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डॉक्टर सेवाभाव से मरीज का करें इलाज : उप मुख्यमंत्री शुक्ल जी मीडिया समूह के कार्यक्रम में रीवा शहर के डॉक्टर्स का किया सम्मान

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि डॉक्टर को संवेदनशीलता के साथ मरीज का इलाज करना चाहिए। उन्होंने कहा कि धरती में डॉक्टर भगवान के सामान हैं डॉक्टर भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन सेवाभाव से करें। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने पत्रिका समूह द्वारा आयोजित चिकित्सकों के सम्मान समारोह में शहर के डॉक्टर्स का सम्मान किया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि किसी मीडिया समूह द्वारा चिकित्सकों का रीवा में पहली बार इस तरह का सम्मान किया गया है। यह आयोजन सिद्ध करता है कि रीवा में डॉक्टर्स बेहतर कार्य कर रहे हैं। रीवा को मेडिकल हब बनाने का सपना सही दिशा में जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब जीवन संकट में आता है तो केवल डॉक्टर के पास ही लोग जाते हैं। मेहनत से किये गये कार्य की जब बड़े सामाजिक स्तर पर सराहना मिलती है तो उत्साह भी बढ़ता है। सांसद  जनार्दन मिश्र ने कहा कि विचारहीन समाज स्थाई नहीं होता किसी भी क्षेत्र में विचार के ऊपर व्यावसायिकता नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रिका समूह द्वारा डॉक्टर्स का किया गया सम्मान प्रशंसनीय है। उन्होंने आयोजन से कहा कि सकारात्मक कार्यो के लिए केवल प्रेरित ही नहीं किया जा रहा बल्कि सामने आकर कार्य भी किया जा रहा है। उन्होंने सम्मानित होने वाले डॉक्टर्स को शुभकामनाएं दी तथा उनके द्वारा कोरोनाकाल सहित अन्य समय में किये गये सेवाभाव की प्रशंसा भी की। नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय सहित चिकित्सक व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  

रिटायर हुए सरफराज अहमद, बाबर आजम पर कही खास बात; भारत के खिलाफ उस ऐतिहासिक जीत की यादें ताजा

इस्लामाबाद पाकिस्तान के पूर्व कप्तान सरफराज अहमद ने रविवार को इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटारयरमेंट का ऐलान कर दिया। 38 वर्षीय विकेटकीपर-बल्लेबाज सरफराज ने पाकिस्तान की ओर से 200 से ज्यादा इंटरनेशनल मुकाबले खेले। उन्होंने 54 टेस्ट, 117 वनडे और 61 टी20 इंटरनेसनल मैच खेले और तीनों फॉर्मेट में 6164 रन बनाए। उन्होंने छह शतक और 35 अर्धशतक लगाए। उन्होंने विकेट के पीछे 315 कैच पकड़े जबकि 56 स्टंप आउट किए। कराजी में जन्मे सरफराज ने 2010 में डेब्यू किया था और 2023 में पाकिस्तान के लिए आखिरी मैच खेला। ऐसा करने वाले इकलौते पाकिस्तानी सरफराज ने सभी फॉर्मेट (50 वनडे, 37 T20, 13 टेस्ट) में 100 मैचों में पाकिस्तान की कप्तानी की और टीम को टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में नंबर-1 रैंकिंग तक पहुंचाया। उनकी कप्तानी के दौरान पाकिस्तान ने लगातार 11 टी20 सीरीज जीतने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। सरफराज के व्यक्तिगत रिकॉर्ड की बात करें तो वह एक टेस्ट मैच में 10 कैच लेने वाले इकलौते पाकिस्तानी हैं। उन्होंने जोहान्सबर्ग 2019 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ऐसा किया। वह लॉर्ड्स में वनडे शतक बनाने वाले पाकिस्तान के एकमात्र विकेटकीपर हैं। उन्होंने 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ यह कारनामा किया था। भारतीय टीम को दिया था एक बड़ा दर्द सरफराज की कप्तानी में पाकिस्तान ने आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में खिताबी सूखा समाप्त किया था। सरफराज की अगुवाई वाली पाकिस्तान टीम ने साल 2017 में भारत को एक बड़ा दर्द दिया था। पाकिस्तान ने चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में भारतीय टीम के खिलाफ 180 रनों से विशाल जीत दर्ज की थी। उस वक्त विराट कोहली भारत के कप्तान थे। पाकिस्तान ने द ओवल में खेले गए फाइनल में 4 विकेट के नुकसान पर 338 रन बनाए थे। जवाब में भारत की पारी सिर्फ 158 रनों पर सिमट गई थी। 'कप्तानी में ऐसा करना गर्व की बात' सरफराज ने संन्यास के बाद कहा, ''पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करना मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा सम्मान रहा है। 2006 में अंडर-19 टीम को वर्ल्ड टाइटल जिताने से लेकर 2017 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीतने तक हर पल खास रहा। मैं अपने टीममेट्स, कोच, परिवार और फैंस का शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने करियर में हमेशा मुझे सपोर्ट किया। सभी फॉर्मेट में पाकिस्तान की कप्तानी करना एक सपने के सच होने जैसा था। मैंने हमेशा बिना डरे क्रिकेट खेलने और एकजुट टीम बनाने की कोशिश की। अपनी कप्तानी के दौरान बाबर आजम, शाहीन अफरीदी, हसन अली और अन्य खिलाड़ियों को मैच-विनर बनते देखना मेरे लिए गर्व की बात है। मैं पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को इतने सालों तक मुझपर भरोसा करने के लिए शुक्रिया कहना चाहता हूं। पाकिस्तान क्रिकेट हमेशा मेरे दिल के बहुत करीब रहा और मैं हर मुमकिन तरीके से इस खेल को सपोर्ट करता रहूंगा।''

भोपाल मेट्रो का बड़ा कदम: 15 मीटर नीचे पहुंची TBM मशीन, पुराने शहर में बनेगी अंडरग्राउंड सुरंग

भोपाल राजधानी में मेट्रो रेल परियोजना अब अपने सबसे चुनौतीपूर्ण और रोमांचक चरण में प्रवेश कर रही है। भोपाल मेट्रो की आरेंज लाइन के तहत भोपाल रेलवे स्टेशन से नादरा बस स्टैंड तक 3.39 किलोमीटर लंबे भूमिगत कॉरिडोर के निर्माण की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस ट्विन टनल को बनाने के लिए टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का पहला पार्ट क्रेन के जरिए करीब 15 मीटर जमीन की गहराई में उतारा जा चुका है। तकनीकी इंस्टालेशन और जांच के बाद मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल के पहले सप्ताह से जमीन के अंदर सुरंग बनाने के लिए जमीन की खोदाई का काम शुरू हो सकता है। पुल पातरा और सिंधी कालोनी में एक अंडरग्राउंड रैंप बनाया जाएगा, जिसके जरिए मेट्रो ट्रेन भूमिगत स्टेशन तक पहुंचेगी। दिसंबर में बेंगलुरु से आई थी टीबीएम मशीन यह टीबीएम मशीन दिसंबर 2025 में बेंगलुरु से भोपाल पहुंची थी। टीबीएम के कुल तीन से चार बड़े हिस्से हैं, जिन्हें एक-एक कर जमीन के नीचे उतारा जाएगा। पूरी तरह असेंबल होने के बाद यह मशीन 19 से 20 मीटर की गहराई पर जाकर सुरंग के लिए जमीन की खोदाई करेगी। यह टनल भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे शहर के सबसे घने और व्यस्त इलाकों के नीचे से गुजरेगी। हालांकि मेट्रो प्रबंधन का दावा है कि टीबीएम से खोदाई के दौरान किसी भी प्रकार का कंपन नहीं होगा और ऊपर रहने वाले लोगों को इसका आभास भी नहीं होगा। पुरानी इमारतों की सुरक्षा और विरासत की चुनौती सुरक्षा के लिहाज से प्रबंधन उन पुरानी इमारतों और होटलों को लेकर सतर्क है जो पुल पातरा से सिंधी कालोनी के बीच स्थित हैं। इनमें से कई इमारतें काफी जर्जर और पुरानी हैं। इस भूमिगत तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि शहर के व्यस्ततम रास्तों के नीचे काम चलने के बावजूद ऊपर का ट्रैफिक और ऐतिहासिक विरासतें पूरी तरह अप्रभावित रहेंगी। यह पूरा प्रोजेक्ट पैकेज बीएच-04 के तहत संचालित किया जा रहा है। एक नजर में भूमिगत कॉरिडोर (ऑरेंज लाइन)     क्षेत्र: भोपाल रेलवे स्टेशन से नादरा बस स्टैंड तक     टनल की लंबाई: लगभग 3.39 किलोमीटर     संरचना: 02 समानांतर सुरंगें     गहराई: 20 मीटर की गहराई में सुरंग बनाएगी मशीन मशीन की तकनीकी क्षमता     नाम: टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम)     आगमन: दिसंबर 2025 (बेंगलुरु से भोपाल लाई गई)     व्यास: 5.8 मीटर     क्षमता: एक मशीन की प्रतिदिन 15 मीटर खोदाई की क्षमता     स्थिति: 15 मीटर गहराई पर उतारा गया मशीन का पहला पार्ट  

ग्लोबल इन्वेस्टमेंट की तैयारी: सिंगापुर-लंदन में रोड शो करेगी मोहन सरकार, सौर ऊर्जा में आगे बढ़ेगा MP

भोपाल मध्य प्रदेश ने 2030 तक अपनी ऊर्जा खपत के 50 प्रतिशत हिस्से की पूर्ति सौर ऊर्जा से करने की कार्य योजना बनाई है। इसके लिए प्रदेश में कई परियोजनाओं पर काम भी चल रहा है। इसे और गति देने के लिए निवेश बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में इस साल दिल्ली, मुंबई, सिंगापुर और लंदन में रोड शो आयोजित कर मुरैना-2 सौर सहित ऊर्जा भंडारण परियोजना का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। मुरैना-2 परियोजना में छह माह बिजली उत्तर प्रदेश और छह माह मध्य प्रदेश को मिलेगी। वैश्विक स्तर पर निवेशकों को लुभाने की तैयारी रोड शो में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सौर ऊर्जा से जुड़े उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ बैठक कर प्रदेश में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं से अवगत कराएंगे। बता दें कि 24 और 25 फरवरी 2025 को भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 5.72 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले थे। इससे 1.4 लाख रोजगार सृजन संभावित हैं। मध्य प्रदेश अपनी आवश्यकता की 50 फीसदी विद्युत आपूर्ति सौर ऊर्जा से करेगा। वर्ष 2030 तक लगभग 40 हजार मेगावाट बिजली की आवश्यकता होगी। इसमें से आधी यानी 20 हजार मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा से बनाई जाएगी। इसके लिए सरकार कार्ययोजना बनाकर काम कर रही है। प्रदेश में अभी 26 हजार मेगावाट बिजली की खपत है, जिसमें सात हजार मेगावाट बिजली की पूर्ति सौर ऊर्जा से हो रही है। मुरैना और अन्य जिलों में प्रस्तावित बड़ी परियोजनाएं आठ हजार मेगावाट की दो सौर ऊर्जा की परियोजनाएं मुरैना में स्थापित की जाएंगी। वहीं साढ़े सात हजार मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं छह जिलों (आगर, धार, अशोकनगर, भिंड, शिवपुरी और सागर) में प्रस्तावित की गई हैं। 15 हजार हेक्टेयर भूमि भी चिन्हित कर ली गई है। गांधीनगर में चौथी ग्लोबल रिन्यूएबल एनर्जी इन्वेस्टर समिट में अवाडा ग्रुप ने पांच हजार करोड़ और रिन्यू पावर ने छह हजार करोड़ रुपये निवेश करने की रुचि दिखाई। इसके अलावा जल संसाधन विभाग भी 100 मेगावाट की परियोजना पर काम कर रहा है। नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य की विशेष उपलब्धियां सांची मप्र की पहली सोलर-सिटी है। देश के सौर ऊर्जा उत्पादन में मध्य प्रदेश 8.2 प्रतिशत के योगदान के साथ चौथे स्थान पर है। ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्लांट भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्लांट है। रीवा स्थित दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट सोलर प्लांट (750 मेगावाट) दिल्ली मेट्रो को बिजली प्रदान करता है। नीमच जिले में भारत की सबसे बड़ी पंप स्टोरेज परियोजना 7,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को एकीकृत करती है। पावर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग जोन नर्मदापुरम के मोहासा बाबई में 884 एकड़ में विकसित किया जा रहा है।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा ने घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा जिले में घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा करते हुए निर्देश दिये कि नियमित घरेलू गैस सिलेण्डर आपूर्ति की व्यवस्थाएँ सुनिश्चित कराई जाय। बुकिंग के आधार पर गैस लेने वाले उपभोक्ताओं को सुगमता से गैस सिलेण्डर मिले। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने केन्द्रीय व प्रदेश स्तर के अधिकारियों से फोन से रीवा जिले में नियमित गैस सिलेण्डर आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि इस बात के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं कि जिले में नियमित गैस सिलेण्डर की आपूर्ति होती रहे और बुकिंग का बैकलाग समाप्त हो जाय और लोगों को बिना किसी परेशानी के गैस सिलेण्डर मिलता रहे। कलेक्टर मती प्रतिभा पाल ने बताया कि सर्वर के ठीक ढंग से कार्य करने से गैस की आनलाइन बुकिंग हो रही है। रीवा शहर में गैस की उपलब्धता के अनुसार वितरण किया जा रहा है। नियमित आपूर्ति के सभी प्रयास जारी हैं, जिससे बैकलाग को पूरा करते हुए लोगों को सुगमता से गैस सिलेण्डर का वितरण हो सके। बैठक में गैस एजेंसी संचालकों ने गैस वितरण में प्रशासन द्वारा दिये गये सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि गैस वितरण की सुगम व्यवस्था के लिए एजेंसियों द्वारा कार्य किया जा रहा है। बैठक में अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, अपर कलेक्टर मती सपना त्रिपाठी, जिला आपूर्ति नियंत्रक  कमलेश ताण्डेकर सहित गैस एजेंसी के संचालक उपस्थित रहे।  

सस्पेंशन खत्म होते ही अभिषेक प्रकाश को मिली अहम पोस्टिंग, यूपी सरकार ने सौंपी नई जिम्मेदारी

लखनऊ रिश्वत मामले में सस्पेंड किए गए आईएएस अभिषेक प्रकाश की प्रशासनिक सेवा में एक बार फिर वापसी हो गई है। एक साल पहले निलंबित किए गए आईएएस अभिषेक को यूपी सरकार ने नई जिम्मेदारी सौंपी है। आईएएस अभिषेक को सचिव सामान्य प्रशासन में तैनाती मिली है। इसको लेकर शासन की ओर से आदेश भी जारी कर दिया है। आईएएस के निलंबन खत्म होने के बाद सेवा में उनकी वापसी एक अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि अभी उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया गया है। इसको लेकर लोगों की निगाहें टिकी हैं। एक साल पहले मार्च में सस्पेंड किए गए आईएएस अभिषेक प्रकाश के 15 मार्च को यूपी सरकार ने बहाली के आदेश जारी कर दिए हैं। नियुक्ति अनुभाग-5 द्वारा जारी आदेश में कहा गया था कि आईएएस अभिषेक प्रकाश की निलंबन अवधि 14 मार्च तक मानी जाएगी। इसके बाद 15 मार्च से उन्हें सेवा में बहाल करने का निर्णय लिया गया है। शासन ने यह आदेश राज्यपाल की अनुमति से जारी किया था। साथ ही आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बहाली के बावजूद उनके खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई यथावत जारी रहेगी। सस्पेंड होने से पहले सीईओ के पद पर तैनात थे आईएस अभिषेक अभिषेक प्रकाश इससे पहले इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर तैनात थे। उन पर एक सोलर कंपनी से प्रोजेक्ट मंजूरी के बदले रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगे थे। इस मामले में प्रदेश सरकार ने 20 मार्च 2025 को उन्हें निलंबित कर दिया था। हालांकि, बाद में मामले की सुनवाई के दौरान पिछली फरवरी में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने साक्ष्यों के अभाव में उनके खिलाफ दाखिल चार्जशीट को रद्द कर दिया था। इसके बाद से उनके निलंबन की समीक्षा की जा रही थी। लागत का पांच प्रतिशत घूस मांगने लगा था आरोप इंवेस्ट यूपी के सीईओ रहने के दौरान सोलर एनर्जी प्रदेश में संयंत्र लगाने के एवज में कुल लागत का पांच प्रतिशत घूस मांगने का भी आरोप लगा था। सोलर कंपनी ने इन्वेस्ट यूपी के कार्यालय के साथ ऑनलाइन प्रार्थना पत्र भेजा था। कंपनी के प्रस्ताव को एम्पावर्ड कमेटी और कैबिनेट से तुरंत मंजूर कराने के एवज में घूस देने की मांग की गई थी। कंपनी के लोगों ने मुख्यमंत्री से इसकी शिकायत की थी। मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह द्वारा जांच के बाद उन्हें निलंबित किया गया था। अभिषेक प्रकाश को डिफेंस कॉरिडोर भूमि घोटाले के आरोप में पहले ही चार्जशीट मिली थी। घूसखोरी के आरोप पर दी गई चार्जशीट पर लगे आरोपों के आधार पर बिंदुवार स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया था। बताया जा रहा है कि चार्जशीट पर सोलर एनर्जी कंपनी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों का जिक्र किया गया था।  

भोपाल में ‘कुत्ते’ से पंगा पड़ा महंगा! भेल कर्मचारी ने 8 दिन की छुट्टी लेकर किया सर्च ऑपरेशन

भोपाल राजधानी के अवधपुरी क्षेत्र की एक कवर्ड कॉलोनी में इन दिनों एक ''आवारा कुत्ते'' चर्चा का केंद्र बनी हुई है। यह मामला किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जहां कालोनी से श्वानों को बाहर निकालने का फैसला ''भेल'' के जिम्मेदार कर्मचारियों पर इतना भारी पड़ा कि उन्हें अपनी होली और रंगपंचमी सड़कों पर खाक छानते हुए बितानी पड़ी। मामले में मेनका गांधी की सक्रियता और प्रशासन के कड़े रुख ने कॉलोनी के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों की रातों की नींद उड़ा दी। पदाधिकारी जिन सरकारी और निजी संस्थानों में ऊंचे पदों पर कार्यरत थे, वहां भी शिकायतें पहुंचने लगीं। दबाव इतना बढ़ा कि इन जिम्मेदार पदाधिकारियों को अपने दफ्तरों से छुट्टी लेनी पड़ी। मेनका गांधी और पीएमओ तक पहुंची शिकायत दरअसल, भोपाल स्थित नवरत्न कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिक लिमिटेड (भेल) के कर्मचारी आठ दिनों तक एक कुत्ते को खोजते रहे। हुआ यह कि ये कर्मचारी अवधपुरी क्षेत्र की जिस सोसाइटी में रहते हैं, वहां एक कुत्ता प्रेमी महिला एक आवारा कुतिया को रोज खाना खिलाती थी। कालोनी में घूमने वाले आवारा कुत्तों को हटाने के क्रम में रहवासियों ने उसे भी भगा दिया। इससे दुखी होकर उस महिला ने भेल प्रबंधन, पुलिस आयुक्त, नगर आयुक्त, प्रधानमंत्री कार्यालय और पेटा जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं तक रहवासी कालोनी की सोसायटी के पदाधिकारियों की शिकायत कर दी। साथ ही पूर्व केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी कुत्ते के गायब होने को लेकर पत्र लिख दिया। छुट्टियों में कुत्ते पकड़ने का अनूठा 'ऑपरेशन' वहीं, भेल के जो कर्मचारी हैं, वे सोसायटी के पदाधिकारी थे। मामला बढ़ता देख भेल प्रबंधन ने भी कर्मचारियों को कुत्ते को खोजकर देने को कहा। ऐसे में भेल के कर्मचारी सहित सोसायटी के सभी पदाधिकारी अपनी होली और रंगपंचमी सहित आठ दिन तक खेतों में कुत्ते को पकड़ने के लिए उसके पीछे-पीछे घूमते रहे। कुत्ते की तलाश का ''आपरेशन'' कुछ यूं चला – पदाधिकारियों ने शहर की गली-गली में कुत्ते को ढूंढा। सातवें दिन वह एक सुदूर इलाके में खेतों में मिली, लेकिन हाथ नहीं आई। कुत्ते को पकड़ने के लिए पदाधिकारी अगले दो दिनों तक बिस्कुट, ब्रेड और मछली-मुर्गे का मांस लेकर उसके पीछे घूमते रहे, ताकि उसे लालच देकर काबू किया जा सके। 'नॉन-वेज' डिप्लोमेसी से मिली कामयाबी जहां पूरा शहर होली, भाईदूज और रंगपंचमी के जश्न में डूबा था, वहीं ये पदाधिकारी कुत्ते पकड़ने वालों की भूमिका निभा रहे थे। आखिरकार भारी मशक्कत और ''नान-वेज'' डिप्लोमेसी के बाद आठवें दिन कुत्ते को सुरक्षित पकड़कर वापस कालोनी लाया गया। तब जाकर महिला डाक्टर का गुस्सा शांत हुआ और प्रशासन ने अपनी फाइलें बंद कीं। कालोनी के लोग अब दबी जुबान में कह रहे हैं कि श्वानों को कालोनी से बाहर निकालना तो आसान था, लेकिन कानून और रसूख के शिकंजे से बाहर निकलना नामुमकिन हो गया था।

रातभर सफाई के दावे, लेकिन भोपाल के इन बाजारों में फिर भी पसरी गंदगी

भोपाल स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 की तैयारियों को लेकर नगर निगम भले ही बड़े-बड़े दावे कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। शहर के कई हिस्सों में रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था ठप पड़ी हुई है। पुराने शहर के व्यापारिक केंद्रों में सफाई व्यवस्था के हाल बेहाल हैं। जहांगीराबाद चौराहा, जो शहर का एक प्रमुख व्यस्त केंद्र है, वहां देर रात तक सड़कों का कचरा नहीं उठने से सुबह सड़कों के किनारे कचरा पसरा रहता है। यही स्थिति अशोका गार्डन क्षेत्र के परिक्रमा मार्ग की है। रात में यहां सफाई टीम के न पहुंचने के कारण कचरे का अंबार लग जाता है, जिससे यहां से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कागजों पर तैनात फौज, धरातल पर कर्मचारी गायब इसकी वजह यह है कि निगम के रिकॉर्ड में शहर के 85 वार्डों की सड़कों और बाजारों को चमकाने के लिए 326 सफाईकर्मियों की फौज तैनात है, लेकिन धरातल पर इनमें से बमुश्किल 50 कर्मचारी ही काम करते नजर आते हैं। नतीजा यह है कि सुबह होते ही पुराने शहर के प्रमुख बाजारों और मुख्य सड़कों पर कचरे के ढेर स्वच्छता अभियान को मुंह चिढ़ाते मिलते हैं। अशोका गार्डन के परिक्रमा मार्ग के आसपास रात 11:57 बजे फल, सब्जी सहित अन्य सामान के हाथ ठेले लग जाते हैं, जो सड़क किनारे ही कचरा फैलाते रहते हैं। ऐसे में सड़क किनारे कचरे का ढेर लग जाता है। वहीं, रात में सफाई के लिए तैनात अमले की अनुपस्थिति के कारण सड़क के दोनों ओर कचरा फैला रहता है। इससे रहवासी क्षेत्रों की सफाई भी प्रभावित हो रही है। जहांगीराबाद चौराहा: मुख्य मार्ग पर कचरे का अंबार पुराने शहर का हृदय कहे जाने वाले जहांगीराबाद चौराहा पर रात 12:38 बजे रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था का बुरा हाल मिला। चौराहे के पास ही मुख्य मार्ग किनारे कचरा फैला हुआ था। स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि रात दुकानों का कचरा लेने के लिए गाड़ी तो आती है, लेकिन सड़कों की सफाई के लिए कर्मचारी नहीं आते। आलम यह है कि सुबह व्यापारिक गतिविधियां शुरू होने से पहले ही मुख्य सड़क और चौराहे के किनारों पर कचरे का अंबार लग जाता है। स्वच्छ सर्वेक्षण के दावों के बीच यह व्यस्ततम इलाका नगर निगम की मॉनिटरिंग पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था में शहर की मुख्य सड़कों और बाजार क्षेत्रों की सफाई कराई जाती है। रोजाना करीब 25 से 30 टन कचरा रात में उठाया जाता है और कर्मचारियों की मॉनिटरिंग जीपीएस युक्त फोटो के जरिए की जा रही है। सुपरवाइजर द्वारा निगरानी की जाती है। बाजार क्षेत्र में रात में जहां सफाई नहीं हो पाती है, वहां सुबह जल्दी सफाई करा दी जाती है। – नितेश मिश्रा, एचओ, रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था  

‘200 रुपये की पुड़िया देकर कराए जा रहे अपराध’ – AAP का CM रेखा गुप्ता पर बड़ा हमला

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर बड़ा आरोप लगा दिया है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली में सीएम रेखा गुप्ता के संरक्षण में नशे का धंधा और फिर अपराध किए जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि ये जानकारी खुद पुलिस की ओर से दी गई है। आप दिल्ली के मुखिया सौरभ भारद्वाज ने रविवार को इस मामले पर सीएम रेखा गुप्ता के इस्तीफे मांग की है। सौरभ भारद्वाज ने कहा, दिल्ली में अपराध और नशा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। तमाम जगहों पर खुलेआम नशा बिक रहा है और पुलिस तस्करों को जानती भी है लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया जाता है। नाबालिग बच्चों को सूखा नशा कराया जाता है और उनसे आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिलाया जाता है। ऐसा ही कुछ वजीरपुर की JJ कॉलोनी में हुआ, वहां नशेड़ियों ने अपनी गैंग बुलाकर एक आदमी की हत्या कर दी और एक व्यक्ति अस्पताल में भर्ती है। सीएम रेखा गुप्ता पर अपराधियों को बचाने का आरोप आप नेता ने कहा, इस हत्याकांड के बाद इलाके की महिलायें पुलिस थाने पहुंची और उन्होंने SHO से कहा कि जब CCTV में सभी लोग नजर आ रहे हैं तो उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? इसके बाद SHO बताते हैं कि जब भी हम नशेड़ियों और तस्करों के खिलाफ एक्शन लेते हैं तब उन्हें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता बचाती हैं। सौरभ भारद्वाज ने कहा, दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर साफ-साफ कह रहे हैं कि जब-जब हम इन बदमाशों को पकड़ते हैं, तब-तब रेखा गुप्ता जी के यहां से इन्हें छोड़ने का आदेश आ जाता है। पूरी दिल्ली में नाबालिग बच्चों को नशा कराकर अपराध कराया जा रहा है। 200 रुपए की पुड़िया दी जाती है और खुलेआम गोलीबारी और चाकूबाजी कराई जाती है। ये सभी चीजें सीएम रेखा गुप्ता के संरक्षण में खुल्लम खुल्ला चल रही हैं।

बस्तर के ग्राम तुआरास-चितापुर की महिलाएं लखपति दीदी संवाद कार्यक्रम रायपुर में हुई सम्मानित

रायपुर वनांचल की किस्मत बदलने वाली फसल साबित हुई इमली इमली प्रसंस्करण समिति चितापुर की महिला समूह की दीदियों ने अपनी मेहनत और लगन के बूते यह सिद्ध कर दिया है कि यदि ग्रामीण संसाधनों का सही तरीके से प्रसंस्करण किया जाए, तो आर्थिक स्वावलंबन की राह आसान हो जाती है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत गठित उत्पादक समूह आजीविका इमली प्रसंस्करण समिति की दीदियों ने इमली के परंपरागत संग्रहण को एक आधुनिक और लाभप्रद व्यवसाय का रूप दे दिया है। समूह की इन महिलाओं द्वारा किए जा रहे इसी उत्कृष्ट और संगठित कार्य को पिछले दिनों राजधानी रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आयोजित लखपति दीदी संवाद कार्यक्रम में विशेष रूप से रेखांकित करते हुए उन्हें मंच पर सम्मानित किया गया।       बस्तर जिले के दरभा विकासखंड अंतर्गत सुदूर ग्राम तुआरास-चितापुर की महिलाओं ने अपनी मेहनत और नवाचार से इमली को वनांचल की किस्मत बदल देने वाली फसल साबित कर दिखाया है। इस समूह की कार्यप्रणाली पूर्णतः पेशेवर और गुणवत्ता पर आधारित है, जहाँ महिलाएँ स्वयं इमली की खरीदी सुनिश्चित करती हैं। खरीदी के उपरांत समूह की सदस्य बड़ी ही कुशलता से इमली का रेशा और बीज निकालकर उसे पूरी तरह शुद्ध करती हैं। महिलाओं के इसी हुनर का परिणाम है कि आज वे साधारण इमली से उच्च गुणवत्ता वाला इमली फूल और विशेष रूप से इमली चपाती तैयार कर रही हैं, जिसकी बाजार में भारी मांग है।             आजीविका इमली प्रसंस्करण समिति चितापुर की सदस्य पदमिनी कश्यप बताती हैं कि अब ग्राहकों की सुविधा और बाजार की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इन उत्पादों की 200 ग्राम, 500 ग्राम और 1000 ग्राम के आकर्षक पैकेटों में पैकेजिंग कर स्वयं इसका विक्रय भी संभाल रही हैं। बिहान योजना के माध्यम से एकजुट होकर इन महिलाओं ने न केवल अपनी आय में वृद्धि की है, बल्कि लखपति दीदी बनने की दिशा में एक सशक्त कदम बढ़ाया है। कार्यक्रम में इन महिलाओं के अटूट परिश्रम और उद्यमशीलता की मुक्त कंठ से सराहना की गई, जो आज पूरे बस्तर संभाग के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी हुई हैं। यह सम्मान दरभा की उन सैकड़ों महिलाओं के सामूहिक प्रयास की जीत है, जो अब आर्थिक रूप से सुदृढ़ होकर समाज की मुख्यधारा में अपना स्थान बना रही हैं।