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भोपाल मेट्रो को मिला ग्रीन सिग्नल, 13 दिसंबर को पीएम मोदी देंगे हरी झंडी, लेकिन सुविधाओं की कमी

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो रेल दौड़ने को तैयार है। ब्रिज से लेकर पटरियां बिछाने का काम हो चुका है। वहीं, कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) ने भी भोपाल मेट्रो के प्रायोरिटी कॉरिडोर को हरी झंडी दे दी है। भले ही मेट्रो कंपनी ने ट्रेन चलाने के लिए मंथन शुरू कर दिया है। पर अभी भी कुछ काम बाकी है। दरअसल, कई मेट्रो स्टेशनों में अभी तक कई सुविधाएं अधूरी हैं। करीब 6.22 किलोमीटर लंबे इस ऑरेंज लाइन कॉरिडोर पर एक बड़ी कमी नजर आ रही है। यह कमियां यात्रियों की यात्रा को आसान तो नहीं बनने देंगी। जानिए क्या काम अभी बाकी है। कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) के ग्रीन सिग्नल के बाद अब भोपाल में मेट्रो के कमर्शियल रन की तैयारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 दिसंबर को मेट्रो को हरी झंडी दिखा सकते हैं। ये भी संभावना है कि वे वर्चुअली तरीके से लोकार्पण करें। फिलहाल स्टेशन के 1 गेट से ही एंट्री-एग्जिट होगी। यानी, जो भी यात्री स्टेशन पर पहुंचेंगे, वे स्टेशन के एक तरफ से ही अंदर-बाहर आ-जा सकेंगे। जिन स्टेशनों पर अभी फिनिशिंग या अन्य काम बचे हैं, उन्हें अगले 3 दिन में पूरा करने का टारगेट है। 10 दिसंबर से सभी स्टेशन बंद कर दिए जाएंगे। ये वीआईपी-वीवीआईपी की सिक्योरिटी के चलते होगा। यदि पीएम भोपाल आएं तो पहले यात्री भी बनेंगे मेट्रो सूत्रों के अनुसार, यदि प्रधानमंत्री मोदी भोपाल आकर मेट्रो का लोकार्पण करते हैं तो वे भोपाल मेट्रो के पहले यात्री भी बन सकते हैं। इसलिए स्टेशनों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। सुभाषनगर मेट्रो स्टेशन पर कार्यक्रम होगा, क्योंकि यही पर डिपो और सबसे ज्यादा स्पेस है। ऐसे में कार्यक्रम को लेकर किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। अक्टूबर 2023 में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और तीन महीने पहले वर्तमान मंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी सुभाषनगर स्टेशन से ही मेट्रो में सफर व निरीक्षण किया था। लोकार्पण के दौरान बंद रहेंगे स्टेशन जानकारी के अनुसार, मेट्रो का जब भी कमर्शियल रन होगा, तब सुभाषनगर को छोड़ बाकी सभी स्टेशन बंद रखे जाएंगे। यह सब सुरक्षा के मद्देनजर होगा। वीआईपी-वीवीआईपी के जाने के बाद आम लोगों के लिए स्टेशन खोल दिए जाएंगे। ताकि, वे मेट्रो का सफर कर सके। प्रायोरिटी कॉरिडोर 6.22 किमी लंबा, 8 स्टेशन आएंगे ऑरेंज लाइन का प्रायोरिटी कॉरिडोर 6.22 किलोमीटर लंबा है। इनमें कुल 8 स्टेशन- सुभाषनगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स शामिल हैं। इंदौर में वर्चुअली तरीके से किया था लोकार्पण प्रधानमंत्री मोदी ने 31 मई को भोपाल में हुए कार्यक्रम से ही इंदौर मेट्रो का वर्चुअली तरीके से लोकार्पण किया था। तब उन्होंने भोपाल मेट्रो के लोकार्पण के लिए अक्टूबर में आने की बात कही थी। हालांकि, बिहार में विधानसभा चुनाव के चलते मेट्रो का कमर्शियल रन अक्टूबर में नहीं हो सका। नवंबर में सीएमआरएस की टीम ने निरीक्षण किया और हाल ही में एनओसी दी। इसलिए कमर्शियल रन अब दिसंबर में किया जा रहा है। टिकट मैन्युवली सिस्टम से ही मिलेगी खास बात ये है कि मेट्रो के कमर्शियल रन के दौरान टिकट सिस्टम ऑनलाइन न होते हुए मैन्युवली रहेगा। टिकट कलेक्शन करने वाली तुर्किए की कंपनी का ठेका मेट्रो कॉरपोरेशन कैंसिल कर चुका है। नई एजेंसी आने तक मैन्युवली टिकट कलेक्शन सिस्टम रहेगा। इंदौर में भी यही सिस्टम लागू है। साल 2018 से शुरू हुआ था मेट्रो का काम भोपाल में पहला मेट्रो रूट एम्स से करोंद तक 16.05 किलोमीटर लंबा है। इसमें से एम्स से सुभाष नगर के बीच 6.22 किलोमीटर पर प्राथमिकता कॉरिडोर के तौर पर 2018 में काम शुरू किया गया था। सबसे पहले सुभाषनगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर और रानी कमलापति स्टेशन के काम पूरे हुए। इसके बाद रेलवे ट्रैक के ऊपर दो स्टील ब्रिज बनाए गए। वहीं, आगे के 3- डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स स्टेशनों का काम शुरू हुआ। कुछ महीने पहले ही इनका काम भी पूरा हो गया और अब ये यात्रियों के आने का इंतजार कर रहे हैं। दो साल पहले हुआ था पहला ट्रायल राजधानी में पहली बार मेट्रो 3 अक्टूबर 2023 को पटरी पर दौड़ी थी। तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन तक मेट्रो में सफर किया था।

CMRS और पीएम मोदी का ग्रीन सिग्नल, भोपाल मेट्रो ट्रैक पर दौड़ेगी और 3 महीने तक किराए में छूट

भोपाल  राजधानी भोपाल के रहवासियों के लिए अच्छी खबर है. कमिश्नर इन मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) ने भोपाल में मेट्रो के संचालन के लिए हरी झंडी दे दी है. यानि अब एम्स साकेत नगर से सुभाष नगर डिपो तक मेट्रो के संचालन की तैयांरियां पूरी हो चुकी हैं. पहले भोपाल मेट्रो के संचालन के लिए 13 दिसंबर 2025 की तारीख तय की गई थी. लेकिन मध्य प्रदेश मेट्रो के अधिकारियों का कहना है कि 6.22 किलोमीटर का कारिडोर मेट्रो के संचालन के लिए तैयार है, लेकिन इसका संचालन राज्य सरकार तय करेगी. पीएम मोदी कर सकते हैं वर्चुअल शुभारंभ मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन के अधिकारियों का कहना है कि, भोपाल मेट्रो का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअल शुभारंभ कर सकते हैं. चूंकि प्रायोरिटी कारिडोर में काम पूरा हो गया है और सीएमआरएस ने भी संचालन के लिए हरी झंडी दिखा दी है. ऐसे में माना जा रहा है कि दिसंबर में ही प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाषनगर से एम्स के बीच मेट्रो का कमर्शियल रन हो सकता है. सीएमआरएस रिपोर्ट में सब कुछ ओके होने के बाद यह रिपोर्ट प्रदेश सरकार को दी गई है. वहीं, नई दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद मेट्रो के कमर्शियल रन की शुरुआत हो जाएगी. भोपाल मेट्रो में मैन्युअल लेना होगा टिकट मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कार्पाेरेशन के एमडी एस कृष्णा चौतन्य ने बताया कि, ''भोपाल और इंदौर मेट्रो स्टेशन में ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन का काम 186 करोड़ रुपये में तुर्की की कंपनी को दिया गया था. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान को ड्रोन सप्लाई करने का मामला सामने आने के बाद मध्य प्रदेश मेट्रो ने इसका टेंडर कैंसिल करने का काम भी शुरु कर दिया है. वहीं ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन के लिए दूसरी कंपनी की तलाश की जा रही है. इसके लिए अभी टेंडर जारी किया जा चुका है. लेकिन इसमें अभी समय लग सकता है. ऐसे में भोपाल में भी मेट्रो का शुभारंभ इंदौर की तरह मैन्युअल टिकट के माध्यम से किया जाएगा.'' एक सप्ताह फ्री, 3 महीने तक छूट मेट्रो रेल कार्पाेेशन के अधिकारियों का कहना है कि इंदौर कि, तरह भोपाल मेट्रो में भी यात्रियों को पहले छूट दी जाएगी. शुभारंभ के बाद अगले एक सप्ताह तक भोपाल मेट्रो में यात्री निशुल्क सवारी कर सकेंगे. इसके बाद दूसरे सप्ताह में भी 70 प्रतिशत की छूट टिकट में दी जाएगी. जबकि तीसरे सप्ताह में 50 प्रतिशत और चौथे सप्ताह से शुभारंभ के तीन महीने तक मेट्रो के टिकट में यात्रियों को 25 प्रतिशत की छूट मिलती रहेगी. हालांकि इसका किराया क्या होगा. इसको लेकर कृष्णा चौतन्य का कहना है कि अभी इस पर कमेटी चर्चा कर रही है. जल्द ही इसे भी सार्वजनिक किया जाएगा. भोपाल मेट्रो में एक बार में 900 सवारी करेंगे सफर भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट के पहले चरण में 27 ट्रेन प्रस्तावित हैं. इनमें से 9 ट्रेनों की डिलीवरी हो चुकी है. इनकी कमीशनिंग और ट्रायल का काम भी पूरा हो गया है. ये सभी मेट्रो 3 कोच वाली हैं. बाद में जरुरत के अनुसार, इनमें कोच की संख्या बढ़ाई जा सकेगी. अधिकारियों का कहना है कि शुरुआत में मेट्रो करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी. इसमें करीब 900 यात्री सफर कर सकेंगे. वहीं 150 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी. भोपाल मेट्रो स्टेशनों पर काम अधूरे आर्किटेक्ट और टाउन प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ का कहना है कि, ''भले ही भोपाल मेट्रो को सीएमआरएस की हरी झंडी मिल गई है, लेकिन अभी रानी कमलापति, डीआरएम और अलकापुरी मेट्रो स्टेशनों पर फिनिशिंग समेत अन्य काम किए जा रहे हैं. ऐसे में अभी मेट्रो के संचालन में और समय लग सकता है.'' कुलश्रेष्ठ का कहना है कि, ''यदि इससे पहले मेट्रो का कामर्शियल रन शुरु भी किया जाता है, तो शुरुआत में इन मेट्रो स्टेशनों पर सवारियों को मेट्रो का लाभ नहीं मिल पाएगा.''

PM मोदी कर सकते हैं भोपाल मेट्रो की पहली सवारी, कमर्शियल रन को जल्द हरी झंडी

भोपाल  भोपाल शहर में मेट्रो के कमर्शियल रन के लिए सबसे अहम कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी अपनी रिपोर्ट इसी हफ्ते मेट्रो कॉरपोरेशन को दे सकते हैं। सब कुछ ’ओके’ होने के बाद प्रदेश सरकार को रिपोर्ट दी जाएगी। वहीं, नई दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद मेट्रो के कमर्शियल रन की शुरुआत हो जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकार्पण करेंगे। वे भोपाल मेट्रो के पहले यात्री भी बन सकते हैं। इंदौर में 31 मई को उन्होंने वर्चुअली तरीके से लोकार्पण किया था। सीएमआरएस 12 नवंबर को भोपाल पहुंची थी। अब बस रिपोर्ट का इंतजार अगले 3 दिन यानी, 13, 14 और 15 नवंबर को टीम ने डिपो से लेकर ट्रैक और ट्रेन तक निरीक्षण किया था। कमिश्नर नीलाभ्र सेनगुप्ता के साथ टीम ने मेट्रो के नट-बोल्ड तक देखे थे। इसके बाद टीम वापस लौट गई। इसके साथ ही अब रिपोर्ट का इंतजार है। मेट्रो अफसरों का कहना है कि मेट्रो के कमर्शियल रन के लिए वे सभी काम पूरे हो चुके हैं, जो जरूरी है और सीएमआरएस के पैमाने के हैं। स्टेशनों का कुछ काम जरूर बचा है, लेकिन उससे कमर्शियल रन पर असर नहीं पड़ेगा। इसलिए उम्मीद है कि सीएमआरएस की रिपोर्ट ’ओके’ ही रहेगी। इन हिस्सों की जांच हुई -रख-रखाव मानकों की जांच। -ट्रेन परीक्षण दस्तावेजों और संचालन नियंत्रण केंद्र की समीक्षा। -पावर सप्लाई और थर्ड रेल सिस्टम का परीक्षण। -स्वचालित ट्रेन नियंत्रण, एटीएस/एटीपी सिस्टम। -आपातकालीन ब्रेकिंग, इंटरलॉकिंग। -फायर सेफ्टी, यात्री सुविधाएं व स्टेशन मैनेजमेंट की भी जांच।

भोपाल मेट्रो को मिली रफ्तार: CMRs टीम ने अचानक शुरू की अंतिम परीक्षा का तीसरा पड़ाव

भोपाल भोपाल में मेट्रो संचालन से पहले सुरक्षा की अंतिम परीक्षा गुरुवार से शुरू हो गई है। दिल्ली से अचानक पहुंची कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम ने सुबह सुभाष नगर मेट्रो डिपो पहुंचकर निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने डिपो में ट्रेन संचालन, सुरक्षा प्रोटोकाल और तकनीकी व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की। इसके बाद दोपहर एक बजे टीम ने ट्रैक कार से मेट्रो ट्रैक का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण भोपाल मेट्रो की अंतिम परीक्षा का तीसरा पड़ाव है। इस पड़ाव को पार करने के बाद सीएमआरएस की टीम ओके टू रन यानी संचालन की रिपोर्ट देगा। इसके बाद शासन तय करेगा कि भोपाल मेट्रो को कब शुरू किया जाना है। माना जा रहा है कि लगातार देरी के कारण हो रही आनन-फानन में सीएमआरएस टीम का निरीक्षण शुरू हो रहा है ताकि मेट्रो का संचालन जल्द से जल्द हो। हालांकि अधूरी तैयारियों व काम के बीच यह जल्दबाजी कहीं आमजन पर भारी न पड़ जाए।   मेट्रो के लिए अंतिम परीक्षा गौरतलब है कि सीएमआरएस का भोपाल मेट्रो का यह तीसरा निरीक्षण है। इससे पहले दो बार टीम निरीक्षण कर चुकी है, लेकिन कुछ तकनीकी कमियों के कारण संचालन की अनुमति नहीं मिल सकी थी। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार यदि इस बार सभी मानक सही पाए गए तो भोपाल मेट्रो को ओके टू रन रिपोर्ट मिल जाएगी। अन्यथा संचालन की तारीख एक बार फिर आगे बढ़ सकती है। हालांकि ऐसी उम्मीद कम है। यह निरीक्षण मेट्रो के लिए अंतिम परीक्षा माना जा रहा है। उधर, मेट्रो कंपनी के एमडी एस. कृष्ण चैतन्य मेट्रो संचालन में हो रही देरी पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। उन्होंने पूरी तरह इस मामले में चुप्पी साध रखी है। सुभाष नगर एम्स तक देखी संचालन व्यवस्था निरीक्षण के दौरान सुभाष नगर डिपो के पास टीम केंद्रीय विद्यालय (केवी) मेट्रो स्टेशन पर पांच मिनट रुकी और सुरक्षा मानकों का मूल्यांकन किया। इसके बाद वे बोर्ड ऑफिस मेट्रो स्टेशन पर करीब आधा घंटा रुके। यहां से एम्स मेट्रो स्टेशन तक टीम ने पहुंचकर ट्रैक की तकनीकी खामियों और संचालन व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान कमिश्नर नीलाभ्र सेनगुप्ता भी टीम के साथ मौजूद रहे। आज से होगी आठ मेट्रो स्टेशन की जांच तीन दिवसीय इस दौरे में सीएमआरएस टीम 15 नवंबर तक पूरे प्रायोरिटी कॉरिडोर की जांच करेगी। शुक्रवार को टीम आठ मेट्रो स्टेशनों का निरीक्षण करेगी, जबकि 15 नवंबर को प्रोजेक्ट से जुड़ी फाइलों की परखा जाएगा।

भोपाल मेट्रो नवंबर के अंत तक दौड़ेगी, अंतिम जांच में यात्री सुरक्षा और एंट्री-एग्जिट सुधार की समीक्षा

भोपाल  भोपाल की बहुप्रतीक्षित मेट्रो रेल परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो नवंबर के आखिरी सप्ताह तक भोपाल मेट्रो पटरियों पर दौड़ती नजर आ सकती है। दरअसल, दिल्ली से आने वाली कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम अगले सप्ताह भोपाल मेट्रो का तीसरा और अंतिम निरीक्षण करने आने वाली है। यह परीक्षा मेट्रो प्रबंधन के लिए निर्णायक साबित होगी, क्योंकि इस रिपोर्ट के आधार पर ही ‘ओके टू रन’ की मंजूरी दी जाएगी। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भोपाल मेट्रो इस बार सुरक्षा मानकों पर खरी उतरकर राजधानीवासियों को नवंबर के अंत तक मेट्रो की सवारी का तोहफा दे पाएगी या फिर इंतजार और लंबा खिंचेगा। एमपी मेट्रो प्रबंधन एक महीने से सुधार कार्य में जुटा गौरतलब है कि अक्टूबर में मेट्रो संचालन शुरू किया जाना था, लेकिन सीएमआरएस टीम के पिछले निरीक्षण के दौरान मेट्रो प्रबंधन परीक्षा में पास नहीं हो सका। उस समय सुरक्षा संबंधी कई खामियां सामने आई थीं। सूत्रों के अनुसार टीम ने यात्री सुरक्षा, स्टेशन एरिया, एंट्री और एग्जिट से जुड़ी कमियों की ओर ध्यान दिलाया था। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए एमपी मेट्रो प्रबंधन एक महीने से सुधार कार्यों में जुटा हुआ है। अब टीम द्वारा देखा जाएगा कि सुरक्षा मानकों पर मेट्रो प्रबंधन ने कितना सुधार किया है और क्या ट्रेन के संचालन के लिए सभी जरूरी मानक पूरे हो गए हैं या नहीं। बता दें कि एमपी मेट्रो के प्रबंध निदेशक एस. कृष्ण चैतन्य पूरी सक्रियता के साथ प्रायोरिटी कॉरिडोर के सभी मेट्रो स्टेशनों के कार्यों की समीक्षा और निरीक्षण कर रहे हैं।मंगलवार और बुधवार उन्होंने मैदान में उतरकर चल रहे कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और सीएमआरएस से जुड़े बिंदुओं पर विशेष रूप से रिव्यू किया। मैदानी कार्य पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाया प्रायोरिटी कॉरिडोर पर नहीं शुरू हुआ मैदानी कार्य सूत्रों की मानें तो प्रायोरिटी कॉरिडोर पर अभी भी मैदानी कार्य पूरी तरह शुरू नहीं हो पाया है। सामान्यत: यह काम तब शुरू किए जाते हैं, जब परियोजना के सभी तकनीकी और सुरक्षा से जुड़े कार्य पूरे हो जाएं। ऐसे में इस बार भी मेट्रो के संचालन की मंजूरी मिल पाएगी या नहीं, यह फिलहाल संशय में है। अक्टूबर में संचालन शुरू नहीं होने पर हुई थी किरकिरी अक्टूबर में समय पर मेट्रो शुरू न होने से एमपी मेट्रो प्रबंधन की काफी किरकिरी हो चुकी है। यही कारण है कि एमडी एस. कृष्ण चैतन्य अब भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी करने से बच रहे हैं और पूरी तैयारी के साथ सीएमआरएस परीक्षा पास करने पर फोकस कर रहे हैं। इस मामले में भी उन्होंने चुप्पी साध रखी है।

भोपाल मेट्रो ट्रायल सफल, CMRS टीम ने की जांच; दिवाली से पहले शुरू हो सकती है सेवा

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो को जल्द से जल्द दौड़ाए जाने की कवायद तेज हो गई हैं। आम यात्रियों के लिए कमर्शियल ट्रेवलिंग शुरू करने के लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम ने खुद यात्रा करके सुरक्षा मानकों की जांच की।  सीएमआरएस कमिश्नर जनक कुमार गर्ग सुभाषनगर स्थित मेट्रो डिपो पहुंचें। सीएमआरएस कमिश्नर ने टीम के साथ यहां पर करीब 3 घंटे तक निरीक्षण किया और मेट्रो में सवार हुए। उनके साथ मेट्रो एमडी एस कृष्ण चैतन्य भी मौजूद रहे। इस दौरान गर्ग ने प्राथमिकता में शामिल कॉरिडोर के 6.22 किलोमीटर रूट तक सफर किया। यह रूट सुभाष नगर से एम्स तक का है। इस निरीक्षण के दौरान वे और उनकी टीम सुभाषनगर स्टेशन पर करीब 30 मिनट और एम्स स्टेशन पर सवा घंटे रुकी। क्या हैं सीएमआरएस दरअसल, किसी भी रेल लाइन या मेट्रो रेल को आम लोगों के लिए प्रारंभ करने से पूर्व सीएमआरएस की जांच आवश्यक होती है। इस टीम की जांच में 'हरी झंडी' मिलने के बाद आम लोगों के लिए मेट्रो दौड़ना यानी कमर्शियल सफर की शुरुआत होती है। इस जांच टीम के अफसर ट्रैक के नट-बोल्ट, सिग्नल, इंट्री-एग्जिट गेट, डिपो सहित सुरक्षा के लिहाज से हर पक्ष की बारीकी से जांच की जाती है। टीम के लौटने के बाद मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर ही भोपाल में मेट्रो रन प्रारंभ होगा। पीएम मोदी दिखा सकते हैं हरी झंडी बताया जा रहा है कि इस महीने के अंत तक सीएमआरएस की 'ओके' रिपोर्ट मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेट्रो को हरी झंडी दिखाएंगे। पूरी संभावना है कि वे भोपाल मेट्रो में सफर भी करें। आपको बता दें कि 31 मई को मोदी ने इंदौर मेट्रो को भोपाल से हरी झंडी दिखाई थी।     सीएमआरएस की टीम ने 90 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रेन दौड़ाई     अचानक ब्रेक लगाकर की सुरक्षा जांच, कंट्रोल रूम का रिस्पांस जांचा     मेट्रो मेन लाइन, स्टेशन का निरीक्षण बाकी, सप्ताहभर बाद फिर जांच 2010 का सपना होगा साकार मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त जनक कुमार गर्ग के नेतृत्व में टीम ने सुभाष नगर से एम्स तक मेट्रो को 90 किमी प्रतिघंटे की फुल स्पीड में दौड़ाया। सीएमआरएस सर्टिफिकेट मिलते ही मेट्रो यात्रियों को लेकर दौडने को तैयार हो जाएगी। 2010 से ही शहरवासियों को मेट्रो में सवारी का दिखाया जा रहा सपना अब पूरा होने को है। निरीक्षण के बाद टीम शाम को रवाना हो गई। अभी मेन लाइन, स्टेशन की जांच बोटगी। टीम ने अत्याधुनिक ट्रेन सेट। सिस्टम के अलावा नट बोल्ट, स्टेशन, सिग्नल आदि की जांच की। मेट्रो के दूसरे फेस में भी काम तेज भोपाल मेट्रो का उद्देश्य यात्रियों के सफर को आसान बनाना है। साथ ही शहर को एक आधुनिक, कुशल शहरी केंद्र के रूप में आकार देना है। भोपाल मेट्रो के पहले चरण का काम पूरा होने के बाद दूसरे चरण को लेकर काम तेजी से चल रहा है। इसका दूसरा चरण भदभदा चौराहे से रत्नागिरी चौराहे तक लगभग 15 किमी लंबा होगा। इसमें 14 एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाएंगे। इस पर भी तेजी से काम चल रहा है। सितंबर में सीएमआरएस का निरीक्षण गुरुवार को सीएमआरएस की टीम ने तीन कोच वाली मेट्रो ट्रेन यानी रोलिंग स्टॉक में यात्री सुरक्षा, सुविधा और ऊर्जा दक्षता की जांच की। इसमें सीसीटीवी की निगरानी, आरामदायक बैठने की व्यवस्था, वातानुकूलित कोच, चार्जिग पॉइंट और वास्तविक समय यात्री सूचना प्रणाली की सुविधा को जांचा गया। इनकी टेस्टिंग की गयी। तीन माह में दो बड़ी जांच जुलाई में आयी थी आरडीएसओ की टीम 9 जुलाई से 21 जुलाई तक 13 दिन मेट्रो ट्रेन के ऑसिलेशन और इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस का लखनऊ की रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन यानी आरडीएसओ ने परीक्षण किया था। टीम ने 90 किमी प्रतिघंटा पर ट्रेन दौड़ाई थी। इमरजेंसी ब्रेक लगाया हर स्टेशन, ट्रैक के बीच मेट्रों के ऑसिलेशन यानि कंपन को मापा गया था। उस समय परीक्षण में मेट्रो की राइड क्वालिटी, स्थिरता, इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस, और सम्पूर्ण रोलिंग स्टॉक का मूल्यांकन रिकॉर्ड किया गया था। परीक्षण से रोलिंग स्टॉक यानी ट्रेन की सुरक्षा. विश्वसनीयता और दक्षता के उच्चतम मानकों की स्थिति पता चलती है। तकनीकी सवाल-जवाब भी हुए सीएमआरएस टीम ने मेट्रो के वरिष्ठ अधिकारियों और इंजीनियर्स से मेट्रो ऑपरेशन के तकनीकी पक्षों से जुड़े सवाल जवाब किए। सुरक्षा प्रोटोकॉल क्या होता है? स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स, रोलिंग स्टॉक की तैयारियों के साथ ही ऑपरेशन के लिए डिपो के सिस्टम से जुड़े सवाल जवाब किए गए। इसका बकायदा प्रजेंटेशन भी लिया गया। इस अवसर पर एमडी मेट्रो एस कृष्ण चैतन्य, निदेशक सिस्टम अरुण कुमार श्रीवास्तव, निदेशक प्रोजेक्ट अजय गुप्ता व अन्य टीम सदस्य उपस्थित रहे। ऑपरेशन कंट्रोल को परखा सुभाष नगर डिपो इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच में ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर को देखा गया। ट्रेन संचालन, विद्युत आपूर्ति और सुरक्षा प्रणालियों की केंद्रीकृत निगरानी. डिपो में मेंटेनेंस बे, स्टेबलिंग लाइन, रिपेयर बे के साथ आग लगने की स्थितियों की पहचान कर अग्निशमन सहित अन्य सुरक्षा प्रणालियों को परखा गया। तेज रफ्तार में ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम की जांच सीएमआरएस ने डिपो में मेट्रो के रैक की जांच करने के दौरान ड्राइवर से इसे एम्स तक ले चलने का कहा। मेट्रो ट्रेन डिपो से सुभाष नगर स्टेशन पहुंची और 90 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ाने का आदेश दिया। तेज रफ्तार ट्रेन देखकर आंबेडकर ब्रिज से गुजरने वाले रूककर देखने लगे। ट्रेन तेज गति से दौड़ी और फिर अचानक रूक गयी। कभी मध्यम गति में चली। दोपहर करीब साढ़े बारह बजे से एक घंटे तक पांच रैक को इसी तरह दौड़ाया गया। ऐसा रैक की गति और इसके ब्रेकिंग सिस्टम की जांच के लिए किया की टीम ने भी इसी तरह ब्रेकिंग सिस्टम की जांच की थी। मेट्रो के अंदर से ही सीएमआरएस जनक कुमार ने वहां दर्ज आपातकालीन नंबर पर कॉल किया। कंट्रोल रूम में इसे किसी तरह अटेंड किया जाता है। कॉल लगता भी है या नहीं इसे देखा।

CMRS टीम भोपाल मेट्रो के निरीक्षण पर, OK रिपोर्ट के बाद आम जनता कर सकेगी सफर

भोपाल  कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम भोपाल पहुंच गई है। गुरुवार और शुक्रवार को टीम निरीक्षण करेगी। कमिश्नर जनक कुमार गर्ग भी साथ हैं। इसके बाद एक और टीम भोपाल पहुंचेंगी। मेट्रो के लिए सीएमआरएस का दौरा सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि 'ओके' रिपोर्ट का फाइनल होना।  मेट्रो अफसरों की माने तो ये टीमें ट्रैक के नट-बोल्ट से लेकर सिग्नल, इंट्री-एग्जिट गेट, डिपो तक देखेगी। निरीक्षण में यदि सबकुछ पैमाने और सुरक्षा के लिहाज से परफेक्ट मिलता है तो सीएमआरएस की टीम 'ओके' रिपोर्ट देगी। इसके बाद कमर्शियल रन की तारीख तय कर दी जाएगी। मुंबई से आई है टीम सीएमआरएस की टीम मुंबई से आई है। इस टीम के जिम्मे डिपो और गाड़ी है। डिपो में मेट्रो की सभी जरूरतें जानी जाएगी। वहीं, मेट्रो के अंदर फंक्शन, सॉफ्टवेयर के बारे में जानेगी। यदि कहीं कोई खामी मिलती है तो उसे तुरंत सुधरवाएगी। यह टीम डिपो के अंदर ही रहेगी।इसके बाद दूसरी टीम ट्रैक का निरीक्षण करेगी। हर वो बात जानेगी, जो मेट्रो के संचालन के लिए जरूरी है। टीम ट्रैक के नट-बोल्ट तक देखती है, क्योंकि यह मामला आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा होता है। इसलिए हर पैमाने पर जांच होती है। अक्टूबर में कमर्शियल रन प्रस्तावित बता दें कि अक्टूबर में मेट्रो का कमर्शियल रन प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेट्रो को हरी झंडी दिखाएंगे। वहीं, वे भोपाल मेट्रो के पहले यात्री भी बन सकते हैं। 31 मई को इंदौर मेट्रो को भोपाल से हरी झंडी दिखाई थी। इसके बाद से भोपाल मेट्रो को लेकर तेजी से काम शुरू हो गया। मेट्रो के जिन 3 स्टेशन के काम बचे हैं, उन पर फोकस किया जा रहा है। आरडीएसओ से मिल चुकी ओके रिपोर्ट भोपाल मेट्रो के लिए सबसे पहले रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) की टीम आ चुकी है। इस टीम की रिपोर्ट ओके आई। इसके निरीक्षण के बाद सीएमआरएस को डॉक्युमेंट्स सबमिट किए गए। फिर निरीक्षण की तारीख 25-26 सितंबर फाइनल हुई। साल 2018 से शुरू हुआ था मेट्रो का काम भोपाल में पहला मेट्रो रूट एम्स से करोंद तक 16.05 किलोमीटर लंबा है। इसमें से एम्स से सुभाष नगर के बीच 6.22 किलोमीटर पर प्राथमिकता कॉरिडोर के तौर पर 2018 में काम शुरू किया गया था। सुभाष नगर से आरकेएमपी स्टेशन तक काम पूरा हो चुका है। इसके आगे अलकापुरी, एम्स और डीआरएम मेट्रो स्टेशन के कुछ काम बाकी है, जो पूरे किए जा रहे हैं। रेल ट्रैक के ऊपर दो स्टील ब्रिज भी बनाए गए हैं। दो साल पहले हुआ था पहला ट्रायल राजधानी में पहली बार मेट्रो 3 अक्टूबर 2023 को पटरी पर दौड़ी थी। तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन तक मेट्रो में सफर किया था।

भोपाल मेट्रो सेवा शुरू: पहले 7 दिन फ्री यात्रा, फिर ₹20 से शुरू होगा किराया

भोपाल  अगला स्टेशन है…दरवाजे बाईं तरफ खुलेंगे। कृपया, दरवाजों से हटकर खड़े हों। इंदौर को मेट्रो की सौगात मिलने के बाद भोपाल के यात्रियों के मन में भी कुछ इस तरह के ख्यालात आ रहे होंगे। लोग पिछले एक साल से मेट्रो ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं। अब ऐसे लोगों के लिए अक्टूबर का महीना खुशखबरी लेकर आ सकता है। दरअसल, मेट्रो के ट्रायल रन के बीच कमर्शियल रन शुरू होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले चरण की मेट्रो को हरी झंडी दिखा सकते हैं। यात्रियों को पहले 7 दिन तक फ्री में सफर करने का मौका मिलेगा। वहीं, कुछ दिनों तक किराए में डिस्काउंट में टिकट मिलने के बाद 20 रुपये की शुरूआती कीमत में लोग यात्रा कर पाएंगे। सीएमआरएस टीम पहुंची भोपाल मेट्रो ट्रेन शुरू करने से पहले कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की एक टीम 24 सितंबर को भोपाल पहुंचेगी। मेट्रो के लिए सीएमआरएस का दौरा सबसे खास होता है। इसकी 'ओके' रिपोर्ट मिलने के बाद कमर्शियल रन शुरू होती है। यह टीम डिपो और गाड़ी को जांचेगी। साथ ही ट्रैक के नट-बोल्ट से लेकर सिग्नल तक देखेगी। यह टीम 25 और 26 सितंबर को निरीक्षण करेगी। यह शेड्यूल आने के बाद एमपी मेट्रो के अधिकारी तैयारियों में जुट गए हैं। इस जांच के बाद एक और केंद्रीय टीम भी आएगी। फाइनल रिपोर्ट के बाद मेट्रों को दौड़ाया जा सकता है। ऐसा रहेगा मेट्रो किराया भोपाल मेट्रो के अफसरों के अनुसार शुरुआती 7 दिन तक यात्री मेट्रो में फ्री सफर कर पाएंगे। इसके बाद 3 महीने तक टिकट पर 75%, 50% और 25% की छूट दी जाएगी। यह छूट खत्म होते ही 20 रुपए का टिकट लेकर लोग मेट्रो का सफर कर पाएंगे। भोपाल के सभी चरण प्रारंभ होने के बाद अधिकतम किराया 80 रुपए रखने का विचार है। 31 मई को इंदौर में चलाई गई मेट्रो के लिए भी यही मॉडल रहा था। फिलहाल यह बाधा बताया जाता है कि जिस लाइन पर पहले मेट्रो चलेगी उसके एम्स, अलकापुरी और डीआरएम ऑफिस स्टेशन पर गेट लगाने समेत अन्य काम अधूरे हैं। इन्हें अगले 15 दिन में पूरा करने का टारगेट तय किया गया है। पहला चरण ही पूरा हुआ आपको बता दें कि राजधानी भोपाल में पहले चरण के तहत ऑरेंज लाइन में एम्स साकेत नगर से सुभाष नगर डिपो तक करीब 6 किलोमीटर की दूरी की लाइन बनाई गई है। इसके बाद दूसरा फेस सुभाषनगर से करोंद तक के लिए कार्य चल रहा है। इसमें करीब 2 से 3 वर्ष लगने का अनुमान है। फिलहाल भोपाल के सुभाष नगर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन ट्रैक पर मेट्रो दौड़ाकर ट्रायल रन किया जा रहा है। ट्रायल रन में न्यूनतम 30 और अधिकतम 80 किमी प्रतिघंटा रफ्तार रखी जा रही है। आनलाइन नहीं मिलेगा टिकट भले ही दिल्ली सहित कई शहरों में टिकट प्रणाली आनलाइन हो गई है। लेकिन भोपाल में आपको मैन्युअल टिकट से यात्रा करना पड़ेगा। बता दें कि ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लगाने वाली तुर्किए की कंपनी 'असिस गार्ड’ का टेंडर सरकार ने निरस्त कर दिया है। इसकी वजह है तुर्किए ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को ड्रोन देकर मदद की थी।

भोपाल मेट्रो का किराया तय: ₹20 से ₹80 के बीच, शुरुआती 7 दिन मुफ्त यात्रा और 3 महीने तक डिस्काउंट

भोपाल  भोपाल में अक्टूबर से लोग मेट्रो ट्रेन में सफर कर सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेट्रो को हरी झंडी दिखाने राजधानी आ सकते हैं। इससे पहले डिपो और गाड़ी को देखने के लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की एक टीम 24 सितंबर को भोपाल पहुंचेगी।  मेट्रो की किराया सूची पर भी मंथन किया जा रहा है। अफसरों की मानें तो 7 दिन तक लोग मेट्रो में फ्री सफर कर सकेंगे। वहीं, 3 महीने तक टिकट पर 75%, 50% और 25% की छूट दी जाएगी। छूट खत्म होने के बाद सिर्फ 20 रुपए में मेट्रो का सफर किया जा सकेगा। इसका अधिकतम किराया 80 रुपए होगा। 31 मई को इंदौर में चलाई गई मेट्रो के लिए भी यही मॉडल रहा था। भोपाल में ऑरेंज लाइन के पहले फेज में मेट्रो सुभाषनगर से एम्स तक करीब 6 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। दूसरा फेस सुभाषनगर से करोंद तक है। हालांकि, इसका काम अगले 2 से 3 साल में पूरा हो सकेगा। 15 दिन में काम पूरा करने का टारगेट अगला स्टेशन एम्स है। दरवाजे बाईं तरफ खुलेंगे। कृपया, दरवाजों से हटकर खड़े हों…इस तरह का अनाउंसमेंट आपको अक्टूबर में सुनाई देने लगेगा। मेट्रो के ट्रायल रन के बीच कमर्शियल रन शुरू होगा। हालांकि, अभी एम्स, अलकापुरी और डीआरएम ऑफिस स्टेशन पर गेट लगाने समेत अन्य काम किए जा रहे हैं। इन्हें अगले 15 दिन में पूरा करने का टारगेट है। 30 से 80 किमी प्रति घंटा रहेगी मेट्रो की स्पीड भोपाल के सुभाष नगर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन (RKMP) और इंदौर के गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर तक मेट्रो कोच को ट्रैक पर दौड़ाकर ट्रायल रन किया जा रहा है। ट्रायल रन में न्यूनतम 30 और अधिकतम 80 किमी प्रतिघंटा रफ्तार रखी जा रही है। बीच-बीच में 100 से 120 किमी की रफ्तार से भी मेट्रो दौड़ाई जा रही है। सिग्नल लग चुके हैं। इनकी टेस्टिंग भी हो रही है। ट्रेन की तर्ज पर मेट्रो में भी टिकट लेनी पड़ेगी मेट्रो का टिकट सिस्टम ऑनलाइन न होकर मैन्युअल ही रहेगा। जैसे आप ट्रेन में टिकट लेकर सफर करते हैं, वैसे ही मेट्रो में भी कर सकेंगे। इंदौर में अभी यही सिस्टम है। भोपाल और इंदौर मेट्रो में ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लगाने वाली तुर्किए की कंपनी 'असिस गार्ड’ से काम छिनने और नई कंपनी के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू किए जाने से यह स्थिति बनेगी। बता दें कि असिस गार्ड का मामला पिछले 4 महीने से सुर्खियों में था। आखिरकार अगस्त में असिस गार्ड का टेंडर कैंसिल कर दिया गया। नई कंपनी के लिए टेंडर भी कॉल किए हैं। इस पूरी प्रक्रिया में दो से तीन महीने का वक्त लग सकता है। मैन्युअल टिकट ही एक मात्र ऑप्शन अफसरों ने बताया कि असिस गार्ड कंपनी इंदौर में स्टेशनों पर भी सिस्टम लगा रही थी, लेकिन विवाद के बाद इंदौर में मैन्युअल टिकट ही ऑप्शन बचा था। पिछले साढ़े 3 महीने से इंदौर में ट्रेन जैसा ही सिस्टम है। इसमें मेट्रो के कर्मचारी ही तैनात किए गए हैं। यही ऑप्शन अब भोपाल मेट्रो के लिए भी बचा है। दरअसल, 'असिस गार्ड’ के जिम्मे ही सबसे महत्वपूर्ण ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन यानी किराया लेने की पूरी प्रक्रिया का सिस्टम तैयार करने का काम था। जिसमें कार्ड के जरिए किराया लेने के बाद ही गेट खुलना भी शामिल है। यह कंपनी सिस्टम का पूरा मेंटेनेंस भी करती। अब अनुबंध खत्म होने पर नई कंपनी काम करेगी, लेकिन उसे टेंडर और फिर अन्य प्रक्रिया से गुजरने में समय लगेगा। इसलिए मेट्रो कॉर्पोरेशन भोपाल में भी मैन्युअली टिकट सिस्टम ही लागू कर सकता है। अफसरों के अनुसार, मैन्युअली सिस्टम के लिए अमला तैनात किया जा रहा है।

भोपाल को मेट्रो की सौगात: अक्टूबर से शुरू होगी सेवा, हाईटेक डिपो बनकर तैयार

भोपाल  अक्टूबर में भोपाल मेट्रो(Bhopal Metro) का कमर्शियल रन शुरू होने के साथ ही सुभाष नगर डिपो का उपयोग बढ़ जाएगा। अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ डिजाइन किए इस डिपो की छत पर सोलर पैनल लगाने की योजना है ताकि ऊर्जा की जरूरतों को पूरा कर सके। इसे एक पर्यावरण-अनुकूल डिपो बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। यह डिपो मेट्रो के ऑरेंज लाइन (करोद से एम्स) के लिए बनाया है। 140 करोड़ रुपए हुए खर्च सुभाष नगर डिपो का निर्माण जुलाई 2023 में पूरा हो गया था। यह मेट्रो परियोजना के पहले चरण में सबसे पहले पूरे होने वाले काम में से एक था। यह डिपो सुभाष नगर में स्थित है. जो कि ऑरेंज लाइन के एक छोर के पास है। यह ट्रेनों की आवाजाही को आसान बनाता है। इसमें कई रैम्प और ट्रैक बनाए गए हैं जो मेट्रो ट्रेनों को मुख्य लाइन से डिपो तक लाते और ले जाते हैं। भोपाल को मिलेंगे 27 रैक सुभाष नगर मेट्रो डिपों में मेट्रो ट्रेनों की दैनिक जांच, मरम्मत और धुलाई का काम किया जाएगा। यहां ट्रेनों की स्वचालित धुलाई के लिए वॉशिंग प्लांट भी बनाया गया है। ट्रेनों की नियमित तकनीकी जांच के लिए इंस्पेक्शन शेड और मरम्मत के लिए रिपेयर वर्कशॉप भी बनाया गया है। डिपो को ऐसे डिजाइन किया गया है कि भविष्य में बढ़ने वाली ट्रेनों की संख्या को भी संभाल सके। भोपाल मेट्रो क्यों है खास? सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम सितंबर के मध्य में निरीक्षण करेगी। साफ-सुथरे प्लेटफॉर्म, आधुनिक टिकटिंग सिस्टम और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था भोपाल मेट्रो को खास बनाएंगे। यह मेट्रो न केवल ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी। प्रायोरिटी कॉरिडोर पर तेजी से काम भोपाल मेट्रो के पहले चरण में प्रायोरिटी कॉरिडोर पर काम तेजी से पूरा किया जा रहा है। इस कॉरिडोर में स्टेशनों के कॉनकोर्स लेवल पर कंट्रोल रूम, सिस्टम रूम और यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाओं का निर्माण चल रहा है। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म लेवल पर भी काम जोरों पर है।  सुभाष नगर में मेट्रो डिपो के साथ-साथ एडमिन बिल्डिंग में कंट्रोल रूम और अन्य महत्वपूर्ण सिस्टम रूम तैयार किए जा रहे हैं। अधिकारियों का लक्ष्य है कि 30 सितंबर तक प्रायोरिटी कॉरिडोर का सारा काम पूरा हो जाए। सीएमआरएस की टीम करेगी निरीक्षण मेट्रो संचालन से पहले सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम 15 सितंबर के बाद भोपाल पहुंचेगी। यह टीम मेट्रो के डिपो, ट्रेन और मेन लाइन का निरीक्षण करेगी। इंदौर मेट्रो की तर्ज पर भोपाल में भी दो चरणों में निरीक्षण होगा। पहले चरण में डिपो और ट्रेन की जांच होगी, जबकि दूसरे चरण में मेन लाइन का निरीक्षण किया जाएगा। इसके लिए मेट्रो प्रबंधन ने सभी जरूरी दस्तावेज सीएमआरएस के पोर्टल पर अपलोड कर दिए हैं। निरीक्षण की तारीख जल्द ही तय की जाएगी। डिपो और मेन लाइन का काम पूरा मेट्रो के डिपो और मेन लाइन का अधिकांश काम पूरा हो चुका है। डिपो में ट्रेनों के रखरखाव और संचालन से जुड़े सभी जरूरी सिस्टम तैयार हैं। मेन लाइन पर भी निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। अधिकारियों का कहना है कि अक्टूबर में मेट्रो को प्रायोरिटी कॉरिडोर पर दौड़ाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए सभी टीमें दिन-रात काम कर रही हैं। भोपालवासियों के लिए क्या होगा खास? भोपाल मेट्रो के शुरू होने से शहरवासियों को यातायात का एक आधुनिक, तेज और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा। सुभाष नगर से एम्स तक का सफर आसान और समय की बचत करने वाला होगा। मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं जैसे कि साफ-सुथरे प्लेटफॉर्म, टिकटिंग सिस्टम और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध होगी। यह मेट्रो न केवल भोपाल की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाएगी, बल्कि पर्यावरण के लिए भी अनुकूल होगी। भोपाल मेट्रो का भविष्य पहले चरण की सफलता के बाद भोपाल मेट्रो के अगले चरणों पर भी काम शुरू होगा, जिससे शहर के अन्य हिस्सों को भी मेट्रो से जोड़ा जाएगा। यह प्रोजेक्ट भोपाल को एक स्मार्ट और आधुनिक शहर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अक्टूबर में मेट्रो के शुरू होने का इंतजार भोपालवासियों को बेसब्री से है। जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है, शहर में उत्साह बढ़ता जा रहा है। भोपाल मेट्रो के फायदे 1. तेज और समय की बचत     ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी।     सुभाष नगर से एम्स तक का सफर मिनटों में तय होगा।  2. सुविधाजनक यात्रा     साफ-सुथरे प्लेटफॉर्म, एस्केलेटर, लिफ्ट और आधुनिक टिकटिंग सिस्टम।     यात्रियों के लिए आरामदायक कोच और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था।  3. ट्रैफिक दबाव में कमी     सड़कों पर निजी गाड़ियों का बोझ घटेगा।     शहर के मुख्य मार्गों पर जाम की समस्या कम होगी।  4. पर्यावरण के लिए फायदेमंद     प्रदूषण और धुएं का स्तर घटेगा।     इलेक्ट्रिक आधारित मेट्रो, ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देगी।  5. आर्थिक और सामाजिक विकास     मेट्रो स्टेशन के आसपास बिज़नेस और रोजगार के नए अवसर।     शहर का बुनियादी ढांचा और इमेज स्मार्ट सिटी जैसी होगी।  6. सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन     महिलाओं, छात्रों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित यात्रा का विकल्प।     जीपीएस और सीसीटीवी आधारित निगरानी।  कुल मिलाकर, भोपाल मेट्रो न सिर्फ़ यात्रियों के लिए आरामदायक सफर देगी, बल्कि शहर को स्मार्ट और प्रदूषण मुक्त बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।