samacharsecretary.com

चक्रवात ‘दित्वा’ से जूझ रहे श्रीलंका के साथ भारत खड़ा, मजबूत समर्थन के साथ राहत सहायता रवाना

नई दिल्ली  भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा ने शनिवार को श्रीलंका के कॉर्पोरेट दिग्गजों से मुलाकात कर चक्रवात प्रभावित द्वीप राष्ट्र के प्रति भारत के निरंतर समर्थन को दोहराया। श्रीलंका में चक्रवात ‘दित्वा' से अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो गयी है। झा की ‘रीबिल्डिंग श्रीलंका फंड' से जुड़े कॉर्पोरेट दिग्गजों के साथ यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब श्रीलंका चक्रवात ‘दित्वा' के बाद भीषण बाढ़, भूस्खलन और बुनियादी ढांचे को हुए गंभीर नुकसान से जूझ रहा है। इस आपदा में अब तक 607 लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे कई जिले अलग-थलग पड़ गए हैं और देश की आपदा-प्रतिक्रिया क्षमता पर भारी दबाव पड़ा है। भारतीय उच्चायोग ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि झा ने पुनर्वास और इस संकट से उबरने के लिए रास्ते तलाशने पर चर्चा करने के लिए कॉर्पोरेट दिग्गजों से मुलाकात की। झा ने उन्हें ‘भारत की प्रतिक्रिया और इस संकट से उबरने में श्रीलंका के साथ खड़े रहने की निरंतर प्रतिबद्धता' के बारे में भी जानकारी दी। ‘ऑपरेशन सागर बंधु' के तहत सहायता के लिए श्रीलंका की अंतररराष्ट्रीय अपील पर प्रतिक्रिया देने वाला भारत पहला देश था। भारतीय मिशन ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि उसने जमीन एवं हवाई दोनों माध्यमों से श्रीलंका को मानवीय सहायता मुहैया कराई जिसमें आपातकालीन प्रतिक्रिया और निरंतर चिकित्सा देखभाल दोनों पर ध्यान केंद्रित किया गया। ‘ऑपरेशन सागर बंधु' की 28 नवंबर को शुरुआत के बाद से भारत ने 58 टन से ज्यादा राहत सामग्री उपलब्ध कराई है, जिसमें सूखा राशन, टेंट, तिरपाल, स्वच्छता किट, जल शोधन किट और लगभग 4.5 टन दवाइयां व सर्जिकल उपकरण शामिल हैं।   जनरेटर, बचाव नौकाओं सहित 50 टन उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं और महत्वपूर्ण संपर्क बहाल करने के लिए 31 इंजीनियरों के साथ 130 टन बेली ब्रिज इकाइयां हवाई मार्ग से पहुंचाई गई हैं। कैंडी के निकट महियांगनया में अब भारत के 78 चिकित्सा कर्मियों वाला एक पूर्ण विकसित फील्ड अस्पताल जीवन रक्षक सेवाएं प्रदान कर रहा है। बुरी तरह प्रभावित जा-एला और नेगोम्बो में भीष्म (भारत स्वास्थ्य सहयोग हित और मैत्री पहल) आरोग्य मैत्री केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। आईएनएस विक्रांत, आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस सुकन्या ने श्रीलंका को तत्काल बचाव एवं राहत सहायता प्रदान की है। आईएनएस विक्रांत से तैनात दो चेतक हेलीकॉप्टर के अलावा, भारतीय वायु सेना के दो भारी-भरकम एमआई-17 हेलीकॉप्टर भी लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने में सक्रिय रूप से शामिल हैं। इसके अलावा, श्रीलंका में फंसे लगभग 2,500 भारतीयों को निकाला गया, जिनमें 400 से अधिक भारतीय वायुसेना के विमानों से आये थे।   

फ्लाइट सेवाओं में अव्यवस्था को लेकर सैलजा सख्त, कहा– यात्रियों के अधिकारों पर तुरंत हो सरकारी हस्तक्षेप

चंडीगढ़  सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि देश में हवाई सेवाओं की अव्यवस्था लगातार बढ़ती जा रही है और एयरलाइंस द्वारा अचानक उड़ानें रद्द किए जाने की घटनाओं ने यात्रियों को गहरी चिंता और असुविधा में डाल दिया है। डीजीसीए और अन्य संबंधित संस्थाओं द्वारा समय रहते स्थिति की समीक्षा न करना तथा आवश्यक कदम न उठाना बेहद गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक विफलता को सामने लाती है, बल्कि करोड़ों यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। केंद्र सरकार को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। मीडिया को जारी बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि हवाई सेवाओं में एक प्रकार की एकाधिकार जैसी प्रवृत्ति उभरती दिखाई दे रही है, जिसका सीधा नुकसान आम यात्रियों को झेलना पड़ रहा है। बार-बार फ्लाइट कैंसिल होने की घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि यात्रियों के पास न तो कोई व्यवहारिक विकल्प बचता है और न ही एयरलाइंस की ओर से उन्हें संतोषजनक समाधान दिया जाता है। ऐसी स्थिति किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी कहा कि एयरलाइंस की पहली जिम्मेदारी यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और पारदर्शिता को सुनिश्चित करना है, लेकिन जब कंपनियां अपनी मूल जिम्मेदारियों से पीछे हटने लगती हैं, तब सरकार और नियामक संस्थाओं की जवाबदेही और भी बढ़ जाती है। कुमारी सैलजा ने कहा कि केंद्र सरकार से मांग की कि वह इस पूरे मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए हवाई सेवाओं की निगरानी को मजबूत करे और एयरलाइंस को यात्रियों के प्रति अधिक उत्तरदायी बनाने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करे। सांसद ने स्पष्ट कहा कि अचानक उड़ान रद्द करने की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने, यात्री-हितैषी व्यवस्थाओं को लागू करने और उभरती एकाधिकार प्रवृत्ति की विस्तृत जांच करने की आवश्यकता है। एयरलाइंस द्वारा यात्रियों को समय पर वैकल्पिक व्यवस्था और मुआवजा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है, ताकि उनकी यात्रा योजनाओं और समय का सम्मान किया जा सके। सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि यात्रियों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार का दायित्व है, और केंद्र को इस विषय में संवेदनशीलता और तत्परता के साथ ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे हालात दोबारा न बनें और हवाई यात्रा व्यवस्था में जनता का भरोसा कायम रह सके। किसानों को पानी उपलब्ध कराने का वादा नहीं हुआ पूराः सिरसा जिला के अनेक गांवों में सिंचाई के पानी की गंभीर समस्या को लेकर सांसद कुमारी सैलजा ने राज्य सरकार पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि किसानों को पानी उपलब्ध कराने का सरकार का वादा आज तक पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने मांग की है कि सरकार तुरंत इस समस्या का हल करे और पानी की आपूर्ति को बिना देरी बहाल किया जाए। सांसद ने कहा कि चौटाला सहित कई गांव लगातार पानी के संकट से जूझ रहे हैं, जिसके कारण किसान अपनी फसलों को बचाने तक में असमर्थ हो रहे हैं। सांसद ने कहा है कि इस मुद्दे को वह पहले भी लोकसभा में उठा चुकी हैं, लेकिन सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होने से हालात और खराब हो गए हैं। सांसद ने चेतावनी दी कि किसानों की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यदि सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए, तो बढ़ते आक्रोश के लिए वही जिम्मेदार होगी।

ताकत, संतुलन और सम्मान: सैनिकों के खेल से ओलंपिक तक वेटलिफ्टिंग की कहानी

नई दिल्ली। वेटलिफ्टिंग ताकत, सहनशक्ति और संतुलन का खेल है, जिसमें स्नैच के अलावा, क्लीन एंड जर्क दो मुख्य तकनीकों के रूप में शामिल हैं। इस खेल के लिए आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता के साथ शरीर की मांसपेशियों को विकसित करना जरूरी है। ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग बेहद लोकप्रिय खेल है। एक दौर था, जब मनुष्य किसी कार्य को अंजाम देने के लिए भार को उठाकर यहां से वहां जाता था, लेकिन बाद में इसे शख्स के बलवान होने से जोड़कर देखा जाने लगा। धीरे-धीरे लोग एक-दूसरे से अधिक वजन उठाकर खुद को ज्यादा बलशाली साबित करने की होड़ में लग गए। यहीं से इस खेल का इजाद भी हुआ। ग्रीस, चीन, मिस्र और मेसोपोटामिया में योद्धा और सैनिक अपनी ताकत परखने के लिए भारी पत्थर या वस्तुएं उठाते थे, जिसने इस खेल की नींव रखी। धीरे-धीरे अन्य देशों में पहलवान शौक के साथ वेटलिफ्टिंग के खेल में हिस्सा लेने लगे। आलम ये रहा कि 19वीं शताब्दी के अंत तक वेटलिफ्टिंग एक अंतरराष्ट्रीय खेल के रूप में अपनी पहचान बना चुका था। 1896 एथेंस ओलंपिक में इस खेल को शामिल किया गया। हालांकि, यह 1900, 1908 और 1912 के संस्करणों का हिस्सा नहीं रहा। इन तीन संस्करणों को छोड़कर, वेटलिफ्टिंग का खेल प्रत्येक ओलंपिक का हिस्सा रहा है। साल 1935 में भारतीय भारोत्तोलन महासंघ की स्थापना हुई, जिसके बाद भारत ने 1936 बर्लिन ओलंपिक में पहली बार इस इवेंट में हिस्सा लिया। 2000 सिडनी ओलंपिक में इस खेल में महिलाओं ने भी हिस्सा लेना शुरू किया। इसी ओलंपिक में कर्णम मल्लेश्वरी ने महिलाओं के 54 किलोग्राम भारवर्ग में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इसके बाद मीराबाई चानू ने 2020 टोक्यो ओलंपिक में 49 किलोग्राम भार वर्ग में देश को सिल्वर मेडल दिलाया। वेटलिफ्टिंग के खेल में वेटलिफ्टर्स अलग-अलग बॉडीवेट कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा करते हैं। ओलंपिक में इसके दो चरण होते हैं: 'स्नैच' और 'क्लीन एंड जर्क'। वेटलिफ्टर को दोनों कैटेगरी में तीन-तीन मौके दिए जाते हैं, जिसमें उसके सर्वश्रेष्ठ प्रयास को ही जोड़ा जाता है। दोनों कैटेगरी के वजन को जोड़कर विजेता घोषित किया जाता है। 'स्नैच' में वेटलिफ्टर बारबेल को उठाते हुए इसे अपने सिर के ऊपर सिंगुलर मोशन में लिफ्ट करता है, जबकि 'क्लीन एंड जर्क' में वेटलिफ्टर पहले बारबेल को उठाकर इसे अपनी छाती तक लेकर जाता है। उसे इसी पोजीशन पर कुछ देर रुकना होता है। इसके बाद वह अपनी बाहों और पैरों को फैलाकर बारबेल को सिर के ऊपर लेकर जाता है। इस दौरान उसकी कोहली बिल्कुल सीधी रहनी जरूरी है। बजर बजने तक वेटलिफ्टर को बारबेल सिर से ऊपर रखना होता है। भारत में सीनियर के साथ युवा और जूनियर स्तर पर वेटलिफ्टिंग तेजी से आगे बढ़ रही है। विश्व स्तर पर भारत के वेटलिफ्टर्स ने अपना नाम रोशन किया है। सीनियर्स के नक्शे कदम पर चलते हुए युवा खिलाड़ी और जूनियर स्तर के एथलीट इसमें शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं, जो भविष्य के लिए अच्छा आधार है। कड़ी ट्रेनिंग, बेहतरीन संसाधन, अच्छी कोचिंग और सपोर्ट के साथ ओलंपिक में भारत को इस खेल में और भी अधिक मेडल मिलने की संभावना है।

शाम के समय की 4 बड़ी गलतियाँ, जो आपकी किस्मत को नीचे खींच सकती हैं!

  हिंदू धर्म ग्रंथों में खुशहाल जीवन के लिए कुछ बातें नियम बताए गए हैं. अगर व्यक्ति इन बातों का ध्यान रखता है, उसे जीवन में खुश-शांति और समृद्धि प्राप्त होती है. धर्म शास्त्रों में सुबह और शाम के नियम भी बहुत ही विस्तार से बताए गए हैं. शाम के समय कुछ कामों को करने से बचना चाहिए. मान्यता है कि शाम के समय इन चार कामों को करने से व्यक्ति रसातल में पहुंच सकता है. संध्या का समय सूर्यास्त के बाद 72 मिनट और सुबह 3 बजकर 30 मिनट से 07 बजे तक संध्या काल माना जाता है. इस समय ये चार काम करने बिल्कुल शुभ नहीं माने जाते हैं. इन कामों को करने से घर में आर्थिक परेशानियां और तंगी आ सकती है. रोग हो सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर ये चार काम कौन से हैं, जिन्हें शाम के समय करने के लिए मना किया जाता है. भोजन न करें जगद्गुरु हरिप्रपन्नाचार्य के अनुसार शाम के समय भोजन नहीं करना चाहिए. शाम के समय भोजन करने से ऐसा रोग हो सकता है, जो विदेश इलाज कराकर भी ठीक नहीं होता. इसलिए भूलकर शाम के समय भोजन नहीं करना चाहिए. स्त्री और पुरुष पास न आएं जगद्गुरु हरिप्रपन्नाचार्य के अनुसार, शाम के समय स्त्री और पुरुष को पारस्परिक सहयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि शाम के समय स्त्री और पुरुष को पारस्परिक सहयोग से जो पुत्र पैदा होता है वो बाहुबली बनता है. सोएं नहीं अगर शाम के समय कोई सोता है, तो माता लक्ष्मी नाराज होकर उसके घर से चली जाती हैं, जिसके बाद घर में गरीबी, आर्थिक तंगी और दरिद्रता का वास होता है. इसलिए शाम को सोना धर्म शास्त्रों में वर्जित किया गया है. स्वाध्याय न करें शाम के स्वाध्याय अर्थात स्वयं का अध्ययन या आत्म अध्ययन भी नहीं करना चाहिए. माना जाता है कि शाम के समय ऐसा करने वाला व्यक्ति बहुत जल्दी काल के गाल में समा जाता है.

फरीदाबाद में अतिक्रमण पर बड़ा एक्शन, अवैध निर्माण ढहाकर रिकवर की गई सरकारी भूमि

फरीदाबाद फरीदाबाद के डीटीपी एनफोर्समेंट ने आज पल्ला इलाके में सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जों को पीले पंजे से धराशाई कर दिया, इससे पहले भी 6 बार इनमें से कई जगहों पर कब्जे हटाने की कार्रवाई की गई थी, हर बार डीटीपी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी इन लोगों को चेतावनी देते हैं और कई लोगों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की गई है।  डीटीपी यजन चौधरी के मुताबिक कई बार इन लोगों का नुकसान हो चुका है। बहुत से लोगों ने इस जगह पर दोबारा कब्ज़ा करने की कोशिश नहीं की, लेकिन कई करते हैं तो नुकसान उठाते हैं। अबकी बार सख्त कार्रवाई करते हुए इनको चेतावनी दी गई है। आगे कानूनी कार्रवाई भी इनके खिलाफ अमल में लाई जायेगी। 

कांग्रेस में नई नियुक्तियों पर उठे सवाल, पूर्व डिप्टी सीएम ने कहा– पार्टी की पहचान खतरे में

रायपुर छत्तीसगढ़ में आज कांग्रेस के नवनियुक्त जिला अध्यक्षों ने पदभार ग्रहण किया. राजधानी के गांधी मैदान स्थित जिला कांग्रेस भवन में रायपुर शहर समेत ग्रामीण के जिला अध्यक्षों ने पदभार ग्रहण किया. इस दौरान बड़ी संख्या में जिलों के पदाधिकारी और प्रदेश के पदाधिकारी शामिल हुए. इसी के साथ ही कांग्रेस पार्टी ने सभी पूर्व जिला अध्यक्षों को पद से मुक्त कर दिया है. इस दौरान पूर्व डिप्टी सीएम TS सिंहदेव ने मीडिया से बातचीत में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा- यह नियुक्ति कांग्रेस के मूल स्वरूप को बदलने वाली है. पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंह देव ने कहा कि यह नियुक्ति कांग्रेस के मूल स्वरूप को बदलने वाली है. कोशिश है कि हम भी कैडर बेस्ड पार्टी खड़ा कर सकें. कांग्रेस में लोग केवल व्यक्ति से जुड़ने लगे थे, पार्टी से नहीं. अब संगठन आगे होगा, व्यक्ति थोड़ा पीछे रहेंगे. पूरा परिवर्तन लाने में थोड़ा वक्त लगेगा, लेकिन जितनी देर करते उतना पीछे रहते. पदभार ग्रहण के अवसर पर पूर्व डिप्टी सीएम टी एस सिंह देव, पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय, पीसीसी चीफ दीपक बैज और प्रदेश सह प्रभारी विजय जांगिड़ भी समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए. वहीं पश्चिम बंगाल में रखी जा रही बाबरी मस्जिद की नींव को लेकर भी पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंह देव बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि आपने किसी से कोई चीज ले ली है. देश के कानून के अनुरूप भी नहीं ली. बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने धारा 142-143 लगाकर ले ली. उन लोगों की भावना आहत हुई है. ऐसा नहीं है कि वह देश के नागरिक नहीं रह गए. सबको अपने तौर तरीकों से पूजा अर्चना करने की आजादी है.

हवाई यात्रियों को राहत: इंडिगो विवाद के बाद उड्डयन मंत्रालय ने लागू किया फेयर कैप

नई दिल्ली  इंडिगो की उड़ानों में जारी संकट के बीच उड्डयन मंत्रालय ने यात्रियों को राहत देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने सभी प्रभावित रूटों पर फेयर कैप (Fare Cap) लागू कर दिया है, ताकि एअरलाइंस अत्यधिक किराया वसूल न कर सकें और संकट में फंसे यात्रियों का शोषण न हो। संकट की वजह इंडिगो की कई उड़ानें हाल ही में परिचालन गड़बड़ियों के कारण रद्द या देर से चल रही हैं। इससे यात्रियों की मांग बढ़ गई है और कुछ एयरलाइंस ने इस अवसर का फायदा उठाकर किरायों में अत्यधिक वृद्धि कर दी। मंत्रालय की कड़ी कार्रवाई उड्डयन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी परिस्थिति में यात्रियों से मनमानी या अवसरवादी तरीके से किराया वसूलना सख्त मना है। सभी प्रभावित रूटों पर अधिकतम किराया तय कर दिया गया है, जिसे फेयर कैप कहा जाता है। एयरलाइंस को बिना किसी अपवाद के इस सीमा का पालन करना होगा। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती। उद्देश्य और निगरानी मंत्रालय का उद्देश्य मार्केट में मूल्य अनुशासन बनाए रखना और संकट में फंसे यात्रियों को राहत देना है। खासकर वरिष्ठ नागरिक, छात्र और मरीजों जैसे यात्रियों को अत्यधिक आर्थिक बोझ में नहीं डाला जाएगा। मंत्रालय रियल टाइम डेटा के जरिए किरायों की निगरानी कर रहा है और एयरलाइंस तथा ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।   मंत्रालय की कड़ी चेतावनी  मंत्रालय ने कहा कि तय मानकों का उल्लंघन होने पर तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी। यात्रियों से अपील की गई है कि वे अपनी उड़ान से पहले किराया और रूट की स्थिति की जांच करें। यह कदम संकटग्रस्त यात्रियों को तुरंत राहत देने और एयरलाइंस के मनमाने शुल्क वसूलने को रोकने के लिए उठाया गया है।  

क्या रात में स्मार्टवॉच पहनना सुरक्षित है? पूरी जानकारी

नई दिल्ली क्या आप स्मार्टवॉच इस्तेमाल करते हैं? ऐसे में इस बात की दुविधा आपको भी होती होगी कि सोते समय स्मार्टवॉच पहनी जाए या नहीं? कई लोग इसे कोई बड़ी बात नहीं मानते, वहीं कई लोग सोते समय अपने शरीर पर किसी भी गैजेट के होने से परहेज करते हैं। चलिए फिर आज तमाम दुविधाओं का अंत करते हुए पता लगाते हैं कि स्मार्टवॉच पहन कर सोना चाहिए या नहीं? इसके बाद आप इस बात का फैसला बेहतर तरीके से कर पाएंगे कि स्मार्टवॉच को सोते समय पहनना है या नहीं। नींद की क्वालिटी ट्रैक करने के लिए स्मार्टवॉच कंपनियां अपनी घड़ियों में खासतौर पर स्लीप मोड फीचर देती हैं। इस फीचर की मदद से यूजर अपनी नींद की क्वालिटी का सही ट्रैक पता कर सकता है। स्मार्टवॉच हल्की, गहरी और REM स्लीप को मापती है, जिससे आपको समझ आता है कि आपकी नींद कितनी बेहतर या खराब है। इसके अलावा स्मार्टवॉच आपको नींद सही से पूरी न होने पर चेतावनी भी दे सकती है, ताकि आप ठीक से नींद लेने पर ध्यान दे सकें। अगर आपका मकसद अपनी नींद की क्वालिटी पता करना या फिर नींद की क्वालिटी सुधारना है, तो आपको स्मार्टवॉच पहन कर सोना चाहिए। दूसरों को बिना डिस्टर्ब किए जागने के लिए अगर आप सुबह जल्दी उठते हैं और नहीं चाहते कि आपके फोन का अलार्म बाकी सभी की नींद खराब करे, तो भी आप स्मार्टवॉच पहन कर सो सकते हैं। दरअसल आप स्मार्टवॉच पर अलार्म लगाकर सोएंगे, तो वह आवाज करने की जगह आपके हाथ पर वाइब्रेट होकर आपको जगाएगी। इससे आप समय से उठ पाएंगे और किसी की नींद खराब भी नहीं होगी। बता दें कि ऐपल या सैमसंग जैसी महंगी स्मार्टवॉच में अलार्म के लिए खासतौर पर सॉफ्ट तरह की वाइब्रेशन का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि आपकी नींद तीखी और झटकेदार वाइब्रेशन से ना टूटे। हेल्थ से जुड़े सभी अपडेट पाने के लिए स्मार्टवॉच सोते समय आपके दिल की धड़कन से लेकर खून में मौजूद ऑक्सीजन तक लगातार नापता है। यह आपके स्ट्रेस लेवल आदि पर भी नजर रखती है। ऐसे में अगर आप अपने स्वास्थ्य को लेकर अलर्ट रहना चाहते हैं, तो रात में स्मार्टवॉच पहन कर सो सकते हैं। ऐसे में अगर आपकी हेल्थ से जुड़ी कोई मेट्रिक खतरे के निशान पर जाती है, तो यह आपको समय रहते सजग कर सकती है। नींद में अड़चन से बचना हो तो अगर आप उन लोगों में से हैं, जिन्हें कलाई में कुछ भी पहनकर सोने से असुविधा होती है, तो आपको स्मार्टवॉच पहन कर नहीं सोना चाहिए। दरअसल कई बार स्मार्टवॉच की वजह से कलाई में घर्षण, पसीना या भारीपन महसूस हो सकता है। ऐसे में स्मार्टवॉच पहन कर सोने से किसी तरह का फायदा होने की जगह, सोने में ही असुविधा हो सकती है। बेहतर बैटरी लाइफ के लिए अगर आप अपनी स्मार्टवॉच से बेहतर बैटरी लाइफ चाहते हैं, तो उसे रात में पहनकर नहीं सोना चाहिए। अगर आप रातभर स्मार्टवॉच को नींद या स्वास्थ्य से जुड़ी बाकी डिटेल्स मापने के ल‍िए इस्‍तेमाल करते हैं, तो उठने के बाद स्मार्टवॉच की बैटरी बेहद कम मिलती है। ऐसे में दिन में सबसे पहले आपको अपनी स्मार्टवॉच को चार्ज करना पड़ता है। अगर आप ऐसा नहीं चाहते, तो रात में स्मार्टवॉच पहन कर न सोएं। अगर नींद कच्ची है तो अगर आपकी नींद कच्ची है या फिर आप हल्के शोर या रोशनी से उठ जाते हैं, तो आपको स्मार्टवॉच पहन कर नहीं सोना चाहिए। हो सकता है कि आपकी स्मार्टवॉच रात में किसी तरह के नोटिफिकेशन के चलते वाइब्रेट होने लगे या फिर स्मार्टवॉच के सेंसर की लाल-हरी लाइट आपकी नींद तोड़ दे। ऐसे में स्मार्टवॉच को पहने कर सोने से बचें। देखा जाए, तो स्मार्टवॉच पहन कर सोना पूरी तरह से आप पर निर्भर करता है। ऐसे में अपनी आदत के अनुसार चुनें कि आप स्मार्टवॉच पहन कर सोना चाहते हैं या नहीं।

डिजिटल निगरानी की बड़ी पहल: टेंडर जारी होते ही सरपंचों को SMS अलर्ट, गांवों में बढ़ेगी पारदर्शिता

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार अब गांवों में विकास कार्यों से जुड़ी प्रक्रियाओं को और पारदर्शी बनाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने निर्देश दिया है कि विकास एवं पंचायत विभाग के एचईडब्ल्यू पोर्टल पर जैसे ही कोई टेंडर जारी हो, उसकी जानकारी संबंधित सरपंचों को तत्काल SMS के माध्यम से भेजी जाए। सीएम सैनी ने कहा कि इस व्यवस्था से ग्रामीण प्रतिनिधियों को विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति की समय पर जानकारी मिलेगी, जिससे परियोजनाओं की निगरानी मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि समय पर सूचना मिलने से न केवल काम की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी, बल्कि भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी पर भी रोक लगेगी। बैठक में बताया गया कि 1 हजार से अधिक आबादी वाले गांवों में कच्ची फिरनियों को पक्का बनाने का कार्य तेज गति से चल रहा है। अब तक 639 फिरनियों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 303 स्थानों पर कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा, ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य में 480 महिला चौपालों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 274 चौपालों पर कार्य जारी है। प्रथम चरण में 994 ई-पुस्तकालयों का नवीनीकरण भी पूरा कर लिया गया है और शीघ्र ही उनमें पुस्तकें व कंप्यूटर उपलब्ध कराए जाएंगे।

कार में ले जा रहे थे अवैध शराब! पुलिस ने लाखों की खेप पकड़ी, दो तस्कर गिरफ्तार

राजनांदगांव शराब तस्करी पर बसंतपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लाखों रुपए की मध्यप्रदेश निर्मित अवैध शराब जब्त की है। पुलिस के अनुसार आरोपी कार से भारी मात्रा में शराब को राजनांदगांव जिले में खपाने की कोशिश में था। सूचना मिलने पर पुलिस की टीम ने आरके नगर इलाके में पॉइंट लगाया। जांच के दौरान संदिग्ध कार को रोककर तलाशी ली तो उसमें बड़ी मात्रा में अवैध शराब बरामद की गई। पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देश पर बसंतपुर क्षेत्र में असामाजिक तत्वों एवं अवैध गांजा, शराब व नशीले पदार्थाें की बिक्री में संलिप्त लोगों के विरूद्व लगातार अभियान चलाया जा रहा है। बसंतपुर थाना प्रभारी एमन साहू ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की छानबीन भी की जा रही है। बरामद शराब और वाहन को जब्त कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अवैध शराब तस्करी के खिलाफ अभियान तेज किया जाएगा। पकड़े गए आरोपियों ने अपना नाम मनोज आचार्य निवासी बोरसी दुर्ग प्रगती मैदान एवं रोशन साहू निवासी धौराभांठा, धमधा जिला बेमेतरा का रहने वाला बताया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ राजनांदगांव, दुर्ग, महासमुन्द, रायगढ़, बलौदाबाजार, बेमेतरा में आपराधिक प्रकरण दर्ज है। जब्त शराब व कार, मोबाइल जुमला कीमत 7,46,414 रुपए है। इस मामले में पम्मे सरदार एवं अन्य की सरगर्मी से तलाश की जा रही है।