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भोपाल में धर्मांतरण का काला सच: लड़कियों से बार-बार दुष्कर्म, अहमदाबाद-मुंबई कनेक्शन और ‘जन्नत’ का हाथ

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में ‘द केरल स्टोरी’ जैसे एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। आरोप है कि इस रैकेट में दो मुस्लिम बहनें शामिल हैं, जो हिंदू युवतियों को फंसाने के लिए कभी सहेली बन जाती हैं तो कभी ननद और भाभी की भूमिका में आ जाती हैं। दोनों ने प्रेमी के साथ मिलकर कई हिंदू युवतियों का शारीरिक शोषण करवाया है। इस रैकेट के संपर्क में कई हिंदू युवतियों के होने और इनके मोबाइल में कई संदिग्ध वाट्सएप ग्रुप मिले हैं, जिनमें कई युवतियों की फोटो है। ऐसे में पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह युवतियों को नौकरी और हाईप्रोफाइल लाइफ स्टाइल के नाम पर अपने झांसे में लेकर देह व्यापार में धकेलता होगा।  पुलिस ने रैकेट की मास्टरमाइंड अमरीन उर्फ माहिरा, उसके मुस्लिम प्रेमी चंदन यादव और कथित बहन आफरीन को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है। पुलिस इस गिरोह में शामिल तीन अन्य आरोपी बिलाल, यासिर और चानू की तलाश कर रही है। फिलहाल दो युवतियों ने एक साथ मामला दर्ज कराया है, जो मूलतः छत्तीसगढ़ की रहने वाली हैं। इस गिरोह का पर्दाफाश होने के बाद कुछ और युवतियों के सामने आकर शिकायत दर्ज कराए जाने की संभावना हैं।   आरोप है कि यह गिरोह गरीब घर की हिंदू युवतियों को निशाना बनाकर उनसे दोस्ती करता था और नौकरी के नाम पर अपने चंगुल में लेकर हाईप्रोफाइल लाइफस्टाइल का खर्च उठाता था। गरीब घर की युवतियों को जैसे ही हाईप्रोफाइल लाइफस्टाइल का शौक लग जाता, रैकेट उन्हें पब और पार्टियों में ले जाकर बड़े घर के रईसजादों के साथ शारीरिक संबंध बनाने यानी देह व्यापार करने के लिए मजबूर करता था। यह रैकेट कई युवतियों को मुंबई और अहमदाबाद तक सप्लाई कर चुका है।  हिंदू नाम रखकर युवतियों को फंसाते थे बागसेवनिया थाना प्रभारी अमित सोनी ने बताया कि तीन आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। आरोपियों के मोबाइल भी जब्त कर जांच में लिए गए हैं, कुछ और संदिग्धों के नाम सामने आए हैं। सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। जल्दी ही कुछ और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।   पीड़िताओं ने पुलिस को दिए बयान में बताया है कि रैकेट की मास्टरमाइंड अमरीन उर्फ माहिरा का लिव-इन पार्टनर चंदन यादव भी धर्म बदलकर मुस्लिम बन चुका है। उसने हिंदू युवतियों पर विश्वास कायम करने के लिए हिंदू नाम रखा हुआ है।   ब्यूटीशियन को किस तरह फंसाया गया देहव्यापार व धर्मांतरण के दलदल में पहली पीड़िता छत्तीसगढ़ के मुंगेली क्षेत्र की रहने वाली 23 वर्षीय ब्यूटीशियन है। 31 दिसंबर 2024 को शाहपुरा स्थित एक होटल में दोस्त की बर्थडे पार्टी में उसकी मुलाकात आफरीन नाम की युवती से एक हिंदू युवती ने कराई थी। ब्यूटीशियन की उक्त सहेली ने हिंदू युवतियों को मुस्लिम युवक और युवतियों द्वारा बहुत सम्मान और प्यार दिए जाने का झांसा देकर आफरीन से दोस्ती करने को कहा था। जबकि ब्यूटीशियन की उक्त हिंदू युवती खुद धर्म परिवर्तन कर ‘जन्नत’ बन चुकी है और वर्तमान में अमरीन के मुंहबोले भाई की पत्नी बनकर रह रही है। जनवरी 2025 में ब्यूटीशियन और आफरीन सरगना अमरीन उर्फ माहिरा के साथ एक साथ रहने लगीं।  पहली पीड़िता से किसने और कहां-कहां किया दुष्कर्म ब्यूटीशियन के साथ पहली बार चंदन ने अगस्त 2025 में अपनी बहन के नारायण नगर स्थित घर पर दुष्कर्म किया। इसके बाद नवंबर 2025 में अमरीन गांधी नगर क्षेत्र स्थित अब्बास नगर में अपने माता-पिता के घर में ले गई, जहां उसके भाई बिलाल ने नशीला पेय पिलाकर दुष्कर्म किया।  दिसंबर 2025 में अमरीन ने ब्यूटीशियन को निजी काम का हवाला देकर अहमदाबाद ले गई। वहां यासिर नामक युवक ने उससे दुष्कर्म किया। इसके बाद पीड़िता जनवरी 2026 में भोपाल छोड़कर रायपुर में अपने मामा के यहां रहने चली गई। अगस्त 2025 से जनवरी 2026 के बीच चंदन ने ब्यूटीशियन से अमरीन के सागर रॉयल विला स्थित मकान व अन्य स्थानों पर कई बार भोपाल में दुष्कर्म किया है।  दूसरी पीड़िता को अपने घर में रखकर देह व्यापार में धकेला रैकेट की सरगना आमरीन से वर्ष 2024 में दीपावली के समय 35 वर्षीय महिला की एक मॉल में मुलाकात हुई। उक्त महिला अपने दो छोटे-छोटे बच्चों के साथ भोपाल के अशोका गार्डन में रहती थी। पति से तलाक हो चुका है। वह मूलतः छत्तीसगड़ की रहने वाली है। अमरीन ने उक्त महिला को पहले अपने घर में दो माह तक काम पर रखा। इसके बाद होशंगाबाद रोड स्थित सागर रॉयल विला स्थित डुप्लेक्स में रख लिया। इसके बाद उससे चंदन ने दुष्कर्म किया। फिर यासिर और चानू नाम के व्यक्ति अमरीन से मिलने आते और उक्त महिला से दुष्कर्म करते थे। बाद में उसे दूसरे युवकों से संबंध बनाने के लिए भोपाल में भेजा जाने लगा तो वह काम छोड़कर बच्चों के साथ वापस छत्तीसगढ़ चली गई।   तीन आरोपी पकड़े गए, बाकी चल रहे फरार इस मामले में अब तक रैकेट की मास्टरमाइंड अमरीन उर्फ माहिरा, उसकी कभी सहेली तो कभी बहन बताने वाली आफरीन और अमरीन का लिव-इन पार्टनर चंदन यादव गिरफ्तार किए गए हैं। तीनों बागसेवनिया पुलिस की रिमांड पर हैं। अमरीन का भाई बिलाल, मुंहबोला भाई चानू और अहमदाबाद निवासी यासिर फरार हैं। दूसरी पीड़िता से एक-दो अन्य युवकों ने दुष्कर्म किया, उनके नामों का खुलासा नहीं हो सका है। पुलिस ने दो पीड़िताओं की शिकायत पर अब तक छह आरोपियों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया है।  

MP में 2 मार्च से निजी बस ऑपरेटरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, 1.5 लाख यात्रियों को होगा असर

भोपाल  मध्य प्रदेश में नई परिवहन नीति के खिलाफ निजी बस संचालकों ने मोर्चा खोल दिया है। बस ऑपरेटरों ने 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। यह हड़ताल होली के त्यौहार से ठीक दो दिन पहले शुरू होने वाली है, जिससे प्रदेशभर में यात्रियों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। बस एसोसिएशन का विरोध सरकार की नई परिवहन नीति को लेकर है। उन्होंने परमिट प्रक्रिया पर सवाल उठाए है। बस ऑपरेटरों का कहना है कि रूट आवंटन और रिन्यूअल की प्रक्रिया को जटिल और महंगा बनाया गया है।  डीजल की बढ़ती कीमतों के बावजूद किराए में संशोधन का कोई लचीला प्रावधान नहीं है। परमिट नियमों के उल्लंघन पर भारी आर्थिक दंड और परमिट निरस्त करने के सख्त नियम बनाए गए है। ऑपरेटरों का आरोप है कि सरकारी और नगर परिवहन को प्राथमिकता देकर निजी बसों के रूट सीमित किए जा रहे हैं।  बता दें प्रदेश में वर्तमान में लगभग 28,000 बसें संचालित होती हैं, जिनमें ऑल इंडिया परमिट और स्टेज कैरिज बसें शामिल हैं। यदि यह हड़ताल होती है, तो इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। रोजाना सफर करने वाले करीब 1.5 लाख यात्रियों का आवागमन बाधित होगा। इससे ड्राइवरों, कंडक्टरों, मैकेनिकों और बुकिंग एजेंटों सहित हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा। होली के कारण ट्रेनों में पहले से ही भारी वेटिंग है। ऐसे में बसों का बंद होना यात्रियों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। फिलहाल, परिवहन विभाग की ओर से इस चेतावनी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। बस संचालकों ने भोपाल, इंदौर और ग्वालियर सहित कई जिलों में आरटीओ को ज्ञापन सौंपना शुरू कर दिया है।  सरकार प्रदेश की जनता को गुमराह कर रही है सम्मेलन में बस संचालकों ने एकमत होकर कहा कि जब सरकार की अपनी बसें ही नहीं है तो यह सेवा सरकारी कैसे हुई? सरकार प्रदेश की जनता को गुमराह कर रही है। पहले ही जनता का पैसा सरकार सूत्र सेवा बसों के रूप में बर्बाद कर चुकी है। अब फिर से द्वेष और दुर्भावना से जनता और ऑपरेटरों को धोखे में रख निजी कंपनियों को फायदा देने के मकसद से बसों से स्थायी परमिटों पर संचालन कर रहे। बस ऑपरेटर के परमिट सरकार छीनना चाहती है और बस ऑपरेटरों को बेरोजगार करना चाहती है। आंदोलन की चेतावनी हड़ताल की रणनीति तय करने के लिए सागर में संगठन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें रायसेन समेत कई जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में सरकार से नीति पर पुनर्विचार की मांग की गई और चेतावनी दी गई कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा। यदि हड़ताल लंबी खिंचती है तो प्रदेश में दैनिक यात्रियों, छात्रों और व्यापारिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ सकता है। कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे, 2 मार्च से करेंगे हड़ताल सरकार का अड़ियल रवैया देख बस ऑपरेटरों में गहरा रोष है। जिसको लेकर बस ऑपरेटरों ने निर्णय लिया है कि वे अगले एक से दो दिनों में प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखेंगे। मांगें नहीं मानी गई तो 2 मार्च से प्रदेश के सभी बस ऑपरेटर्स अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। इसके लिए शासन जिम्मेदार होगा। बैठक में प्रदेश की सभी यूनियनों ने हड़ताल का समर्थन किया है। क्या है 'मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा योजना'? सरकार अप्रैल 2026 से इस योजना को शुरू करने का लक्ष्य रख रही है। इसके तहत लगभग दो दशक बाद परिवहन सेवा को फिर से सरकारी नियंत्रण में लाने की तैयारी है। सरकार का दावा है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच किफायती, सुरक्षित और समयबद्ध परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। खासकर उन ग्रामीण रूटों पर जहां अभी निजी बसों की कमी है या कनेक्टिविटी खराब है। सरकार खुद बसें नहीं खरीदेगी, बल्कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर काम करेगी। बसों की निगरानी सरकार करेगी, ट्रैकिंग के लिए बनेगा ऐप योजना के तहत बसें निजी ऑपरेटर्स की होंगी, लेकिन उनका नियंत्रण और निगरानी सरकार के पास होगी। बसों की ट्रैकिंग, ई-टिकटिंग और टाइम-टेबल के लिए एक मोबाइल एप और डैशबोर्ड बनाया जाएगा। इस सम्मेलन के दौरान मप्र बस ऑनर्स एसोसिएशन के महामंत्री जय कुमार जैन, बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष संतोष पांडेय, खंडवा जिले से प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुनील आर्य, जिला अध्यक्ष राजीव शर्मा, सिमरन चावला, रूपल आजमानी और सुरेश राउत समेत प्रदेश के अलग-अलग जिलों के बस ऑपरेटर मौजूद थे। अनुबंध व्यवस्था लागू न की जाए बस ऑपरेटर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष कुशल मिश्रा ने प्रदेश सरकार द्वारा जो नई नीति लाई गई है, जिसके तहत प्राइवेट बस वालों से अनुबंध कराया जाएगा. उसी विषय पर आज हमारी पत्रकार वार्ता थी. हमारी 22 तारीख को सागर जिले में यूनियन की बैठक हुई थी, जिसमें यह निर्णय लिया गया है कि आगामी 2 मार्च से प्रदेश में बसों की हड़ताल होगी, क्योंकि कोई भी प्राइवेट बस संचालक अनुबंध नहीं करना चाहता है. हमारी मांग यही है कि यह अनुबंध व्यवस्था लागू न की जाए. यदि सरकार को गाड़ियां चलानी हैं, तो वह अपनी खुद की गाड़ियां चलाए, अपने मार्ग स्वयं तय करे और कंप्यूटर प्रणाली से संचालन करे. इसमें प्राइवेट बस संचालकों को क्यों शामिल किया जा रहा है.

MotoGP India: यूपी सरकार ने मोटोजीपी रेसिंग के लिए किया करार, फिर होगी रफ्तार की रोमांचक जंग

नई दिल्ली    उत्तर प्रदेश में मोटरसाइकिल रेसिंग और मोटरस्पोर्ट के शौकीनों के लिए बड़ी ख़बर है. राज्य में अब एक बार फिर से इंटरनेशनल लेवल की रेसिंग देखने को मिल सकती है. ख़बर है कि, प्रीमियम ऑटोमोटिव और मोटरस्पोर्ट कंसल्टेंसी कंपनी AVW Global ने  स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के साथ एक अहम MoU साइन किया है. इस समझौते का मकसद उत्तर प्रदेश में ग्लोबल लेवल मोटरसाइकिल रेसिंग इकोसिस्टम तैयार करना है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस रणनीतिक समझौते के तहत एबीडब्ल्यू ग्लोबल उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर बड़े अंतरराष्ट्रीय रेसिंग टूर्नामेंट आयोजित कराने में सहयोग करेगी. इनमें दुनिया की मशहूर चैम्पियनशिप मोटोजीपी, एशिया रोड रेसिंग चैंपियनशिप जैसी प्रतियोगिताएं शामिल हैं. इसका मतलब एक बार फिर से नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर पावरफुल मोटरसाइकिलों की रेस आयोजित हो सकती है. स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने कहा कि एवीडब्ल्यू ग्लोबल की मदद से उत्तर प्रदेश मोटरसाइकिल रेसिंग को प्रोफेशनल तरीके से फिर से भारत में लाने की तैयारी कर रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य और देश के लाखों फैंस दोबारा ट्रैक पर इन शानदार बाइक्स को दौड़ते देखना चाहते हैं. उत्तर प्रदेश सरकार मोटरस्पोर्ट और युवाओं के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करना चाहती है. उन्होंने भरोसा जताया कि हाई स्पीड रेसिंग बहुत जल्द राज्य में शुरू होगी. उन्होंने यह भी कहा कि ग्रेटर नोएडा स्थित बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (BIC) जैसी ग्लोबल रेसिंग फेसिलिटी का पूरा उपयोग किया जाएगा. इसके अलावा इस सर्किट के आसपास एक बेहतर और सस्टेनेबल इकोसिस्टम भी तैयार किया जाएगा. ताकि भविष्य में भी इस तरह के बड़े मोटरस्पोर्ट इवेंट का आयोजन आसानी से किया जा सके. टू व्हील्स मोटर रेसिंग के प्रमोशंस डायरेक्टर रॉन हॉग ने कहा कि भारत जैसे बड़े बाजार में एवीडब्ल्यू ग्लोबल के जरिए प्रतिनिधित्व करना खुशी की बात है. उन्होंने उम्मीद जताई कि जुलाई-अगस्त 2026 तक भारत में रेसिंग आयोजित की जा सकती है. वहीं एवीडब्ल्यू ग्लोबल के फाउंडर Karel Abraham ने कहा कि उन्होंने खुद MotoGP में रेसिंग की है और ग्लोबल लेवल की सर्किट चलाने का अनुभव भी उनके पास है.  उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा मोटरसाइकिल बाजार है और यहां वर्ल्ड लेवल रेसिंग होनी चाहिए. उनकी कंपनी पूरे प्रोफेशनल तरीके से फैंस को ध्यान में रखते हुए इस टार्गेट को पूरा करेगी. बयान में कहा गया है कि यह साझेदारी उत्तर प्रदेश सरकार और अंतरराष्ट्रीय मोटरस्पोर्ट एक्सपर्ट के बीच एक साझा प्रयास है. इसका मकसद राज्य में स्पोर्ट को बेहतर ढंग से तैयार करना है.   भारत में MotoGP का इतिहास भारत में MotoGP की एंट्री बड़े जोरशोर के साथ हुई थी. इसके कमर्शियल राइट्स होल्डर डोर्ना स्पोर्ट्स ने शुरुआत में नोएडा की कंपनी फेयरस्ट्रीट स्पोर्ट के साथ 7 साल का समझौता किया था. मकसद साफ था, भारत को रेसिंग की दुनिया में एक बड़ी पहचान दिलाना. साल 2023 में पहली रेस हुई, दुनिया भर से आए मोटोजीपी रेसर्स ने इस भव्य आयोजन में हिस्सा लिया. लेकिन आयोजन के दौरान कई ऑपरेशनल दिक्कतें सामने आईं. तेज गर्मी ने भी रेस को प्रभावित किया. हालांकि ग्रेटर नोएडा का बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट  राइडर्स को काफी पसंद आया. कई राइडर्स ने ट्रैक की तारीफ की और इसे इंटरनेशनल लेवल का बताया. साल 2024 का इंडियन ग्रां प्री बाद में रद्द कर दिया गया और इसे 2025 तक के लिए टाल दिया गया. आधिकारिक वजह “वेदर कंडिशन” बताई गई. लेकिन उस समय आई खबरों में कहा गया कि प्रमोटर फेयरस्ट्रीट स्पोर्ट्स ने डोर्ना स्पोर्ट्स को पूरी होस्टिंग फीस समय पर नहीं दी थी. हालांकि फेयरस्ट्रीट स्पोर्ट्स  ने इन दावों को खारिज किया. कंपनी का कहना था कि डोर्ना स्पोर्ट्स को पहले से जानकारी थी कि आम चुनाव की वजह से पेमेंट में देरी हो सकती है. सरकार की सीधी एंट्री इसके कुछ ही हफ्तों बाद डोर्ना स्पोर्ट्स ने सीधे उत्तर प्रदेश सरकार के साथ 3 साल का नया समझौता कर लिया. इस फैसले के बाद फेयरस्ट्रीट स्पोर्ट्स इस पूरी व्यवस्था से बाहर हो गई. अगस्त 2024 में राज्य सरकार ने नए रेस प्रमोटर की तलाश के लिए टेंडर जारी किया. लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया और सितंबर 2024 में दोबारा जारी किया गया. अब सबकी नजर इस बात पर है कि नए अरेंजमेंट के साथ भारत में मोटोजीपी कितनी मजबूती से वापसी करता है.

भारत में राफेल बनाने के बाद सरकार बेचेगी, समझें डील की शर्तें

बेंगलुरु  भारत में राफेल बनाने की तैयारी तेज हो गई है. फ्रांस के राष्ट्रपति के दौरे के बाद डील को आगे बढ़ाने की कवायद शुरू हो चुकी है. सवाल अब यह उठ रहा है कि अगर राफेल भारत में बनेंगे, तो क्या सरकार इन्हें दूसरे देशों को बेच भी सकेगी? या ये विमान सिर्फ भारतीय वायुसेना के लिए ही होंगे? डील की शर्तें क्या कहती हैं चलिए समझते हैं. राफेल डील में आई तेजी इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे के बाद राफेल डील को लेकर हलचल तेज हुई है. रक्षा मंत्रालय जल्द ही प्रस्ताव को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी के पास भेजने की तैयारी में है. ऐसे में उम्मीद है कि अगले 4 से 6 महीने में समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, रक्षा खरीद प्रक्रिया की टाइमलाइन छोटी करने की कोशिश की जा रही है ताकि लड़ाकू विमान और अन्य हथियार जल्द मिल सकें. अभी विदेशी हथियार खरीदने की प्रक्रिया लंबी और जटिल मानी जाती है.  114 राफेल को भारत में बनाने की मंजूरी मैक्रों के दौरे से पहले रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल विमान देश में बनाने की मंजूरी दी थी. राफेल विमान फ्रांस की कंपनी दासो एविएशन बनाती है. प्रस्ताव है कि दासो किसी भारतीय कंपनी के साथ साझेदारी कर भारत में उत्पादन प्लांट स्थापित करे. इससे तकनीक हस्तांतरण, स्थानीय रोजगार और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा.  क्या भारत इन राफेल को बेच सकेगा? यहीं सबसे अहम सवाल आता है. साफ तौर पर कहा गया है कि ये 114 राफेल भारतीय वायुसेना की जरूरतों के लिए बनाए जा रहे हैं. यानी इनका उद्देश्य निर्यात नहीं, बल्कि देश की रक्षा क्षमता बढ़ाना है. डील की शर्तों के मुताबिक, विमान का उत्पादन लाइसेंस और तकनीकी समझौते के तहत होगा. ऐसे में बिना फ्रांसीसी कंपनी और सरकार की अनुमति के भारत इन विमानों को तीसरे देश को नहीं बेच सकता है.  रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भविष्य में निर्यात का विकल्प खुलता भी है, तो वह अलग समझौते और संयुक्त अनुमति के तहत ही संभव होगा. 

केंद्र सरकार की मंजूरी से MP और CG में बनेंगे 2.88 लाख नए घर, महिलाओं को मिलेगा अहम हिस्सा

भोपाल /रायपुर  केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 (PMAY-U 2.0) के तहत शहरी गरीबों के लिए आवास की सुविधा को विस्तार देते हुए सोमवार को लगभग 2.88 लाख और घरों के निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा दी गई इस नवीनतम स्वीकृति के तहत कुल 2,87,618 घरों का निर्माण किया जाएगा। इस नए निर्णय के साथ ही पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत स्वीकृत घरों की कुल संख्या अब 13.61 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। महिलाओं और वंचित वर्गों को प्राथमिकता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस परियोजना में सामाजिक न्याय और समावेशिता का विशेष ध्यान रखा गया है। स्वीकृत घरों में से 1.60 लाख से अधिक घर महिलाओं को आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा, 22,581 घर वरिष्ठ नागरिकों के लिए और 8 घर ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए स्वीकृत किए गए हैं। श्रेणीवार विवरण देखें तो इसमें ओबीसी वर्ग के लिए 82,190 घर, एससी (SC) लाभार्थियों के लिए 35,525 और एसटी (ST) वर्ग के लिए 9,773 घर आरक्षित किए गए हैं। 16 राज्यों में अलग-अलग श्रेणियों के तहत होगा निर्माण यह महत्वपूर्ण निर्णय मंत्रालय के सचिव श्रीनिवास कटिकीथला की अध्यक्षता में आयोजित 'केंद्रीय स्वीकृति और निगरानी समिति' की बैठक में लिया गया। योजना के तहत नए घर 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बनाए जाएंगे, जिनमें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश और बंगाल जैसे प्रमुख राज्य शामिल हैं। निर्माण की श्रेणियों को तीन हिस्सों में बांटा गया है।     लाभार्थी आधारित निर्माण: 1.66 लाख घर।     भागीदारी में किफायती आवास: 1.09 लाख घर।     किफायती किराये के आवास: 12,846 घर। 'डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स' को हरी झंडी परियोजना में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने छत्तीसगढ़, पुडुचेरी और राजस्थान में तीन 'डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स' (डीएचपी) को भी मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य आधुनिक और लागत-कुशल निर्माण तकनीकों का प्रदर्शन करना है। प्रत्येक डीएचपी परियोजना में 40 आवास इकाइयां शामिल होंगी, जो भविष्य के शहरी आवास निर्माण के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करेंगी।