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पटना जू में बर्ड फ्लू रोकने फुट वॉश और किया जा रहा सैनिटेशन

पटना. पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान (पटना जू) में बर्ड फ्लू पर रोकथाम लगाने के लिए जू प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट है. पटना जू के पक्षी घर में दुनिया के अलग-अलग कोने से आए अनोखे पक्षियों के लिए खास व्यवस्था की गई है. बर्ड फ्लू से बचाव के लिए 24 घंटे केयर टेकर की तैनाती की गई है. ताकि बर्ड एवियरी की हर एक एक्टिविटी पर विशेष नजर रखी जा सके. इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए संजय गांधी जैविक उद्यान के निदेशक हेमंत पाटिल ने बताया कि जू में घूमने आने वाले सभी लोगों के लिए गेट पर ही पोटाशियम परमैगनेट से फूट वॉश करवाया जा रहा है. ताकि किसी तरह के संक्रमण का खतरा नहीं हो. पटना में की गई है यह व्यवस्था जानकारी के मुताबिक, पटना जू के रेंज ऑफिसर अरविंद वर्मा ने कहा कि हर रोज नियमित तौर पर पूरे उद्यान को कोर्सोलिन और वीरकॉन्ड पदार्थ से सैनिटेशन किया जा रहा है. ताकि बर्ड फ्लू जैसी बीमारी पक्षियों को छू भी न सकें. इसके अलावा बर्ड ड्रॉपिंग से बचाने के लिए खास इंतजाम किया गया है. दो शेरनियों को लाया गया पटना जू हाल ही में राजगीर जू सफारी से दो मादा शेरनियों को लाया गया है. साथ ही पटना जू से एक मादा शेरनी पार्वती को राजगीर जू सफारी नालंदा भेजा गया है. जू प्रशासन के अनुसार, दोनों शेरनियों को फिलहाल 30 दिनों के लिए क्वारंटाइन में रखा गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रांसफर के दौरान जानवर अक्सर तनाव (स्ट्रेस) में आ जाते हैं, इसलिए उन्हें शांत वातावरण में रखना और यहां की जलवायु के अनुकूल ढालना आवश्यक है. क्वारंटाइन की अवधि समाप्त होने के बाद ही इन्हें आम पर्यटकों के दीदार के लिए बाड़े में छोड़ा जाएगा.

छत्तीसगढ़ का शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय अद्वितीय

रायपुर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने नवा रायपुर में बने देश का पहला डिजिटल संग्रहालय का किया अवलोकन देश के प्रत्येक व्यक्ति को जनजातीय इतिहास को जानना चाहिए: चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति  सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति  सूर्यकांत ने आज राजधानी नवा रायपुर के आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में बने देश के पहले डिजिटल संग्रहालय का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का यह जनजातीय संग्रहालय अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को जनजातीय इतिहास और संस्कृति से वाकिफ होना चाहिए।  चीफ जस्टिस ने छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के अंदोलनों और शौर्य गाथाओं पर संग्रहालय में बने प्रत्येक गैलरी को निकट से देखा। उन्होंने कहा कि इस संग्रहालय में जनजातीय आंदोलनों की स्मृतियां लोगों को शोषण एवं अन्याय के खिलाफ एक जुट होने और उसका प्रतिकार करने के लिए प्रेरित करेंगी।  आदिमजाति विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणी बोरा ने जनजातीय संग्रहालय पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस  सूर्यकांत, जस्टिस  पी.एस.नरसिम्हा, जस्टिस  प्रशांत कुमार और हाईकोर्ट बिलासपुर के चीफ जस्टिस  रमेश सिन्हा, राजस्थान के चीफ जस्टिस  कल्पथी राजेंद्रन राम सहित अन्य न्यायाधीश गण का बीरनमाला से आत्मीय स्वागत करने के साथ ही उन्हें स्मृति स्वरूप जनजातीय जीवन पर आधारित भित्ती चित्र भेंट किया।  प्रमुख सचिव  बोरा ने जनजातीय संग्रहालय के अवलोकन के दौरान चीफ जस्टिस  सूर्यकांत सहित अन्य न्यायधीश गणों को जनजातीय विद्रोहों की पृष्ठिभूमि और जनजातीय नायकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।  बोरा ने संग्रहालय के अलग-अलग गैलरियों में प्रदर्शित विद्रोहों को साल, साजा और महुआ के प्रतिकात्मक वृक्ष के पत्तों के जरिये समझाने का प्रयास किया गया है। संग्रहालय में बने यह वृक्ष उसी तरह से है जिस तरह से मोशन फिल्मों में एक वृद्ध व्यक्ति फिल्म की कहानी बताते है।  चीफ जस्टिस  सूर्यकांत ने जनजातीय संग्रहालय में प्रदर्शित भूमकाल विद्रोह के बारे में जानकर काफी प्रभावित हुए। यह विद्रोह बस्तर क्षेत्र के चित्रकोट के आस-पास वर्ष 1910 में हुआ था। यह विद्रोह 20 वर्षीय जननायक गुंडाधुर के नेतृत्व में, औपनिवेशिक वन नीतियों, जमींदारों के शोषण और बाहरी हस्तक्षेप के विरूद्ध था, जिसमें आदिवासियों ने पारंपरिक हथियारों से अंग्रेजों के खिलाफ किया था। चीफ जस्टिस ने संग्रहालय में शहीद वीर नारायण सिंह की तलवार सहित अन्य जनजातीय नायकों द्वारा विद्रोह के दौरान उपयोग में लाए गए अस्त्र-शस्त्र का भी अवलोकन किया।  चीफ जस्टिस ने गैलरी में स्थापित मां दंतेश्वरी का प्रतिकात्मक डिजिटल मंदिर से काफी प्रभावित हुए उन्होंने दो बार घंटी बजाकर मां दंतेश्वरी के दर्शन किया। उन्होंने आगामी समय बस्तर (दंतेवाड़ा) जाकर मां दंतेश्वरी की साक्षात दर्शन करने की इच्छा जाहिर की।  उल्लेखीनय है कि छत्तीसगढ़ राज्योत्सव रजत जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा 01 नवबंर 2025 को इस भव्य डिजिटल संग्रहालय को लोगों को समर्पित किया था। तब से आगुन्तकों के लिए यह संग्रहालय आर्कषण एवं उत्साह का केंद्र बना हुआ है। जनसमुदाय में इस संग्रहालय के प्रति आकर्षण और लोकप्रियता को  देखते हुए इसके द्वितीय चरण के विस्तार की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। गौरतलब है कि आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणी के मार्गदर्शन में जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित म्यूजियम तथा सहित वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी म्यूजियम का निर्माण तेजी के साथ पूरा हुआ है। मुख्य मंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर निर्माण से उद्घाटन तक विभाग के अधिकारी-कर्मचारी  बोरा के नेतृत्व में बारीकी से एक-एक पहलुओं को परखा तब जाकर संग्रहालय का बुनियाद बनकर तैयार हुआ है। संग्रहालय का धरातल में आने से नई पीढ़ियों को अपने पुरखों की वीरता और साहस का याद दिलाता रहेगा। यह न केवल जनजातीय वर्गो के बल्कि सभी लोगों के प्रेरणापद है। 

मौत से मुकाबला… 27 दिन बाद नन्हीं जान ने ली नई सांस

रायपुर 27 दिनों तक चिकित्सकों की देखभाल से नन्हीं जान को मिला नया जीवन मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के दूरदर्शी विजन के अनुरूप प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार हो रहा है, जिससे अब जिला मुख्यालयों पर ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो रहे हैं। इसी का जीवंत उदाहरण जिला अस्पताल कोंडागांव की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) में देखने को मिला, जहां एक गंभीर नवजात शिशु को नया जीवन मिला है। कलेक्टर मती नुपूर राशि पन्ना के सतत निर्देशन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर. के. चतुर्वेदी के मार्गदर्शन तथा सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. प्रेमलाल मंडावी के नेतृत्व में जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सशक्त किया जा रहा है। आवश्यक संसाधनों, जीवन रक्षक उपकरणों एवं दवाइयों की उपलब्धता तथा नियमित मॉनिटरिंग के कारण आज एसएनसीयू दूरस्थ अंचलों के लिए आशा की किरण बन चुकी है। ग्राम राकसबेड़ा, विकासखंड माकड़ी निवासी बो सुखदई मरकाम एवं चैतराम मरकाम के नवजात शिशु का जन्म 18 दिसंबर 2025 को शाम 5:28 बजे हुआ। जन्म के तुरंत बाद शिशु की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई। 20 दिसंबर 2025 को शिशु को एसएनसीयू में भर्ती किया गया। जन्म के समय शिशु का वजन 2.70 किलोग्राम था तथा वह बर्थ एस्फिक्सिया, लगातार दौरे और संक्रमण जैसी जटिल समस्याओं से जूझ रहा था। गर्भावस्था के दौरान माता में गंभीर ओलिगोहाइड्राम्नियोस की स्थिति भी पाई गई थी। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रुद्र कश्यप, डॉ. राजेश बघेल एवं डॉ. परोमिता सूत्रधार सहित एसएनसीयू की टीम ने शिशु का तत्काल उपचार प्रारंभ किया। प्रारंभिक दिनों में ऑक्सीजन सपोर्ट एवं एंटीबायोटिक दिए गए, परंतु अपेक्षित सुधार न होने पर पांचवें दिन शिशु को मैकेनिकल वेंटिलेशन पर रखा गया, जहां 12 दिनों तक गहन निगरानी में उपचार जारी रहा। उपचार के दौरान शिशु में सेप्सिस एवं गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग जैसी जटिलताओं की पहचान हुई। चिकित्सकीय टीम ने तत्परता से उच्च श्रेणी के एंटीबायोटिक तथा आवश्यकतानुसार फ्लुकोनाजोल प्रदान किया। बार-बार आने वाले दौरों को नियंत्रित करने के लिए फेनोबार्बिटोन/फेनाइटोइन दवाएं दी गईं। चिकित्सकों की विशेषज्ञता, संवेदनशीलता और सतत निगरानी ने इस नन्हीं जान को सुरक्षित रखा। लगातार 18 दिनों के गहन उपचार के बाद शिशु की स्थिति में सुधार होने लगा। स्थिर होने पर 19वें दिन से 10 दिनों तक कंगारू मदर केयर (केएमसी) प्रारंभ की गई, जिससे शिशु के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ। लगभग 27 दिनों के अथक प्रयासों के पश्चात शिशु को पूर्णतः स्थिर अवस्था में छुट्टी प्रदान की गई। प्रदेश सरकार की प्राथमिकता के अनुरूप अब जिला स्तर पर ही उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं, जिससे दूरस्थ अंचलों के नागरिकों को महानगरों की ओर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही।   कलेक्टर द्वारा जिला अस्पताल के एसएनसीयू की व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए समय समय पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं और सतत मॉनिटरिंग भी की जा रही है। उक्त प्रकरण जिला अस्पताल के इकाई की नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल और सेवाओं एवं टीमवर्क का उदाहरण है।

JPSC उम्मीदवारों के लिए खुशखबरी: विधानसभा में CM हेमंत ने घोषित की नई कटऑफ डेट

रांची झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन शनिवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन में जेपीएससी अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देने की घोषणा की जबकि हाथियों के आतंक से मौत पर मुआवजा की राशि बढ़ाने और पीड़ित परिवारों को तुरंत राहत पहुंचाने के लिए एसओपी बनाने का संकेत भी दिया। मुख्यमंत्री सोरेन ने सदन में घोषणा की कि झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (जेपीएससी) के अभ्यर्थियों के लिए कटऑफ डेट अब 1 अगस्त 2022 निर्धारित की गई है। पहले कटऑफ डेट 2026 निर्धारित था। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद हजारों ऐसे अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा, जो पूर्व निर्धारित तिथि के कारण पात्रता से वंचित हो रहे थे। हालांकि, छात्र संगठन अगस्त 2018 को कटऑफ डेट बनाने की मांग कर रहे थे। वहीं झारखंड में हाथियों के हमलों से होने वाली मौत और नुकसान को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लेने के संकेत दिए हैं। सोरेन ने विधानसभा में कांग्रेस विधायक रामेश्वर उरांव के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और एक समेकित एसओपी तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि फिलहाल झारखंड में हाथी के हमले में मौत होने पर 4 लाख रुपये मुआवजा देने का प्रावधान है। हालांकि, अन्य राज्यों में यह राशि 4 लाख से लेकर 50 लाख रुपये तक है। सरकार असम, ओडिशा और अन्य राज्यों की व्यवस्था का अध्ययन कर रही है और जल्द ही मुआवजा राशि बढ़ाने पर निर्णय लिया जाएगा। अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी सोरेन ने कहा कि नई एसओपी में यह प्रावधान किया जाएगा कि घटना के 10 दिनों के भीतर पीड़ित परिवार को मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित हो। इसके साथ ही लकड़बग्घा, तेंदुआ और सांप जैसे अन्य वन्यजीवों के हमलों से होने वाली मौतों को भी एसओपी में शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि खनन क्षेत्रों में अवैध खनन के कारण हाथियों का आतंक बढ़ रहा है, तो उस पर भी सरकार की नजर है और अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले विधायक तिवारी महतो ने मांडू क्षेत्र में भारी मशीनों से अवैध खनन का आरोप लगाया था। इस पर प्रभारी मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि सरकार को इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं है, लेकिन शिकायत मिलने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।  

तेजस्वी यादव का बड़ा बयान—संविधान बचाने के लिए सजग रहना जरूरी, सत्ता पर साधा निशाना

पटना राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने रविवार को सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में बैठे हुए लोग आज बाबा साहेब के संविधान को खत्म करने की साजिश में लगे हुए हैं। उन्होंने लोगों से इसके खिलाफ सजग रहने का आह्वान किया। रविदास चेतना मंच के तत्वावधान में आयोजित संत शिरोमणि गुरु रविदास के राज्य स्तरीय 649वें जयंती समारोह को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि राजद ने हमेशा अपने पुरखों को सम्मान दिया। लालू यादव ने पुरखों के विचारों के आधार पर समाज को आगे बढ़ाने का कार्य किया, जबकि आज भाजपा के लोग समाज में नफरत बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर देश को कमजोर करने वाले कार्यों में लगे होने का आरोप लगाया। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने संत शिरोमणि गुरु रविदास के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तारपूर्वक अपनी बातें रखी। उन्होंने कहा, "डबल इंजन सरकार ने 16 प्रतिशत आरक्षण से शोषितों, वंचितों, पिछड़ों, अति पिछड़ों, दलितों और आदिवासियों को वंचित रखा है। हम लोगों ने जातीय आधारित गणना कराकर 65 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर सभी के साथ न्याय किया, लेकिन महागठबंधन सरकार के बदलते ही डबल इंजन सरकार ने आरक्षण को फंसाने का कार्य किया।" उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, रविदास और कबीर के विचारों को स्कूलों के सिलेबस में शामिल करवाने के लिए सरकार पर दबाव बनाया जाएगा तथा इसके लिए सदन के अंदर और बाहर आवाज बुलंद की जाएगी। राजद नेता ने आगे कहा कि बिहार में गरीबों, शोषितों, ठेला वालों और सब्जी वालों के घरों और दुकानों को उजाड़ा जा रहा है। बिहार में शराबबंदी अभियान को विफल बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार के स्तर से माफियाओं को संरक्षित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत का किया आत्मीय स्वागत

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के छत्तीसगढ़ आगमन पर पुष्प गुच्छ भेंटकर उनका आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने माननीय मुख्य न्यायाधीश को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के प्रतीक स्वरूप राजकीय गमछा, विश्वविख्यात बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक तथा बेल मेटल से निर्मित भगवान श्रीराम एवं माता शबरी की आकर्षक प्रतिकृति भेंट की। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. नरसिम्हा एवं न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा तथा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उल्लेखनीय है कि भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (Hidayatullah National Law University) के दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होने हेतु छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए हैं।  

24 फरवरी को फाल्गुन अष्टमी से शुरू हो रहे होलाष्टक?

होली से पहले आने वाले आठ दिन होलाष्टक के नाम से जाने जाते हैं, जिनका सनातन धर्म में विशेष महत्व है।साल 2026 में पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलाष्टक की शुरुआत 24 फरवरी से मानी जा रही है। यह अवधि होलिका दहन यानी फाल्गुन पूर्णिमा तक चलती है और इस दौरान मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।मान्यता है कि इन दिनों में नकारात्मक ऊर्जा प्रबल रहती है, इसलिए नई शुरुआत टाल दी जाती है।होलाष्टक का संबंध भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा से भी जुड़ा है, जो अटूट भक्ति और आस्था का संदेश देती है। होलाष्टक 2026 कब से हो रहे हैं आरंभ? वैदिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 24 फरवरी सुबह 7 बजकर 1 मिनट से होगी और यह तिथि 25 फरवरी शाम 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। चूंकि होलाष्टक का आरंभ अष्टमी तिथि से माना जाता है, इसलिए इस वर्ष होलाष्टक 24 फरवरी 2026 से शुरू होंगे। क्या है होलाष्टक? होलाष्टक का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। पौराणिक कथा के अनुसार राक्षसराज हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानता था और अपने पुत्र प्रह्लाद की भगवान विष्णु में अटूट भक्ति से क्रोधित रहता था। उसने प्रह्लाद को आठ दिनों तक अनेक कष्ट दिए। यही आठ दिन होलाष्टक के रूप में माने जाते हैं।मान्यता है कि इन दिनों में वातावरण में उग्र और अस्थिर ऊर्जा रहती है, इसलिए शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। यह समय आत्मचिंतन, साधना और संयम का माना गया है। होलाष्टक में क्या नहीं करें? शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक के दौरान 16 संस्कार जैसे नामकरण, जनेऊ, विवाह, गृह प्रवेश आदि शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। इन दिनों में हवन, यज्ञ या किसी नए कार्य की शुरुआत भी वर्जित मानी गई है।यह भी परंपरा है कि जिन कन्याओं का हाल ही में विवाह हुआ हो, वे इस अवधि में अपने मायके में रहें। साथ ही, किसी अनजान व्यक्ति से खाने-पीने की वस्तु लेने से भी बचना चाहिए। मान्यता है कि इस समय नकारात्मक प्रभाव अधिक सक्रिय रहते हैं। होलाष्टक में क्या करें? नियमित पूजा-पाठ और मंत्र जाप करें। भगवान विष्णु या अपने इष्ट देव का ध्यान करें। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान दें। घर में शांति और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें। श्रद्धा और नियमपूर्वक होलिका दहन की तैयारी करें। होलिका दहन 2026 शुभ मुहूर्त वर्ष 2026 में होलिका दहन 3 मार्च को किया जाएगा। शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 22 मिनट से रात 8 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। यह समय बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है और श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

सीएम धामी ने स्कूल के बच्चों के साथ सुनी पीएम मोदी के मन की बात

देहरादून सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस एपिसोड में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर वैश्विक शिखर सम्मेलन, अंगदान की प्रेरणादायक कहानियां तथा डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी से सावधानी बरतने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में जन प्रतिनिधियों और संस्कृति स्कूल के बच्चों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम के 131वें एपिसोड को सुना। मुख्यमंत्री  ने कहा कि मन की बात कार्यक्रम जन-जन को प्रेरित करने वाला माध्यम है, जो नवाचारों, सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण में योगदान को प्रोत्साहित करता है।  

मानव जीवन में संयम अनिवार्य

मनुष्य दोहरी प्रकृति का प्राणी है। एक पशु प्रवृत्ति है जो अपनी सहज प्रवृत्तियां, आवेगों इच्छाओं एवं स्वचालित प्रेरणाओं के अनुसार जीवन-यापन करती है, दूसरी एक अति जागरूक बौध्दिक नैतिक, सौन्दर्यात्मक, विवेकपूर्ण और गतिशील प्रकृति है। एक ओर ऐसा चिंतन-मनन है जो निम्न प्रकृति का परिशोधन चाहता है तो दूसरी ओर ऐसा संकल्प है जो देवत्व को जीवन में उतारने के लिए हुलसाता है। अच्छे-बुरे चिंतन और कर्म का परिणाम पाना अपने पर निर्भर करता है। व्यक्ति अनुपयुक्त विचारों को छोड़कर तथा विवेक और संयमशीलता को अपनाकर अपनी गतिविधियों में उत्कृष्टता का समावेश कर सकता है। विवेक का अभाव आज व्यक्ति ने अपना वर्तमान और भविष्य अंधकारमय बना रखा है। उसका एक ही कारण है विवेक का अभाव। मकड़ी अपना जाला स्वयं बनाती है, स्वयं ही उसमें फंसती है, परन्तु जब वह स्वतंत्र होना चाहती है तो जाले तो निगलकर स्वतंत्रता का अनुभव करने लगती है। व्यक्ति यह क्यों नहीं समझा पा रहा है कि यह जाल उसके चारों ओर उसका ही निर्मित किया हुआ है और स्वयं ही इससे छूट भी सकता है। कोई भी व्यक्ति साधना, पुरुषार्थ में प्रवृत्त होने पर सिध्द पुरुष, महामानव की स्थिति प्राप्त कर सकता है। मानव जीवन कई जन्मों के पुण्यों का प्रतिफल है। मनुष्य शरीर ही आत्मा का मंदिर है। शरीर में परमात्मा स्वयं ज्योतिस्वरूप में विराजमान हैं। ईश्वर का राजकुमार मनुष्य ही है, पर वह उस पिता को भूला हुआ है। मानव शरीर प्राप्त करने के लिए तो देवता भी लालायित रहते हैं। समस्त भारतीय साहित्य में अंतरात्मा को ब्रह्म कहकर इसके महत्व को प्रतिपादित किया है। दुर्भाग्यवश मनुष्य इस बात को भूल ही गया है। जीवन ही प्रत्यक्ष देखता है। इसकी ही सेवा उपासना सुसंस्कृत और सुदृढ़ बनाकर इसी जीवन में करनी चाहिए। आज व्यक्ति ने असंयमित जीवन अपनाकर अपना सब कुछ खो दिया है। मनुष्य ने नासमझी में सदैव अपनी मानसिक, शारीरिक शक्तियां एवं सम्पदाओं का अनावश्यक रूप से अपव्यय किया है। यदि व्यक्ति चाहे तो संयम अपनाकर परमात्मा के राजकुमार जैसी जीवन जी सकता है। संयमशीलता व कत्र्तव्य परायणता संयमशील होना तथा कत्र्तव्य परायण होना दोनों ही जीवन के अनिवार्य अंग हैं। व्यक्ति अपने आंतरिक अमृत को असंयम द्वारा निरंतर गंवाकर झूठ की भांति रह जाने पर अपने दुर्भाग्य का रोना रोता रहता है। असंयमी व्यक्ति निरंतर पतनोन्मुख होकर किस प्रकार दुर्गति को प्राप्त होता है। यह व्यक्ति पर निर्भर है कि वह किस प्रकार उन्हें नियंत्रित करे। पूर्णरूपेण असंयम को तुरन्त छोड़ना संभव न हो तो भी अपने आप को हटाते अवश्य चलना चाहिए। आज की अपेक्षा कल वह असंयम घटे-बढ़े नहीं। संयम को सरलता के लिए चार भागों में बांटा गया है। 1. इन्द्रिय संयम 2. समय संयम, 3. विचार संयम, 4. साधन (अर्थ) संयम। जीवन देवता के माध्यम से ईश्वर ने मनुष्य को इन्द्रिय शक्ति, समय शक्ति एवं विचार शक्ति की अनुपम सम्पदा प्रदान की है। साधन (अर्थ) शक्ति इन तीनों के संयुक्त प्रयास से पुरुषार्थ द्वारा अर्जित की जा सकती है, जो व्यक्ति इनमें से किसी एक की भी अवहेलना करता है, वही आंसू बहाता है। इन्द्रिय संयम: इन्द्रियों का संयम ही मानव जीवन में सबसे अधिक आवश्यक है। इन्द्रियों पर यदि अंकुश नहीं है तो व्यक्ति का पतन और दुर्गति अवश्य होती है। विशेष रूप से जिव्हा तथा जननेन्द्रिय को वश में करना आवश्यक है। जिव्हा के दो कार्य हैं- एक रसास्वादन करना, दूसरा वार्तालाप करना। ये दोनों ही कार्य महत्वपूर्ण हैं। स्वास्थ्य का नष्ट होना, पारिवारिक कलह तथा झगड़ों का मूल कारण जिव्हा का असंयम होनी ही होता है। वाणी से व्यक्ति किसी को मित्र व शत्रु बना सकता है। कहते हैं तलवार का घाव तो भर जाता है, परन्तु कटु वाणी का घाव जीवन भर नहीं भरता। कटु वाणी का घाव जीवन भर नहीं भरता। कटु वचन असहनीय होते हैं। समय संयम: समय के संयम से ही मनुष्य महत्वपूर्ण सुखी जीवन व्यतीत कर सकता है। इसमें थोड़ी-सी शिथिलता भी व्यक्ति को प्रमादी बना डालती है। जीवन में सार्थकता इसी में है कि जीवन का एक क्षण भी व्यर्थ न जाए। विचार संयम: व्यक्ति विचारों को ही कार्यरूप में परिणित करता है। जो कुछ व्यक्ति सोचता है वैसा ही करता है और वैसी ही बन जाता है। विचारों की अस्वच्छता से उत्तेजना, असहिष्णुता, निष्ठुरता की पैशाचिक प्रवृत्तियां पनपती हैं, उन्हीं के कारण मनुष्य नर पिशाच तक बन जाता है। विचारों को संयमित करके व्यक्ति लौकिक और आंतरिक जगत में आनन्द और लाभ ले सकता है। विचारों के असंयम से ही मन, समय एवं धन का अपव्यय आरम्भ होता है। साधन (अर्थ) संयम: भौतिक जगत हो चाहे आत्मिक किसी भी क्षेत्र में मनुष्य को अपव्यय की छूट नहीं है। धन की सार्थकता नेकी की कमाई में है और दूसरों के हित में अपने साधन लगाने में है। धन का अपव्यय या दुरुपयोग करना लक्ष्मी का साक्षात् अपमान है। अत्यधिक संचय अपव्यय सिखाता है। इसी से आडम्बर युक्त प्रदर्शन, फैशनपरस्ती, विवाहों में अनावश्यक व्यय किया जाता है। जुआ, मदिरा जैसे व्यसन घरों में पनपते हैं। कत्र्तव्य परायणता: उच्च उद्देश्यों जुड़े कत्र्तव्य पालन का नाम ही कर्मयोग है। मनुष्य और पशु में ईश्वर ने यही अंतर किया कि कत्र्तव्य और्र अकत्तव्य में भेद करने की क्षमता मनुष्य को दी है पशु को नहीं, परन्तु अभागा मनुष्य अपने शरीर को निरोगी, मन संतुलित और चरित्र को उज्ज्वल रखने का दायित्व भी ठीक से नहीं निभा पाता। दुष्प्रवृत्तियों पर नियंत्रण संयमित और कत्र्तव्यपरायणता जीवन सुलभ और आनन्ददायक भी है। कत्र्तव्य पालन से पहले व्यक्ति को संयमी बनना पड़ता है। असंयमित जीवन-यापन करने वाले तिरस्कार और भर्त्सना के पात्र बनते हैं। कोई-कोई असफल होने पर ही श्रध्दा के पात्र होते हैं। केवल संयमशीलता एवं कत्र्तव्यपरायणता उन्हें यह स्थान दिलाती हैं। लक्ष्मीबाई, तात्याटोपे, शहीद भगत सिंह की जीवन गाथाएं इसके उदाहरण हैं। इसमें ऐसा कोई कारण नहीं कि मनुष्य अपनी दुष्प्रवृत्तियों पर नियंत्रण न कर सके। आईए, हम भी संयमशीलता एवं कत्र्तव्यपरायणता का स्वयं निर्वाह कर दूसरों को भी इस राजमार्ग पर चलने की सीख देकर मानव जीवन को सार्थक करें। यदि हमें अपनी और अपने समाज की आरोग्यता प्रिय है, यदि हम दीर्घजीवी होना चाहते हैं और अपने बच्चों को अकाल मृत्यु से ग्रस्त होने देना नहीं चाहते तो हमें संयम की प्रतिष्ठा करनी होगी। अपने निज … Read more

शिक्षक की क्रूरता का मामला: 7वीं के छात्र को 200 बार उठक-बैठक की सजा, स्वास्थ्य गंभीर

पश्चिम चंपारण बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से शर्मनाक और अमानवीय घटना सामने आई है, जहां एक शिक्षक ने होमवर्क न पूरा करने की सजा के रूप में 7वीं कक्षा के एक छात्र से 200 बार उठक-बैठक लगवाई, जिसके कारण छात्र की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई। पीड़ित को आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां उसका इलाज चल रहा है। सजा के दौरान ही बेहोश हुआ छात्र दरअसल, मामला पश्चिम चंपारण जिले के बगहा-2 प्रखंड स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालय से जुड़ा है। सहपाठी छात्रों के अनुसार, पीड़ित छात्र ने अपना होमवर्क पूरा नहीं किया था। इससे नाराज शिक्षक ने उसे दंड देते हुए 200 बार उठक-बैठक करने का निर्देश दिया। शारीरिक रूप से इतनी अधिक मेहनत के कारण छात्र उठक-बैठक करते हुए ही बेहोश होकर गिर पड़ा। घटना के बाद विद्यालय प्रबंधन ने उसे पहले स्थानीय स्तर पर दिखाया, लेकिन हालत में सुधार न होने पर उसे सेमरा रेफरल अस्पताल भेजा गया। वहां से भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे अनुमंडलीय अस्पताल, बगहा रेफर कर दिया गया। क्या कहते हैं चिकित्सक? अनुमंडलीय अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विजय कुमार ने बताया कि अधिक शारीरिक परिश्रम और दबाव के कारण छात्र के जांघों और मांसपेशियों में गंभीर जकड़न आ गई है। उन्होंने बताया कि मांसपेशियों में अत्यधिक खिंचाव के कारण ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हुआ है, जिससे बच्चा फिलहाल अपने पैरों पर खड़ा होने में असमर्थ है। हालांकि, खतरे की कोई बात नहीं है और उचित उपचार से वह एक-दो दिनों में सामान्य हो जाएगा। परिजनों का फूटा गुस्सा इस घटना से छात्र के अभिभावक बेहद आक्रोशित हैं। परिजनों ने स्कूल प्रशासन पर लापरवाही और शिक्षक द्वारा बच्चों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय शिकायत करने और संबंधित शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।