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इजरायल का बेरूत पर हमला! मिसाइल गिरते ही ढही बहुमंजिला इमारत, 6 की मौत

बेरूत इजरायल ने अपने पड़ोसी देश लेबनान पर भीषण हमला किया है। बुधवार को उसने बिना किसी पूर्व सूचना के मिसाइल दाग दी, जिसमें एक बड़ी इमारत देखते ही देखते जमींदोज हो गई। इसका वीडियो भी दुनिया भर में तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना में 6 लोगों के मारे जाने की जानकारी मिली है। यही नहीं इजरायल का कहना है कि वह दक्षिणी लेबनान में हमला करने की तैयारी में था, लेकिन बेरुत में मिसाइल लॉन्च हो गई। ईरान से जारी जंग के बीच लेबनान में सक्रिय उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमले किए थे। 2 मार्च को हुई इस घटना के बाद लेबनान भी जंग में शामिल हो गया और इजरायल ने उस पर लगातार हमले किए हैं।  

MP को बड़ी सौगात: धार में टेक्सटाइल का मेगा सेंटर, MITRA पार्क में रजिस्ट्रेशन शुरू

धार धार जिले के बदनावर स्थित पीएम मेगा मित्र पार्क परियोजना अब निर्णायक मोड़ पर है। निवेशकों के भूखंडों की रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जमीन का स्वामित्व मिलते ही उद्योग स्थापना की तैयारियां तेज हो गई हैं। खास बात यह है कि पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया ऑनलाइन है, जिससे निवेशकों को धार आए बिना ही जमीन पर अधिकार मिल रहा है। प्रमुख समूहों का बड़ा निवेश प्रस्ताव परियोजना के पहले चरण में 25 निवेशकों ने कुल 14,099 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है। इनमें वर्धमान टेक्सटाइल समूह करीब 2,000 करोड़ और जैन कार्ड इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड कंपनी लगभग 2,500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इसके अलावा कई छोटे-बड़े उद्योग समूह भी इस परियोजना से जुड़ने की तैयारी में हैं। टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित होगी परियोजना पीएम मेगा मित्र पार्क का उद्देश्य कपास से लेकर फैब्रिक और तैयार वस्त्र तक की पूरी औद्योगिक श्रृंखला को एक ही स्थान पर विकसित करना है। इससे स्थानीय किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और मालवा-निमाड़ क्षेत्र में टेक्सटाइल उद्योग को नई पहचान मिलेगी। अंतिम चरण में बुनियादी ढांचा और रोजगार की उम्मीद परियोजना क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं का काम भी तेज गति से चल रहा है। पानी की पाइपलाइन, सड़क और बाउंड्रीवाल सहित अन्य निर्माण कार्य अंतिम चरण में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जमीन पर अधिकार मिलने के बाद निवेशक जल्द ही उद्योग निर्माण शुरू करेंगे, जिससे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और धार जिले की आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

सीएम ने कहा, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदेश बना उत्तर प्रदेश, इसी महीने पूरा हो रहा गंगा एक्सप्रेसवे का कार्य

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में ‘नव निर्माण के 9 वर्ष’ पुस्तक के विमोचन पर अपने संबोधन में कहा कि यूपी अब इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदेश बना है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर से अवगत कराते हुए कहा कि देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क यूपी के पास है। सर्वाधिक सात शहरों (लखनऊ, कानपुर, आगरा, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ) में मेट्रो चल रही है। देश की पहली रैपिड रेल मेरठ से दिल्ली के बीच प्रारंभ हो चुकी है। देश का पहला रोपवे वाराणसी में बन रहा है। देश में पहला इनलैंड वाटर वे यूपी (वाराणसी से हल्दिया) में बना है। सीएम ने एयर कनेक्टिविटी का जिक्र करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में 16 एयरपोर्ट संचालित हैं, जिनमें चार अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं। यूपी का पांचवां अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट जेवर में तैयार है। यह देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। हमने 28 मार्च को इसके लोकार्पण के लिए प्रधानमंत्री जी से अनुरोध किया है, उन्हें आमंत्रित किया है। जेवर एयरपोर्ट से अर्थव्यस्था में ग्रोथ होगी और उप्र सरकार को एक लाख करोड़ रुपये की आय होगी।  इसी महीने पूरा हो रहा गंगा एक्सप्रेसवे का कार्य  सीएम योगी ने 2017 के पहले राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर की दुर्दशा का जिक्र किया, फिर अपनी सरकार के कार्यों को गिनाया। उन्होंने कहा कि देश का 55 फीसदी एक्सप्रेसवे यूपी के पास है। गंगा एक्सप्रेसवे इसी महीने पूरा हो रहा है। इसके पश्चात यूपी का शेयर 60 फीसदी हो जाएगा। यूपी ने इंटरस्टेट, इंटरनेशनल, फोरलेन कनेक्टिविटी को बेहतर किया है। मैत्रीद्वार बनाए गए हैं। सीएम ने यूपी में आए परिवर्तनों को भी इंगित किया और कहा कि हर जिला मुख्यालय फोरलेन, ब्लॉक-तहसील मुख्यालय टू लेन-फोर लेन कनेक्टिविटी से जुड़ा है।  सिंगापुर, जापान व जर्मनी से बड़े पैमाने पर आने वाले हैं निवेशक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अभी हम लोग जापान और सिंगापुर की यात्रा पर गए थे। मेरे साथ वित्त व औद्योगिक विकास मंत्री भी थे। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व आईटी मंत्री जर्मनी की यात्रा पर गए थे। उन देशों में सभी वरिष्ठ मंत्री व इंडस्ट्री लीडर्स कहते थे कि हम यूपी में इसलिए आ रहे हैं, क्योंकि वहां जीरो टॉलरेंस व जीरो करप्शन की नीति है। सीएम योगी ने कहा कि यूपी निवेश का बेहतरीन डेस्टिनेशन बनकर उभरा है। सिंगापुर, जापान और जर्मनी से बड़े निवेशक यूपी आने वाले हैं। अभी से पत्र आने प्रारंभ हो गए हैं। सरकार ने इस पर कार्य भी शुरू कर दिया है। जिस प्रदेश में कोई निवेशक नहीं आता था, वहां अब तक 15 लाख करोड़ के निवेश की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी हैं। छह लाख करोड़ रुपये का निवेश ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के लिए तैयार है। हर जिले में निवेश हो रहा है। हमारे पास व्यापक लैंडबैंक है। 34 सेक्टोरल पॉलिसीज, निवेश मित्र व निवेश सारथी जैसी उद्यम सर्मथित व्यवस्थाएं है। प्रदेश इस दिशा में आगे बढ़ा है।  सुरक्षा, पॉलिसी, लैंडबैंक और सरकार की नीयत नहीं होने से 2017 के पहले नहीं आते थे निवेशक सीएम योगी ने कहा कि यूपी में 2017 से पहले निवेशक नहीं आता था, क्योंकि यहां सुरक्षा, पॉलिसी, लैंडबैंक और सरकार की नीयत भी नहीं थी। 1947 से 2017 तक बमुश्किल 14 हजार से कम उद्योग थे, आज राज्य में अब तक 31 हजार बड़े उद्योग लग चुके हैं। यूपी में 96 लाख एमएसएमई यूनिट कार्यरत हैं, जिसमें 3.11 करोड़ लोग कार्यरत हैं। 31 हजार से अधिक उद्योगों में 65 लाख से अधिक लोग कार्य कर रहे हैं। निवेश तब आता है, जब सरकार की नीयत अच्छी होती है।  नोएडा जाने के अपशकुन को हमने उखाड़ फेंका सीएम ने पिछली सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग हमारी आस्था को अंधविश्वास बोलते थे, वे नोएडा नहीं जाते थे। उन्हें लगता था नोएडा जाएंगे तो कुर्सी चली जाएगी। मुझे दायित्व मिला तो मैंने कहा कि नोएडा जाएंगे। लोगों ने कहा कि जो मुख्यमंत्री नोएडा जाते हैं, उनकी कुर्सी चली जाती है। मैंने कहा कि कुर्सी आज चली जाए, लेकिन प्रदेश का भला होगा तो नोएडा जाएंगे और विकास पर लगे बैरियर को हटाएंगे। नोएडा, ग्रेटर नोएडा आज देश के विकास में योगदान दे रहे हैं। यदि हम लोग नोएडा नहीं जाते तो देश में 55 फीसदी मोबाइल की मैन्युफेक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का 60 फीसदी निर्माण यूपी में नहीं हो पाता। नोएडा जाना यूपी के लिए अपशकुन बना दिया गया था, तब के मुख्यमंत्री उसका माध्यम बने थे। हमने कहा कि अपशकुन को उखाड़ फेकेंगे और इसे विकास में बाधा नहीं बनने देंगे।

पूर्ण बहुमत से आगे बढ़ी भाजपा: राज्यसभा में NDA की ताकत 140 के पार

नई दिल्ली भाजपा को 2024 के लोकसभा चुनाव में 240 सीटें मिली थीं तो माना गया था कि यह उसके लिए झटका है। यही नहीं 2014 और 2019 के आम चुनाव के मुकाबले नई बनने वाली सरकार के भविष्य पर भी सवाल उठे थे। ऐसा इसलिए क्योंकि पहली बार पीएम नरेंद्र मोदी की लीडरशिप में भाजपा को गठबंधन पर निर्भर रहते हुए सरकार चलानी थी। इन सब आशंकाओं के बाद भी भाजपा और उसके नेतृत्व में एनडीए ने जिस तरह से सफलताएं हासिल की हैं, वह चौंकाने वाला है। भाजपा ने महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार और दिल्ली जैसे राज्यों के चुनाव 2024 के झटके के बाद ही जीते हैं। यही नहीं अब इसका असर राज्यसभा में भी दिखा है और उसकी संख्या पहली बार 100 के पार हुई है। फिर एनडीए भी पहली बार 141 सीटों पर पहुंच गया है। 250 सदस्यों वाली राज्यसभा में इतना एनडीए के पक्ष में इतना बड़ा बहुमत आना उसके लिए बड़ी सफलता है। खासतौर पर हाल ही में खाली हुईं 37 राज्यसभा सीटों में से 22 पर जीत हासिल करके एनडीए ने अपने स्कोर को 135 से बढ़ाकर 141 कर लिया है। ओडिशा, बिहार में भाजपा ने अतिरिक्त सीटें हासिल कर ली हैं। भाजपा के पास उच्च सदन में 101 निर्वाचित सांसद हैं, जबकि 5 मनोनीत सांसद भी उसके पक्ष में हैं। ऐसी स्थिति में उसके यहां 106 सदस्य हो जाते हैं। एनडीए में भाजपा के बाद एआईएडीएमके और जेडीयू के 5-5 सांसद हैं। फिर महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी एनसीपी के 4 सांसद हो गए हैं तो वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना के भी 2 सदस्य हैं। आंध्र प्रदेश में सत्ता चला रही टीडीपी के पास भी 2 राज्यसभा मेंबर हैं। भाजपा और एनडीए की इस ताकत से यह स्पष्ट है कि अब लोकसभा के साथ ही राज्यसभा में भी सत्ताधारी गठबंधन किसी भी बिल को आसानी से पास कराने की स्थिति में है। भले ही बीते दो कार्यकालों के मुकाबले लोकसभा में भाजपा और एनडीए के पास पहले मुकाबले कम सीटें हैं, लेकिन राज्यसभा में उसकी ताकत निरंतर बढ़ रही है। इससे स्पष्ट है कि 2029 में भी एनडीए के पास अपरहैंड रहेगा। अब यदि INDIA ब्लॉक की बात करें तो उसकी धुरी कही जाने वाली कांग्रेस के पास 29 सीटें हो गई हैं। भाजपा के मुकाबले यह संख्या एक तिहाई से भी कम है। इसके साथ ही विपक्ष की कुल सीटों की संख्या 62 है। विपक्ष में भी डीएमके को झटका लगा है, जिसके सांसदों की संख्या राज्यसभा में अब 8 ही रह गई है, जो पहले 10 हुआ करती थी। इसी तरह आरजेडी के सांसद भी अब 5 के मुकाबले तीन ही रह गए हैं।  

कचरा मुक्त होगा आदमपुर खंती! 55 करोड़ की योजना पर जल्द लगेगी मुहर

 भोपाल सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सख्ती के बाद नगर निगम प्रशासन आदमपुर खंती में वर्षों से जमा लेगेसी वेस्ट (पुराना कचरा) के निपटान को लेकर तेजी दिखा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इस परियोजना की राह अब भी आसान नहीं दिख रही। जिंसी स्थित स्लॉटर हाउस में हुए हालिया घटनाक्रम के बाद महापौर परिषद (एमआइसी) भी इस संवेदनशील मुद्दे पर बेहद सतर्क हो गई है। यही कारण है कि कचरा निपटान के प्रस्ताव को एमआइसी बैठक में मंजूरी नहीं मिली और अब इसे परिषद की बैठक में अंतिम निर्णय के लिए रखा गया है। 23 मार्च को परिषद बैठक में होगा बड़ा फैसला     नगर निगम की बजट सत्र की अहम बैठक सोमवार, 23 मार्च को आइएसबीटी स्थित परिषद सभागार में सुबह 11:30 बजे आयोजित होगी। इस बैठक पुनरीक्षित बजट और आगामी वित्तीय वर्ष का प्राक्कलन बजट पेश किया जाएगा और आदमपुर खंती के लेगेसी वेस्ट का मुद्दा भी केंद्र में रहेगा।      यह मामला शहर के लिए लंबे समय से “गले की फांस” बना हुआ है, जिस पर अब निर्णायक फैसला लेने का दबाव बढ़ गया है। एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश      आदमपुर खंती में फैले कचरे के निपटान को लेकर एनजीटी और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ही समय-सीमा तय कर चुके हैं। निर्देशों का पालन न करने पर एनजीटी ने नगर निगम पर 1.80 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है।      करीब 33 एकड़ क्षेत्र में फैले 6,47,825 मीट्रिक टन कचरे को हटाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह मुद्दा बेहद गंभीर है। नई तकनीक से होगा निपटान    कचरे के निष्पादन के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया में मेसर्स सौराष्ट्र इनवायरो प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने 55.54 करोड़ रुपये की न्यूनतम बोली लगाई है। खास बात यह है कि इस बार काम एकमुश्त राशि पर कराया जाएगा, जिससे खर्च बढ़ने की संभावना कम रहेगी। इस परियोजना में बायो-रेमेडिएशन और बायो-माइनिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर कचरे को खत्म किया जाएगा और जमीन को फिर उपयोग के योग्य बनाया जाएगा। एमआइसी में नहीं बनी सहमति यह प्रस्ताव पहले भी दो बार एमआइसी की बैठकों में आ चुका है, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। जिंसी स्लॉटर हाउस के घटनाक्रम के बाद परिषद और अधिक सतर्क हो गई है। अब यह मामला परिषद बैठक में रखा जाएगा, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा। पहले के प्रयास रहे नाकाम नगर निगम पहले भी आदमपुर खंती के कचरे के निपटान के लिए कई प्रयास कर चुका है, लेकिन हर बार असफलता हाथ लगी। नवंबर 2023 में ग्रीन रिसोर्स सालिड वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी को कार्यादेश दिया गया था, लेकिन तय समय सीमा 30 मई 2024 तक काम पूरा नहीं होने पर अनुबंध निरस्त कर जुर्माना लगाया गया। इसके बाद जून 2025 में सुसज्जा जेवी आनंद ऑटो को काम सौंपा गया, लेकिन एजेंसी ने काम शुरू ही नहीं किया, जिससे अगस्त 2025 में यह अनुबंध भी रद्द कर दिया गया। शहर में नए पार्किंग स्थल भी होंगे शुरू बैठक में ट्रैफिक दबाव को कम करने और निगम की आय बढ़ाने के लिए 14 नए पार्किंग स्थल शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा।  इनमें सुभाष नगर, केंद्रीय विद्यालय, बोर्ड ऑफिस चौराहा, डीआरएम ऑफिस और अलकापुरी जैसे मेट्रो स्टेशनों के आसपास की जगहें शामिल हैं। साथ ही न्यू मार्केट और मनीषा मार्केट जैसे व्यस्त क्षेत्रों में भी पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। पुराने वाहनों को हटाने की तैयारी नगर निगम अपने बेड़े से 145 कंडम वाहनों को हटाने की तैयारी कर रहा है। इनमें से 143 वाहन 15 साल पूरे कर चुके हैं, जबकि दो वाहन खराब स्थिति के कारण हटाए जाएंगे।  

पानी पर नया संग्राम: पंजाब ने उठाया ऐतिहासिक समझौते का मुद्दा, राजस्थान से भारी रकम की मांग

चंडीगढ़ पंजाब ने राजस्थान को दिए जा रहे पानी पर ₹1.44 लाख करोड़ के संभावित भुगतान का मुद्दा उठाया है। 1920 के समझौते, सिंचाई सुधार और बढ़ते जल विवाद ने सियासी माहौल गरमा दिया है। ऐतिहासिक समझौते से उठा नया विवाद चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सिंचाई और जल प्रबंधन से जुड़े आंकड़े पेश करते हुए राजस्थान को दिए जा रहे पानी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि पानी की आपूर्ति की शुरुआत 1920 में बीकानेर रियासत और बहावलपुर के बीच हुए समझौते से हुई थी, जो बाद में राजस्थान तक विस्तारित हुई। उस दौर में प्रति एकड़ के हिसाब से भुगतान तय था और यह व्यवस्था 1960 तक जारी रही। 1960 के बाद खत्म हुआ भुगतान सिस्टम मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 1960 के बाद यह भुगतान प्रणाली समाप्त हो गई और नए तंत्र के लागू होने के बाद दोनों राज्यों ने इस विषय पर कोई मांग नहीं उठाई। अब पुराने रिकॉर्ड के आधार पर किए गए आकलन के अनुसार, 1960 से 2026 तक की अवधि में यह बकाया राशि करीब ₹1.44 लाख करोड़ तक पहुंचती है। समझौते के आधार पर भुगतान की मांग सरकार का कहना है कि यदि राजस्थान अब भी उसी ऐतिहासिक समझौते के तहत पानी ले रहा है, तो उसे भुगतान भी करना चाहिए। अन्यथा समझौते को समाप्त करने या पानी की आपूर्ति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता हो सकती है। इस मुद्दे को अब उच्च स्तर पर उठाने के संकेत दिए गए हैं। बिना भुगतान के पानी सप्लाई पर सवाल मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्तमान में राजस्थान फीडर से लगभग 18,000 क्यूसेक पानी बह रहा है, जबकि इसके बदले कोई आर्थिक मुआवजा नहीं मिल रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि पहले भुगतान क्यों किया जाता था और अब यह प्रक्रिया क्यों बंद हो गई। सिंचाई क्षेत्र में बड़े बदलाव का दावा राज्य सरकार ने सिंचाई क्षेत्र में बड़े सुधारों का दावा किया है। 2022 में सरकार बनने के समय जहां नहरों के पानी का उपयोग केवल 26.5 प्रतिशत था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 78 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिससे करीब 5.8 मिलियन एकड़ भूमि को लाभ मिला है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर हजारों करोड़ का निवेश सरकार ने बताया कि लगभग ₹6,700 करोड़ खर्च कर चार वर्षों में सिंचाई बजट तीन गुना बढ़ाया गया। इस दौरान 13,938 किलोमीटर नई नहरें बनाई गईं और 18,000 किलोमीटर से अधिक पुराने ढांचे का पुनर्निर्माण किया गया। गांवों तक पहली बार पहुंचा नहरी पानी पंजाब के 1,454 गांव ऐसे थे जहां आजादी के बाद भी नहरी पानी नहीं पहुंचा था। अब पहली बार इन गांवों तक पानी पहुंचाया गया है। कंडी क्षेत्र में 1,500 किलोमीटर भूमिगत पाइपलाइन बहाल कर 24,000 एकड़ जमीन को सिंचाई से जोड़ा गया। “गायब” नहरों का पुनर्जीवन सरकार ने उन नहरों को भी खोजकर चालू किया जो कागजों में मौजूद थीं लेकिन जमीन पर नहीं थीं। तरनतारन की सरहाली नहर का उदाहरण देते हुए बताया गया कि खुदाई में दबे ढांचे मिले और लगभग 22 किलोमीटर नहर को फिर से चालू किया गया। भूजल स्तर में सुधार और परियोजनाओं की सफलता नहरी पानी बढ़ने से भूजल पर दबाव कम हुआ है। गुरदासपुर के कई इलाकों में जल दोहन की दर आधे से ज्यादा घट गई है और 57 प्रतिशत से अधिक कुओं में जल स्तर 0 से 4 मीटर तक बढ़ा है। 25 साल से लंबित शाहपुर कंडी डैम परियोजना ₹3,394.49 करोड़ की लागत से पूरी हो चुकी है, जिससे सिंचाई के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा 26 नए पर्यटन स्थलों का विकास किया गया है। जल विवाद के सियासी संकेत मुख्यमंत्री के बयान से साफ संकेत मिलते हैं कि पंजाब और राजस्थान के बीच पानी और भुगतान को लेकर विवाद फिर से उभर सकता है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेगी और जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे को केंद्र स्तर पर उठाया जाएगा।

वायलेंस और गालियों पर चली कैंची: धुरंधर 2 को 21 कट्स के बाद मिली हरी झंडी

मुंबई,  धुरंधर 2 को CBFC ने 21 कट्स के बाद A सर्टिफिकेट दिया। रणवीर सिंह की इस फिल्म में वायलेंट सीन और गालियों पर कैंची चली। फिल्म का रनटाइम करीब 3 घंटे 50 मिनट ही रखा गया है। धुरंधर 2 रिलीज से पहले ही सुर्खियों में बनी हुई है। रणवीर सिंह स्टारर इस फिल्म को लेकर जहां फैंस में जबरदस्त उत्साह है, वहीं अब सेंसर बोर्ड के फैसले ने भी इसे चर्चा का विषय बना दिया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने फिल्म को A सर्टिफिकेट दिया है, लेकिन इसके लिए मेकर्स को कुल 21 कट्स और कई अहम बदलाव करने पड़े हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, सेंसर बोर्ड ने फिल्म के करीब 1 मिनट 34 सेकंड के फुटेज पर कैंची चलाई है। खासतौर पर फिल्म में दिखाए गए वायलेंट सीन्स पर सख्ती बरती गई है। कुछ सीन, जिनमें अत्यधिक हिंसा दिखाई गई थी, उन्हें छोटा या एडिट किया गया है। एक सीन में हथौड़े से सिर पर वार दिखाया गया था, जिसे कम किया गया, वहीं सीमेंट ब्लॉक से हमला करने और आंखों को कुचलने जैसे दृश्यों में भी कटौती की गई है। धुरंधर 2 के कई डायलॉग्स को किया गया म्यूट सबसे बड़ा बदलाव उस सीन में किया गया है, जिसमें सिर काटने और मारपीट का लंबा दृश्य था। इस हिस्से से लगभग 24 सेकंड हटाए गए हैं। इसके अलावा फिल्म में इस्तेमाल की गई गालियों और अपशब्दों पर भी बोर्ड ने आपत्ति जताई है। कई डायलॉग्स को म्यूट किया गया है या उन्हें बदला गया है ताकि फिल्म को प्रमाणन मिल सके। सिर्फ वायलेंस ही नहीं, बल्कि फिल्म के कुछ किरदारों के नाम, सबटाइटल्स और एक शहर के नाम को भी संशोधित करने के निर्देश दिए गए हैं। धुरंधर 2 को मिली रिलीज की मंजूरी मेकर्स को फिल्म की शुरुआत में ‘डिस्टर्बिंग कंटेंट’ और ‘ड्रग्स’ से जुड़े डिस्क्लेमर जोड़ने को कहा गया है। फिल्म के कुछ दृश्यों में दिखाए गए न्यूज फुटेज और राजनीतिक संदर्भों के लिए आधिकारिक अनुमति पत्र भी जमा करना पड़ा। वहीं, जानवरों से जुड़े दृश्यों के लिए एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) का सर्टिफिकेट भी प्रस्तुत किया गया है। इन सभी बदलावों के बाद फिल्म को आखिरकार रिलीज की मंजूरी मिल गई है। कब होगा धुरंधर 2 का पेड प्रीव्यू दिलचस्प बात यह है कि इतने कट्स के बावजूद फिल्म के रनटाइम पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म की कुल लंबाई लगभग 3 घंटे 50 मिनट है, जो इसे एक लंबी फिल्म बनाती है। बताया जा रहा है कि धुरंधर 2 का पेड प्रीव्यू 18 मार्च की शाम से शुरू होगा, जबकि यह 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। एडवांस बुकिंग में शानदार रिस्पॉन्स के चलते धुरंधर 2 पहले ही कई रिकॉर्ड तोड़ने की ओर बढ़ रही है।  

31 मार्च तक हर जिले को दिया गया सभी आईडी बनाने का लक्ष्य

लखनऊ  प्रदेश के किसानों की आय बढ़ाने एवं सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से अभियान चलाकर फार्मर रजिस्ट्री (फार्मर आईडी) बनाई जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के किसानों की शत प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने के लिए 1 जनवरी से अभियान चलाने के निर्देश दिए थे, यह 31 मार्च तक जारी रहेगा। ऐसे में किसानों के घर-घर जाकर फार्मर आईडी बनाई जा रही है। वहीं रामपुर जिला प्रशासन ने निर्धारित तिथि से पहले ही किसानों की 100 प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने का लक्ष्य पूरा कर लिया है। इसी के साथ रामपुर जिला प्रशासन ने शत-प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने में पहला स्थान प्राप्त किया है जबकि दूसरे स्थान पर गाजियाबाद और तीसरे स्थान पर अंबेडकरनगर हैं। उत्तर प्रदेश में 2,88,70,495 किसानों की फार्मर आईडी बनाने का लक्ष्य है। इसके सापेक्ष अब तक 1,99,42,798 फार्मर रजिस्ट्री बनाई जा चुकीं हैं।  सांस्कृतिक कार्यक्रम, खुली चौपाल, वॉल पेंटिंग से हासिल किया लक्ष्य रामपुर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप जिले में शत-प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने के लिए 1 जनवरी से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में लक्ष्य को हासिल करने के लिए अन्नदाताओं को जागरूक करने के लिए किसान गोष्ठी, गांवों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, होर्डिंग, ग्राम पंचायत स्तर पर खुली चौपाल का आयोजन किया गया। इसके साथ ही वॉल पेंटिंग एवं प्रचार वाहन के जरिये प्रचार-प्रसार किया गया। साथ ही राजस्व, कृषि, पंचायती राज, ग्राम्य विकास एवं गन्ना विभाग के कर्मचारियों को किसानों के घर-घर जाकर फार्मर आईडी बनाने के निर्देश दिए गये। जिलाधिकारी ने बताया कि वह खुद प्रत्येक सप्ताह अभियान की समीक्षा करते हैं। इस दौरान अच्छा कार्य करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया गया जबकि कम प्रगति वाले कर्मचारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की गई।  टॉप टेन में औरैया, बाराबंकी, हरदोई और कन्नौज ने जगह बनाई डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि रामपुर को 31 मार्च तक फार्मर रजिस्ट्री का कुल लक्ष्य 2,09,828 निर्धारित किया गया था। इसके सापेक्ष 17 मार्च तक शत प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया। उन्होंने बताया कि रामपुर ने लक्ष्य के सापेक्ष शत प्रतिशत 2,09,828 फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है। इसी के साथ रामपुर ने प्रदेश में शत प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने में पहला स्थान प्राप्त किया है।  उन्होंने बताया कि इससे पहले भी रामपुर प्रदेश में सर्वप्रथम 50 प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री को पूर्ण कर प्रथम पुरुस्कार प्राप्त कर चुका है। इसके अलावा गाजियाबाद ने निर्धारित लक्ष्य 38,909 के सापेक्ष अब तक 36,598 फार्मर आईडी बनाकर पूरे प्रदेश में दूसरा तथा अंबेडकरनगर ने 31 मार्च तक निर्धारित लक्ष्य 3,42,847 के सापेक्ष 3,10,145 फार्मर आईडी बनाकर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। वहीं टॉप टेन में औरैया, बाराबंकी, फर्रुखाबाद, हरदोई, कन्नौज, मीरजापुर और बिजनौर ने अपनी जगह बनाई है।  यह हैं फार्मर रजिस्ट्री के लाभ   किसान सम्मान निधि योजना का बिना बाधा लाभ प्राप्त होगा।   कृषकों को उर्वरक सुविधाजनक एवं निर्धारित मूल्य पर प्राप्त होगा।   किसान क्रेडिट कार्ड प्राप्त करने में अभिलेखों के सत्यापन की बाध्यता समाप्त होगी।   राज्य एवं केन्द्र सरकार की नवीन योजना में शामिल होने के लिए बार-बार अभिलेखों के सत्यापन से मुक्ति मिलेगी।   एग्रीस्टैक में सम्मिलित होने पर डिजीटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से एमएसपी पर उत्पादों की बिक्री सुविधाजनक एवं त्वरित होगी।

बर्थ एनिवर्सरी : रोमांटिक हीरो के रूप में पहचान बनाई शशि कपूर ने

मुंबई, बॉलीवुड में शशि कपूर का नाम एक ऐसे अभिनेता के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने अपने रोमांटिक अभिनय के जरिये लगभग तीन दशक तक सिने प्रेमियों का भरपूर मनोरंजन किया। 18 मार्च 1938 को जन्में शशि कपूर मूल नाम बलबीर राज कपूर का उनका रूझान बचपन से ही फिल्मों की ओर था और वह अभिनेता बनना चाहते थे।उनके पिता पृथ्वीराज कपूर और भाई राजकपूर और शम्मी कपूर फिल्म इंडस्ट्री के जाने माने अभिनेता थे। उनके पिता यदि चाहते तो वह उन्हें लेकर फिल्म का निर्माण कर सकते थे लेकिन उनका मानना था कि शशि कपूर संघर्ष करें और अपनी मेहनत से अभिनेता बनें।शशि कपूर ने अपने सिने कैरियर की शुरूआत बाल कलाकार के रूप में की। चालीस के दशक में उन्होंने कई फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में काम किया। इनमें 1948 में प्रदर्शित फिल्म आग और 1951 में प्रदर्शित फिल्म आवारा शामिल है, जिसमें उन्होंने अभिनेता राजकपूर के बचपन की भूमिका निभाई। पचास के दशक में शशि कपूर अपने पिता के थियेटर से जुड़ गये। इसी दौरान भारत और पूर्वी एशिया की यात्रा पर आई बर्तानवी नाटक मंडली शेक्सपियेराना से वह जुड़ गये, जहां उनकी मुलाकात मंडली के संचालक की पुत्री जेनिफर केडिल से हुई। वह उनसे प्यार कर बैठे और बाद में उनसे शादी कर ली। शशिकपूर ने अभिनेता के रूप में सिने कैरियर की शुरूआत वर्ष 1961 में यश चोपड़ा की फिल्म धर्म पुत्र से की।इसके बाद उन्हे विमल राय की फिल्म प्रेम पत्र में भी काम करने का अवसर मिला लेकिन दुर्भाग्य से दोनों ही फिल्में टिकट खिड़की पर असफल साबित हुयीं। इसके बाद शशि कपूर ने मेंहदी लगी मेरे हाथ, होली डे इन बांबे और बेनेजीर जैसी फिल्मों में भी काम किया लेकिन ये फिल्में भी टिकट खिड़की पर बुरी तरह नकार दी गई। वर्ष 1965 शशि कपूर के सिने करियर का अहम वर्ष साबित हुआ। इस वर्ष उनकी फिल्म जब जब फूल खिले प्रदर्शित हुई। बेहतरीन गीत, संगीत और अभिनय से सजी इस फिल्म की जबर्दस्त कामयाबी ने ने शशि कपूर को भी .स्टार. के रूप में स्थापित कर दिया। वर्ष 1965 मे शशि कपूर के सिने कैरियर की एक और सुपरहिट फिल्म फिल्म वक्त प्रदर्शित हुई। इस फिल्म में उनके सामने बलराज साहनी, राजकुमार और सुनील दत्त जैसे नामी सितारे थे। इसके बावजूद वह अपने अभिनय से दर्शको का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहे।इन फिल्मों की सफलता के बाद शशि कपूर की छवि रोमांटिक हीरो की बन गई और निर्माता-निर्देशकों ने अधिकतर फिल्मों में उनकी रूमानी छवि को भुनाया 1वर्ष 1965 से 1976 के बीच कामयाबी के सुनहरे दौर में शशि कपूर ने जिन फिल्मों में काम किया, उनमें अधिकतर फिल्में हिट साबित हुयीं।  

बड़ी कार्रवाई: कार से 21 किलो चांदी बरामद, वैध दस्तावेज न होने पर जब्ती

महासमुंद जिले में वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। महासमुंद पुलिस ने एक कार से भारी मात्रा में चांदी के आभूषण जब्त किए हैं। जानकारी के मुताबिक, कोमाखान थाना क्षेत्र के टेमरी नाका के पास पुलिस नियमित वाहन जांच कर रही थी। इसी दौरान एक संदिग्ध कार (CG 04 PY 7882) को रोका गया। तलाशी लेने पर कार में रखे तीन बैगों से 54 लाख 60 हजार रुपये कीमत के 21.089 किलोग्राम चांदी के आभूषण बरामद हुए। कार में सवार विरेन्द्र प्रधान (50 वर्ष) – मठपारा रायपुर, टिकेश कुमार साहू (38 वर्ष) – उरला रायपुर से जब आभूषणों के परिवहन से संबंधित दस्तावेज मांगे गए तो वे कोई वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सके। पुलिस ने दोनों व्यक्तियों को धारा 94 BNSS के तहत नोटिस दिया और गवाहों की उपस्थिति में आभूषणों और कार को जब्त कर लिया। प्राथमिक पूछताछ में सामने आया है कि दोनों आरोपी ओडिशा से रायपुर की ओर जा रहे थे। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि चांदी के आभूषण कहां से लाए जा रहे थे और उनका उद्देश्य क्या था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे की जांच के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।