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रीवा एयरपोर्ट के पास जमीनों की खरीदी-बिक्री पर रोक, क्या शहर में बड़ा परिवर्तन होने वाला है?

 रीवा  रीवा के उमरी और चोरहटा में अचानक जमीन की खरीदी-बिक्री पर रोक लगा दी गई है… आखिर ऐसा क्या होने वाला है कि 800 किसानों की 140 एकड़ जमीन अधिग्रहण की तैयारी चल रही है? मामला एयरपोर्ट विस्तार से जुड़ा है, जो इलाके की तस्वीर बदल सकता है। रीवा में एयरपोर्ट विस्तार को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। उमरी और चोरहटा गांव की जमीनों की प्रशासन ने खरीदी-बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अब इन इलाकों में जमीन ना बेची जा सकेगी, ना खरीदी जा सकेगी, और ना ही नामांतरण या डायवर्जन किया जा सकेगा। जानकारी के मुताबिक, एयरपोर्ट विस्तार के लिए इन दोनों गांवों की करीब 140 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है। इस जमीन के अधिग्रहण से लगभग 800 किसान प्रभावित होंगे। इनमें चोरहटा के करीब 500 और उमरी के लगभग 300 किसान शामिल हैं।   SDM ने लगाया प्रतिबन्ध  जैसे ही जमीन अधिग्रहण की खबर फैली, कई किसानों ने जल्दी-जल्दी अपनी जमीन बेचनी शुरू कर दी। इसी को देखते हुए प्रशासन ने यह रोक लगा दी, ताकि मुआवजे में किसी तरह की गड़बड़ी या अतिरिक्त खर्च न हो। इस बारे में SDM हुजूर डॉ. अनुराग तिवारी ने बताया कि ये फैसला सरकारी खर्च को नियंत्रित रखने के लिए लिया गया है। बताया जा रहा है कि जमीन अधिग्रहण के लिए राजस्व विभाग का सर्वे लगभग पूरा हो चुका है।  446 एकड़ रकबे का होगा रीवा एयरपोर्ट  वर्तमान में रीवा एयरपोर्ट करीब 306 एकड़ में बना हुआ है। अब 140 एकड़ जमीन जुड़ने के बाद इसका कुल रकबा बढ़कर 446 एकड़ हो जाएगा। अभी रीवा से दिल्ली, इंदौर, भोपाल और रायपुर के लिए फ्लाइट सेवाएं चल रही हैं। आने वाले समय में कोलकाता के लिए भी उड़ान शुरू करने की तैयारी की जा रही है। नेशनल लेवल पर होगा डेवलपमेंट  एयरपोर्ट के रनवे को भी बढ़ाने की योजना है। अभी रनवे की लंबाई करीब 1800 मीटर है, जिसे बढ़ाकर 2300 मीटर किया जाएगा। इससे बड़े विमान, जैसे एयरबस A320, यहां आसानी से उतर और उड़ान भर सकेंगे।  प्रशासन का कहना है कि रीवा एयरपोर्ट को अब राष्ट्रीय स्तर के अनुसार विकसित करने की योजना है। इसके लिए 140 एकड़ अतिरिक्त जमीन की जरूरत बताई गई है और इस संबंध में प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है। यह पूरी प्रक्रिया 17 मई 2023 को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और मध्यप्रदेश सरकार के बीच हुए समझौते के बाद शुरू हुई थी। प्रशासन ने ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है।  

एयरपोर्ट में नौकरी पाने का मौका: 12वीं पास के लिए भी लाखों का पैकेज, जानें कौन सा कोर्स करें

 नई दिल्ली एविएशन सेक्टर आज के दौर में सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाले इंडस्ट्रीज में से एक बन चुका है, जहां करियर के कई नए रास्ते खुल रहे हैं. अगर आप भी ऐसी नौकरी चाहते हैं जिसमें अच्छी सैलरी के साथ ग्रोथ और प्रोफेशनल माहौल मिले, तो एयरपोर्ट से जुड़े कोर्स आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकते हैं. इन कोर्सेज के जरिए आपको एयरपोर्ट पर कई भूमिकाओं में काम करने का मौका मिल सकता है जिससे आप अपने करियर को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं. इन कोर्सेज के जरिए आप ग्राउंड स्टाफ, केबिन क्रू, कस्टमर सर्विस जैसे कई क्षेत्रों में अपना परचम लहरा सकते हैं।  एयरपोर्ट पर काम करना केवल अच्छी सैलरी नहीं देते बल्कि प्रोफेशनल माहौल, स्मार्ट लाइफस्टाइल और ग्रोथ का भी बेहतरीन मौके देते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन से कोर्स एयरपोर्ट पर नौकरी दिलाते हैं।  ग्राउंड स्टाफ  ग्राउंड स्टाफ को एयरपोर्ट पर यात्रियों की मदद करने के लिए तैनात की जाती है. इनका काम होता है यात्रियों का चेक-इन करवाना, बोर्डिंग पास देना और यात्रा से जुड़ी हर आवश्यक जानकारी को बताना. किसी भी यात्री को फ्लाइट के टाइम, गेट नंबर समेत किसी भी चीज से जुड़ी जानकारी चाहिए होती है, तो वे ग्राउंड स्टाफ को संपर्क कर सकते हैं।  केबिन क्रू  केबिन क्रू फ्लाइट के अंदर काम करते हैं. वह यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर फोकस करते हैं. फ्लाइट उड़ने से पहले वह यात्रियों को सारी जानकारी शेयर करते हैं. इसके साथ ही वह यात्रा के दौरान खाना भी सर्व करते हैं।  एयरपोर्ट ऑपरेशन स्टाफ  एयरपोर्ट ऑपरेशन स्टाफ का काम एयरपोर्ट के संचालन को सही तरह से चलाना है. ये फ्लाइट के टेक ऑफ और लैंडिंग की प्लानिंग करते हैं. साथ ही वह यह सुनिश्चित करते हैं कि सब कुछ सुरक्षित तरीके से हो जाए।  सिक्योरिटी स्टाफ  एयरपोर्ट पर मौजूद सिक्योरिटी स्टाफ सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते हैं. इनका मुख्य काम यात्रियों और उनके सामान की जांच करना होता है ताकि कोई भी ऐसा सामान फ्लाइट में न जाए जो और यात्रियों के लिए खतरा बन सके।  टेक्निकल जॉब्स  टेक्निकल जॉब्स में वे लोग आते हैं, जो तकनीक से जुड़ा काम संभालते हैं. यानी कि इंजीनियर और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) अधिकारी. इंजीनियर फ्लाइट की मरम्मत का ध्यान रखता है ताकि एयरक्राफ्ट सुरक्षित रहे. वहीं ATC अधिकारी हवा में उड़ रहे विमानों को कंट्रोल करते हैं और सुरक्षित तरीके से टेक ऑफ और लैंडिंग करवाते हैं।  एयरपोर्ट इस तरह मिलती है नौकरी? एयरपोर्ट पर नौकरी पाने के कई तरीके होते हैं. एयरलाइन कंपनियां अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर वैकेंसी निकालती हैं, जहां से ऑनलाइन आवेदन कर आप इंटरव्यू और ट्रेनिंग के बाद नियुक्त होते हैं. सरकारी नौकरियों के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी के तहत एग्जाम और इंटरव्यू के जरिए हायरिंग होती है. इसके अलावा थर्ड पार्टी कंपनियां भी ग्राउंड स्टाफ जैसी पोस्ट के लिए कॉन्ट्रैक्ट बेस पर हायर करती हैं, जबकि सिक्योरिटी जॉब के लिए SSC जैसी सरकारी परीक्षा पास करनी होती है।  करनी होती है ये पढ़ाई  एयरपोर्ट पर नौकरी के लिए छात्र किसी भी स्ट्रीम से 12वीं या ग्रेजुएशन के बाद एविएशन से जुड़े कोर्स जैसे डिप्लोमा इन  एविएशन हॉस्पिटैलिटी, एयरपोर्ट मैनेजमेंट या ग्राउंड स्टाफ सर्विस कोर्स करना अच्छा होता है. साथ ही इस फील्ड में अच्छी कम्युनिकेशन स्किल, कॉन्फिडेंस और अच्छी पर्सनालिटी होना बहुत आवश्यक है. वहीं, ग्राउंड स्टाफ पोस्ट पर काम करने के लिए 12वीं पास या ग्रेजुएशन के साथ बेसिक कंप्यूटर नॉलेज जरूरी है. केबिन क्रू के लिए 12वीं या ग्रेजुएशन के साथ अच्छी इंग्लिश, कम्युनिकेशन स्किल और अच्छी पर्सनालिटी चाहिए. टेक्निकल जॉब्स के लिए इंजीनियरिंग करनी होती है, जबकि एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के लिए BSc या B.Tech के साथ इसे जुड़ी परीक्षा पास करना जरूरी होता है।  मिलती है आकर्षक सैलरी  एयरपोर्ट पर सैलरी एक्सपीरियंस पर निर्भर करती है. ग्राउंड स्टाफ को करीब 20,000 से 40,000 तक, केबिन क्रू को 25,000 से 1,00,000 तक और ऑपरेशन स्टाफ को 30,000 से 60,000 तक सैलरी मिलती है. वहीं, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को 40,000 से 1.5 लाख रुपये तक सैलरी मिल सकती है। 

हलवारा एयरपोर्ट से लुधियाना में अप्रैल से बुकिंग शुरू होगी, केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा – मई में उड़ान संभव

लुधियाना  केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब के लोगों को एक बड़ी खुशखबरी दी है। उन्होंने बताया कि लुधियाना के हलवारा हवाई अड्डे से बहुत जल्द उड़ानें शुरू होने जा रही हैं। लंबे समय से लोग इस एयरपोर्ट के शुरू होने का इंतजार कर रहे थे और अब आखिरकार यह सपना पूरा होने जा रहा है। रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए इसे पंजाब के लिए गर्व का पल बताया। उन्होंने जानकारी दी कि अप्रैल महीने से ही हलवारा एयरपोर्ट से फ्लाइट्स की बुकिंग शुरू हो जाएगी। पहली उड़ान 10 से 15 मई के बीच शुरू होने की उम्मीद है। शुरुआत में यहां से 160 सीटों वाला ए320 इकोनॉमी एयरक्राफ्ट उड़ान भरेगा, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि शुरुआत में दिल्ली और हलवारा के बीच रोजाना दो फ्लाइट्स चलाई जाएंगी। एक फ्लाइट सुबह होगी और दूसरी दोपहर में। इससे न सिर्फ लोगों को सफर करने में आसानी होगी, बल्कि व्यापार और कारोबार को भी काफी फायदा मिलेगा। अब तक लुधियाना और आसपास के इलाकों के लोगों को हवाई यात्रा के लिए चंडीगढ़ या अमृतसर जाना पड़ता था, लेकिन हलवारा एयरपोर्ट शुरू होने से यह परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी। बिट्टू ने इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी धन्यवाद किया और कहा कि उनके विजन और मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देने की वजह से ही ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स संभव हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम पंजाब के विकास में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा और राज्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। इस एयरपोर्ट के शुरू होने से सिर्फ यात्रा ही आसान नहीं होगी, बल्कि इसका असर पंजाब की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। व्यापार बढ़ेगा, नए निवेश आएंगे और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। खासकर लुधियाना जैसे औद्योगिक शहर के लिए यह एक बहुत बड़ी सुविधा साबित होगी, क्योंकि यहां के कारोबारियों को अब देश के दूसरे हिस्सों में जाने के लिए ज्यादा समय नहीं लगेगा। व्यापार और यात्रा को मिलेगा बड़ा बूस्ट बिट्टू ने कहा कि हलवारा एयरपोर्ट के शुरू होने से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि पंजाब में व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई रफ्तार मिलेगी। इसे राज्य के विकास की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। पीएम मोदी का जताया आभार बिट्टू ने इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया। बिट्टू ने कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की प्रतिबद्धता से ही ऐसे प्रोजेक्ट संभव हो पा रहे हैं। इस नई शुरुआत के साथ पंजाब अब देश-विदेश से बेहतर कनेक्टिविटी की ओर बढ़ रहा है और विकास की नई उड़ान भरने को तैयार है। ग्लाडा और AAI का ज्वाइंट वैंचर है एयरपोर्ट इसमें एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की 51 फीसदी हिस्सेदारी है और पंजाब सरकार की 49 फीसदी है। पंजाब सरकार की तरफ से यह काम ग्लाडा ने करवाया है। इस तरह एयरपोर्ट ग्लाडा और एएआई का ज्वाइंट वेंचर है। एयरपोर्ट निर्माण पर खर्च की गई कुल राशि टर्मिनल बिल्डिंग आदि के निर्माण पर लगभग ₹70 करोड़ के करीब खर्च हुए। इसमें से ₹27 करोड़ मुख्य टर्मिनल बिल्डिंग के लिए और ₹27 करोड़ विमानों के खड़े होने और टैक्सी-वे (Tarmac) के लिए खर्च किए गए हैं। इसके अलावा एप्रोच रोड के निर्माण पर भी 10 करोड़ के करीब खर्च किए गए। वहीं 161.27 एकड़ जमीन के बदले किसानों को लगभग ₹39.40 करोड़ का मुआवजा वितरित किया गया। किसानों को प्रति एकड़ मुआवजा लगभग ₹20.61 लाख (पुनर्वास भत्ते सहित) तय किया गया था।  

एमपी में 10 एयरपोर्ट होंगे, दो शहरों में काम शुरू; CM मोहन यादव ने दी जानकारी

इंदौर  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को कहा कि अगले दो साल के भीतर उज्जैन और शिवपुरी में नये हवाई अड्डों का निर्माण का काम पूरा हो जाएगा। इसका काम पूरा होते ही राज्य में हवाई अड्डों की कुल तादाद बढ़कर 10 पर पहुंच जाएगी। मोहन यादव, इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डे पर नवीनीकृत टर्मिनल भवन, उड़ान यात्री कैफे और आधारभूत ढांचे के उन्नयन से जुड़ी अन्य सुविधाओं के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। राम मोहन नायडू ने किया लोकार्पण केंद्रीय नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये इन सुविधाओं का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री यादव ने लोकार्पण समारोह में बताया कि फिलहाल प्रदेश में आठ हवाई अड्डों के साथ ही 20 हवाई पट्टियां और 220 हेलीपैड हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन और शिवपुरी में अगले दो साल के भीतर हवाई अड्डों का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। इससे सूबे में हवाई अड्डों की कुल तादाद बढ़कर 10 हो जाएगी। इंदौर में नए एयरपोर्ट टर्मिनल का सीएम ने शुभारंभ किया; मन की बात भी सुनी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को इंदौर दौरे पर हैं। इंदौर पहुंचते ही उन्होंने एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का शुभारंभ किया। इसके बाद वे ‘मन की बात’ कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां कई जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। इधर, सीएम ‘संकल्प से समाधान’ अभियान के तहत दशहरा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां भाजपा के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन को नर्मदा को कार्यक्रम में मंच पर बैठने के लिए कुर्सी नहीं मिली, तो वे कार्यक्रम छोड़कर निकल गए। जानकारी के अनुसार, एमआईसी सदस्य बबलू शर्मा से बैठने को लेकर हुई बातचीत के दौरान उनकी कही बात से नाराज होकर सत्तन वहां से चले गए। वहीं, बबलू शर्मा ने बताया कि सत्तन जी की कुर्सी आगे ही थी, लेकिन उस पर नाम की पर्ची नहीं लगी थी। मुख्यमंत्री शहर को पेयजल व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण सहित कई विकास कार्यों की महत्वपूर्ण सौगात देंगे। वे पेयजल परियोजना के चौथे चरण का भूमि पूजन भी करेंगें, जिससे शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने के साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। मुख्यमंत्री की पहल पर संचालित ‘संकल्प से समाधान’ अभियान के तहत अब तक 1 लाख 44 हजार से अधिक हितग्राहियों को लाभ मिल चुका है। दशहरा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न विभागों द्वारा विकासात्मक गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जिसमें शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जा रहा है। सीएम ने महावीर जयंती के अवसर पर आयोजित महावीर अलंकरण समारोह में भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि महावीर जयंती केवल एक दिन नही बल्कि हर दिन मानना चाहिए। जैन सिद्धांत दुनिया मे अत्यंत अलौकिक सिद्धांत है। पौधों में प्राण है, यह सिद्ध करना जीवन का बड़ा दर्शन है। क्योंकि पौधे से भी हमें जीवनदायिनी वायु मिलती है। ज्ञानेन्द्रियाँ और कर्मेन्द्रियां जीवन के अनमोल तत्वों से वास्तविक परिचय का आधार है। इस मौलिक सिद्धांत का अनुसरण हर इंसान को करना सिखाता है। इन शहरों में भी प्लान मुख्यमंत्री ने बताया कि शहडोल, नीमच, छिंदवाड़ा और मंडला की हवाई पट्टियों को क्षेत्रीय संपर्क योजना (रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम) के तहत हवाई अड्डे के तौर पर विकसित करने की योजना बनाई गई है। यादव ने बताया कि उड्डयन सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रदेश सरकार ने यह भी तय किया है कि हर 145 किलोमीटर पर एक हवाई पट्टी बनाई जाएगी। 50 करोड़ की लागत से नवीनीकरण अधिकारियों ने बताया कि इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डे के पुराने टर्मिनल भवन का 50 करोड़ रुपये की लागत से नवीनीकरण किया गया है और इसे 'टी-1' (टर्मिनल 1) नाम दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस सुविधा के लोकार्पण के साथ ही हवाई अड्डे पर टर्मिनल भवनों की तादाद बढ़कर दो हो गई है और दोनों इमारतों के बूते हवाई अड्डे की सालाना यात्री क्षमता बढ़कर कुल 50 लाख पर पहुंच गई है। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल इस हवाई अड्डे के जरिये हर रोज 100 से ज्यादा उड़ानों की आवाजाही होती है जिनमें नियमित यात्री उड़ानें और विशेष उड़ानें शामिल हैं।

चप्पे-चप्पे पर पहरा, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट बना अभेद्य किला

चप्पे-चप्पे पर पहरा, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट बना अभेद्य किला एयरपोर्ट की सुरक्षा को सशक्त बनाने के लिए 05 नई अस्थाई पुलिस चौकियों का सृजन      दो स्थानों पर 07-07 यूनिट के अग्निशमन केंद्र किए जाएंगे स्थापित एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्रों में आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था सुदृढ़ एयरपोर्ट की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों को जेवर इमिग्रेशन कोर्स के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण तकनीक और प्रशिक्षित बल के साथ तैयार हुआ मजबूत सुरक्षा मॉडल लखनऊ/जेवर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रथम चरण के शनिवार को शुभारंभ के दौरान सुरक्षा के दृष्टिगत नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और उसके आसपास का पूरा क्षेत्र अभेद्य सुरक्षा घेरे में तब्दील कर दिया गया। मजबूत सुरक्षा व्यवस्था अब यहां स्थाई तौर पर सुनिश्चित की जा रही है। एयरपोर्ट क्षेत्र की सुरक्षा को सशक्त बनाने के लिए 05 नई अस्थायी पुलिस चौकियों का सृजन किया गया है तो साथ ही किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए दो स्थानों पर 07-07 यूनिट के अग्निशमन केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। पुलिस कमिश्नर (गौतमबुद्ध नगर) लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्रों में आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ एवं सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं हैं। सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को इस प्रकार व्यवस्थित किया गया कि भविष्य में यहां वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम जनमानस को किसी प्रकार की असुविधा न होने पाए। 70 पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण जॉइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि एयरपोर्ट की सुरक्षा एवं संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जेवर इमिग्रेशन कोर्स के अंतर्गत 03 निरीक्षक, 24 उपनिरीक्षक, 17 मुख्य आरक्षी एवं 26 आरक्षियों सहित कुल 70 पुलिस कर्मी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त आगामी प्रशिक्षण के लिए 30 उपनिरीक्षक, 14 मुख्य आरक्षी एवं 17 आरक्षियों सहित कुल 61 पुलिसकर्मियों को नामित किया गया है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक दक्ष एवं प्रभावी बनाया जा सके। थाना जेवर डॉमेस्टिक टर्मिनल के लिए 35 पुलिसकर्मी एयरपोर्ट क्षेत्र में थाना जेवर डॉमेस्टिक टर्मिनल के लिए कुल 35 नागरिक पुलिसकर्मियों के पद स्वीकृत/नियुक्त किए गए हैं। इनमें 01 निरीक्षक, 02 उपनिरीक्षक, 09 मुख्य आरक्षी, 03 कंप्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए, 15 आरक्षी, 02 आरक्षी चालक तथा 03 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। चौकियों से एयरपोर्ट की परिधि सुरक्षा को मिलेगी मजबूती जॉइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि एयरपोर्ट क्षेत्र की सुरक्षा को सशक्त बनाने के लिए 05 नई अस्थायी पुलिस चौकियों का सृजन किया गया है। इन चौकियों में पुलिस चौकी माइल स्टोन-32 कि.मी., कार्गो टर्मिनल, डॉमेस्टिक टर्मिनल, माइल स्टोन-27 कि.मी. तथा माइल स्टोन-15 कि.मी. शामिल हैं। इन सभी चौकियों के माध्यम से एयरपोर्ट की परिधि सुरक्षा को मजबूत किया गया है तथा आवागमन मार्गों पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था हर समय सक्रिय इसके अतिरिक्त पीसीआर/पीआरवी वाहनों का आवंटन किया गया है, जो आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित हैं। इन वाहनों के माध्यम से लगातार गश्त की जा रही है और पुलिस चौकियों तथा पीआरवी/पीसीआर वाहनों पर  पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था हर समय सक्रिय और प्रभावी बनी रहे। अग्नि सुरक्षा के लिहाज से किसी भी आपात स्थिति में होगा तुरंत एक्शन अग्नि सुरक्षा के दृष्टिकोण से यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के सेक्टर-32 एवं सेक्टर-18 में दो नए अग्निशमन केंद्र स्थापित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। दोनों स्थानों पर 7485 वर्गमीटर भूमि पर 07-07 यूनिट के अग्निशमन केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इनके निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। प्रत्येक अग्निशमन केंद्र के लिए 01 अग्निशमन अधिकारी, 03 अग्निशमन द्वितीय अधिकारी, 01 एएसआईएम, 08 एलएफएम, 09 एफएस चालक तथा 44 फायरमैन के पद सृजित किए गए हैं, जिससे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए 05 राजपत्रित अधिकारियों 01 पुलिस उपायुक्त, 01 अपर पुलिस उपायुक्त तथा 03 सहायक पुलिस आयुक्त के साथ लगभग 70 सहायक स्टाफ के पदों की स्वीकृति के लिए प्रस्ताव है। इसी क्रम में 'थाना जेवर इंटरनेशनल टर्मिनल' के निर्माण के लिए 4000 वर्गमीटर भूमि उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रस्तावित थाने के लिए 01 निरीक्षक, 02 उपनिरीक्षक, 09 मुख्य आरक्षी, 03 कंप्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए, 15 आरक्षी, 02 आरक्षी चालक एवं 03 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पदों की स्वीकृति के प्रस्ताव भी विचाराधीन हैं। एयरपोर्ट के पास पुलिस लाइन्स के निर्माण के लिए 10,000 वर्गमीटर भूमि उपलब्ध कराने का प्रयास  इसके अतिरिक्त, कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर पुलिस लाइन्स की एयरपोर्ट से लगभग 55 कि.मी. दूरी को दृष्टिगत रखते हुए एयरपोर्ट के समीप एक पुलिस लाइन्स के निर्माण के लिए यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण से लगभग 10,000 वर्गमीटर भूमि उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है।  प्रस्तावित परिसर में बीडीडीएस टीम, डॉग स्क्वाड, परिवहन शाखा, शस्त्रागार, प्रशिक्षण केंद्र, इमिग्रेशन स्टाफ के लिए बैरक, आवास, गैरेज एवं कार्यालय आदि की समस्त आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। सुरक्षा के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित करेगा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर उपर्युक्त सभी व्यवस्थाओं से जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सुरक्षा, संरक्षा एवं संचालन को उच्चतम मानकों के अनुरूप सुनिश्चित किए जाने की दिशा में निरंतर प्रभावी कार्रवाई कर रहा है। इस व्यापक, बहुस्तरीय और तकनीक-संपन्न सुरक्षा व्यवस्था से स्पष्ट है कि जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट न केवल देश की कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा, बल्कि सुरक्षा के क्षेत्र में भी एक नया मानक स्थापित करेगा।   संपूर्ण क्षेत्र नो-फ्लाई जोन घोषित कर एंटी-ड्रोन सिस्टम रहा सक्रिय जॉइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी के जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर पूरे इलाके में 5-स्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया गया। जहां हाईटेक एंटी-ड्रोन, सीसीटीवी, इंटेलिजेंस नेटवर्क से चप्पे-चप्पे पर नजर रखी गई। इसी के साथ 100 से अधिक प्रवेश द्वारों पर 200 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर, एंटी-सैबोटाज चेक, बम डिस्पोजल स्क्वाड, एंटी-माइंस चेकिंग, स्निफर डॉग्स तैनात किए गए। इसके साथ ही करीब 5000 पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई। चप्पे चप्पे पर सुरक्षा के लिए पीएसी, आरएएफ, एटीएस, सीआईएसएफ के साथ एसपीजी भी मुस्तैद रहे। नो-फ्लाई जोन, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, कंट्रोल रूम, हेल्प डेस्क, एनडीआरएफ/एसडीआरएफ अलर्ट के साथ ही … Read more

डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल और विशेष कार्गो रूट से उद्योगों को सीधा लाभ, सप्लाई चेन होगी मजबूत

कार्गो हब बनाएगा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को ग्लोबल ट्रेड गेटवे, लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलेगी नई रफ्तार डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल और विशेष कार्गो रूट से उद्योगों को सीधा लाभ, सप्लाई चेन होगी मजबूत 20 लाख से 80 लाख मीट्रिक टन तक कार्गो क्षमता विस्तार का लक्ष्य मल्टी मोडल कार्गो हब से निर्यात-आयात को मिलेगा बड़ा बूस्ट इंडस्ट्री और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए गेमचेंजर बनेगा एयरपोर्ट जेवर  उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब केवल यात्री सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देश के सबसे बड़े कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में भी उभरने जा रहा है। एयरपोर्ट के पास निर्मित डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और विशेष कार्गो रूट इस क्षेत्र को ग्लोबल ट्रेड गेटवे बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में शामिल यह परियोजना प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती है। डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल से बढ़ेगी क्षमता एयरपोर्ट परिसर में एक अत्याधुनिक डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल विकसित किया गया है, जिसकी प्रारंभिक क्षमता लगभग 20 लाख मीट्रिक टन निर्धारित की गई है। भविष्य में इसे बढ़ाकर 80 लाख मीट्रिक टन तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त, शुरुआती चरण में लगभग 2.5 लाख टन प्रति वर्ष कार्गो संचालन की क्षमता विकसित की गई है, जिसे आगे बढ़ाकर करीब 15 लाख टन प्रति वर्ष तक विस्तारित किया जाएगा। लगभग 80 हजार वर्गमीटर में फैले इस कार्गो क्षेत्र को आधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया जा रहा है, ताकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर की लॉजिस्टिक्स सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें। मल्टी मॉडल कार्गो हब का हो रहा विकास नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एक मल्टी मॉडल कार्गो हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां वायु मार्ग, सड़क और संभावित रेल कनेक्टिविटी के माध्यम से माल परिवहन को आसान बनाया जाएगा। डेडिकेटेड कार्गो रूट का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे औद्योगिक इकाइयों से सीधे एयरपोर्ट तक माल की तेज और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सकेगी। उद्योगों को मिलेगा सीधा लाभ यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, ई-कॉमर्स, वेयरहाउसिंग और फार्मा सेक्टर को इस कार्गो हब से सीधा लाभ मिलेगा। यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास स्थापित उद्योगों के उत्पाद अब तेजी से अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकेंगे, जिससे निर्यात को नई गति मिलेगी और उत्पादन लागत में भी कमी आएगी। सप्लाई चेन होगी मजबूत, समय और लागत में कमी डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल और विशेष रूट के कारण लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया अधिक सुगम और समयबद्ध हो जाएगी। इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और उद्योगों को समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इस तरह की सुविधाओं से उत्तर प्रदेश “जस्ट-इन-टाइम” सप्लाई मॉडल की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा, जिससे वैश्विक कंपनियों का भरोसा भी बढ़ेगा। ग्लोबल ट्रेड गेटवे के रूप में उभरता उत्तर प्रदेश नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का यह कार्गो हब उत्तर प्रदेश को ‘लैंडलॉक्ड’ स्थिति से बाहर निकालते हुए सीधे वैश्विक व्यापार नेटवर्क से जोड़ेगा। इससे न केवल निर्यात-आयात को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि राज्य को एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स और ट्रेड हब के रूप में स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।

केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु को पछाड़कर शीर्ष पर पहुंचा यूपी

सीएम योगी के नेतृत्व में सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट वाला राज्य बना उत्तर प्रदेश  केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु को पछाड़कर शीर्ष पर पहुंचा यूपी  उत्तर प्रदेश में जेवर, लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या व कुशीनगर की शान बने अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट  जेवर समेत यूपी में कुल 17 एयरपोर्ट संचालित, अब 24 एयरपोर्ट वाला राज्य बनने की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश लखनऊ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण के उद्घाटन के साथ ही उत्तर प्रदेश के खाते में बड़ी उपलब्धि शामिल हो गई। अब उत्तर प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की संख्या 05 हो गई है। जेवर एयरपोर्ट के शुरू होते ही अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के मामले में उत्तर प्रदेश ने केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु को पीछे छोड़ दिया है। वहीं, उत्तर प्रदेश में कुल एयरपोर्ट की बात करें तो अब यह संख्या बढ़कर 17 हो गई है।  बजट में कई गुना बढ़ोतरी एयर कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने खजाना खोल दिया है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017-18 से 2025-26 के बीच नागरिक उड्डयन का बजट उत्तर प्रदेश में कई गुना बढ़ चुका है। यही वजह है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन के साथ ही यूपी एयर-कनेक्टिविटी के मामले में देश का सिरमौर बन गया। योगी सरकार ने हालिया बजट में नागरिक उड्ड्यन के लिए 2111 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की है।  24 एयरपोर्ट वाला राज्य बनने की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश प्रदेश में संचालित एयरपोर्ट – 17 *घरेलू एयरपोर्ट 12 – आगरा, त्रिशूल (बरेली), गोरखपुर, हिंडन (गाजियाबाद), प्रयागराज, कानपुर, अलीगढ़, आजमगढ़, मुरादाबाद, श्रावस्ती, चित्रकूट, सहारनपुर *अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट 05 – नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर, चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट लखनऊ, लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा वाराणसी, महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट अयोध्या, कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा कुशीनगर *प्रक्रियाधीन एयरपोर्ट परियोजनाएं 07 – म्योरपुर (सोनभद्र), ललितपुर, मेरठ, पलिया (लखीमपुर) फुरसतगंज (अमेठी), गाजीपुर व झांसी।

उत्तर प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस से सजा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का प्रतीक चिन्ह

सारस की उड़ान बनी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की पहचान उत्तर प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस से सजा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का प्रतीक चिन्ह नीला-हरा ग्रेडिएंट परंपरा और आधुनिकता का संगम, तकनीक, कनेक्टिविटी और पर्यावरण का संदेश जेवर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने अपनी ब्रांड पहचान को खास और वैश्विक स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस को अपने प्रतीक (लोगो) के रूप में अपनाया है। यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस विजन को दर्शाती है, जिसमें विकास के साथ सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरणीय संतुलन को भी समान महत्व दिया जा रहा है। सारस उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी होने के साथ-साथ समृद्ध परंपरा और प्रकृति का प्रतीक है। एयरपोर्ट के लोगो में इसे शामिल करना राज्य की विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की एक सार्थक पहल है, जो योगी सरकार के “विकास के साथ विरासत” के दृष्टिकोण को मजबूत करती है। डिजाइन में तकनीक और इको-फ्रेंडली सोच का मेल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लोगो को पतली और एकीकृत रेखाओं से तैयार किया गया है, जो गति, कनेक्टिविटी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का संकेत देती हैं। नीले-हरे रंग का ग्रेडिएंट तकनीकी प्रगति और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन को दर्शाता है, जो योगी आदित्यनाथ की ग्रीन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट नीति के अनुरूप है। उड़ान में छिपा विकास और सकारात्मकता का संदेश लोगो में उड़ता सारस प्रगति, आत्मविश्वास और नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ते उत्तर प्रदेश का प्रतीक है। यह राज्य को एक वैश्विक निवेश और कनेक्टिविटी हब बनाने के विजन को भी दर्शाता है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का यह प्रतीक न केवल इसकी ब्रांडिंग को मजबूत कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान को भी अलग और प्रभावी बना रहा है। यह एयरपोर्ट अब केवल एक परिवहन केंद्र नहीं, बल्कि संस्कृति, आधुनिकता और सतत विकास का प्रतीक बनकर उभर रहा है।

एलसी3 तकनीक से निर्माण, करीब 1.37 लाख वर्ग मीटर का विशाल टर्मिनल

अत्याधुनिक तकनीक और इको-फ्रेंडली निर्माण से सुसज्जित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का टर्मिनल-1 बनेगा नया मानक एलसी3 तकनीक से निर्माण, करीब 1.37 लाख वर्ग मीटर का विशाल टर्मिनल उच्च क्षमता, तेज सेवाएं और विश्वस्तरीय यात्री सुविधाएं होंगी सुलभ नोएडा  नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अपने अत्याधुनिक और पर्यावरण अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण देश के सबसे आधुनिक एयरपोर्ट्स में शामिल होने जा रहा है। यहां निर्मित टर्मिनल-1 न केवल आकार और क्षमता के लिहाज से बड़ा है, बल्कि तकनीकी नवाचार और यात्री सुविधाओं के मामले में भी नया मानक स्थापित करेगा। लो-कार्बन एलसी3 तकनीक से पर्यावरण को बढ़ावा एयरपोर्ट का निर्माण देश में पहली बार बड़े पैमाने पर एलसी3 (चूना-मिट्टी-सीमेंट मिश्रण) तकनीक से किया गया है। यह लो-कार्बन निर्माण सामग्री पारंपरिक सीमेंट की तुलना में पर्यावरण पर कम प्रभाव डालती है, जिससे यह परियोजना इको-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर का उत्कृष्ट उदाहरण बनती है। विशाल टर्मिनल और आधुनिक यात्री सुविधाएं करीब 1.37 लाख वर्ग मीटर में फैले टर्मिनल-1 में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। यहां 48 चेक-इन काउंटर, 20 सेल्फ बैगेज ड्रॉप और 9 सिक्योरिटी चेक लेन स्थापित किए जाएंगे, जिससे यात्रियों को तेज और सहज अनुभव मिलेगा। अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों के लिए फास्ट-ट्रैक सुविधा के साथ 9-9 इमिग्रेशन काउंटर उपलब्ध रहेंगे, जिससे समय की बचत और सुगम आवागमन सुनिश्चित होगा। घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए अलग व्यवस्था घरेलू उड़ानों के लिए 10 एयरोब्रिज और 2 बस बोर्डिंग गेट की व्यवस्था की गई है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए 2 एयरोब्रिज और एक बस बोर्डिंग गेट उपलब्ध होंगे। यह विभाजन संचालन को व्यवस्थित और कुशल बनाएगा, जिससे यात्रियों की आवाजाही में किसी प्रकार की बाधा न हो। उच्च क्षमता और तेज संचालन की तैयारी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रति घंटे लगभग 30 विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग की क्षमता के साथ तैयार किया गया है। इसके अलावा, एयरपोर्ट की वार्षिक कार्गो हैंडलिंग क्षमता 2.5 लाख मीट्रिक टन निर्धारित की गई है, जो इसे एक मजबूत लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करेगी।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन पर राजकीय वायुयान ने भरी पहली उड़ान

ऐतिहासिक क्षण: जेवर से पहली उड़ान, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व सीएम योगी ने किया लखनऊ का सफर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन पर राजकीय वायुयान ने भरी पहली उड़ान यूपी के उड्डयन इतिहास में जुड़ा नया अध्याय, ऐतिहासिक पल का साक्षी बना जेवर एयरपोर्ट नोएडा/लखनऊ  नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रथम चरण के उद्घाटन के ऐतिहासिक अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के राजकीय वायुयान ने जेवर रनवे से अपनी पहली उड़ान भरते हुए विकास की नई कहानी लिख दी। इस विशेष उड़ान में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा से लखनऊ तक का सफर तय किया। राजकीय वायुयान की इस पहली उड़ान ने न केवल एयरपोर्ट के संचालन की औपचारिक शुरुआत को चिह्नित किया, बल्कि प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी और तेज विकास के नए द्वार भी खोल दिए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से राजधानी तक की दूरी अब और अधिक सहज और तेज हो जाएगी, जिससे व्यापार, निवेश और आवागमन को सीधा लाभ मिलेगा।