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पलामू में बड़ी कार्रवाई, अयोग्य पाए गए लाभुकों को राशन सूची से बाहर किया गया

 पलामू झारखंड के पलामू जिले में 41 हजार 681 लाभुकों को अयोग्य पाए जाने पर राशन कार्ड से नाम डिलिट कर दिया गया, जबकि 12 हजार 689 लाभुक ऐसे पाए गए जिनका आधार कार्ड संदेहास्पद पाया गया. पिछले कई वर्षों से राशन का लाभ उठा रहे थे. बताया जाता है कि इसके अलावा, दूसरे जगहों से भी राशन का उठाव किया जा रहा था. विभागीय सूत्रों के अनुसार राशन कार्ड मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से 1985 लोगों को चिन्हित कर नाम हटाया गया है. 23 हजार 544 वैसे लाभुकों का नाम हटाया गया है, जिनके नाम से राशन कार्ड बन चुका था, लेकिन राशन का उठाव नहीं कर रहे थे. विभागीय कर्मियों ने बताया कि तीन हजार 283 लाभुक ऐसे थे, जो डुप्लीकेट के रूप में पहचान किए गए है. अवैध पाए जाने पर उन सभी लाभुकों का नाम हटाया गया. विभाग द्वारा 41 हजार 681 लोगों को चिन्हित कर सूची से नाम हटाया. केंद्र सरकार के द्वारा चिन्हित कर नाम जिला को भेजा गया था. जिसके बाद वैसे लोगों को सूची से राशन कार्ड से नाम हटाया गया. इनकम टैक्स, जीएसटी व फोर व्हीलर वाले उठा रहे हैं राशन कार्ड का लाभ दूसरे फेज में पलामू जिले में दो लाख 45 हजार 931 लोगों को चिन्हित किया गया है, जिनकी जांच की जा रही है. इसमें दो लाख 37 हजार 528 वैसे लोग हैं. जिनके पास पांच एकड़ से ज्यादा जमीन है. 6782 लोग ऐसे हैं जो इनकम टैक्स भरते हैं. 96 लोग ऐसे हैं जो जीएसटी भरते हैं. 1525 लोग ऐसे है जिनके नाम से फोर व्हीलर गाड़ी है. इन सभी को चिन्हित कर आपूर्ति विभाग को भेजा गया है. आपूर्ति विभाग के द्वारा जिले के सभी मार्केटिंग ऑफिसर को इसकी सूची भेज दी गई है. मार्केटिंग ऑफिसर के द्वारा सभी डीलरों को इसका डिटेल भेज दिया गया है. डीलर के द्वारा इसकी जांच कर इसकी रिपोर्ट मार्केटिंग ऑफिसर को देंगे. मार्केटिंग ऑफिसर के द्वारा जिले को प्रतिवेदन भेजा जाएगा. जिला स्तर से उनके नाम को राशन कार्ड से हटा दिया जाएगा. उनके स्थान पर जरूरतमंदों के नाम को जोड़ा जाएगा. जिले में करीब साढ़े चार लाख राशन कार्डधारी है. जिसमें 18 लाख 28 हजार 926 सदस्य हैं. राज्य सरकार के निर्देशानुसार 18 लाख 28 हजार 926 सदस्य से अधिक नहीं करना है. जिनका नाम हटेगा उसके स्थान पर नए सदस्यों का नाम जोड़ा जाएगा. दूसरे पेज में 245931 सदस्य जांच के घेरे में हुसैनाबाद में 19803, हैदरनगर में 6488 , मोहम्मदगंज 3647, हरिहरगंज 4885, पीपरा 3408, पाटन 15791, विश्रामपुर में 6474 , चैनपुर में 36652, छतरपुर में 18785, नौडीहा बाजार 9669, पड़वा में 4417, पांकी 38775 , तरहसी में 16166 , मनातू में 4868, नावाबाजार में 5877, पांडू में 10280 , सतबरवा में 7801, लेस्लीगंज 12098, मेदिनीनगर सदर में 10991, उंटारी रोड प्रखंड में 4223, हुसैनाबाद नगर पंचायत में 751, विश्रामपुर नगर पंचायत में 1931 और मेदिनीनगर नगर निगम में 2179 लोगों को नाम हटाने के लिए चिन्हित किया गया है.

पंजाब में स्मार्ट राशन कार्ड लॉन्च, 1.5 करोड़ लाभार्थियों को मिलेगा फायदा, पहचान प्रक्रिया होगी सरल

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को सुविधाजनक बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बता दें कि पंजाब में अब पारंपरिक राशन कार्ड की जगह QR कोड आधारित स्मार्ट राशन कार्ड जारी किए जा रहे हैं, जिससे लाखों लाभार्थियों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। क्यों जरूरी था यह बदलाव? पुरानी व्यवस्था में कई लाभार्थियों को राशन लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। खासतौर पर वे लोग जिनके बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) ठीक से मैच नहीं होते थे या ई-केवाईसी बार-बार फेल हो जाती थी, उन्हें राशन मिलने में देरी होती थी। नई QR कोड तकनीक इन समस्याओं का समाधान करने के लिए लाई गई है। कितने लोगों को मिलेगा लाभ? पंजाब में करीब 1.5 करोड़ लोग PDS प्रणाली के तहत राशन लेते हैं, जबकि राज्य में लगभग 39 लाख राशन कार्ड हैं। सरकार का लक्ष्य मई से पहले 80% लाभार्थियों तक नए QR कोड कार्ड पहुंचाने का है, ताकि गेहूं वितरण शुरू होने से पहले व्यवस्था पूरी तरह लागू हो सके। यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि राज्यभर में हजारों पात्र परिवार E-KYC और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के दौरान लगातार समस्याओं का सामना कर रहे थे। खासकर अंगूठे के निशान का मेल न होना, बुजुर्गों के घिसे हुए फिंगरप्रिंट और EPoS मशीनों में तकनीकी खराबियां बड़ी वजह रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, नए स्मार्ट कार्ड अब राशन लाभार्थियों के लिए एक वैध पहचान माध्यम के रूप में काम करेंगे, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि केवल बायोमेट्रिक फेल होने के कारण किसी भी पात्र परिवार को गेहूं के हक से वंचित न होना पड़े। लुधियाना वेस्ट के जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक सरताज सिंह चीमा मीडिया ने बताया कि इस चरणबद्ध योजना का उद्देश्य डिपो नेटवर्क में लाभार्थियों की पहचान प्रक्रिया को और सुगम बनाना है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट कार्ड तैयार हैं और अगले 2-3 दिनों में डिपो होल्डरों के जरिए धीरे-धीरे लाभार्थियों तक पहुंचने शुरू हो जाएंगे। स्मार्ट कार्ड में लाभार्थियों की जरूरी जानकारी जैसे श्रेणी, राशन कार्ड नंबर, परिवार प्रमुख का विवरण और जारी करने की जानकारी शामिल होगी, जिससे गेहूं वितरण के दौरान तेज और विश्वसनीय पहचान संभव हो सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि यह सुधार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में मौजूद खामियों को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे बार-बार अंगूठा सत्यापन की समस्या कम होगी और असली लाभार्थियों को समय पर उनका गेहूं मिल सकेगा। खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के तहत पात्र लाभार्थियों को मुफ्त गेहूं दिया जाता है, ऐसे में उनकी पहचान में किसी भी प्रकार की रुकावट गरीब परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन जाती है। राज्य स्तर पर यह योजना बड़े पैमाने पर लागू की जा रही है, जिसमें करीब 39 लाख राशन कार्ड और 1.5 करोड़ लाभार्थी शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि स्मार्ट कार्ड व्यवस्था लागू होने से डिपो पर विवाद कम होंगे, लाभार्थियों की पहचान बेहतर होगी और पूरे पंजाब में गेहूं वितरण प्रक्रिया अधिक सुगम हो जाएगी। राज्य सरकार इस पहल को एक बड़े कल्याणकारी और पारदर्शिता बढ़ाने वाले सुधार के रूप में देख रही है, जिससे कोई भी पात्र परिवार तकनीकी कारणों से वंचित न रह जाए। जिला स्तर पर वितरण शुरू होने के साथ ही आने वाले दिनों में पंजाब की राशन प्रणाली में स्मार्ट कार्ड आधारित पहचान का बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। पहले ही छप चुके हैं लाखों कार्ड सरकार ने QR कोड आधारित करीब 10 लाख प्लास्टिक राशन कार्ड पहले ही तैयार कर लिए हैं। इन्हें चरणबद्ध तरीके से जिलों और राशन डिपो तक पहुंचाया जा रहा है। शेष कार्डों की आपूर्ति भी तेजी से जारी है, ताकि कोई भी पात्र परिवार इस सुविधा से वंचित न रहे। अब नहीं ले जाना होगा आधार या अन्य दस्तावेज नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों को सिर्फ QR कोड वाला राशन कार्ड दिखाना होगा। राशन डिपो पर अब आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे प्रक्रिया तेज और आसान होगी। कहीं भी मिलेगा राशन इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत पोर्टेबिलिटी है। यानी लाभार्थी अपने निर्धारित डिपो के अलावा किसी अन्य डिपो से भी राशन प्राप्त कर सकेंगे। QR कोड स्कैन होते ही उनकी जानकारी सामने आ जाएगी और उन्हें बिना किसी परेशानी के अनाज मिल सकेगा। नए स्मार्ट कार्ड से मिलेगी लाभार्थियों को वैध पहचान अधिकारियों के अनुसार, नए स्मार्ट कार्ड अब राशन लाभार्थियों के लिए एक वैध पहचान माध्यम के रूप में काम करेंगे, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि केवल बायोमेट्रिक फेल होने के कारण किसी भी पात्र परिवार को राशन के हक से वंचित न होना पड़े। डिपो होल्डरों के जरिए लाभार्थियों तक पहुंचेगे स्मार्ट कार्ड लुधियाना वेस्ट के जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक सरताज सिंह चीमा मीडिया ने बताया कि इस चरणबद्ध योजना का उद्देश्य डिपो नेटवर्क में लाभार्थियों की पहचान प्रक्रिया को और सुगम बनाना है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट कार्ड तैयार हैं और अगले 2-3 दिनों में डिपो होल्डरों के जरिए धीरे-धीरे लाभार्थियों तक पहुंचने शुरू हो जाएंगे। इससे खासकर उन मामलों में राहत मिलेगी, जहां अंगूठे के निशान के मेल न खाने से गेहूं वितरण में दिक्कत आ रही थी। यह वितरण पंजाब के राशन डिपो नेटवर्क के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें जिला प्रशासन और डिपो धारक अंतिम स्तर तक पहुंच सुनिश्चित करेंगे। e-KYC से मिलेगी राहत स्मार्ट कार्ड में लाभार्थियों की जरूरी जानकारी जैसे श्रेणी, राशन कार्ड नंबर, परिवार प्रमुख का विवरण और जारी करने की जानकारी शामिल होगी। जिससे गेहूं वितरण के दौरान तेज और विश्वसनीय पहचान संभव हो सकेगी। इस पहल से खासकर बुजुर्गों, मजदूरों और उन परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो बार-बार e-KYC में फेल हो रहे थे या बायोमेट्रिक गड़बड़ी के कारण उनका राशन अटक जाता था। पात्र लाभार्थियों को मुफ्त मिलता है राशन अधिकारियों का कहना है कि यह सुधार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में मौजूद खामियों को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे बार-बार अंगूठा सत्यापन की समस्या कम होगी और असली लाभार्थियों को समय पर उनका गेहूं मिल सकेगा। खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के तहत पात्र लाभार्थियों को मुफ्त गेहूं दिया जाता है, ऐसे में उनकी पहचान में किसी भी प्रकार की रुकावट … Read more

राशन कार्ड वालों के लिए जरूरी अपडेट, सरकार का बड़ा ऐलान—अगले 3 महीने बदलेंगे नियम

चंडीगढ़ केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत देश के 82 करोड़ जरूरतमंद लोगों को मिलने वाले मुफ्त गेहूं और चावल की योजना में बड़ा फैसला लिया है। अब अप्रैल 2026 से जून 2026 (3 महीने) तक का राशन एक साथ देने के लिए पत्र जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आमतौर पर हर महीने राशन दिया जाता है, लेकिन पंजाब में पहले से ही 3 महीने का राशन एकमुश्त दिया जाता है। पंजाब के करीब 18 हजार डिपो होल्डर साल में 4 बार राशन वितरित करते हैं। केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार आगामी खरीद सीजन को ध्यान में रखते हुए तीन महीने का कोटा तुरंत उठाने और वितरित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह मुफ्त राशन प्रति सदस्य 5 किलो के हिसाब से दिया जाता है, जिसकी सप्लाई देशभर में करीब 6 लाख डिपो होल्डर बायोमेट्रिक मशीनों के जरिए करते हैं। लोगों में खुशी की लहर तीन महीने का मुफ्त कोटा जारी होने पर प्रतिक्रिया देते हुए ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय वाइस प्रेसिडेंट गुरजिंदर सिंह सिद्धू और पंजाब अध्यक्ष करमजीत सिंह अड़ेचा ने कहा कि इस फैसले से देश के 82 करोड़ लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे महंगाई पर भी नियंत्रण रहेगा और लोगों को गेहूं व चावल आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।

सरकार का बड़ा फैसला: अब राशन कार्ड वालों को मिलेगा 3 महीने का स्टॉक एक साथ

चंडीगढ़. केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत देश के 82 करोड़ जरूरतमंद लोगों को मिलने वाले मुफ्त गेहूं और चावल की योजना में बड़ा फैसला लिया है। अब अप्रैल 2026 से जून 2026 (3 महीने) तक का राशन एक साथ देने के लिए पत्र जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आमतौर पर हर महीने राशन दिया जाता है, लेकिन पंजाब में पहले से ही 3 महीने का राशन एकमुश्त दिया जाता है। पंजाब के करीब 18 हजार डिपो होल्डर साल में 4 बार राशन वितरित करते हैं। केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार आगामी खरीद सीजन को ध्यान में रखते हुए तीन महीने का कोटा तुरंत उठाने और वितरित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह मुफ्त राशन प्रति सदस्य 5 किलो के हिसाब से दिया जाता है, जिसकी सप्लाई देशभर में करीब 6 लाख डिपो होल्डर बायोमेट्रिक मशीनों के जरिए करते हैं। लोगों में खुशी की लहर तीन महीने का मुफ्त कोटा जारी होने पर प्रतिक्रिया देते हुए ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय वाइस प्रेसिडेंट गुरजिंदर सिंह सिद्धू और पंजाब अध्यक्ष करमजीत सिंह अड़ेचा ने कहा कि इस फैसले से देश के 82 करोड़ लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे महंगाई पर भी नियंत्रण रहेगा और लोगों को गेहूं व चावल आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। 

शादी के बाद भी राहत: विवाहित बेटियों को ससुराल में मिलेगा फ्री राशन, राशन कार्ड से नाम नहीं कटेगा

लखनऊ  विवाहित बेटियों को अब शादी के बाद ससुराल में ही मुफ्त राशन उपलब्ध कराया जाएगा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाला राशन अब उनके ससुराल की कोटा दुकान से मिलेगा। पूर्ति विभाग शादी के बाद बेटियों के हिस्से का राशन ससुराल के राशन कार्ड (Ration Card) में जोड़ देगा, जिससे मायके के राशन कार्ड से नाम कटवाने और ससुराल में जुड़वाने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। लंबी प्रक्रिया से मिलेगी राहत अब तक विवाह के बाद बेटियों का नाम मायके के राशन कार्ड से कटवाकर ससुराल के राशन कार्ड में जोड़ने में काफी समय लगता था। यह प्रक्रिया 45 से 90 दिन तक खिंच जाती थी और तकनीकी समस्याएं भी सामने आती थीं। कई मामलों में नाम डुप्लीकेसी में चले जाने से लाभार्थियों को राशन से वंचित रहना पड़ता था। तकनीकी दिक्कतें होंगी खत्म पहले राशन कार्ड से नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया के दौरान लाभार्थियों का डाटा नेशनल डाटा सेंटर और स्टेट डाटा सेंटर में भेजा जाता था। राउटर के माध्यम से तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने में लंबा समय लगता था। अब पूर्ति विभाग ने इसे सरल बनाते हुए दोनों राशन कार्ड प्रस्तुत करने पर तुरंत नाम स्थानांतरित करने की व्यवस्था लागू की है। गरीब परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ इस नई व्यवस्था से गरीब परिवारों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। विवाह के बाद बेटियों को राशन मिलने में अब कोई बाधा नहीं आएगी। पूर्ति विभाग यह सुविधा केवल विवाहिता महिलाओं को दे रहा है, ताकि उन्हें राशन पाने के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े। ब्लॉकों में तेजी से हो रहा नामांतरण पूर्ति विभाग अब तक दो सौ नाम दूसरे ब्लॉक में स्थानांतरित कर चुका है, जबकि तीन सौ नाम निचलौल ब्लॉक में जोड़े जा चुके हैं। यह प्रक्रिया लगातार जारी है, जिससे अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को इसका फायदा मिल सके। जमीनी स्तर पर उदाहरण निचलौल ब्लॉक के लोड़िया की रहने वाली अन्नू का नाम सिसवा मीरगंज में जोड़ा गया है। वहीं हुस्नबानों का भारत खंड पकड़ी में, सोनम मौर्य का खेरहवा जंगल नौतनवा ब्लॉक से निचलौल के ग्राम टिकुलहिया में और गुलशन मोहनापुर का नाम जयश्री में जोड़ा गया है। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि विवाहिता महिलाओं को राशन से वंचित न रहने देने के लिए विभाग सक्रिय है। पूर्ति निरीक्षक कार्यालय में होगी प्रक्रिया बेटियों की शादी के बाद मायके और ससुराल दोनों के राशन कार्ड पूर्ति निरीक्षक कार्यालय में प्रस्तुत करने होंगे। इसके बाद विवाहिता का नाम तुरंत ससुराल के राशन कार्ड में जोड़ दिया जाएगा, जिससे उन्हें बिना रुकावट राशन मिल सकेगा।     खाद्य एवं रसद विभाग ने विवाहिता का राशन कार्ड काटने तथा जोड़ने में आती समस्या को देखते हुए ऑनलाइन स्थानांतरण की सुविधा दी है। यह प्रक्रिया काफी आसान है। दोनों पक्ष के राशन कार्ड को लेकर पूर्ति निरीक्षक कार्यालय पर आने के बाद नाम को जोड़ दिया जाता है। इससे विवाहिता को राशन का लाभ तुरंत मिले।     -इंद्रभान सिंह, पूर्ति निरीक्षक अधिकारी निचलौल  

मुख्यमंत्री ने जनदर्शन में दिए निर्देश- 60 वर्षीय श्रमिक हनुमंत राव का तत्काल बनाएं राशन कार्ड

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से जनदर्शन में अपनी समस्या लेकर बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री सभी से बड़ी ही आत्मीयता से मुलाकात कर उनकी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। उसी क्रम में रायपुर के 60 वर्षीय अविवाहित श्रमिक हनुमंत राव ने मुख्यमंत्री से मिलकर कर उन्हें बताया कि उनके पास राशन कार्ड नहीं है, जिसकी वजह से वे शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने तत्काल राव का राशन कार्ड बनाने के निर्देश अधिकारियों को दिए । मुख्यमंत्री को राव ने बताया कि वे राजधानी रायपुर के तात्यापारा वार्ड में लगभग 60 वर्ष से निवासरत हैं। पूर्व में उनके माता-पिता के राशन कार्ड में उनका भी नाम जुड़ा था, जिससे उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ मिलता था। उनके माता-पिता की अब मृत्यु हो चुकी है। वे अविवाहित हैं और अकेले जीवन यापन करते हैं। राशन कार्ड नहीं होने की वजह से उन्हें खाद्य विभाग की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री साय की व्यथा को बहुत आत्मीयता से सुना और अधिकारियों को तत्काल राव को राशनकार्ड उपलब्ध कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

बिहार में राशन कार्ड की सूची पर हो रही है छंटनी, 54 लाख से ज्यादा नाम हटाए जाने की संभावना

पटना  बिहार सरकार ने पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) में पारदर्शिता और पात्र लोगों तक ही लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अब तक की सबसे बड़ी वेरिफिकेशन ड्राइव शुरू कर दी है. राज्यभर में पहले चरण में 54.20 लाख से अधिक नामों को राशन कार्ड सूची से हटाने की तैयारी है. यह कार्रवाई तब तेज हुई जब राशन कार्डों को आधार से लिंक किया गया और कई विभागों के रिकॉर्ड मिलान में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आईं. राज्यभर में बड़े आंकड़े सामने आए ऑफिशियल रिपोर्ट बताती है कि सीतामढ़ी में करीब 99 हजार, मुजफ्फरपुर में 2.34 लाख और पूर्वी चंपारण में लगभग 1.5 लाख ऐसे लाभार्थी चिह्नित किए गए हैं, जो पात्रता के मानकों पर खरे नहीं उतरते. इन जिलों ने विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. पटना में 10.33 लाख एक्टिव राशन कार्ड हैं, जिनमें शहरी क्षेत्र के 2.30 लाख कार्ड शामिल हैं. चल रहे E-KYC वेरिफिकेशन के दौरान अनुमान लगाया गया है कि करीब 65 से 70 हजार नाम गलत दस्तावेजों या अयोग्य श्रेणी के कारण हटाए जा सकते हैं. डेटा मिलान में खुली गड़बड़ियां सप्लाई विभाग ने राशन कार्ड डेटा को रेवेन्यू एवं लैंड रिफॉर्म्स, ट्रांसपोर्ट, इनकम टैक्स और सिविल रजिस्ट्रेशन डेटाबेस से मैच किया. इसमें चौंकाने वाली विसंगतियां सामने आईं.     कई लाभार्थियों के पास 2.5 एकड़ से अधिक जमीन पाई गई.     कई लोग चार पहिया वाहन के मालिक निकले.     इनकम टैक्स रिटर्न भरने वाले भी राशन सूची में शामिल मिले.     सरकारी रिकॉर्ड में मृत व्यक्तियों के नाम भी अब तक सक्रिय थे. इसके बाद जिलों के सप्लाई अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी नाम को हटाने से पहले फील्ड वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से किया जाए. केंद्र के निर्देश के बाद प्रक्रिया में आई तेजी वन नेशन, वन राशन कार्ड स्कीम के लागू होने के बाद केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से अपडेटेड और साफ डेटा मांगा. इसके बाद बिहार में वेरिफिकेशन की रफ्तार और बढ़ गई. गलत दस्तावेज जमा करने वालों को विभाग नोटिस भेजेगा. 90 दिनों के भीतर उनकी पात्रता की दोबारा जांच होगी. अगर उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित नामों को स्थायी रूप से सूची से हटा दिया जाएगा. 

बड़ी खबर: छत्तीसगढ़ में 32 लाख राशन कार्ड निरस्त, ये काम करने पर ही राशन मिलेगा

रायपुर छत्तीसगढ़ में अब 32 लाख राशन कार्ड धारकों को राशन नहीं मिलेगा. राज्य सरकार ने इन हितग्राहियों का राशन कार्ड निरस्त कर दिया है. खाद्य विभाग के सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने कहा, पिछले एक सालों से ये लोग राशन लेने नहीं आ रहे हैं न ही इन लोगों ने केवाईसी हुई है. KYC होने पर फिर से राशन दिया जाएगा. उन्होंने कहा, प्रदेश में लगभग 95 लाख राशन कार्डधारी परिवार हैं. 2 करोड़ 73 लाख राशन हितग्राही हैं, जिसमें से 32 लाख लोगों का राशन कार्ड सस्पेंड किया गया है. नवंबर से नहीं मिलेगा राशन छत्तीसगढ़ में लंबे समय से राशन कार्ड धारकों को E-KYC कराने के लिए कहा जा रहा है. खाद्य विभाग ने फर्जी हितग्राहियों को हटाने के लिए E-KYC कराना अनिवार्य कर दिया है. इसके बावजूद अब तक प्रदेश के 32 लाख हितग्राहियों ने E-KYC नहीं कराया है. ऐसे में माना जा रहा है कि इनमें से ज्यादातर राशन कार्ड फर्जी हो सकते हैं. ऐसे फर्जी हितग्राहियों पर नकेल कसने के लिए 31 अक्टूबर से पहले जो लोग E-KYC नहीं कराएंगे उन्हें नवंबर से मुफ्त राशन का लाभ नहीं मिलेगा. बेहद आसान है E-KYC की प्रक्रिया बता दें कि E-KYC कराना कोई मुश्किल प्रक्रिया नहीं है. अगर एक राशन कार्ड में चार सदस्य हैं और उन्हें अपने कार्ड का E-KYC कराना है तो सभी सदस्यों को अपना आधार कार्ड लेकर अपने क्षेत्र की राशन दुकान में जाना होगा. वहां आधार कार्ड की प्रारंभिक जांच के साथ उनके बायोमेट्रिक की जांच की जाएगी. जैसे ही बायोमेट्रिक के दौरान मिलान हो जाएगा, वैसे ही E-KYC की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. जनता से राशन छीना जा रहा, ये पूरी तरह षड्यंत्र : कांग्रेस छत्तीसगढ़ में 32 लाख राशन कार्ड निरस्त किए जाने के मामले में कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा, नवंबर से करीब 32 लाख परिवारों को राशन नहीं मिलेगा. सरकार का कहना है कि इन परिवारों ने केवाईसी नहीं करवाई है. यह जिम्मेदारी सरकार, खाद्य विभाग या राशन दुकान संचालक किसकी है? सरकार बदलने के बाद खाद्य मंत्री और मुख्यमंत्री ने अपने फोटो राशन कार्ड में लगवाए थे. उस वक्त सभी से आधार कार्ड मांगा गया था, यानी केवाईसी पहले ही हो चुकी थी. अब दोबारा केवाईसी के नाम पर जनता से राशन छीना जा रहा है, जो पूरी तरह षड्यंत्र है.

दुर्ग में राशन कार्ड पर बड़ी कार्रवाई: संदिग्ध 53 हजार से ज्यादा नाम होंगे निरस्त

दुर्ग प्रदेश में फर्जी और अपात्र राशन कार्ड धारकों पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने बड़ी कार्यवाही शुरू कर दी है। विभाग ने 46 लाख से अधिक संदिग्ध राशन कार्डों का सत्यापन अभियान चलाया है, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। कई कार्डधारक ऐसे मिले जिनकी मृत्यु हो चुकी है, तो कई प्रदेश छोड़कर बाहर जा चुके हैं। ऐसे मामलों में अब तक 53,234 सदस्यों के नाम राशन कार्ड से निरस्त किए जाने की तैयारी है। इनमें अकेले रायपुर जिले के 9,233 सदस्य शामिल हैं। पहले चरण में 1.93 लाख सदस्य हटाए जा चुके इससे पहले भी विभाग ने राज्यभर में 1 लाख 93 हजार 67 सदस्यों के नाम राशन कार्ड से हटाए थे। इनमें रायपुर जिले के 19,574 सदस्य शामिल थे। भौतिक सत्यापन में यह पाया गया कि इनमें अधिकांश सदस्य मृत हो चुके या अन्य राज्यों में बस चुके हैं। दरअसल, केंद्र सरकार ने सभी राशन कार्डधारकों को ई-केवाईसी कराने के निर्देश दिए थे। समय पर ई-केवाईसी न कराने वाले 46 लाख से अधिक लोगों को संदिग्ध सूची में डाल दिया गया था। इसके बावजूद कई संदिग्ध कार्डधारकों के नाम पर हर महीने खाद्यान्न उठाव जारी था। अब आय, टैक्स और जमीन के आधार पर होगी छंटनी विभाग अब अगला कदम उठाने की तैयारी में है। जिन परिवारों की वार्षिक आय 6 लाख रुपए से अधिक है, जो आयकर (इनकम टैक्स) जमा करते हैं, या जिनके पास 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि है, उनके नाम राशन कार्ड से हटाने की कार्यवाही शुरू की जाएगी। खाद्य नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा ने बताया कि रायपुर जिले में पहले ही 19 हजार से अधिक सदस्यों के नाम निरस्त किए जा चुके हैं। शेष 9 हजार से अधिक सदस्यों के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके बाद नियमानुसार अन्य अपात्रों की छंटनी जारी रहेगी। इतने-इतने नाम होंगे निरस्त (जिला अनुसार सूची) जिला    निरस्त होने वाले सदस्य रायपुर    9,233 बस्तर    4,879 बीजापुर    7 दंतेवाड़ा    2 कांकेर    1,923 कोंडागांव    735 नारायणपुर    180 सुकमा    58 बिलासपुर    3,000 गौरेला-पेंड्रा-मारवाही    1,005 जांजगीर    281 कोरबा    33 मुंगेली    114 रायगढ़    49 बालोद    879 बेमेतरा    1,248 दुर्ग    6,319 कवर्धा    1,773 राजनांदगांव    247 बलौदाबाजार    2,248 धमतरी    346 गरियाबंद    862 महासमुंद    2,722 बलरामपुर    3,044 जशपुर    6,007 कोरिया    2 सरगुजा    7,178 खैरागढ़    18 मोहला-मानपुर    995 सारंगढ़-बिलाईगढ़    717 मनेंद्रगढ़-चिरमिरी    1,240 अपात्रों पर विभाग की सख्ती जारी विभाग का कहना है कि सरकार का लक्ष्य वास्तविक गरीब और पात्र परिवारों तक सस्ते राशन की सुविधा पहुंचाना है। ऐसे में जिन लोगों के नाम अपात्र श्रेणी में पाए जा रहे हैं, उनके कार्ड निरस्त कर खाद्यान्न वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाया जा रहा है।  

सरकार की नई गाइडलाइन: राशन कार्ड धारक जल्द निपटाएं यह प्रक्रिया, नहीं तो होगी दिक्कत

बरनाला  पंजाब सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत जरूरतमंद परिवारों को राशन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चल रही ई-के.वाई.सी. प्रक्रिया में जिला बरनाला ने सराहनीय प्रगति दर्ज की है। डिप्टी कमिश्नर बरनाला टी. बैनिथ ने जानकारी दी कि जिले में अब तक 89.30 प्रतिशत लाभार्थियों की ई-के.वाई.सी. सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है। डी.सी. ने बताया कि जिले में कुल 71,427 परिवारों के 2,74,095 लाभार्थी राशन योजना के अंतर्गत शामिल हैं। इनमें से अब तक 2,44,773 सदस्यों की ई-के.वाई.सी. पूरी हो चुकी है, जबकि शेष 29,322 लाभार्थियों की ई-के.वाई.सी. की प्रक्रिया जारी है। डिप्टी कमिश्नर ने आगे कहा कि ई-के.वाई.सी. के साथ-साथ लाभार्थियों का सर्वे भी किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक और पात्र लोगों को ही सरकारी योजना का लाभ मिल सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहरी क्षेत्रों में खाद्य आपूर्ति नियंत्रक कार्यालय के अधिकारी और ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ई-के.वाई.सी. और सर्वे कार्य में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। डी.सी. टी. बैनिथ ने लोगों से अपील की कि वे प्रशासन का सहयोग करते हुए शीघ्र अपनी ई-के.वाई.सी. पूरी करवाएं। उन्होंने कहा कि सरकार की यह योजना गरीब और वंचित वर्ग तक आसानी से राशन पहुंचाने के लिए बनाई गई है, इसलिए इसमें देरी करने से लाभार्थी खुद ही नुकसान उठा सकते हैं। इस दौरान जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक रूपप्रीत संधू ने जानकारी दी कि जो लाभार्थी अब तक ई-के.वाई.सी. नहीं करवा पाए हैं, वे 30 सितम्बर 2025 तक इसे अनिवार्य रूप से पूरा कर लें। उन्होंने बताया कि लाभार्थी अपने क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता या सीधे जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक कार्यालय से सम्पर्क कर ई-के.वाई.सी. करवा सकते हैं। संधू ने यह भी कहा कि यह कार्य बहुत सरल है और इसके लिए लाभार्थी को आधार कार्ड, राशन कार्ड और आवश्यक पहचान दस्तावेज उपलब्ध करवाने होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो परिवार समय पर यह प्रक्रिया पूरी नहीं करेंगे, उनके राशन वितरण में बाधा आ सकती है।