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33 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनने की दिशा में अग्रसर

संडे स्पेशल हर महीने लाख तक कमाने लगीं हैं लखपति दीदियां 33 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनने की दिशा में अग्रसर सरकार ने प्रदेश की महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर, लखपति दीदी परिवार का बनीं सहारा लखनऊ उत्तर प्रदेश में महिलाएं अब आर्थिक स्वावलंबन के माध्यम से सफलता की नई कहानियां गढ़ रहीं हैं। लखपति दीदी योजना से कई महिलाएं हर महीने एक लाख रुपये तक की कमाई कर रहीं हैं। पिछले नौ साल में महिला सशक्तीकरण के लिए प्रदेश सरकार ने तत्परता से योजनाओं का क्रियान्वयन किया है जिससे यह उपलब्धि हासिल हो पायी। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत प्रदेश में 33 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनने की दिशा में अग्रसर हैं। बढ़ी कमाई, परिवार का बनीं सहारा आत्मनिर्भरता की सशक्त मिसाल हैं आजमगढ़ जिले की हुस्नआरा खातून जो तैबा स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं । वे रेशमी साड़ी निर्माण के काम से जुड़ीं हैं। लखपति दीदी योजना के माध्यम से जब एक लाख 15 हजार रुपये की सहायता मिली तो जैसे ठहरी हुई रफ्तार को पंख लग गए। आज वे प्रतिमाह लगभग एक लाख रुपये तक कमा रहीं हैं। वे कहती हैं कि अब उनका कारोबार बारह गुना तक बढ़ चुका है। उनका परिवार सम्मान और आत्मविश्वास के साथ जीवनयापन कर रहा है। आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन को मिला बल प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक संसाधन, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने का जो व्यापक ढांचा तैयार हुआ, उसने हजारों परिवारों की तकदीर बदल दी। लखपति दीदी योजना के अंतर्गत ही आजमगढ़ की शशिकला राजभर ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ऋण प्राप्त किया। इससे अदिति फास्ट फूड के नाम से अपना स्टॉल शुरू किया। आज वे प्रतिदिन लगभग 2000 रुपये का कारोबार कर रही हैं। वे बताती हैं कि पहले रोजगार की तलाश में थी, आज वे दूसरों के लिए प्रेरणा बन चुकीं हैं। यह परिवर्तन दर्शाता है कि योजनाएं जब सही दिशा और निगरानी के साथ लागू होती हैं तो परिणाम समाज की संरचना को बदल देते हैं। लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का लेनदेन महिला सशक्तीकरण का सबसे मजबूत स्तंभ वित्तीय सहायता है जिसमें प्रदेश सरकार ने खासी प्रगति हासिल की है। आजमगढ़ की सरोज मौर्या इसकी जीवंत तस्वीर हैं। पढ़ाई के साथ वे बीसी सखी के रूप में कार्य कर रहीं हैं और गांवों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचा रही हैं। उनके बताया कि पहले ग्रामीण महिलाएं बैंक जाने से हिचकतीं थीं। अब वे घर के पास ही जमा-निकासी, पेंशन वितरण और डिजिटल भुगतान जैसी सेवाएं पा रहीं हैं। इस पहल ने महिलाओं को न केवल रोजगार दिया बल्कि उन्हें आर्थिक निर्णयों में सहभागी भी बनाया। बीसी सखियों ने प्रदेश में अब तक लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय लेनदेन किया है और 107 करोड़ रुपये से अधिक का लाभांश अर्जित किया है। यह आंकड़ा बताता है कि महिलाएं अब आर्थिक गतिविधियों की मुख्य धुरी बन चुकी हैं। नौ लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों का गठन प्रदेश में नौ लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है। 63,519 ग्राम संगठन और 3272 संकुल स्तरीय संघ सक्रिय हैं जिनसे 99 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। लखपति महिला योजना के तहत 18 लाख से अधिक महिलाएं लखपति श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। यह केवल सरकारी उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रमाण है।  कारोबार शुरू करने के लिए मिलती है पूंजी लखपति दीदी योजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को लघु उद्योग और स्वरोजगार शुरू करने के लिए आसान, ब्याज मुक्त और चरणबद्ध पूंजी उपलब्ध कराया जाता है। इससे महिलाओं को छोटे स्तर पर कारोबार शुरू करने में सहायता मिलती है।

नर्मेदश्वर महादेव का नया मंदिर बना,धूम धाम से समारोह हुआ

रायपुर   शहर की प्रमुख कालोनी जैनम विहार में महाशिवरात्रि के अवसर पर नव निर्मित नर्मदेश्वर शिव मंदिर का लोकार्पण और प्राण प्रतिष्ठा समारोह संपन्न हुआ । जैनम विहार मंदिर निर्माण समिति द्वारा इस मंदिर का निर्माण कार्य करीब दो वर्ष पूर्व शुरू हुआ था जो आज महाशिवरात्रि पर पूर्ण हुआ ।          लालपुर स्थित जैनम विहार में बने इस मंदिर में शिव परिवार जिसमें भगवान गणेश,कार्तिकेय और पार्वती माँ विराजित हैं । साथ ही बजरंग बली की मूर्ति स्थापना भी की गई है । कालोनी वासियों के सहयोग से निर्मित इस मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर सभी अत्यंत उत्साहित थे।

चेहरे पर रेज़र चलाना पड़ सकता है भारी: ये 5 आम भूलें स्किन को कर देती हैं खराब

आजकल चेहरे के अनचाहे बालों को हटाने के लिए फेस शेविंग महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है। यह न केवल बालों को हटाती है, बल्कि त्वचा को एक्सफोलिएट कर डेड स्किन सेल्स को भी निकाल देती है, जिससे मेकअप और स्किनकेयर प्रोडक्ट्स त्वचा में बेहतर तरीके से समा जाते हैं। हालांकि, चेहरे की त्वचा बहुत सेंसिटिव होती है। इसलिए अगर आप फेस रेजर का इस्तेमाल करती हैं, तो कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है ताकि कटने, छिलने या पिंपल्स की समस्या न हो। सही रेजर का चुनें चेहरे के लिए कभी भी अपने बॉडी रेजर का इस्तेमाल न करें। चेहरे के लिए खास तौर पर डिजाइन किए गए फेशियल रेजर का ही इस्तेमाल करें, जिनमें एक छोटा और बारीक ब्लेड होता है। हमेशा चेक करें कि रेजर का ब्लेड तेज हो। पुराने ब्लेड से त्वचा छिल सकती है। साथ ही, इस्तेमाल से पहले और बाद में रेजर को सैनिटाइजर या अल्कोहल से साफ जरूर करें ताकि बैक्टीरिया न पनपें। त्वचा को तैयार करना सूखी त्वचा पर कभी भी रेजर न चलाएं। इससे जलन और रेजर बर्न हो सकता है। सबसे पहले चेहरे को माइल्ड फेस वॉश से साफ करें। शेविंग को आसान बनाने के लिए चेहरे पर एलोवेरा जेल, फेशियल ऑयल या एक अच्छा मॉइस्चराइजर लगाएं। यह रेजर और त्वचा के बीच एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। शेविंग की सही तकनीक चेहरे को शेव करने का भी एक खास तरीका होता है, जिसे फॉलो करना जरूरी है।     रेजर को त्वचा पर हमेशा 45 डिग्री के एंगल पर रखें।     रेजर को बहुत जोर से न दबाएं। हल्के हाथों से छोटे-छोटे स्ट्रोक्स लें।     हमेशा बालों के उगने की दिशा में ही शेव करें। उल्टी दिशा में शेव करने से इनग्रोन हेयर की समस्या हो सकती है।     शेव करते समय दूसरे हाथ से त्वचा को थोड़ा ऊपर की ओर खींचकर टाइट रखें, ताकि ब्लेड आसानी से फिसल सके। शेविंग के बाद की देखभाल शेविंग के बाद त्वचा के पोर्स खुल जाते हैं, इसलिए सही देखभाल जरूरी है-     शेविंग के बाद चेहरे को ठंडे पानी से धोएं ताकि त्वचा शांत हो जाए।     शेविंग वाले दिन विटामिन-सी, किसी भी तरह के केमिकल एक्सफोलिएंट, जैसे- AHA/BHA या रेटिनॉल का इस्तेमाल न करें। ये त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं।     एक अच्छे हाइड्रेटिंग मॉइस्चराइजर या एलोवेरा जेल से चेहरे को अच्छी तरह हाइड्रेट करें। कब शेविंग से बचें? अगर आपके चेहरे पर मुंहासे, कट्स या कोई स्किन इन्फेक्शन है, तो उस समय शेविंग बिल्कुल न करें। रेजर के इस्तेमाल से बैक्टीरिया पूरे चेहरे पर फैल सकते हैं और आपकी समस्या बढ़ सकती है।  

कोलार पुलिस ने 2 नाबालिग बालकों को सकुशल किया बरामद

कोलार पुलिस ने 2 नाबालिग बालकों को सकुशल किया बरामद   कजलीखेड़ा इलाके से लापता हुए थे बच्चे भोपाल  राजधानी की कोलार पुलिस ने रविवार को बगैर बताए लापता हुए 2 नाबालिगों को कुछ ही घंटों के भीतर सकुशल बरामद कर परिजनों के सुपुर्द किया। पुलिस की इस कार्रवाई से संभावित अनहोनी की घटना घटित होने से बच गई। जानकारी के अनुसार थाना कोलार रोड अंतर्गत पुलिस चौकी कजलीखेड़ा क्षेत्र के ग्राम सतगढ़ी बोरदा से 2 नाबालिग बालकों के गुम होने संबंधी सूचना प्राप्त हुई थी। पुलिस ने तत्काल ही गुम इंसान कायम कर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज किया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी मयूर खंडेलवाल ने नाबालिक बच्चों को शीघ्र दस्तयाब कर वैधानिक कार्यवाही करने हेतु समुचित निर्देश दिये थे। उक्त तारतम्य में चौकी प्रभारी कजलीखेड़ा एसआई केशांत शर्मा के नेतृत्व में टीम गठित कर बालकों की पतारसी प्रारंभ की गयी। पतारसी के दौरान संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ कार्यवाही करते हुए दोनों बालकों के सब्जी बाजार बंजारी के पास दिखने की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल टीम को मौके पर रवाना किया गया, जहां पर उक्त गुमशुदा बच्चे मिल गए। बालकों को चौकी कजलीखेड़ा लाकर गुमशुदा बच्चों से पूछताछ की गयी, जिन्होंने अपने साथ कोई घटना होना नही बताया। उसके बाद दोनों बच्चों को सकुशल परिजनों के सुपुर्द किया गया। उक्त कार्यवाही में चौकी प्रभारी एसआई केशांत शर्मा, एएसआई रुपेश नर्रे, संतोष कुमार, हेड कांस्टेबल रणजीत सिंह कलम, आरक्षक राजेश जाटव, प्रदीप यदुवंशी और महिला आरक्षक राधिका की सराहनीय भूमिका रही है।

13 साल की बेटी को ‘पावर’ देने की तैयारी में किम जोंग उन, परिवारिक झगड़े में फंसा क्रूर तानाशाह

सोल दुनिया के सबसे क्रूर तानाशाहों में से एक किम जोंग उन के परिवार में ही फिलहाल झगड़ा होता दिख रहा है। साउथ कोरिया की खुफिया एजेंसी का कहना है कि किम जोंग उन की बेटी किम जू ऐ का नाम अगले नेता के तौर पर घोषित किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में किम जोंग उन की बेटी का मुकाबला पावरफुल बुआ किम यो जोंग से हो सकता है। भविष्य में देश पर कंट्रोल करने की लड़ाई दोनों के बीच तेज हो सकती है। किम जू ऐ की उम्र महज 13 साल है और चर्चा है कि उसे 14 साल का होते ही किम जोंग उन की ओर से अपना उत्तराधिकारी घोषित किया जा सकता है। उन की बहन भी खुद को एक पावर सेंटर मानती रही हैं। ऐसे में संभव है कि यह संघर्ष बढ़ सकता है। साउथ कोरिया की नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस ने बीते सप्ताह बताया कि किम जू ऐ की उम्र 13 साल की हो गई हैं। अब उन्हें औपचारिक तौर पर उत्तराधिकारी घोषित किया जा सकता है। यह समय अहम है क्योंकि उत्तर कोरिया में इसी महीने एक बड़ा राजनीतिक आयोजन होने वाला है। इसमें किम जोंग उन बताएंगे कि देश के लिए भविष्य में क्या लक्ष्य तय किए गए हैं। इसके अलावा वह देश की सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए भी कुछ कदमों का ऐलान कर सकते हैं। इस दौरान किम जोंग उन की बेटी भी मंच पर हो सकती हैं। हाल ही में एक मीटिंग में वह अपने पिता का हाथ थामे हुए पहुंची थीं। किम जू ऐ को किसी सार्वजनिक आयोजन में पहली बार नवंबर 2022 में देखा गया था। तब वह एक लॉन्ग रेंज मिसाइल के परीक्षण में पहुंची थीं। इसके बाद वह लगातार कई आयोजनों में पिता के साथ नजर आई हैं। उन्होंने हथियार फैक्ट्रियों के दौरे किए हैं तो वहीं सैन्य परेडों में भी हिस्सा लिया है। यही नहीं बीते साल सितंबर में वह चीन की राजधानी बीजिंग भी पहुंची थीं। आमतौर पर उत्तर कोरिया की राजनीति में पुरुषों का ही वर्चस्व रहा है, लेकिन पहली बार किम जोंग उन बेटी को कमान दे सकते हैं। इसी उद्देश्य से उन्हें चीन ले जाया गया था ताकि उन्हें स्थापित किया जा सके और दुनिया भर में एक संदेश जाए। क्यों इतनी पावरफुल मानी जाती हैं किम जोंग उन की बहन किम जोंग उन की बेटी के लिए देश में कोई चुनौती नहीं है, लेकिन बुआ से ही चैलेंज मिल सकता है। दरअसल 38 वर्षीय किम यो जोंग को उन के बाद देश की दूसरी सबसे पावरफुल शख्सियत माना जाता है। उनकी राजनीतिक पकड़ मजबूत है तो वहीं सैन्य हलकों में भी उनकी ताकत कम नहीं है। फिलहाल वह कोरिया की वर्कर्स पार्टी की सेंट्रल कमेटी में सीनियर पद पर हैं। इसके अलावा भाई की राय को भी वह काफी हद तक प्रभावित करती रही हैं। ऐसे में अब यदि किम जोंग उन की बेटी मजबूत हुई तो फिर चीजें बदल सकती हैं। किम जोंग के परिवार में बर्बर रहा है सत्ता का संघर्ष उत्तर कोरिया पूरी दुनिया के उनके मुल्कों में शुमार किया जाता है, जो सूचना से कटे हुए हैं। यहां के आम नागरिकों को दुनिया के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती। इसके अलावा दुनिया के मीडिया या लोगों की एंट्री पर भी काफी पाबंदियां हैं। मीडिया पर इस सेंसरशिप के चलते ही उत्तर कोरिया के लोग पूरी दुनिया से एक तरह से कटे हुए हैं। बता दें कि देश में सत्ता संघर्ष भी बहुत क्रूर रहा है। किम जोंग उन ने 2011 में सत्ता संभालने के बाद अपने अंकल और मेंटर रहे जांग सॉन्ग थाएक को गोलियां मरवाकर जान ले ली थी। इसके अलावा किम जोंग उन के सौतेले भाई किम जोंग नाम की भी 2017 में हत्या करा दी गई थी।

अब जेट लैग नहीं करेगा परेशान: लंबी यात्रा के बाद बदन को तरोताज़ा रखने का वैज्ञानिक तरीका आया सामने

लंबी हवाई यात्रा के बाद होने वाली थकान या अलग-अलग शिफ्ट में काम करने की वजह से बिगड़ी हुई नींद अब बीते दिनों की बात हो सकती है। जापान के वैज्ञानिकों ने एक क्रांतिकारी दवा 'मिक 628' की खोज की है, जो शरीर की 'इंटरनल क्लॉक' को तेजी से आगे खिसकाने में मदद करती है। इस दवा की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह अनिद्रा और थकान से राहत दिलाने में बेहद असरदार साबित हो रही है। चूहों पर सफल रहा प्रयोग वैज्ञानिकों ने इस दवा का परीक्षण चूहों पर किया, जिसके नतीजे चौंकाने वाले रहे। शोध के दौरान चूहों के लिए दिन और रात के समय को 6 घंटे आगे बढ़ाकर 'जेट लैग' जैसी स्थिति पैदा की गई। जिन चूहों को 'मिक 628' की एक खुराक दी गई, वे सामान्य चूहों की तुलना में 3 दिन पहले ही नए समय के अनुसार ढल गए। इस प्रयोग से यह साफ हुआ कि यह दवा जेट लैग से उबरने के समय को लगभग आधा कर देती है। कैसे काम करती है यह दवा? यह महत्वपूर्ण शोध अमेरिका की राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों ने सबसे पहले शरीर की अंदरूनी घड़ी को नियंत्रित करने वाले एक खास जीन की पहचान की। 'मिक 628' दवा इसी जीन को सक्रिय करती है, जिससे शरीर का चक्र तेजी से बदल जाता है। इस दवा की एक और खास बात यह है कि इसे लेने के समय का इसके असर पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, जो इसे अन्य दवाओं से अलग बनाता है। भारतीयों के लिए क्यों है खास? आज के दौर में भारतीयों का विदेश दौरा काफी बढ़ गया है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2024-25 में करीब 3.17 करोड़ भारतीयों ने लंबी हवाई यात्राएं कीं। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों को अक्सर समय के अंतर के कारण नींद न आने और थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अगर यह दवा बाजार में आती है, तो इन करोड़ों यात्रियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। अब इंसानों पर होगा परीक्षण चूहों पर मिली बड़ी कामयाबी के बाद अब वैज्ञानिक इस दवा को इंसानों पर परखने की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले समय में इसके सुरक्षा मानकों और प्रभाव का गहराई से अध्ययन किया जाएगा। अगर इंसानों पर होने वाले परीक्षण सकारात्मक रहते हैं, तो यह दवा न केवल यात्रियों के लिए, बल्कि शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी एक बड़ी राहत लेकर आएगी।  

भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती के लिए शुरू हुआ पंजीकरण

चंडीगढ़. भारतीय सेना में अग्निवीर स्कीम के तहत वर्ष 2027 के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। हरियाणा के 6 जिलों अम्बाला, कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल, यमुनानगर, पंचकूला और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के पुरुष अभ्यर्थियों तथा दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल एवं चंडीगढ़ की महिला अभ्यार्थियों के लिए पंजीकरण 13 फरवरी, 2026 से 01 अप्रैल, 2026 तक होगा। सभी योग्य अभ्यर्थी वैबसाइट पर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यह भर्ती प्रक्रिया पुरुष वर्ग में अग्निवीर (सामान्य कर्तव्य), अग्निवीर (तकनीकी), अग्निवीर (लिपिक/स्टोर कीपर तकनीकी) और अग्निवीर ट्रेड्समैन 10वीं और 8वीं पास तथा महिला वर्ग में महिला मिलिट्री पुलिस के लिए आयोजित की जा रही है। इस वर्ष से अग्निवीर में भर्ती के लिए पुरुष और महिला अभ्यर्थियों का अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 21 वर्ष से 22 वर्ष कर दिया गया है। अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया में पहले चरण में ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। ऑनलाइन परीक्षा की संभावित तारीख 1 जून से 15 जून 2026 है। यदि परीक्षा की तिथि में कोई बदलाव होता है तो उसकी सूचना वैबसाइट पर जारी की जाएगी। दूसरे चरण में ऑनलाइन परीक्षा में मैरिट में चयनित अभ्यर्थियों को भर्ती रैली में शामिल होने के लिए बुलाया जाएगा।

फाल्गुन अमावस्या की रात की ये गलतियाँ बन सकती हैं दुर्भाग्य का कारण, जान लें समय रहते

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है. खासतौर पर फाल्गुन अमावस्या को पितरों की शांति, नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति और आध्यात्मिक साधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है. इस दिन पूजा-पाठ और दान-पुण्य करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या की रात कुछ ऐसे काम होते हैं जिन्हें भूलकर भी नहीं करना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि इन गलतियों से जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं और नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. आइए जानते हैं फाल्गुन अमावस्या की रात किन कामों से बचना चाहिए. सुनसान जगहों पर जाने से बचें अमावस्या की रात को सबसे अधिक भारी माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस रात नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है. इसलिए कोशिश करें कि रात के समय किसी सुनसान रास्ते, श्मशान घाट या खंडहरों के पास न जाएं. तामसिक भोजन का त्याग करें फाल्गुन अमावस्या पर शुद्धता का पालन करना अनिवार्य है. इस दिन और रात में मांस, मदिरा या लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से पितृ दोष लग सकता है और घर की बरकत रुक सकती है. देर रात तक न जागें अमावस्या की रात को जल्दी सोना बेहतर माना जाता है. बिना वजह देर रात तक बाहर घूमना या जागना आपकी सेहत और मानसिक स्थिति पर बुरा असर डाल सकता है. इस रात मन को शांत रखें और ईश्वर का ध्यान करें. लड़ाई-झगड़े से रहें दूर जिस घर में अमावस्या के दिन क्लेश या वाद-विवाद होता है, वहां दरिद्रता का वास होने लगता है. इस रात विशेष रूप से बड़े-बुजुर्गों का अपमान न करें, क्योंकि अमावस्या पितरों को समर्पित होती है और उनकी नाराजगी परिवार पर भारी पड़ सकती है. ब्रह्मचर्य का पालन शास्त्रों के अनुसार, अमावस्या की तिथि पर संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. इस दिन शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए, ताकि मन की एकाग्रता और आध्यात्मिक शक्ति बनी रहे. शुभ फल के लिए क्या करें?     पीपल के नीचे दीया: शाम के समय पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाएं. इससे पितृ प्रसन्न होते हैं.     दान पुण्य: अगले दिन सुबह किसी जरूरतमंद को अन्न या काले तिल का दान करें.     हनुमान चालीसा का पाठ: चूंकि इस बार अमावस्या मंगलवार को है, इसलिए हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी होगा और सभी नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करेगा.  

CBSE की 10वीं और 12वीं की कल से होंगी बोर्ड परीक्षाएं

लुधियाना. सैंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं। बोर्ड के मुताबिक दोनों क्लासेज में देश-विदेश से करीब 46 लाख स्टूडेंट्स अपीयर होने जा रहे हैं। परीक्षा को सुरक्षित, अनुशासित और स्ट्रैस फ्री बनाने के लिए सी.बी.एस.ई. ने छात्रों के लिए विशेष 'क्या करें और क्या न करें' की एक लिस्ट जारी की है। बोर्ड का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जानकारी के अभाव में किसी भी विद्यार्थी को परीक्षा से वंचित न होना पड़े। सी.बी.एस.ई. ने समय की पाबंदी पर सबसे अधिक जोर दिया है। परीक्षा सुबह 10.30 बजे शुरू होगी लेकिन विद्यार्थियों को सुबह 10 बजे तक परीक्षा केंद्र के अंदर पहुंचना अनिवार्य है। सुबह 10 बजे के बाद किसी भी छात्र को केंद्र के अंदर प्रवेश नहीं दिया जाएगा। बोर्ड ने सलाह दी है कि ट्रैफिक और दूरी को देखते हुए विद्यार्थी सुबह 9 या 9.30 बजे तक केंद्र पर पहुंच जाएं। पहले से करें यात्रा की योजना – बोर्ड ने विद्यार्थियों और पेरैंट्स से कहा है कि वे परीक्षा के दिनों में लोकल ट्रैफिक, दूरी, मौसम और संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनाएं। छात्रों को परीक्षा से पहले एक बार अपने केंद्र का दौरा करने की भी सलाह दी गई है ताकि रास्ता, समय और दूरी का सही अंदाजा लगाया जा सके। स्कूलों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अभिभावकों और विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करें और उन्हें समय प्रबंधन तथा परीक्षा संबंधी नियमों के प्रति जागरूक बनाएं। यह परीक्षा केवल छात्रों की तैयारी ही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की सजगता, जिम्मेदारी और निर्णय क्षमता की भी परीक्षा है, इसलिए सभी को नियमों, प्रक्रियाओं और दिशा-निर्देशों की पूरी जानकारी होना जरूरी है। इन बिंदुओं पर भी करें गौर – बिना एडमिट कार्ड विद्यार्थी को सैंटर में नहीं मिलेगी एंट्री एडमिट कार्ड पर पेरैंट्स और स्कूल प्रिंसीपल के सिग्नेचर जरूर हों एडमिट कार्ड को लैमिनेट न करें, क्योंकि इस पर इनविजिलेटर के सिग्नेचर होने जरूरी हैं रैगुलर विद्यार्थियों को स्कूल यूनिफॉर्म में आना अनिवार्य प्राइवेट परीक्षार्थी साधारण कपड़े पहन सकते हैं विद्यार्थी ट्रांसपेरैंट पाऊच में नीला या काला पैन, पैंसिल, रबर, कटर और स्केल ले जा सकते है पानी के लिए केवल ट्रांसपेरैंट बोतल की अनुमति, मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटुथ डिवाइस, कैल्कुलेटर, लॉग टेबल, इलैक्ट्रॉनिक गैजेट पूरी तरह वर्जित किसी भी प्रकार की लिखित सामग्री या कागज के टुकड़े ले जाना यू.एफ.एम. माना जाएगा एग्जाम सैंटर में ध्यान रखने वाली बातें – विद्यार्थी अपनी सीट पर बैठने से पहले आस-पास जांच लें कि कोई कागज तो नहीं गिरा है। आंसर-शीट मिलने पर उसके पन्नों की जांच करें और ओ.एम.आर. शीट पर अपना रोल नंबर, विषय कोड और अन्य डिटेल्स सावधानी से भरें। सी.बी.एस.ई. ने चेतावनी दी है कि नकल करते हुए या वर्जित सामान के साथ पकड़े जाने पर छात्र को परीक्षा से निकाला जा सकता है और भविष्य के लिए डिबार किया जा सकता है।

रिंग ऑफ फायर सूर्य ग्रहण: क्या होता है और क्यों है यह साल का पहला खास ग्रहण?

सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तिथि पर लगता है. कल यानी 17 फरवरी को फाल्गुन माह की अमावस्या मानाई जाएगी. साथ ही कल साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. सूर्य को ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लगेगा. ये वलयाकार सूर्य ग्रहण रहने वाला है. इसे विज्ञान अपनी भाषा में रिंग ऑफ फायर कहता है. ये सूर्य ग्रहण बहुत ही विशेष है. ये सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आने वाला है और न ही इसका सूतक काल भारत में माना जाएगा, लेकिन लोगों के मन में सवाल है कि ये रिंग ऑफ फायर क्या है और ये सूर्य ग्रहण विशेष क्यों हैं? क्या है रिंग ऑफ फायर? NASA के अनुसार, जब धरती से चंद्रमा की दूरी सबसे अधिक होती है और उस दौरान सूर्य ग्रहण लगता है, तो चंद्रमा दूर होने की वजह से सूर्य को पूरी तरह से ढक पाने में असफल रहता है. इसलिए आकार में छोटा नजर आता है. ऐसे में सूर्य का बीच वाला भाग काला दिखता है और उसके चारों ओर रौशनी की पतली चमकदार घेरा बन जाता है. ये चमकदार घेरा आग की अंगूठी जैसा नजर आता है. इसे ही रिंग ऑफ फायर कहते हैं. दूसरा, वलयाकार या कुंडलाकार सूर्य ग्रहण के समय सूर्य, चंद्रमा और धरती एक सीध में होते हैं और चंद्रमा सूर्य के मध्य भाग को ढक लेता है. इस स्थिति में सूर्य एक रिंग जैसा दिखने लगता है. सूर्य ग्रहण क्यों है विशेष? साल 2026 का ये सूर्य ग्रहण इसलिए विशेष माना जा रहा है क्योंकि ये शनि देव की राशि कुंभ में और धनिष्ठा नक्षत्र में लगने वाला है. सूर्य के साथ-साथ इस राशि में राहु, बुध, शुक्र और चंद्रमा भी मौजूद रहने वाले हैं. ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि सूर्य और राहु के एक साथ किसी राशि में रहने पर ग्रहण योग निर्मित होता है. कुंभ राशि में राहु और सूर्य की युति को परंपरागत तौर पर अशुभ माना जाता है. कितने बजे लगेगा सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार, सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर लगेगा और शाम 7 बजकर 57 मिनट पर ये खत्म होगा. ये सूर्य ग्रहण कुल 04 घंटे 32 मिनट तक रहेगा.