्वेता त्रिपाठी अपने बैनर बैंडरफुल फ़िल्म्स के तहत अपनी पहली हॉरर फ़िल्म नावा का निर्माण कर रही हैं, जिसे कोवातांडा फ़िल्म्स इंडिया के साथ मिलकर बनाया जाएगा। फिल्म ‘नावा’ श्वेता त्रिपाठी का दूसरा प्रोडक्शन वेंचर है। इससे पहले वह तिलोत्तमा शोम अभिनीत क्वियर ड्रामा मुझे जान न कहो मेरी जान को प्रोड्यूस कर चुकी हैं। सुंदरबन के खूबसूरत लेकिन डरावने और रहस्यमयी मैंग्रोव जंगलों पर आधारित फिल्म नावा की कहानी तारा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने पुश्तैनी घर लौटने पर पीढ़ियों पुराने एक सिहरनभरे रहस्य में फंस जाती है, जहां नदी के देवता, दबी हुई पारिवारिक सच्चाइयाँ और लोककथाओं तथा हकीकत का धुंधला संगम उसकी ज़िंदगी को घेरने लगता है। आकाश मोहिमेन द्वारा लिखित यह फ़िल्म लोककथाओं, भय और भावनाओं का प्रभावशाली मिश्रण पेश करती है। श्वेता त्रिपाठी ने कहा, “नावा मेरे लिए एक निर्माता के रूप में बहुत खास कदम है। ‘मुझे जान न कहो मेरी जान’, जो प्रेम और पहचान पर आधारित थी, के बाद मुझे एक बिल्कुल अलग भावनात्मक दुनिया को एक्सप्लोर करने की चाह हुई। हॉरर, खासकर तब जब वह संस्कृति और लोककथाओं से बुना जाए, लोगों को अप्रत्याशित तरीकों से छूने की क्षमता रखता है। सुंदरबन सिर्फ इस कहानी की लोकेशन नहीं है। वह जीवित है, साँस लेता है, बचाता भी है और डराता भी है। जब आकाश ने मुझे स्क्रिप्ट सुनाई, तो मैं उसकी खूबसूरती, उसके भय और उसकी आत्मा से खिंच गई। एक निर्माता के रूप में मैं ऐसी कहानियों को समर्थन देना चाहती हूँ जो जोखिम लें, परतदार हों, और दर्शकों के मन में फ़िल्म खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक बनी रहें। कोवातांडा फ़िल्म्स इंडिया के साथ मिलकर नावा बनाना एक परफेक्ट सहयोग है, क्योंकि हम दोनों ही सार्थक और सिनेमाई कहानी कहने के प्रति समान जुनून रखते हैं।”  

सीईओ संजीव कुमार झा ने मतदाताओं को किया साइबर फ्राड से सचेत

गणना पत्रक भरने के लिए नहीं चाहिए ओटीपी भोपाल  एसआईआर-2026 के दौरान गणना पत्रक भरने के लिए बीएलओ या किसी भी अन्य अधिकारी द्वारा किसी भी माध्यम से ओटीपी मांगे जाने की आवश्यकता नहीं है। मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री संजीव कुमार झा ने मतदाताओं को सतर्क करते हुए बताया है कि वर्ष 2003 की मतदाता सूची में स्वयं, माता-पिता या दादा-दादी संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए मतदाता अपने क्षेत्र के बीएलओ अथवा नजदीकी हेल्पडेस्क से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा जानकारी ऑनलाइन voters.eci.gov.in या ceoelection.mp.gov.in पर भी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने नागरिकों से अनुरोध किया है कि एसआईआर पत्रक भरते समय सुरक्षा उपायों का पालन करें। आधिकारिक सरकारी वेबसाइट पर ही एसआईआर भरें। ये हैं सुरक्षा उपाय ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें। एसआईआर की प्रक्रिया में निर्वाचन विभाग या किसी अधिकारी द्वारा फोन/मैसेज पर ओटीपी, आधार नंबर, मोबाइल नंबर आदि मांगना प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है। यदि कोई इस तरह की जानकारी माँगता है तो वह 'साइबर फ्रॉड कॉल' हो सकता है। एसआईआर भरते समय इन बातों का रखें ध्यान एसआईआर प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क है। किसी भी प्रकार की फीस, प्रोसेसिंग चार्ज या भुगतान करने के लिए कहे जाने पर ध्यान दें-ऐसे संदेश/कॉल धोखाधड़ी हो सकते हैं। व्हॉट्सऐप या सोशल मीडिया पर मिले लिंक न खोलें। 'आपका वोटर कार्ड रद्द हो जाएगा', 'तुरंत एसआईआर भरें' जैसे संदेश फर्जी हो सकते हैं। एसआईआर के लिये साइबर कैफे का उपयोग करते समय सतर्क रहें। ऑटो-सेव बंद रखें, कार्य समाप्त होने पर ब्राउजर इतिहास/कैश साफ़ करें और अनिवार्य रूप से लॉगआउट करें। किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल: www.cybercrime.gov.in अथवा हेल्पलाइन: 1930 पर कर सकते हैं।  

RCB फैंस खुश! रजत पाटीदार की फिटनेस रिपोर्ट क्लियर, खेलने की अनुमति मिली

नई दिल्ली  रजत पाटीदार बाएं घुटने की हल्की चोट से उबर चुके हैं और बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने उन्हें खेलने की अनुमति दे दी है। वह शुक्रवार को कोलकाता में मध्य प्रदेश की टीम से दोबारा जुड़ेंगे और रविवार को होने वाले सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफ़ी के तीसरे राउंड के लिए उपलब्ध रहेंगे। पाटीदार एमपी के कप्तान हैं। पिछले चार हफ्तों से वह प्रतिस्पर्धी क्रिकेट नहीं खेल पाए थे। दक्षिण अफ्रीका ए के खिलाफ पहले अनौपचारिक टेस्ट में भारत ए के लिए खेलने के बाद उन्हें लगातार घुटने में दर्द हो रहा था। इसके कारण वह रणजी ट्रॉफी के कुछ मैच से भी दूर रहे। यह दर्द उन्हें 15 अक्टूबर को पंजाब के ख़िलाफ एमपी के पहले रणजी मैच के दौरान महसूस हुआ था।   क्रिकइंफो के अनुसार पाटीदार ने 10 दिन का रिहैब प्रोग्राम पूरा किया और सीओई की मेडिकल टीम ने उन्हें फिर से खेलने की अनुमति दे दी है। वह नेट में दोबारा बल्लेबाजी शुरू कर चुके हैं। चोट से पहले पाटीदार बेहतरीन लय में थे। उन्होंने रणजी सीजन की शुरुआत पंजाब के ख़िलाफ़ दोहरा शतक लगाकर की थी। इस दौरान दलीप ट्रॉफी में सेंट्रल जोन के कप्तान के तौर पर वह खिताबी सफर में दो शतक और दो अर्धशतक भी लगा चुके थे। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025-26 उनके लिए आईपीएल 2025 के बाद पहला सफ़ेद गेंद का टूर्नामेंट होगा, जहां वह रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को उनका पहला खिताब दिलाने वाले कप्तान थे। इसके बाद पाटीदार को राज्य टीम की सभी फॉर्मेट की कप्तानी सौंप दी गई, जहां उन्होंने शुभम शर्मा की जगह ली। पिछले सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफ़ी सीजन में एमपी उपविजेता रही थी और पाटीदार का योगदान अहम था। वह 428 रन के साथ टूर्नामेंट के दूसरे सबसे सफल बल्लेबाज थे। उन्होंने नौ पारियों में 186.08 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए थे और उनके 27 सिक्सर उस सीजन में सबसे ज्यादा थे।  

घर पर ही बनाएं बाजार जैसा जेल आईलाइनर

जब भी आंखों के मेकअप की बात होती है तो आईलाइनर का इस्तेमाल अवश्य किया जाता है। इसके बिना आईमेकअप पूरा ही नहीं होता। आमतौर पर महिलाएं बाजार में मिलने वाले आईलाइनर का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन अगर आप चाहें तो खुद घर पर भी जैल बेस्ड आईलाइनर बनाकर इस्तेमाल कर सकती हैं। तो चलिए जानते हैं इसे बनाने का तरीका-   इनकी होगी जरूरत घर पर जेल आईलाइनर बनाने के लिए आपको ब्लैक या किसी कलर के आईशैडो, एक छोटा कंटेनर, आई प्राइमर व नारियल के तेल की आवश्यकता होगी। वैसे तो आईलाइनर बनाने के लिए ब्लैक आईशैडो का प्रयोग किया जाता है, लेकिन अगर आप कलरफुल आईलाइनर बनाना चाहती हैं तो उस कलर के आईशैडो का प्रयोग करें। इन सभी चीजों के इस्तेमाल से एक बेहतरीन आईलाइनर तैयार किया जा सकता है।   यूं बनाएं आईलाइनर होममेड जेल आईलाइनर बनाने के लिए सबसे पहले ब्लैक आईशैडो को स्क्रैप करके कंटेनर में भरें। अब इसमें थोड़ा सा प्राइमर मिलाएं और तब तक मिक्स करें, जब तक इनकी कसिस्टेंसी एक जैसी न हो जाए। अब इसमें नारियल तेल की कुछ बूंदें मिलाएं और इन्हें फिर से अच्छी तरह मिक्स करें। आपका आईलाइनर बनकर तैयार है।   होते हैं यह फायदे होममेड जेल आईलाइनर बनाने के कई तरह के फायदे हैं। सबसे पहले तो आप इस तरीके से उन कलर्स के आईलाइनर भी बना सकते हैं, जो मार्केट में आसानी से अवेलेबल नहीं होते। इसके अतिरिक्त यह जेल आईलाइनर बेहद स्मूद लुक देता है और करीबन सात से आठ घंटे तक आराम से टिकता है।   इसका रखें ध्यान   अगर आप भी घर पर आईलाइनर बनाने का मन बना रही हैं तो कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें। जैसे कि आईलाइनर बनाने के लिए लूज आईशैडो का प्रयोग करें।   अगर आप अपने आईलाइनर को शिमरी इफेक्ट नहीं देना चाहतीं तो बेहतर होगा कि आप मैट आईशैडो का प्रयोग करें।   वहीं जिस आईप्राइमर का आप इस्तेमाल करें, वह क्लीयर हो। अर्थात् उसका अपना कोई कलर न हो। अन्यथा अंत में आपके आईलाइनर का वह कलर नहीं आएगा, जिसकी आपको इच्छा है।   अगर आपके पास नारियल का तेल नहीं है तो आप उसके स्थान पर वैसलीन का प्रयोग भी कर सकती हैं।  

एसआईआर फार्म में गलत जानकारी देने पर होगी कानूनी कार्रवाई

भोपाल  लोकतांत्रिक व्यवस्था को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के उद्देश्य से चुनाव आयोग ने एसआईआर फार्म में गलत जानकारी देने वालों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान दोहराया है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 31 और 32 के तहत यदि कोई व्यक्ति एसआईआर फार्म में गलत जानकारी देता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इस प्रावधान के अनुसार, दोषी पाए जाने पर दो साल तक की कैद और जुर्माना दोनों हो सकते हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि एस आई आई प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मतदाता द्वारा दी जाने वाली सभी सूचनाओं की सत्यता अनिवार्य है। गलत जानकारी देने को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखते हुए आयोग ने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। मतदाता सूची की शुद्धता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आयोग ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें और किसी भी प्रकार की मिथ्या सूचना देने से बचें।  

गौतम गंभीर की कोचिंग स्टाइल पर बोल पड़े ABD, कहा—जज़्बाती होना नुकसानदेह

नई दिल्ली  दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 2 टेस्ट मैच की होम सीरीज में 0-2 से सफाया होने के बाद भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर लगातार चर्चा में हैं। सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट के गलियारों तक उन पर भारत में टेस्ट क्रिकेट को बर्बाद करने के आरोप लग रहे। उनके खिलाफ कही जा रही बातों का लब्बालुआब है- प्रयोग पर प्रयोग, बैटिंग ऑर्डर में मनमाने बदलाव, स्पेशलिस्ट खिलाड़ियों का तिरस्कार, ऑलराउंडरों के साथ सनक की हद तक प्यार। हालांकि गंभीर ने दो टूक कहा है कि यही तो बदलाव का दौर होता है। ट्रांजिशन फेज यही तो होता है। इस बीच दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज पूर्व बल्लेबाज एबी डिविलियर्स ने कहा है कि इमोशनल कोच का होना अच्छी बात नहीं होती।   रविचंद्रन अश्विन के यूट्यूब चैनल पर डिविलियर्स ने गौतम गंभीर को लेकर बेबाकी से अपनी बात रखी। वह और गंभीर काफी समय तक एक ही वक्त में इंटरनेशनल क्रिकेट खेले हैं। दोनों बतौर खिलाड़ी कई बार अंतरराष्ट्रीय मैचों में आमने-सामने हुए हैं। आईपीएल में भी दोनों लंबे वक्त तक एक दूसरे के खिलाफ खेले हैं। डिविलियर्स ने अपने उन्हीं अनुभवों के आधार पर 'कोच गौतम गंभीर' का मूल्यांकन करने की कोशिश की है। डिविलियर्स ने कहा, 'जब नेतृत्व की बात आती है तो मुझे नहीं पता कि गौतम गंभीर कैसे हैं। मैं उन्हें इमोशनल प्लेयर (भावुक खिलाड़ी) के तौर पर जानता आया हूं और अगर चेंज रूम में भी वही स्थिति है तो आम तौर पर इमोशनल कोच का होना अच्छी बात नहीं मानी जाती है।' दक्षिण अफ्रीकी दिग्गज ने हालांकि साथ में ये भी कहा कि भावुक खिलाड़ी रहे गंभीर भावुक कोच भी होंगे, ये जरूरी नहीं। उन्होंने कहा, ‘यह कहने की जरूरत नहीं कि वह पर्दे के पीछे उसी तरह के कोच हैं। कुछ भी सही या गलत नहीं होता। कुछ खिलाड़ी पूर्व खिलाड़ी के साथ सहज महसूस करते हैं, कुछ उनके साथ सहज होते हैं जिनके साथ कभी नहीं खेला है लेकिन उसके पास वर्षों का कोचिंग अनुभव हो।’ डिविलियर्स ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा, 'मुझे गैरी कर्स्टन के तहत खेलना बहुत पसंद था। वह भी गंभीर की तरह पूर्व खिलाड़ी हैं। कुछ खिलाड़ियों को इस बात से आत्मविश्वास आता है कि कोई पूर्व महान खिलाड़ी उनके आस-पास है- कोई है जो उसे और ज्यादा झोंकने के लिए प्रेरित करता है।'  

अफ्रीकी चीता KP-2 कूनो से भटका, किशनगंज के जंगलों में दिखाई दिया

बारां एक बार फिर मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से आया अफ्रीकी चीता राजस्थान-मध्यप्रदेश सीमा से सटे जिले के किशनगंज इलाके में दिखाई दिया है। बताया जा रहा है कि चीता KP-2 किशनगंज रेंज के जंगलों में प्रवेश कर गया है, जिससे वन विभाग में हड़कंप मच गया है। फिलहाल दोनों राज्यों के वन विभाग की टीमें चीते की गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए हैं और उसे ट्रैक कर रही हैं। मिली जानकारी के अनुसार अफ्रीकी चीता KP-2 को दोपहर के समय रामगढ़ क्षेत्र में पहली बार देखा गया, जहां वह जंगल की ओर बढ़ता नजर आया। कुछ समय बाद ही वह सरसों के खेत में फिर से दिखाई दिया, जिससे आसपास के ग्रामीण इलाकों में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद विभागीय टीम मौके पर पहुंची और निगरानी तेज कर दी गई। सूत्रों के मुताबिक अफ्रीकी चीतों को आदिवासी अंचल के जंगल रास आ रहे हैं। इससे पहले भी दिसंबर 2023 में कूनो नेशनल पार्क से अफ्रीकी चीता ‘अग्नि’ इसी क्षेत्र में पहुंचा था। लगातार हो रही साइटिंग से यह संकेत मिल रहे हैं कि चीते इस इलाके को अपना नया विचरण क्षेत्र मानने लगे हैं। वन विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है और कहा है कि वे जंगल या खेतों की ओर अनावश्यक आवाजाही न करें। बहरहाल KP-2 की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।