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नौटंकी जारी है… स्क्वॉड घोषित, अब T20 वर्ल्ड कप की टिकट बुक कर चर्चा में पाकिस्तान

इस्लामाबाद पाकिस्तान ने आगामी टी20 विश्व कप के लिए कुछ दिन पहले ही टीम का ऐलान किया है। सलमान आगा अली के नेतृत्व में पाकिस्तान की टीम आगामी टूर्नामेंट के लिए तैयारी भी कर रही है। इस बीच पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने कोलंबो के लिए फ्लाइट की टिकट भी बुक करवा ली है लेकिन टूर्नामेंट में उनकी भागीदारी पर अंतिम फैसला अभी भी लंबित है, क्योंकि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन नकवी सरकार की मंजूरी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। मोहसिन नकवी ने प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के साथ बैठक के बाद कहा था कि सभी विकल्प खुले हैं और फैसला शुक्रवार या अगले सोमवार तक लिया जाएगा।   बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देकर भारत में टी20 विश्व कप के मैच खेलने से इनकार कर दिया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने बांग्लादेश के स्थान पर स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल कर दिया था जिसका पाकिस्तान विरोध कर रहा है। लगातार विरोध के बावजूद पाकिस्तान की टीम टी20 विश्व कप के लिए स्क्वॉड का ऐलान करने के बाद अब श्रीलंका जाने के लिए टिकट भी बुक करवा चुकी है। टी20 विश्व कप 7 फरवरी से 8 मार्च तक भारत और श्रीलंका में संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। पाकिस्तान के सभी मैच श्रीलंका के मैदानों पर निर्धारित हैं, जिसमें भारत के खिलाफ हाई-वोल्टेज मुकाबला 15 फरवरी को कोलंबो में होना है। पाकिस्तान की टीम गुरुवार से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 सीरीज खेल रही है, जिसके बाद पाकिस्तान अगर अनुमति मिलती है तो श्रीलंका के लिए रवाना होगी। इस सीरीज को पाकिस्तान के टी20 विश्व कप की तैयारी के अंतिम चरण के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन यह देखना बाकी है कि क्या राष्ट्रीय टीम को भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में सात फरवरी से शुरू होने वाले टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए सरकार की मंजूरी मिलेगी या नहीं। अगले महीने होने वाले टी20 विश्व कप में पाकिस्तान की भागीदारी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।  

हरियाणा बजट के लिए मिस्ड काल या लिंक के जरिए 31 तक दें सुझाव

गुरुग्राम. हरियाणा सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के बजट निर्माण की प्रक्रिया में आमजन की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। सरकार का मत है कि बजट जनहित, विकास प्राथमिकताओं और नागरिकों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार हो। इसी उद्देश्य से राज्य के प्रत्येक नागरिक को अपने सुझाव साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया है। उपायुक्त अजय कुमार ने बताया कि लोगों की सुविधा के लिए सुझाव देने के कई माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं। नागरिक 7303350030 नंबर पर मिस्ड काल देकर 31 जनवरी तक अपनी राय दर्ज करा सकते हैं। इसके अतिरिक्त एआइ-सहायक के माध्यम से thevoxai.in/haryanabudget लिंक पर संवाद करने की सुविधा भी उपलब्ध है। विस्तृत सुझाव देने के लिए नागरिक bamsharyana.nic.in/suggestion.aspx लिंक पर जाकर आनलाइन फार्म भर सकते हैं। पोर्टल पर हरियाणवी, हिंदी और अंग्रेज़ी तीनों भाषाओं में सुझाव देने की सुविधा उपलब्ध है, जिससे समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित हो सके। लोग समय रहते अपने सुझाव साझा करें, ताकि बजट निर्माण की प्रक्रिया अधिक समावेशी और प्रभावी बन सके। प्राप्त सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार कर उन्हें बजट निर्माण में सम्मिलित किया जाएगा, जिससे हरियाणा के समग्र विकास को नई दिशा मिल सके।

राजस्थान विधानसभा के ऑनर किलिंग सहित 10 विधेयक राज्यपाल ने लौटाए

जयपुर. राज्यपाल ने 10 विधयेकों के कानूनी पहलुओं पर सवाल उठाते हुए उन्हें अलग-अलग कारणों से पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटा दिया है, जिनमें से नौ अशोक गहलोत सरकार के समय विधानसभा से पारित हुए और एक वसुंधरा राजे सरकार के पहले कार्यकाल में 2008 में पारित किया गया था। इसका खुलासा बुधवार को किया गया। विधानसभा में पेश जानकारी के अनुसार, ऑनर किलिंग संबंधी 2019 का विधेयक लौटाते हुए राज्यपाल की ओर से कहा है कि इसमें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 व दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), 1973 का संदर्भ है, जो अब अस्तित्व में नहीं है और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103 में ऑनर किलिंग के अपराध से निपटने के लिए पर्याप्त प्रावधान हैं। इन विधेयक को मिली मंजूरी विधानसभा के प्रमुख सचिव भारत भूषण शर्मा ने बुधवार को सदन में यह भी बताया कि पिछले विधानसभा सत्र में पारित राजस्थान भू-जल (संरक्षण और प्रबंध) प्राधिकरण विधेयक-2024, राजस्थान भू-राजस्व (संशोधन और विधिमान्यकरण) विधेयक-2025, राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण और विनियमन) विधेयक-2025, राजस्थान विनियोग विधेयक-2025, राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2025, राजस्थान माल और सेवा कर (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2025, राजस्थान मत्स्य क्षेत्र (संशोधन) विधेयक, 2025, राजस्थान आयुर्विज्ञान संस्थान, जयपुर विधेयक, 2025 और राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक, 2025 को राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है। सदन को दी दो अध्यादेशों की जानकारी खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने जहां सरकार की ओर से पिछले दिनों लाए गए राजस्थान दुकान और वाणिज्यिक अधिष्ठान (संशोधन) अध्यादेश, 2025 की जानकारी देने के लिए सदन में इसकी प्रति रखी। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने राजस्थान जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अध्यादेश, 2025 को सदन में रखा। उल्लेखनीय है कि इन दोनों अध्यादेशों के स्थान पर इसी सत्र में विधेयक लाए जाएंगे, अन्यथा ये अध्यादेश अस्तित्व खो देंगे। राज्यपाल पहले भी लौटाते रहे हैं विधेयक राज्यपाल पहले भी विधानसभा से पारित विधेयक लौटाते रहे हैं। विधेयकों को राज्यपाल उन परिस्थितियों में लौटा देता है, जब राज्य के विधेयक के प्रावधान केंद्रीय कानूनों के प्रावधानों के विपरीत हों। कानूनों को लेकर स्पष्ट प्रावधान है कि राज्य केवल राज्य सूची के विषयों पर ही कानून ला सकते हैं। समवर्ती सूची में केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, लेकिन केंद्रीय कानून ही प्राथमिकता के साथ मान्य होगा। राज्य का कोई कानून केंद्रीय प्रावधानों को नहीं पलट सकता। वसुंधरा राजे सरकार के समय पारित धर्म स्वातंत्रय विधेयक को तत्कालीन राज्यपाल प्रतिभा पाटिल ने लौटा दिया था। बाद में यह विधेयक नए सिरे से लाया गया, जिसे तत्कालीन राज्यपाल ने राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेज दिया गया और वहां वर्षों तक अटका रहा। गहलोत राज 9 विधेयक, जो लौटे हैं 0- राजस्थान लिंचिंग से संरक्षण विधेयक, 2019 : 5 अगस्त 2019 को पारित 0- राजस्थान सम्मान और परम्परा के नाम पर वैवाहिक संबंधों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक,2019 : 5 अगस्त 2019 को पारित 0- कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) (राजस्थान संशोधन) विधेयक, 2020 : 2 नवंबर 2020 को पारित 0- कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार (राजस्थान संशोधन) विधेयक, 2020 : 2 नवंबर 2020 को पारित 0- आवश्यक वस्तु (विशेष उपबंध और राजस्थान संशोधन) विधेयक, 2020 : 2 नवंबर 2020 को पारित 0- व्यास विद्या पीठ विश्वविद्यालय, जोधपुर विधेयक, 2022 : 4 मार्च 2022 को पारित 0- सौरभ विश्वविद्यालय, हिण्डौन सिटी (करौली) विधेयक, 2022 : 22 मार्च 2022 को पारित 0- राजस्थान विद्युत (शुल्क) विधेयक, 2023 : 2 अगस्त 2023 को पारित 0- नाथद्वारा मंदिर (संशोधन) विधेयक, 2023 : 2 अगस्त 2023 को पारित

गिरना अब आसान नहीं! 40 T20I में केवल 4 बार सिमटी टीम इंडिया, बल्लेबाजों की ऐतिहासिक निरंतरता

नई दिल्ली T20I इंटरनेशनल क्रिकेट में भारतीय दबदबा कितना है, इसकी अगर एक झलक आपको देखनी है तो आप इंडिया वर्सेस न्यूजीलैंड तीसरे टी20 मैच का स्कोरकार्ड उठाकर देख लीजिए। अगर आंकड़ों पर जाएं तो आपको हैरानी होगी कि T20 World Cup 2024 के बाद से भारतीय टीम ने 29 जनवरी 2026 तक 40 टी20 इंटरनेशनल मैच खेल लिए हैं, लेकिन सिर्फ 4 बार ही भारतीय टीम को कोई सामने वाली टीम ऑलआउट कर पाई है। तीन बार सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में और एक बार शुभमन गिल की कप्तानी में ऐसा हुआ है।   टी20 वर्ल्ड कप 2024 तक भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा थे। रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने उस विश्व कप को जीता था, लेकिन वह इस फॉर्मेट में रोहित शर्मा का आखिरी मैच था। इसके बाद नया पर्मानेंट कैप्टन हमें सूर्यकुमार यादव के रूप में देखने को मिला। हालांकि, जिम्बाब्वे के दौरे पर कप्तान के तौर पर शुभमन गिल गए थे, जहां उनको एक मैच में हार मिली थी और पूरी टीम उस मैच में ऑलआउट हो गई थी। भारतीय टीम उस मैच में 102 रनों पर ढेर हो गई थी। इसके बाद 2025 में दो बार भारतीय टीम टी20 इंटरनेशनल मैच में ऑलआउट हुई, जहां ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें एमसीजी में 125 रन पर समेट दिया था और मुल्लानपुर में 162 रन पर साउथ अफ्रीका ने भारतीय टीम के सभी बल्लेबाजों को पवेलियन भेज दिया था। अब 2026 में टीम इंडिया ने एक मैच में सभी विकेट खोए। इस बार न्यूजीलैंड भारत के सामने थी। वाइजैग में 165 रन पर भारतीय टीम ने सभी विकेट खोए। भारत ने पिछले 40 टी20 इंटरनेशनल मैचों में 30 मुकाबले जीते हैं। 2 टाई रहे हैं और 2 बेनतीजा रहे हैं। सिर्फ 6 मैच टीम इंडिया इस अवधि में हारी है। जीत प्रतिशत भारत का बाकी टीमों के मुकाबले बेहतरीन है, जिसने 30 या इससे ज्यादा मैच खेले हैं।  

क्या आप भी सुबह सबसे पहले ये 5 चीजें देखते हैं? हो सकता है इसी वजह से बिगड़ता हो आपका दिन

हम अक्सर कहते हैं कि "आज का दिन ही खराब है", लेकिन कभी इसके पीछे की वजह पर गौर नहीं करते। वास्तु शास्त्र के अनुसार, जब हम सोकर उठते हैं, तो हमारा शरीर और मन अत्यधिक संवेदनशील होता है। उस वक्त हम जो देखते हैं, उसका सीधा असर हमारी मानसिक ऊर्जा और भाग्य पर पड़ता है। प्राचीन वास्तु शास्त्र और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कुछ चीजें नकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती हैं। अगर दिन की शुरुआत ही इन चीजों को देखकर हो, तो न केवल मानसिक तनाव बढ़ता है, बल्कि आर्थिक हानि के योग भी बनने लगते हैं। भूलकर भी न देखें ये 5 चीजें बंद घड़ी (रुका हुआ समय): वास्तु विशेषज्ञों के मुताबिक, सुबह उठते ही बंद घड़ी देखना बहुत अशुभ है। यह आपके जीवन में ठहराव और कार्यों में बाधा आने का संकेत है। यह दर्शाता है कि आपका अच्छा समय रुक गया है। शीशे में चेहरा देखना: बहुत से लोगों की आदत होती है जागते ही शीशा देखने की। वास्तु के अनुसार, रात भर की नकारात्मक ऊर्जा सुबह चेहरे पर होती है। शीशा देखने से वह ऊर्जा वापस आप में समा जाती है, जिससे दिनभर चिड़चिड़ापन रह सकता है। जूठे बर्तन: अगर आप सुबह उठकर किचन में सबसे पहले रात के जूठे बर्तन देखते हैं, तो यह सीधे तौर पर आर्थिक तंगी को न्योता देना है। इससे घर में दरिद्रता का वास होता है। अपनी या दूसरों की परछाई: सुबह-सुबह परछाई देखना (चाहे वह अपनी हो या किसी और की) राहु का प्रभाव बढ़ाता है। इससे मन में डर, भ्रम और कार्यों में उलझन पैदा होती है। जंगली जानवरों की तस्वीर: बेडरूम में कभी भी हिंसक जानवरों की फोटो न लगाएं। सुबह इन्हें देखने से स्वभाव में क्रोध बढ़ता है और परिवार में क्लेश होने की संभावना रहती है। धार्मिक ग्रंथों और वास्तु के जानकारों के अनुसार, इन नकारात्मक चीजों से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि सुबह उठते ही अपनी हथेलियों के दर्शन करें या किसी देवी-देवता की शांत तस्वीर देखें। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।  

किन्नर समाज का बड़ा ऐलान: न्याय की मांग पूरी न हुई तो राजस्थान की सड़कें जाम

जयपुर  राजस्थान की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा हमेशा से आपसी भाईचारे, समरसता और विविधता के सम्मान की रही है। इसी परंपरा की रक्षा के लिए बुधवार को राजधानी जयपुर में सर्व किन्नर समाज ने एकजुट होकर आवाज़ बुलंद की। विवादित और भड़काऊ बयानबाज़ी के खिलाफ सर्व किन्नर समाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न केवल कड़ा विरोध दर्ज कराया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि नफरत और उकसावे की राजनीति का किन्नर समाज से कोई लेना-देना नहीं है। जयपुर में आयोजित इस प्रेस वार्ता में समाज के प्रतिनिधियों ने हाल ही में शिव शंकर सैनी उर्फ़ तनिषा द्वारा दिए गए विवादित बयानों को राजस्थान की गंगा-जमुनी तहज़ीब के खिलाफ बताया। समाज ने कहा कि ऐसे बयान न सिर्फ किन्नर समाज की छवि को धूमिल कर रहे हैं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने का भी प्रयास हैं, जो प्रदेश की शांति व्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सर्व किन्नर समाज ने स्पष्ट आरोप लगाया कि शिव शंकर सैनी उर्फ़ तनिषा कुछ असामाजिक तत्वों के साथ मिलकर मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार आपत्तिजनक और उकसाऊ बयान दे रहा है। “किन्नर जिहाद” जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर समाज ने तीखी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि पूरे किन्नर समाज को कटघरे में खड़ा करने की साजिश भी है। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि राजस्थान में किन्नर समाज सदियों से सभी धर्मों, जातियों और समुदायों के साथ सौहार्द के साथ रहता आया है। चाहे त्योहार हों, सामाजिक कार्यक्रम हों या आम जनजीवन—किन्नर समाज ने हमेशा प्रेम और आशीर्वाद की परंपरा को आगे बढ़ाया है। ऐसे में किसी एक व्यक्ति के बयान को पूरे समाज से जोड़ना पूरी तरह अनुचित और दुर्भावनापूर्ण है। प्रेस वार्ता में यह भी जानकारी दी गई कि शिव शंकर सैनी उर्फ़ तनिषा ने मार्च 2023 में लिंग परिवर्तन कराया था। इस संबंध में समाज की ओर से दस्तावेज़, प्रमाण पत्र, एफिडेविट और वीडियो साक्ष्य प्रेस के सामने प्रस्तुत किए गए। समाज ने सवाल उठाया कि यदि तनिषा स्वयं को “सनातनी किन्नर” बताता है, तो इसके ठोस और वैध प्रमाण सार्वजनिक किए जाएं, ताकि सच्चाई सामने आ सके। सर्व किन्नर समाज ने यह भी बताया कि “किन्नर जिहाद” प्रकरण को लेकर तनिषा के खिलाफ अब तक प्रदेश के अलग-अलग पांच पुलिस थानों में मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होना चिंता का विषय है। समाज का कहना है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई, तो ऐसे बयान प्रदेश में सामाजिक तनाव को बढ़ावा दे सकते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित समाज के प्रतिनिधियों ने राजस्थान सरकार और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किन्नर समाज किसी भी तरह की सांप्रदायिक राजनीति या उकसावे का हिस्सा नहीं बनेगा और प्रदेश में शांति, सौहार्द और भाईचारे की परंपरा को बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। इस प्रेस वार्ता में सर्व किन्नर समाज से नूरी बाई बगरू, गोरीरेखा चांदपोल, काजोल बाई (किन्नर अखाड़ा, कोटा), सिमरन बाई शाहपुरा, राजकुमारी बाई मेड़ता सिटी, प्रीति बाई सांगानेर, अन्नू बाई चोमू, हिना बाई टोंक, सलोनी बाई अजमेर, हिना बाई करौली, पूनम नायक रतलाम, हलीमा झालावाड़ पाटन, मौसम बाई, विजया बाई, चकोरी बाई जयपुर, मंजू बाई सुमेरपुर, फयाज नायक तोड़ी मोड़, नूर शेखावत और रितिका सिंह सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे। प्रेस वार्ता के माध्यम से सर्व किन्नर समाज ने राजस्थान की जनता को यह संदेश दिया कि प्रदेश की असली ताकत उसकी सामाजिक एकता और भाईचारा है, और इसे तोड़ने की किसी भी कोशिश का डटकर विरोध किया जाएगा।

धनबाद में मेयर और 55 वार्ड पार्षद पदों की नामांकन प्रक्रिया शुरू

धनबाद. नगर निकाय चुनाव के धनबाद नगर निगम के मेयर और 55 वार्ड पार्षद के लिए नामांकन गुरुवार की सुबह 10 बजे से आरंभ हो गया। इसको लेकर उपायुक्त कार्यालय में पूरी तैयारी कर ली गई है। सुबह 9:30 बजे से ही सदर अनुमंडल पदाधिकारी धनबाद लोकेश बारंगे उपायुक्त कार्यालय में तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे। मेमको मोड़ से लेकर निर्वाची पदाधिकारी के कार्यालय तक का उन्होंने निरीक्षण किया। दो जगहों पर रोके जाएंगे समर्थक नामांकन को लेकर सुरक्षा पर भी विशेष रूप से ध्यान दिया गया है। उपायुक्त कार्यालय के अंदर अत्यधिक भीड़ न हो और चुनाव के अलावा अन्य कामों में बाधा न पहुंचे इसका विशेष ख्याल रखा गया है। इसके लिए सबसे पहले मेमको मोड़ और निरंकारी चौक पर बैरियर लगाया गया है। यहां से प्रत्याशियों के केवल तीन वाहनों को ही आगे जाने की अनुमति है। इसके अलावा दूसरा बैरियर उपायुक्त कार्यालय के मुख्य गेट पर है। प्रत्याशियों को अपना वाहन यहीं छोड़ना होगा। इसके बाद वे अपने प्रस्तावक और अधिवक्ता के साथ ही अंदर जा पाएंगे। इन जगहों पर पुलिस की तैनाती की गई है। पूर्व मेयर करेंगे नामांकन  धनबाद नगर निगम के पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल गुरुवार को अपना नामांकन करेंगे। नामांकन से पूर्व वे झरिया के श्री श्याम मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद समर्थकों के साथ उपायुक्त कार्यालय धनबाद के लिए रवाना होंगे। इस बीच वे धनबाद के शक्ति मंदिर में पूजा करेंगे।

खड़े ट्रेलर में स्लीपर बस घुसने से 4 लोगों की दर्दनाक मौत

भरतपुर. राजस्थान के भरतपुर जिले में आगरा-जयपुर नेशनल हाईवे पर गुरुवार अलसुबह एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हो गया। सेवर थाना क्षेत्र में लुधावई पुलिया के पास कासगंज से जयपुर जा रही एक स्लीपर बस बीच हाईवे पर खड़े ट्रेलर में पीछे से जा घुसी। हादसा इतना भीषण था कि बस के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए। इस दर्दनाक दुर्घटना में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। ट्रेलर खराब था जो बीच हाईवे पर खड़ा था। ट्रेलर चालक ने कोई खराब का संकेत नहीं लगा रखा था। बस चालक को लगा ट्रेलर चल रहा है, इसी के चलते हादसा हुआ। मौके पर भरतपुर जिला कलेक्टर कमर चौधरी एसपी दिगंत आनन्द मौके पर पहुंचे। घायलों को भिजवाया अस्पताल सेवर थाना प्रभारी सतीश शर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। सभी घायलों को तत्काल जिला आरबीएम अस्पताल भिजवाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। वहीं, चारों मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए आरबीएम अस्पताल की मोर्चरी में रखवाए गए हैं। मृतकों के परिजनों को सूचित कर दिया गया है, उनके पहुंचने के बाद पोस्टमार्टम की कार्रवाई कराई जाएगी। मृतकों की हुई पहचान मृतकों की पहचान कान्हा (8 वर्ष) पुत्र रामवीर निवासी सतोवा मथुरा (उत्तर प्रदेश), गीता (38 वर्ष) पत्नी रामवीर निवासी सतोवा मथुरा (उत्तर प्रदेश), मुक्खन सिंह (28 वर्ष) पुत्र खेम सिंह निवासी कठूमर अलवर (राजस्थान) और मुस्लिम (40 वर्ष) पुत्र इस्माइल, निवासी कासगंज (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। रामवीर की पत्नी और बेटे की मौत इस हादसे की सबसे मार्मिक कहानी मथुरा के सतोवा निवासी रामवीर की है. रामवीर अपनी पत्नी गीता और 8 वर्षीय बेटे कान्हा के साथ खाटूश्याम जी के दर्शन के लिए जा रहे थे। रामवीर भगवान की मूर्तियों के लिए कागज की पगड़ियां बनाते हैं और हर महीने माल सप्लाई करने खाटूश्याम जी जाते थे। इस बार वो पत्नी और बेटे को भी साथ लेकर गए थे। हादसे में रामवीर की पत्नी और बेटे की मौत हो गई, जबकि रामवीर खुद गंभीर रूप से घायल हो गए। घने कोहरे के चलते हुए हादसा हादसा गुरुवार तड़के करीब 3 बजे हुआ। घना कोहरा हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है। टक्कर के बाद बस में फंसे यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को बस से बाहर निकाला गया और अस्पताल में भर्ती करवाया गया। फिलहाल, उनका इलाज चल रहा है।

राहु का प्रभाव और गोमेद रत्न: मन की उलझनों से मुक्ति किसे मिल सकती है?

हेसोनाइट, जिसे हिंदी में गोमेद कहा जाता है, राहु से जुड़ा रत्न है. राहु कोई दिखाई देने वाला ग्रह नहीं, बल्कि छाया ग्रह माने जाते हैं. राहु भ्रम, महत्वाकांक्षा, विदेशी प्रभाव, अचानक घटनाएं, जुनून और अलग रास्तों का संकेत देते हैं. गोमेद राहु की बिखरी और भ्रमित ऊर्जा को संभालने और उसे सही दिशा में लगाने के लिए पहना जाता है, खासकर राजनीति, विदेश, अचानक सफलता और भौतिक क्षेत्रों में. राहु अचानक उतार-चढ़ाव, विदेश यात्रा, राजनीति, जन-प्रभाव, तकनीक, नशा, डर, भ्रम और मानसिक पैटर्न से जुड़े माने जाते हैं. पीड़ित राहु चिंता, भ्रम, नशे, कानूनी झंझट, अचानक नुकसान और बदनामी दे सकते हैं. संतुलित राहु तेज दिमाग, नाम और अलग तरह की सफलता देते हैं. गोमेद गार्नेट परिवार का रत्न है. इसका रंग शहद जैसा भूरा से लेकर लाल-नारंगी (दालचीनी जैसा) होता है. इसमें हल्की तैलीय या धुंधली चमक होती है, जो इसे दूसरे रत्नों से अलग बनाती है. अच्छा गोमेद साफ, एकसार रंग वाला और बिना दरार या काले धब्बों के होना चाहिए. श्रीलंका (सीलोन) का गोमेद सबसे अच्छा माना जाता है. गोमेद से जुड़े ज्योतिषीय, सांस्कृतिक और व्यावहारिक पहलू वैदिक ज्योतिष में गोमेद को राहु ग्रह का रत्न माना जाता है. राहु बाकी ग्रहों की तरह सीधा असर नहीं करता, बल्कि यह मन, डर, लालच, भ्रम, अचानक घटनाओं और कर्म से जुड़े मामलों को प्रभावित करता है. गोमेद का काम भ्रम को बढ़ाना नहीं, बल्कि वहां नियंत्रण और स्पष्टता लाना है, जहां राहु की वजह से उलझन, बेचैनी या अजीब व्यवहार पैदा हो जाता है. कर्म और दशा के अनुसार, गोमेद ज्यादातर राहु की महादशा या अंतरदशा में पहनने की सलाह दी जाती है. खासकर तब, जब बिना वजह रुकावटें आ रही हों, अचानक नुकसान हो रहा हो, कोर्टकचहरी के मामले चल रहे हों, लत की समस्या हो या बार-बार डर और घबराहट सताती हो. अगर कुंडली में राहु शुभ हो लेकिन अटका हुआ हो, तो गोमेद विदेश से जुड़े मौके, अनोखी सफलता, टेक्नोलॉजी, राजनीति और जनसंचार जैसे क्षेत्रों में अचानक ब्रेकथ्रू दिला सकता है. सांस्कृतिक रूप से राहु को छाया ग्रह और ग्रहण से जोड़ा गया है. पुराने समय में गोमेद को धोखा, काला जादू और छुपे हुए दुश्मनों से बचाव के लिए ताबीज की तरह भी पहना जाता था. आध्यात्मिक रूप से गोमेद जरूरत से ज्यादा कल्पनाशक्ति, भ्रम या वहम को जमीन से जोड़ता है. यही वजह है कि यह गहरे मानसिक या तांत्रिक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है. व्यावहारिक रूप से गोमेद खरीदते समय ध्यान रखें कि उसका रंग शहद या दालचीनी जैसा हो और उसमें हल्की तेलीय चमक हो, कांच जैसी तेज चमक नहीं. आमतौर पर गोमेद 5 से 8 रत्ती तक पहनने की सलाह दी जाती है, लेकिन सही वजन उम्र, शरीर के वजन और कुंडली के अनुसार तय किया जाना चाहिए. कृत्रिम रूप से गर्म किया हुआ, बहुत फीका या बेजान गोमेद नहीं पहनना चाहिए. एक आम गलती यह होती है कि लोग अचानक पैसा या ताकत पाने के लिए बिना जांच गोमेद पहन लेते हैं. अगर कुंडली में राहु अशुभ हो, तो गोमेद पहनने से वहम, लत, डर या मानसिक अस्थिरता बढ़ सकती है इसलिए गोमेद पहनने से पहले ट्रायल पहनना और किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लेना बहुत जरूरी है. सही स्थिति में गोमेद ढाल और इंजन दोनों की तरह काम करता है—यह सुरक्षा भी देता है और महत्वाकांक्षा को नियंत्रित तरीके से सफलता की ओर ले जाता है. गोमेद रत्न पहनने के ज्योतिषीय लाभ     डर, घबराहट और मानसिक भ्रम कम करेगा     नकारात्मक ऊर्जा और भ्रम से सुरक्षा देगा     अचानक करियर और धन लाभ में मदद करेगा     राजनीति, मीडिया और जन-प्रभाव वाले क्षेत्रों में सफलता देगा     विदेश यात्रा, विदेश में बसने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सहयोग करेगा     नशे और जुनूनी आदतों को नियंत्रित करने में मदद करेगा     राहु महादशा चल रही हो या बिना कारण बार-बार समस्याएं आ रही हों, तो गोमेद सलाह दिया जाता है. गोमेद पहनने की विधि     धातु: चांदी या पंचधातु     उंगली: मध्य उंगली     हाथ: दाहिना     दिन: शनिवार शाम     समय: राहु काल     मंत्र: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः (108 बार) गोमेद पहनते समय बरतें ये सावधानियां     गोमेद हमेशा ट्रायल के बाद ही पहनें     ट्रायल अवधि: 57 दिन     डर, बुरे सपने, बीमारी या नुकसान हो तो तुरंत उतार दें     टूटा, फीका या ट्रीट किया हुआ गोमेद न पहनें     मोती, माणिक, पुखराज या नीलम के साथ बिना सलाह न पहनें गोमेद सजावटी नहीं, बल्कि सुधार करने वाला रत्न है. राहु अनुकूल हों तो यह अचानक सफलता और सुरक्षा दे सकता है. राहु प्रतिकूल हों तो भ्रम और अस्थिरता बढ़ा सकता है. इसलिए कुंडली जांच बेहद जरूरी है.

बिहार में ‘कृषि सुपर बाजार’ का किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

पटना. बिहार में अब किसान अपनी उपज के लिए बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहेंगे। राज्य सरकार ने कृषि विपणन व्यवस्था को पूरी तरह बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कृषि रोड मैप (2023-28) के तहत प्रदेश के कृषि उपज बाजार प्रांगणों को आधुनिक “कृषि सुपर बाजार” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे किसानों को सीधे बाजार से जोड़कर उनकी आय बढ़ाई जा सके। इस संबंध में कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने बताया कि राज्य में कुल 53 कृषि उपज बाजार प्रांगण कार्यरत हैं, जिनमें से 22 बाजार प्रांगणों का चरणबद्ध तरीके से आधुनिकीकरण किया जा रहा है। इन बाजारों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर किसानों को बेहतर विपणन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। इन 22 बाजारों का हो रहा आधुनिकीकरण आधुनिकीकरण की सूची में सासाराम, बेगूसराय, कटिहार, फारबिसगंज, जहानाबाद, दरभंगा, किशनगंज, छपरा, बिहटा, पूर्णिया (गुलाबबाग), मुसल्लहपुर (पटना), आरा, हाजीपुर, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, मोतिहारी, गया, बेतिया, दाउदनगर, मोहनिया और स्मार्ट सिटी योजना के तहत बिहारशरीफ कृषि बाजार समिति शामिल हैं। कृषि रोड मैप बना ‘गेम चेंजर’ कृषि मंत्री ने बताया कि दाउदनगर, वैशाली, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, मोतिहारी और मोहनिया बाजार प्रांगणों में विकास कार्य पूरा हो चुका है, जबकि अन्य बाजारों में निर्माण कार्य तेजी से जारी है। यहां आधुनिक शेड, पक्की सड़कें, पेयजल, बिजली, स्वच्छता, कार्यालय भवन और भंडारण जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। किसानों को मिलेगा डायरेक्ट प्रॉफिट उन्होंने कहा कि बाजार प्रांगणों के विकास का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य दिलाना है। भंडारण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मूल्य संवर्द्धन की सुविधाओं से किसानों की बाजार पहुंच मजबूत होगी और बिचौलियों की भूमिका स्वतः कम हो जाएगी। ई-नाम से जुड़कर खुलेगा राष्ट्रीय बाजार राज्य के 20 कृषि उपज बाजार प्रांगणों को ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) से जोड़ा जा चुका है। इससे किसान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर देशभर में अपनी फसल बेच पा रहे हैं। सरकार का मानना है कि यह पहल बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी और किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगी।