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Raipur Crime Crackdown: चाकूबाजी के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 12 आरोपी गिरफ्तार

रायपुर. राजधानी में कानून व्यवस्था भंग करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। एसीसीयू (क्राइम यूनिट) और थाना मौदहापारा पुलिस की संयुक्त टीम ने 24 घंटे के भीतर तीन अलग-अलग घटनाओं में शामिल 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों के खिलाफ गैर जमानतीय संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया है। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई है, जिसके तहत शहर में गुंडागर्दी, चाकूबाजी, पत्थरबाजी और हथियारों का प्रदर्शन करने वालों पर लगातार सख्ती बरती जा रही है। पहली घटना: चाकू से जानलेवा हमला 16 मार्च 2026 को मौदहापारा थाना क्षेत्र के तालाब पार बीटीएस चौक के पास पुरानी रंजिश को लेकर विवाद हुआ, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। आरोपियों ने चाकू से हमला कर दो लोगों को घायल कर दिया और जान से मारने की धमकी दी। इस मामले में पुलिस ने रवि रक्सेल (19), हर्ष कोसले (19), अभय रक्सेल (19) और लोकेश रक्सेल (26) को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से धारदार हथियार जब्त किए हैं। दूसरी घटना: मरही माता मंदिर के पास पत्थरबाजी 16 मार्च को ही मरही माता मंदिर क्षेत्र में कुछ लोगों ने समूह बनाकर गाली-गलौज करते हुए पत्थरबाजी की, जिससे इलाके में दहशत फैल गई और कई लोग घायल हुए। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आमिर अहमद (26), मोह. अनस खान (32), मोह. मुशीर खान (29), अब्दुल समीर (29), मोह. फाजिल (29) और शेख सिकंदर (29) को गिरफ्तार किया है। तीसरी घटना: सड़क पर तलवार लहराकर दहशत फैलाना दूसरी घटना की प्रतिक्रिया में डेंटल कॉलेज चौक के पास कुछ युवक हाथ में तलवार लेकर लोगों को डरा रहे थे। सूचना मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपियों को पकड़ लिया। इस मामले में लोकेश रक्सेल (26), मयंक सोनी (19) और पिंटू ठाकुर (26) को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। शांति व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ जारी रहेगी कार्रवाई तीनों घटनाओं में आरोपियों के पास से दर्जन भर चाकू, तलवार और अन्य धारदार हथियार जब्त किए गए हैं। रायपुर पुलिस ने साफ कहा है कि शहर में शांति व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त और निरंतर कार्रवाई जारी रहेगी। सार्वजनिक स्थलों पर हथियार लहराने, मारपीट और पत्थरबाजी जैसी घटनाओं को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

छत्तीसगढ़ में ED की पकड़ और मजबूत, रायपुर के पुराने मेयर हाउस में खुलेगा दफ्तर

रायपुर  राजधानी रायपुर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अब स्थायी पता मिल गया है। नगर निगम की एमआईसी (मेयर-इन-काउंसिल) बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए शहर के सुभाष स्टेडियम स्थित पुराने महापौर (मेयर) बंगले को ईडी कार्यालय के लिए आवंटित कर दिया गया है। जांच गतिविधियों को मजबूती मिलने की उम्मीद जानकारी के अनुसार, लंबे समय से रायपुर में ईडी के लिए स्थायी कार्यालय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अब नगर निगम द्वारा यह कदम उठाए जाने के बाद ईडी को स्थायी और सुव्यवस्थित कार्यालय मिल सकेगा। इससे एजेंसी की कार्यप्रणाली और जांच गतिविधियों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। एमआईसी बैठक में प्रस्ताव पर चर्चा के बाद मिली मंजूरी नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि एमआईसी बैठक में प्रस्ताव पर चर्चा के बाद इसे मंजूरी दी गई। पुराने मेयर बंगले की लोकेशन शहर के प्रमुख क्षेत्र सुभाष स्टेडियम के पास होने के कारण यह प्रशासनिक दृष्टि से भी उपयुक्त माना गया। प्रशासनिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा ईडी कार्यालय के शुरू होने से रायपुर में आर्थिक अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच में तेजी आने की संभावना है।

चेहरा पहचान प्रणाली से आंगनबाड़ी केंद्रों में पुष्टाहार वितरण में हुई बड़ी सुधार

चेहरा पहचान प्रणाली से आंगनबाड़ी केंद्रों में अनुपूरक पुष्टाहार वितरण में बड़ी प्रगति फरवरी में लगभग 1 करोड़ लाभार्थियों में से 81 लाख लाभार्थियों तक एफआरएस से पहुंचा पुष्टाहार डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता बढ़ी, फर्जीवाड़े पर रोक लगने से उचित लाभार्थियों को फायदा  लखनऊ  प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों में अनुपूरक पुष्टाहार के वितरण को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए लागू की गई चेहरा पहचान प्रणाली यानी एफआरएस के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। फरवरी में प्रदेश के लगभग 1 करोड़ लाभार्थियों में से 81 लाख लाभार्थियों को इस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया गया। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार के दिशा निर्देशों के तहत प्रदेश में एफआरएस प्रणाली से ही पुष्टाहार वितरण को मान्यता दी गई है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही एफआरएस से पुष्टाहार वितरण का शत प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। योगी सरकार में न केवल पारदर्शिता बढ़ी है बल्कि यह भी सुनिश्चित हुआ है कि पोषण का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक ही पहुंचे1 फरवरी में 81 प्रतिशत तक पहुंचे एफआरएस लाभार्थी प्रदेश में अनुपूरक पुष्टाहार के लगभग 1 करोड़ लाभार्थी हैं। इनमें छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और धात्री माताएं प्रमुख रूप से शामिल हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने डिजिटल व्यवस्था को तेजी से अपनाते हुए फरवरी में करीब 81 प्रतिशत लाभार्थियों तक पुष्टाहार पहुंचाया। इस तरह फरवरी में लगभग 81 लाख लाभार्थियों को फेस रिकॉग्निशन प्रणाली के माध्यम से पुष्टाहार उपलब्ध कराया गया। विभाग के अनुसार यह उपलब्धि पोषण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का संकेत है। किशोरियों तक भी पहुंच रहा पोषण प्रदेश सरकार पोषण योजनाओं के दायरे को लगातार व्यापक बना रही है। इसी क्रम में आठ जनपदों में किशोरियों को भी अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार वर्तमान माह में भी एफआरएस प्रणाली के माध्यम से वितरण की प्रगति संतोषजनक है और उम्मीद जताई जा रही है कि मार्च महीने में लाभार्थियों तक पहुंचने का प्रतिशत फरवरी की तुलना में और बेहतर होगा। डिजिटल निगरानी और तकनीक आधारित व्यवस्था से पोषण योजनाओं का क्रियान्वयन और अधिक प्रभावी बनता दिखाई दे रहा है।

हाईकोर्ट ने गेस्ट फैकल्टी के नियमितीकरण की याचिका खारिज की, सिंगल बेंच ने दी अहम टिप्पणी

जबलपुर  मध्यप्रदेश के कॉलेजों में अध्यापन का भार सम्भाल रहे 5000 से ज्यादा गेस्ट फैकल्टी को हाईकोर्ट के फैसले से तगड़ा झटका लगा है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा नियमित नियुक्ति करने की स्थिति में सालों यही अतिथि विद्वान अध्यापन की व्यवस्था संभाल रहे हैं।कॉलेजों में नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया के दौरान गेस्ट फैकल्टी ने हाईकोर्ट में याचिका पेश कर नियमितीकरण की मांग की थी। सेवा के बदले मांगा नियमितीकरण याचिकाकर्ता अतिथि विद्वानों की याचिका के अनुसार वे एक से दो दशक से स्वीकृत और खाली पदों पर काम कर रहे हैं। नई भर्ती की जगह उन्हें सहायक प्राध्यापक, खेल अधिकारी और ग्रंथपाल के पदों पर नियमित किया जाए।   गेस्ट फैकल्टी द्वारा याचिका के माध्यम से उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश पर फॉलेन आउट किए अतिथि विद्वानों की वापसी की मांग भी कर रहे थे। वहीं सरकार द्वारा नए सिरे से नियमित भर्ती के लिए जारी विज्ञापनों को रद्द करने की भी मांग की गई थी। गेस्ट फैकल्टी को सामाजिक सुरक्षा देने बनी समिति तीन दिन में ही बदली, उठे सवाल 20 साल से कार्यरत होने का दिया था हवाला याचिका में पन्ना निवासी डॉ. कमल प्रताप सिंह सहित 290 अन्य ने बताया था कि वे पिछले 20 सालों से शासकीय कॉलेजों में कार्यरत हैं। वे यूजीसी के मानकों के अनुसार पढ़ाई और अन्य कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ 50 हजार रुपए मानदेय मिलता है। हर साल 89 दिन का अनुबंध याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्हें हर साल 89 दिन के अनुबंध पर रखा जाता है। इसके बाद सेवा समाप्त कर फिर नई प्रक्रिया से नियुक्ति दी जाती है। राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने कोर्ट को बताया कि गेस्ट फैकल्टी को आयु सीमा में छूट, अनुभव के आधार पर वेटेज और 25 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है, ताकि वे नियमित भर्ती में शामिल हो सकें। नियमित भर्ती प्रक्रिया को बताया वैध सरकार ने कहा कि सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति एक वैधानिक आयोग के माध्यम से होती है। नियमों के विपरीत कोई भी नियुक्ति असंवैधानिक होगी। कोर्ट ने भी इस तर्क को सही माना। “फॉलन आउट” नियम को भी सही ठहराया हाईकोर्ट ने अपने फैसले में “फॉलन आउट” नियम को वैध बताया। कोर्ट ने कहा कि नियमित भर्ती होने पर गेस्ट फैकल्टी को हटाना कानूनन सही है, क्योंकि यह पद को स्थायी रूप से भरने की प्रक्रिया का हिस्सा है। कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु 1. भर्ती प्रक्रिया में अंतर नियमित भर्ती (1990 के नियमों के तहत) एमपीपीएससी (MPPSC) के माध्यम से होती है। इसका आधार खुली प्रतियोगिता परीक्षा और अखिल भारतीय स्तर है। जबकि अतिथि विद्वानों का चयन केवल पोस्ट ग्रेजुएशन के अंकों के आधार पर मध्य प्रदेश के मूल निवासियों के लिए ही सीमित है। 2. आरक्षण नियमों का पालन नहीं: नियमित भर्ती में SC, ST, OBC और दिव्यांगों के लिए संवैधानिक आरक्षण लागू होता है। अतिथि विद्वानों की नियुक्ति में ऐसा कोई प्रावधान प्रभावी नहीं।है। अभ्यर्थी को इसमें केवल अतिरिक्त अंक दिए जाते हैं।   नियमित भर्ती के लिए हटाना गलत नहीं फैसले के अनुसार यदि किसी पद पर नियमित नियुक्ति या तबादले के कारण अतिथि विद्वान को हटाया जाता है, तो यह गलत नहीं है। नियम स्पष्ट है कि एक अस्थायी कर्मचारी की जगह दूसरा अस्थायी कर्मचारी नहीं रखा जा सकता। जबकि अस्थायी कर्मचारी की जगह स्थायी  कर्मचारी की नियुक्ति सही है।   जानकारी का अभाव नहीं सुनवाई पूरी करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अतिथि विद्वानों को नियुक्ति के पहले दिन से इस नियुक्ति की प्रकृति की सारी जानकारी थी।  उनकी नियुक्ति केवल एक शैक्षणिक सत्र के लिए थी इसलिए वे नियमित लाभ के हकदार नहीं होंगे। उमादेवी केस का हवाला हाईकोर्ट ने कहा कि 'उमादेवी' केस के लाभ यहां सीधे लागू नहीं होते। प्रोफेसर और लाइब्रेरियन जैसे उच्च शैक्षणिक पदों की योग्यता और कार्य की प्रकृति एक दिहाड़ी मजदूर से पूरी तरह अलग होती है।   भर्ती विज्ञापन को चुनौती नहीं अदालत ने कहा कि सरकार को नियमित भर्ती करने का पूरा अधिकार है। अतिथि विद्वान केवल इस आधार पर भर्ती विज्ञापन को चुनौती नहीं दे सकते कि वे लंबे समय से काम कर रहे हैं। यह कहते हुए हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

इंदौर अग्निकांड पर पीएम मोदी का शोक संदेश, पीड़ित परिवारों को दी जाएगी आर्थिक मदद

इंदौर  इंदौर अग्निकांड की खबर ने देशभर को झकझोरकर रख दिया है। सुनते ही लोगों की रूह कांप रही है। पीएम नरेंद्र मोदी  इंदौर में आग लगने के कारण आठ लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक मदद की भी घोषणा की है। मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव, राज्य सरकार के मंत्री कैलाश विजय वर्गीय, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने इस हादसे में गहरा दुख जताया है।   प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये दिए जाएंगे  इंदौर की घटना पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट में लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि मध्य प्रदेश के इंदौर में आग लगने की घटना में हुई जान-माल की हानि से गहरा दुख हुआ है। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।" उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि पीएमएनआरएफ (प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष) की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपए दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में अग्नि दुर्घटना में दिवंगत नागरिकों को दी श्रद्धांजलि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में हुई अग्नि दुर्घटना में दिवंगत नागरिकों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गहन शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह दुर्घटना अत्यंत पीड़ादायक है, हमारी संवेदनाएं सभी शोकाकुल परिजन के साथ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से दिवंगतों की आत्मा की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना की है। गर्भवती थी पुगलिया परिवार की बहू सिमरन ब्रजेश्वरी कॉलोनी में पुगलिया परिवार के मकान में लगी आग ने दो परिवारों को तबाह कर दिया। पुगलिया परिवार के मुखिया मनोज पुगलिया और उनकी बहू सिमरन की इस हादसे में मौत हो गई। सिमरन, मनोज के बेटे सौरभ की पत्नी थी। वह तीन साल पहले ही इस घर की बहू बनकर आई थी और गर्भवती थी। उसने इस परिवार के साथ एक नई जिंदगी के सपने भी संजोए थे।   चार माह का गर्भ था चार महीने से अधिक की गर्भवती सिमरन अब इस दुनिया में नहीं रहीं और उनके साथ ही उस नन्ही जान ने भी दम तोड़ दिया, जो अभी इस दुनिया में आने वाली थी। गर्भवती होने के कारण डाॅक्टरों ने आराम की सलाह दी थी। इस कारण सिमरन नीचे की मंजिल पर थी।  जनवरी में हुई थी शादी, सामान लेने कमरे में गई थी हादसे में मृत कारोबारी मनोज पुगलिया के तीन बेटे हैं। दूसरे नंबर के बेटे की जनवरी माह में शादी हुई थी। उसकी पत्नी मायके में थी। तीसरे बेटे की शादी नहीं हुई है। बताया जाता है कि सौरभ ने अपनी पत्नी सिमरन को भी छत पर चलने के लिए कहा, लेकिन वह कुछ जरूरी सामान लेने कमरे के भीतर चली गई। इसके बाद पूरे घर में इतना धुआं भर गया कि नीचे के हिस्से में लोगों का दम घुटने लगा। मनोज के तीनों बेटे और पत्नी छत के रास्ते पड़ोसी की छत पर चले गए, जबकि मेहमानों को छत पर जाने का मौका भी नहीं मिल पाया।  साले विजय सेठिया का परिवार रात में ही आया था मनोज के साले विजय सेठिया और उनका परिवार रात को ही घर आया था। खाना खाने के बाद रात 12 बजे तक सभी नीचे बैठकर बातें करते रहे। इसके बाद सभी अलग-अलग कमरों में सोने चले गए थे। बेटा आया कीमती सामान लेने आग लगने पर तीनों बेटों को भागने के अलावा कुछ नहीं सूझा। सबसे पहले उन्होंने अपनी जान बचाई। घर में कीमती सामान और जेवर रखे थे। इन्हें निकालने के लिए बेटा सौरभ सुबह आठ बजे अपने जले हुए घर पर फिर पहुंचा। सौरभ ने बताया कि जब आग लगी, तब पूरे घर में काला धुआं भरा हुआ था और सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही थी। 9 गैस सिलिंडर मिले, एक फूटा था फायर ब्रिगेड ने जले हुए घर से 9 गैस सिलिंडर भी निकाले, जिनमें कुछ खाली थे। आग उन सिलिंडर तक नहीं पहुंची, वरना हादसा और भी भयावह हो सकता था। हालांकि, रसोई  घर में रखे एक सिलिंडर में विस्फोट हुआ था।   गैस सिलिंडरों में धमाका हुआ  इंदौर में कार चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लग गई, जिसने विकराल रूप ले लिया। इस हादसे में कम से कम 8 लोग आग के चलते जान खो दी। मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को बंगाली चौराहा क्षेत्र में स्थित बृजेश्वरी कॉलोनी में कार को चार्ज किया जा रहा था, तभी चार्जिंग के दौरान आग लग गई और देखते ही देखते इस आग ने विकराल रूप ले लिया। पूरी इमारत में आग की लपटें नजर आने लगीं। इस आग की चपेट में घर के अंदर रखे गैस सिलेंडर भी आ गए और एक-एक कर कई गैस सिलिंडर में धमाका हुआ। इसके चलते मकान का कुछ हिस्सा भी ढह गया। इस हादसे को लेकर जानें पुलिस कमिश्नर ने क्या बताया? इस हादसे में आठ लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि 3 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, तिलक नगर थाना क्षेत्र में सुबह 4 बजे आग लगने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। तीन मंजिला मकान में पुगलिया परिवार रहता था।  इस परिवार के सदस्य ऊपरी मंजिल में सो रहे थे जबकि इनके यहां बिहार से मनोज सेठिया का परिवार आया हुआ था जो ग्राउंड फ्लोर में सो रहा था। इसी सेठिया परिवार के छह लोगों की मौत हादसे में हुई है जबकि दो लोग पुगलिया परिवार के हैं। वहीं घटना में तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। 

Green Hydrogen Policy: पानीपत बनेगा हब, हरियाणा के युवाओं को मिलेगी बड़ी संख्या में नौकरियां

चंडीगढ़. हरियाणा में जल्द ही स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी लागू होगी। देश की पहली मेगा ग्रीन हाइड्रोजन परियोजना पानीपत में स्थापित की जा रही है। प्राइवेट पब्लिक पार्टनशिप (पीपीपी) के तहत पानीपत में आईओसी के माध्यम से 10,000 टन प्रतिवर्ष क्षमता वाली परियोजना स्थापित होगी। उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बताया कि इस परियोजना के माध्यम से भारतीय तेल निगम लिमिटेड की पानीपत रिफाइनरी को ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को दिसंबर 2026 तक चालू करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह देश के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पंचामृत संकल्पों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि राज्य की नई उद्योग नीति बनाई जा रही है जिसमें ग्रीन हाइड्रोजन को थर्स्ट सेक्टर में रखा गया है। हरियाणा को लो-कार्बन रिफाइनिंग और ग्रीन स्टील उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी मदद मिलेगी। पानीपत व आसपास स्थित उर्वरक व अमोनिया इकाइयों को भी ग्रीन अमोनिया अपनाने से लाभ मिलेगा जिससे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी। इस परियोजना से व्यापक स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। प्रदेश में 250 सकत केटीपीए ग्रीन हाइड्रोजन क्षमता प्राप्त होने पर विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्रों में लगभग 40,000 प्रत्यक्ष और 1.2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

CM फेस पर सस्पेंस बरकरार: नीतीश कुमार ने फिर दिए संकेत, बड़े नेता की पीठ थपथपाई

जमुई. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि केंद्र का पूरा सहयोग मिल रहा है। पिछले 20 वर्षों के कार्यकाल में जो थोड़ी बहुत कमी रह गई है, उसे अगले पांच वर्षों के एनडीए सरकार में पूर्ण कर लिया जाएगा। वह बुधवार को समृद्धि यात्रा पर भगवान महावीर की धरती लछुआड़ पहुंचे थे। यहां उन्होंने चिर प्रतीक्षित कुंडघाट जलाशय परियोजना सहित 914 करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री ने 2005 के पहले के बिहार की चर्चा करते हुए लोगों को विरोधियों से सावधान किया और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए के लिए समर्थन देते रहने का भरोसा लिया। 40 मिनट लंबा संबोधन नीतीश ने तकरीबन 40 मिनट के संबोधन में लगभग सभी बिंदुओं को रेखांकित करते हुए बताया कि किस प्रकार उन लोगों ने बिहार को बदहाली के दलदल से बाहर निकाला। उन्होंने यह भी बताया कि शाम होते कैसे दरवाजे बंद हो जाते थे और लोगों का घरों से निकलना मुश्किल होता था। सड़कों की क्या हालत थी और अब क्या है। 24 नवंबर 2005 को सत्ता संभालने के साथ हमने न्याय के साथ विकास करना प्रारंभ किया। नीतीश ने गिनाई अपनी उपलब्धियां मुख्यमंत्री ने बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति पर नमन करते हुए अपना संबोधन प्रारंभ किया। इसके बाद वह कब्रिस्तान से लेकर मंदिरों की घेराबंदी सुनिश्चित कर सांप्रदायिक सौहार्द बहाल करने में सरकार की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम शिक्षा पर काम शुरू किया और आज सरकारी शिक्षकों की संख्या 5.24 लाख हो गई। पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रतिमाह 39 मरीज आते थे। आज यह आंकड़ा 11600 तक पहुंच गया है। 2005 से पहले सिर्फ छह मेडिकल कॉलेज थे। अब 12 हो गए। छह पूर्ण होने वाले हैं और 21 को भी शीघ्र पूरा किया जाएगा। पुराने को भी अपग्रेड कर दिया गया है। पीएमसीएच 5400 बेड का बन गया। इसके अलावा, पांच अन्य पुराने मेडिकल कॉलेज को ढाई हजार बेड का बनाया गया। अगले 5 साल में देंगे 1 करोड़ नौकरी नीतीश कुमार ने कहा कि आईजीएमएस भी 3000 बेड का अस्पताल हो गया। 2018 में ही उन्होंने हर घर बिजली पहुंचाने का काम किया 50 लाख घरों पर सोलर की स्वीकृति दी जा चुकी है। अगले पांच वर्षों में एक करोड़ को नौकरी और रोजगार दिया जाएगा। अल्पसंख्यक कल्याण की कई योजनाओं को प्रारंभ किया गया। जाति आधारित गणना, पेंशन राशि बढ़ोतरी और 125 यूनिट बिजली फ्री के साथ ही रोजगार के लिए जीविका दीदी को सहायता पहुंचने की भी उन्होंने चर्चा की। जीविका दीदियों की चर्चा नारी सशक्तिकरण में जीविका दीदियों से लेकर पंचायत और नगर निकाय में महिलाओं को 50 प्रतिशत तथा पुलिस एवं सभी सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था को भी उन्होंने महत्वपूर्ण कदम बताया। 25 से 30 का संकल्प दोहराते हुए उन्होंने कहा औसत आय को दोगुना करना तथा प्रत्येक जिले में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना सरकार की प्राथमिकता में है। पुरानी बंद चीनी मीलें चालू होंगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि डेयरी और मछली पालन के क्षेत्र में भी विशेष काम करने की योजना है। उन्नत शिक्षा और उज्जवल भविष्य के तहत प्रत्येक प्रखंड में आदर्श विद्यालय और डिग्री कॉलेज खुलेंगे। सुलभ स्वास्थ, सुरक्षित जीवन के तहत विशिष्ट चिकित्सा केंद्र की स्थापना होगी। डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाई जाएगी। सम्राट की पीठ पर रखा हाथ, मांगा समर्थन अंत में उन्होंने सम्राट चौधरी के करीब जाकर उनकी पीठ पर हाथ रख जनता से समर्थन देते रहने का भरोसा भी लिया। सभा को उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी, 20 सूत्री प्रभारी मंत्री संजय सिंह खेल व सूचना प्रविधि की मंत्री श्रेयसी सिंह ने भी संबोधित किया

हाईवे बना आग का दरिया: तेल टैंकर हादसे के बाद 200 मीटर तक फैली लपटें, एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत

जालौर जालौर जिले के सांचौर क्षेत्र में नेशनल हाईवे पर एक बड़ा हादसा सामने आया, जब तेल से भरा टैंकर पलटने के बाद उसमें भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि हाईवे पर करीब 200 मीटर तक लपटें फैल गईं। इस घटना में टैंकर में सवार एक व्यक्ति की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि दूसरा व्यक्ति समय रहते बाहर निकलकर अपनी जान बचाने में सफल रहा। कैसे हुआ हादसा? जानकारी के अनुसार, टैंकर बाड़मेर से सांचौर की ओर जा रहा था। यह हादसा जैसलमेर-जामनगर मार्ग पर सिंवाड़ा ओवरब्रिज के पास हुआ, जहां टैंकर अनियंत्रित होकर पलट गया। टैंकर के पलटते ही उसमें भरा ज्वलनशील पदार्थ सड़क पर फैल गया और कुछ ही क्षणों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया।   प्रशासन और राहत कार्य हादसे के बाद हाईवे पर अफरातफरी मच गई और सुरक्षा के लिहाज से एक तरफ का यातायात तुरंत बंद कर दिया गया। सूचना मिलते ही सांचौर उपखंड अधिकारी प्रमोद कुमार और सिंवाड़ा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। सांचौर से दमकल की गाड़ी भी मौके पर पहुंची और आग बुझाने के प्रयास शुरू किए गए।   टैंकर और जांच की स्थिति बताया जा रहा है कि यह टैंकर भारत पेट्रोलियम का था और यह पूरी तरह आग की चपेट में आ गया। चितलवाना थानाधिकारी भंवरलाल गुड़ियासर के अनुसार फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि टैंकर में कौनसा ज्वलनशील पदार्थ भरा हुआ था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

Guest Teachers Issue: सदन में हंगामा, नियमितीकरण को लेकर असंतुष्ट विपक्ष ने किया वॉकआउट

रायपुर. विधानसभा बजट सत्र के दौरान बुधवार को स्कूलों के युक्तियुक्करण के साथ-साथ अतिथि शिक्षकों की भर्ती, वेतन और नियमितिकरण के मुद्दे पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को न केवल विपक्ष बल्कि सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी घेरा. मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने वॉकआउट किया. सत्ता के पक्ष के विधायकों सुनील सोनी, राजेश मूणत और रोहित साहू ने स्कूलों के युक्तिकरण पर शिक्षा मंत्री को घेरा. राजेश मूणत ने कहा कि युक्तियुक्करण के बाद स्कूलों की स्थिति ख़राब है. मैंने स्वयं दरी ख़रीद कर दी. शिकायत के बाद भी परीक्षण करने अधिकारी नहीं पहुंचे. मूणत के आरोप पर मंत्री ने परीक्षण कराने की बात कही. इस पर आसंदी ने मंत्री को 30 मार्च तक सभी स्कूलों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. विधायक सुनील कुमार सोनी ने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से सवाल किया कि स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा कितनी शालाओं का युक्तियुक्तकरण किया गया, एक वर्ष में जहां जहां स्कूल भवन खाली हुए है उसका उपयोग कहा हुआ है. शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने जवाब दिया कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विगत वर्ष पूरे प्रदेश में 10538 शालाओं का युक्तियुक्तकरण किया गया हैं, जहां भी खाली भवन हैं वहां स्मार्ट स्कूल, लैब बनाया जाएगा. 10,372 शालाओं का उपयोग हुआ हैं, और 166 स्कूल का उपयोग नहीं हुआ है. इस पर सुनील सोनी ने सवाल किया कि बहुत से स्कूल जर्जर हैं, कब तक नवीनीकरण होगा. इस पर गजेंद्र यादव ने कहा कि जहां-जहां आवश्यकता है, वह हम जांच करवा कर नवीनीकरण करेंगे. इस पर विधायक अजय चंद्राकर ने सवाल किया कि कितने स्कूल के लिए आपने क्या नीति बनाई. इस पर गजेंद्र यादव ने कहा कि चीजों को आसान बनाने के लिए और स्कूल में प्रयाप्त शिक्षक हो इसके लिए हमने स्कूलों और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया है. विधायक राजेश मूणत ने सवाल किया कि रायपुर जिले में कितने स्कूलों का युक्तियुक्तकरण हुआ? इस पर गजेंद्र यादव ने बताया कि रायपुर में 389 स्कूल में 385 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण हुआ है. 4 खाली हैं. नए सत्र से 150 स्कूल शुरू होंगे जो स्वामी आत्मानंद और विवेकानंद के तर्ज पर होगा. विपक्ष ने अतिथि शिक्षकों की भर्ती, वेतन और नियमितिकरण का मुद्दा उठाया. विपक्ष ने वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी की गारंटी में नियमितीकरण का वादा था. ढाई साल बाद भी सरकार वादा नहीं पूरा कर पाई. इस पर मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने वॉकआउट किया.

लावारिस बैग बना सुराग: एयरपोर्ट से 10 करोड़ का गांजा जब्त, चौंकाने वाला खुलासा

गया जी बिहार के गया जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर कस्टम विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई की। इस बीच करीब 10 करोड़ रुपये मूल्य का ‘हाईटेक गांजा’ जब्त किया।  बरामदगी के बाद एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था और जांच प्रक्रिया को और सख्त कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, 14 मार्च को थाई एयरवेज की बैंकॉक से आई एक शेड्यूल फ्लाइट से पहुंचे दो संदिग्ध बैग को कस्टम अधिकारियों ने जांच के दौरान अलग कर लिया था। बैग की स्थिति और उसमें मौजूद सामान को लेकर अधिकारियों को संदेह हुआ, जिसके बाद उन्हें निगरानी में रखा गया। तीन दिनों तक लावारिस पड़े थे बैग चौंकाने वाली बात यह रही कि ये दोनों बैग एयरपोर्ट पर लगातार तीन दिनों तक लावारिस पड़े रहे, लेकिन कोई भी यात्री उन्हें लेने नहीं पहुंचा। इससे कस्टम विभाग का शक और गहरा गया। अंततः अधिकारियों ने नियमों के तहत बैग की तलाशी लेने का फैसला किया। कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये आंकी गई तलाशी के दौरान बैग के अंदर से करीब 10 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक वीड बरामद किया गया। यह गांजा पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि उन्नत तकनीक यानी हाइड्रोपोनिक विधि से तैयार किया जाता है, जिसकी गुणवत्ता और कीमत दोनों काफी अधिक होती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये आंकी गई है। क्या कोई संगठित गिरोह है ? इस बरामदगी के बाद एयरपोर्ट पर हड़कंप मच गया और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट मोड में आ गईं। कस्टम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह मामला अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी से जुड़ा हो सकता है और इसके पीछे संगठित गिरोह की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल कस्टम विभाग पूरे मामले की गहन जांच कर रहा है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन बैग को एयरपोर्ट तक कौन लाया और इन्हें लेने कोई क्यों नहीं पहुंचा। साथ ही अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय कर तस्करी के पूरे नेटवर्क का खुलासा करने की दिशा में कार्रवाई जारी है।