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भोपाल के गोमांस तस्करी मामले में असलम चमड़ा को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गोमांस तस्करी केस में 70 दिन बाद बड़ा अपडेट सामने आया है। ट्रक भरकर मुख्य आरोपी असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा को सेशन कोर्ट से जमानत मिल गई है। कोर्ट की तरफ से जांच में कई कमियों का हवाला दिया गया है। बताया जा रहा है कि, असलम कुरैशी की तरफ से कोर्ट में साबित किया गया कि, उसके ट्रक में गोमांस नहीं, बल्कि भैंस का मास था। इसप कोर्ट ने उन्हें 35 हजार रुपए के मुचलके पर जमानत मिली है। असलम चमड़ा के अधिवक्ता ने भोपाल जिला अदालत में कहा कि, जो मांस सैंपल के लिए हैदराबाद भेजा गया था। उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें, लेकिन पुलिस ऐसा नहीं कर सकी। सत्र न्यायालय में द्वितीय जमानत आवेदन का हिंदू संगठन ने कड़ा विरोध किया था। भानु हिंदू ने न्यायमूर्ति पंकज कुमार जैन की कोर्ट में उपस्थित होकर आपत्ति दर्ज कराई थी। मथुरा लैब की रिपोर्ट में गोमांस होने की पुष्टि हुई थी, लेकिन हैदराबाद की लैब की रिपोर्ट पेश ही नहीं हुई।. क्या है मामला? हिंदू संगठनों ने पुलिस मुख्यालय के सामने दिसंबर 2025 में एक ट्रोक रोका, जिसमें 26 टन मांस भरा था तो उसमें 26 टन गोमांस होने का दावा किया गया था। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर सैंपल जांच के लिए भेज दिए। इसके बाद प्रशासन ने भोपाल का स्लॉटर हाउस भी बंद करवा दिया। असलम कुरैशी पर आरोप लगा कि, स्लॉटर हाउस में गोवंश का अवैध कत्ल कर मांस मुंबई भेजा जा रहा था। फॉरेंसिक रिपोर्ट में गोमांस की पुष्टि के बाद आरोपी और उसके ड्राइवर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इस मामले में एसआईटी पहले ही 500 पन्नों का चालान अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर चुकी है। जमानत के बाद हिंदू संगठनों का विरोध हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने सेशन कोर्ट से असलम चमड़े को कोर्ट से जमानत मिलने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि, असलम चमड़े जैसे हत्यारे को इतनी आसानी से जमानत दे दी गई। ये एक सोचने वाला विषय है कि, सीट की रिपोर्ट किस प्रकार प्रस्तुत की गई? सिर्फ ड्राइवर और असलम चमड़े को मुजरिम बनाया गया, बाकी सहयोगियों को छोड़ दिया गया। इसमें सही तरीके से शासन ने अपना पक्ष नहीं रखा। हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ये मांग करता है कि, असलम पर तुरंत रासुका की कार्रवाई हो, वरना हम जन आंदोलन करेंगे।

शिक्षा में नई पहल: हरियाणा में 9वीं-10वीं के छात्रों के लिए तीसरी भाषा जरूरी

भिवानी. हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत त्रि-भाषाई सूत्र लागू करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही हरियाणा देश का पहला ऐसा बोर्ड बन गया है जिसने इस नीति को स्कूल स्तर पर लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। नई व्यवस्था के अनुसार अब कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों को हिन्दी और अंग्रेजी के साथ एक अतिरिक्त भाषा पढ़नी होगी। यह तीसरी भाषा संस्कृत, उर्दू या पंजाबी में से चुननी होगी और इसे अनिवार्य बनाया गया है। बोर्ड अध्यक्ष डा. पवन कुमार और उपाध्यक्ष सतीश शाहपुर ने बताया कि इस फैसले से विद्यार्थियों के भाषाई कौशल में सुधार होगा और उन्हें अन्य राज्यों में रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। नई प्रणाली के तहत विद्यार्थियों को अब कुल 7 विषय पढ़ने होंगे, जिनमें 6 अनिवार्य और 1 वैकल्पिक विषय शामिल होगा। पास होने के लिए 6 विषयों में उत्तीर्ण होना जरूरी होगा। इसके साथ ही 'बैस्ट फाइव' की जगह अब 'बैस्ट सिक्स' फॉर्मूला लागू किया जाएगा। शारीरिक रूप से अक्षम विद्यार्थियों को 2 अनिवार्य भाषाओं में से एक चुनने की छूट दी जाएगी। साथ ही विशेष विद्यालयों में इंडियन साइन लैंग्वेज को अलग विषय के रूप में लागू किया जाएगा। बोर्ड कक्षा 9वीं से 12वीं तक के लिए स्मार्ट पाठ्य पुस्तकें प्रकाशित करेगा। इन किताबों में क्यू. आर. कोड दिए जाएंगे जिन्हें स्कैन करने पर संबंधित विषय का वीडियो लैक्चर सीधे मोबाइल पर उपलब्ध होगा।

सरकार का बड़ा फैसला: अब राशन कार्ड वालों को मिलेगा 3 महीने का स्टॉक एक साथ

चंडीगढ़. केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत देश के 82 करोड़ जरूरतमंद लोगों को मिलने वाले मुफ्त गेहूं और चावल की योजना में बड़ा फैसला लिया है। अब अप्रैल 2026 से जून 2026 (3 महीने) तक का राशन एक साथ देने के लिए पत्र जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आमतौर पर हर महीने राशन दिया जाता है, लेकिन पंजाब में पहले से ही 3 महीने का राशन एकमुश्त दिया जाता है। पंजाब के करीब 18 हजार डिपो होल्डर साल में 4 बार राशन वितरित करते हैं। केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार आगामी खरीद सीजन को ध्यान में रखते हुए तीन महीने का कोटा तुरंत उठाने और वितरित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह मुफ्त राशन प्रति सदस्य 5 किलो के हिसाब से दिया जाता है, जिसकी सप्लाई देशभर में करीब 6 लाख डिपो होल्डर बायोमेट्रिक मशीनों के जरिए करते हैं। लोगों में खुशी की लहर तीन महीने का मुफ्त कोटा जारी होने पर प्रतिक्रिया देते हुए ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय वाइस प्रेसिडेंट गुरजिंदर सिंह सिद्धू और पंजाब अध्यक्ष करमजीत सिंह अड़ेचा ने कहा कि इस फैसले से देश के 82 करोड़ लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे महंगाई पर भी नियंत्रण रहेगा और लोगों को गेहूं व चावल आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। 

यात्रा से पहले देखें अपडेट: 14 ट्रेनें कैंसिल, गोंदिया में ट्रैक मरम्मत का असर

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ से होकर गुजरने वाली 14 ट्रेनें 5 अप्रैल से 24 अप्रैल तक अलग-अलग तारीखों में रद्द कर दी गई हैं। इनमें 10 एक्सप्रेस और 4 पैसेंजर ट्रेनें शामिल हैं, जिनमें बिलासपुर, रायपुर और गोंदिया मार्ग की ट्रेनें हैं। यह रद्दीकरण गोंदिया स्टेशन के प्लेटफॉर्म 3 और अप मेन लाइन नंबर 5 पर मरम्मत के कारण किया गया है, जिससे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश और दिल्ली के यात्रियों को परेशानी हो सकती है। 18030 – शालीमार-लोकमान्य तिलक टर्मिनल एक्सप्रेस (4 अप्रैल से 24 अप्रैल) 18029 – लोकमान्य तिलक टर्मिनल-शालीमार एक्सप्रेस (6 अप्रैल से 26 अप्रैल) 18237 – कोरबा-अमृतसर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस (5 अप्रैल से 25 अप्रैल) 18238 – अमृतसर-बिलासपुर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस (7 अप्रैल से 27 अप्रैल) 12410 – हज़रत निजामुद्दीन-रायगढ़ गोंडवाना एक्सप्रेस (2, 4, 6-9, 11, 13-16, 18, 20-22 अप्रैल) 12409 – रायगढ़-हज़रत निजामुद्दीन गोंडवाना एक्सप्रेस (4, 6, 8-11, 13, 15-18, 20, 22-24 अप्रैल) 12101 – लोकमान्य तिलक टर्मिनल-शालीमार एक्सप्रेस (4, 6, 7, 10, 11, 13, 14, 17, 18, 20, 21 अप्रैल) 12102 – शालीमार-लोकमान्य तिलक टर्मिनल एक्सप्रेस (6, 8, 9, 12, 13, 15, 16, 19, 20, 22, 23 अप्रैल) 12807 – विशाखापत्तनम-हज़रत निजामुद्दीन एक्सप्रेस (5, 7, 8, 9, 11, 12, 14-16, 18, 19, 21-23 अप्रैल) 12808 – हज़रत निजामुद्दीन-विशाखापत्तनम एक्सप्रेस (7, 9, 10, 11, 13, 14, 16, 17, 18, 20, 21, 23-25 अप्रैल) 68815 – बल्लारशाह-गोंदिया मेमू पैसेंजर (5 अप्रैल से 25 अप्रैल) 68816 – गोंदिया-बल्लारशाह मेमू पैसेंजर (5 अप्रैल से 25 अप्रैल) 78805 – गोंदिया-कटंगी डेमू पैसेंजर (5 अप्रैल से 25 अप्रैल) 78806 – कटंगी-गोंदिया डेमू पैसेंजर (5 अप्रैल से 25 अप्रैल)

सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर सीएम ने की दिन की शुरुआत, प्रदेशभर में आयोजित किए गए भव्य कार्यक्रम

भोपाल  हिंदू नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, विक्रम संवत 2083 और गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर दिन की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए भारतीय संस्कृति और उज्जैन की गौरवशाली परंपरा को याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन सदियों से धर्म, ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित परंपराएं आज भी समाज को प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उज्जैन में आयोजित हो रहा विक्रमोत्सव अब राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय पंचांग और सभी प्रमुख पर्व विक्रम संवत पर आधारित हैं, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसी क्रम में 19 मार्च 2026 को सृष्टि आरंभ दिवस और वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में सुबह 10 बजे सूर्य उपासना और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  मंत्री प्रभार वाले जिलों में आयोजित कार्यक्रम में होंगे शामिल  राज्यभर में आयोजित कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर में मौजूद रहेंगे, जबकि उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा मंदसौर और राजेंद्र शुक्ला रीवा में कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इसके अलावा कई कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री अपने-अपने आवंटित जिलों में कार्यक्रमों की अगुवाई करेंगे। विक्रमोत्सव–2026 का आयोजन 15 फरवरी से शुरू होकर 19 मार्च तक चलेगा। इस दौरान उज्जैन में विभिन्न सांस्कृतिक, साहित्यिक, धार्मिक और वैचारिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। देशभर से आए कलाकार, विद्वान और सांस्कृतिक साधक अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय परंपरा की समृद्ध झलक प्रस्तुत कर रहे हैं। भारतीय परंपरा को जन जन तक पहुंचाने का प्रयास  उत्सव के अंतर्गत संगीत, नृत्य, नाटक, लोककला और संगोष्ठियों के जरिए सम्राट विक्रमादित्य की परंपरा और भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों और पर्यटकों की भागीदारी से उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान और भी सशक्त रूप में उभरकर सामने आ रही है। बता दें कि विक्रमोत्सव 2025 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें “लॉन्गस्टैंडिंग आईपी ऑफ द ईयर” और WOW अवॉर्ड शामिल हैं। आने वाले समय में यह उत्सव भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार का सशक्त माध्यम बनेगा। 

सीएम योगी ने 10 जिलों के अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी, रामपुर, गोरखपुर, आगरा और प्रयागराज पर फोकस

लखनऊ यूपी में आने वाले दिनों में एक के बाद एक बड़े धार्मिक पर्वों को देखते हुए सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर साफ संदेश दिया कि कानून-व्यवस्था से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने प्रदेश के 10 संवेदनशील जिलों के अधिकारियों से हालिया घटनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में प्रदेश के सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारी जुड़े. बैठक का फोकस साफ था कि त्योहारों के दौरान शांति, सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द हर हाल में बनाए रखना। 10 जिलों पर खास नजर, मांगी गई रिपोर्ट मुख्यमंत्री ने बदायूं, मुरादाबाद, रामपुर, गाजियाबाद, जालौन, गोरखपुर, आगरा, जौनपुर, प्रतापगढ़ और प्रयागराज में हाल के दिनों में हुई आपराधिक घटनाओं को गंभीरता से लिया. उन्होंने संबंधित जिलों के अधिकारियों से इन घटनाओं पर अब तक हुई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा तलब किया. सीएम ने दो टूक कहा कि अपराध की एक भी घटना पूरे माहौल को प्रभावित करती है, इसलिए हर शिकायत पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपराधियों में पुलिस का खौफ दिखना चाहिए, तभी कानून का असर जमीन पर नजर आएगा। त्योहारों को लेकर सख्त निर्देश बैठक में खास तौर पर चैत्र नवरात्र, अलविदा की नमाज और ईद-उल-फितर को लेकर तैयारियों की समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन अवसरों पर किसी भी तरह की अव्यवस्था या तनाव की स्थिति पैदा न होने पाए. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की उद्दंडता या माहौल बिगाड़ने की कोशिश को तुरंत रोका जाए और दोषियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए. प्रशासन को निर्देश दिया गया कि संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए। मंदिरों में व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश चैत्र नवरात्र के दौरान देवी मंदिरों में भारी भीड़ को देखते हुए मुख्यमंत्री ने विशेष इंतजाम करने को कहा. उन्होंने साफ निर्देश दिए कि मंदिरों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा, साफ-सफाई, पेयजल, रोशनी और स्वास्थ्य सुविधाओं की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए. भीड़ प्रबंधन को लेकर भी प्रशासन को अलर्ट किया गया है, ताकि किसी भी तरह की भगदड़ या अव्यवस्था की स्थिति न बने. प्रमुख मंदिरों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने के भी निर्देश दिए गए हैं. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि धार्मिक आयोजनों में किसी भी नई परंपरा की अनुमति नहीं दी जाएगी. जो परंपराएं पहले से चली आ रही हैं, उन्हीं का पालन सुनिश्चित किया जाए. इसका मकसद यह है कि किसी भी नई गतिविधि के कारण विवाद की स्थिति पैदा न हो। लाउडस्पीकर और स्टंटबाजी पर सख्ती सीएम योगी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की आवाज तय मानकों के भीतर ही रहनी चाहिए. यदि कहीं नियमों का उल्लंघन होता है, तो तुरंत कार्रवाई करते हुए लाउडस्पीकर हटाए जाएं. इसके साथ ही उन्होंने बाइक स्टंटबाजी पर भी सख्त नाराजगी जताई. अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सड़कों पर इस तरह की गतिविधियों को तुरंत रोका जाए और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. बैठक में चेन स्नेचिंग की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता जताई गई. मुख्यमंत्री ने पीआरवी-112 वाहनों की गश्त बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि पुलिस की मौजूदगी ऐसी होनी चाहिए कि अपराधी वारदात करने से पहले ही डर जाएं। एलपीजी सप्लाई पर भी सरकार सख्त मुख्यमंत्री ने एलपीजी गैस की आपूर्ति को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर आम जनता पर नहीं पड़ना चाहिए. कहीं भी कृत्रिम कमी, जमाखोरी या कालाबाजारी की शिकायत मिलती है, तो दोषियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए। राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे की तैयारी अयोध्या और मथुरा-वृंदावन में राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी तैयारियां तय प्रोटोकॉल के तहत पूरी की जाएं और किसी भी स्तर पर चूक न हो. मुख्यमंत्री ने निराश्रित गोवंश के संरक्षण को लेकर भी अधिकारियों को निर्देशित किया. उन्होंने कहा कि गो-आश्रय स्थलों में व्यवस्थाएं मजबूत की जाएं, समय पर धनराशि जारी हो और चारे सहित सभी जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. बैठक से पहले पुलिस महानिदेशक ने जानकारी दी कि चैत्र नवरात्र, ईद और रामनवमी के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल पूरी तरह तैयार है. संवेदनशील इलाकों में फुट पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।  

KBC में 50 लाख जीतने वाली अफसर अमिता सिंह तोमर की गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट ने की तय

 श्योपुर मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले की विजयपुर तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. बाढ़ राहत राशि घोटाले के मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका हाई कोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दी है. इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई है और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। दरअसल, साल 2021 में श्योपुर जिले में आई बाढ़ के बाद पीड़ितों के लिए राहत राशि का वितरण किया गया था. आरोप है कि बड़ौदा तहसील में उस समय पदस्थ तत्कालीन तहसीलदार अमिता सिंह तोमर, करीब 25 पटवारियों और 100 से ज्यादा दलालों ने मिलकर 127 फर्जी खातों में लगभग 2.57 करोड़ रुपये की राशि बांट दी. यह गड़बड़ी डिप्टी कलेक्टर की ऑडिट में पकड़ में आई, जिसके बाद बड़ौदा थाने में FIR दर्ज कराई गई। 2.57 करोड़ का बाढ़ राहत घोटाला जांच में आरोप लगा कि राहत राशि वितरण के दौरान रिश्तेदारों और परिचितों को बाढ़ पीड़ित दिखाकर रकम उनके खातों में डलवाई गई. इस कथित घोटाले में तहलसील कार्यालय के कर्मियों और बिचौलियों की मिलीभगत बताई गई है. पुलिस जांच में 100 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें अमिता सिंह तोमर और 25 पटवारी भी शामिल हैं. अब आगे क्या? गिरफ्तारी से बचने के लिए अमिता सिंह तोमर ने पहले हाई कोर्ट (ग्वालियर खंडपीठ) में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में SLP के साथ अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई. 17 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी,अब या तो उन्हें स्वेच्छा से सरेंडर करना होगा या पुलिस गिरफ्तारी कर सकती है. सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद राजस्व अमले और प्रशासनिक तंत्र में हलचल तेज हो गई है. बड़ौदा थाने की पुलिस कभी भी अमिता सिंह तोमर की गिरफ्तारी कर सकती है. कानूनी जानकारों के मुताबिक,अब उनके पास सरेंडर या कस्टोडियल इंटरोगेशन की स्थिति के लिए तैयार रहने के विकल्प हैं. KBC से लेकर विवादित पोस्ट तक का सफर बता दें कि महिला तहसीलदार अमिता सिंह तोमर साल 2011 में केबीसी के पांचवें सीजन में 50 लाख रुपये जीतकर सुर्खियों में आई थीं. पिछले वर्षों में सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट और कमेंट डालकर प्रशासन की कार्रवाई को गलत बताने और संविधान से जुड़ी एक पोस्ट पर आपत्तिजनक कमेंट करने पर अमिता तोमर निलंबित भी हो चुकी हैं.  इतना ही नहीं, अमिता सिंह अपने बार-बार तबादलों लेकर पीएम मोदी को पत्र भी लिख चुकी हैं. साल 2023 में तहसील का प्रभार नहीं मिलने से खफा होकर इस्तीफे के पत्र भी लिख चुकी हैं.    

हिंदू नववर्ष: विक्रम संवत को मान्यता, 1.96 अरब वर्ष पहले बनी सृष्टि, अंग्रेजी कैलेंडर 58 साल पीछे

इंदौर  गुड़ी पड़वा पर्व को हिंदुओं का नववर्ष माना जाता है। मान्यता है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर सृष्टि की उत्पत्ति हुई थी इसलिए इसे हिंदुओं के नववर्ष की तरह मनाते हैं। उज्जैन में चैत्र प्रतिपदा से विक्रम संवत (वर्ष) की शुरुआत हुई। आज भी इसे गुड़ी पड़वा पर्व पर शिप्रा नदी के रामघाट पर आतिशबाजी और रंगारंग कार्यक्रम कर विक्रमोत्सव के रूप में मनाया जाता है।  हिंदू नववर्ष के कैलेंडर की शुरुआत उज्जैन शहर से हुई। इस कैलेंडर को विक्रम संवत या पंचांग भी कहा जाता है। उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने विक्रम संवत (वर्ष) की शुरुआत की थी, तभी से इस कैलेंडर के अनुसार हिंदू नववर्ष मनाया जाता है। नेपाल में पूरी तरह माना जाता है विक्रम संवत मान्यता है कि चैत्र की प्रतिपदा एकम के दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था, इसलिए गुड़ी पड़वा के दिन नववर्ष मनाया जाता है। करीब 1 अरब 96 करोड़ 58 लाख 81 हजार 126 वर्ष पहले सृष्टि की रचना मानी जाती है। विक्रम संवत भारतीय कालगणना का सबसे अचूक प्रामाणिक पंचांग है। शादी, तीज, त्योहार या अन्य कार्यक्रम इसी पंचांग से तय होते हैं। विक्रम संवत सबसे प्राचीन है। इसके बाद हिजरी, ईस्वी आदि आए थे। विक्रम संवत को नेपाल, मॉरीशस, सूरीनाम और यूक्रेन जैसे देशों में माना जाता है। नेपाल में तो पूरी तरह विक्रम संवत ही चलता है। पुरातत्वविद रमण सोलंकी ने बताया कि नव संवत्सर का मतलब नया साल होता है। संवत मतलब वर्ष होता है। भारत में आज भी अंग्रेजी कैलेंडर से ही काल की गणना की जा रही है। विक्रम संवत अंग्रेजी कैलेंडर से 58 वर्ष आगे है। अंग्रेजी कैलेंडर में वर्ष 2026 चल रहा है, जबकि 19 मार्च से विक्रम संवत 2083 शुरू होगा। दुनिया भर में 60 से अधिक संवत हिंदू कैलेंडर का पहला महीना चैत्र और आखिरी महीना फाल्गुन होता है। राजा विक्रमादित्य उज्जैन के राजा थे। विक्रमादित्य का जन्म 102 ईसा पूर्व हुआ था। उन्होंने 57 ईसा पूर्व भारत से शक साम्राज्य का पतन किया। शकों को हराने के बाद उन्होंने उनके कैलेंडर शक संवत की जगह इसी साल से विक्रम संवत शुरू किया। इसे आगे चलकर हिंदू कैलेंडर कहा है। दुनिया भर में 60 से अधिक संवत हुए, लेकिन विक्रम संवत सबसे ज्यादा प्रचलित है। उज्जैन में राजा विक्रमादित्य द्वारा विक्रम संवत की शुरुआत उज्जैन से की गई इसीलिए इसका सीधा संबंध उज्जैन से है। 

जल विवाद गरमाया: पंजाब का राजस्थान पर 1.44 लाख करोड़ का दावा, पानी बंद करने की चेतावनी

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राजस्थान को दो बड़ी नहरों इंदिरा कनाल व सरहिंद कनाल से 66 वर्षों से दिए जा रहे नहरी पानी की कीमत वसूल करने के लिए 1.44 लाख करोड़ रुपये देने के लिए पत्र लिखा है। यहां बुधवार को मीडिया कर्मियों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 1920 में बीकानेर रियासत और बहावलपुर के बीच हुए समझौते के तहत पानी की आपूर्ति शुरू हुई थी। उस समय पानी के बदले प्रति एकड़ शुल्क तय किया गया था और 1960 तक इसका भुगतान भी होता रहा लेकिन 1960 में सिंधु जल समझौते के बाद नदियों के पानी का बंटवारा कर दिया गया पर इसके बदले में रिपेरियन स्टेट पंजाब को भुगतान करने का पैसा तय नहीं किया गया। कहा गया कि यह अगली मीटिंग में तय होगा।न तो राजस्थान ने भुगतान किया और न ही पंजाब ने इसकी मांग उठाई। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार साल 1920 के समझौते की समीक्षा की मांग करती है ताकि पंजाब अपने जायज बकाए की वसूली कर सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सरकार ने पुराने रिकार्ड के आधार पर 1960 से 2026 तक का हिसाब जोड़ा तो यह राशि करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये बनती है। उन्होंने कहा कि उस समय की सरकारों ने 1960 में नई व्यवस्था में शामिल होते समय भुगतान का जिक्र नहीं किया लेकिन उन्होंने 1920 के समझौते को भी कभी रद नहीं किया। अन्यथा या तो समझौते को समाप्त किया जाए या फिर पानी की आपूर्ति पर पुनर्विचार किया जाए। मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि राज्य अपने अधिकारों को लेकर अब पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि हमने यह मुद्दा केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार, दोनों के समक्ष उठाया है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने राजस्थान सरकार को इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए बैठक की मांग करने के लिए एक पत्र भी लिखा है। मुख्यमंत्री मान बोले-राजस्थान पानी तो साल 1920 के समझौते के मुताबिक ले रहा, लेकिन बकाया मांगने पर 1960 के समझौते का सहारा ले लेता है। यदि राजस्थान 1920 के समझौते के तहत पानी ले रहा है तो उसे उसी आधार पर भुगतान भी करना चाहिए। वर्तमान में लगभग 18 हजार क्यूसेक पानी राजस्थान फीडर के माध्यम से जा रहा है, जबकि इसके बदले कोई आर्थिक प्रतिफल नहीं मिल रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले भुगतान होता था तो अब क्यों नहीं हो रहा।

हेल्थ टीम का सख्त एक्शन: 5 अस्पतालों पर गिरी गाज, लाइसेंस निरस्त

दुर्ग. जिले के कई निजी अस्पतालों में नर्सिंग होम अधिनियम के नॉर्म्स का पालन नहीं किया जा रहा है. 48 निजी अस्पतालों से मांगा स्पष्टीकरण इसकी शिकायत मिलने पर जिले में संचालित 124 निजी अस्पतालों का भौतिक निरीक्षण किया गया. इनमें से 5 अस्पतालों में खामी पाए जाने पर लाइसेंस निरस्त किया गया है. अस्पताल नर्सिंग होम अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत तथा आयुष्मान योजना के अंतर्गत एम्पेनल्ड दुर्ग जिले के सभी निजी अस्पतालों का एक माह के भीतर भौतिक निरीक्षण कर यथा निर्धारित चेक लिस्ट अनुसार निरीक्षण कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने 4 निरीक्षण टीम का गठन किया गया था. निरीक्षण टीम के प्रतिवेदन के आधार पर 48 निजी अस्पतालों में खामियां पाई गई, जिनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है. इनमें से 5 निजी अस्पतालों का लाइसेंस निरस्त किया गया है. सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी से मिली जानकारी अनुसार जिले में संचालित 124 निजी अस्पतालों के निरीक्षण उपरांत टीम द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट अनुरूप 48 अस्पतालों में कमी पाई गई, जिसके लिए 48 अस्पतालों को छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह तथा रोगोपचार संबंधी अनुज्ञापन अधिनियम 2010 एवं नियम 2013 के तहत स्पष्टीकरण 30 दिवस के भीतर प्रस्तुत किये जाने हेतु कलेक्टर द्वारा नोटिस जारी किया गया है. प्रत्येक निरीक्षण टीम में स्थानीय नगरीय निकाय, जिला आयुष कार्यालय, स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि एवं अन्य सदस्य शामिल थे. डॉ. दानी के अनुसार अस्पतालों से प्राप्त जवाब की जांच हेतु गठित टीम द्वारा 48 अस्पतालों का पुनः निरीक्षण किया गया. निरीक्षण उपरांत 5 निजी अस्पतालों में पाई गई कमियों की पूर्ति किया जाना नहीं पाया गया, जो छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह तथा रोगोपचार संबंधी अनुज्ञापन अधिनियम 2010 एवं नियम 2013 की अनुसूची 1 का भाग ङ (अस्पताल एवं नर्सिंग होम) में विहित मानकों का स्पष्ट उल्लंघन होना पाया गया.