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नवरात्रि 2026: पंचक और खरमास के कारण सीमित समय में होगी कलश स्थापना

कल यानी 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि शुरू होने जा रही है. नवरात्रि की शुभ शुरुआत पहले दिन कलश स्थापना के साथ होगी. फिर 27 मार्च को महानवमी के साथ चैत्र नवरात्रि की समाप्ति हो जाएगी. इस नवरात्रि की शुरुआत बड़े ही दुर्लभ संयोग में होगी. इस समय खरमास लग चुका है. पंचक भी लगा हुआ है. नवरात्रि की कलश स्थापना पंचक और खरमास में होगी. खरमास 15 मार्च से लगा है, जोकि 14 अप्रैल तक रहेगा. जबकि पंचक 16 मार्च से लगा है और ये 20 मार्च तक रहेगा. चैत्र नवरात्रि तिथि नवरात्रि के पहले दिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन कलश स्थापना होती है. इस साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी. ये तिथि 20 मार्च को सुबह 04 बजकर 25 मिनट तक रहेगा. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, नवरात्रि की कलश स्थापना कल की जाएगी. कलश स्थापना शुभ मुहूर्त     चैत्र नवरात्रि की कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी. ये मुहूर्त सुबह 07 बजकर 43 मिनट तक रहेगा.     अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा. अगर किसी वजह से सुबह कलश स्थपना न कर पाएं तो इस मुहूर्त में करें. खरमास और पंचक से कलश स्थापना में विघ्न नहीं ज्योतिषविदों के अनुसार, खरमास में शुभ और मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं, लेकिन इसमें देवी की पूजा, धार्मिक अनुष्ठान या फिर कलश स्थापना जैसे शुभ कार्यों को लेकर कोई मनाही नहीं होती. आप निश्चिंत होकर तय मुहूर्त में कलश स्थापना करें. बता दें कि कलश स्थापना करके माता दुर्गा का आवाहन किया जाता है. फिर पूजन शुरू होता है. इस विधि से करें कलश स्थापना     ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में कलश स्थापना करें.     चैत्र नवरात्रि के पहले दिन स्नान कर लें.     इसके बाद एक चौकी रखें. उस पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा रखें.     मिट्टी के बर्तन में मिट्टी डालकर जौ बोएं.     इसके बाद एक मिट्टी या तांबे का कलश लें. उसमें जल भरकर सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें.     कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते बांधें और ऊपर से एक नारियल रख दें.     इसके बाद इस कलश को देवी की चौकी के पास स्थापित कर दें.  

MS धोनी ने छोड़ा अपना नंबर 7, क्या जडेजा से जुड़ा है इस फैसले का राज?

चेन्नई  इंडियन प्रीम‍ियर लीग (IPL) 2026 से पहले चेन्नई सुपर किंग्स (Chennai Super Kings) के पूर्व कप्तान महेंद्र स‍िंह धोनी ( MS Dhoni) ने अपने जर्सी नंबर में बदलाव कर क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है. लंबे समय तक नंबर 7 के साथ पहचान बना चुके धोनी अब नंबर 8 में नजर आ सकते हैं. हालांकि यह जर्सी चेन्नई टीम के येलो कलर में नहीं है। धोनी ने सोशल मीडिया पर एक रहस्यमयी पोस्ट शेयर करते हुए लिखा- कुछ नंबर आपके साथ रहते हैं… लेकिन आज, मैं 8 पर स्विच कर रहा हूं, आपको जल्द ही पता चल जाएगा क्यों. इस मैसेज ने फैन्स  और एक्सपर्ट्स के बीच कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह बदलाव महज एक प्रमोशनल स्टंट है या इसके पीछे कोई भावनात्मक या रणनीतिक कारण छिपा है. वहीं ऐसा भी अनुमान है कि यह बदलाव टीम के अंदर जर्सी नंबर मैनेजमेंट से जुड़ा हो सकता है। एक थ्योरी यह भी सामने आई है कि यह फैसला रवींद्र जडेजा से जुड़ा हो सकता है, जो पहले नंबर 8 पहनते थे. पर अब वो राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा बन चुके हैं, जिससे यह नंबर खाली हो गया था. ऐसे में धोनी का इस नंबर को अपनाना एक तरह का ट्रिब्यूट भी माना जा रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, कुछ क्रिकेट एक्सपर्ट्स इसे एक ब्रांडिंग और मार्केटिंग मूव भी मान रहे हैं.IPL जैसे बड़े मंच पर जर्सी नंबर बदलना फैन्स  की दिलचस्पी बढ़ाने और मर्चेंडाइज सेल्स को बूस्ट करने का जरिया भी हो सकता है। यह भी संभव है कि CSK टीम मैनेजमेंट आने वाले सीजन के लिए नई रणनीति पर काम कर रहा हो, जिसमें सीनियर खिलाड़ियों के रोल और पहचान को नए तरीके से पेश किया जा रहा है। फिलहाल, धोनी या फ्रेंचाइजी की ओर से इस बदलाव की असली वजह पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. लेकिन एक बात तय हैधोनी का हर कदम सोच-समझकर उठाया गया होता है, और इस बार भी इसके पीछे कोई बड़ा कारण जरूर होगा, जिसका खुलासा जल्द हो सकता है 2023 में धोनी की जर्सी BCCI ने की थी र‍िटायर  महेंद्र‍ सिंह धोनी की 7 नंबर की जर्सी को BCCI ने साल 2023 में रिटायर करने का फैसला किया था. इससे पूर्व 2017 में भी महान बल्लेबाज सच‍िन तेंदुलकर की सिग्नेचर 10 नंबर जर्सी को भी हमेशा के लिए र‍िटायर कर दिया गया था. धोनी का जन्म 7 जुलाई 1981 को हुा था, ऐसे में उनकी जन्म की तारीख की वजह से ही उन्होंने इस नंबर को अपनाया था।

Wildlife Crime: डिप्टी रेंजर की साजिश का खुलासा, बाघ और तेंदुए के शिकार के बाद खाल बेचने जाते पकड़ा गया

जगदलपुर. बस्तर के इंद्रावती और बीजापुर के जंगलों से जो कहानी सामने आई है. वो सिर्फ शिकार नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी की चीख है. यहां बाघ और तेंदुए की मौत हुई. लेकिन गोली से नहीं. बल्कि एक धीमी, दर्दनाक साजिश से. तार के फंदों में फंसे दोनों वन्य जीव 2-3 दिनों तक तड़पने के बाद आखिरकार दम तोड़ दिया. इस पूरे खेल में एक ऐसा नाम सामने आया. जिस पर जंगल बचाने की जिम्मेदारी थी. दंतेवाड़ा वन विभाग का डिप्टी रेंजर देवी प्रसाद कोयाम भी इस शिकारी गिरोह का हिस्सा निकला. वन विभाग की उड़नदस्ता टीम ने जब कार्रवाई की तो 9 आरोपी पकड़ में आए, जो बाघ और तेंदुए की खाल को बाइक के जरिए रायपुर ले जाकर बेचने की फिराक में थे. बरामद खाल और हालात इस ओर इशारा कर रहे हैं कि शिकार हाल ही में हुआ और मारे गए बाघ की उम्र महज 3 साल थी, यानी एक युवा दहाड़ को हमेशा के लिए खामोश कर दिया गया. विशेषज्ञ बताते हैं कि शिकारियों ने पुराने लेकिन बेहद क्रूर तरीके अपनाए. मांस के लालच में फंसाकर तार के फंदे गले में कस दिए और फिर उन्हें तड़पने के लिए छोड़ दिया गया. सवाल अब सिर्फ शिकार का नहीं है सवाल उस भरोसे का है जो जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा पर टिका है. जब जिम्मेदार ही शिकारी बन जाएं तो जंगल की सुरक्षा आखिर किसके भरोसे? बस्तर के जंगल आज खामोश हैं लेकिन इस खामोशी में एक सवाल लगातार गूंज रहा है, क्या अब भी जंगल सुरक्षित हैं या शिकार का खेल सिस्टम के भीतर तक फैल चुका है?

UP Board 10वीं-12वीं आंसरशीट चेकिंग आज से, त्रिस्तरीय मूल्यांकन लागू, जानें कब आएगा रिजल्ट

लखनऊ यूपी बोर्ड 10वीं 12वीं परीक्षा की कॉपियों की चेकिंग आज 18 मार्च से राज्य के 250 केंद्रों पर शुरू होगी। 2.5 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए आज से 1.5 लाख से अधिक परीक्षकों ने काम शुरू किया है। हाईस्कूल उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में 4300 अंकेक्षक, 8550 डीएचई व 83800 परीक्षक लगाए गए हैं। यूपी बोर्ड इंटर उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में 2590 अंकेक्षक, 5300 डीएचई व 48990 परीक्षक लगे हैं। उत्तरपुस्तिकाओं की पूरी गंभीरता से त्रिस्तरीय जांच की जाएगी। यूपी बोर्ड ने इस साल पहली बार राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और वरिष्ठ शिक्षकों की अंकेक्षण में ड्यूटी लगाई है ताकि किसी प्रकार की लापरवाही न रह जाए। बोर्ड की कॉपियों का पहले परीक्षक मूल्यांकन करते हैं और उसके बाद उप मुख्य नियंत्रक या डिप्टी हेड एग्जामिनर (डीएचई) रैंडम 45 या 50 कॉपियों में से कम से कम पांच कॉपियों की जांच करते हैं कि कहीं कोई कमी तो नहीं रह गई। 15 प्रतिशत की जांच अंकेक्षक करेंगे तीसरे चरण में डीएचई के अधीन जांची जांची गई कुल कॉपियों में से 15 प्रतिशत की जांच अंकेक्षक करते हैं। अंकेक्षण का नियम तो है लेकिन मूल्यांकन केंद्रों पर उसका गंभीरता से पालन नहीं होता। पिछले साल तक मूल्यांकन केंद्र स्तर पर ही अंकेक्षकों की नियुक्ति कर ली जाती थी लेकिन हकीकत में खानापूरी ही होती थी। कई केंद्रों पर अनुभवहीन शिक्षकों को भी अंकेक्षण की जिम्मेदारी सौंप दी जाती थी जो परीक्षक या डीएचई की कमियां इंगित तक नहीं कर पाते थे। इसकी शिकायत मिलने पर यूपी बोर्ड ने इस साल पहली बार अपने स्तर से अंकेक्षकों की नियुक्ति की है। 31 मार्च तक मूल्यांकन पूरा हो, रिजल्ट अप्रैल अंत तक दस परीक्षक पर एक डीएचई और दो डीएचई पर एक अंकेक्षक की व्यवस्था की गई है। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने निर्देशित किया है कि अंकेक्षक प्रतिदिन अपनी रिपोर्ट उप-नियंत्रक और जिला विद्यालय निरीक्षक को सौंपेंगे। अंकेक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी उत्तर अमूल्यांकित न रह गया। सचिव ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, जिला विद्यालय निरीक्षक और मूल्यांकन केंद्र के उपनियंत्रक (प्रधानाचार्य) को पत्र लिखा है कि कार्यभार को देखते हुए एक मूल्यांकन केन्द्र पर एक से अधिक अंकेक्षकों की तैनाती की जाएगी। 31 मार्च तक मूल्यांकन पूरा किया जाना है। अप्रैल अंत तक रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा। ओवरराइटिंग या कटिंग को रिजेक्ट कर देगा कंप्यूटर बोर्ड अधिकारियों ने बताया है कि इस बार बोर्ड ने शिक्षकों को चेतावनी दी है कि वे यह पक्का करें कि वे सही नंबर ही डाल रहे हैं, क्योंकि कंप्यूटर सिस्टम किसी भी ऐसी एंट्री को रिजेक्ट कर देगा जिसमें ओवरराइटिंग या कटिंग दिखेगी। इस बात को फिर से दोहराया गया है, क्योंकि बोर्ड का दावा है कि पहले भी कई छात्रों ने रीचेकिंग के लिए अप्लाई किया था और पाया कि आंसर शीट पर दिए गए नंबर और सिस्टम में अपडेट किए गए नंबर अलग-अलग थे। शिक्षकों की लापरवाही पर लगाम यह सुनिश्चित करने के लिए कि मूल्यांकन प्रक्रिया में कोई गलती न हो, यूपी बोर्ड रैंडम तरीके से जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं को चुनेगा ताकि यह पक्का हो सके कि विषय विशेषज्ञों द्वारा गणना में कोई चूक न हुई हो। यदि दोबारा जांच के बाद भी गलतियां पाई जाती हैं, तो जिस शिक्षक ने संबंधित उत्तर पुस्तिका को जांचा था, उसे बोर्ड के नियमों और 'उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। सॉफ्टवेयर के माध्यम से 6980 अंकेक्षक नियुक्त उत्तरपुस्तिकाओं के गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन के लिए पहली बार सॉफ्टवेयर के माध्यम से 6980 अंकेक्षक नियुक्त किए हैं। इनमें प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक व वरिष्ठ शिक्षक शामिल हैं, जो 15 प्रतिशत कॉपियों का रेंडम परीक्षण करेंगे। परिषद सचिव भगवती सिंह के अनुसार यह निर्णय मूल्यांकन को त्रुटिरहित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। इससे न केवल परीक्षा प्रणाली की साख बढ़ेगी, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। प्रधानाचार्यों की ड्यूटी लगाने पर जताया रोष प्रयागराज। यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में प्रधानाचार्यों की ड्यूटी को लेकर प्रदेशभर में असंतोष व्याप्त है। राजकीय शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश ने इस संबंध में अपर मुख्य सचिव (माध्यमिक शिक्षा), उत्तर प्रदेश शासन को ज्ञापन भेजकर आपत्ति दर्ज कराई है। संघ के प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर पांडेय और प्रांतीय महामंत्री अरुण यादव ने बताया कि परिषद के क्षेत्रीय कार्यालयों प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, बरेली एवं मेरठ की ओर से प्रधानाचार्यों को उनके पद की गरिमा के विपरीत अंकेक्षण कार्य में लगाया गया है। इससे प्रदेश के हाईस्कूलों के प्रधानाचार्यों में व्यापक रोष है।

Jharkhand HC Decision: CISF असिस्टेंट कमांडेंट भर्ती जारी रहेगी, कोर्ट ने रोक लगाने से मना किया

रांची. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में सीआईएसएफ असिस्टेंट कमांडेंट नियुक्ति नियमावली को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया। कोर्ट यह निर्देश दिया कि असिस्टेंट कमांडेंट की विज्ञापन के आधार पर नियुक्ति इस केस के अंतिम निर्णय से प्रभावित होगी। इसकी जानकारी अभ्यर्थियों को भी दे दी जाए। प्रार्थी ने कहा कि नियमावली के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई लंबित रहने के दौरान ही यूपीएससी ने असिस्टेंट कमांडेंट पद के लिए विज्ञापन निकाला है, इसलिए इस पर रोक लगाई जाए। प्रार्थी ने सीआईएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट नियुक्ति नियमवाली को चुनौती देते हुए कहा कि डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेंनिंग की गाइडलाइन के तहत हर पांच साल में इस नियुक्ति नियमावली की समीक्षा होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। प्रार्थी का यह भी कहना था कि सीआईएसएफ के अन्य विंग में असिस्टेंट कमांडेंट के शत प्रतिशत पद इंस्पेक्टर पद से प्रोन्नति के माध्यम से भरे जाते हैं। जबकि उक्त नियमावली के तहत केवल 30 प्रतिशत पद ही इंस्पेक्टर पद से असिस्टेंट कमांडेंट पद पर प्रोन्नति देने का प्रविधान है। इसलिए वर्ष 2009 की नियुक्ति नियमावली और असंवैधानिक और गलत है।

Congress Action Mode: राज्यसभा चुनाव में ‘धोखेबाज’ विधायकों की पहचान, जल्द होगा नोटिस जारी

चंडीगढ़. कांग्रेस प्रभारी बी के हरिप्रसाद ने प्रेस वार्ता की और उन विधायकों के नाम बताए जिन्होंने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की। उन्होंने कहा कि नारायणगढ़ से शैली चौधरी, पुनहाना से मोहम्मद इलियास, हथीन से मोहम्मद इसराइल, सदौरा से रेणु बाला ने क्रॉस वोट किया है, हमारी पार्टी ने डिसिप्लिनरी कमेटी को जानकारी दे दी है, आज इन सभी विधायकों को शोकॉज नोटिस भेजा जाएगा। पांचवा नाम जरनैल सिंह का है। हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस में लगातार घमासान मचा हुआ है। पार्टी के कई विधायकों पर क्रॉस वोटिंग के आरोप लग रहे था। कांग्रेस के पांच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी और 4 वोट रिजेक्ट हुए थे। विधायक गोकुल सेतिया पर क्रॉस वोटिंग के आरोप लगे थे मगर उन्होंने इसे फेक न्यूज बताया और चंडीगढ़ में कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने मांग की कि जिन्होंने भी पार्टी को धोखा दिया है उन पांचों विधायकों के नाम सार्वजनिक होने चाहिए और उनपर उचित कार्रवाई होनी चाहिए। मगर धरने पर बैठे गोकुल सेतिया और मंजू चौधरी को भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मना लिया और उन्हें क्लीन चिट दे दी।

Punjab-Haryana Water Crisis: हाईकोर्ट की चेतावनी—मुफ्त बिजली और अत्यधिक दोहन ने बढ़ाई परेशानी

चंडीगढ़. राज्य में कृषि ट्यूबवेलों को 24 घंटे मुफ्त बिजली देने और इसके कारण भूजल के अत्यधिक दोहन के मुद्दे पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड को चार हफ्ते में रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। एक याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि जब भूजल की उपलब्धता से अधिक उसका दोहन हो रहा है, तो यह स्थिति आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत खतरनाक है। मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि राज्य की नीति के अनुसार किसानों को केवल धान के सीजन में सीमित समय के लिए मुफ्त बिजली दी जानी चाहिए, लेकिन जमीनी स्तर पर कई स्थानों पर 24 घंटे मुफ्त बिजली का उपयोग किया जा रहा है। अदालत को बताया गया कि तरनतारन जिले के पट्टी क्षेत्र में लगभग 300 ऐसे कृषि कनेक्शन हैं, जहां 24 घंटे मुफ्त बिजली का उपयोग हो रहा है। यह बिजली का उपयोग केवल ट्यूबवेल तक सीमित नहीं है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि इस अनियंत्रित मुफ्त बिजली के कारण दोहरा नुकसान हो रहा है। एक तरफ बिजली की खपत बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में पंजाब में कुल भूजल रिचार्ज 18.84 बीसीएम था, जबकि दोहन 27.8 बीसीएम तक पहुंच गया, जो स्पष्ट रूप से अधिक है। राज्य की ओर से जवाब देते हुए बताया गया कि लंबे समय से नए कृषि ट्यूबवेल कनेक्शन जारी नहीं किए गए हैं।

Highway Construction Ban: राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला, 75 मीटर तक बिल्डिंग पर रोक से निवेशकों को झटका

दौसा. सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और हाईवे सुरक्षा को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नई गाइडलाइन के तहत नेशनल और स्टेट हाइवे की सेंटर लाइन से दोनों ओर 75-75 मीटर तक किसी भी प्रकार का आवासीय या व्यावसायिक निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। सरकार के इस फैसले का सीधा असर हाइवे किनारे हो रहे निर्माण और प्रॉपर्टी निवेश पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमों की अनदेखी कर खरीदे गए प्लॉट भविष्य में बेकार साबित हो सकते हैं, क्योंकि ऐसे भूखंडों पर निर्माण की अनुमति नहीं मिलेगी। निवेशकों की पूंजी फंसने की आशंका दौसा जिले से गुजर रहे मनोहरपुर-कौथून हाइवे और जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग सहित अन्य मार्गों के किनारे पहले से होटल, ढाबे और कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हैं। वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने निवेश के उद्देश्य से प्लॉट भी खरीद रखे हैं। गाइडलाइन सख्ती से लागू होने पर इन निवेशकों की पूंजी फंसने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीण सड़कों पर भी सरकार ने दिखाई सख्ती ग्रामीण सड़कों पर भी सरकार ने सख्ती दिखाई है। नई व्यवस्था के अनुसार ग्रामीण मार्गों की सेंटर लाइन से करीब 15.5 मीटर तक निर्माण नहीं किया जा सकेगा। गांवों में सड़क किनारे अनियोजित निर्माण के कारण भविष्य में चौड़ाईकरण के दौरान अतिक्रमण हटाने में दिक्कत आती है। अब सड़क के दोनों ओर पर्याप्त खाली स्थान सुरक्षित रहने से यातायात सुगम होगा और विकास कार्यों में बाधा नहीं आएगी। मास्टर प्लान के अनुसार होगा हाईवे किनारे निर्माण शहरी क्षेत्रों में हाईवे किनारे निर्माण मास्टर प्लान के अनुसार ही होगा। इसमें स्पष्ट किया जाएगा कि कितनी दूरी छोड़कर निर्माण किया जा सकता है और कहां पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। कई मामलों में प्रॉपर्टी डीलर पूरी जानकारी नहीं देते, जिससे खरीदार बाद में अनुमति के लिए भटकते हैं। नई गाइडलाइन ऐसे मामलों में पारदर्शिता लाने की दिशा में भी अहम मानी जा रही है। नियमों की अवहेलना कर बनाए गए निर्माण अवैध सरकार ने साफ किया है कि नियमों की अवहेलना कर बनाए गए निर्माण को अवैध माना जाएगा और इन्हें हटाने की कार्रवाई भी की जा सकेगी। अनियोजित निर्माण के कारण अक्सर यातायात बाधित होता है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है। नई व्यवस्था लागू होने से सड़क सुरक्षा बेहतर होने के साथ ही भविष्य में चौड़ाईकरण और अन्य विकास कार्य बिना बाधा पूरे किए जा सकेंगे।

ग्रामीणों की मेहनत रंग लाई: कारकाबेड़ा गांव में पहली बार खुला स्कूल, बच्चों में उत्साह

नारायणपुर. अबूझमाड़ के अति दूरस्थ क्षेत्र कारकाबेड़ा में पहली बार स्कूल की शुरुआत हुई। यह पहल कलेक्टर नम्रता जैन और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकांक्षा शिक्षा खलको के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुई। बच्चों और ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग को सुनते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गांव में शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई। इस सफलता की शुरुआत जनसमस्या निवारण शिविर से हुई, जिसमें ग्रामीणों ने आवेदन देकर कारकाबेड़ा में स्कूल खोलने की मांग रखी थी। कलेक्टर नम्रता जैन ने तत्काल निर्देश जारी किए और जिला शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार पटेल को स्कूल खोलने की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद संकुल समन्वयक और शिक्षकों की टीम ने सर्वेक्षण कर बच्चों की संख्या और शैक्षणिक आवश्यकता का आंकलन किया। सर्वे में पाया गया कि गांव में लगभग 20 बच्चे पढ़ाई के योग्य हैं। स्कूल खोलने के लिए जिला प्रशासन की टीम ने कई नदी-नालों और पहाड़ियों को पार करते हुए करीब 5 घंटे की पैदल यात्रा कर कारकाबेड़ा पहुंचकर नवीन प्राथमिक शाला का उद्घाटन किया। इस मौके पर खंड शिक्षा अधिकारी संतुराम नूरेटी, खंड स्रोत समन्वयक लक्ष्मीकांत सिंह, संकुल समन्वयक कारूराम नूरेटी और सरपंच रामूराम वड्डे भी मौजूद रहे। स्कूल खुलने के साथ ही बच्चों को निःशुल्क गणवेश, पाठ्यपुस्तकें, स्लेट, पेंसिल और श्यामपट्ट जैसी शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई गई। इस पहल से बच्चों और ग्रामीणों में खुशी और उत्साह देखने को मिला। वर्तमान में इस स्कूल में 20 बच्चों को पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है, और इसके लिए जिला प्रशासन ने एक अतिथि शिक्षक की व्यवस्था भी की है। भविष्य में आसपास के अन्य दूरस्थ गांवों जैसे मरकूड़ के बच्चे भी इस स्कूल का लाभ ले सकेंगे। स्वतंत्रता के बाद पहली बार कारकाबेड़ा में स्कूल की स्थापना होने के कारण यह कदम क्षेत्र में शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। जिला प्रशासन की इस पहल से अबूझमाड़ के बच्चों को स्थानीय स्तर पर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, जिससे उन्हें स्कूल आने के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत नहीं रहेगी। इस कदम से न केवल शिक्षा का स्तर बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण समुदाय में जागरूकता और विकास की भावना भी मजबूत होगी। कारकाबेड़ा में स्कूल खोलने की यह पहल यह संदेश देती है कि दूरदराज के क्षेत्र में भी सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यवाही के जरिए शिक्षा को सुलभ बनाना संभव है। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि भविष्य में इस क्षेत्र में शिक्षा और विकास के कार्यक्रम नियमित रूप से चलेंगे और बच्चों की पढ़ाई के लिए समुचित संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

भोपाल में फिर आई धमकी, जेके यूनिवर्सिटी में 21 बम रखने का किया गया दावा

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आज (बुधवार) एक बार फिर उस समय हड़कंप मच गया, जब कोलार रोड स्थित जेके अस्पताल और जेके यूनिवर्सिटी को बम से उड़ाने की धमकी मिली. धमकी मेल से दी गई. भोपाल में लगातार तीसरे दिन संस्थानों को बम से उड़ाने की धमकी का मेल आया है. मेल में जेके अस्पताल और जेके यूनिवर्सिटी को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है. इसमें लिखा है कि कॉलेज कैंपस, बाथरूम और प्रिंसिपल के रूम में 21 बम रखे गए हैं. दोपहर 1:30 बजे इन संस्थानों को बम से उड़ा दिया जाएगा. दो दिन पहले नापतोल विभाग को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी. इससे पहले एम्स और पीपल्स यूनिवर्सिटी को भी बम से उड़ाने की धमकी मिल चुकी है. भोपाल में पिछले एक महीने में 5वीं बार धमकी भरा मेल आया है. अब तक जितने भी धमकी भरे मेल आए हैं, सब फर्जी साबित हुए हैं। बुधवार सुबह धमकी भरा मेल मिलते ही जेके हॉस्पिटल और यूनिवर्सिटी में जांच की गई. दोनों जगह बम स्क्वॉड और पुलिस की टीम पहुंची. जांच में अब तक कोई भी खतरनाक पदार्थ नहीं मिला है. इससे पहले आए मेल भी सिर्फ कोरी धमकी साबित हुए थे। आईपी एड्रेस और वीपीएन बदलकर भेज रहे मेल भोपाल के पुलिस कमिश्नर संजय कुमार सिंह ने इस बारे में कहा कि अलग-अलग जगह से धमकी भरे मेल आ रहे हैं. शरारती तत्व इस तरह से धमका रहे हैं लेकिन हम एहतियात के तौर पर अपना काम कर रहे हैं. आईपी एड्रेस और वीपीएन बदलकर मेल भेजे जा रहे हैं. पुलिस लगातार इस मामले में जांच कर रही है। कानून व्यवस्था और इंटेलिजेंस पर सवाल भोपाल के अलग-अलग संस्थानों को बम से उड़ाने की धमकी के मामले में कांग्रेस ने प्रदेश की कानून व्यवस्था और इंटेलिजेंस पर सवाल उठाए. पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि शहर बारूद के ढेर पर बैठा है. अब तक तो धमकियां मिल रही हैं, सच में कोई हादसा हो गया, तो क्या होगा. पुलिस का अमला पर्याप्त नहीं है. इंटेलिजेंस को मजबूत किया जाए. एडीजी अधिकारी को धमकियां मिल रही हैं. एमपी में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। अज्ञात युवकों ने एडीजी से की बदसलूकी बताते चलें कि भोपाल में मध्य प्रदेश पुलिस के एडीजी (ट्रेनिंग) राजाबाबू सिंह के साथ अज्ञात युवकों ने गाली-गलौज की और उन्हें धमकाया. ADG के त्रिलंगा स्थित घर के बाहर कार से आए कुछ अज्ञात युवकों ने गाली-गलौज की. एक युवक के हाथ में डंडा भी था. पूरी घटना सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गई. एडीजी ने शाहपुरा थाने को सूचना देने के साथ ही सीसीटीवी फुटेज भी दिए हैं. उन्होंने अपनी जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है. हाल ही में ADG राजाबाबू सिंह ने पुलिस ट्रेनिंग के दौरान ट्रेनी के धार्मिक नवाचार के साथ ही रामचरितमानस के पाठ की शुरुआत की थी. एडीजी की शिकायत पर पुलिस कमिश्नर संजय कुमार सिंह ने कहा कि उन्हें ट्रेनिंग में किए जा रहे नवाचार को लेकर धमकी मिल रही है. शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री से मांगा इस्तीफा कांग्रेस नेता अभिनव बरोलिया ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर कहा कि राजधानी भोपाल में कभी आईजी इंटेलिजेंस के हाथ से चोर मोबाइल छीनकर ले जाते हैं, कभी पुलिसवालों के घरों में चोरियां होती हैं, अभी रिटायर्ड जज के घर से चोर चार सिलेंडर चुराकर ले गए और अब एडीजी पर हमला हुआ है. यह बताता है कि मध्य प्रदेश में किस तरह का अराजकता का माहौल बना हुआ है. जनता डर के माहौल में रह रही है. जब एडीजी स्तर के अधिकारी के साथ ऐसी घटना घट रही है, तो सोचिए जनता किस दहशत में रह रही होगी. उनका मुख्यमंत्री मोहन यादव से निवेदन है कि अगर उनसे कानून व्यवस्था नहीं संभल रही है, तो इस्तीफा दे दीजिए।