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खजुराहो में होगा कन्या विवाह महोत्सव, 300 जोड़ों का ब्याह—नेपाल की युवती भी होगी दुल्हन

खजुराहो  छतरपुर के बागेश्वर धाम में हर वर्ष की तरह इस साल भी बहुत ही शानदार कन्या विवाह महोत्सव आयोजित होने जा रहा है. इस बार का महोत्सव काफी खास होने वाला है, क्योंकि यह महोत्सव सिर्फ राष्ट्रीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय हो गया है. नेपाल की भी एक बेटी की शादी धाम में होगी.  इस मौके पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वर-वधु को लहंगा, चुनरी, शेरवानी, टोपी, वरमाला आदि सामग्री दी. खजुराहो के बागेश्वर धाम में 300 जोड़ों की शादी की तैयारियां जोरों पर हैं। समारोह 12 से 15 फरवरी तक तीन दिनों तक चलेगा। हर दिन अलग-अलग रस्में होंगी। आने वाले मेहमानों की खातिरदारी भी की जाएगी। दहेज में सभी जोड़ों को 90 लाख की FD, सोने-चांदी समेत गृहस्थी का सामान दी जयेगा।  बागेश्वर धाम में सातवीं बार आयोजन हो रहा है। इस बार 13 राज्यों से 1500 से अधिक आवेदन मिले। 60 जिलों की 600 सदस्यीय टीम ने एक महीने तक सर्वे किया। 300 जोड़ों को शादी के लिए बुलाया गया। इसमें एक जोड़ा नेपाल का भी है। 30,000 रुपये की जॉइंट एफडी बाबा बागेश्वर ने सभी ससुराल वालों को सलाह दी कि वे अपनी बहुओं को अपनी बेटियों जैसा मानें और यह पक्का करें कि किसी भी तरह की कोई शिकायत न हो. उन्होंने कुछ समधियों को बुलाया, उनके साथ मज़ाक किया और उनके चेहरों पर गुलाल लगाया. उन्होंने ऐलान किया कि इस बार दूल्हा और दुल्हन के नाम पर 30,000 रुपये की जॉइंट फिक्स्ड डिपॉज़िट खोली जाएगी. यह फिक्स्ड डिपॉज़िट पांच साल से पहले नहीं तोड़ी जा सकती. उन्होंने बताया कि शादियों के लिए चयन प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी रही. सर्वे टीम ने 500 से ज़्यादा लड़कियों में से 300  लड़कियों को चुना, जिसमें उन लड़कियों को प्राथमिकता दी गई जो बहुत गरीब, अनाथ या बेसहारा थीं. धीरेंद्र शास्त्री बोले– ये अब बालाजी की बेटियां आयोजन को लेकर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि "ये अब बालाजी की बेटियां हो गई हैं। इनका विवाह धूमधाम से किया जाएगा। देशभर के संत, महात्मा, राजपीठ, व्यास पीठ के लोगों के सानिध्य में बेटियां विवाह बंधन में बंधेंगी। उन्होंने बताया कि सर्वे टीम ने 600 से अधिक अति निर्धन, अनाथ, मातृहीन और पितृहीन बेटियों का चयन किया था। इनमें से वर्तमान संसाधनों को देखते हुए 300 बेटियों को विवाह के लिए चुना है। उन्होंने कहा कि पात्र बेटियों की संख्या अधिक थी, लेकिन बागेश्वर धाम की वर्तमान सामर्थ्य के अनुसार ही चयन किया गया है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री के ऑफिस में इन दिनों खासी हलचल है। कर्मचारी देर रात तक काम में व्यस्त हैं। सभी की टेबल पर शादी के निमंत्रण कार्ड का ढेर है। ये निमंत्रण पत्र VVIP मेहमानों को भेजे जाने हैं। बीच-बीच में इसकी जिम्मेदारी संभाल रहे कमल अवस्थी कार्ड उठाकर चेक कर ले रहे हैं। वो इसलिए कि नाम और पता सही है या नहीं। उसे वे अपने आईपैड में दर्ज लिस्ट से भी मिलान कर रहे हैं। कोशिश है कि कहीं कोई गलती न हो जाए। दूसरी तरफ भंडार में दूल्हा-दुल्हन को दिए जाने वाले उपहार के ढेर लगे हैं। सेवादार सावधानी से पैकेट बना रहे हैं। कमल अवस्थी कहते हैं कि सभी अरेंजमेंट पूरे हो गए हैं। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कुछ दिन पहले ही हर जोड़े को बुलाकर उन्हें कपड़े और बाकी सामान दे दिया है। सभी को 13 फरवरी की सुबह 8 बजे बुलाया है। लगन मंडप तैयार किए जा रहे हैं। भोजन पंडाल अलग-अलग होंगे। तैयारियां तो पूरी हैं, फिर भी बहुत काम बाकी है। उस दिन पूरे बागेश्वर धाम को सजाया जाएगा। कमल अवस्थी ने नेपाल की रहने वाली अस्मिता सुनार से फोन पर हमारी बात कराई। अस्मिता भी नेपाल के युवक ये यहां सात फेरे लेने वाली हैं। इसके अलावा, मध्यप्रदेश की दो लड़कियाें से भी बात की। नेपाल की अस्मिता बोली- चार साल में आया नंबर अस्मिता ने फोन पर बताया कि परिवार की माली हालत कभी ठीक नहीं रही। मां दिल्ली में घर-घर जाकर बर्तन साफ करती हैं। पिता यहीं मजदूरी करते हैं। भाई केरल में मजदूरी करता है। एक बार मेरी तबीयत खराब हुई। पहले यहां फिर दिल्ली में डॉक्टर्स को दिखाया। फायदा नहीं हो रहा था। डॉक्टर बोलते थे कि दिमाग खराब है, पागल हो गई हूं। लोगों से सुना, तो बागेश्वरधाम पहुंचे। अब मैं एकदम ठीक हूं। बालाजी भगवान ने मुझे ठीक कर दिया। हमने यूट्यूब पर बागेश्वर धाम में हो रही शादियों के बारे में देखा था। मां पिछले चार साल से यहां मेरी शादी के लिए आवेदन कर रही थी, लेकिन इस बार नंबर लगा है। खुशी है कि मुझे गुरुजी से मिलने का मौका मिलेगा। अब मेरी शादी मेज बहादुर से हो रही है, वो मेरे ही देश के कंचनपुर के रहने वाले हैं। उनके परिवार की हालत भी हमारे जैसे ही हैं। पढ़ाई के दौरान हमारी मुलाकात हुई थी। मैं और उनकी बहन साथ पढ़ते थे। एक बार हम माउंटेन घूमने गए। वहां बात हुई। धीरे-धीरे प्यार हो गया। फिर हम लोगों ने अपने-अपने घर बताया, तो घरवाले बोले- इतना पैसा नहीं है कि अभी शादी कर दें। इसके बाद मां चार साल तक लगातार आवेदन करती रहीं। इस बार नंबर आ गया। फोन पर मिली सूचना, शादी के लिए चुना गया विदिशा जिले की गंजबासौदा के लाल पठार इलाके में रहने वाली सपना अहिरवार के पिता नहीं हैं। मां बीमार रहती हैं और भाई छोटा है। घर में दो वक्त खाने के लिए भी जद्दोजहद करनी होती है। सपना कहती हैं- बीमार मां को हमेशा मेरी शादी की चिंता रहती थी। जब बागेश्वर धाम में होने वाली सामूहिक विवाह समारोह के बारे में पता चला, तो मन में आस सी जागी। पहले भी यहां आ चुकी हूं। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने परिवार की मदद की। उन्हें अपने पिता जैसा मानती हूं। आवेदन के बाद यहां से घर पहुंचे थे। कुछ दिन बाद फोन पर सूचना मिली कि मुझे यहां शादी के लिए चुना गया है। उन्होंने शादी का लहंगा, सैंडल और होने वाले पति को शेरवानी, पगड़ी, जूते और माला दी है। उस दिन कपड़े पहनकर यहां आना है। गरीब हूं, पर आज इसका अहसास नहीं हो रहा है। बागेश्वरधाम से शादी होना सपने की तरह बागेश्वरधाम … Read more

मलेशिया दौरे से PM मोदी भारत को दिलाएंगे सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ में बड़ा लाभ

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल से दो दिन के लिए (7-8 फरवरी 2026) मलेशिया की यात्रा पर जा रहे हैं. यह यात्रा दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ एलीमेंट्स (REE) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नए दरवाजे खोलने का काम करेगी. हाल ही में यूनियन बजट 2026 में सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और रेयर अर्थ कॉरिडोर्स की घोषणा के बाद यह यात्रा और भी खास हो गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत की सप्लाई चेन मजबूत होगी, नौकरियां बढ़ेंगी और चीन पर निर्भरता कम होगी. भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) कई बार कह चुके हैं कि कि रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग से सेल्फ-रिलायंस बढ़ेगी और चीन पर निर्भरता कम होगी. मलेशिया के साथ टेक्नोलॉजी शेयरिंग से यह आसान होगा. बता दें कि वैष्णव क्रिटिकल मिनरल्स पर काम कर रहे हैं. बेंचमार्क मिनरल इंटेलिजेंस (Benchmark Mineral Intelligence) में रेयर अर्थ एक्सपर्ट और रिसर्च मैनेजर नेहा मुखर्जी (Neha Mukherjee) ने भारत की नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन की तारीफ की है और कहा है कि मलेशिया जैसे पार्टनर्स से डाइवर्सिफिकेशन तेज होगा, जिससे चीन पर से निर्भरता घटेगी. कितना महत्वपूर्ण है मलेशिया? पीएम मोदी और मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम के बीच बातचीत के केंद्र में अन्य मुद्दों के साथ सेमीकंडक्टर पर गहरा सहयोग भी होगा. मलेशिया सेमीकंडक्टर का बड़ा हब है, जहां दुनिया की 12-15 फीसदी REE प्रोसेसिंग होती है. भारत यहां से तकनीक और निवेश ले सकता है. बजट में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के लिए 40,000 करोड़ रुपये का ऐलान हुआ है, जो इंडस्ट्री-लेड रिसर्च और ट्रेनिंग पर फोकस करेगा. इससे भारत में सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट, मटेरियल और फुल स्टैक आईपी डेवलप होगा. मलेशिया रेयर अर्थ पर भी बड़ा जोर देता है. मलेशिया में लिनास प्लांट दुनिया का बड़ा REE प्रोसेसर है. 2025 में लिनास में पहली बार भारी REE (जैसे डिस्प्रोसियम ऑक्साइड) का कमर्शियल उत्पादन शुरू किया, जो चीन के बाहर पहला ऐसा प्लांट है. भारत के आम बजट में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिल नाडु में डेडिकेटेड REE कॉरिडोर्स बनाने का प्लान है. यह माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगा. लक्ष्य है 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष REE परमानेंट मैग्नेट बनाना, जो EV, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस में इस्तेमाल होंगे. गौरतलब है कि यह भारत सरकार की एक बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसका नाम REPM है. इसे नवंबर 2025 में कैबिनेट ने मंजूरी दी थी, और कुल ₹7,280 करोड़ का बजट रखा गया है. भारत को कितना फायदा?     सप्लाई चेन मजबूत: मलेशिया से REE और सेमीकंडक्टर पार्ट्स आसानी से मिलेंगे. इससे भारत की मैन्युफैक्चरिंग स्पीड बढ़ेगी और चीन पर निर्भरता 20-30 फीसदी कम हो सकती है.     निवेश और टेक्नोलॉजी: मलेशिया के साथ JV से 3 अरब डॉलर का राजस्व और 24,800 नौकरियां पैदा होंगी. सेमीकंडक्टर मार्केट 2026 तक 64 अरब डॉलर और 2030 तक 110 अरब डॉलर पहुंचेगा.     EV और क्लीन एनर्जी: REE से EV बैटरी और मोटर सस्ते होंगे. मलेशिया 2030 तक EV प्रोडक्शन 15% बढ़ाना चाहता है, जिसमें भारत मदद कर सकता है.     ट्रेड बूस्ट: दोनों देशों का व्यापार 25 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. MICECA समझौते की समीक्षा से निर्यात बढ़ेगा.     स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप: रक्षा, डिजिटल टेक और हेल्थ में सहयोग बढ़ेगा, जो भारत को ASEAN में मजबूत बनाएगा. कुल मिलाकर, यह यात्रा भारत को आत्मनिर्भर बनाने में बड़ा रोल प्ले करेगी. 2030 तक REE से 3 अरब डॉलर राजस्व और 6.5 अरब डॉलर की आर्थिक ग्रोथ हो सकती है. भारत और मलेशिया में कितना व्यापार? 2025 में भारत-मलेशिया का कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 18-20 अरब डॉलर के आसपास रहा. भारत मलेशिया से मुख्य रूप से पाम ऑयल (करीब 2.8-3 अरब डॉलर का), इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, कंप्यूटर हार्डवेयर और अन्य वनस्पति तेल आयात करता है. वहीं भारत मलेशिया को परिष्कृत पेट्रोलियम (रिफाइंड पेट्रोलियम, करीब 2.3 अरब डॉलर), कृषि उत्पाद जैसे बफेलो मीट, और कुछ इलेक्ट्रिकल मशीनरी निर्यात करता है. कैसे हैं दोनों देशों में ऐतिहासिक संबंध? दोनों देशों के बीच मजबूत नींव है. 2010 में MICECA (मलेशिया-इंडिया कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट) ने व्यापार को आसान बनाया. 2015 में संबंधों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा मिला, और 2024 में इसे अपग्रेड करके कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप बना दिया गया. ये समझौते टैरिफ कम करने, निवेश बढ़ाने और नए क्षेत्रों में सहयोग का रास्ता खोलते हैं. भारत-मलेशिया: भविष्य के प्लान क्या हैं? दोनों देश AITIGA (ASEAN-इंडिया ट्रेड इन गुड्स एग्रीमेंट) की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि टैरिफ और मार्केट एक्सेस बेहतर हो. फोकस डिजिटल फाइनेंस, रिन्यूएबल एनर्जी, सेमीकंडक्टर और EV जैसे हाई-टेक क्षेत्रों पर है. मलेशिया में अनुमानित 16.2 मिलियन टन रेयर अर्थ एलीमेंट्स (REE) के रिजर्व हैं, जिनकी वैल्यू सैकड़ों अरब डॉलर है. ये रिजर्व भारत के साथ JV या टेक्नोलॉजी शेयरिंग के जरिए इस्तेमाल हो सकते हैं, खासकर REE प्रोसेसिंग और मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग में. व्यापार को 25 अरब डॉलर तक पहुंचाने का टारगेट है. क्या चुनौतियां हैं सामने? ट्रेड बैलेंस अभी असंतुलित है. मलेशिया का सरप्लस ज्यादा है, इसलिए भारत नए निर्यात सेक्टर (जैसे सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग) ढूंढ रहा है. पर्यावरणीय मुद्दे भी बड़े हैं, खासकर पाम ऑयल की खेती से जुड़े जंगल कटाई और सस्टेनेबिलिटी के सवाल. REE माइनिंग में भी पर्यावरण सुरक्षा जरूरी है, ताकि प्रदूषण न फैले. दोनों देश इन मुद्दों पर बात करके बैलेंस्ड और ग्रीन ट्रेड बढ़ाना चाहते हैं. भारत-मलेशिया में ग्लोबल कनेक्शन? मलेशिया ने अमेरिका के साथ REE सप्लाई चेन पर MoU साइन किया है. भारत भी इंडो-US ट्रेड डील और क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के जरिए काम कर रहा है. इससे REE और सेमीकंडक्टर की सप्लाई चेन मजबूत होगी, चीन पर निर्भरता कम होगी, और दोनों देश ग्लोबल वैल्यू चेन में बेहतर पोजिशन पा सकेंगे. कुल मिलाकर, ये रिश्ते सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी, एनर्जी और स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का मजबूत आधार बन रहे हैं. मोदी की मलेशिया यात्रा कब है? 7-8 फरवरी 2026 को. यह उनकी तीसरी यात्रा है, जिसमें व्यापार और रणनीतिक मुद्दों पर बात होगी. मलेशिया से सेमीकंडक्टर में भारत को क्या फायदा? मलेशिया से टेक्नोलॉजी और निवेश मिलेगा. इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से 40,000 करोड़ रुपये लगेंगे, जो जॉब्स और आत्मनिर्भरता बढ़ाएगा. रेयर अर्थ एलीमेंट्स क्या हैं और क्यों जरूरी? REE विशेष … Read more

IIT रुड़की का अलर्ट: हिमालय से आएगी ‘सुनामी’, 93 लाख की आबादी होगी खतरे में, हजारों गांव होंगे प्रभावित

नई दिल्ली  हिमालय की बर्फीली चोटियों के बीच एक ऐसी तबाही आकार ले रही है, जो सुनामी से कम खतरनाक नहीं है. IIT रुड़की के रिसर्चर्स ने एक चौंकाने वाली स्टडी में बताया है कि हिमालय के पहाड़ों पर बनी ग्लेशियल झीलों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है. ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ में छपी रवींद्र कुमार और सौरभ विजय की इस रिसर्च के अनुसार, हाई माउंटेन एशिया (HMA) क्षेत्र में 2016 से 2024 के बीच इन झीलों के क्षेत्रफल में 5.5 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है. वर्तमान में करीब 31,000 से ज्यादा ऐसी झीलें हैं, जो 93 लाख लोगों के लिए सीधा खतरा बन गई हैं. क्या है ‘हिमालयी सुनामी’ या GLOF?     जब पहाड़ों पर स्थित ग्लेशियर पिघलते हैं, तो उनका पानी खाली जगहों पर जमा होकर झीलें बना लेता है. इन झीलों के चारों ओर पक्के बांध नहीं होते, बल्कि ये ढीली चट्टानों, बर्फ और मलबे (Moraine) के प्राकृतिक बांधों से घिरी होती हैं.     जब ग्लोबल वार्मिंग की वजह से पानी का दबाव बढ़ता है या कोई एवलांच (बर्फ का तूफान) इन झीलों में गिरता है, तो ये बांध गुब्बारे की तरह फट जाते हैं. इसे ही ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ (GLOF) या हिमालयी सुनामी कहा जाता है.     केदारनाथ की 2013 वाली त्रासदी और 2023 में सिक्किम में आई बाढ़ इसी तरह के खतरे के बड़े उदाहरण हैं. ये झीलें इतनी ऊंचाई पर स्थित हैं कि जब इनका पानी नीचे गिरता है, तो वह जबरदस्त रफ्तार पकड़ लेता है.     इसमें सिर्फ पानी नहीं होता, बल्कि अपने साथ बोल्डर, मिट्टी और पेड़ों को बहाकर लाने वाला एक ‘चलता-फिरता पहाड़’ बन जाता है, जो रास्ते में आने वाली हर चीज को तबाह कर देता है. वैज्ञानिकों ने कैसे पहचाना इन 31,000 टाइम बमों को? हजारों फीट की ऊंचाई और बेहद कठिन रास्तों के कारण इन झीलों की निगरानी करना नामुमकिन जैसा था. लेकिन IIT रुड़की के वैज्ञानिकों ने अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का सहारा लिया. उन्होंने नासा (NASA) और यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के ‘लैंडसैट 8’ के हाई-रेजोल्यूशन डेटा का उपयोग किया. इसके साथ ही यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के ‘सेंटिनल 1 और 2’ और कोपरनिकस डिजिटल एलिवेशन मॉडल की मदद ली गई. अमेरिका के नेशनल रिकॉनेस्सेंस ऑफिस द्वारा 3 जनवरी 1976 को ली गई इस तस्वीर में माउंट एवरेस्ट बीच में दिख रहा है. (AP) इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके राडार और ऑप्टिकल सेंसर बादलों के पार भी देख सकते हैं. इसकी मदद से वैज्ञानिकों ने 20,000 से 1,00,000 वर्ग मीटर तक की छोटी झीलों की भी सटीक पहचान की है. अब इस तकनीक से ‘तीसरे ध्रुव’ (Third Pole) कहे जाने वाले इस पूरे इलाके की रूटीन मॉनिटरिंग मुमकिन हो गई है. किन इलाकों में सबसे तेजी से फैल रही हैं झीलें? स्टडी के मुताबिक, झीलों के बढ़ने की रफ्तार हर इलाके में अलग-अलग है: किलियन शान (Qilian Shan): इस क्षेत्र में झीलों के क्षेत्रफल में सबसे ज्यादा 22.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. पूर्वी हिमालय: यह इलाका सबसे ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि यहां इन झीलों की संख्या सबसे अधिक है. भारत की स्थिति: भारत में करीब 30 लाख लोग सीधे तौर पर इन अस्थिर झीलों के नीचे बसे हुए हैं. बढ़ती गर्मी और बदलते मानसून की वजह से ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं. जहां पहले बर्फ हुआ करती थी, अब वहां गहरे और अस्थिर पानी के तालाब बन गए हैं. 93 लाख लोगों पर मंडराता मौत का साया दुनिया भर में ग्लेशियर की बाढ़ से जितने लोगों को खतरा है, उनमें से 62 प्रतिशत लोग अकेले हाई माउंटेन एशिया क्षेत्र में रहते हैं. हिमालय के इस हिस्से में रहने वाले कई परिवार झीलों से महज 10 किलोमीटर के दायरे में बसे हैं. इसका मतलब है कि अगर कोई झील फटती है, तो लोगों को चेतावनी देने और सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए समय बहुत ही कम मिलेगा. ये झीलें ‘टिकिंग टाइम बम’ की तरह हैं, जिनकी दीवारें मिट्टी और बर्फ की बनी हैं. अगर ग्लोबल वार्मिंग की रफ्तार यही रही, तो आने वाले समय में केदारनाथ जैसे हादसों का खतरा और बढ़ सकता है.