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उत्तर प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस से सजा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का प्रतीक चिन्ह

सारस की उड़ान बनी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की पहचान उत्तर प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस से सजा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का प्रतीक चिन्ह नीला-हरा ग्रेडिएंट परंपरा और आधुनिकता का संगम, तकनीक, कनेक्टिविटी और पर्यावरण का संदेश जेवर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने अपनी ब्रांड पहचान को खास और वैश्विक स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस को अपने प्रतीक (लोगो) के रूप में अपनाया है। यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस विजन को दर्शाती है, जिसमें विकास के साथ सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरणीय संतुलन को भी समान महत्व दिया जा रहा है। सारस उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी होने के साथ-साथ समृद्ध परंपरा और प्रकृति का प्रतीक है। एयरपोर्ट के लोगो में इसे शामिल करना राज्य की विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की एक सार्थक पहल है, जो योगी सरकार के “विकास के साथ विरासत” के दृष्टिकोण को मजबूत करती है। डिजाइन में तकनीक और इको-फ्रेंडली सोच का मेल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लोगो को पतली और एकीकृत रेखाओं से तैयार किया गया है, जो गति, कनेक्टिविटी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का संकेत देती हैं। नीले-हरे रंग का ग्रेडिएंट तकनीकी प्रगति और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन को दर्शाता है, जो योगी आदित्यनाथ की ग्रीन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट नीति के अनुरूप है। उड़ान में छिपा विकास और सकारात्मकता का संदेश लोगो में उड़ता सारस प्रगति, आत्मविश्वास और नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ते उत्तर प्रदेश का प्रतीक है। यह राज्य को एक वैश्विक निवेश और कनेक्टिविटी हब बनाने के विजन को भी दर्शाता है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का यह प्रतीक न केवल इसकी ब्रांडिंग को मजबूत कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान को भी अलग और प्रभावी बना रहा है। यह एयरपोर्ट अब केवल एक परिवहन केंद्र नहीं, बल्कि संस्कृति, आधुनिकता और सतत विकास का प्रतीक बनकर उभर रहा है।

एलसी3 तकनीक से निर्माण, करीब 1.37 लाख वर्ग मीटर का विशाल टर्मिनल

अत्याधुनिक तकनीक और इको-फ्रेंडली निर्माण से सुसज्जित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का टर्मिनल-1 बनेगा नया मानक एलसी3 तकनीक से निर्माण, करीब 1.37 लाख वर्ग मीटर का विशाल टर्मिनल उच्च क्षमता, तेज सेवाएं और विश्वस्तरीय यात्री सुविधाएं होंगी सुलभ नोएडा  नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अपने अत्याधुनिक और पर्यावरण अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण देश के सबसे आधुनिक एयरपोर्ट्स में शामिल होने जा रहा है। यहां निर्मित टर्मिनल-1 न केवल आकार और क्षमता के लिहाज से बड़ा है, बल्कि तकनीकी नवाचार और यात्री सुविधाओं के मामले में भी नया मानक स्थापित करेगा। लो-कार्बन एलसी3 तकनीक से पर्यावरण को बढ़ावा एयरपोर्ट का निर्माण देश में पहली बार बड़े पैमाने पर एलसी3 (चूना-मिट्टी-सीमेंट मिश्रण) तकनीक से किया गया है। यह लो-कार्बन निर्माण सामग्री पारंपरिक सीमेंट की तुलना में पर्यावरण पर कम प्रभाव डालती है, जिससे यह परियोजना इको-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर का उत्कृष्ट उदाहरण बनती है। विशाल टर्मिनल और आधुनिक यात्री सुविधाएं करीब 1.37 लाख वर्ग मीटर में फैले टर्मिनल-1 में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। यहां 48 चेक-इन काउंटर, 20 सेल्फ बैगेज ड्रॉप और 9 सिक्योरिटी चेक लेन स्थापित किए जाएंगे, जिससे यात्रियों को तेज और सहज अनुभव मिलेगा। अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों के लिए फास्ट-ट्रैक सुविधा के साथ 9-9 इमिग्रेशन काउंटर उपलब्ध रहेंगे, जिससे समय की बचत और सुगम आवागमन सुनिश्चित होगा। घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए अलग व्यवस्था घरेलू उड़ानों के लिए 10 एयरोब्रिज और 2 बस बोर्डिंग गेट की व्यवस्था की गई है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए 2 एयरोब्रिज और एक बस बोर्डिंग गेट उपलब्ध होंगे। यह विभाजन संचालन को व्यवस्थित और कुशल बनाएगा, जिससे यात्रियों की आवाजाही में किसी प्रकार की बाधा न हो। उच्च क्षमता और तेज संचालन की तैयारी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रति घंटे लगभग 30 विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग की क्षमता के साथ तैयार किया गया है। इसके अलावा, एयरपोर्ट की वार्षिक कार्गो हैंडलिंग क्षमता 2.5 लाख मीट्रिक टन निर्धारित की गई है, जो इसे एक मजबूत लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करेगी।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन पर राजकीय वायुयान ने भरी पहली उड़ान

ऐतिहासिक क्षण: जेवर से पहली उड़ान, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व सीएम योगी ने किया लखनऊ का सफर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन पर राजकीय वायुयान ने भरी पहली उड़ान यूपी के उड्डयन इतिहास में जुड़ा नया अध्याय, ऐतिहासिक पल का साक्षी बना जेवर एयरपोर्ट नोएडा/लखनऊ  नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रथम चरण के उद्घाटन के ऐतिहासिक अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के राजकीय वायुयान ने जेवर रनवे से अपनी पहली उड़ान भरते हुए विकास की नई कहानी लिख दी। इस विशेष उड़ान में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा से लखनऊ तक का सफर तय किया। राजकीय वायुयान की इस पहली उड़ान ने न केवल एयरपोर्ट के संचालन की औपचारिक शुरुआत को चिह्नित किया, बल्कि प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी और तेज विकास के नए द्वार भी खोल दिए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से राजधानी तक की दूरी अब और अधिक सहज और तेज हो जाएगी, जिससे व्यापार, निवेश और आवागमन को सीधा लाभ मिलेगा।

हवेली शैली की झलक, गंगा घाट थीम पर बना मल्टीलेवल टर्मिनल

आधुनिकता के साथ संस्कृति का संगम: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का डिजाइन दे रहा भारत दर्शन का अनुभव हवेली शैली की झलक, गंगा घाट थीम पर बना मल्टीलेवल टर्मिनल देशभर के हैंडीक्राफ्ट्स से सजा एयरपोर्ट बनेगा सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक नोएडा/जेवर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल एक आधुनिक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक बनने जा रहा है। इसके वास्तु और इंटीरियर डिजाइन में उत्तर प्रदेश की विरासत को विशेष रूप से शामिल किया गया है, जिससे यात्रियों को एक अनूठा सांस्कृतिक अनुभव मिलेगा। हवेली शैली में झलकेगी उत्तर प्रदेश की विरासत एयरपोर्ट के डिजाइन में उत्तर प्रदेश की पारंपरिक हवेलियों की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देगी। वास्तुकला में उपयोग किए गए डिजाइन एलिमेंट्स जैसे मेहराब, आंगन और पारंपरिक संरचनाएं यात्रियों को प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ेंगे। गंगा घाट थीम से मिलेगा आध्यात्मिक अनुभव टर्मिनल को गंगा घाट की थीम पर मल्टी-लेवल संरचना में विकसित किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को वाराणसी और हरिद्वार के घाटों जैसा अनुभव मिलेगा। सीढ़ीनुमा डिजाइन, खुले स्पेस और प्रकाश व्यवस्था इस तरह तैयार की गई है कि यह आध्यात्मिक और शांत वातावरण का एहसास कराए। हैंडीक्राफ्ट्स से सजेगा पूरा एयरपोर्ट एयरपोर्ट के सौंदर्यीकरण में देश के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक हैंडीक्राफ्ट्स का उपयोग किया गया है। यह पहल न केवल भारत की विविध कला परंपराओं को प्रदर्शित करेगी, बल्कि स्थानीय और राष्ट्रीय कारीगरों को भी एक वैश्विक मंच प्रदान करेगी। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का डिजाइन इस बात का उदाहरण है कि कैसे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर में सांस्कृतिक पहचान को समाहित किया जा सकता है। हाईटेक सुविधाओं के साथ पारंपरिक थीम इसे अन्य एयरपोर्ट्स से अलग और विशिष्ट बना रही है।

पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को लेकर पूरे इलाके में 5000 पुलिसकर्मी तैनात

5 स्तरीय सुरक्षा घेरे में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हाईटेक निगरानी से चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को लेकर पूरे इलाके में 5000 पुलिसकर्मी तैनात  एंटी-ड्रोन, सीसीटीवी और इंटेलिजेंस नेटवर्क से कड़ी निगरानी 100 से अधिक प्रवेश द्वारों पर 200 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर स्थापित एंटी-सैबोटाज चेक, बम डिस्पोजल स्क्वाड, एंटी-माइंस चेकिंग और स्निफर डॉग्स की तैनाती नोएडा/जेवर नवनिर्मित जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह और प्रस्तावित जनसभा को लेकर पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर ने अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति के मद्देनजर पूरे क्षेत्र को 5-स्तरीय सुरक्षा घेरे में रखा गया, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक, खुफिया समन्वय और व्यापक पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप यह पूरी व्यवस्था पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में संचालित की जा रही है।  5-स्तरीय सुरक्षा घेरा, एसपीजी के साथ समन्वय नोएडा के जॉइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि कार्यक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे क्षेत्र में मल्टी लेयर सिक्योरिटी आर्किटेक्चर के तहत 5 सुरक्षा रिंग बनाईं गईं। एसपीजी के साथ निरंतर समन्वय रखते हुए सभी एंट्री प्वाइंट्स पर सघन चेकिंग, बैगेज स्क्रीनिंग और पहचान सत्यापन किया जा रहा है। 100 से अधिक प्रवेश द्वारों पर 200 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर लगाए गए, जबकि महिलाओं के लिए अलग चेकिंग एन्क्लोजर की व्यवस्था की गई। 5000 से अधिक सुरक्षाकर्मी, कई एजेंसियों की तैनाती सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के करीब 5000 राजपत्रित और अराजपत्रित अधिकारियों की तैनाती की गई। इसके अलावा पीएसी, आरएएफ, एटीएस और सीआईएसएफ की संयुक्त तैनाती कर सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया गया। एयरपोर्ट परिसर और आसपास पहले से स्थापित पुलिस चौकियों पर भी अतिरिक्त बल तैनात किया गया। एंटी-ड्रोन, बीडीडीएस और स्निफर डॉग से निगरानी कार्यक्रम स्थल पर एंटी-सैबोटाज चेक, बीडीडीएस (बम डिस्पोजल स्क्वाड), एंटी-माइंस चेकिंग और स्निफर डॉग्स की तैनाती की गई। एंटी-ड्रोन टीमों द्वारा आसमान से निगरानी रखी गई, जबकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई के लिए क्विक रिएक्शन टीम्स को रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया गया। इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया पर कड़ी नजर आईबी और स्टेट इंटेलिजेंस यूनिट्स के साथ रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन स्थापित किया गया है। नोएडा के जॉइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के जरिए अफवाहों और संभावित खतरों को लेकर नजर रखी गई, जिससे किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। सीसीटीवी कंट्रोल रूम और हेल्प डेस्क की व्यवस्था पूरे कार्यक्रम स्थल और एयरपोर्ट परिसर में सीसीटीवी निगरानी के लिए विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। साथ ही आमजन की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों पर पुलिस हेल्प डेस्क भी बनाए गए हैं, जिससे लोगों को त्वरित सहायता मिल सके। आपदा प्रबंधन और चिकित्सा सुविधाएं अलर्ट मोड पर आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। फायर ब्रिगेड और फायर टेंडर स्टैंडबाय पर रहे, जबकि मेडिकल डेस्क, एम्बुलेंस और विशेष एम्बुलेंस कॉरिडोर की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई। यही नहीं, एवैक्यूएशन रूट और असेंबली प्वाइंट पहले से तय कर मॉक ड्रिल भी कराई गई है।  ट्रैफिक डायवर्जन और पार्किंग का विशेष प्लान यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए रियल-टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग के साथ विस्तृत डायवर्जन प्लान लागू किया गया। करीब 15 निर्धारित पार्किंग स्थलों पर 20,000 से अधिक वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है।  हाईटेक कम्युनिकेशन और कंट्रोल सिस्टम सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए डेडिकेटेड वायरलेस नेटवर्क और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल डैशबोर्ड के जरिए सभी व्यवस्थाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की गई। नदी क्षेत्र में भी सुरक्षा, ड्रोन पर प्रतिबंध यमुना नदी के नजदीक होने के कारण उस क्षेत्र में भी पेट्रोलिंग की भी विशेष व्यवस्था की गई है। साथ ही कार्यक्रम क्षेत्र को नो-फ्लाई जोन घोषित कर एंटी-ड्रोन सिस्टम सक्रिय रखा गया।

28 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी करेंगे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन, जानें 10 महत्वपूर्ण बातें

 नोएडा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मार्च 2026 को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) का उद्घाटन करेंगे. यूपी सरकार ने कहा है कि जेवर में बना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर साबित होगा. यह एयरपोर्ट कृषि, उद्योग, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के क्षेत्र में व्यापक असर डालेगा. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन काल यानी 28 मार्च को हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के इस सबसे बड़े हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे। इससे न केवल हवाई सफर करने वालों को फायदा होगा बल्कि दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट सेक्टर को भी बूस्ट मिलेगा। जेवर हवाई अड्डा एनसीआर के विकास में बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके शुरू होने से यहां के इलाकों में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। अभी तक ज्यादातर लोग दिल्ली उसके आसपास रहना ज्यादा पसंद करते थे। इस हवाई अड्डे के शुरू होने के बाद यमुना एक्सप्रेसवे, ग्रेटर नोएडा और जेवर जैसे इलाकों में रहने का ट्रेंड बढ़ सकता है। यहां के इलाकों में सड़कें बेहतर की जा रही, मेट्रो और रैपिड रेल जैसी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं, जिससे यहां रहना और ज्यादा आसान हो जाएगा। जेवर एयरपोर्ट शुरू में (फेज-1) प्रति वर्ष 1.2 करोड़ यात्रियों (12 मिलियन पैसेंजर्स) को हैंडल करने की क्षमता रखता है. पूरी तरह विकसित होने के बाद इसकी क्षमता बढ़ाकर 7 करोड़ यात्रियों प्रति वर्ष (70 मिलियन पैसेंजर्स) तक की जा सकेगी।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत विकसित यह एयरपोर्ट राज्य की भौगोलिक सीमाओं को तोड़कर वैश्विक बाजार से जोड़ेगा. इससे कृषि उत्पादों, छोटे उद्योगों (MSMEs), पर्यटन और अन्य क्षेत्रों को सीधा फायदा होगा. जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट, पार्किंग, मेडिकल सुविधाएं और सीसीटीवी निगरानी को मजबूत किया गया है. वीवीआईपी मूवमेंट और आम लोगों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।  इन्वेस्ट करने वालों को एक्सपर्ट की सलाह एक्सपर्ट की मानना है कि बेशक नोएडा एयरपोर्ट शुरू हो गया है और इसके आसपास कई बड़े हाउसिंग और बिजनेस प्रोजेक्ट्स शुरू हो रहे हैं या शुरू हो चुके हैं लेकिन फिर भी आपको इन्वेस्ट के मामले में सतर्क रहना चाहिए। कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले उसकी कानूनी स्थिति की जांच जरूर करें। यह जरूर चेक करें कि वो प्रोजेक्ट RERA एक्ट 2016 के तहत रजिस्टर् है या नहीं। केवल लोकेशन के आधार पर फैसला न लें बल्कि वहां हो रहे वास्तविक विकास और सुविधाओं को भी समझें। ताज से लेकर कुंभ तक… सफर होगा आसान ये हवाई अड्डा एक बड़े ‘गेटवे’ यानी प्रवेश द्वार का काम करेगा. भारत अपनी संस्कृति और अध्यात्म के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. अब तक विदेशी या घरेलू पर्यटकों को आगरा का ताजमहल देखने, मथुरा और वृंदावन के दर्शन करने, प्रयागराज के कुंभ मेले में जाने या फिर श्रावस्ती और कुशीनगर जैसे प्रमुख बौद्ध स्थलों तक पहुंचने के लिए काफी हद तक दिल्ली एयरपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता था. जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से इन सभी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्थलों की दूरी काफी कम हो जाएगी. जिससे पर्यटन को एक नई रफ्तार मिलेगी और यात्रियों के समय और पैसे दोनों की बचत होगी।  यूपी की इकॉनमी के लिए गेम चेंजर है जेवर एयरपोर्ट मनोज गौड़, सीएमडी, गौड़ ग्रुप के अनुसार, जेवर एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के पूरे इकॉनोमिक सिस्टम के लिए एक बड़ा कदम है। इसके शुरू होने से इस पूरी बेल्ट पर मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स शुरू होंगे। कनेक्टिविटी और इंडस्ट्री बढ़ने से सीधे तौर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। जाहिर है यहां जॉब करने वालों को किफायती घरों की जरूरत होगी जिससे हाउसिंग की डिमांड बढ़ेगी। यह एयरपोर्ट सिर्फ नोएडा या ग्रेटर नोएडा ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक मजबूत 'गेटवे' का काम करेगा।   आइए जानते हैं जेवर एयरपोर्ट से जुड़ी 10 खास बातें… – नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत को वैश्विक एविएशन हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. दिल्ली-एनसीआर के लिए दूसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनकर यह क्षेत्र की कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगा।  – यह एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर का दूसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट होगा, जो दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर बढ़ते बोझ को कम करेगा. एक रनवे के साथ शुरू होने वाला यह एयरपोर्ट 3900 मीटर लंबा रनवे, आधुनिक टर्मिनल और कार्गो सुविधाओं से लैस है।  – शुरू में (फेज-1) यह एयरपोर्ट सालाना 1.2 करोड़ (12 मिलियन) यात्रियों को हैंडल करेगा. पूरा विकसित होने पर क्षमता 7 करोड़ यात्रियों और लगभग 10 लाख टन कार्गो तक पहुंच जाएगी।  – 3900 मीटर लंबा रनवे, आधुनिक नेविगेशन सिस्टम, ऑल-वेदर ऑपरेशन और 40 एकड़ का एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर) फेसिलिटी है. कार्गो टर्मिनल 2.5 लाख टन से शुरू होकर 18 लाख टन तक बढ़ाया जा सकेगा। – एयरपोर्ट को नेट-जीरो एमिशन बनाने का लक्ष्य है. भारतीय विरासत से प्रेरित डिजाइन (घाट और हवेली जैसी शैली) में बनाया गया है।  – यमुना एक्सप्रेसवे पर स्थित यह एयरपोर्ट सड़क, रेल, मेट्रो और अन्य परिवहन से जुड़ेगा. इससे यात्रियों और कार्गो की सुविधा बढ़ेगी।  – फल, सब्जी, डेयरी उत्पाद और फूल जैसे जल्द खराब होने वाले सामान आसानी से अंतरराष्ट्रीय बाजार पहुंचेंगे. इससे किसानों की आय बढ़ेगी और 'फार्म टू ग्लोबल मार्केट' मॉडल मजबूत होगा।  – राज्य के करीब 1 करोड़ छोटे-मध्यम उद्योगों को वैश्विक बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी. निर्यात बढ़ेगा, लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धा क्षमता मजबूत होगी।  – एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, होटल, कृषि और सप्लाई चेन सेक्टर में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. आसपास के इलाकों में औद्योगिक विकास तेज होगा।  – फेज-1 पर करीब 11,200 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. यह पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित किया जा रहा है।  वास्तुकला में दिखेगी यूपी, उत्तराखंड और राजस्थान की झलक अक्सर एयरपोर्ट का मतलब कांच और कंक्रीट की बड़ी और नीरस इमारतें माना जाता है. लेकिन, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के डिजाइन को बेहद खास तरीके से तैयार किया गया है. अधिकारियों के मुताबिक, इसकी वास्तुकला में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की साफ झलक देखने को मिलेगी।  टर्मिनल की छत को एक सफेद रंग के पारदर्शी कैनोपी (छतरी) का आकार दिया गया है, जो गंगा, यमुना और हिंडन नदियों की उठती-गिरती लहरों का अहसास … Read more

अंबिकापुर से दिल्ली के लिए 30 मार्च से डायरेक्ट फ्लाइट, एलायंस एयर चलाएगी 72 सीटर विमान

अंबिकापुर  छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से दिल्ली के लिए हवाई सेवा 30 मार्च से शुरू होगी। एलायंस एयर मां महामाया एयरपोर्ट से हफ्ते में 2 दिन सोमवार और बुधवार को फ्लाइट चलाएगी। यह उड़ान बिलासपुर होते हुए दिल्ली पहुंचेगी। एलाएंस एयर ने अपने वेबसाइट पर इसकी बुकिंग भी शुरू कर दी है। एलायंस एयर ने शुरू की जा रही फ्लाइट का शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है। 30 मार्च को अंबिकापुर के मां महामाया एयरपोर्ट से फ्लाइट दोपहर 12 बजे रवाना होगी, जो 2:30 बजे दिल्ली पहुंचेगी। एलायंस एयर 72 सीटर ATR विमान का संचालन करेगी। सप्ताह में दो दिन सोमवार और बुधवार को चलेगी। वहीं बिलासपुर के लिए शुक्रवार को भी फ्लाइट सेवा मिलेगी। एलायंस एयर की ओर से 30 मार्च से ही बिलासपुर-दिल्ली फ्लाइट के शेड्यूल में बदलाव किया गया है। पहले यह सेवा मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को चलती थी। 8 महीने बाद से बंद है हवाई सेवा अंबिकापुर के मां महामाया एयरपोर्ट से दिसंबर 2024 में हवाई सेवा की शुरुआत हुई थी। उड़ान 4.2 योजना के तहत फ्लाई बिग कंपनी ने मां महामाया एयरपोर्ट दरिमा से रायपुर और बिलासपुर के लिए 19 सीटर विमान सेवा शुरू की थी। शुरुआती दिनों में अनियमित उड़ान के कारण यह सेवा केवल छह महीने तक ही चल सकी। पिछले 6 महीने से अधिक समय से इसका संचालन पूरी तरह बंद है। 6000 तक हो सकता है किराया 2 साल पहले एलायंस एयर ने अंबिकापुर और बिलासपुर एयरपोर्ट का निरीक्षण किया था। एलायंस एयर ने अपनी वेबसाइट में अंबिकापुर एयरपोर्ट का नाम जोड़ दिया है और फ्लाइट सर्च भी हो रही है। हालांकि अभी किराया घोषित नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि बेस फेयर 6000 रुपए से शुरू हो सकता है। बिलासपुर-दिल्ली मार्ग पर सामान्यतः बेस फेयर 4000 रुपए से अधिक रहता है, जिसमें बुकिंग नियमों के अनुसार किराया कम-ज्यादा होता रहता है। एलायंस एयर ने सोमवार एवं बुधवार को बिलासपुर से चलने वाली नान स्टाप फ्लाइट को भी री-शेड्यूल किया है। जानिए एलायंस एयर के बारे में एलायंस एयर देश की प्रमुख घरेलू विमानन कंपनियों में से एक है। पहले यह एयर इंडिया के स्वामित्व में थी। एयर इंडिया के विनिवेश के बाद यह भारत सरकार की स्वतंत्र व्यावसायिक इकाई के रूप में कार्य कर रही है। वर्तमान में एलायंस एयर प्रतिदिन 137 घरेलू उड़ानें संचालित करती है और 57 शहरों को जोड़ती है। कंपनी रायपुर से हैदराबाद और जगदलपुर के लिए भी हवाई सेवा दे रही है।

आदमपुर एयरपोर्ट से उड़ानों की ताज़ा जानकारी, यात्री रखें ध्यान

जालंधर    आदमपुर एयरपोर्ट से उड़ानों के बंद होने को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही खबरें पूरी तरह गलत और भ्रामक है। पंजाब भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद सुशील रिंकू ने आदमपुर एयरपोर्ट प्रबंधन से बात करके इस विषय पर स्पष्ट किया कि एयरपोर्ट के रनवे मेंटेनेंस के कारण 8 महीने तक संचालन बंद रहने की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। यहां से उड़ानों का संचालन जारी है। पूर्व सांसद सुशील रिंकू ने कहा कि आदमपुर एयरपोर्ट के डायरेक्टर पुष्पेंद्र कुमार निराला ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यहां से प्रतिदिन हिंडन, नांदेड़, बेंगलुरु और मुंबई के लिए फ्लाइट्स का नियमित संचालन जारी है। यात्रियों की आवाजाही भी सामान्य बनी हुई है और किसी प्रकार की बाधा नहीं आई है। सुशील रिंकू ने बताया कि एयरपोर्ट प्रशासन ने जानकारी दी है कि गत दिन शाम 5:48 बजे तक लगभग 505 यात्रियों ने आदमपुर एयरपोर्ट से यात्रा की, जो इस बात का प्रमाण है कि एयरपोर्ट पर गतिविधियां पूरी तरह सुचारू रूप से चल रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में किसी प्रकार का मेंटेनेंस कार्य प्रस्तावित होता है, तो यात्रियों को समय रहते इसकी जानकारी दे दी जाएगी ताकि उन्हें असुविधा का सामना न करना पड़े। सुशील रिंकू ने कहा कि एयरपोर्ट प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का आदमपुर एयरपोर्ट के संचालन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। एयरपोर्ट प्रशासन ने भी यात्रियों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें और अफवाहों से बचें।

लावारिस बैग बना सुराग: एयरपोर्ट से 10 करोड़ का गांजा जब्त, चौंकाने वाला खुलासा

गया जी बिहार के गया जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर कस्टम विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई की। इस बीच करीब 10 करोड़ रुपये मूल्य का ‘हाईटेक गांजा’ जब्त किया।  बरामदगी के बाद एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था और जांच प्रक्रिया को और सख्त कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, 14 मार्च को थाई एयरवेज की बैंकॉक से आई एक शेड्यूल फ्लाइट से पहुंचे दो संदिग्ध बैग को कस्टम अधिकारियों ने जांच के दौरान अलग कर लिया था। बैग की स्थिति और उसमें मौजूद सामान को लेकर अधिकारियों को संदेह हुआ, जिसके बाद उन्हें निगरानी में रखा गया। तीन दिनों तक लावारिस पड़े थे बैग चौंकाने वाली बात यह रही कि ये दोनों बैग एयरपोर्ट पर लगातार तीन दिनों तक लावारिस पड़े रहे, लेकिन कोई भी यात्री उन्हें लेने नहीं पहुंचा। इससे कस्टम विभाग का शक और गहरा गया। अंततः अधिकारियों ने नियमों के तहत बैग की तलाशी लेने का फैसला किया। कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये आंकी गई तलाशी के दौरान बैग के अंदर से करीब 10 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक वीड बरामद किया गया। यह गांजा पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि उन्नत तकनीक यानी हाइड्रोपोनिक विधि से तैयार किया जाता है, जिसकी गुणवत्ता और कीमत दोनों काफी अधिक होती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये आंकी गई है। क्या कोई संगठित गिरोह है ? इस बरामदगी के बाद एयरपोर्ट पर हड़कंप मच गया और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट मोड में आ गईं। कस्टम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह मामला अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी से जुड़ा हो सकता है और इसके पीछे संगठित गिरोह की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल कस्टम विभाग पूरे मामले की गहन जांच कर रहा है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन बैग को एयरपोर्ट तक कौन लाया और इन्हें लेने कोई क्यों नहीं पहुंचा। साथ ही अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय कर तस्करी के पूरे नेटवर्क का खुलासा करने की दिशा में कार्रवाई जारी है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला फेज: एक रनवे के साथ होगी शुरुआत

पहले चरण में एक रनवे के साथ संचालित होगा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट सालाना 1.20 करोड़ यात्रियों की क्षमता होगी, पहले चरण में प्रतिदिन औसतन 150 उड़ानें संचालित होंगी  लखनऊ गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर क्षेत्र में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तेजी से अपने संचालन की ओर बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में पहले चरण का करीब 95 प्रतिशत निर्माण कार्य संपन्न हो गया है। शेष कार्य 10 नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। पहले चरण में एयरपोर्ट एक रनवे के साथ संचालित होगा और इसकी वार्षिक यात्री क्षमता 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों की होगी। औसतन प्रतिदिन करीब 150 उड़ानों के संचालन का अनुमान लगाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही यात्रियों की संख्या एक करोड़ को पार करेगी, एयरपोर्ट पर दूसरे रनवे के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। दो रनवे के साथ यह एयरपोर्ट करीब 7 करोड़ यात्रियों को सेवा देने में सक्षम होगा। जेवर एयरपोर्ट के पहले चरण में लगभग 3,300 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जा रहे हिस्से का लोकार्पण किया जाएगा। परियोजना के लिए कुल 6,700 एकड़ भूमि का अधिग्रहण पहले ही किया जा चुका है, जबकि शेष 5,100 एकड़ भूमि अगले तीन महीनों में अधिग्रहित किए जाने की योजना है। एयरपोर्ट के लिए भूमि खरीद पर लगभग 5000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि निर्माण कार्य पर करीब 7000 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। जेवर एयरपोर्ट को देश के सबसे बड़े और आधुनिक हवाई अड्डे के रूप में विकसित करने की योजना है। परियोजना के पूर्ण होने पर इस एयरपोर्ट पर कुल पांच रनवे होंगे और इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 11,750 एकड़ तक पहुंच जाएगा। अंतिम रूप से तैयार होने के बाद एयरपोर्ट की वार्षिक यात्री क्षमता 30 करोड़ यात्रियों तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में शामिल हो सकता है। परियोजना के साथ क्षेत्र में व्यापक आर्थिक और औद्योगिक विकास की भी उम्मीद जताई जा रही है। एयरपोर्ट के आसपास लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। प्रदेश सरकार का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण परिवहन केंद्र के रूप में उभरेगा। इसके संचालन से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एक नया विकल्प उपलब्ध होगा। विशेषज्ञों के अनुसार जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बढ़ते दबाव को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा। साथ ही यह परियोजना उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश और व्यापार के नक्शे पर और मजबूती से स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।