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वर्ल्ड कप सुपर-8 में वेस्टइंडीज का जलवा, जिम्बाब्वे को करारी शिकस्त

नई दिल्ली आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप का 44वां मैच सोमवार को जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के बीच खेला गया. इस मैच में वेस्टइंडीज को 107 रनों से जीत मिली है. इस मुकाबले में टॉस जीतकर जिम्बाब्वे ने पहले गेंदबाजी का फैसला लिया था. वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने तूफानी बैटिंग की और 254 रन ठोक डाले. इसके जवाब में उतरी जिम्बाब्वे की टीम महज 147 रन ही बना सकी और 18वें ओवर में ऑलआउट हो गई. वेस्टइंडीज ने इस विश्वकप का सबसे बड़ा स्कोर बनाया था. ऐसी रही जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी वेस्टइंडीज ने तूफानी बल्लेबाजी के बाद गेंदबाजी में भी कहर बरपाया. 255 के जवाब में उतरी जिम्बाब्वे की शुरुआत ही बेहद खराब रही. दूसरे ओवर में टीम को पहला झटका लगा. और इसके बाद विकेटों का पतन चालू हो गया. सिकंदर रजा के 27 और मायर्स के 28 रनों के अलावा कोई भी बल्लेबाज लय में नहीं दिखा. आलम ये रहा कि जिम्बाब्वे की टीम महज 147 के स्कोर पर ढेर हो गई. वेस्टइंडीज की ओर से गुडाकेश मोती सबसे सफल गेंदबाज रहे. जिन्होंने 4 ओवर में केवल 28 रन देकर 4 विकेट झटक लिए. अकील ने भी शानदार गेंदबाजी की. ऐसे रही वेस्टइंडीज की बैटिंग पहले बल्लेबाजी के लिए उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत अच्छी नहीं रही. तीसरे ही ओवर में ब्रेंडन किंग अपना विकेट गंवा बैठे. उनके बल्ले से केवल 9 रन आए. लेकिन इसके बाद हेटमायर और शाई होप ने अच्छी बल्लेबाजी की. लेकिन छठे ओवर में विंडीज को दूसरा झटका लगा जब शाई होप 14 रन बनाकर आउट हो गए. लेकिन इसके बाद हेटमायर ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की. उन्होंने केवल 19 गेंद में फिफ्टी जड़ दी. 9वें ओवर में विंडीज का स्कोर 100 के पार चला गया. इसके बाद पॉवेल ने भी 29 गेंद में फिफ्टी जड़ दी. दोनों ओर से ताबड़तोड़ बल्लेबाजी हुई.  आखिरकार 15वें ओवर में जिम्बाब्वे को तीसरी सफलता मिली. जब हेटमायर 34 गेंद में 85 रनों की तूफानी पारी खेलकर आउट हुए. हेटमायर ने 7 चौके और 7 छक्के जड़े. जब उनका विकेट गिरा तो विंडीज का स्कोर 176 रन था. 17वें ओवर में पॉवेल भी अपना विकेट गंवा बैठ. इसके बाद रदरफोर्ड ने तूफानी बल्लेबाजी की. इसके दम पर वेस्टइंडीज ने 20 ओवर में 6 विकेट खोकर 254 रन बना डाले. जिम्बाब्वे (प्लेइंग इलेवन): ब्रायन बेनेट, तादिवानाशे मारुमानी, रयान बर्ल, सिकंदर रजा, ताशिंगा मुसेकिवा, टोनी मुनयोंगा, डायोन मायर्स, ब्रैड इवांस, ग्रीम क्रेमर, रिचर्ड नगारवा, ब्लेसिंग मुजरबानी वेस्टइंडीज (प्लेइंग इलेवन): ब्रैंडन किंग, शाई होप, शिमरोन हेटमायर, रोवमैन पॉवेल, शेरफेन रदरफोर्ड, रोमारियो शेफर्ड, जेसन होल्डर, मैथ्यू फोर्डे, अकील होसेन, गुडाकेश मोटी, शमर जोसेफ.

प्रकृति की गोद में रोमांच — बारनवापारा अभयारण्य की अनोखी दुनिया

रायपुर, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 100 किलोमीटर दूर महासमुंद जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक आकर्षक पर्यटन स्थल है। लगभग 245 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभ्यारण्य साल और सागौन के घने जंगलों और समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहां का शांत वातावरण, हरियाली और वन्यजीवों की प्राकृतिक गतिविधियां पर्यटकों को एक अलग ही दुनिया का अनुभव कराती है। बारनवापारा में चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सूअर, चौसिंगा, भालू तथा कभी-कभी तेंदुए की झलक भी देखने को मिल जाती है। इसके अलावा विभिन्न प्रजातियों के पक्षी यहां के वातावरण को और जीवंत बनाते हैं। वन विभाग द्वारा संचालित जीप सफारी पर्यटकों को जंगल के भीतर सुरक्षित भ्रमण का अवसर देती है। सुबह और शाम का समय वन्यजीवों को देखने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। यह अभयारण्य सड़क, रेल और हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। निकटतम हवाई अड्डा रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट है। रेल यात्रियों के लिए रायपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन सबसे सुविधाजनक स्टेशन है। रायपुर, महासमुंद और बलौदाबाजार से नियमित बस एवं टैक्सी सेवाएं उपलब्ध रहती हैं। निजी वाहन से पहुंचना अधिक सुविधाजनक रहता है। अभयारण्य में प्रवेश शुल्क और सफारी शुल्क निर्धारित हैं। यहां पार्किंग, गाइड, वॉच टॉवर, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे सफारी के लिए अग्रिम बुकिंग कराएं और प्लास्टिक का उपयोग न करें। बारनवापारा की यात्रा को और अधिक सुखद बनाने के लिए पर्यटन मंडल द्वारा संचालित मोहदा रिसोर्ट विशेष आकर्षण का केंद्र है। यह रिसोर्ट प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित है और यहां आधुनिक सुविधाओं से युक्त कमरे, रेस्टोरेंट, बच्चों के खेलने की जगह तथा हरियाली से घिरा शांत परिसर उपलब्ध है। परिवार और समूह में आने वाले पर्यटकों के लिए यह ठहरने का एक उत्कृष्ट विकल्प है। यहां स्थानीय व्यंजनों का स्वाद भी लिया जा सकता है। जंगल सफारी और मोहदा रिसोर्ट की बुकिंग वनविभाग और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की साइट से की जा सकती है। बारनवापारा के समीप स्थित तुरतुरिया भी पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। यह स्थान अपने प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहां प्राचीन अवशेष, शांत वन क्षेत्र और जलधाराएं पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। तुरतुरिया को महर्षि वाल्मीकि के आश्रम से जुड़ी मान्यता के कारण धार्मिक और पौराणिक महत्व भी प्राप्त है। यहां पिकनिक और प्रकृति अवलोकन के लिए उपयुक्त वातावरण मिलता है। लोक मान्यता है कि माता सीता ने वनवास के दौरान यहीं आश्रय लिया था और लव-कुश का जन्म भी इसी क्षेत्र में हुआ। इस कारण यह स्थल धार्मिक आस्था का केंद्र है। यह क्षेत्र घने जंगलों, पहाड़ियों और शांत वातावरण से घिरा हुआ है। यहां बहने वाली छोटी जलधाराएं और प्राकृतिक झरने इसकी खूबसूरती को और बढ़ाते हैं। प्रकृति प्रेमियों और पिकनिक मनाने वालों के लिए यह आकर्षक स्थान है। तुरतुरिया में प्राचीन मंदिरों और संरचनाओं के अवशेष मिले हैं, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को दर्शाते हैं। पुरातात्विक दृष्टि से भी यह स्थान महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां प्राकृतिक गरम जल कुंड भी पाए जाते हैं, जिनके बारे में स्थानीय मान्यता है कि इनका जल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। यही “तुर-तुर” ध्वनि से निकले नाम की एक मान्यता भी बताई जाती है। अभयारण्य से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित सिरपुर ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। प्राचीन मंदिर, बौद्ध विहार और पुरातात्विक अवशेष यहां के प्रमुख आकर्षण हैं, जो इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। बारनवापारा घूमने का सर्वाेत्तम समय अक्टूबर से जून तक माना जाता है। वर्षा ऋतु में हरियाली अपने चरम पर होती है, हालांकि कभी-कभी सफारी सेवाएं सीमित हो सकती हैं। यात्रा के दौरान हल्के रंग के वस्त्र पहनना, दूरबीन और कैमरा साथ रखना तथा वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना आवश्यक है। बारनवापारा अभयारण्य, सिरपुर और तुरतुरिया मिलकर एक ऐसा पर्यटन परिपथ तैयार करते हैं, जहां प्रकृति, रोमांच, इतिहास और आरामदायक आवास की सुविधाएं एक साथ मिलती हैं। यदि आप सप्ताहांत में सुकून भरी और यादगार यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यह क्षेत्र आपके लिए एक आदर्श गंतव्य सिद्ध हो सकता है।

पुतिन का बड़ा सैन्य संदेश: Su-34 बना दुनिया का पहला फाइटर जेट जो रूस से अमेरिका तक कर सकता है हमला

मॉस्को रूस दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिनकी ताकतवर फाइटर जेट बनाने में महारत मानी जाती है। लड़ाकू विमानों को लेकर रूस की अमेरिका और पश्चिम के दूसरे देशों से प्रतिद्वंद्विता रही है। रूस का ऐसा ही लड़ाकू विमान Su-34 है, जो अमेरिका जैसे देशों का भी ध्यान खींचता रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी हवा में देर तक रहने की क्षमता और बड़ा फ्यूल टैंक है। ये एक ऐसा विमान है, जो रूस से अमेरिका तक उड़ान भर सकता है। मिलिट्री वॉच मैगजीन के मुताबिक, रूसी Su-34 स्ट्राइक फाइटर दुनिया में कहीं भी सबसे लंबी ऑपरेशनल रेंज वाला टैक्टिकल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है। इसकी एंड्योरेंस (हवा में रहने की क्षमता) कई तरह के स्ट्रेटेजिक बॉम्बर्स के बराबर है। यह लंबे समय तक घूमने से लेकर डीप पेनेट्रेशन मिशन जरूरतों के लिए ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी देता है। अलग से फ्यूल टैंक की नहीं होती जरूरत पश्चिमी के फाइटर्स के उलट रूसी फाइटर्स को एक्सटर्नल फ्यूल टैंक ले जाते बहुत कम देखा जाता है क्योंकि उनकी लंबी रेंज इंटरनल फ्यूल का इस्तेमाल करती है। इससे वे बिना ड्रैग लगाए लंबी दूरी पर असरदार तरीके से काम कर सकते हैं। ऐसे फ्यूल टैंकों का इस्तेमाल करके उपलब्ध वेपन हार्डपॉइंट की संख्या को कम कर सकते हैं। Su-34 का तीन PTB-3000 3,000 लीटर एक्सटर्नल फ्यूल टैंक के साथ कम देखा जाना बताता है कि एयरक्राफ्ट इंटरकॉन्टिनेंटल रेंज पर ऑपरेशन के लिए कॉन्फिगर होने की एक खास क्षमता है। Su-34 को सोवियत Su-27 एयर सुपीरियोरिटी फाइटर के डेरिवेटिव के तौर पर डेवलप किया गया था, जो 20वीं सदी में सबसे लंबी रेंज वाला फाइटर टाइप था। Su-34 की अमेरिका तक रेंज रूस के Su-34 फाइटर Su-27 से 50 प्रतिशत ज्यादा भारी है। इसका बड़ा साइज ज्यादा फ्यूल एफिशिएंट AL-31FM2 इंजन का इंटीग्रेशन और रेंज को ज्यादा आसान बनाता है। Su-27 की इंटरनल फ्यूल पर मैक्सिमम फेरी रेंज 4,000 किलोमीटर थी। Su-34 की रेंज 4,800-5,000 किलोमीटर है। 5000 की यह क्षमता और भी बढ़ सकती है। इंटरकॉन्टिनेंटल रेंज को 5,500 किलोमीटर से ज्यादा रेंज माना जाता है। इससे Su-34 इस बड़े माइलस्टोन के करीब पहुंच गया। तीन 3,000 लीटर के ड्रॉप टैंक ले जाने पर Su-34 की फेरी रेंज को टैंकों के वजन और ड्रैग को ध्यान में रखते हुए 8,000 किलोमीटर बढ़ाया जा सकता है। इससे Su-34 मॉस्को से वाशिंगटन डीसी तक उड़ सकता है। यानी यह विमान रूस से सीधे अमेरिका पहुंचने की क्षमता रखता है। बिना रीफ्यूलिंग के उड़ान Su-34 बिना एरियल रीफ्यूलिंग सपोर्ट के इंटरकॉन्टिनेंटल दूरियों पर उड़ सकता है। एयरक्राफ्ट ऐसी रेंज पर ऑपरेट करते समय कुछ ऑपरेशनल इस्तेमाल भी बनाए रख सकता है। इलेक्ट्रॉनिक, रडार और फोटो रेकी के लिए पॉड्स को इंटीग्रेट करने की जेट की क्षमता इसे बिना हथियार लोड के जरूरी भूमिका निभाने में मदद करती है। चेंगदू एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन के चीनी छठी पीढ़ी के फाइटर के आने से Su-34 दुनिया के सबसे लंबी दूरी के फाइटर के तौर पर अपनी जगह खो सकता है। चीनी जेट दुनिया के सबसे बड़े फाइटर के तौर पर Su-34 से आगे निकल सकता है। इसके बावजूद Su-34 की अहमियत बनी रहेगी क्योंकि इसमें नई मिसाइल टाइप को इंटीग्रेट किया जा रहा है।

₹1.25 करोड़ का GST नोटिस और पहचान की चोरी का खतरा: ऐसे सुरक्षित रखें अपना आधार–पैन

नई दिल्ली आधार और पैन कार्ड का गलत हाथों में पड़ जाना आपके लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है। इसका उदाहरण हाल ही में सामने आया एक फ्रॉड केस है। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में एक मिट्टी के बर्तन बनाने वाले को 1.25 करोड़ का GST नोटिस मिला है। जी हां, 2 रुपये के मिट्टी के कप और मिट्टी की छोटी-मोटी चीजें बेचकर अपना गुजारा चलाने वाले को 1.25 करोड़ रुपये का GST नोटिस आना आम बात नहीं है। यह कुछ और नहीं बल्कि आधार और पैन कार्ड के गलत इसेमाल का नतीजा है। हरचंदपुर इलाके के रहने वाले मोहम्मद सईद का दावा है कि उसने कभी कोई कंपनी या बड़ा बिजनेस नहीं चलाया है और उसे शक है कि उसके नाम पर एक नकली फर्म बनाई गई है और इसके लिए उसके आधार और पैन डिटेल्स का गलत इस्तेमाल किया गया है। मिट्टी के बर्तन बनाने वाले को मिला 1.25 करोड़ का नोटिस 1.25 करोड़ रुपये का गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) नोटिस मिलने के बाद सईद और उनके परिवार ने लोकल अधिकारियों से संपर्क किया। सईद के अनुसार, नोटिस में जिस कंपनी का जिक्र किया गया है, वे उसके बारे में कुछ नहीं जानते हैं। सईद ने कहा, “हम हर दिन कुछ दर्जन मिट्टी के कप और छोटे बर्तन बेचते हैं। हमने कभी सोचा भी नहीं था कि हम करोड़ों का बिजनेस कर पाएंगे। अगर मेरे डॉक्यूमेंट्स का गलत इस्तेमाल हुआ है, तो इसकी सही जांच होनी चाहिए।” किसी को नहीं दिए अपने डॉक्यूमेंट नोटिस के मुताबिक, सईद के नाम पर एक फर्म रजिस्टर्ड है, जिस पर काफी टैक्स देनदारी दिखाई गई है। परिवार का कहना है कि उन्हें सईद से जुड़े किसी भी GST रजिस्ट्रेशन या कमर्शियल एक्टिविटी के बारे में कभी नहीं बताया गया। सईद के अनुसार, उसने कभी किसी को अपने डॉक्यूमेंट्स नहीं दिए और बिजनेस के लिए उनका इस्तेमाल नहीं किया है। होना चाहिए मजूबत KYC वेरिफिकेशन सिस्टम परिवार ने एडमिनिस्ट्रेशन से इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के लिए डिटेल्ड साइबर और फाइनेंशियल जांच करने की अपील की है। इस घटना से एक बार फिर जरूरी डॉक्यूमेंट्स की सुरक्षा और GST रजिस्ट्रेशन की मॉनिटरिंग को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि डिजिटल ट्रांजैक्शन और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जमाने में, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के डॉक्यूमेंट्स का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए ज्यादा सख्त नो योर कस्टमर (KYC) वेरिफिकेशन सिस्टम जरूरी हैं। आधार और पैन का हुआ गलत इस्तेमाल बता दें कि हाल के सालों में, देश भर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां आधार और PAN डिटेल्स का गलत इस्तेमाल कंपनियां बनाने और इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करने के लिए नकली इनवॉइस बनाने के लिए किया गया है। यह भी ऐसा ही कुछ मामला लग रहा है।

पैक्स सिलिका: भारत की भागीदारी से बदला वैश्विक समीकरण, जानें सदस्य देश

नई दिल्ली  भारत शुक्रवार को अमेरिका की अगुवाई वाले ‘पैक्स सिलिका’ अलायंस में औपचारिक रूप से शामिल हो गया। AI इंपैक्ट समिट के दौरान दोनों देशों ने इस पहल से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। दिसंबर 2025 में जब इस अलायंस की औपचारिक घोषणा हुई थी, तब भारत इसका हिस्सा नहीं था। अब इस रणनीतिक गठबंधन में शामिल होकर भारत तकनीक के क्षेत्र में अमेरिका के विश्वसनीय साझेदारों में शामिल हो गया है। इस कदम को AI, सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनिरल्स की सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में भारत-अमेरिका सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। कार्यक्रम में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग और केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित दोनों देशों के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। आइए, जानते हैं, क्‍या है पैक्‍स‍ सलिका और इसका मकसद क्‍या है। क्या है पैक्स सिलिका? पैक्स सिलिका अमेरिकी सरकार का एक प्रमुख रणनीतिक फ्रेमवर्क है। इसके तहत अमेरिका अपने विश्वसनीय साझेदार देशों के साथ तकनीक और औद्योगिक इकोसिस्टम का साझा नेटवर्क विकसित कर रहा है। इसे वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन पर चीन के प्रभुत्व को चुनौती देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। पैक्स सिलिका में कौन-कौन से देश? इसका मुख्य उद्देश्य AI और सेमीकंडक्टर इंडस्‍ट्री के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद ग्‍लोबल सप्लाई चेन तैयार करना है। तकनीकी विकास के लिए आवश्यक क्रिटिकल मिनरल्स की लगातार आपूर्ति इस रणनीति का अहम हिस्सा है। दिसंबर में बने इस समूह में जापान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और इस्राइल सहित कई देश शामिल हैं। अब भारत के औपचारिक रूप से जुड़ने के बाद इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ गई है। क्यों बनाया गया यह गठबंधन यह गठबंधन पूरी चिप निर्माण प्रक्रिया को सुरक्षित करने के लिए बनाया गया है। यानी खदानों से निकलने वाले जरूरी खनिजों से लेकर चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों तक और उन डेटा सेंटर्स तक, जहां अडवांस AI चलाया जाता है- हर स्तर पर सुरक्षा और भरोसेमंद सप्लाई सुनिश्चित करना इसका उद्देश्य है। क्या इससे और गहरे होंगे रिश्ते? भारत ऐसे समय इस पहल में शामिल हुआ है जब हाल के महीनों में भारत-अमेरिका संबंधों में ट्रेड डील और अन्य वैश्विक मुद्दों को लेकर कुछ असहजता देखी गई थी। हालांकि हाल ही में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौते पर सहमति बनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से द्विपक्षीय सहयोग, खासकर इमरजिंग टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में, और गहरा होगा। चीन के दबदबे को संतुलित करने की रणनीति में भारत की भूमिका मजबूत होगी।

भारत-इजरायल संबंधों में नया अध्याय! नेतन्याहू ने PM मोदी की यात्रा को बताया खास और ऐतिहासिक

इजरायल प्रधानमंत्री Narendra Modi 25-26 फरवरी को इजरायल के दौरे पर जा रहे हैं। इस यात्रा से पहले भारत में इजरायल के राजदूत Reuven Azar ने कहा है कि भारत और इजरायल सिर्फ साझेदार नहीं, बल्कि “सच्चे दोस्त” हैं, जो मिलकर भविष्य को आकार दे रहे हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि यह दौरा भारत और इजरायल के “विशेष संबंधों” को और मजबूत करेगा। नेतन्याहू ने कहा कि उनकी और पीएम मोदी की व्यक्तिगत मित्रता भी दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई दे रही है। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी इजरायल की संसद Knesset को संबोधित करेंगे और यरुशलम में एक इनोवेशन कार्यक्रम में भाग लेंगे। दोनों नेता Yad Vashem भी जाएंगे, जो होलोकॉस्ट पीड़ितों की स्मृति में बना आधिकारिक स्मारक है। भारत-इजरायल संबंध पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत हुए हैं। रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और स्टार्टअप इकोसिस्टम में दोनों देश एक-दूसरे के पूरक हैं।यह दौरा न सिर्फ द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देगा, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति में दोनों देशों की सामरिक साझेदारी को भी मजबूत करेगा। राजदूत अजार ने कहा कि जब भारत और इजरायल साथ आते हैं तो वह सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं होती, बल्कि यह विश्वास, तकनीक और साझा चुनौतियों की समझ पर आधारित साझेदारी होती है। राजदूत अजारने बताया कि इस यात्रा के दौरान दोनों देश रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करेंगे। मौजूदा सुरक्षा समझौतों को अपडेट किया जाएगा ताकि संवेदनशील परियोजनाओं पर मिलकर काम किया जा सके। भारत और इजरायल वर्षों से रक्षा क्षेत्र में सहयोग कर रहे हैं। अब बदलती वैश्विक परिस्थितियों और खतरों को देखते हुए दोनों देश नई तकनीकी साझेदारी पर ध्यान देंगे।AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में बड़े समझौते होने की उम्मीद है। दोनों देशों ने हाल ही में द्विपक्षीय निवेश संधि पर हस्ताक्षर किए हैं और इस साल फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में काम हो रहा है। इजरायल चाहता है कि भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां वहां निवेश करें। वित्तीय सहयोग को भी आसान बनाने पर जोर रहेगा।  

‘भारत टैक्सी’ से नई क्रांति: अमित शाह बोले—अब टैक्सी ड्राइवर खुद होंगे मालिक, खत्म होगी बिचौलियों की भूमिका

नई दिल्ली दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की भारत टैक्सी सर्विस से जुड़े ड्राइवरों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। दोनों के बीच हुई इस बैठक का उद्देश्य Central Government Cooperative Models को मजबूत करना है। इसी के साथ शाह ने कहा कि इस नई व्यवस्था में गाड़ी चलाने वाला ड्राइवर महज एक कर्मचारी नहीं, बल्कि खुद मालिक की भूमिका में होगा।   सहकारी मॉडल से बदलेगी ड्राइवरों की किस्मत जानकारी के लिए बता दें कि यह सर्विस 5 फरवरी को लॉन्च की थी। 'भारत टैक्सी' देश का ऐसा पहला ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म है जो Cooperative Principlesपर काम करता है। शाह ने चालकों से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य बिचौलियों को खत्म कर सीधा लाभ उन लोगों तक पहुँचाना है जो जमीन पर पसीना बहाते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मॉडल के तहत होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा सीधे ड्राइवरों की जेब में जाएगा। समस्याओं और सुझावों पर हुई खुली चर्चा कार्यक्रम के दौरान गृहमंत्री ने केवल अपनी बात नहीं रखी, बल्कि ड्राइवरों की चुनौतियों को भी करीब से समझा। उन्होंने 'भारत टैक्सी' के सारथियों से उनकी समस्याओं पर फीडबैक लिया और भविष्य में इस सेवा को और बेहतर बनाने के लिए उनके सुझाव मांगे। शाह ने दोहराया कि सहकारिता क्षेत्र का विस्तार करना प्रधानमंत्री मोदी की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है, ताकि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को आर्थिक आजादी मिल सके।

रंगों और भक्ति का महीना मार्च: होलिका दहन से चैत्र नवरात्र तक छुट्टियों की भरमार

नई दिल्ली साल 2026 का मार्च महीना आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों से सराबोर रहने वाला है। इस महीने में न केवल रंगों का महापर्व होली मनाया जाएगा, बल्कि हिंदू नववर्ष की शुरुआत और चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व भी आएगा। मार्च के पहले ही सप्ताह में होलाष्टक समाप्त होंगे, जिसके बाद शुभ कार्यों की शुरुआत (March 2026 Festivals List) हो जाएगी। होली और चंद्र ग्रहण का संयोग इस वर्ष होलिका दहन 3 मार्च को मनाया जाएगा। विशेष बात यह है कि इसी दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त शाम 06:48 बजे से रात 08:50 बजे तक रहेगा। इसके अगले दिन यानी 4 मार्च को रंगवाली होली खेली जाएगी और इसी दिन से चैत्र माह का प्रारंभ होगा।  8 मार्च को रंग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। इसी के साथ मार्च में छुट्टियों की भी लंबी लिस्ट (March Holidays List) है। इसे जानकर आप अपना धूमने या सेलिब्रेट करने प्लान भी बना सकते हैं।   चैत्र नवरात्रि और घटस्थापना वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि और गुड़ी पड़वा 19 मार्च से शुरू होंगे। कलश स्थापना के लिए दो विशेष मुहूर्त उपलब्ध हैं। पहला सामान्य मुहूर्त सुबह 06:52 से 07:46 तक है, जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 से 12:52 तक रहेगा। नवरात्रि के नौ दिनों के बाद 26 मार्च को राम नवमी का महापर्व धूमधाम से मनाया जाएगा।

घर बैठे एड्रेस अपडेट का नया नियम, एक सेल्फ डिक्लेरेशन से काम पूरा

नई दिल्ली अगर आपके मोबाइल पर बैंक की ओर से KYC अपडेट का मैसेज आया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसका मकसद आपकी बैंकिंग सेवाओं को बिना रुकावट जारी रखना है। KYC यानी Know Your Customer वह प्रक्रिया है, जिसके जरिए बैंक अपने ग्राहकों की पहचान की पुष्टि करते हैं। समय-समय पर इसे अपडेट करना जरूरी होता है, ताकि खाते से जुड़ी जानकारी सही बनी रहे। सिर्फ पता बदला है तो आसान है प्रक्रिया यदि आपकी अन्य जानकारी पहले जैसी ही है और केवल पता बदला है, तो आप सेल्फ डिक्लेरेशन देकर एड्रेस अपडेट करवा सकते हैं। इसके लिए भारी दस्तावेज जमा करने या लंबी लाइन में लगने की जरूरत नहीं पड़ती। घर बैठे भी कर सकते हैं KYC आधार OTP आधारित e-KYC: ऑनलाइन माध्यम से आसानी से पूरा किया जा सकता है। वीडियो KYC: बैंक अधिकारी वीडियो कॉल के जरिए पहचान सत्यापित करते हैं। ब्रांच में दस्तावेज जमा: चाहें तो मान्य दस्तावेज की कॉपी शाखा में भी दे सकते हैं। सावधानी जरूरी KYC के नाम पर किसी अज्ञात लिंक या कॉल पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें। हमेशा बैंक के आधिकारिक माध्यम से ही प्रक्रिया पूरी करें। Reserve Bank of India भी ग्राहकों को सुरक्षित बैंकिंग के प्रति जागरूक करता रहता है। ‘आरबीआई कहता है’ जैसे अभियानों के माध्यम से लोगों को बताया जा रहा है कि सतर्कता और सही जानकारी ही धोखाधड़ी से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है।  

सरसों किसानों की बढ़ी उम्मीदें: भावांतर योजना में शामिल, कम कीमत का नुकसान भरेगी सरकार

भोपाल मध्य प्रदेश में किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब सोयाबीन की तरह ही सरसों पर भावांतर दिया जाएगा। जो पंजीकृत किसान मंडियों में उपज बेचेंगे, उन्हें योजना का लाभ मिलेगा। इतना ही नहीं उड़द पर प्रति किसान प्रति क्विंटल छह सौ रुपये का बोनस भी दिया जाएगा। चना, मसूर और तुअर का प्राइस सपोर्ट स्कीम में उपार्जन करने के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भी भेजा गया है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने यह जानकारी सोमवार को विधानसभा में दी। वर्ष 2026 'कृषक कल्याण वर्ष' घोषित उन्होंने कृषि पर अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। किसान को अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता की तरह उद्यमी बनाने की दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश को खाद्यान्न उत्पादों का हब बनाया जाएगा। सोयाबीन में समर्थन मूल्य का लाभ दिलाने के लिए 6.86 लाख किसानों को 1,492 करोड़ रुपये का भावांतर दिया गया। इस योजना को पूरे देश में सराहा गया। इसे आगे बढ़ाते हुए सरसों में भी लागू किया जा रहा है।   दलहन उत्पादन को प्रोत्साहन और केंद्र को भेजे गए उपार्जन प्रस्ताव अभी मंडी में सरसों का भाव 5,500 से 6,000 के बीच चल रहा है। इसका समर्थन मूल्य 6,200 रुपये है। इसमें भावांतर लागू किए जाने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेज दिया है। प्रदेश में सरसों के क्षेत्र में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उत्पादन 15.71 लाख टन होने का अनुमान है। दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। वैसे भी प्रदेश में बिजली और पानी की कोई कमी नहीं है। ग्रीष्मकालीन मूंग के स्थान पर उड़द को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति क्विंटल छह सौ रुपये बोनस दिया जाएगा। चना, मसूर और तुअर के उपार्जन का प्रस्ताव भी भेजा है। इसमें 6.45 लाख टन चना और एक लाख टन मसूर शामिल है। इसी तरह तुअर भी प्राइस सपोर्ट स्कीम में खरीदा जाएगा। विपक्ष ने उठाए बिजली और गेहूं पंजीयन के मुद्दे इस पर प्रतिपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने कहा कि 12 घंटे बिजली किसानों को मिलनी चाहिए। मक्का खरीदने का प्रस्ताव ही सरकार ने भारत सरकार को नहीं भेजा। गेहूं का पंजीयन सही नहीं हो रहा है। सर्वर डाउन होने की शिकायतें मिल रही हैं। ओलावृष्टि से नुकसान पर सर्वे और मुआवजे का आश्वासन उधर, प्रश्नकाल में ओलावृद्धि से गेहूं, धनिया, अफीम सहित अन्य फसलों के खराब होने का मुद्दा ध्यानाकर्षण के माध्यम से कांग्रेस और भाजपा के विधायकों ने उठाया। सभी ने कहा कि सर्वे ठीक से नहीं हो रहा है। अफीम की फसल नीमच, रतलाम और मंदसौर में खराब हो गई। गुना में धनिया बर्बाद हो गया। गेहूं की फसल खेत में लेट गई है। उपज की गुणवत्ता प्रभावित हो गई। उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। फसल बीमा के लिए किसान परेशान हो रहे हैं। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि सर्वे कराया जा रहा है। कहीं 10 प्रतिशत नुकसान हुआ है तो कहीं 15। सर्वे होने के बाद सही स्थिति सामने आएगी और मापदंड के अनुसार सरकार राहत देगी।