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छत्तीसगढ़ की 4 सेंट्रल जेलों को मिला आईएसओ गुणवत्ता प्रमाणन

रायपुर. छत्तीसगढ़ की जेल व्यवस्थाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। उप मुख्यमंत्री एवं जेल विभाग के प्रभारी मंत्री विजय शर्मा के निर्देशन में राज्य की जेलों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे है। इन्हीं प्रयासों का ही यह परिणाम है कि छत्तीसगढ़ की सेंट्रल जेल रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर एवं अम्बिकापुर को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानक आईएसओ 9001ः2015 का प्रमाणन प्राप्त हुआ है।  उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा द्वारा जेलों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्यप्रणाली स्थापित करने के उद्देश्य से आईएसओ सर्टिफिकेशन कराने की पहल की थी। यह प्रक्रिया पूर्ण कर राज्य की चार प्रमुख केंद्रीय जेलों को प्रमाणन प्राप्त हो गया है। इस प्रमाणन से जेल प्रशासन में कार्य प्रक्रियाओं में एकरूपता एवं पारदर्शिता, बंदी कल्याण और मानवाधिकार संरक्षण को बढ़ावा, जोखिम प्रबंधन और जवाबदेही में सुधार, जनविश्वास एवं संस्थागत विश्वास में वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को मजबूती मिलेगी। यह पहल राज्य की सुधारात्मक न्याय प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार का उद्देश्य जेलों को केवल निरुद्ध स्थान के रूप में नहीं, बल्कि सुधार एवं पुनर्वास केंद्र के रूप में विकसित करना है। 

बांका में मार्केट वैल्यू रेट का रिवीजन से जमीन रजिस्ट्री होगी महंगी

बांका. नए वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल से जमीन रजिस्ट्री में नया मार्केट वैल्यू रेट (एमवीआर) लागू हो जाएगा। इसके लिए जिला मूल्यांकन समिति की ओर से बांका नगर परिषद, बौंसी नगर पंचायत, अमरपुर नगर पंचायत और कटोरिया नगर पंचायत सहित सभी राजस्व ग्रामों में इलाके वार एमवीआर रेट के रिविजन की पूरी तैयारी कर ली गई है। साथ ही इससे संबंधित प्रस्ताव भी विभाग के पास भेज दिया गया है। विभागीय स्वीकृति मिलते ही इसे लागू कर दिया जाएगा। जिससे रजिस्ट्री दर चार से पांच गुणा तक बढ़ जाएगा। शहर के आसपास के इलाकों का भी शहरी क्षेत्र के अनुसार दर निर्धारित किया जा रहा है। अभी जो दर है उसमें एमवीआर और बाजार दर में काफी अंतर है। जमीन की रजिस्ट्री का रेट सबसे अधिक बांका नगर परिषद क्षेत्र में बढ़ेगा। शहर के गांधी चौक के पास अभी प्रति डिसमल साढ़े छह लाख रुपए एमवीआर है, लेकिन अप्रैल से गांधी चौक के पास की जमीन का एमवीआर 25 लाख रुपए प्रति डिसमल तक हो जाएगा। इसी तरह कटोरिया और चांदन में खेतिहर जमीन का एमवीआर प्रति डिसमल दो से चार हजार रुपए डिसमल है, जो बढ़कर 15 से 20 हजार रुपए प्रति डिसमल तक पहुंच जाएगा। जमीन निबंधन से हर साल सरकार को लगभग 90 से सौ करोड़ रुपए राजस्व की प्राप्ति होती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 95.31 करोड़ का लक्ष्य जिला को मिला है। इसमें से 80 फीसद राजस्व का लक्ष्य हासिल हो चुका है। मार्केट रेट और एमवीआर में काफी अंतर जिला सब रजिस्ट्रार हेमंत कुमार ने बताया कि अभी जो एमवीआर है, वह बाजार दर से काफी कम है। जमीन के साथ-साथ भवन और संरचना में भी यही स्थिति है। व्यावसायिक भूखंड में पक्के निर्माण का मूल्य हाइवे और मुख्य मार्ग के किनारे तीन हजार रुपए प्रति वर्गफीट निर्धारित है, जबकि आवासीय भवन के लिए एमवीआर 1650 रुपए प्रति वर्गफुट है, लेकिन बाजार मूल्य तीन से चार गुणा से भी अधिक है। आरसीसी रोड के किनारे व्यावसायिक भूखंड में पक्का निर्माण का मूल्य 2600 रुपए प्रति वर्गफुट है जबकि आवासीय उपयोग वाली संरचना का दर औसतन 1200 रुपए प्रति वर्गफीट है। जिला सब रिजिस्टार ने बताया कि नए वित्तीय वर्ष में 50 फीसद तक एमवीआर में बढ़ोतरी हो जाएगी। 2013 के बाद हो रहा एमवीआर पुनरीक्षण एमवीआर का पुनरीक्षण करीब 13 साल बाद हो रहा है। पिछली बार साल 2013 में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों का किया गया था। इसके तीन साल बाद 2016 में केवल बांका शहरी क्षेत्र के लिए एमवीआर पुनरीक्षण किया गया था। ऐसे में करीब एक दशक से अधिक समय से एमवीआर पुनरीक्षण नहीं होने के कारण राजस्व संग्रहण कार्य एवं आधारभूत संरचना विकास कार्य में परेशानी हो रही थी। साथ ही जिले में अब जमीन की वर्गीकरण प्रक्रिया में भी बदलाव होगा। ग्रामीण क्षेत्रों के जमीन का वर्गीकरण आवासीय भूमि, कृषि भूमि तथा सड़क की दोनों तरफ की भूमि, सिंचित भूमि, असिंचित भूमि तथा व्यावसायिक, औद्योगिक एवं विशेष श्रेणी क्षेत्र के रूप में किया गया है। यानी ग्रामीण क्षेत्र में जमीन का वर्गीकरण सात प्रकार में किया गया है, जबकि शहरी क्षेत्र में जमीन का वर्गीकरण छह तरह से किया गया है नए साल में बढ़ेगा राजस्व एमवीआर रिवाइज होने से सरकार को राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। अभी जमीन निबंधन से हर साल सरकार को लगभग 90 से सौ करोड़ रुपए राजस्व की प्राप्ति होती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 95.31 करोड़ का लक्ष्य जिला को मिला है। इसमें से 80 फीसद राजस्व का लक्ष्य हासिल हो चुका है। एमवीआर पुनरीक्षण होने से जमीन का वैल्यू बढ़ेगा। इससे राजस्व में बढ़ोतरी होगी। शहरी क्षेत्र और सभी राजस्व ग्रामों के लिए इलाके वार एमवीआर रेट में संशोधन की तैयारियां पूरी कर ली गई है। विभागीय निर्देश मिलने के बाद डीएम से आदेश लेकर इसे लागू कर दिया जाएगा। – हेमंत कुमार, जिला अवर निबंधक पदाधिकारी

माता मावली मेले में विकास की सौगात

रायपुर. माता मावली मेले में विकास की सौगात       नारायणपुर में आयोजित ऐतिहासिक माता मावली मेले में छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप तथा राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री  टंकराम वर्मा शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने माता मावली की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों, विशेषकर जिलेवासियों को शुभकामनाएं दीं।      कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री  कश्यप ने कहा कि मावली माता के आशीर्वाद से बस्तर की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराएं सदैव अक्षुण्ण रहें। उन्होंने कहा कि नारायणपुर का यह मेला सामाजिक समरसता, लोककला और परंपरा का जीवंत संगम है, जहां दूर-दूर से लोग पहुंचकर बस्तर की संस्कृति से रूबरू होते हैं। उन्होंने सभी को मेले में शामिल होकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने का आग्रह किया।        मंत्री द्वय ने मेले में लगे विभिन्न दुकानों एवं विभागीय स्टॉलों का अवलोकन किया तथा स्थानीय उत्पादों और पूजा सामग्री की खरीदारी भी की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करते हैं।        इस अवसर पर कुल 1 करोड़ 76 लाख 59 हजार रुपये के कार्यों का भूमिपूजन तथा 59 लाख 51 हजार रुपये के कार्यों का लोकार्पण किया गया। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप 10 प्राथमिक शाला भवनों के निर्माण हेतु भूमिपूजन किया गया, जिनकी स्वीकृत राशि 1 करोड़ 41 लाख 60 हजार रुपये है। इसके अलावा जनपद पंचायत ओरछा के ग्राम कुतुल एवं जाटलूर में दो-दो बाजार शेड निर्माण के लिए 34 लाख 99 हजार रुपये स्वीकृत किए गए।        जनपद पंचायत नारायणपुर अंतर्गत बागडोंगरी, पालकी और महिमागवाड़ी में 59 लाख 51 हजार रुपये की लागत से निर्मित खाद्यान्न भवनों का लोकार्पण किया गया। साथ ही नेलवाड़ और खोड़गांव में 100-100 मैट्रिक टन क्षमता के गोदामों का भी लोकार्पण किया गया।         कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, नगरपालिका अध्यक्ष इंद्रप्रसाद बघेल, कलेक्टर नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित

बुक लीक कांड: क्या जनरल नरवणे को निशाना बनाया गया? पेंगुइन इंडिया से पूछताछ तेज

नई दिल्ली पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब लीक मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने छानबीन तेज कर दी है। इस सिलसिले में प्रकाशक पेंगुइन इंडिया के प्रतिनिधियों से पूछताछ की गई है। सूत्रों की मानें तो पुलिस 15 सवालों के जवाब जानना चाहती है। स्पेशल सेल तकनीकी सबूतों के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि यह पूरी घटना किसी साजिश का हिस्सा तो नहीं है। कोई आपराधिक साजिश तो नहीं? पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्पेशल सेल की छानबीन अब इस बात पर फोकस है कि क्या पांडुलिपि के कथित लीक के पीछे कोई आपराधिक साजिश तो नहीं थी। हाल ही में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नरवणे की किताब के कथित लीक की जांच में आपराधिक साजिश के आरोप भी जोड़ दिए हैं। 15 सवालों के जवाब चाह रही स्पेशल सेल पुलिस सूत्रों ने बताया कि स्पेशल सेल ने पेंगुइन इंडिया को नोटिस जारी कर 15 अहम सवालों के जवाब मांगे थे। जांच एजेंसी ने कंपनी से पांडुलिपि की हैंडलिंग, डिजिटल और फिजिकल एक्सेस, एडिटिंग प्रक्रिया, प्रिंटिंग से पहले की सुरक्षा व्यवस्था और ड्राफ्ट कॉपी तक किन-किन लोगों की पहुंच थी, जैसे बिंदुओं पर जानकारी तलब की थी। पेंगुइन इंडिया के प्रतिनिधियों से पूछताछ वहीं जांच टीम ने पेंगुइन इंडिया के प्रतिनिधियों से विस्तृत पूछताछ की है। कंपनी के प्रतिनिधि पूछताछ के लिए पेश हुए। उन्होंने कुछ सवालों के जवाब जांच एजेंसी को सौंप दिए हैं। कुछ बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया है। स्पेशल सेल अब पेंगुइन इंडिया द्वारा दिए गए जवाबों और दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है। डिजिटल ट्रेल की भी जांच जांच में इस सवाल का भी जवाब तलाशा जा रहा है कि क्या यह घटना किसी आंतरिक लापरवाही का नतीजा है। इस मामले में किसी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रेल की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदारी तय की जा सकेगी। नहीं प्रकाशित की पुस्तक- पेंगुइन इंडिया गौरतलब है कि राहुल गांधी ने लोकसभा में इसके कुछ अंश का जिक्र करते हुए सरकार की घेरेबंदी की थी। इसके बाद पुस्तक को लेकर विवाद बढ़ गया। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने अपने बयान में कहा कि हम स्पष्ट कर रहे हैं कि पुस्तक का प्रकाशन नहीं हुआ है। पुस्तक की कोई भी प्रति प्रिंट या डिजिटल रूप में जनता के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई है। फिर कैसे लीक हो गए बुक के अंश? ऐसे में सवाल उठता है कि जब किताब प्रकाशित नहीं हुई तो इसके अंश आम कैसे हो गए? पुलिस सूत्रों ने बताया कि अप्रकाशित पांडुलिपि कथित तौर पर कैसे प्रसारित हुई? इसके जवाब तलाशे जा रहे हैं।

बाछा-बाछी बयान पर बवाल: राहुल गांधी को लेकर गिरिराज सिंह क्यों हुए आगबबूला?

पटना नरेंद्र मोदी सरकार में कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर बड़ा हमला किया है। भाजपा नेता ने कांग्रेस नेता के लिए झूठा, लूच्चा जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने राहुल गांधी पर किसानों का नकली हितैषी होने का आरोप लगाते हुए कहा है कि वह गेहूं और जौ के पौधे या गाय की बाछा और बाछी की पहचान नहीं कर पाएंगे। मंत्री ने उन पर विदेशों में भारत की छवि धूमिल करने का भी आरोप लगाया और कहा कि इनकी भी फाइल खुलने वाली है। गिरिराज सिंह इस सवाल पर भड़क गए कि राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर किसानों के साथ छलावा करने का आरोप लगाया है। दरअसल राहुल गांधी ने कहा था कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील में किसानों के हितों के साथ सरकार ने समझौता कर दिया। इस पर गिरिराज सिंह ने कहा कि राहुल गांधी जैसा झूठा नेता नहीं देखा। वे कितना झूठ बोलते हैं इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है। वे किसानों के नकली हितैषी हैं। मेरे साथ खेत में चलकर गेहूं और जौ के पौधे में जरा अंतर बता देंं। वे गाय की बाछी और बछड़े को भी पहचान पाएंगे कि कौन किस लिंग का है। ऐसे नेता किसानों के बारे में बात करते हैं। गिरिराज सिंह ने कहा कि उनके पूरे खानदान ने किसानों को धोखा दिया। वे किसानों के हित की बात कैसे कर सकते हैं। किसानों के हित की रक्षा अगर कोई कर सकता है तो वे नरेन्द्र मोदी हैं। राहुल गांधी देश में भ्रम फैला रहे हैं। वे गृह युद्ध कराने में लगे हैं। जब कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कह दिया कि किसानों के कल्याण पर सरकार की पूरी नजर है। मंत्री पीयूष गोयल ने आश्वासन दिया है कि किसानों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं हो सकता। देश की जनता को नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है। राहुल गांधी को खती, किसानी की एबीसीडी भी पता नहीं है। अब इनका भी फाइल खुलने वाला है।  

निपाह का खतरा: संदिग्ध संक्रमण के बीच नर्स की मौत, रिपोर्ट आई निगेटिव

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में निपाह वायरस इंफेक्शन से जूझ रही 25 साल की एक नर्स की गुरुवार को मौत हो गई। हाल के इतिहास में पश्चिम बंगाल में इस वायरस से यह पहली मौत है। निपाह वायरस से देश में पहली मौत, टेस्ट निगेटिव के बावजूद नर्स की हार्ट अटैक से चली गई जान निपाह वायरस से देश में पहली मौत का मामला सामने आया है। पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के एक प्राइवेट अस्पताल में निपाह वायरस इंफेक्शन से जूझ रही 25 साल की एक नर्स की गुरुवार (12 फरवरी) को मौत हो गई। हाल के इतिहास में पश्चिम बंगाल में इस वायरस से यह पहली मौत है। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि नर्स, उन दो लोगों में एक थीं, जो निपाह वायरस से संक्रमित हुए थे और कई हफ़्तों से इलाज करा रही थी। हालांकि, हाल ही में उसका वायरस टेस्ट नेगेटिव आया था, बावजूद इसके उसकी हालत गंभीर बनी हुई थी और गुरुवार को हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई। राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि नर्स को जनवरी के अंत में जीवन-रक्षक प्रणाली से हटाया गया था। उन्होंने कहा, ''आज दोपहर हृदयगति रुकने से उनकी मृत्यु हो गई। हालांकि वह निपाह संक्रमण से उबर चुकी थीं, लेकिन वह कई जटिलताओं से ग्रस्त थीं।'' अधिकारी ने बताया कि नर्स लंबे समय तक कोमा में थीं, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई और बाद में उन्हें फेफड़ों का संक्रमण हो गया था। उन्होंने बताया कि वह उन दो लोगों में से एक थीं जिनके पिछले महीने निपाह से संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी। दूसरा संक्रमित व्यक्ति पुरुष नर्स है और ठीक हो चुका है।

वंदे मातरम् को अनिवार्य बजाने पर बवाल, बोले मदनी- यह धार्मिक आज़ादी के खिलाफ कदम

नई दिल्ली वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में बजाने को अनिवार्य घोषित किए जाने के फैसले को जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने धर्म की स्वतंत्रता पर खुला हमला बताया है। केंद्र सरकार ने सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों, कॉलेजों और अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों में इसके सभी अंशों की धुन बजाने को अनिवार्य कर दिया है। मदनी ने केंद्र सरकार के इस फैसले को अत्यंत दुखद तथा नागरिकों पर जबरन थोपा गया बताया है। धार्मिक स्वतंत्रता पर गहरी चोट करने का प्रयास मदनी ने कहा कि यह न केवल एक पक्षपातपूर्ण फैसला है बल्कि नागरिकों की उस धार्मिक स्वतंत्रता पर गहरी चोट करने का प्रयास है जो देश के संविधान ने उन्हें प्रदान की है। उन्होंने कहा कि अब यह दुखद सच्चाई पूरी तरह सामने आ गई है कि इन लोगों को देश की प्रगति और जनता की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है, वे हर समय चुनावी मोड में रहते हैं। उनका हर काम और हर फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि उससे चुनाव में कितना लाभ मिल सकता है। हम केवल एक अल्लाह की इबादत करते हैं मौलाना मदनी ने कहा कि वंदे मातरम् का विवाद बहुत पुराना है। इससे पहले दिसंबर 2025 में जब इसे लेकर संसद में चर्चा हुई थी तब भी हमने अपने एक बयान के माध्यम से अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। हमें किसी के वंदे मातरम् गाने या किसी समारोह में इसकी धुन बजाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन हम मुसलमान इस गीत को इसलिए नहीं गा सकते क्योंकि हम केवल एक अल्लाह की इबादत करते हैं और अपनी इस इबादत में किसी और को शामिल नहीं कर सकते। हर धर्म के अपने आदेश और नियम होते हैं उन्होंने यह भी कहा कि वंदे मातरम् की विषयवस्तु शिर्क से संबंधित मान्यताओं पर आधारित है और इसके एक अंतरे में देश को दुर्गा माता से उपमा देकर उसकी उपासना के लिए शब्दों का प्रयोग किया गया है। हर धर्म के अपने आदेश और नियम होते हैं जिन पर अमल करने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता और इसी कारण हमारे संविधान में भी अनुच्छेद 25 के तहत प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता दी गई है। ऐसे में किसी विशेष नागरिक या नागरिकों पर किसी विशेष विचारधारा को अपनाने, उसका उच्चारण करने या उसे मानने के लिए मजबूर करना संविधान के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। किसी के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं मौलाना मदनी ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट का भी यह निर्णय है कि किसी भी नागरिक को राष्ट्रगान या किसी ऐसे गीत को गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता जो उसके धार्मिक विश्वास के विरुद्ध हो। उन्होंने कहा कि देश से प्रेम एक अलग बात है और उसकी पूजा दूसरी बात। मुसलमानों को इस देश से कितनी मोहब्बत है, इसके लिए उन्हें किसी के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। देशभक्ति का संबंध दिल की निष्ठा और कर्म से मदनी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में मुसलमानों और जमीयत उलमा-ए-हिंद के बुजुर्गों की बेमिसाल कुर्बानियां और विशेष रूप से देश के विभाजन के विरोध में जमीयत की कोशिशें दिन के उजाले की तरह स्पष्ट हैं। आजादी के बाद भी देश की एकता और अखंडता के लिए उनकी जद्दोजहद को भुलाया नहीं जा सकता। हमने हमेशा कहा है कि देशभक्ति का संबंध दिल की निष्ठा और कर्म से है, न कि नारों से। टैगोर ने नेहरू को सलाह दी थी आजादी से पहले का ऐतिहासिक रिकॉर्ड मौजूद है कि 26 अक्टूबर 1937 को रवीन्द्रनाथ टैगोर ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को एक पत्र में सलाह दी थी कि वंदे मातरम् के प्रारंभिक दो बंदों को ही राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया जाए क्योंकि शेष पंक्तियां एकेश्वरवादी धर्मों की मान्यताओं से टकराती हैं। फलस्वरूप 19 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस की वर्किंग कमेटी ने निर्णय लिया कि इसके केवल दो बंदों को ही राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया जाए। पूरे गीत को थोपने की कोशिश संसद में हुई पूरे दिन की चर्चा में भी कांग्रेस सहित अन्य दलों के सदस्यों ने इसी बात पर जोर दिया था, लेकिन अब एक आदेश के माध्यम से पूरे गीत को नागरिकों पर थोपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके पीछे देशभक्ति की भावना नहीं बल्कि राजनीति काम कर रही है। वर्तमान सरकार जब भी किसी मुद्दे पर घिरती है तो जानबूझकर कोई न कोई विवाद खड़ा करने की कोशिश करती है ताकि जनता का ध्यान मूल समस्याओं से हटाया जा सके, वंदे मातरम् संबंधी अधिसूचना इसका ताजा उदाहरण है। उन्होंने अंत में कहा कि यह देश को बांटने वाली राजनीति है। हर हाल में सत्ता बनाए रखने का यह जुनून देश की शांति और एकता को नष्ट करने वाला ही नहीं है बल्कि उस संविधान को भी पैरों तले रौंदता है जिस पर हमारे देश के महान लोकतंत्र की नींव टिकी हुई है।  

बच्चे का मासूम जवाब—चूहे ने कॉपी खा ली, DC अजय नाथ झा का मानवीय फैसला चर्चा में

बोकारो बोकारो में निरीक्षण के दौरान डीसी अजय नाथ झा का एक मानवीय चेहरा देखने को मिला। स्कूल पहुंचे डीसी ने बच्चों से पढ़ाई के बारे में बात की और उनकी कॉपियां देखीं। इसी दौरान एक बच्चे की फटी कॉपी देखकर उन्होंने तुरंत व्यवस्था सुधारने का निर्देश दिया। स्कूल के बरामदे में बैठकर डीसी ने बच्चों की कॉपियां देखीं दरअसल, जिले के बेरमो अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय, रिजनल हॉस्पिटल फुसरो में निरीक्षण के दौरान डीसी अजय नाथ झा अचानक पहुंच गए। वे मतदान केंद्रों के निरीक्षण पर निकले थे, तभी स्कूल भी देखने चले गए। स्कूल के बरामदे में बैठकर डीसी ने बच्चों की कॉपियां देखीं और उनसे पढ़ाई के बारे में सवाल पूछे। वे बच्चों की लिखावट भी ध्यान से देख रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर एक छात्र सूरज की कॉपी पर पड़ी, जिसके कई पन्ने फटे हुए थे। "चूहे ने कॉपी खा ली" डीसी ने प्यार से पूछा, “तुम्हारी कॉपी क्यों फटी है?” इस पर बच्चे ने मासूमियत से जवाब दिया, “चूहे ने खा लिया।” बच्चे की बात सुनकर डीसी ने तुरंत एसडीओ मुकेश मछुआ को सभी बच्चों के लिए नई कॉपियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। साथ ही संबंधित अधिकारियों को स्कूल बैग की व्यवस्था करने को कहा, ताकि बच्चे अपनी किताब-कॉपी सुरक्षित रख सकें। डीसी ने बच्चों से सामान्य ज्ञान के सवाल भी पूछे कुछ ही देर में स्कूल के सभी दस बच्चों को नई कॉपियां बांट दी गईं। निरीक्षण के दौरान स्कूल में मूलभूत सुविधाओं की कमी भी सामने आई। इस पर डीसी ने नाराजगी जताई। उन्होंने बीडीओ को निर्देश दिया कि बच्चों की पढ़ाई फिलहाल पास के सामुदायिक भवन में कराई जाए। साथ ही डीईओ जगरनाथ लोहरा को स्कूल की मरम्मत का प्रस्ताव जल्द जिला मुख्यालय भेजने को कहा। डीसी ने बच्चों से सामान्य ज्ञान के सवाल भी पूछे। उन्होंने पूछा कि फरवरी महीने में कितने दिन होते हैं। बच्चों ने उत्साह से सही जवाब दिया। डीसी के इस दौरे से स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों और शिक्षकों में उत्साह देखने को मिला।  

ट्यूशन गए 10वीं के छात्र की बेरहमी से हत्या

कैथल. कैथल जिले के गुहला-चीका खंड के गांव खरकां में हृदयविदारक घटना में 10वीं कक्षा के छात्र नवराजदीप की चाकू मारकर हत्या कर दी गई, जबकि उसका साथी विनीत गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जानकारी के अनुसार नवराजदीप ट्यूशन पढ़ने के लिए घर से निकला था। रास्ते में रामथली नहर के पास उसकी कुछ छात्रों से कहासुनी हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार देखते ही देखते मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि दूसरे पक्ष के युवकों ने अचानक चाकू निकाल लिए और नवराजदीप व उसके साथी विनीत पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में नवराजदीप को 8 से 10 चाकू के वार किए गए। गंभीर चोटों के कारण वह लहूलुहान होकर मौके पर ही गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई। वहीं विनीत को भी कई चोटें आईं। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार उसकी हालत फिलहाल स्थिर है। पुरानी रंजिश की जताई जा रही आशंका  जांच अधिकारी नायब सिंह ने बताया कि मृतक की आरोपियों से पहले भी कहासुनी हो चुकी थी, जिससे पुरानी रंजिश की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने 5 नामजद और 12 अन्य के खिलाफ हत्या व हत्या के प्रयास की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है। एहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात किया गया है। परिजनों और ग्रामीणों ने दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा देने की मांग की है। इस दर्दनाक वारदात ने फिर युवाओं में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति और छोटी-छोटी बातों पर हिंसा की घटनाओं पर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता की ओर छत्तीसगढ़ : राज्य में 10,796 हेक्टेयर क्षेत्रों में ऑयल पाम की खेती

रायपुर. खाद्य तेल में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए छत्तीसगढ़ में ऑयल पाम की खेती को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में अब तक 10,796 हेक्टयर क्षेत्रों में ऑयल पाम की खेती हो रही है। जिसमें 7,315 किसान लाभान्वित हो रहे हैं। जिला प्रशासन भी ऑयल पाम के लिए जमीन चिहांकित कर रकबा बढ़ाने प्रयासरत हैं।  इसी क्रम में संचालक उद्यानिकी श्री लोकेश कुमार ने दुर्ग एवं बेमेतरा जिलों के किसानों के खेतों का निरीक्षण कर योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और अधिक क्षेत्र में ऑयल पाम लगाने के लिए किसानों को प्रेरित किया। उद्यानिकी संचालक श्री लोकेश कुमार ने निरीक्षण के दौरान राष्ट्रीय बागवानी मिशन, समेकित उद्यानिकी विकास कार्यक्रम तथा नेशनल मिशन ऑन ऑयल पाम के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। गौरतलब है कि राज्य में ऑयल पाम की खेती वर्ष 2012-13 से की जा रही है। वर्तमान में राज्य के समस्त जिलों में लगभग 10,796 हेक्टेयर क्षेत्र में रोपण किया जा चुका है, जिससे 7,315 किसान लाभान्वित हुए हैं। अब तक लगभग 1,394.88 टन फ्रेश फ्रूट बंच का उत्पादन हुआ है। भारत सरकार द्वारा फ्रेश फ्रूट बंच का न्यूनतम मूल्य 16,460.46 रुपये प्रति टन निर्धारित कया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ में किसानों से 22,000 रुपये प्रति टन की दर से सीधी खरीदी की जा रही है। संचालक श्री लोकेश कुमार ने दुर्ग जिले के ग्राम ढाबा में श्रीमती सुनिती देवी मढरिया के एक हेक्टेयर में लगाए गए ऑयल पाम के साथ टमाटर की अंतरवर्ती फसल तथा श्री प्रवीण मढरिया के एक हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम के साथ केले की खेती का अवलोकन किया। यहां किसानों से सब्सिडी और अनुदान से जुड़ी जानकारी साझा की। इसके पश्चात दुर्ग जिले के ही परसदापार, चिखला एवं राजपुर तथा बेमेतरा जिले के डोंगीतराई गांव में चयनित और लाभान्वित किसानों के खेतों में रोपित ऑयल पाम, केला, आम, फेंसिंग और अंतरवर्ती फसलों का अवलोकन किया।  संचालक श्री लोकेश कुमार ने किसानों को योजना के अंतर्गत ऑयल पाम पौध, फेंसिंग, ट्यूबवेल, ड्रिप सिंचाई तथा अंतरवर्ती फसलों पर मिलने वाली आर्थिक सहायता और उत्पाद की बाजार व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऑयल पाम की खेती किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर विकल्प बन रही है। राजपुर स्थित शासकीय बीज प्रगुणन प्रक्षेत्र में प्लग टाइप सीडलिंग यूनिट का निरीक्षण कर इसे शीघ्र दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए, ताकि आगामी मौसम में किसानों को गुणवत्तायुक्त पौध उपलब्ध कराई जा सके।