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Bhopal Metro : 2030 तक 28 स्टेशन और ‘ऑरेंज-ब्लू’ लाइन का निर्माण होगा पूरा

भोपाल   मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत भदभदा से रत्नागिरी मेट्रो लाइन में पहला स्लैब पिपलानी से जेके रोड के बीच डाला जाएगा। इसकी तैयारी हो चुकी है। करीब डेढ़ किमी का स्लैब बिछाया जाएगा। अगले दो से तीन माह में इसे पुल बोगदा तक लाया जाएगा। भदभदा से डिपो चौराहा तक भी पियर्स का काम तेजी से हो रहा है। यहां भी इस साल आखिर तक स्लैब का काम शुरू हो जाएगा। साल 2027 तक ब्लू लाइन का 80 प्रतिशत काम पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। बताया जा रहा है कि जिस तरह ऑरेंज लाइन में एम्स से सुभाष ब्रिज तक छह स्टेशनों का काम कर ट्रेन शुरू की, उसी तरह ब्लू लाइन में रत्नागिरी तिराहा से ऐशबाग तक ट्रेन शुरू करने का लक्ष्य है। बढ़ी नई समय सीमा के तहत 2030 तक ऑरेंज व ब्लू लाइन पर काम पूरा करना है। हालांकि मेट्रो रेल कॉरपोरेशन 2027-28 तक का लक्ष्य लेकर काम कर रहा है। मेट्रो लाइन पर आपत्तियां भी डिपो चौराहा से जहांगीराबाद तक की एलीवेटेड लाइन पर सांसद आलोक शर्मा आपत्ति जता चुके हैं। उनके अनुसार ये वीआइपी व संवेदनशील क्षेत्र है, इसलिए यहां मेट्रो लाइन अंडरग्राउंड होनी चाहिए। इसी तरह बड़ा बाग की ओर मेट्रो की लाइन पर विधायक आतिफ अकील ने आपत्ति ली थी। यहां अंडरग्राउंड कितनी हो, एलीवेटेड कितनी हो, इसे नए सिरे से तय करने की मांग की। ऐसे समझें मेट्रो -16 किमी लंबी है ऑरेंज लाइन एम्स से करोंद तक -14 किमी लंबी है ब्लू लाइन भदभदा से रत्नागिरी तिराहा तक -16 स्टेशन है ऑरेंज मेट्रो लाइन में -12 स्टेशन है ब्लू मेट्रो लाइन में -07 किमी में मेट्रो ट्रेन एम्स से सुभाष स्टेशन तक संचालित हो चुकी है -11 हजार करोड़ रुपए लागत तय है अभी दोनों लाइनों की -2030 तक की नई बढ़ाई हुई समय सीमा -3.39 किमी लंबाई में अंडरग्राउंड लाइन भी बन रही है काम तेजी से पूरा किया जा रहा है। हर काम की समय सीमा तय की है और मॉनीटरिंग का शेड्यूल भी बनाया है। – चैतन्य कृष्णा, एमडी मेट्रो रेल बनेंगे ‘2 अंडरग्राउंड’ मेट्रो स्टेशन मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत 3.36 किमी लंबाई की अंडरग्राउंड लाइन बनाना तय है। ऐशबाग से डीआइजी बंगला, सिंधी कॉलोनी तक भोपाल स्टेशन व नादरा बस स्टैंड होते हुए काम होगा। इसे पूरा करने शुरुआत में तीन से चार माह का लक्ष्य तय किया था। इसके लिए तीन मशीनों से काम शुरू करना था, लेकिन अभी एक मशीन ही उतारी गई। दो अन्य उतारनी बाकी है। इस कॉरिडोर में दो अंडरग्राउंड स्टेशन बनाए जा रहे हैं। जिनकी लंबाई करीब 180-180 मीटर होगी। टीबीएम से बनी सुरंग 3.39 किमी तक जाएगी। इसके बाद बड़ा बाग के पास नादरा स्टेशन के आगे 143 मीटर स्लोप के जरिए मेट्रो फिर जमीन के ऊपर आ जाएगी।  

भोपाल मेट्रो का संचालन समय बदला, अब सुबह 11 बजे से शाम 4.30 बजे तक ही चलेगी

भोपाल  राजधानी में मेट्रो यात्रियों के लिए समय में बदलाव किया गया है।आज 3 अप्रैल, शुक्रवार से मेट्रो ट्रेनें अब सुबह 11 बजे से शाम 4:30 बजे तक संचालित होंगी। अब तक मेट्रो सेवाएं दोपहर 12 बजे से शाम 7:30 बजे तक चल रही थीं। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी काम पूरा होते ही समय को फिर से सामान्य किया जा सकता है। मेट्रो का संचालन फिलहाल सुभाष नगर स्टेशन से लेकर एम्स तक हो रहा है, जिसमें कुल आठ स्टेशन शामिल हैं। यह रूट शुरुआत से ही ट्रायल और सीमित संचालन के तहत चलाया जा रहा है।  टनल बनाने का काम जल्द होगा शुरू मेट्रो परियोजना के तहत अंडरग्राउंड टनल बनाने का काम भी अब तेजी पकड़ने वाला है। टनल बोरिंग मशीन (TBM) अगले दो-तीन दिनों में खुदाई शुरू करेगी। मशीन को हाल ही में 24 मीटर गहराई तक उतारा गया है और फिलहाल उसकी तकनीकी सेटिंग का काम चल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मशीन प्रतिदिन करीब 14 मीटर तक खुदाई कर सकती है, लेकिन भोपाल की पथरीली जमीन को देखते हुए यह गति घटकर 5 से 7 मीटर प्रतिदिन रहने की संभावना है। पहली मशीन द्वारा करीब 50 मीटर टनल तैयार करने के बाद दूसरी TBM  को भी उतारा जाएगा। दोनों मशीनों के जरिए टनल निर्माण का काम आगे बढ़ाया जाएगा। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि सुभाष नगर से एम्स के बीच प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम शुरू हुआ है। करीब 30 किमी के लिए हुए 800 करोड़ रुपए के टेंडर का यह पहला चरण है। अभी सिग्नलिंग सिस्टम नहीं होने के कारण मेट्रो प्रबंधन को मजबूरन केवल एक ही ट्रैक (डाउन ट्रैक) पर ट्रेन चलानी पड़ रही हैं। यही वजह है कि ट्रेनों की फ्रिक्वेंसी 75 मिनट रखी गई है, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। सिग्नलिंग के काम के चलते ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर का ट्रैक प्रभावित रहेगा। हालांकि, प्रबंधन ने यह साफ नहीं किया है कि काम कब तक चलेगा और मेट्रो कब तक इसी टाइमिंग पर चलती रहेगी। 20 दिसंबर-25 को शुरू हुई थी मेट्रो भोपाल मेट्रो का उद्घाटन पिछले साल 20 दिसंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्‌टर ने किया था। इसके अगले दिन यानी, 21 दिसंबर से कमर्शियल रन शुरू हो गया। इस दिन से आम लोग मेट्रो में सफर करने लगे। मेट्रो को शुरुआत में अच्छे पैसेंजर मिले, लेकिन बाद में संख्या घटती गई। वर्तमान में मेट्रो में न के बराबर यात्री सफर कर रहे हैं। 5 जनवरी को पहली बार टाइमिंग और फेरे बदले गए थे। शुरुआत में 17 फेरे और सुबह 9 बजे से मेट्रो दौड़ने लगी थी। जब बदलाव हुआ तो फेरे घटकर 13 हो गए। वहीं, टाइमिंग दोपहर 12 से शाम 7.30 बजे तक कर दी गई थी। वर्तमान में इसी टाइमिंग पर मेट्रो का संचालन हो रहा था। तीसरी बार शेड्यूल बनने के बाद फेरे 13 से घटकर 9 हो गए हैं। इनमें एम्स से सुभाषनगर के बीच 5 और सुभाषनगर से एम्स के बीच 4 फेरे शामिल हैं। डेढ़ साल तक चलेगा निर्माण कार्य टनल की खुदाई पूरी होने में करीब दो महीने लग सकते हैं, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। पूरा निर्माण कार्य पूरा होने में कम से कम डेढ़ साल का समय लगने का अनुमान है। यह टनल ओल्ड रेलवे स्टेशन क्षेत्र से पुल पातरा की ओर निकलेगा और इसमें अप और डाउन दोनों दिशाओं के लिए अलग-अलग मेट्रो लाइन बनाई जाएंगी।  भोपाल में लागू हुई नई कलेक्टर गाइडलाइन, मेट्रो ट्रैक के किनारे जाम जस के तस!  नये फाइनेंशियल ईयर के शुरू होने के साथ ही राजधानी भोपाल में नई कलेक्टर गाइडलाइन भी लागू हो गई है. जिसके बाद अब भोपाल में प्रॉपर्टी खरीदने से लेकर रजिस्ट्री कराना महंगा हो गया है. नई गाइडलाइन में भोपाल मेट्रो ट्रैक के प्रॉपर्टी रेट को लगातार दूसरे साल भी नहीं बढ़ाया गया है. जिसके पीछे वजह इन इलाकों में रेट कम रखकर यहां तेजी से डेवलपमेंट करना बताई जा रही है. कलेक्टर गाइडलाइन में तय दर 13 हजार रुपए वर्गमीटर से लेकर 40 हजार वर्गमीटर तक तय हुई है. जिसके बाद हर वर्गफीट 1300 रुपए से लेकर 4000 रुपए पंजीयन शुल्क लगेगा।  भोपाल मेट्रो के किनारे तेज होगा डेवलपमेंट वर्क, एक ही जगह रेजिडेंशियल-कॉमर्शियल स्पेस और मार्केट बनाने की प्लानिंग मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकार भोपाल मेट्रो कॉर्रिडोर के आस-पास ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) वर्क को बूस्ट देने के लिए लगातार दूसरे साल कलेक्टर गाइडलाइन में मेट्रो के किनारे की जमीन के रेट नहीं बदले गए हैं. प्रदेश सरकार इन इलाकों में एक ही जगह पर रेजिडेंशियल-कॉमर्शियल और मार्केट स्पेस बनाने पर प्लांनिग कर रही है।  पुराने भोपाल इतना हुआ प्रति वर्गमीटर प्रॉपर्टी का रेट अगर बात की जाए मेट्रो कॉर्रिडोर किनारे सबसे महंगी जमीन की तो भोपाल में करोंद इलाके में रेट सबसे हाई हैं. जहां नई गाइडलाइन में करोंद इलाके में रजिस्ट्री दर 40 हजार रुपए वर्गमीटर निर्धारित की गई है. इसके अलावा पुराने भोपाल में नए प्रॉपर्टी के रेट 12 हजार रुपए वर्गमीटर से 15 हजार वर्गमीटर निर्धारित किया गया है। 

भोपाल मेट्रो को मिली हरी झंडी, प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम की शुरुआत, दिल्ली जैसी सुविधा मिलेगी

भोपाल  शहर में मेट्रो की धीमी रफ्तार को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब सुधार की दिशा में काम शुरू हो गया है। सुभाष नगर से एम्स तक के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। करीब 30 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 800 करोड़ रुपए का टेंडर दिया गया है। अभी मेट्रो एक ही ट्रैक पर चल रही है। यही वजह है कि यात्रियों को ट्रेन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। मौजूदा समय में एक ट्रेन के बाद दूसरी ट्रेन आने में करीब 75 मिनट लग जाते हैं। ऐसे में रोजाना सफर करने वालों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। दरअसल, सुभाष नगर से एम्स के बीच डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों तरफ चलाई जा रही है। यानी जो ट्रेन आगे जाती है, वही उसी ट्रैक से वापस लौटती है। अप ट्रैक तैयार तो है, लेकिन सिग्नलिंग सिस्टम के बिना उस पर संचालन संभव नहीं है। इसी कारण मेट्रो अपनी पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही। मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक, सिग्नलिंग सिस्टम लगने के बाद हालात बदल जाएंगे। दोनों ट्रैक पर एक साथ ट्रेनें चल सकेंगी और उनके बीच का अंतर भी कम होगा। इससे ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी और यात्रियों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जानकार बताते हैं कि सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो सेवा के लिए बेहद जरूरी होता है। यही सिस्टम ट्रेनों की गति, उनके बीच की दूरी और सुरक्षा को नियंत्रित करता है। इसके बिना मल्टी-ट्रैक संचालन संभव नहीं होता। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि काम पूरा होने के बाद सेफ्टी ट्रायल कराया जाएगा। इसके लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) को बुलाया जाएगा। उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही अप ट्रैक पर नियमित संचालन शुरू किया जाएगा। दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक तकनीक भोपाल में भी लागू की जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे मेट्रो सेवा ज्यादा भरोसेमंद और तेज होगी। अभी कम स्पीड और ज्यादा इंतजार के कारण यात्रियों की संख्या भी सीमित है, लेकिन आने वाले समय में इसमें बढ़ोतरी होने की संभावना है। शहर के लोगों के लिए यह राहत की खबर है। अगर सब कुछ तय समय पर पूरा होता है, तो भोपाल मेट्रो आने वाले महीनों में ज्यादा सुविधाजनक और उपयोगी साबित हो सकती है। मेट्रो की रीढ़ होता है सिग्नलिंग सिस्टम जानकारों के मुताबिक सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क का सबसे अहम हिस्सा होता है। यही तय करता है कि ट्रेन कितनी दूरी पर चलेगी। ट्रेन की अधिकतम और न्यूनतम गति नियंत्रित करता है। ट्रेनों के बीच सुरक्षित गैप बनाए रखता है। ऑटोमेटेड ऑपरेशन और इमरजेंसी कंट्रोल संभालता है। सिस्टम के बिना मल्टी-ट्रैक ऑपरेशन संभव नहीं होता, जिससे पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाता। अप्रैल में फिर होगा सेफ्टी ट्रायल     सिग्नलिंग का काम पूरा होने के बाद मेट्रो प्रबंधन एक बार फिर कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) को निरीक्षण के लिए बुलाएगा।     जरूरी परीक्षण और सेफ्टी क्लियरेंस मिलने के बाद ही अप ट्रैक पर भी नियमित संचालन शुरू किया जाएगा। दिल्ली मेट्रो जैसी तकनीक लगेगी भोपाल मेट्रो में वही आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है, जो दिल्ली मेट्रो में इस्तेमाल होती है। इस तकनीक के लागू होने के बाद ट्रेन दोनों ट्रैक पर चल सकेंगी। ट्रेनों के बीच का अंतर (हेडवे) कम होगा और फ्रिक्वेंसी तेजी से बढ़ाई जा सकेगी।

भोपाल मेट्रो का बड़ा कदम: 15 मीटर नीचे पहुंची TBM मशीन, पुराने शहर में बनेगी अंडरग्राउंड सुरंग

भोपाल राजधानी में मेट्रो रेल परियोजना अब अपने सबसे चुनौतीपूर्ण और रोमांचक चरण में प्रवेश कर रही है। भोपाल मेट्रो की आरेंज लाइन के तहत भोपाल रेलवे स्टेशन से नादरा बस स्टैंड तक 3.39 किलोमीटर लंबे भूमिगत कॉरिडोर के निर्माण की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस ट्विन टनल को बनाने के लिए टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का पहला पार्ट क्रेन के जरिए करीब 15 मीटर जमीन की गहराई में उतारा जा चुका है। तकनीकी इंस्टालेशन और जांच के बाद मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल के पहले सप्ताह से जमीन के अंदर सुरंग बनाने के लिए जमीन की खोदाई का काम शुरू हो सकता है। पुल पातरा और सिंधी कालोनी में एक अंडरग्राउंड रैंप बनाया जाएगा, जिसके जरिए मेट्रो ट्रेन भूमिगत स्टेशन तक पहुंचेगी। दिसंबर में बेंगलुरु से आई थी टीबीएम मशीन यह टीबीएम मशीन दिसंबर 2025 में बेंगलुरु से भोपाल पहुंची थी। टीबीएम के कुल तीन से चार बड़े हिस्से हैं, जिन्हें एक-एक कर जमीन के नीचे उतारा जाएगा। पूरी तरह असेंबल होने के बाद यह मशीन 19 से 20 मीटर की गहराई पर जाकर सुरंग के लिए जमीन की खोदाई करेगी। यह टनल भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे शहर के सबसे घने और व्यस्त इलाकों के नीचे से गुजरेगी। हालांकि मेट्रो प्रबंधन का दावा है कि टीबीएम से खोदाई के दौरान किसी भी प्रकार का कंपन नहीं होगा और ऊपर रहने वाले लोगों को इसका आभास भी नहीं होगा। पुरानी इमारतों की सुरक्षा और विरासत की चुनौती सुरक्षा के लिहाज से प्रबंधन उन पुरानी इमारतों और होटलों को लेकर सतर्क है जो पुल पातरा से सिंधी कालोनी के बीच स्थित हैं। इनमें से कई इमारतें काफी जर्जर और पुरानी हैं। इस भूमिगत तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि शहर के व्यस्ततम रास्तों के नीचे काम चलने के बावजूद ऊपर का ट्रैफिक और ऐतिहासिक विरासतें पूरी तरह अप्रभावित रहेंगी। यह पूरा प्रोजेक्ट पैकेज बीएच-04 के तहत संचालित किया जा रहा है। एक नजर में भूमिगत कॉरिडोर (ऑरेंज लाइन)     क्षेत्र: भोपाल रेलवे स्टेशन से नादरा बस स्टैंड तक     टनल की लंबाई: लगभग 3.39 किलोमीटर     संरचना: 02 समानांतर सुरंगें     गहराई: 20 मीटर की गहराई में सुरंग बनाएगी मशीन मशीन की तकनीकी क्षमता     नाम: टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम)     आगमन: दिसंबर 2025 (बेंगलुरु से भोपाल लाई गई)     व्यास: 5.8 मीटर     क्षमता: एक मशीन की प्रतिदिन 15 मीटर खोदाई की क्षमता     स्थिति: 15 मीटर गहराई पर उतारा गया मशीन का पहला पार्ट  

मेट्रो का रोमांचक सफर: भोपाल में मार्च से शुरू होगा रैंप निर्माण, ट्रेन जाएगी जमीन से ऊपर

 भोपाल  शहर में मेट्रो परियोजना के लिए तकनीकी रूप से सबसे महत्वपूर्ण माने जा रहे मेट्रो रैंप निर्माण का काम मार्च से शुरू होने की संभावना है। यह मेट्रो रैंप पुल पातरा और सिंधी कॉलोनी क्षेत्र के पास प्रस्तावित है, जो अंडरग्राउंड और एलिवेटेड मेट्रो कारिडोर को आपस में जोड़ेगा। मेट्रो ट्रेन भूमिगत सेक्शन से बाहर निकलकर एलिवेटेड ट्रैक पर दौड़ेगी, इसलिए इसका निर्माण पूरे प्रोजेक्ट के लिए बहुत अहम माना जा रहा है। हालांकि, फिलहाल निर्माण की राह में कई अड़चनें हैं। पहली पुल पातरा की ओर टिंबर मार्केट, जो रैंप निर्माण में बाधा बना हुआ है। इसके शिफ्ट होने के बाद यहां सबसे पहले रैंप का निर्माण शुरू किया जाएगा। वहीं, दूसरी सिंधी कॉलोनी क्षेत्र में मकान और दुकानें रैंप के दायरे में आ रहे हैं। यह मामला अभी ज्वाइंट सर्वे में उलझा हुआ है। मेट्रो प्रबंधन अपनी ओर से सर्वे पूरा कर चुका है, लेकिन जिला प्रशासन की तरफ से सर्वे प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है। मेट्रो के अधिकारी बताते हैं कि टिंबर मार्केट की शिफ्टिंग को लेकर गुरुवार को लॉटरी है। इसके बाद टिंबर मार्केट की दुकानें शिफ्ट होने लगेंगी। इसलिए रैंप बनाने के काम की शुरुआत सबसे पहले पुल पतारा से होगी। ट्रैफिक डायवर्जन के लिए कार्ययोजना की जा रही तैयार निर्माण के दौरान यातायात व्यवस्था को लेकर मेट्रो प्रबंधन ने योजना तैयार करने को कहा है। मेट्रो रैंप निर्माण कार्य के दौरान क्षेत्र में आंशिक ट्रैफिक डायवर्जन किया जाएगा, ताकि आम लोगों को कम से कम परेशानी हो। कुल मिलाकर मेट्रो रैंप निर्माण मेट्रो परियोजना को नई गति देने वाला अहम कदम साबित होगा। मेट्रो रैंप निर्माण को लेकर टेस्ट पाइल का कार्य जारी है और अतिक्रमण हटने के बाद ज्वाइंट सर्वे किया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले सप्ताह ज्वाइंट सर्वे हो सकता है। इसके बाद जिन मकानों और दुकानों का निर्माण कार्य में हस्तक्षेप हो रहा है, उन्हें मुआवजा देकर भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई की जाएगी। मेट्रो रैंप का निर्माण शुरू होते ही अंडरग्राउंड सेक्शन के काम को भी तय समय सीमा में पूरा करने में मदद मिलेगी। टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) समेत अन्य जरूरी मशीनरी साइट पर पहुंचने लगी है। रेलवे स्टेशन के पास अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन के लिए खुदाई पहले ही शुरू हो चुकी है। टनल बोरिंग मशीन के जरिए अंडर ग्राउंड कारिडोर बनाया जाना है।

भोपाल मेट्रो में यात्रियों की कमी, शेड्यूल में बदलाव—अब ट्रेन चलेगी दोपहर से शाम तक

भोपाल  राजधानी भोपाल में जल्दबाजी में शुरू की गई मेट्रो सेवा अब सवालों के घेरे में है. एक ओर मेट्रो स्टेशनों और रूट को लेकर खामियां सामने आईं, तो दूसरी ओर आधे-अधूरे कॉरिडोर पर चलाई जा रही मेट्रो अब सवारी की कमी से जूझ रही है. हालत यह है कि संचालन के महज 15 दिन में ही भोपाल मेट्रो की रफ्तार थमने लगी है और संचालन समय व ट्रिप में कटौती करनी पड़ रही है. 21 दिसंबर से आम यात्रियों के लिए शुरु हुआ था संचालन भोपाल मेट्रो को 20 दिसंबर 2025 को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरी झंडी दिखाकर किया था. जबकि इसके अगले दिन 21 दिसंबर से आम जनता के लिए मेट्रो के गेट खोल दिए गए. शुरुआती एक-दो दिन लोगों में उत्सुकता दिखी और करीब 5 से 6 हजार यात्रियों ने मेट्रो में सफर किया. लेकिन यह उत्साह ज्यादा दिन टिक नहीं सका. दिन गुजरने के साथ यात्रियों की संख्या लगातार घटती चली गई. अब सुबह 9 बजे से नहीं होगा संचालन वर्तमान में स्थिति यह हो गई कि अब रोजाना केवल 500 से 800 यात्री ही मेट्रो का इस्तेमाल कर रहे हैं. कई बार पूरी की पूरी ट्रेन बिना यात्रियों के ही स्टेशन से गुजरती नजर आ रही है. यात्रियों की इस भारी कमी ने मेट्रो कॉर्पोरेशन की चिंता बढ़ा दी है. इसी के चलते भोपाल मेट्रो कॉर्पोरेशन ने संचालन शेड्यूल में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है. अब सुबह 9 बजे की जगह दोपहर 12 बजे से मेट्रो का संचालन होगा. अब दोपहर से शाम तक 13 ट्रिप चलेगी टाइम टेबल में बदलाव के साथ भोपाल मेट्रो में ट्रिप की संख्या भी 17 से घटाकर 13 कर दी गई है. नया शेड्यूल 5 जनवरी यानि आज से प्रभावी रहेगा. नए शेड्यूल के अनुसार, मेट्रो दोपहर 12 बजे से शाम साढ़े 7 बजे तक ही चलेगी. पहली ट्रेन दोपहर 12 बजे एम्स स्टेशन से रवाना होकर 12 बजकर 25 मिनट पर सुभाष नगर स्टेशन पहुंचेगी. इसके बाद 12 बजकर 40 मिनट पर सुभाष नगर से रवाना होकर 1 बजकर 5 मिनट पर एम्स पहुंचेगी. इस तरह मेट्रो लगभग 75 मिनट के अंतराल में अपनी राउंड ट्रिप पूरी करेगी. इस तरह घटता गया यात्रियों का ग्राफ यात्रियों के आंकड़े भी मेट्रो की गिरती साख को बयां कर रहे हैं. 21 दिसंबर से 2 जनवरी तक कुल 29 हजार यात्रियों ने भोपाल मेट्रो में सफर किया. पहले दिन 6 हजार 568 यात्रियों ने मेट्रो का इस्तेमाल किया. 22 दिसंबर को 2 हजार 896 यात्रियों. 23 को 2 हजार 163 यात्रियों, 24 को 1 हजार 787 यात्रियों, 25 को 4 हजार 264 यात्रियों, 26 को 1 हजार 473 यात्रियों, 27 को 1200 यात्रियों, 28 को 2 हजार 349 यात्रियों, 29 को 1100 यात्रियों, 30 को 967 यात्रियों, 31 को 1 हजार 113 यात्रियों, एक जनवरी को 2 हजार 23 और दो जनवरी को सिर्फ 1 हजार 65 यात्रियों ने ही सफर किया. सवारियों को आकर्षित करना बड़ी चुनौती आर्किटेक्ट और टाउन प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ का कहना है कि, ''भोपाल में मेट्रो जिस मार्ग पर चल रही है, वहां मेट्रो के अलावा बस व अन्य साधन भी मौजूद हैं. इसके साथ ही भोपाल मेट्रो में एम्स से सुभाष नगर तक करीब 7 किलोमीटर पहुंचने में 35 से 40 मिनट लग रहे हैं. जबकि इसी मार्ग पर महज 10 से 15 मिनट में किसी अन्य परिवहन से पहुंचा जा सकता है.'' कुलश्रेष्ठ ने कहा कि, ''इतने कम समय में शेड्यूल बदलने और ट्रिप घटाने को लेकर सोशल मीडिया पर भी मेट्रो को लेकर तंज कसे जा रहे हैं. फिलहाल भोपाल मेट्रो के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों को आकर्षित करना और नियमित सवारी बढ़ाना है.'' शाम को 30 मिनट बढ़ाया गया मेट्रो का समय भोपाल मेट्रो के समय में बदलाव क्यों किया गया है, इसको लेकर कोई भी अधिकारी बयान देने से बच रहे हैं. मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कार्पेारेशन के एमडी कृष्णा चैतन्य का कहना है कि, ''सुबह ठंड के कारण लोग कम निकलना पसंद कर रहे हैं. जिससे सुबह के समय लोगों की संख्या कम रहती है. लेकिन दोपहर के बाद सवारियों की भीड़ बढ़ती है. इसलिए पहले मेट्रो का संचालन शाम 7.25 बजे तक किया जा रहा था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 7.55 बजे तक किया गया है.''

यात्री नहीं मिले तो बदला प्लान: भोपाल मेट्रो का 14 दिन में शेड्यूल रिवाइज

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की मेट्रो को अब एक चौथाई पैसेंजर भी नहीं मिल रहे हैं। यही कारण है कि, मेट्रो कॉर्पोरेशन ने शुरुआत के सिर्फ 14 दिन बाद मेट्रो की टाइमिंग में बदलाव करने के साथ ही ट्रिप भी घटा दी है। अब मेट्रो एम्स स्टेशन से सुबह 09 बजे की बजाय 03 घंटे की देरी से दोपहर 12 बजे शुरू होगी, जबकि यही से शाम साढ़े सात बजे आखिरी ट्रिप चलेगी। नया शेड्यूल 05 जनवरी से लागू होने जा रहा है। भोपाल मेट्रो का उद्घाटन 20 दिसंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने किया था। इसके अगले दिन यानी 21 दिसंबर से कमर्शियल रन शुरू हो गया। इस दिन से आम लोग मेट्रो में सफर करने लगे। ऐसे में कमर्शियल रन के पहले दिन मेट्रो में सफर करने को लेकर लोगों में उत्साह देखने को मिला था। इस दौरान 6568 पैसेंजर सवार हुए थे। अब करीब एक हजार यात्री मेट्रो में हो रहे सवार वहीं, अब एक हजार के आसपास ही यात्री मेट्रो में सवार हो रहे हैं। इस वजह से मेट्रो कॉर्पोरेशन ने टाइमिंग और ट्रिप दोनों में बदलाव कर दिया है।   ऐसा रहेगा नया शेड्यूल -मेट्रो अब 3 घंटे देरी से दोपहर 12 बजे से चलेगी।, जबकि रात 7:55 बजे तक इसका संचालन होगा -शाम 7:30 बजे एम्स से सुभाष नगर के बीच आखिरी मेट्रो दौड़ेगी, जो 25 मिनट में सुभाष नगर स्टेशन पहुंचेंगी। -पहले की तरह 75 मिनट के अंतराल में मेट्रो मिलेगी। यानी, एक गाड़ी छूटने के बाद दूसरी गाड़ी सवा घंटे बाद ही मिल सकेगी। -पहले दोनों ओर कुल 17 ट्रिप लगाई जा रही थी, जो घटाकर 13 कर दी गई है। -एम्स से सुभाषनगर के बीच सात और सुभाषनगर से एम्स के बीच छह ट्रिप लगेगी।   अब ये रहेगी टाइमिंग -पहली मेट्रो दोपहर 12 बजे एम्स स्टेशन से शुरू होगी, जो दोपहर 12:40 बजे सुभाषनगर स्टेशन पहुंचेगी। -आखिरी मेट्रो शाम 7:30 बजे एम्स से शुरू होकर 7:55 बजे सुभाषनगर स्टेशन पर पहुंचेगी। किस दिन कितने पैसेंजर मिले -21 दिसंबर को मिले 6,568 पैसेंजर। -22 दिसंबर को मिले 2,896 पैसेंजर। -23 दिसंबर को मिले 2,163 पैसेंजर। -24 दिसंबर को मिले 1,787 पैसेंजर। -25 दिसंबर को मिले 4,264 पैसेंजर। -26 दिसंबर को मिले 1,473 पैसेंजर। -27 दिसंबर को मिले 1,200 पैसेंजर। -28 दिसंबर को मिले 2,349 पैसेंजर। -29 दिसंबर को मिले 1,100 पैसेंजर। -30 दिसंबर को मिले 9,67 पैसेंजर। -31 दिसंबर को मिले 1113 पैसेंजर। -01 जनवरी को मिले 2,023 पैसेंजर। -02 जनवरी को मिले 1,065 पैसेंजर।

भोपाल में मेट्रो को यात्री न मिलने से 14 दिन बाद ही घटाया समय और ट्रिप

भोपाल. भोपाल मेट्रो को अब एक चौथाई पैसेंजर भी नहीं मिल रहे हैं। यही कारण है कि मेट्रो कॉर्पोरेशन ने शुरुआत के सिर्फ 14 दिन बाद ही मेट्रो की टाइमिंग में बदलाव करने के साथ ही ट्रिप भी घटा दी है। अब मेट्रो एम्स स्टेशन से सुबह नौ बजे की बजाय तीन घंटे की देरी से दोपहर 12 बजे शुरू होगी, जबकि यही से शाम साढ़े सात बजे आखिरी ट्रिप चलेगी। नया शेड्यूल पांच जनवरी से लागू होगा। भोपाल मेट्रो का उद्घाटन 20 दिसंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल ने किया था। इसके अगले दिन यानी 21 दिसंबर से कमर्शियल रन शुरू हो गया। इस दिन से आम लोग मेट्रो में सफर करने लगे। ऐसे में कमर्शियल रन के पहले दिन मेट्रो में सफर करने को लेकर लोगों में उत्साह देखने को मिला था। इस दौरान 6568 पैसेंजर सवार हुए थे। अब करीब एक हजार यात्री मेट्रो में हो रहे सवार वहीं, अब एक हजार के आसपास ही यात्री मेट्रो में सवार हो रहे हैं। इस वजह से मेट्रो कॉर्पोरेशन ने टाइमिंग और ट्रिप दोनों में बदलाव कर दिया है। ऐसा रहेगा नया शेड्यूल मेट्रो अब तीन घंटे देरी से दोपहर 12 बजे शुरू होगी, जबकि रात 7:55 बजे तक यह चलेगी। शाम 7:30 बजे एम्स से सुभाष नगर के बीच आखिरी मेट्रो दौड़ेगी, जो 25 मिनट में सुभाष नगर स्टेशन पहुंचेंगी। पहले की तरह 75 मिनट के अंतराल में मेट्रो मिलेगी। यानी, एक गाड़ी छूटने के बाद दूसरी गाड़ी सवा घंटे बाद ही मिल सकेगी। पहले दोनों ओर कुल 17 ट्रिप लगाई जा रही थी, जो घटाकर 13 कर दी गई है। एम्स से सुभाषनगर के बीच सात और सुभाषनगर से एम्स के बीच छह ट्रिप लगेगी। अब ये रहेगी टाइमिंग पहली मेट्रो दोपहर 12 बजे एम्स स्टेशन से शुरू होगी, जो दोपहर 12:40 बजे सुभाषनगर स्टेशन पहुंचेगी। आखिरी मेट्रो शाम 7:30 बजे एम्स से शुरू होकर 7:55 बजे सुभाषनगर स्टेशन पर पहुंचेगी। किस दिन कितने पैसेंजर मिले 21 दिसंबरः 6,568 पैसेंजर 22 दिसंबरः 2,896 पैसेंजर 23 दिसंबरः 2,163 पैसेंजर 24 दिसंबरः 1,787 पैसेंजर 25 दिसंबरः 4,264 पैसेंजर 26 दिसंबरः 1,473 पैसेंजर 27 दिसंबरः 1,200 पैसेंजर 28 दिसंबरः 2,349 पैसेंजर 29 दिसंबरः 1,100 पैसेंजर 30 दिसंबरः 9,67 पैसेंजर 31 दिसंबरः 1113 पैसेंजर 01 जनवरीः 2,023 पैसेंजर 02 जनवरीः 1,065 पैसेंजर

भोपाल मेट्रो में लागू नए नियम, नो डिस्टरबेंस जोन में शांति बनाए रखना जरूरी, उल्लंघन पर सजा

भोपाल  भोपाल मेट्रो के शुरू होते ही प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कोई भी कोर-कसर बाकी नहीं रखना चाहता, इसी का नतीजा है कि यात्रियों की सुविधाओं के साथ ही प्रशासन ने उनकी सुरक्षा को लेकर भी बड़ा कदम उठाया है। दरअसल मेट्रो प्रबंधन ने प्लेटफॉर्म पर बड़े-बड़े पोस्टर लगाए हैं। ये वही पोस्टर हैं, जिनपर लिखा है… भोपाल मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों को अब नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर 6 महीने की जेल और जुर्माने समेत दोनों के तहत दंड दिए जाने का प्रावधान भी किया गया है। मेट्रो भोपाल में सफर करने से पहले… क्या करें और क्या न करें…? परिचालन और अनुरक्षण अधिनियम 2002 के तहत होगी सजा इन पोस्टर्स पर लिखे गए नियमों को लेकर यात्रियों को सख्त हिदायत दी गई है। यदि वे किसी भी नियम का उल्लंघन करते पाए गए, तो उनके खिलाफ मेट्रो रेलवे परिचालन और अनुरक्षण अधिनियम 2002 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस अधिनियम के मुताबिक नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जुर्माना और जेल तक की सजा का प्रावधान है। इन गतिविधियों पर रोक इन पोस्टर्स पर स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि मेट्रो परिसर में और ट्रेन में भीख मांगना, भीड़ जुटाना या किसी भी तरह की नारेबाजी, उत्पादों की मांग करना और किसी भी तरह की सामुहिक गतिविधियों को प्रतिबंधित किया गया है। धारा 62 रहेगी लागू यहां मेट्रो अधिनियम की धारा 62 भी लागू की गई है। इसके तहत मेट्रो परिसर में प्रदर्शन करने, लिखने, चिपकाने और निर्देशों का पालन न करने पर 500 रुपए तक का जुर्माना और यात्री को ट्रेन से बाहर करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके अलावा मेट्रो परिसर में या ट्रेन में पालतू जानवरों को लाने की अनुमति नहीं है। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि इससे यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा दोनों प्रभावित होंगी। धारा 73 के तहत सामान बेचा तो जुर्माना भीड़ और अव्यवस्था को रोक्ने के लिए मेट्रो परिसर में भीख मांगना, सामान बेचना या यात्रियों को किसी भी तरह से परेशान करने पर भी सख्ती से निपटा जाएगा। धारा 73 के तहत मेट्रो परिसर में अनाधिकृत रूप से सामान बेचने पर 400 रुपए जुर्माना वसूला जाएगा। प्रबंधन ने की अपील, कतार में रहें मेट्रो प्रबंधन ने यात्रियों से अपील भी की है कि वे मेट्रो परिसर में कतार में रहें। अपने सामान का ध्यान रखें। टिकट जांच के समय अधिकृत कर्मचारी को ही टिकट दिखाएं, जरूरत पड़ने पर मेट्रो सुरक्षा और ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क करें। यहां पढ़ें यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए सख्त नियम मेट्रो ट्रैक पर उतरने या चलने पर धारा 64-2 के तहत 6 महीने की जेल या 500 रुपए का जुर्माना महिलाओं के आरक्षित कोच में बैठने पर 3 महीने की जेल या 250 रुपए जुर्माना इमरजेंसी अलार्म का दुरुपयोग करने पर 10 हजार रुपए तक का जुर्माना ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के काम में बाधा डालने वाले पर 1000 रुपए का जुर्माना और 1 साल की जेल का प्रावधान मेट्रो अधिनियम 2002 के तहत ये धाराएं लागू धारा- 59:भोपाल मेट्रो या मेट्रो परिसर में शराब पीना, उपद्रव करना, ट्रेन में फर्श पर बैठना, थूकना या झगड़ा करने पर 200 रुपए जुर्माना वसूला जाएगा। टिकट या पास जब्त किया जा सकता है, ट्रेन से बाहर भी निकाला जा सकता है। धारा 60: आपत्तिजनक सामग्री ले जाने पर 200 रुपए का जुर्माना। धारा 62: रेलवे पर प्रदर्शन करने, कोच में लिखने/चिपकाने या हटने से इनकार करने पर 500 रुपए का जुर्माना और ट्रेन से बाहर निकाला जाना धारा 63: मेच्रो की छत पर यात्रा करने पर 5 हजार का जुर्माना धारा 64-1: महिलाओं के आरक्षित कोच में बैठने पर 3 महीने की जेल औऱ 250 रुपए जुर्माने का या दोनों का प्रावधान धारा 64-2: मेट्रो ट्रेक पर अवैध प्रवेश, पैदल चलने पर 69 महीने की जेल या 500 रुपए जुर्माना या दोनों की सजा धारा 68: ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के कार्य में बाधा डाले जाने पर 1 साल की जेल या 1000 रुपए जुर्माना या दोनों। धारा 69: बिना वैध पास या टिकट के यात्रा करने पर 50 रुपए का सरचार्ज और तय किराये का अधिकतम किराया देना होगा।

भोपाल मेट्रो: एक गलती पर 10 हजार का जुर्माना, स्टेशन और ट्रेन में थूकने पर 200 का फाइन

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आमजन के लिए शुरु हुई मेट्रो ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के लिए रेल प्रबंधन की ओर से सख्त गाइडलाइन जारी की गई है। आप में से कई लोग जानतें होंगे कि, जिस तरह हवाई यात्रियों के लिए नियम होते हैं, करीब-करीब वैसे ही नियम भोपाल मेट्रो के लिए भी लागू होंगे। ऐसे में शहरवासियों से अपील है कि, मेट्रो में यात्रा करने से पहले इन नियमों को जान लें वरना छोटी से चूक भी बड़ी भारी पड़ सकती है। मेट्रो रेल प्रबंधन की ओर से जारी गइडलाइन के अनुसार, कोई भी यात्री मेट्रो में पालतू पशु या पक्षी साथ लेकर सफर नहीं कर सकेगा। ऐसे में बेवजह इमरजेंसी बटन दबाने वाले को 10 हजार रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। यात्री अपने साथ पेट्रोल-डीजल, हथियार, खुले बीड़ी-सिगरेट, माचिस-लाइटर, गुटखा, तंबाकू, सूखा नाश्ता भी नहीं ले जा सकते। मोबाइल या स्मार्ट वॉच ले जाने की परमिशन तो है, लेकिन ड्रोन, सैटेलाइट फोन, पोर्टेबल और रेडियो संचार उपकरण, कैमरा आदि ले जाना वर्जित है। मेट्रो में ये काम करना पड़ेगा भारी अगर आप मेट्रो में सफर कर रहे हैं, तो सबसे पहले ये समझ लीजिए कि थूकना या कचरा फेंकना अब सीधे जेब पर भारी पड़ेगा. प्लेटफॉर्म या ट्रेन के अंदर गंदगी फैलाने पर जुर्माना तय किया गया है. मेट्रो प्रशासन का साफ कहना है कि सार्वजनिक परिवहन को साफ रखना यात्रियों की भी जिम्मेदारी है. ये खेल उपकरण पैक कर ले जा सकेंगे मेट्रो में सफर करने वाले यात्री तीरंदाजी, मार्शल आर्ट, तलवारबाजी या नानचाकू जैसे खेल उपकरण सक्रिय खिलाड़ी या संचालक की अनुमति से ढककर या पैक कर ले जा सकते हैं। पेट्स के साथ नो एंट्री अब आप पालतू जानवर (Pets) के साथ मेट्रो में सफर नहीं कर सकेंगे. चाहे छोटा डॉग हो या कोई और पेट, मेट्रो ट्रेन में उन्हें ले जाने की अनुमति नहीं होगी. नियम का उल्लंघन करने पर कार्रवाई तय है. ये सामान ले गए तो पकड़े जाएंगे मेट्रो में सफर के दौरान कई चीजों पर पूरी तरह पाबंदी है. सभी 8 स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरों से नजर भोपाल में मेट्रो का प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाष नगर से एम्स तक है। इस दौरान कुल 8 स्टेशन- सुभाष नगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम ऑफिस, अलकापुरी और एम्स हैं। इन सभी स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जो यात्रियों पर नजर रखे हुए हैं। मेट्रो ट्रेन में भी सीसीटीवी सर्विलांस है। हर हरकत कैमरे में कैद हो रही है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश की सिक्योरिटी कंपनी के ढाई सौ गार्ड भी तैनात किए गए हैं। पहले और दूसरे दिन कुछ यात्रियों ने गार्ड्स के गलत व्यवहार की शिकायत भी मेट्रो अफसरों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से की है। 25 किलो वजनी सामान ही ले जा सकेंगे यात्री संक्रामक रोग से ग्रसित व्यक्ति, मानसिक रूप से परेशान और असंयमी, शराबी पैसेंजर सफर नहीं कर सकेगा। विमान की तरह ही इसमें सामान लेजाने का नियम निर्धारित किा गया है। एक यात्री मेट्रो में अधिकतम 25 किलो वजन का सामान ही ले जा सकता है। इसी तरह स्टेशन परिसर या मेट्रो ट्रेन के भीतर थूकने वाले पर 200 रुपए जुर्माना लगाया जाएगा। इनमें शामिल हैं पेट्रोल और डीजल, हथियार, माचिस और ज्वलनशील पदार्थ, गुटखा, पान, तंबाकू, खाने-पीने का सामान और नाश्ता. सुरक्षा के लिहाज से इन चीजों को खतरनाक माना गया है, इसलिए चेकिंग के दौरान पकड़े जाने पर जुर्माना या कार्रवाई हो सकती है. इमरजेंसी बटन से मजाक पड़ेगा भारी अगर किसी ने बेवजह इमरजेंसी बटन दबाया, तो सीधे 10,000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. यह बटन सिर्फ आपात स्थिति के लिए है, न कि मजाक या प्रयोग के लिए. प्रशासन का कहना है कि फर्जी अलर्ट से यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. हर हरकत पर CCTV की नजर मेट्रो स्टेशन और ट्रेन के अंदर CCTV कैमरों से 24×7 निगरानी की जा रही है. हर गतिविधि रिकॉर्ड हो रही है, इसलिए नियम तोड़कर बच निकलना अब आसान नहीं होगा. क्यों जरूरी हैं ये नियम? मेट्रो प्रशासन का कहना है कि इन नियमों का मकसद यात्रियों को परेशान करना नहीं, बल्कि सुरक्षित, साफ और अनुशासित सफर देना है. नियम मानेंगे तो सफर आसान और आरामदायक रहेगा, वरना चालान और कार्रवाई तय है.