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भोपाल मेट्रो सेवा शुरू: पहले 7 दिन फ्री यात्रा, फिर ₹20 से शुरू होगा किराया

भोपाल  अगला स्टेशन है…दरवाजे बाईं तरफ खुलेंगे। कृपया, दरवाजों से हटकर खड़े हों। इंदौर को मेट्रो की सौगात मिलने के बाद भोपाल के यात्रियों के मन में भी कुछ इस तरह के ख्यालात आ रहे होंगे। लोग पिछले एक साल से मेट्रो ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं। अब ऐसे लोगों के लिए अक्टूबर का महीना खुशखबरी लेकर आ सकता है। दरअसल, मेट्रो के ट्रायल रन के बीच कमर्शियल रन शुरू होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले चरण की मेट्रो को हरी झंडी दिखा सकते हैं। यात्रियों को पहले 7 दिन तक फ्री में सफर करने का मौका मिलेगा। वहीं, कुछ दिनों तक किराए में डिस्काउंट में टिकट मिलने के बाद 20 रुपये की शुरूआती कीमत में लोग यात्रा कर पाएंगे। सीएमआरएस टीम पहुंची भोपाल मेट्रो ट्रेन शुरू करने से पहले कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की एक टीम 24 सितंबर को भोपाल पहुंचेगी। मेट्रो के लिए सीएमआरएस का दौरा सबसे खास होता है। इसकी 'ओके' रिपोर्ट मिलने के बाद कमर्शियल रन शुरू होती है। यह टीम डिपो और गाड़ी को जांचेगी। साथ ही ट्रैक के नट-बोल्ट से लेकर सिग्नल तक देखेगी। यह टीम 25 और 26 सितंबर को निरीक्षण करेगी। यह शेड्यूल आने के बाद एमपी मेट्रो के अधिकारी तैयारियों में जुट गए हैं। इस जांच के बाद एक और केंद्रीय टीम भी आएगी। फाइनल रिपोर्ट के बाद मेट्रों को दौड़ाया जा सकता है। ऐसा रहेगा मेट्रो किराया भोपाल मेट्रो के अफसरों के अनुसार शुरुआती 7 दिन तक यात्री मेट्रो में फ्री सफर कर पाएंगे। इसके बाद 3 महीने तक टिकट पर 75%, 50% और 25% की छूट दी जाएगी। यह छूट खत्म होते ही 20 रुपए का टिकट लेकर लोग मेट्रो का सफर कर पाएंगे। भोपाल के सभी चरण प्रारंभ होने के बाद अधिकतम किराया 80 रुपए रखने का विचार है। 31 मई को इंदौर में चलाई गई मेट्रो के लिए भी यही मॉडल रहा था। फिलहाल यह बाधा बताया जाता है कि जिस लाइन पर पहले मेट्रो चलेगी उसके एम्स, अलकापुरी और डीआरएम ऑफिस स्टेशन पर गेट लगाने समेत अन्य काम अधूरे हैं। इन्हें अगले 15 दिन में पूरा करने का टारगेट तय किया गया है। पहला चरण ही पूरा हुआ आपको बता दें कि राजधानी भोपाल में पहले चरण के तहत ऑरेंज लाइन में एम्स साकेत नगर से सुभाष नगर डिपो तक करीब 6 किलोमीटर की दूरी की लाइन बनाई गई है। इसके बाद दूसरा फेस सुभाषनगर से करोंद तक के लिए कार्य चल रहा है। इसमें करीब 2 से 3 वर्ष लगने का अनुमान है। फिलहाल भोपाल के सुभाष नगर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन ट्रैक पर मेट्रो दौड़ाकर ट्रायल रन किया जा रहा है। ट्रायल रन में न्यूनतम 30 और अधिकतम 80 किमी प्रतिघंटा रफ्तार रखी जा रही है। आनलाइन नहीं मिलेगा टिकट भले ही दिल्ली सहित कई शहरों में टिकट प्रणाली आनलाइन हो गई है। लेकिन भोपाल में आपको मैन्युअल टिकट से यात्रा करना पड़ेगा। बता दें कि ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लगाने वाली तुर्किए की कंपनी 'असिस गार्ड’ का टेंडर सरकार ने निरस्त कर दिया है। इसकी वजह है तुर्किए ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को ड्रोन देकर मदद की थी।

भोपाल मेट्रो का किराया तय: ₹20 से ₹80 के बीच, शुरुआती 7 दिन मुफ्त यात्रा और 3 महीने तक डिस्काउंट

भोपाल  भोपाल में अक्टूबर से लोग मेट्रो ट्रेन में सफर कर सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेट्रो को हरी झंडी दिखाने राजधानी आ सकते हैं। इससे पहले डिपो और गाड़ी को देखने के लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की एक टीम 24 सितंबर को भोपाल पहुंचेगी।  मेट्रो की किराया सूची पर भी मंथन किया जा रहा है। अफसरों की मानें तो 7 दिन तक लोग मेट्रो में फ्री सफर कर सकेंगे। वहीं, 3 महीने तक टिकट पर 75%, 50% और 25% की छूट दी जाएगी। छूट खत्म होने के बाद सिर्फ 20 रुपए में मेट्रो का सफर किया जा सकेगा। इसका अधिकतम किराया 80 रुपए होगा। 31 मई को इंदौर में चलाई गई मेट्रो के लिए भी यही मॉडल रहा था। भोपाल में ऑरेंज लाइन के पहले फेज में मेट्रो सुभाषनगर से एम्स तक करीब 6 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। दूसरा फेस सुभाषनगर से करोंद तक है। हालांकि, इसका काम अगले 2 से 3 साल में पूरा हो सकेगा। 15 दिन में काम पूरा करने का टारगेट अगला स्टेशन एम्स है। दरवाजे बाईं तरफ खुलेंगे। कृपया, दरवाजों से हटकर खड़े हों…इस तरह का अनाउंसमेंट आपको अक्टूबर में सुनाई देने लगेगा। मेट्रो के ट्रायल रन के बीच कमर्शियल रन शुरू होगा। हालांकि, अभी एम्स, अलकापुरी और डीआरएम ऑफिस स्टेशन पर गेट लगाने समेत अन्य काम किए जा रहे हैं। इन्हें अगले 15 दिन में पूरा करने का टारगेट है। 30 से 80 किमी प्रति घंटा रहेगी मेट्रो की स्पीड भोपाल के सुभाष नगर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन (RKMP) और इंदौर के गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर तक मेट्रो कोच को ट्रैक पर दौड़ाकर ट्रायल रन किया जा रहा है। ट्रायल रन में न्यूनतम 30 और अधिकतम 80 किमी प्रतिघंटा रफ्तार रखी जा रही है। बीच-बीच में 100 से 120 किमी की रफ्तार से भी मेट्रो दौड़ाई जा रही है। सिग्नल लग चुके हैं। इनकी टेस्टिंग भी हो रही है। ट्रेन की तर्ज पर मेट्रो में भी टिकट लेनी पड़ेगी मेट्रो का टिकट सिस्टम ऑनलाइन न होकर मैन्युअल ही रहेगा। जैसे आप ट्रेन में टिकट लेकर सफर करते हैं, वैसे ही मेट्रो में भी कर सकेंगे। इंदौर में अभी यही सिस्टम है। भोपाल और इंदौर मेट्रो में ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लगाने वाली तुर्किए की कंपनी 'असिस गार्ड’ से काम छिनने और नई कंपनी के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू किए जाने से यह स्थिति बनेगी। बता दें कि असिस गार्ड का मामला पिछले 4 महीने से सुर्खियों में था। आखिरकार अगस्त में असिस गार्ड का टेंडर कैंसिल कर दिया गया। नई कंपनी के लिए टेंडर भी कॉल किए हैं। इस पूरी प्रक्रिया में दो से तीन महीने का वक्त लग सकता है। मैन्युअल टिकट ही एक मात्र ऑप्शन अफसरों ने बताया कि असिस गार्ड कंपनी इंदौर में स्टेशनों पर भी सिस्टम लगा रही थी, लेकिन विवाद के बाद इंदौर में मैन्युअल टिकट ही ऑप्शन बचा था। पिछले साढ़े 3 महीने से इंदौर में ट्रेन जैसा ही सिस्टम है। इसमें मेट्रो के कर्मचारी ही तैनात किए गए हैं। यही ऑप्शन अब भोपाल मेट्रो के लिए भी बचा है। दरअसल, 'असिस गार्ड’ के जिम्मे ही सबसे महत्वपूर्ण ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन यानी किराया लेने की पूरी प्रक्रिया का सिस्टम तैयार करने का काम था। जिसमें कार्ड के जरिए किराया लेने के बाद ही गेट खुलना भी शामिल है। यह कंपनी सिस्टम का पूरा मेंटेनेंस भी करती। अब अनुबंध खत्म होने पर नई कंपनी काम करेगी, लेकिन उसे टेंडर और फिर अन्य प्रक्रिया से गुजरने में समय लगेगा। इसलिए मेट्रो कॉर्पोरेशन भोपाल में भी मैन्युअली टिकट सिस्टम ही लागू कर सकता है। अफसरों के अनुसार, मैन्युअली सिस्टम के लिए अमला तैनात किया जा रहा है।

भोपाल को मेट्रो की सौगात: अक्टूबर से शुरू होगी सेवा, हाईटेक डिपो बनकर तैयार

भोपाल  अक्टूबर में भोपाल मेट्रो(Bhopal Metro) का कमर्शियल रन शुरू होने के साथ ही सुभाष नगर डिपो का उपयोग बढ़ जाएगा। अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ डिजाइन किए इस डिपो की छत पर सोलर पैनल लगाने की योजना है ताकि ऊर्जा की जरूरतों को पूरा कर सके। इसे एक पर्यावरण-अनुकूल डिपो बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। यह डिपो मेट्रो के ऑरेंज लाइन (करोद से एम्स) के लिए बनाया है। 140 करोड़ रुपए हुए खर्च सुभाष नगर डिपो का निर्माण जुलाई 2023 में पूरा हो गया था। यह मेट्रो परियोजना के पहले चरण में सबसे पहले पूरे होने वाले काम में से एक था। यह डिपो सुभाष नगर में स्थित है. जो कि ऑरेंज लाइन के एक छोर के पास है। यह ट्रेनों की आवाजाही को आसान बनाता है। इसमें कई रैम्प और ट्रैक बनाए गए हैं जो मेट्रो ट्रेनों को मुख्य लाइन से डिपो तक लाते और ले जाते हैं। भोपाल को मिलेंगे 27 रैक सुभाष नगर मेट्रो डिपों में मेट्रो ट्रेनों की दैनिक जांच, मरम्मत और धुलाई का काम किया जाएगा। यहां ट्रेनों की स्वचालित धुलाई के लिए वॉशिंग प्लांट भी बनाया गया है। ट्रेनों की नियमित तकनीकी जांच के लिए इंस्पेक्शन शेड और मरम्मत के लिए रिपेयर वर्कशॉप भी बनाया गया है। डिपो को ऐसे डिजाइन किया गया है कि भविष्य में बढ़ने वाली ट्रेनों की संख्या को भी संभाल सके। भोपाल मेट्रो क्यों है खास? सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम सितंबर के मध्य में निरीक्षण करेगी। साफ-सुथरे प्लेटफॉर्म, आधुनिक टिकटिंग सिस्टम और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था भोपाल मेट्रो को खास बनाएंगे। यह मेट्रो न केवल ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी। प्रायोरिटी कॉरिडोर पर तेजी से काम भोपाल मेट्रो के पहले चरण में प्रायोरिटी कॉरिडोर पर काम तेजी से पूरा किया जा रहा है। इस कॉरिडोर में स्टेशनों के कॉनकोर्स लेवल पर कंट्रोल रूम, सिस्टम रूम और यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाओं का निर्माण चल रहा है। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म लेवल पर भी काम जोरों पर है।  सुभाष नगर में मेट्रो डिपो के साथ-साथ एडमिन बिल्डिंग में कंट्रोल रूम और अन्य महत्वपूर्ण सिस्टम रूम तैयार किए जा रहे हैं। अधिकारियों का लक्ष्य है कि 30 सितंबर तक प्रायोरिटी कॉरिडोर का सारा काम पूरा हो जाए। सीएमआरएस की टीम करेगी निरीक्षण मेट्रो संचालन से पहले सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम 15 सितंबर के बाद भोपाल पहुंचेगी। यह टीम मेट्रो के डिपो, ट्रेन और मेन लाइन का निरीक्षण करेगी। इंदौर मेट्रो की तर्ज पर भोपाल में भी दो चरणों में निरीक्षण होगा। पहले चरण में डिपो और ट्रेन की जांच होगी, जबकि दूसरे चरण में मेन लाइन का निरीक्षण किया जाएगा। इसके लिए मेट्रो प्रबंधन ने सभी जरूरी दस्तावेज सीएमआरएस के पोर्टल पर अपलोड कर दिए हैं। निरीक्षण की तारीख जल्द ही तय की जाएगी। डिपो और मेन लाइन का काम पूरा मेट्रो के डिपो और मेन लाइन का अधिकांश काम पूरा हो चुका है। डिपो में ट्रेनों के रखरखाव और संचालन से जुड़े सभी जरूरी सिस्टम तैयार हैं। मेन लाइन पर भी निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। अधिकारियों का कहना है कि अक्टूबर में मेट्रो को प्रायोरिटी कॉरिडोर पर दौड़ाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए सभी टीमें दिन-रात काम कर रही हैं। भोपालवासियों के लिए क्या होगा खास? भोपाल मेट्रो के शुरू होने से शहरवासियों को यातायात का एक आधुनिक, तेज और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा। सुभाष नगर से एम्स तक का सफर आसान और समय की बचत करने वाला होगा। मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं जैसे कि साफ-सुथरे प्लेटफॉर्म, टिकटिंग सिस्टम और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध होगी। यह मेट्रो न केवल भोपाल की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाएगी, बल्कि पर्यावरण के लिए भी अनुकूल होगी। भोपाल मेट्रो का भविष्य पहले चरण की सफलता के बाद भोपाल मेट्रो के अगले चरणों पर भी काम शुरू होगा, जिससे शहर के अन्य हिस्सों को भी मेट्रो से जोड़ा जाएगा। यह प्रोजेक्ट भोपाल को एक स्मार्ट और आधुनिक शहर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अक्टूबर में मेट्रो के शुरू होने का इंतजार भोपालवासियों को बेसब्री से है। जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है, शहर में उत्साह बढ़ता जा रहा है। भोपाल मेट्रो के फायदे 1. तेज और समय की बचत     ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी।     सुभाष नगर से एम्स तक का सफर मिनटों में तय होगा।  2. सुविधाजनक यात्रा     साफ-सुथरे प्लेटफॉर्म, एस्केलेटर, लिफ्ट और आधुनिक टिकटिंग सिस्टम।     यात्रियों के लिए आरामदायक कोच और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था।  3. ट्रैफिक दबाव में कमी     सड़कों पर निजी गाड़ियों का बोझ घटेगा।     शहर के मुख्य मार्गों पर जाम की समस्या कम होगी।  4. पर्यावरण के लिए फायदेमंद     प्रदूषण और धुएं का स्तर घटेगा।     इलेक्ट्रिक आधारित मेट्रो, ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देगी।  5. आर्थिक और सामाजिक विकास     मेट्रो स्टेशन के आसपास बिज़नेस और रोजगार के नए अवसर।     शहर का बुनियादी ढांचा और इमेज स्मार्ट सिटी जैसी होगी।  6. सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन     महिलाओं, छात्रों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित यात्रा का विकल्प।     जीपीएस और सीसीटीवी आधारित निगरानी।  कुल मिलाकर, भोपाल मेट्रो न सिर्फ़ यात्रियों के लिए आरामदायक सफर देगी, बल्कि शहर को स्मार्ट और प्रदूषण मुक्त बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

भोपाल मेट्रो को मिलेगी हाईटेक सुरक्षा, SAF जवानों की होगी तैनाती

भोपाल   मेट्रो ट्रेन के स्टेशन से लेकर पूरे प्रोजेक्ट की सुरक्षा में अब आपको स्पेशल आर्म्ड फोर्स यानी एसएएफ के जवान नजर आएंगे। प्रदेश सरकार मेट्रो की सुरक्षा के लिए एसएएफ की विशेष कंपनी गठित करने के प्रस्ताव पर काम कर रही है। इससे इंदौर और भोपाल मेट्रो में यात्रियों और स्टेशनों की सुरक्षा अब इसी एसएएफ के हाथों में होगी। इसके लिए 40 से 45 वर्ष आयु वर्ग के निरीक्षक से लेकर आरक्षक स्तर तक के एसएएफ अधिकारियों और जवानों को रखा जाएगा। हालांकि अभी रिटायर्ड आर्मी मैन और सुरक्षा के लिए युवकों को मिलाकर एक व्यवस्था बनी हुई है। जब तक कंपनी का गठन नहीं होता और एसएएफ की कंपनी नहीं मिलती, जब तक मौजूदा व्यवस्था से ही सुरक्षा की जाएगी। सीएमआरएस निरीक्षण की तैयारी इस समय भोपाल में मेट्रो रेल प्रबंधन से जुड़े तमाम अफसर- इंजीनियर कमिश्रर मेट्रो रेल सेफ्टी की जांच की तैयारियों में लगे हुए हैं। एम्स से अलकापुरी और डीआरएम मेट्रो स्टेशन पर काम काफी बाकी है। सितंबर तक 6.22 किमी का काम पूरा करने का लक्ष्य तय किया हुआ है। एमडी चैतन्य एस कृष्णा लगभग रोजाना इसे लेकर समीक्षा कर रहे हैं। हर सेगमेंट पर एक अफसर को काम पर लगाया हुआ है। अक्टूबर में सीएमआरएस के निरीक्षण की उम्मीद है। लखनऊ से आई आरडीएसओ की टीम ने भोपाल मेट्रो को 90 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पर दौड़ाकर परीक्षण किया। मेट्रो का विस्तार होगा मध्यप्रदेश में मेट्रों का विस्तार होगा। ये अतिरिक्त शहरों और उज्जैन जैसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों को जोड़ने के लिए भी चलाई जा सकती हैं तो बिजली पैदा करने के लिए नए थर्मल पावर प्लांट व उनकी यूनिटें स्थापित की जा सकती हैं। ऐसे प्रस्तावों को मंगलवार होने वाली कैबिनेट बैठक में रखा जाना है। सबकुछ ठीक रहा तो इन्हें मंजूरी भी मिल सकती है।

भोपाल को जल्द मिलेगी मेट्रो की सौगात, सितंबर 2025 से कमर्शियल रन संभव

भोपाल   मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्टूबर माह में हरी झंडी दिखा सकते हैं। यात्रियों को लंबे इंतजार के बाद भोपाल में मेट्रो की सवारी का मौका मिलेगा। कारपोरेशन का सबसे ज्यादा फोकस इस समय एम्स से डीआरएम तक के स्टेशनों का काम पूरा करने में है। बचे हुए काम के लिए सितंबर 2025 की डेडलाइन तय की गई है। कमर्शियल रन को दो माह से भी कम समय बचा है, ऐसे में यहां टिकटिंग सिस्टम से लेकर यात्रियों के लिए इंफॉर्मेशन सिस्टम, इंटीरियर व बाहरी सौंदर्यीकरण के काम काफी बचे हुए हैं। स्टेशनों को पास के संस्थानों से जोडऩे का काम भी बाकी है। कमिश्नर का निरीक्षण कमर्शियल रन के लिए कमिश्रर मेट्रो रेल सेफ्टी की एनओसी जरूरी है। इसलिए सर्वे व मॉनिटरिंग जारी है। सुरक्षा संबंधी कामों को तय मानकों पर कसा जा रहा है। सोमवार को भी मेट्रो रेल एमडी चैतन्य एस कृष्णा ने मेट्रो के कामों का निरीक्षण कर संबंधितों से काम की स्थिति पर बैठक की। तुर्किए की कंपनी की जगह नया टेंडर जल्द मेट्रो रेल कारपोरेशन ने ऑटोमेटिक टिकट फेयर सिस्टम के लिए तुर्की की कंपनी को दिए काम का ठेका रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की है। टेंडर की शर्तों के अनुसार प्रक्रिया की जा रही है। अभी रद्द करने का लेटर जारी नहीं किया। अफसरों का कहना है कि नए सिरे से टेंडरिंग की जाएगी। कमर्शियल रन में इंदौर की तरह मैन्युअली टिकट सिस्टम से काम चलाया जाएगा। RDSO से मिली हरी झंडी, अब CMRS की तैयारी तेज शहरवासियों के लिए खुशी की खबर है। भोपाल मेट्रो संचालन पूर्व पहले पड़ाव को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है । अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन (आरडीएसओ), रेल मंत्रालय से मेट्रो को प्रमाणीकरण मिल गया है। अब मेट्रो प्रबंधन ने कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की तैयारियों में जुट गया है। भोपाल मेट्रो को आरडीएसओ से मिली हरी झंडी जानकारी के अनुसार आरडीएसओ के प्रमाणीकरण के बाद ही सीएमआरएस की टीम जांचने आती है। जिसके बाद भोपाल में मेट्रो का संचालन शुरू हो पाएगा। इसके मद्देनजर अब दस्तावेज तैयार किए जाएंगे और प्रोजेक्ट के बचे शेष कामों को टीम के आने से पहले पूरा किया जाएगा। प्रमाणीकरण मिलते ही सोमवार को मेट्रो प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने सुभाष नगर डिपो और एम्स स्टेशन से डीआरएम आफिस मेट्रो स्टेशन तक का निरीक्षण किया। अब सीएमआरएस की तैयारी तेज इस दौरान उन्होंने सीएमआरएस से जुड़ी महत्वपूर्ण साइट्स और कार्यों की स्थिति देखी। स्टेशन में एंट्री-एग्जिट, फुट ओवर ब्रिज, टिकट रूम, स्टेशन कंट्रोल रूम, पम्प रूम, लिफ्ट, एस्केलेटर, फायर एनओसी सहित आंतरिक और बाहरी सुंदरीकरण कार्यों की समीक्षा की गई। एमडी ने सुभाष नगर डिपो का भी मुआयना किया। यहां उन्होंने इन्स्पेक्शन बे लाइन, रिपेयर बे लाइन, टेस्ट ट्रैक, ट्रैक्शन सब-स्टेशन, एडमिन बिल्डिंग के कंट्रोल रूम, प्रमुख सिस्टम रूम्स, रैम्प एरिया, अनलोडिंग-बे और ट्रेनिंग बिल्डिंग जैसी प्रमुख सुविधाओं का जायजा लिया। साथ ही डिपो में ड्रेनेज व्यवस्था, पम्प रूम और फायर एनओसी की स्थिति की भी जानकारी ली। एमडी ने अधिकारियों और ठेकेदारों को दिए निर्देश निरीक्षण के दौरान एमडी ने अधिकारियों और ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रायोरिटी कॉरिडोर के तहत ट्रेन परिचालन से जुड़े सभी शेष कार्य जल्द से जल्द पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि सीएमआरएस के लिए दस्तावेजीकरण और साइट तैयारियों को तेज गति से निपटाना होगा ताकि समय पर संचालन शुरू किया जा सके। भोपाल मेट्रो के इस कदम से उम्मीद बढ़ी है कि आने वाले महीनों में राजधानी में मेट्रो परिचालन का सपना हकीकत में बदल सकेगा। इससे यातायात दबाव कम होगा और शहर को आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की बड़ी सौगात मिलेगी।