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होलिका दहन की पूजा विधि: कौन-कौन सी वस्तुएँ चढ़ती हैं और प्रसाद घर लाना शुभ है या नहीं?

हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन होली का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन पूरे देश रंग और गुलाल बिखरे नजर आते हैं. होली के दिन आपसी मतभेद भूलकर लोग एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाते हैं. साथ ही एक दूसरे को लगे लगाते हैं. पूरा देश होली के पर्व का इंजार बेसब्र होकर करता है. वहीं हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा की रात को होलिका दहन का भी पर्व मनाया जाता है. रात को हालिका दहन के बाद ही सुबह रंगों की होली खेली जाती है. बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है. मान्यता है कि होलिका दहन की अग्नि में जीवन के सभी दुख और नकारात्मकता जलकर भस्म हो जाती है. फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि होलका दहन में क्या-क्या चीजें अर्पित की जाती हैं? साथ ही जानते हैं कि होलिका दहन का प्रसाद घर ला सकते हैं या नहीं होलिका दहन 2026 कब है? द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि की शुरुआत 02 मार्च 2026 की शाम को 05 बजकर 55 मिनट पर होगी. इस तिथि का समापन 03 मार्च की शाम 5 बजकर 07 मिनट तक रहेगी. ऐसे में होलिका दहन का पर्व 3 मार्च 2026 को मनाया जाएगा. 04 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी. होलिका दहन में क्या चीजें की जाती हैं अर्पित? पूजा के दौरान जलती हुई अग्नि यानी होलिका में नारियल, उपले, नई फसल, गेंहू, गुलाल, चावल, जौ, रोली, अक्षत, बताशे, फूल, हल्दी की गांठ और कपूर आदि पूजा सामग्री अर्पित की जाती है. साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत का आशीर्वाद मांगा जाता है. होलिका दहन का प्रसाद क्या है? जो चीजें होलिका में अर्पित की जाती हैं, वही होलिका दहन का प्रसाद होता है. इसके अलावा अंत में बची हुई होलिका की राख भी बेहद शुभ मानी जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, होलिका की राख को घर के मंदिर या तिजोरी में रखना चाहिए. साथ ही माथे पर लगाना चाहिए. इससे सेहत अच्छी रहती है. क्या होलिका दहन का प्रसाद घर ला सकते हैं? धार्मिक मान्यता के अनुसार, होलिका दहन का प्रसाद घर लाया जा सकता है. गेहूं, चने, नारियल, बताशे, नई फसल, चावल और जौ आदि प्रसाद को दोस्तों और परिवार वालों के बीच वितरित करना चाहिए. इससे नकारात्मकता दूर रहती है.

चिरायु योजना से बदली जिंदगी, एम्स रायपुर में तीन बच्चों का सफल कॉक्लियर इंप्लांट

रायपुर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) का असर: जन्मजात बधिरता से जूझ रहे तीन बच्चों का एम्स रायपुर में सफल कॉक्लियर इंप्लांट राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) का असर: जन्मजात बधिरता से जूझ रहे तीन बच्चों का एम्स रायपुर में सफल कॉक्लियर इंप्लांट सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और बाल स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर राज्य शासन की महत्वाकांक्षी पहल ने एक बार फिर ठोस परिणाम दिए हैं। जन्मजात बधिरता से जूझ रहे तीन मासूम बच्चों का सफल कॉक्लियर इंप्लांट ऑपरेशन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर में संपन्न हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की चिरायु टीम द्वारा समय पर पहचान और समन्वित प्रयासों के कारण इन बच्चों को निःशुल्क उन्नत उपचार उपलब्ध हो सका। वर्तमान में तीनों बच्चे स्वस्थ हैं और चिकित्सकीय देखरेख में हैं। आंगनबाड़ी से सुपर स्पेशियलिटी तक सुदृढ़ स्वास्थ्य श्रृंखला कबीरधाम जिले के स/लोहारा विकासखंड स्थित ग्राम चिलमखोदरा निवासी धैर्य मरकाम (पिता– श्यामू मरकाम) जन्म से श्रवण बाधा से पीड़ित थे। चिरायु टीम ‘ए’ स/लोहारा द्वारा नियमित स्क्रीनिंग के दौरान समस्या की समय रहते पहचान की गई। आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण एवं रेफरल प्रक्रिया के बाद 16 फरवरी 2026 को AIIMS Raipur में उनका कॉक्लियर इंप्लांट सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। वर्तमान में बालक चिकित्सकीय निगरानी में है। इसी क्रम में कोरबा जिले के बालको क्षेत्र निवासी ढाई वर्षीय नक्ष कोशले  की श्रवण समस्या का पता भी प्रारंभिक जांच के दौरान चला। विशेषज्ञ परामर्श के पश्चात 14 फरवरी 2026 को AIIMS Raipur में सर्जरी की गई। चिकित्सकों के अनुसार बालक स्वस्थ है तथा नियमित फॉलो-अप जारी है। सक्ति जिले के जैजैपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम हसौद की तीक्षिका साहू में भी जन्मजात बधिरता की पुष्टि आंगनबाड़ी स्तर पर स्क्रीनिंग के दौरान हुई। चिरायु टीम जैजैपुर द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रकरण को उच्च संस्थान में रेफर किया गया। 17 फरवरी 2026 को AIIMS Raipur में सफल कॉक्लियर इंप्लांट के उपरांत अब तीक्षिका स्वस्थ हैं और स्पीच थेरेपी के माध्यम से श्रवण एवं भाषाई विकास की दिशा में निरंतर प्रगति कर रही हैं। शासन की संवेदनशीलता और स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता इन तीनों मामलों में यह स्पष्ट हुआ है कि यदि समय रहते जांच, परामर्श और उपचार उपलब्ध हो तो जन्मजात श्रवण बाधा जैसी गंभीर समस्या का भी प्रभावी समाधान संभव है। चिरायु टीम की सतत स्क्रीनिंग, आंगनबाड़ी स्तर पर पहचान और उच्च संस्थान में निःशुल्क उपचार की व्यवस्था ने इन परिवारों को नई उम्मीद दी है। परिजनों ने शासन और स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सहयोग ने उनके बच्चों का भविष्य बदल दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि कॉक्लियर इंप्लांट जैसी जटिल और महंगी सर्जरी सामान्य परिवारों के लिए अत्यंत कठिन होती है। किंतु शासन की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत यह उपचार निःशुल्क संभव हुआ। आंगनबाड़ी स्तर पर स्क्रीनिंग, जिला स्तरीय चिकित्सा परीक्षण और सुपर स्पेशियलिटी संस्थान में समयबद्ध सर्जरी यह संपूर्ण तंत्र राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

धान उठाव की रफ्तार धीमी पड़ी भारी, शासन ने मार्कफेड DMO किशोर चंद्रा को हटाया

गरियाबंद जिले में समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान का उठाव बेहद धीमी गति से होने पर शासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कुल 50.66 लाख क्विंटल धान में से अब तक केवल 29 लाख क्विंटल का ही उठाव हो सका है। खरीदी केंद्रों में तय बफर लिमिट से छह गुना ज्यादा धान जमा होने के कारण केंद्रों में जाम की स्थिति बनी हुई थी। धान उठाव में देरी और केंद्रों में जमा अधिक मात्रा को लेकर समिति ने बार-बार पत्राचार कर अधिकारियों को चेताया। इस कार्रवाई के बाद कलेक्टर की नाराजगी भरे पत्र के बाद 18 फरवरी की देर रात आदेश जारी कर मार्कफेड DMO किशोर चंद्रा को पद से हटाकर कबीरधाम भेज दिया गया।

स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा विस्तार: मेडिकल कॉलेज में घुटना-कूल्हा प्रत्यारोपण की अत्याधुनिक सुविधा

रायपुर मेडिकल कॉलेज में अत्याधुनिक घुटना व कूल्हा प्रत्यारोपण सर्जरी की सुविधा उपलब्ध रायगढ़ मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति शासकीय चिकित्सालय के अस्थि रोग विभाग में अब घुटना प्रत्यारोपण एवं कूल्हा प्रत्यारोपण जैसी जटिल सर्जरी की सुविधा सफलतापूर्वक शुरू कर दी गई है। अब तक जिन मरीजों को ऐसे ऑपरेशन के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था और लाखों रुपये खर्च करने पड़ते थे, उन्हें अपने ही जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में अत्याधुनिक तकनीक से सुरक्षित उपचार मिल रहा है। इस उपलब्धि के पीछे राज्य सरकार के स्वास्थ्य क्षेत्र को सुदृढ़ करने के निरंतर प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका है।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय  के नेतृत्व में स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल एवं वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है। अधिष्ठाता डॉ. संतोष कुमार एवं अस्पताल अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार मिंज के नेतृत्व में यह नई सुविधा प्रारंभ की गई है, जिससे जिलेवासियों को उच्चस्तरीय उपचार अपने ही शहर में उपलब्ध हो रहा है। अधिष्ठाता डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि निजी अस्पतालों में प्रति जोड़ प्रत्यारोपण सर्जरी पर लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये तक का खर्च आता है, जबकि शासकीय मेडिकल कॉलेज रायगढ़ में यह सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को आयुष्मान योजना के अंतर्गत निःशुल्क एवं उच्चस्तरीय उपचार मिल रहा है। इससे न केवल आर्थिक बोझ कम हो रहा है, बल्कि जिले के लोगों को अपने ही शहर में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ भी मिल रहा है। 28 वर्षीय मरीज छविराज कुमार ने बताया कि उन्हें लंबे समय से पैर में गंभीर दिक्कत थी, जिसके कारण चलने-फिरने में काफी परेशानी होती थी। उन्होंने पहले निजी अस्पताल में परामर्श लिया था, जहां सर्जरी के लिए लगभग ढाई लाख रुपये का खर्च बताया गया। आर्थिक रूप से यह उनके लिए काफी कठिन था। उन्होंने कहा कि रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत सर्जरी की सुविधा शुरू होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने यहां उपचार कराया। सफल ऑपरेशन के बाद अब उनके पैर में कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दूसरे दिन से ही वे चलने लगे थे और अब वे पूरी तरह सहज और आत्मविश्वास के साथ चल-फिर पा रहे हैं। छविराज ने चिकित्सकों की टीम और अस्पताल प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें निःशुल्क और उच्चस्तरीय उपचार मिलने से उनके जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण जांगड़े ने बताया कि गठिया, ऑस्टियोआर्थराइटिस, रूमेटॉइड आर्थराइटिस, दुर्घटना के बाद जोड़ों की क्षति अथवा लंबे समय से घुटने और कूल्हे के असहनीय दर्द से पीड़ित मरीजों के लिए जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी अत्यंत प्रभावी उपचार है। उन्होंने बताया कि सर्जरी के बाद मरीजों के दर्द में उल्लेखनीय कमी आती है और वे तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौटते हैं। चलने-फिरने की क्षमता में सुधार होने से मरीजों की जीवन गुणवत्ता में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। डॉ. जांगड़े ने आमजन से अपील की है कि घुटने या कूल्हे की पुरानी समस्या को नजरअंदाज न करें और समय रहते अस्थि रोग विभाग की ओपीडी में विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेकर उचित उपचार कराएं। अस्पताल अधीक्षक डॉ. एम.के. मिंज ने बताया कि अस्पताल में घुटना एवं कूल्हा प्रत्यारोपण की सुविधा अत्याधुनिक तकनीक और निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत उपलब्ध है। अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण जांगड़े एवं एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. ए.एम. लकड़ा की विशेषज्ञ टीम द्वारा इन सर्जरी को पूर्ण सुरक्षा और दक्षता के साथ किया जा रहा है। विगत कुछ दिनों में लगभग 10 मरीजों की सफलतापूर्वक सर्जरी की गई है, जिसमें 5 कूल्हा और 5 घुटना प्रत्यारोपण शामिल हैं।

अल्काराज की नजर सेमीफाइनल पर, कतर ओपन के क्वार्टर फाइनल में खाचानोव से भिड़ंत

दोहा कार्लोस अल्काराज ने वैलेंटिन रॉयर पर सीधे सेटों में 6-2, 7-5 से जीत के साथ कतर ओपन के क्वार्टरफाइनल में जगह बना ली है। दूसरे सेट में एक समय अल्काराज का स्कोर 2-5 था, लेकिन इसके बाद लगातार 5 गेम जीतते हुए उन्होंने क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह सुनिश्चित की। जीत के बाद अल्काराज ने कहा, "मैं बहुत खुश हूं कि मैं फिर से अच्छी रिदम और अच्छा टेनिस खेल पाया। मैं टेनिस जानता हूं। यह सिर्फ एक अंक के बारे में है, और कभी-कभी सेट या मैच खत्म करना वाकई मुश्किल होता है। मैं झूठ नहीं बोलूंगा, कुछ पल ऐसे थे जब मैंने तीसरे सेट के बारे में सोचा। मुझे खुशी है कि मैंने इसे पलट दिया और सीधे सेटों में जीत हासिल की।" क्वार्टर फाइनल में अल्काराज का मुकाबला करेन खाचानोव से होगा। सातवीं सीड खाचानोव ने बुधवार को मार्टन फुकसोविक्स को 6-2, 4-6, 6-4 से हराया था। खाचानोव 2024 में कतर ओपन के चैंपियन रहे थे। अल्काराज अब आउटडोर हार्ड कोर्ट पर 27 मैचों की जीत की स्ट्रीक पर हैं। यह सिलसिला पिछले अगस्त में सिनसिनाटी ओपन में उनके टाइटल जीतने के बाद शुरू हुआ था। ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब जीतकर सबसे कम उम्र में करियर ग्रैंड स्लैम पूरा करने की उपलब्धि हासिल करने वाले 22 साल के अल्काराज अपने पहले कतर ओपन खिताब की तलाश में हैं। वह एक साल पहले इवेंट डेब्यू पर क्वार्टर फाइनल स्टेज में जिरी लेहेका से हार गए थे। अल्काराज के ड्रॉ के हाफ में दूसरा क्वार्टर फाइनल पांचवें सीड और डिफेंडिंग चैंपियन एंड्री रुबलेव का मुकाबला स्टेफानोस सिटसिपास से होगा। रुबलेव ने फैबियन मारोजसन को 6-2, 6-4 से हराया, जबकि पूर्व विश्व नंबर 3 सिटसिपास चौथे सीड डेनियल मेदवेदेव को 6-3, 6-4 से हराकर 10 महीने में अपने पहले टूर-लेवल क्वार्टर-फाइनल में पहुंचे।

CM भगवंत मान को चेतावनी: सुखबीर सिंह बादल बोले– पंजाब के हितों से कोई समझौता नहीं

खेमकरण शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने बुधवार को पंजाब का पानी राजस्थान में जाने से रोकने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि अगली एसएडी सरकार राजस्थान की सहायक नहर में बहने वाले पानी को पंजाब के खेतों की सिंचाई के लिए मोड़ देगी। अमरकोट के अनाज मंडी में पंजाब बचाओ, सुखबीर सिंह बादल ल्याओ अभियान के तहत रैली को संबोधित करते हुए एसएडी अध्यक्ष ने कहा कि हम कांग्रेस पार्टी द्वारा राज्य के साथ किए गए भेदभाव को खत्म करेंगे, जिसने नदी के आधे पानी को राजस्थान को दे दिया। सुखबीर बादल ने यह भी स्पष्ट किया कि एसएडी मुख्यमंत्री भगवंत मान को राज्य के हितों से समझौता नहीं करने देगी, क्योंकि केंद्र के पास ऑस्ट्रेलिया में उनकी 2500 एकड़ जमीन की खरीद से संबंधित फाइल है, जिसके चलते एसवाईएल नहर के माध्यम से हरियाणा को पानी दिया जा रहा है। यही कारण है कि भगवंत मान ने अब इस मुद्दे पर अपना रुख नरम कर लिया है और सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि वे पंजाब के पानी को हरियाणा को सौंपने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने घोषणा की कि 2027 में एसएडी की सरकार बनने पर वह गैंगस्टरों की संस्कृति और ड्रग माफिया राज को हमेशा के लिए खत्म कर देगी। उन्होंने कहा कि हम ऐसे तत्वों को दस साल तक जमानत देने से इनकार करने के लिए कानून बदलेंगे और उनकी संपत्तियों की नीलामी भी करेंगे। एसएडी अध्यक्ष ने पंजाबियों से हर चुनाव में नई राजनीतिक पार्टियों के साथ प्रयोग बंद करने की भावुक अपील की। ​​उन्होंने कहा कि अगर हमें पंजाब को बचाना है तो हमें एसएडी को सत्ता में वापस लाना होगा। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि अपने पिता एस प्रकाश सिंह बादल की तरह मैं पंजाब को तेजी से आगे ले जाऊंगा। उन्होंने यह भी उदाहरण दिया कि कैसे आम आदमी पार्टी ने राज्य को इस हद तक खोखला कर दिया है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान नाममात्र के रह गए हैं और पूरा मुख्यमंत्री कार्यालय अरविंद केजरीवाल के निजी सहायक बिभव कुमार के नियंत्रण में है। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे उद्योगपति राजिंदर गुप्ता को राज्यसभा नामांकन के लिए 75 करोड़ रुपए देने पड़े और लवली यूनिवर्सिटी के मालिक अशोक मित्तल ने नामांकन के लिए 50 करोड़ रुपए दिए। बादल ने पंजाब के लोगों के लिए समाज के सभी वर्गों को शामिल करते हुए कई प्रतिबद्धताओं की घोषणा की। किसानों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगली एसएडी सरकार के गठन के एक सप्ताह के भीतर उन सभी किसानों को ट्यूबवेल कनेक्शन दिए जाएंगे जिनके पास अभी तक कनेक्शन नहीं है। उन्होंने बाढ़ से निपटने के लिए नदियों पर पक्के बांध बनाने की भी घोषणा की, अब तक जिन लोगों को भूमि अधिकार से वंचित रखा गया था, उन्हें भूमि अधिकार देने का आश्वासन दिया और भूमि के संयुक्त स्वामित्व का मुफ्त विभाजन सुनिश्चित किया। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी द्वारा पहले वंचितों को दी जाने वाली सामाजिक कल्याण सुविधाओं को कम करने और अब उन्हें पूरी तरह से नकारने के बारे में बोलते हुए बादल ने कहा कि हम एस प्रकाश सिंह बादल द्वारा शुरू की गई सभी सामाजिक कल्याण योजनाओं को बढ़ाने के साथ-साथ कमजोर वर्गों के लिए और भी नई योजनाएं बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि आटा-दाल योजना को फिर से शुरू किया जाएगा, जिसमें आटा 4 रुपए प्रति किलो और दाल 20 रुपए प्रति किलो दी जाएगी। गरीब वर्गों को एक लाख रुपए की विवाह सहायता दी जाएगी और वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाकर 3100 रुपए प्रति माह की जाएगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि गांवों में ‘लाल डोरा’ के अंतर्गत आने वाली सभी जमीनों को उनके मालिकों के नाम पर पंजीकृत किया जाएगा, सभी कच्चे मकानों का आधुनिक तरीके से पुनर्निर्माण किया जाएगा और सभी ग्रामीण सड़कों को कंक्रीट से पक्का किया जाएगा।

21 से उपभोक्ता संरक्षण सम्मेलन: ई-कॉमर्स से जुड़ी समस्याओं और एआई उपयोग पर केंद्रित होगी चर्चा

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की ओर से केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सहयोग से दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन 21 व 22 फरवरी को रायपुर में किया जा रहा है. दो दिनों तक आयोजित छह तकनीकी सत्रों का आयोजन किया जाएगा. पहले दिन ई-जागृति, ई-फाइलिंग, ई – हियरिंग एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, शिकायतों की स्वीकृति, क्षेत्राधिकार एवं प्रक्रिया संबंधी प्रावधान, डिजिटल एवं ई-कॉमर्स चुनौतियाँ, डार्क पैटर्न्स एवं भ्रामक विज्ञापन के साथ उपभोक्ता आयोग के आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विधिक सुधार पर चर्चा होगी. अगले दिन 22 फरवरी को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 में आवश्यक संशोधन के साथ उपभोक्ता आयोगों में प्रक्रियात्मक एकरूपता की आवश्यकता पर चर्चा होगी. समापन सत्र में खुला संवाद होगा, जिसके बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में वैलेडिक्टरी (विदाई) सत्र आयोजित होगा. दो दिवसीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, झारखण्ड, गोवा, बिहार, उत्तरप्रदेश, उड़ीसा एवं उनके जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोगों के अध्यक्ष एवं सदस्यगण, 8 राज्यों के सचिवगण तथा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि इस कार्यशाला में भाग लेंगे. छत्तीसगढ़ में निराकरण का प्रतिशत सौ से ज्यादा छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया ने यह बताया कि आगामी सप्ताह में रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग में एक अतिरिक्त पीठ एवं बेमेतरा जिले में जिला उपभोक्ता आयोग का शुभारंभ होने जा रहा है. छत्तीसगढ़ राज्य के जिला उपभोक्ता आयोगों ने 2025 में 160 प्रतिशत प्रकरणों का निराकरण किया है, एवं राज्य उपभोक्ता आयोग के निराकरण का प्रतिशत 101.57 प्रतिशत रहा. प्रदेश के 16 जिला उपभोक्ता आयोगों में ई – हियरिंग की सुविधा भी प्रारंभ कर दी गई है.

पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के 28 फरवरी तक ऑनलाइन करें आवेदन

चंडीगढ़. पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग व विमुक्त जनजाति के विद्यार्थियों से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। 28 फरवरी तक www.scholarships.gov.in पर छात्र आवेदन कर सकते हैं। विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सरकारी या निजी शिक्षण संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थी इस योजना का लाभ ले सकते हैं। योजना के तहत उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है ताकि कोई भी छात्र पैसों की कमी के कारण पढ़ाई से वंचित न रहे। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए अनुसूचित जाति के विद्यार्थी पीएमएस-एससी श्रेणी तथा अन्य पिछड़ा वर्ग या विमुक्त जनजाति के विद्यार्थी पीएम-यशस्वी घटक-2 के तहत आवेदन कर सकते हैं। आवेदक हरियाणा का निवासी हो और परिवार की वार्षिक आय 2 लाख 50 हजार रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए।

प्रदेश को देश की ऊर्जा राजधानी बनाने की दिशा प्रयास

रायपुर. प्रदेश को देश की ऊर्जा राजधानी बनाने की दिशा प्रयास ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने आज नया रायपुर स्थित छत्तीसगढ संवाद के ऑडिटोरियम में पत्रकारों के साथ ऊर्जा विभाग की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं पर विस्तार से अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में ऊर्जा उत्पादन, पारेषण और वितरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है तथा आने वाले वर्षों के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।               डॉ. यादव ने जानकारी दी कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी, एनटीपीसी तथा निजी उत्पादकों को मिलाकर प्रदेश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 30 हजार 671.7 मेगावाट है। इसमें 28 हजार 824 मेगावाट ताप विद्युत, 220 मेगावाट जल विद्युत तथा सोलर, बायोमास आदि स्रोतों से 2,047 मेगावाट क्षमता शामिल है। ताप विद्युत क्षेत्र में छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी की 2,840 मेगावाट, एनटीपीसी व निजी स्वामित्व के बिजलीघरों की 20 हजार 299 मेगावाट तथा कैप्टिव पॉवर प्लांट्स की 5 हजार 266 मेगावाट क्षमता है। प्रदेश को देश की ऊर्जा राजधानी बनाने की दिशा प्रयास डॉ. यादव ने कहा कि भारत सरकार का फोकस ताप विद्युत पर निर्भरता कम कर कार्बन उत्सर्जन घटाने पर है। नेट जीरो कार्बन लक्ष्य के तहत वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे देश की 50 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकता नवीकरणीय स्रोतों से पूरी की जा सके। इस दिशा में जल विद्युत एवं पंप स्टोरेज परियोजनाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो ग्रिड संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगी। राज्य शासन द्वारा पंप स्टोरेज आधारित जल विद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए नीति 2023 लागू की गई है। इसके तहत छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी द्वारा 8,300 मेगावाट क्षमता के छह स्थलों का चिन्हांकन किया गया है, जिनमें से पांच के फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और डीपीआर निर्माणाधीन है। निजी क्षेत्र में भी लगभग 5,000 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं पर कार्य जारी है।              ऊर्जा सचिव डॉ. यादव ने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के तहत एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड एवं राज्य उत्पादन कंपनी के संयुक्त उपक्रम द्वारा लगभग 2 हजार मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। इनमें अटल बिहारी ताप विद्युत गृह के जलाशय में 6 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर, कोरबा पूर्व के बंद राखड़ बांध पर 32 मेगावाट सौर संयंत्र तथा 500 मेगावाट-ऑवर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की स्थापना प्रस्तावित है। ऊर्जा सचिव ने बताया कि प्रदेश को देश की ऊर्जा राजधानी बनाने की दिशा में 32 हजार 100 मेगावाट क्षमता की नई परियोजनाओं हेतु विभिन्न संस्थाओं के साथ एमओयू किए गए हैं। इन परियोजनाओं में 12 हजार 100 मेगावाट ताप विद्युत, 4 हजार 200 मेगावाट न्यूक्लियर, 2 हजार 500 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर तथा 13 हजार 300 मेगावाट पंप स्टोरेज क्षमता शामिल है। इन सभी परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये के निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जिसमें कई प्रमुख संस्थाएं भागीदार हैं।                 डॉ. यादव ने बताया कि छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी द्वारा कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयों एवं मड़वा में 800 मेगावाट की इकाई स्थापित करने की दिशा में कार्य प्रगति पर है। पारेषण क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए डॉ. यादव ने कहा कि दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच उपकेन्द्रों की संख्या 132 से बढ़कर 137 हो गई है। ट्रांसफार्मरों की कुल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा 132 केवी लाइनों में पुराने कंडक्टरों को उच्च क्षमता वाले एचटीएलएस कंडक्टर से बदला जा रहा है। साथ ही 5 हजार 200 किमी ऑप्टिकल फाइबर ग्राउंड वायर का इंस्टॉलेशन पूर्ण कर 131 उपकेन्द्रों को डिजिटल संचार नेटवर्क से जोड़ा गया है।             वितरण क्षेत्र में प्रगति पर प्रकाश डालते हुए ऊर्जा सचिव ने बताया कि प्रदेश में उपभोक्ताओं की संख्या 65 लाख से अधिक हो गई है। विगत दो वर्षों में हजारों किमी नई लाइनें, उपकेन्द्र एवं ट्रांसफार्मर स्थापित किए गए हैं। जनहितकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, पीएम कुसुम, डॉ. खूबचंद बघेल किसान विद्युत सहायता योजना एवं बीपीएल उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं से लाखों परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विद्युतीकरण हेतु नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत सैकड़ों गांवों तक बिजली पहुंचाई गई है।             क्रेडा की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए ऊर्जा सचिव ने बताया कि विगत दो वर्षों में 26 हजार 794 सोलर सिंचाई पंप, 7 हजार 833 सोलर पेयजल पंप तथा 1 हजार 709 सोलर हाईमास्ट स्थापित किए गए हैं। आगामी वर्षों में ऑफग्रिड सोलर प्लांट्स एवं रूफटॉप सौर संयंत्रों के विस्तार की कार्ययोजना पर भी कार्य जारी है। डॉ. यादव ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में संतुलित मिश्रण, तकनीकी आधुनिकीकरण एवं नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के माध्यम से छत्तीसगढ़ को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर एवं अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस दौरान पत्रकारों के सवालों के भी विस्तृत उत्तर दिए और विभाग की आगामी 03 वर्षों की कार्य योजना साझा की।               इस दौरान सीएसपीडीसीएल के एमडी  भीम सिंह कंवर, सीएसपीजीसीएल के एमडी एस के कटियार, सीएसपीटीसीएल के एमडी  राजेश कुमार शुक्ला सहित वरिष्ठ विभागीय अधिकारीगण मौजूद रहे।

पोषण सुदृढ़ीकरण की दिशा में कदम: न्यूट्रिशन फ्लो तकनीक पर मंथन

रायपुर न्यूट्रिशन फ्लो तकनीक को बढ़ावा देने विशेष बैठक आयोजित वन मंत्री  केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा न्यूट्रिशन फ्लो तकनीक (NFT) के प्रभावी उपयोग और भविष्य की रणनीति तय करने के लिए एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का उद्देश्य नर्सरियों में पौधों के उत्पादन, प्रबंधन और वन रोपण कार्यों में आधुनिक तकनीक अपनाकर गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाना था।         बैठक में विशेषज्ञों ने बताया कि न्यूट्रिशन फ्लो तकनीक के माध्यम से पौधों को संतुलित पोषक तत्व नियंत्रित तरीके से दिए जा सकते हैं। इससे कम पानी में अधिक उत्पादन संभव होता है और संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इस तकनीक से नियंत्रित वातावरण में स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार किए जा सकते हैं। विशेषज्ञों ने इसके तकनीकी पहलुओं, लाभ, व्यवहारिक उपयोग और संभावित चुनौतियों पर विस्तृत जानकारी दी।         अधिकारियों ने निर्णय लिया कि वन विकास निगम की नर्सरियों में इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके लिए स्पष्ट कार्ययोजना और दीर्घकालिक रोडमैप तैयार किया जाएगा। बैठक में यह भी सहमति बनी कि कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, उनकी तकनीकी क्षमता विकसित की जाएगी और पहले चरण में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे।         छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम की यह पहल वन क्षेत्र में  नवाचार, सतत विकास और आधुनिक कृषि-वानिकी तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।