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खेजड़ी संरक्षण की लड़ाई तेज हुई, बीकानेर में 2 फरवरी को होगा महापड़ाव

जोधपुर राजस्थान में खेजड़ी सहित अन्य हरे वृक्षों के संरक्षण को लेकर चल रहा ‘खेजड़ी बचाओ अभियान’ अब तेज़ी से जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। जोधपुर संभाग समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया गया है। मुकाम में आयोजित महापंचायत के निर्णय के अनुसार आगामी 2 फरवरी 2026 को बीकानेर जिला मुख्यालय पर विशाल महापड़ाव एवं आंदोलन आयोजित किया जाएगा।  अभियान के तहत साधु-संतों के सानिध्य में बाड़मेर, सांचौर, जालौर और जोधपुर सहित कई क्षेत्रों में व्यापक जनसंपर्क किया गया। पर्यावरण प्रेमियों, ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों से संवाद कर उन्हें आंदोलन से जोड़ा गया। इस दौरान खेजड़ी वृक्ष के पर्यावरणीय, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को लेकर लोगों में गहरी चिंता और जागरूकता देखने को मिली। बिश्नोई समाज के साथ-साथ अन्य पर्यावरण प्रेमी भी इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आए। मीडिया से बातचीत में आंदोलन संयोजक परसराम बिश्नोई ने सरकार को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों की ताकत को कमतर नहीं आंका जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि खेजड़ी और अन्य हरे वृक्षों की कटाई रोकने के लिए सख्त और प्रभावी कानून नहीं बनाए गए, तो आंदोलन और अधिक उग्र होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। परसराम बिश्नोई ने दो टूक कहा कि हरे पेड़ों की कटाई किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने खेजड़ी की रक्षा के लिए मां अमृता देवी के नेतृत्व में दिए गए 363 बलिदानों का स्मरण करते हुए कहा कि यह परंपरा आज भी समाज को संघर्ष और बलिदान की प्रेरणा देती है। अभियान के तहत बाड़मेर, सांचौर, भीनमाल और जोधपुर के कई गांवों में जनसंपर्क किया गया है। साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं से चर्चा कर आंदोलन को कानूनी मजबूती देने की रणनीति भी तैयार की गई है। आने वाले दिनों में यह अभियान फलोदी, नागौर, बीकानेर के साथ-साथ हरियाणा और पंजाब तक विस्तारित किया जाएगा। खेजड़ी बचाओ अभियान अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई बनता जा रहा है।  

होली स्पेशल ट्रैवल प्लान: दिल्ली और पंजाब से बिहार के लिए 200 अतिरिक्त बसें, जानें बुकिंग डेट

पटना होली के रंग में सराबोर होने के लिए अपने घर बिहार लौटने की तैयारी कर रहे प्रवासियों के लिए राज्य सरकार ने इस साल बड़ा तोहफा दिया है। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) ने होली के त्योहार पर ट्रेनों में होने वाली भारी भीड़ और वेटिंग लिस्ट की समस्या को देखते हुए 200 विशेष फेस्टिवल बसों के परिचालन का निर्णय लिया है। ये बसें न केवल आरामदायक होंगी, बल्कि दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे दूरदराज के राज्यों से आने वाले यात्रियों के लिए किफायती भी साबित होंगी। 15 फरवरी से शुरू होगा परिचालन इन विशेष बसों का परिचालन 15 फरवरी से शुरू होकर 15 मार्च 2026 तक जारी रहेगा, जिससे यात्रियों को आने और वापस लौटने, दोनों ही समय सुविधा मिल सके। यात्रियों की सुविधा के लिए टिकट बुकिंग की प्रक्रिया 1 फरवरी से आधिकारिक वेबसाइट https://bsrtc.bihar.gov.in/ पर शुरू कर दी जाएगी। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि निजी ऑपरेटरों की मनमानी को रोकने के लिए इन बसों के किराए में विशेष छूट दी जाए, जिससे गरीब प्रवासियों पर आर्थिक बोझ न पड़े। भुगतान के लिए डिजिटल माध्यम जैसे यूपीआई, डेबिट और क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।   पांच राज्यों के प्रमुख रूटों पर संचालन ये बसें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के प्रमुख शहरों के लिए चलाई जाएंगी। ये बसें पीपीपी (PPP) मोड पर संचालित होंगी और इनमें एसी डीलक्स व नॉन-एसी डीलक्स दोनों तरह के विकल्प मौजूद रहेंगे। बसों की क्षमता 50 से 60 सीटों की होगी, जिससे अधिक से अधिक लोगों को सफर का मौका मिल सके। विभाग वर्तमान में रूटों के अंतिम निर्धारण और समय-सारणी को अंतिम रूप देने में जुटा है ताकि 1 फरवरी से बिना किसी बाधा के बुकिंग शुरू हो सके। होली पर आरामदायक होगी यात्रा: मंत्री परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने इस संबंध में कहा कि त्योहारों के समय ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं होती, जिससे प्रवासियों को काफी कठिनाई होती है। इसी समस्या के समाधान के लिए विभाग लगातार सकारात्मक योजनाओं पर काम कर रहा है। इन बसों के माध्यम से यात्री न केवल आरामदायक सफर कर सकेंगे, बल्कि समय पर अपने घर भी पहुंच पाएंगे। इसके अलावा, यात्रियों की बुनियादी सुविधाओं का ध्यान रखते हुए बस पड़ावों पर महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।   पिछले साल ढाई लाख यात्रियों ने किया था सफर पिछला रिकॉर्ड देखें तो बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की यह रणनीति काफी सफल रही है। पिछले साल भी निगम ने 220 बसों का सफल संचालन किया था, जिससे लगभग 2.50 लाख यात्रियों को लाभ मिला था। उस दौरान औसतन रोजाना 107 बसें चलाई गई, जिसमें 81 प्रतिशत सीटें भरी रही थीं। इस साल भी वैसी ही सफलता की उम्मीद की जा रही है।

रेलवे सुरक्षा में हाईटेक कदम: स्टेशन पर निगरानी करेगा रोबोट ‘ASC अर्जुन’

नई दिल्ली भारतीय रेलवे में अपनी तरह की पहली पहल के तहत विशाखापत्तनम रेलवे स्टेशन पर एक मानवरूपी रोबोट ‘ASC अर्जुन’ को पेश किया है। पूर्वी तट रेलवे (ECR) जोन के वाल्टेयर मंडल ने यात्रियों की सुरक्षा, संरक्षा और सेवा वितरण को बेहतर बनाने के लिए यह कदम उठाया है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के तहत में रोबोट को तैनात किया गया है, जो इसके आधुनिकीकरण और डिजिटल परिवर्तन अभियान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य सुरक्षा संचालन को मजबूत करना और यात्रियों की सहायता में सुधार करना है।   आरपीएफ के महानिरीक्षक (IG) आलोक बोहरा ने इस पहल की जानकारी दी। उन्होंने बताया, 'पूर्व तट रेलवे जोन के वाल्टेयर डिवीजन ने यात्रियों की सुरक्षा, संरक्षा और सेवा को मजबूत करने के लिए विशाखापत्तनम रेलवे स्टेशन पर ‘एएससी अर्जुन’ नामक एक मानवरूपी रोबोट तैनात किया है।' मंडल रेलवे प्रबंधक (DRM) ललित बोहरा ने कहा कि रोबोट उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IOT) कनेक्टिविटी और वास्तविक समय की निगरानी क्षमताओं से लैस है, जिससे यह आरपीएफ कर्मियों और यात्रियों दोनों के लिए एक स्मार्ट सहायक के रूप में कार्य कर सकता है। रोबोट किस तरह से सुरक्षा में करेगा सहयोग विज्ञप्ति में कहा गया कि एएससी अर्जुन को सुरक्षा निगरानी, ​​भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता निगरानी और सुरक्षा जागरूकता में सहयोग करेगा। साथ ही, इसे मानव संसाधन के बोझ को कम करने और प्रतिक्रिया समय में सुधार करने के लिए डिजाइन किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि मानवरूपी रोबोट को स्वदेशी नवाचार के माध्यम से पूरी तरह से विशाखापत्तनम में डिजाइन और विकसित किया गया है। इसके लिए आरपीएफ टीम ने सीनियर रेलवे और सुरक्षा अधिकारियों के मार्गदर्शन में एक वर्ष से अधिक समय तक काम किया है।

टी20 वर्ल्ड कप 2026 का काउंटडाउन शुरू, 16 टीमें तैयार… 4 देशों ने अब तक नहीं खोले पत्ते

नई दिल्ली T20 World Cup 2026 की शुरुआत में अब करीब दो सप्ताह का समय बाकी है। 7 फरवरी से भारत और श्रीलंका में शुरू हो रहे आईसीसी टी20 विश्व कप में 20 टीमें खेलने वाली हैं। बांग्लादेश के बाहर होने के बाद स्कॉटलैंड को मौका मिला है। हालांकि, अभी तक 16 ही टीमों का ऐलान टूर्नामेंट के लिए हुआ है। इनमें इंडिया और पाकिस्तान समेत सभी टीमों का नाम शामिल है, लेकिन अभी भी 4 देश ऐसे हैं, जिनके स्क्वॉड का ऐलान होना बाकी है। इनमें नया नवेला देश स्कॉटलैंड भी है, जो बांग्लादेश की जगह खेलने वाला है।   ग्रुप ए में टीम इंडिया और पाकिस्तान के अलावा नामीबिया, यूएसए और नीदरलैंड की टीम हैं। इन 5 टीमों में से 4 टीमों का ऐलान हो चुका है, जबकि यूएसए ने अभी तक अपनी टीम घोषित नहीं की है। ग्रुप बी की बात करें तो इस ग्रुप में ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, आयरलैंड, ओमान और जिम्बाब्वे की टीम शामिल है। इस ग्रुप की सभी टीमों की घोषणा हो चुकी है, जिसमें श्रीलंका ने प्रिलिमिनरी और ऑस्ट्रेलिया ने प्रोविजनल स्क्वॉड का ऐलान किया है। ग्रुप सी की बात करें तो इसमें पहले बांग्लादेश की टीम थी, लेकिन उसने भारत में खेलने से इनकार कर दिया है तो आईसीसी को स्कॉटलैंड को बांग्लादेश से रिप्लेस करना पड़ा है। स्कॉटलैंड के अलावा इस ग्रुप में इंग्लैंड, इटली, नेपाल और वेस्टइंडीज की टीम शामिल है। इनमें से इंग्लैंड, इटली और नेपाल ने ही टीम घोषित की है, जबकि स्कॉटलैंड और वेस्टइंडीज की टीम का ऐलान होना बाकी है। ग्रुप डी में साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड, अफगानिस्तान, कनाडा और यूएई की टीम शामिल है। इनमें से सिर्फ यूएई ऐसा देश है, जिसकी टीम अभी तक घोषित नहीं हुई है। बाकी के चार देशों ने अपनी-अपनी टीमें घोषित कर दी हैं। जिन देशों ने अभी तक टीम की घोषणा नहीं की है, उन्हें जल्द से जल्द टीम घोषित करनी होगी, क्योंकि आईसीसी की डेडलाइन इसी महीने के आखिर में खत्म हो रही है। सबसे लेटेस्ट पाकिस्तान की स्क्वॉड का ऐलान हुआ है। आपकी जानकारी के लिए बता दें, बांग्लादेश ने भी अपनी टीम का ऐलान टी20 विश्व कप के लिए कर दिया था, लेकिन अब टीम नहीं खेलेगी तो उस स्क्वॉड का कोई मतलब नहीं है।  

युवाओं को मिलेगा एआई, जनरेटिव टूल्स और उद्यमिता कौशल पर व्यावहारिक प्रशिक्षण

भोपाल मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा एआई आधारित प्रौद्योगिकी उद्यमिता विकास कार्यक्रम का आयोजन 28 जनवरी 2026 से 11 मार्च 2026 तक विज्ञान भवन, नेहरू नगर, भोपाल में किया जाएगा।इस छह सप्ताह के कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में नवाचार, तकनीकी दक्षता और उद्यमशील सोच को सशक्त करना है।कार्यक्रम भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी अनुवाद एवं नवाचार प्रभाग द्वारा प्रायोजित है।इसके माध्यम से प्रतिभागियों को एआई की मौलिक एवं उन्नत अवधारणाओं, आधुनिक टूल्स और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे सामाजिक एवं औद्योगिक समस्याओं के समाधान के लिए नवाचारी, स्केलेबल और सतत स्टार्टअप विकसित कर सकें। कार्यक्रम में उद्यमिता की समझ, एमएसएमई सहायता योजनाएं, वित्तीय संस्थान, परियोजना चयन एवं पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन, बाजार सर्वेक्षण, प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट निर्माण, संचार एवं सॉफ्ट स्किल्स विकास, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, जनरेटिव एआई, उत्पादन योजना, कार्यशील पूंजी प्रबंधन, विपणन, वित्त, मानव संसाधन, कानूनी औपचारिकताएं, कराधान और नेतृत्व कौशल जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। साथ ही प्रतिभागियों को इंटरएक्टिव टूल्स, ग्राफिक्स और ऑगमेंटेड रियलिटी के माध्यम से तकनीकी प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।कार्यक्रम में देश के विभिन्न संगठनों और संस्थानों से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञ, शासकीय विभागों के अधिकारी, सफल उद्यमी, बैंकर्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, विपणन एवं प्रेरणात्मक विशेषज्ञ और उद्यमिता विकास संस्थानों के प्रतिनिधि अपने अनुभव साझा करेंगे। प्रशिक्षण की कार्यप्रणाली में व्याख्यान, केस स्टडी, समूह अभ्यास, प्रस्तुतिकरण, हैंड्स-ऑन सत्र और उद्यमियों के साथ संवाद शामिल रहेगा। कार्यक्रम के लिए पात्रता अंतर्गत विज्ञान, इंजीनियरिंग अथवा प्रौद्योगिकी में स्नातक, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा या पीजीडीसीए धारक अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। आयु सीमा 18 से 35 वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि महिला एवं एससी,एसटी,ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को शासन के नियमानुसार आयु में छूट प्रदान की जाएगी। कुल 30 प्रतिभागियों का चयन ऑनलाइन पंजीकरण एवं आवश्यक होने पर साक्षात्कार के माध्यम से किया जाएगा। प्रवेश ‘पहले आओ–पहले पाओ’ के आधार पर होगा।कार्यक्रम पूर्णतः निःशुल्क है।इच्छुक अभ्यर्थी टीईडीपी के लिए https://tinyurl.com/mpcstAl पर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण की अंतिम तिथि 24 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है। कार्यक्रम के संरक्षक एमपीसीएसटी के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी हैं।समन्वय टीम में डॉ. प्रवीण दिघर्रा, श्री अवनीश के. शर्मा, नव्या चतुर्वेदी एवं श्री रविंद्र कौरव शामिल हैं।कार्यक्रम प्रदेश में एआई आधारित स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने, स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने और डिजिटल नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  

इंदौरवासियों को जाम से बड़ी राहत, 5 महीने में पूरे होंगे 4 फ्लाईओवर, कई इलाकों में सिग्नल फ्री सफर

इंदौर शहर के निर्माणाधीन चार प्रमुख फ्लाईओवर का निर्माण कार्य पांच माह में पूरा हो जाएगा। निर्माण पूरा होने के साथ ही इन चौराहों से वाहनों का आवागमन सुगम होगा और सिग्नल पर रूकने की आवश्यकता नहीं होगी। कलेक्टर शिवम वर्मा और निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने निर्माणाधीन फ्लाईओवर का दौरा कर निरीक्षण किया। फ्लाईओवर को जून माह तक पूरा करने के निर्देश दिए गए। 267 करोड़ की लागत से तैयार हो रहे हैं प्रोजेक्ट शहर में सत्य सांई चौराहा, देवास नाका, मूसाखेडी और आइटी पार्क चौराहा पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर का निर्माण किया जा रहा है। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) द्वारा चारों चौराहों पर फ्लाईओवर का निर्माण कार्य किया जा रहा है। यह फ्लाईओवर 267 करोड़ की लागत से बनाए जा रहे है। सोमवार को कलेक्टर शिवम वर्मा ने निर्माण कार्यो का अवलोकन किया। उन्होंने जून माह तक चारों का काम पूरा करने के निर्देश दिए। कलेक्टर वर्मा ने बताया कि यह सभी फ्लाईओवर्स शहर की यातायात व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इनके पूर्ण होने से नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।   अतिक्रमण हटाकर बाधाएं दूर करने के निर्देश चारों चौराहों पर निर्माण के दौरान कुछ बाधाए है, इन बाधाओं को रिमूवल कर हटाया जाएगा। वहीं चौराहों पर वैकल्पिक व्यवस्थाओं और समय-सीमा में काम पूरा करने को लेकर भी अधिकारियों ने चर्चा की। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि व्यवस्थित संचालन के लिए गार्ड तैनात किए जाएं, ताकि यातायात सुचारु रहे। धूल उड़ने से रोकने के लिए नेटिंग और अन्य उपाय किए जाएंगे। सर्विस रोड और पैदल यात्रियों की सुविधा पर जोर सर्विस लेन पर पैच रिपेयरिंग और डामरीकरण कर ट्रैफिक को सुचारू बनाया जाए। निर्माण कार्यो की आने वाले दिनों में नियमित समीक्षा की जाएगी। कलेक्टर वर्मा ने मूसाखेड़ी चौराहा पार करने के लिए पैदल नागरिकों के लिए व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशित किया कि निर्माणाधीन फ्लाईओवर के सर्विस रोड़ पर पर्याप्त लाईटिंग भी की जाए।   निर्माण में देरी, बढ़ाई समय सीमा फ्लाईओवर का निर्माण कार्य धीमी गति से किया जा रहा है।पहले निर्माण मार्च तक पूरा किया जाना था, लेकिन देरी को देखते हुए समय सीमा तीन माह बढ़ाई है। निर्माण कार्य जून तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। चारों फ्लाईओवर को अब पांच माह में पूरा करना होगा। इसके लिए लगातार मानिटरिंग कर काम की गति को बढ़ाया जाएगा। धीमे निर्माण के कारण आमजन को परेशानी हो रही है।

10वीं-12वीं की परीक्षाओं से पहले MP सरकार का बड़ा फैसला, स्कूलों में 1 फरवरी से ESMA लागू

भोपाल मप्र बोर्ड 10वीं व 12वीं की परीक्षाएं 10 फरवरी से और पांचवीं व आठवीं की बोर्ड परीक्षा 20 फरवरी से शुरू होंगी। वहीं शासन ने एसेंशियल सर्विस एंड मेंटेनेंस (एस्मा) लगा दिया है। यह एक फरवरी से 30 अप्रैल तक लागू रहेगा। तीन माह तक शिक्षक सामान्य के साथ महिला शिक्षिक भी संतान पालन अवकाश (सीसीएलई) भी नहीं ले पाएंगी। साथ ही शिक्षक आंदोलन या धरना-प्रदर्शन तक नहीं कर पाएंगे। प्रदेश के स्कूलों में एक फरवरी को एस्मा लग जाएगा। इसके पहले सभी विभिन्न विभागों में अटैच शिक्षकों को स्कूलों में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इसके बाद ही उन्हें फरवरी का वेतन मिलेगा। अटैच शिक्षकों की मूल स्कूलों में वापसी, भोपाल में 300 शिक्षक कार्यमुक्त इस संबंध में अभी सिर्फ भोपाल जिले के शिक्षकों को कार्यमुक्त किया गया है। भोपाल के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने 300 अटैच शिक्षकों को कार्यमुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है। वहीं कलेक्टर के आदेश से बीएलओ कार्य में लगे शिक्षकों में ड्यूटी को लेकर असमंजस की स्थिति है। राजधानी में 300 ऐसे शिक्षक हैं जो मुख्य पदांकित संस्था छोड़ अपनी पसंद की जगहों पर सालों से अटैच हैं। बता दें कि प्रदेश के करीब छह हजार शिक्षक विभिन्न विभागों में अटैच हैं। साथ ही करीब 15 हजार शिक्षक विशेष पुनरीक्षण कार्य (एसआइआर) में लगे हैं।  ई-सेवा पुस्तिका अपडेट करने की समय-सीमा 31 जनवरी तय शासन द्वारा जारी आदेश के बाद डीईओ ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि 31 जनवरी तक शिक्षकों की ई-सेवा पुस्तिका अपडेट होगी। इस कारण सभी शिक्षकों का अटैचमेंट खत्म किया जा रहा है। सभी शिक्षक अपनी उपस्थिति अपने मूल पदांकित स्कूल में देंगे। वे 31 जनवरी तक अपनी ई-सेवा पुस्तिका में अपडेट कराएंगे। तभी फरवरी का वेतन मूल पदांकित स्कूल में उपस्थिति देने के बाद दिया जाएगा। हालांकि संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में ही कई शिक्षक अटैच हैं। भोपाल, डीईओ, एनके अहिरवार  ने बताया एसआइआर कार्य में लगे शिक्षकों की सूची बुलाकर उन्हें परीक्षा में ड्यूटी करने कार्यमुक्त किया जाएगा। अटैच शिक्षक अपने मूल स्कूल में उपस्थिति देंगे। तभी उनका फरवरी में वेतन जारी होगा।

अब आंखों की बीमारी पकड़ेगा एआई कैमरा, जेपी अस्पताल में शुरू हुई डायबिटिक रेटिनोपैथी की निशुल्क जांच

भोपाल राजधानी के जयप्रकाश (जेपी) जिला चिकित्सालय में शुगर (डायबिटीज) के मरीजों की ''डायबिटिक रेटिनोपैथी'' (शुगर के कारण आंखों के पर्दे का खराब होना) की जांच निश्शुल्क की जाएगी। इसके लिए अस्पताल में अत्याधुनिक एआई फंडस कैमरा लगाया गया है। खास बात यह है कि यदि जांच में कोई गंभीर समस्या पाई जाती है, तो मरीज को तत्काल बेहतर उपचार के लिए हमीदिया अस्पताल रेफर किया जाएगा। नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार, निजी क्षेत्र में फंडस स्क्रीनिंग और रेटिनोपैथी की जांच पर दो से ढाई हजार रुपए तक का खर्चा आता है। जेपी अस्पताल में ''अमृता दृष्टि नेत्र स्वास्थ्य कार्यक्रम'' के सहयोग से शुरू हुए इस केंद्र पर यह पूरी तरह निश्शुल्क होगी। केंद्र के शुभारंभ अवसर पर एनएचएम के वरिष्ठ संयुक्त संचालक डा. प्रभाकर तिवारी, सीएमएचओ मनीष शर्मा और सिविल सर्जन संजय जैन विशेष रूप से मौजूद रहे। असंचारी रोग क्लीनिक से किया लिंक इस नई जांच सुविधा को अस्पताल में पहले से संचालित ''असंचारी रोग क्लीनिक'' से जोड़ा गया है। 40 साल से अधिक उम्र के ऐसे लोग जिन्हें डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है, उनकी शुगर जांच के बाद विशेषज्ञों की सलाह पर आंखों का परीक्षण किया जाएगा। डाॅक्टरों का कहना है कि शुगर के कारण आंखों के पर्दे पर खून के छींटे आ जाते हैं, जिससे दृष्टि स्थायी रूप से जा सकती है। विजन जाने के बाद वापसी मुश्किल सीएमएचओ डा. मनीष शर्मा ने बताया कि डायबिटिक रेटिनोपैथी में शुरुआत में कोई दर्द या स्पष्ट लक्षण नहीं होते। एक बार नजर चली जाए तो उसे वापस लाना मुश्किल होता है। इसलिए समय पर जांच ही एकमात्र बचाव है। इसका उपचार दवा या लेजर तकनीक से संभव है। इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज     अक्षर कटे हुए या तिरछे दिखाई देना।     बारीक अक्षर पढ़ने में परेशानी होना।     अचानक रोशनी की कमी महसूस होना या धुंधला दिखना।     आंखों के सामने काले धब्बे या काली रेखाएं तैरती नजर आना।

वैलेंटाइन डे पर थाईलैंड में छुट्टियां, कम बजट में मिलेगा सब कुछ इस पैकेज के साथ

मुंबई  IRCTC ने इस साल के वैलेंटाइन डे को यादगार बनाने के लिए "वैलेंटाइन स्पेशल फुकेत-क्राबी" (Phuket Krabi Tour Budget) नामक एक शानदार इंटरनेशनल टूर पैकेज (IRCTC Valentine Special Tour 2026) लॉन्च किया है। यह टूर 12 से 19 फरवरी 2026 के बीच संचालित किया जाएगा। छह दिनों के इस सफर में यात्रियों को थाईलैंड की प्राकृतिक सुंदरता और वहां के प्रसिद्ध द्वीपों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। पैकेज में शामिल मुख्य आकर्षण और सुविधाएं यात्रियों की सुविधा के लिए IRCTC ने एयर एशिया की उड़ानों का प्रबंध किया है। इसके अलावा सफर को आरामदायक बनाने के लिए कई विशेष सुविधाएं दी गई हैं…     होटल और भोजन: यात्रियों के लिए चार सितारा (4-Star) होटलों में ठहरने और स्वादिष्ट भारतीय भोजन की व्यवस्था रहेगी।     प्रमुख पर्यटन स्थल: पर्यटक विश्व प्रसिद्ध फि-फि आइलैंड, टाइगर केव टेम्पल, रेलै बीच और वहां के प्रसिद्ध रात्रि बाजारों (Night Markets) का आनंद ले सकेंगे। साथ ही क्राबी के चार प्रमुख आइलैंड्स की सैर भी कराई जाएगी। यात्रा का खर्च  बुकिंग के प्रकार के आधार पर पैकेज की कीमतें अलग-अलग निर्धारित की गई हैं…     अकेले यात्रा (Single Occupancy): ₹1,02,500 प्रति व्यक्ति।     दो या तीन व्यक्ति (Double/Triple Occupancy): ₹82,800 प्रति व्यक्ति।     बच्चों के लिए: अभिभावकों की आवश्यकतानुसार ₹62,500 से ₹76,200 के बीच भुगतान करना होगा। बुकिंग के लिए IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है या विभाग के क्षेत्रीय कार्यालयों से संपर्क किया जा सकता है।

भारत में फेमस हैं HPV वैक्सीन से जुड़े 3 मिथक

हर साल जनवरी का महीना 'गर्भाशय ग्रीवा कैंसर जागरूकता माह'2026 (Cervical Cancer Awareness Month 2026) के रूप में मनाया जाता है। भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले कैंसर से जुड़ी मौतों में सबसे आगे है। यह कैंसर महिलाओं में होने वाले दूसरे सबसे आम कैंसर में से एक है, हालांकि राहत की बात यह है कि सही समय पर टीकाकरण और जांच के जरिए इस कैंसर को पूरी तरह रोका जा सकता है। इस कैंसर का सबसे बड़ा कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) है। चिंता की बात यह है कि इस कैंसर की HPV वैक्सीन को लेकर लोगों में कई गलतफहमियां और मिथक फैले हुए हैं। जो इसके उपचार में कई बार देरी का कारण भी बनते हैं। ऐसे में सर्वाइकल कैंसर और इसकी HPV वैक्सीन से जुड़े 3 बड़े मिथकों की सच्चाई जानने के लिए हमने सीके बिरला अस्पताल की प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. तृप्ति रहेजा के साथ बातचीत की। मिथक 1: वैक्सीन सिर्फ सेक्सुअली एक्टिव महिलाओं के लिए है सच्चाई- इस मिथक में सच्चाई बिल्कुल नहीं है। दरअसल, HPV वैक्सीन हर उस महिला पर अच्छे से काम करती हैं, जिसे वायरस से पहले लगाया गया हो। इस वैक्सीन को लगाने की सही उम्र 9 से 14 साल है। इस उम्र में इम्यून रिस्पॉन्स सबसे मजबूत होता है और वैक्सीन की भी सिर्फ 2 ही डोज लगती हैं। लेकिन यह वैक्सीन 26 साल तक और कुछ केस में उससे भी अधिक उम्र की महिलाओं को लाभ दे सकती है, यह उनकी व्यक्तिगत रिस्क फैक्टर्स पर निर्भर करता है। मिथक 2: वैक्सीन लेने से बच्चे जल्दी सेक्स करने लगेंगे सच्चाई- इस मिथक का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। यह वैक्सीन प्रिवेंटिव हेल्थ माप है, जैसे बचपन या किशोरावस्था में करवाए गए अन्य टीकाकरण। जिसका मकसद बीमारी को होने से पहले रोकना है, न कि किसी व्यवहार को प्रभावित करना। मिथक 3: शादी या बच्चे होने के बाद वैक्सीन लेने का कोई फायदा नहीं सच्चाई- वैक्सीन मौजूदा HPV इंफेक्शन को ठीक नहीं करती, लेकिन यह उन स्ट्रेस से अभी भी सुरक्षा देती है जिनसे महिला अभी तक संक्रमित नहीं हुई है। सुरक्षा को लेकर चिंता डॉ. तृप्ति कहती हैं कि अक्सर पैरेंट्स वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। दुनिया भर में लाखों डोज लगाए जा चुके हैं, और HPV वैक्सीन को सुरक्षित, प्रभावी और अच्छे से सहन करने योग्य माना गया है। भारत में जहां सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग दर अभी भी कम है, वहां HPV वैक्सीन भविष्य में कैंसर के बोझ को कम करने का सबसे बड़ा मौका देती है। यह वैक्सीन स्क्रीनिंग का विकल्प नहीं है, बल्कि इसे पूरक उपाय के रूप में देखा जाना चाहिए। आखिर में, HPV वैक्सीन डर से नहीं, दूरदर्शिता से जुड़ा कदम है। यह एक लंबे समय में स्वास्थ्य में निवेश है, जो कैंसर को शुरू होने से पहले रोक सकता है। कौन ले सकता है HPV वैक्सीन? -9–14 साल की उम्र के बच्चे -15–26 साल की किशोर और युवा महिलाएं -जिन महिलाओं में पहले HPV संक्रमण नहीं हुआ सही जानकारी और समय पर वैक्सीनेशन से हम सर्वाइकल कैंसर के खतरे को भारत में कम करके महिलाओं को स्वस्थ जीवन जीने की दिशा में बड़ा कदम उठाने के लिए जागरूक कर सकते हैं।