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लाड़ली बहना योजना पर ताजातरीन खबर: लाखों बहनों के नाम कटे, मंत्री ने बताया कारण

भोपाल  मध्य प्रदेश की चर्चित योजना लाड़ली बहना योजना एक बार फिर सियासी तूफान के बीच आ गई है। विधानसभा में कांग्रेस विधायक महेश परमार ने सरकार को घेरते हुए बड़ा सवाल उठाया कि योजना से लगातार बहनों के नाम काटे जा रहे हैं और नए पंजीयन पूरी तरह बंद पड़े हैं। वहीं महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने सदन में लिखित जवाब देते हुए चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। मंत्री के मुताबिक, पहले योजना में 1 करोड़ 31 लाख 6 हजार 525 बहनें पंजीकृत थीं, जो अब घटकर 1 करोड़ 25 लाख 29 हजार 51 रह गई हैं। यानी अब तक 5 लाख 77 हजार 474 बहनों के नाम काटे जा चुके हैं। 60 साल की उम्र होते ही लाडली बहना योजना से कट जाता है महिलाओं का नाम मध्य प्रदेश में लाडली बहना योजना का लाभ 60 साल की उम्र तक की महिलाओं को दिया जाता है. अब बड़ी विडंबना यह है कि जैसे ही इस योजना की पात्र महिलाएं 60 साल की होती हैं. सिस्टम अपने आप लाभार्थी का नाम हटा देता है. इसके बाद यह महिला वृद्धावस्था पेंशन का लाभ ले सकती हैं, लेकिन मौजूदा समय में लाडली बहनों को ₹1500 की राशि दी जा रही है और पेंशन के तहत मात्र ₹600 मिलते हैं. ऐसे में बुजुर्ग महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती इतने कम पैसे में अपना गुजारा करने की होती है. देखा जाए तो 60 वर्ष की उम्र होते ही सीधे ₹900 प्रति माह की राशि में कटौती हो जाती है. लाडली बहन योजना का लाभ नहीं ले पा रही बहनों के बीच जब न्यूज 18 की टीम पहुंची, तो उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि कई महीने से उनका नाम कटा हुआ है लाडली बहन योजना के पैसे नहीं मिल रहे हैं. वृद्धावस्था पेंशन भी नहीं मिल रही है और कई महिलाओं के घर में दिव्यांग बच्चे हैं उनके पास भी कोई सहायता राशि नहीं आ रही है. कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने साधा निशाना महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने विधानसभा में कांग्रेस विधायकों के सवालों के लिखित जवाब में यह जानकारी दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि 10 अगस्त 2023 के बाद कोई नया पंजीयन नहीं किया गया है और वर्तमान में नए पंजीयन शुरू करने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है. राशि बढ़ाने को लेकर भी कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है. कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने कहा कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने बहनों से जो वादा किया था वो नहीं निभा रही है. न तो 3 हजार दे रहे हैं और न नए नाम जोड़ रहे हैं. भाजपा प्रवक्ता ईशान जैन ने कही ये बात लाडली बहन योजना को लेकर जारी सियासत और महिलाओं के सवाल पर भाजपा प्रवक्ता ईशान जैन ने कहा कि योजना की शर्तों के अनुसार सभी बहनों को लाभ दिया जा रहा है. हमारी सरकार सबका ध्यान रखती है. आंकड़ों के अनुसार योजना की शुरुआत में पंजीकृत महिलाओं की संख्या 1 करोड़ 31 लाख 6 हजार 525 थी, जो अब घटकर 1 करोड़ 25 लाख 29 हजार 51 रह गई है. सरकार का कहना है कि 60 वर्ष की आयु पूरी करने पर कई महिलाओं के नाम सूची से हटे हैं, जिसके कारण संख्या में कमी आई है. विधानसभा में लाडली बहना योजना की लाभार्थियों की आयु वर्ग अनुसार स्थिति भी सामने आई है. 55 से 60 वर्ष आयु वर्ग में 7.89 लाख, 35 से 55 वर्ष में 71.63 लाख, 23 से 35 वर्ष में 45.26 लाख महिलाएं लाभ ले रही हैं. इधर, 25,395 महिलाओं का भुगतान समग्र आईडी डिलीट होने के कारण फिलहाल बंद है. सरकार का कहना है कि समग्र आईडी पुनः सक्रिय होने पर भुगतान फिर से शुरू किया जाएगा. विधानसभा में इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान भी देखने को मिला. कांग्रेस ने नए पंजीयन शुरू करने और पात्र महिलाओं को योजना से जोड़ने की मांग की. विपक्ष का आरोप है कि जब नए पंजीयन नहीं हो रहे, तो कुछ जिलों में लाभार्थियों की संख्या बढ़ने के दावे कैसे किए जा रहे हैं. लाडली बहना योजना राज्य सरकार की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक है. ऐसे में लाभार्थियों की घटती संख्या और भुगतान अटकने का मुद्दा सियासी बहस का केंद्र बन चुका है. नाम कटने की बड़ी वजहें क्या हैं? मंत्री ने साफ कहा कि बहनों के नाम कटने के प्रमुख कारण ये हैं: 60 साल की उम्र पूरी होना (इसके बाद योजना की पात्रता खत्म) लाभार्थी की मृत्यु ,अन्य अपात्रता सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ 60 साल की उम्र पार करने के कारण 1.51 लाख से ज्यादा महिलाएं योजना से बाहर हो चुकी हैं। विपक्ष का बड़ा आरोप कांग्रेस विधायक महेश परमार ने आरोप लगाया कि नाम कटने का सिलसिला लगातार जारी है, जबकि नए पंजीयन बंद हैं। उन्होंने कहा कि 60 साल पूरे होते ही लाड़ली बहना की राशि बंद हो जाती है और दूसरी पेंशन योजनाओं में सिर्फ 600 रुपये महीना मिलता है। बजट में योजना की राशि 3000 रुपये करने का वादा भी अधूरा रह गया है। सवालों के घेरे में सरकार लाखों बहनों के नाम कटने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि: क्या भविष्य में नए पंजीयन शुरू होंगे? जिन बहनों के नाम कटे, उनके लिए कोई वैकल्पिक राहत योजना आएगी? 3000 रुपये की घोषणा सिर्फ चुनावी जुमला थी या कभी लागू होगी? इस मुद्दे ने विधानसभा से लेकर सड़कों तक सियासी गर्मी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में लाड़ली बहना योजना पर सरकार को और जवाब देने पड़ सकते हैं।

87 शराब दुकानों से 1432 करोड़ का लक्ष्य, कीमतें बढ़ सकती हैं, ड्यूटी नहीं बढ़ेगी, ठेकों को मुनाफे के लिए खपत बढ़ानी होगी

भोपाल  अबकी बार भोपाल की 87 शराब ठेकों से सरकार को 239 करोड़ रुपए या इससे ज्यादा मिल सकते हैं। पिछले साल रिजर्व प्राइस (आरपी) 1073 करोड़ रुपए थी, जबकि उच्चतम ऑफर राशि 1139 करोड़ रुपए मिली थी। इस बार रिजर्व प्राइस ही 1432 करोड़ रुपए रखी गई है। 2 मार्च को 29 दुकानों की नीलामी होगी। बता दें कि राज्य सरकार ने नई आबकारी नीति लागू कर दी है। नई व्यवस्था में शराब दुकानों को छोटे-छोटे समूहों में बांटा गया है। भोपाल की 87 दुकानों को 20 ग्रुप में बांटा है। जिनके आवंटन की प्रक्रिया ई-टेंडर के जरिए होगी। इनमें से 7 ग्रुप की 29 दुकानों के लिए पहले फेज में टेंडर की प्रोसेस शुरू की गई है। 2 मार्च को सुबह 10.30 से दोपहर 2 बजे तक टेंडर सबमिट होंगे। इसी दिन शाम 6 बजे से डिस्ट्रिक कमेटी की मौजूदगी में टेंडर खोलने की कार्रवाई होगी। इन ग्रुपों के लिए प्रक्रिया बागसेवनिया ग्रुप की 5 दुकान, हबीबगंज फाटक ग्रुप की 4 दुकान, भानपुर चौराहा ग्रुप की 5 दुकान, स्टेशन बजरिया ग्रुप की 5 दुकान, खजूरीकलां ग्रुप की 3 दुकान, जहांगीराबाद ग्रुप की 4 दुकान और गुनगा ग्रुप की 3 दुकानों के लिए यह टेंडर प्रक्रिया की जा रही है। 20% बढ़ी ठेके की कीमत वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए नीलामी की प्रक्रिया में ठेके 1193 करोड़ रुपए से ज्यादा में हुए थे, जो टारगेट से 11 प्रतिशत यानी, 120 करोड़ रुपए अधिक थे। इस बार 1432 करोड़ रुपए रिजर्व प्राइस रखी गई है। बता दें कि वर्तमान मूल्य में 20 प्रतिशत बढ़ोतरी कर आरक्षित मूल्य तय किया गया है। इसका असर अब समूहों की कीमतों पर दिखने लगा है। भोपाल में इस बार सबसे महंगा समूह पिपलानी का है। इसमें 4 दुकानें – पिपलानी, अयोध्या नगर, रत्नागिरी तिराहा और पटेल नगर हैं। 20 फीसदी आरक्षित मूल्य बढ़ने के बाद इस समूह की कीमत 127 करोड़ 77 लाख 60 हजार 551 रुपए हो गई है। इससे पहले वर्ष 2025-26 में इन दुकानों का वार्षिक मूल्य 106 करोड़ 48 लाख से ज्यादा था। इसी तरह बागसेवनिया समूह की कीमत करीब 101 करोड़ से बढ़कर 121 करोड़ 89 लाख से ज्यादा हो गई है। आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नीति में किए गए बदलावों के आधार पर ही ई-टेंडर के जरिए दुकानों का आवंटन होगा। छोटे समूह बनाए जाने से ज्यादा बोलीदाता सामने आएंगे व सरकार को फायदा मिलेगा। इससे नए लोगों को भी भागीदारी का मौका मिलेगा। 239 करोड़ रुपए ज्यादा मिलेंगे विभाग की माने तो नई व्यवस्था से सरकार के खजाने में सीधे 238 करोड़ रुपए ज्यादा मिलेंगे। टेंडर फाइनल होने के बाद यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। होटल-बार के लाइसेंस की शर्तों में होगा बदलाव पहले यह थी व्यवस्था     अब तक ज्यादातर जिलों में सिंगल टेंडर के जरिए ठेके दिए गए थे।     प्रदेश में करीब 3500 शराब दुकानें हैं और इनका संचालन लगभग 600 से अधिक समूहों में होता रहा है। बड़े समूहों की वजह से सीमित कंपनियां ही टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा ले पाती थीं।     भोपाल का उदाहरण देखें तो यहां 87 शराब दुकानें हैं। इन पर 4 कंपनियों का कब्जा है। यह बदलाव हो सकता है     अब 2 से 5 दुकानों के छोटे समूह बनाए जाएंगे।     प्रदेश में करीब 1,000 समूह बनने की संभावना है।     भोपाल में 25 से 30 समूह बन सकते हैं।     टेंडर के जरिए ठेके दिए जाएंगे।     हाेटल-बार और रेस्तरां बार के लाइसेंस की शर्तों में बदलाव किया जाएगा। होटल-बार में पहले 20 कमरों की संख्या काे घटाकर 10 किया जा सकता है। ठेकों के टेंडर रेंडमाइजेशन सिस्टम से होंगे नई नीति में पहली बार शराब ठेकों के टेंडर रेंडमाइजेशन सिस्टम से होंगे। कौन-सा समूह पहले खुलेगा, यह कंप्यूटराइज्ड ड्रॉ से तय होगा। पहले सभी टेंडर एक साथ जारी होते थे, अब क्रमवार प्रक्रिया अपनाई जाएगी। नई दुकानें या अहाते नहीं खुलेंगे, मौजूदा ढांचे में ही ठेके दिए जाएंगे। सरकार फिलहाल आबकारी ड्यूटी बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। पिछले साल के मुकाबले अंग्रेजी की खपत ज्यादा भोपाल में शराब से राज्य सरकार को अब तक करीब 1,015 करोड़ का राजस्व मिल चुका है। बिक्री के आंकड़ों में बढ़ोतरी दिखी है। पिछले साल जहां करीब 1,300 करोड़ रुपए की शराब बिकी थी, वहीं इस साल यह आंकड़ा 1,800 करोड़ पार कर चुका है, यानी करीब 500 करोड़ की वृद्धि। वहीं देशी शराब की खपत 61% घटकर 71.31 लाख प्रूफ लीटर से 27.63 लाख पर आ गई। इसके उलट विदेशी शराब 55% बढ़कर 45.07 लाख से 70.26 लाख प्रूफ लीटर पहुंच गई। बीयर की खपत भी बढ़ी है। सिंगल टेंडर की जगह मल्टी-ग्रुप मॉडल लागू होगा सरकार का मानना है कि छोटे समूह बनने से अधिक प्रतिस्पर्धा होगी और ओवरचार्जिंग की शिकायतें कम होंगी। सिंगल टेंडर व्यवस्था में ओवरचार्जिंग की शिकायतें बढ़ी थीं।

कूनो नेशनल पार्क में 8 चीते होंगे शामिल, आज शनिवार सुबह CM मोहन यादव करेंगे स्वागत और रिलीज

 श्योपुर/ग्वालियर MP के श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी महाद्वीप से चीतों का तीसरा बड़ा जत्था भारत आ रहा है. बोत्सवाना से एयरलिफ्ट किए गए इन 8 चीतों (6 मादा और 2 नर) का स्वागत खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव करेंगे. चीता प्रोजेक्ट डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने बताया कि बोत्सवाना से छह मादा और दो नर चीतों का बैच शुक्रवार रात 9 बजे से 10 बजे के बीच इंडियन एयर फोर्स (IAF) के एयरक्राफ्ट से ग्वालियर के लिए उड़ान भरी।  ग्वालियर से, दो IAF हेलीकॉप्टर चीतों को कुनो नेशनल पार्क ले जाएंगे, जहां उनके शनिवार सुबह 9 बजे से 10 बजे के बीच पहुंचने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि बोत्सवाना से ग्वालियर तक की उड़ान का समय लगभग नौ से 10 घंटे का रहा . उन्होंने कहा कि यह अफ्रीका से आने वाला चीतों का तीसरा बैच होगा, इससे पहले नामीबिया और साउथ अफ्रीका से चीते लाए गए थे. इसके साथ ही, भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 46 हो जाएगी. क्वारंटाइन और सुरक्षा के कड़े इंतजाम चीता प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने कहा कि पार्क में बाड़े तैयार किए गए हैं, जहां चीते लगभग एक महीने तक क्वारंटाइन में रहेंगे. उनकी सुरक्षित लैंडिंग के लिए पार्क में 5 हेलीपैड हैं. पिछली बार की तरह, IAF चीतों को अफ्रीका से लाकर उन्हें फिर से बसाने के प्रोग्राम में मदद करेगी, ठीक वैसे ही जैसे उसने फरवरी 2023 में SA से चीते को लाते समय किया था. आबादी को 50 तक बढ़ाना लक्ष्य प्रोजेक्ट डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने कहा कि इससे पहले, सितंबर 2022 में एक प्राइवेट जेट से 8 चीतों को नामीबिया से ग्वालियर लाया गया था, जिसके बाद IAF के हेलीकॉप्टरों ने उन्हें पार्क पहुंचाया था. और चीतों के आने से भारत का चीता रिवाइवल प्रोग्राम और मजबूत होगा. केंद्र सरकार के सपोर्ट से, हमारा मकसद जल्द से जल्द आबादी को 50 तक बढ़ाना है. पिछले साल, भारत में 12 शावकों का जन्म हुआ, हालांकि तीन शावकों समेत छह जिंदा नहीं बचे. इस साल, 7 फरवरी से 18 फरवरी के बीच, दो बार में 8 शावक पैदा हुए. KNP में 39 शावक पैदा हो चुके 2023 से KNP में कुल 39 शावक पैदा हुए हैं, जिनमें से 27 जिंदा हैं. नामीबिया में जन्मी ज्वाला और आशा, साउथ अफ्रीका में जन्मी गामिनी, वीरा और निरवा, और भारत में जन्मी मुखी, सभी ने KNP में बच्चे दिए हैं. तीन चीतों को मंदसौर जिले के गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में भेज दिया गया है, जबकि 35 अभी भी KNP में हैं. बता दें कि दुनिया का सबसे तेज जमीन पर रहने वाला जानवर चीता, भारत में लगभग सात दशक पहले खत्म हो गया था. दोबारा उसे बसाए जाने का प्रोजेक्ट चल रहा है. इसकी शुरुआत साल 2022 में कर दी गई थी. यह अफ्रीका से आने वाला चीतों का तीसरा बैच है. इससे पहले नामीबिया (2022) और दक्षिण अफ्रीका (2023) से चीते लाए गए थे.

कारों की सबसे ज्यादा बिक्री, उज्जैन मेले में टूटा रिकॉर्ड, 11 दिन में 6,662 वाहन बिके

उज्जैन बाबा महाकाल की नगरी में आयोजित उज्जैन विक्रम व्यापार मेले ने इस बार वाहन बिक्री के मामले में नया रिकॉर्ड बना डाला है। इंजीनियरिंग कॉलेज मैदान पर चल रहे इस मेले में मात्र 11 दिनों के भीतर 6,662 वाहनों की बिक्री हो चुकी है। खास बात यह है कि इनमें चारपहिया वाहनों, विशेषकर कारों की संख्या सबसे अधिक रही है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मोटरसाइकिल और अन्य हल्के वाहन खरीदने भी व्यापार मेले में पहुंच रहे हैं। व्यापार मेले का आयोजन विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप शुरू हुए विक्रम व्यापार मेले का तृतीय आयोजन इंजीनियरिंग कॉलेज मैदान पर किया जा रहा है। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, विक्रमोत्सव 2026 अंतर्गत आयोजित उज्जैनी विक्रमोत्सव व्यापार मेले के दौरान 15 फरवरी से 19 मार्च तक मेले में गैर-परिवहन वाहनों जैसे मोटरसाइकिल, मोटर कार, ओमनी बस और हल्के वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर 50% की छूट मध्य प्रदेश सरकार द्वारा दी जा रही है। 25 फरवरी तक व्यापार मेले में कुल 6,662 वाहनों की बिक्री हुई है, जिसमें 1,212 दोपहिया वाहन, 5,150 चारपहिया वाहन और 300 अन्य वाहन शामिल हैं। व्यापार मेले इस बार बिके रिकॉर्ड वाहन राज्य सरकार ने उज्जैन व्यापार मेले को आकर्षक बनाने के विशेष प्रयास किए हैं। राज्य सरकार ने गैर-परिवहन श्रेणी के वाहनों-जैसे दोपहिया, कार, ओमनी बस और अन्य हल्के मोटर वाहनों-के पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट देने की घोषणा की है। यही छूट लोगों को इस व्यापार मेले से खरीदारी के लिए प्रेरित कर रही है। कम रजिस्ट्रेशन शुल्क के कारण ग्राहकों को सीधा लाभ मिल रहा है। यही वजह है कि वाहन बाजार में उत्साह का माहौल है। 25 तक बिके 5,150 चारपहिया वाहन ताजा आंकड़ों के अनुसार 25 फरवरी तक उज्जैन व्यापार मेले से कुल 6,662 वाहनों की बिक्री दर्ज की गई। इनमें 1,212 दोपहिया वाहन हैं, जबकि 5,150 चारपहिया वाहन खरीदे गए हैं। इसके अलावा 300 अन्य श्रेणी के वाहन भी बेचे गए हैं। यह संख्या बताती है कि चारपहिया वाहनों की मांग इस मेले में सबसे अधिक रही। रजिस्ट्रेशन में दी गई छूट और एक ही स्थान पर विभिन्न कंपनियों के विकल्प उपलब्ध होने से ग्राहकों को निर्णय लेने में आसानी हुई। ग्वालियर की तर्ज पर शुरु किया गया मेला उज्जैन के विक्रम व्यापार मेले की तर्ज पर ग्वालियर मेला भी प्रदेश में व्यापार और सांस्कृतिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र माना जाता है। दोनों मेलों में वाहन, घरेलू उत्पाद और विभिन्न व्यावसायिक स्टॉल लोगों को आकर्षित करते हैं। जहां उज्जैन में रजिस्ट्रेशन छूट से वाहन बिक्री को बढ़ावा मिला है, वहीं ग्वालियर मेला भी हर साल कारोबार के नए कीर्तिमान स्थापित करता है। ग्वालियर व्यापार मेला 25 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 25 फरवरी 2026 तक चला।  

उबर एयर टैक्सी का आगाज, मोबाइल ऐप से होगी बुकिंग, नई उड़ान सेवा का इंतजार

 नई दिल्ली Uber Air Taxi : सोचिए, आप कैब बुक करने के लिए फोन निकालते हैं, ऐप खोलते हैं और सामने दो विकल्प मिलते हैं. एक सड़क वाली टैक्सी और दूसरी हवा में उड़ने वाली. जी हां, वही हवा, वही आसमान. दुबई अब इसी सोच को हकीकत में बदलने जा रहा है, जहां टैक्सी सिर्फ सड़क पर नहीं, बल्कि ऊपर आसमान में भी चलेगी. अब तक ट्रैफिक में फंसना मजबूरी था, लेकिन आने वाले वक्त में शायद नहीं. क्योंकि जिस Uber ऐप से आप रोज कैब बुक करते हैं, उसी से एयर टैक्सी भी मिलेगी.  दरअसल, दुबई में इस साल के अंत तक इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी (Air Taxi) सर्विस शुरू होने वाली है, जिसे सीधे मोबाइल ऐप से बुक किया जा सकेगा. खास बात यह है कि यह सुविधा मशहूर राइड-हेलिंग ऐप Uber के जरिए मिलेगी. यानी सड़क पर चलने वाली कार के साथ अब हवा में उड़ने वाली एयर टैक्सी का भी ऑप्शन अब एक ही ऐप पर मिलेगा.  ऐप से कैसे होगी एयर टैक्सी की बुकिंग एयर टैक्सी की बुकिंग प्रक्रिया बिल्कुल सामान्य राइड की तरह होगी. आप ऐप खोलेंगे, अपना डेस्टिनेशन डालेंगे और अगर उस रास्ते पर हवाई सफर संभव होगा तो एयर टैक्सी का विकल्प अपने आप दिख जाएगा. इस एक ही बुकिंग में आपको पहले टेक-ऑफ प्वाइंट तक वाया रोड ले जाया जाएगा, फिर हवा में उड़ान होगी और उतरने के बाद आखिरी मंजिल तक फिर सड़क मार्ग से ही सफर कराया जाएगा. यानी पूरा सफर एक ही टिकट और एक ही ऐप में. यह एयर टैक्सी पूरी तरह इलेक्ट्रिक होगी और इसमें चार यात्री बैठ सकेंगे. हर फ्लाइट को एक लाइसेंस प्राप्त कमर्शियल पायलट उड़ाएगा, जिससे सेफ्टी को लेकर भरोसा बना रहे. केबिन में आरामदायक सीटें होंगी और बड़ी खिड़कियां दी जाएंगी, ताकि यात्री उड़ान के दौरान दुबई के शानदार नजारे देख सकें. इस एयर टैक्सी में 6 खास प्रोपेलर लगाए गए हैं, जो इसे सीधा ऊपर उड़ने और उतरने में मदद करते हैं. ये एक इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) एयरक्राफ्ट जैसा होगा. जरूरत पड़ने पर यह आगे की दिशा में भी उड़ान भर सकती है. इसकी अधिकतम रफ्तार करीब 200 मील प्रति घंटा (321 किमी/घंटा) होगी और एक बार चार्ज करने पर यह लगभग 100 मील (160 किमी) तक उड़ान भर सकेगी. शहर के भीतर यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए इसमें कई अलग-अलग लेवल की सेफ्टी सिस्टम भी लगाए गए हैं. इस एयरटैक्सी सर्विस की शुरुआत इसी साल होने की उम्मीद है. इसके साथ ही दुबई में जमीन और हवा को जोड़ने वाली मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बड़ा बढ़ावा मिलेगा. कई सालों से जिस एयर मोबिलिटी की योजना पर काम हो रहा था, वह अब आम लोगों की डेली लाइफ का हिस्सा बन सकती है.इस सर्विस का मकसद ऐसा ट्रांसपोर्ट सिस्टम बनाना है, जहां ट्रैफिक वाले इलाकों में भी कम समय में शॉर्ट डिस्टेंस की यात्रा की जा सके.