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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, जल गंगा अभियान की सफलता के लिए स्थानीय निकायों की सक्रियता आवश्यक

जल गंगा संवर्धन अभियान को सफल बनाने के लिए स्थानीय निकाय हों सक्रिय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विक्रम संवत और नव वर्ष त्योहारों पर दी बधाई मं‍त्रि-परिषद की बैठक के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संबोधन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में आगामी 19 मार्च से राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान प्रारंभ हो रहा है। प्रदेश के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान का यह तीसरा वर्ष है। कुओं, बावड़ियों, नदियों के पुनरुद्धार के अभियान से सभी वर्गों को जोड़ने के लिए नगरीय निकाय और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय निकाय सक्रिय भूमिका का निर्वहन करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक प्रारंभ होने के पहले महत्वपूर्ण विषयों पर मंत्रीगण को जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान से जन-जन को जोड़कर इसे जन आंदोलन का रूप दिया जाए। समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ सामाजिक संस्थाओं को अभियान से जोड़ा जाए। युवाओं को विशेष भागीदारी का अवसर दिया जाए। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में 3000 से अधिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन किया जा चुका है। गत वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए 86 हजार से अधिक खेत तालाब और 550 से अधिक अमृत सरोवर बनाए गए। भू-जल संवर्धन के लिए एक लाख से अधिक कुओं का पुनर्भरण कार्य भी प्रारंभ किया गया। नदियों की निर्मलता के लिए प्रदेश की 57 प्रमुख नदियों और 194 प्रदूषण जल स्रोतों की पहचान कर उनके शोधन की पहल की गई। लगभग 145 नदियों के उद्गम क्षेत्र में हरित विकास के लिए गंगोत्री हरित योजना भी प्रारंभ की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि जन भागीदारी से इस अभियान को सफल बनाया जाएगा। जल महोत्सव की गतिविधियों को सफल बनाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल महोत्सव की गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। आगामी 22 मार्च तक जल महोत्सव के तहत विभिन्न कार्य हो रहे हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की भी जल संरक्षण कार्यो में महत्वपूर्ण भूमिका है। 'हर घर जल' के लिए मध्यप्रदेश के हित में नई दिल्ली में हुआ महत्वपूर्ण करारनामा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केंद्रीय जल शक्ति और पेयजल मंत्रालय के साथ नई दिल्ली में आज एक महत्वपूर्ण करारनामा हुआ है, जिसके अंतर्गत पेयजल योजना के लिए पाइप लाइन बिछाने और हर व्यक्ति तक जल पहुंचाने के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान 2 राज्यों का चयन हुआ है। यह मध्यप्रदेश के लिए प्रतिष्ठा की बात है। इस अवसर पर प्रदेश की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उईके मंगलवार को नई दिल्ली में उपस्थित थीं। स्वच्छ जल प्रदाय के लिए वर्ष 2028 तक जल जीवन मिशन की अवधि बढ़ाने और जल जीवन मिशन 2.0 पुनर्गठित कर लागू करने की स्वीकृति दी गई है,जिसका लाभ मध्यप्रदेश को मिलेगा और ग्रामीण पेयजल आपूर्ति की व्यवस्थाओं को सशक्त टिकाऊ बनाने में सहयोग मिलेगा। किसान कल्याण वर्ष में विभागों की गतिविधियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान कल्याण वर्ष-2026 में 17 विभाग के सहयोग से वर्ष भर होने वाली विभिन्न गतिविधियों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में किसानों के हित में अभिनव पहल की जा रही है। कृषि को लाभ का धंधा बनाने के लिए राज्य सरकार बहु आयामी प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री का 4-लेन निर्माण स्वीकृति के लिए माना आभार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय कैबिनेट द्वारा हाल ही में 3839 करोड़ रुपए की लागत से एनएच 752 डी पर बदनावर पेटलावद थांदला टिमरवानी सेक्शन में 4-लेन निर्माण की स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ की दृष्टि से यह स्वीकृति अत्यंत महत्वपूर्ण है। बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ प्रदेश के अनेक जिलों को मिलेगा। इंदौर पीथमपुर उज्जैन देवास के औद्योगिक इलाकों तक पहुंच को सुगम बनाया जा सकेगा। धार और झाबुआ जनजातीय बहुल जिलों के आर्थिक विकास में भी सहयोग मिलेगा। भावांतर योजना में सरसों को जोड़े जाने से किसानों को मिलेगी मदद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के किसानों के लिए भावांतर योजना में सरसों को शामिल करने को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि 7 लाख से अधिक सोयाबीन उत्पादक किसानों को सरकार 1500 करोड. रुपए की राशि भावांतर योजना में दे चुकी है। अब सरसों उत्पादक किसानों को भी योजना का लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने किसानों के हित में सबसे पहले सफलतापूर्वक भावांतर जैसी महत्वपूर्ण योजना लागू की है। सर्वाइकल कैंसर को रोकेगी वैक्सीन, मध्यप्रदेश में चल रहा अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर से 14 वर्ष और उससे अधिक उम्र की बेटियों को बचाने के लिए टीका लगाने का अभियान प्रदेश में चल रहा है। सर्वाइकल कैंसर से बेटियों को बचाने के लिए निःशुल्क वैक्सीन लगाई जा रही है। यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है और इससे हमारी बेटियां आजीवन सुरक्षित जीवन जिएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी मंत्रियों से कहा कि वे अपने प्रभार के जिलों में इस महत्वपूर्ण अभियान की सतत समीक्षा करें। विक्रम संवत् वर्षारंभ की बधाइयां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी 19 मार्च को गुड़ी पड़वा और विक्रम संवत वर्ष आरंभ होने की सभी मंत्रीगण को बधाई दी और प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय नववर्ष के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम भी हो रहे हैं निश्चित ही इनसे जन-जन जुड़ता है। यह अवसर हमारे लिए महत्वपूर्ण है।  

मध्य प्रदेश की 22.77 लाख महिलाएं लखपति दीदी बनीं, देश के टॉप-5 राज्यों में चौथे स्थान पर

भोपाल  मध्य प्रदेश महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार के 31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत 22,77,814 महिलाएं सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक आय अर्जित कर रही हैं। इसी के साथ मध्य प्रदेश देश में सबसे ज्यादा ‘लखपति दीदी’ वाली सूची में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। उल्लेखनीय है कि एक वर्ष पहले राज्य इस सूची में आठवें स्थान पर था। यह जानकारी संसद में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में सामने आई है। क्या है ‘लखपति दीदी’ योजना यह योजना ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसके तहत स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार से जोड़ने की सुविधा और बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है, ताकि वे सालाना न्यूनतम ₹1 लाख की आय हासिल कर सकें। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 15 अगस्त 2023 को इस योजना की घोषणा की थी। शुरुआत में इसका लक्ष्य 2 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाना था, जिसे बाद में बढ़ाकर 3 करोड़ कर दिया गया। ड्रोन तकनीक से बढ़ी कमाई मध्य प्रदेश ने आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने में भी बढ़त दिखाई है। ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत राज्य को 34 ड्रोन मिले हैं, जिससे यह देश में तीसरे स्थान पर है। राज्य के 89 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। ये महिलाएं अब खेतों में ड्रोन के जरिए तरल उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हो रही है। ड्रोन वितरण के मामले में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्य आगे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। वहीं, ड्रोन ट्रेनिंग के मामले में भी राज्य शीर्ष पांच में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक और वित्तीय सहायता का यह संयोजन ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति बदलने में अहम भूमिका निभा रहा है। मध्य प्रदेश की यह उपलब्धि सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव का संकेत भी देती है। बड़ी संख्या में महिलाएं अब स्वरोजगार से जुड़ रही हैं और परिवार की आय में योगदान दे रही हैं। नमो ड्रोन दीदी को सरकार ने दिए 34 ड्रोन आधुनिक खेती और तकनीक के क्षेत्र में भी मध्य प्रदेश की महिलाएं पीछे नहीं हैं। 'नमो ड्रोन दीदी' योजना के तहत मध्य प्रदेश को 34 ड्रोन उपलब्ध कराए गए हैं, जो इसे देश में तीसरे स्थान (आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के बाद) पर खड़ा करता है। एमपी के 89 स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं ने ड्रोन से संबंधित प्रमाणित तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जिससे वे अब खेतों में लिक्विड फर्टिलाइजर (तरल उर्वरकों) और कीटनाशकों का छिड़काव ड्रोन के जरिए कर रहीं हैं। क्या है 'लखपति दीदी' योजना? इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत हरेक महिला सदस्य को कम से कम चार कृषि ऋतुओं या व्यावसायिक चक्रों के आधार पर सालाना 1 लाख रुपये की न्यूनतम आय सुनिश्चित करने में सक्षम बनाना है । 2023 में पीएम ने किया था योजना का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2023 को लाल किले की प्राचीर से 'लखपति दीदी' योजना की घोषणा की थी, जिसका लक्ष्य शुरुआती चरण में 2 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाना था (बाद में इसे बढ़ाकर 3 करोड़ कर दिया गया)। कैसे काम करती है योजना इस पहल के तहत महिलाओं को वित्तीय सहायता, बाजार लिंकेज, कौशल विकास प्रशिक्षण और बैंक ऋण की सुविधा प्रदान की जाती है । इसमें 'नमो ड्रोन दीदी' जैसी सहायक योजनाएं भी शामिल हैं, जो महिलाओं को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से आय बढ़ाने में मदद करती हैं। नमो ड्रोन दीदी: राज्यों में ड्रोन वितरण (Top 5) (योजना के तहत दिए गए 500 ड्रोनों के आधार पर) टॉप – 5 राज्य (जहां सबसे ज्यादा ड्रोन दिए गए)     आंध्र प्रदेश: 96     कर्नाटक: 82     तेलंगाना: 72     मध्य प्रदेश: 34     उत्तर प्रदेश: 32 नमो ड्रोन दीदी को ड्रोन ट्रेनिंग देने वाले टॉप – 5 राज्य     कर्नाटक: 145     उत्तर प्रदेश: 128     आंध्र प्रदेश: 108     हरियाणा: 102     मध्य प्रदेश: 89 (इन राज्यों में महिला लाभार्थियों/ SHG को ड्रोन चलाने का सर्टिफिकेट मिला)

इंदौर में MOS टैक्स लागू, खुले हवा पर भी टैक्स; जनता पर 4000 तक का वित्तीय बोझ

इंदौर मकान बनाते समय व्यक्ति भूखंड के कुछ हिस्से को इसलिए खाली छोड़ता है ताकि उस रास्ते घर में हवा-पानी आ सके, लेकिन अब नगर निगम ने इसी खाली रास्ते (मार्जिनल ओपन स्पेस) (एमओएस) पर कर लगाने की तैयारी कर ली है। अगर ऐसा हुआ तो संपत्तिधारकों पर 500 रुपये से लेकर चार हजार रुपये प्रतिवर्ष का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा। इधर कांग्रेस ने इस प्रस्तावित कर का विरोध शुरू कर दिया है। मंगलवार को कांग्रेस पार्षदों ने निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के कार्यालय का घेराव किया। उन्होंने मांग की कि एमओएस कर को रोका ए। ऐसा नहीं किया गया तो कांग्रेस आमजन के समर्थन में सड़क पर उतरेगी। कांग्रेस ने प्रदर्शन करते हुए निगमायुक्त को ज्ञापन सौंपा और कर को वापस लेने की मांग की। कांग्रेस ने निगमायुक्त को सौंपा ज्ञापन नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष और इंदौर शहर कांग्रेस के अध्यक्ष चिंटू चौकसे के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ निगमायुक्त कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए कांग्रेस ने मांग रखी कि, मकानों में छोड़े गए खुले स्थान (एमओएस) पर टैक्स लगाने का फैसला सरासर गलत है। इसे वापस लिया जाना चाहिए। निगम इस टैक्स की वसूली को नहीं रोकेगा तो कांग्रेस आमजन के साथ सड़कों पर उतरकर इसका विरोध करेगी। गांधीवादी तरीके से विरोध की तैयारी उन्होंने कहा कि, निगम के सहायक राजस्व अधिकारी जहां भी इस खुले स्थान के टैक्स को वसूलने के लिए जाएंगे, कांग्रेसी वहां पहुंचकर उनका विरोध करेंगे। हमारा विरोध पूरी तरह से गांधीवादी और शांतिपूर्ण रहेगा। नगर निगम के माध्यम से हर मकान के खुले स्थान पर संपत्ति कर लगाना मनमानी है। ऐसी मनमानी का कांग्रेस हर स्तर पर विरोध करेगी। ज्ञापन देने वालों में पार्षद दीपू यादव, सीमा सोलंकी, सेफू वर्मा , सोनीला मिमरोट, राजू भदोरिया, अमित पटेल, सुदामा चौधरी, राजेश चौकसे आदि शामिल थे। वर्ष 2020 में मिली थी अनुमति राज्य शासन ने वर्ष 2020 में स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एमओएस टैक्स की अनुमति दी थी। हालांकि पिछले पांच वर्ष से इसे लागू नहीं किया जा सका।  

इंदौर मेट्रो की रफ्तार पर सीएमआरएस ने 80 की स्पीड से की जांच, ब्रेक स्पीड टेस्ट चार बार किया

इंदौर  सुपर कॉरिडोर से लेकर रेडिसन तक  80 की स्पीड से मेट्रो दौड़ी। चार बार मेट्रो को दौड़ाकर ब्रेक स्पीड टेस्ट किया गया। इसमें मेट्रो को 80 की स्पीड पर पहुंचाने के बाद रोक कर जांच की गई। दरअसल यह प्रक्रिया कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) नीलाभ्र सेनगुप्ता के निरीक्षण की प्रक्रिया का हिस्सा थी। इसके साथ ही सीएमआरएस का निरीक्षण पूरा हो गया। निरीक्षण रिपोर्ट के बाद सीएमआरएस एनओसी जारी करेंगे। ऐसे में संभावना है कि मार्च के आखरी तक शहर में मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू हो जाएगा। यह प्रक्रिया कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) नीलाभ्र सेनगुप्ता के निरीक्षण की प्रक्रिया का हिस्सा थी। इसके साथ ही सीएमआरएस का निरीक्षण पूरा हो गया। निरीक्षण रिपोर्ट के बाद सीएमआरएस एनओसी जारी करेंगे। ऐसे में संभावना है कि मार्च के आखरी तक शहर में मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू हो जाएगा। सीएमआरएस नीलाभ्र सेनगुप्ता अपने छह सदस्यों के दल के साथ मेट्रो के ग्यारह किमी लंबे रूट का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के तीसरे दिन  मेघदूत, विजयनगर और रेडिसन चौराहे पर बने मेट्रो स्टेशन का निरीक्षण किया। प्रत्येक स्टेशन पर एक-एक घंटे रुके। इस दौरान निकासी गेट, लिफ्ट, एस्कलेटर, पार्किंग एरिया, स्टेशन रूम, दिव्यांगों के लिए मौजूद सुविधाओं का निरीक्षण किया। इसके साथ ही मेट्रो डिपो में कंट्रोल कमांड सेंटर, सिग्नल सेंटर, डिपो में स्टेब्लिंग यार्ड की रेल लाइन का निरीक्षण किया। सीएमआरएस ने एमआर-10 पर बने इलेक्ट्रिक सब स्टेशन का निरीक्षण भी किया। सभी ग्यारह स्टेशन का निरीक्षण पूरा हो चुका है। 80 की स्पीड में चेक हुए ब्रेक शाम से रात तक दौड़ाई मेट्रो सुपर कॉरिडोर के स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक वायडक्ट पर मेट्रो को 80 किमी प्रतिघंटा की गति से दौड़ाई। स्टेशन निरीक्षण के बाद शाम से रात तक चार बार मेट्रो को दौड़ाया गया और स्पीड ब्रेक टेस्ट किया गया। 17 किमी पर संचालन जल्द होगा शुरू सीएमआरएस द्वारा मेट्रो का चार दिनी निरीक्षण प्रस्तावित था, लेकिन यह कार्य तीन दिन में पूरा कर लिया गया। बुधवार को सीएमआरएस दिल्ली रवाना हो जाएंगे। निरीक्षण के आधार पर सुझावों के साथ निरीक्षण रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद मेट्रो प्रबंधन उनके बताए गए सुझावों को पूरा करके रिपोर्ट भेजेगा। इसके बाद सीएमआरएस द्वारा मेट्रो के 11.5 किलोमीटर हिस्से पर कमर्शियल रन शुरू करने की एनओसी जारी की जाएगी। यह संभावना जताई जा रही है कि 26 मार्च के बाद मेट्रो का संचालन रेडिसन चौराहे तक हो सकेगा। इंदौर के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर गांधी नगर स्टेशन से स्टेशन नंबर-2 तक करीब छह किमी में पहले ही संचालन किया जा रहा है। अब स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक 11 किमी हिस्से में मेट्रो का निरीक्षण पूरा हो चुका है। एनओसी जारी होते ही 17 किमी लंबे रूट पर मेट्रो का संचालन होने लगेगा। स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का जायजा सीएमआरएस नीलाभ्र सेनगुप्ता अपने छह सदस्यों के दल के साथ मेट्रो के ग्यारह किमी लंबे रूट का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के तीसरे दिन मंगलवार को मेघदूत, विजयनगर और रेडिसन चौराहे पर बने मेट्रो स्टेशन का निरीक्षण किया। प्रत्येक स्टेशन पर एक-एक घंटे रुके। इस दौरान निकासी गेट, लिफ्ट, एस्कलेटर, पार्किंग एरिया, स्टेशन रूम, दिव्यांगों के लिए मौजूद सुविधाओं का निरीक्षण किया। इसके साथ ही मेट्रो डिपो में कंट्रोल कमांड सेंटर, सिग्नल सेंटर, डिपो में स्टेब्लिंग यार्ड की रेल लाइन का निरीक्षण किया। सीएमआरएस ने एमआर-10 पर बने इलेक्ट्रिक सब स्टेशन का निरीक्षण भी किया। सभी ग्यारह स्टेशन का निरीक्षण पूरा हो चुका है। रात के अंधेरे में मेट्रो का ट्रायल बना आकर्षण शाम से रात तक दौड़ाई मेट्रो सुपर कॉरिडोर के स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक वायडक्ट पर मेट्रो को 80 किमी प्रतिघंटा की गति से दौड़ाई। स्टेशन निरीक्षण के बाद शाम से रात तक चार बार मेट्रो को दौड़ाया गया और स्पीड ब्रेक टेस्ट किया गया। रात्रि में मेट्रो को वायडक्ट पर चलता देखकर विजय नगर और एमआर-10 क्षेत्र में रहने और गुजरने वाले रुककर देखने लगे। एनओसी मिलते ही शुरू होगा 17 किमी पर संचालन सीएमआरएस द्वारा मेट्रो का चार दिनी निरीक्षण प्रस्तावित था, लेकिन यह कार्य तीन दिन में पूरा कर लिया गया। बुधवार को सीएमआरएस दिल्ली रवाना हो जाएंगे। निरीक्षण के आधार पर सुझावों के साथ निरीक्षण रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद मेट्रो प्रबंधन उनके बताए गए सुझावों को पूरा करके रिपोर्ट भेजेगा। इसके बाद सीएमआरएस द्वारा मेट्रो के 11.5 किलोमीटर हिस्से पर कमर्शियल रन शुरू करने की एनओसी जारी की जाएगी। यह संभावना जताई जा रही है कि 26 मार्च के बाद मेट्रो का संचालन रेडिसन चौराहे तक हो सकेगा। इंदौर के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर गांधी नगर स्टेशन से स्टेशन नंबर-2 तक करीब छह किमी में पहले ही संचालन किया जा रहा है। अब स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक 11 किमी हिस्से में मेट्रो का निरीक्षण पूरा हो चुका है। एनओसी जारी होते ही 17 किमी लंबे रूट पर मेट्रो का संचालन होने लगेगा।  

ग्वालियर शहर का मास्टर प्लान तैयार, 3 दिशा में बढ़ेगी सीमा, 600 करोड़ की लागत अनुमानित

ग्वालियर  ग्वालियर विकास प्राधिकरण (जीडीए ) ने नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपने विकास का रोडमैप तैयार कर लिया है। मंगलवार को संभागीय आयुक्त मनोज खत्री की अध्यक्षता में आयोजित संचालक मण्डल की बैठक में 241 करोड़ का बजट पेश किया गया। बजट का फोकस शहर के बाहरी इलाकों को मास्टर प्लान- 2035 के अनुसार मुख्य शहर से जोडऩे और नई आवासीय योजनाओं को विकसित करने पर है। खास बात यह है कि प्राधिकरण ने रुद्रपुरा और बड़ागांव के रूप में दो नई बड़ी योजनाओं को हरी झंडी दे दी है, जिससे आने वाले समय में शहर का दायरा और बढ़ेगा। वहीं पूर्व में स्वीकृत 363 करोड़ से एयरपोर्ट कॉरिडोर को हरी झंडी मिलने से इस तरफ के 15 गांवों में नए आवासीय शहर बस सकेंगे। झांसी बायपास और मुरैना रोड की ओर शहर का दबाव शिफ्ट होगा। शहर का विस्तार, तीन दिशाओं में खुलेंगे विकास के द्वार ग्वालियर अब अपनी पुरानी सीमाओं को तोड़कर बाहर की ओर बढ़ रहा है। जीडीए ने नए आवासीय क्षेत्रों के लिए तीन प्रमुख रूट्स को चिन्हित किए हैं, जहाँ आने वाले समय में टाउनशिप और सरकारी आवासीय योजनाएं नजर आएंगी:     मुरैना रोड (उत्तर दिशा): इस रूट पर पुरानी छावनी, खिरियाभाग, बदनापुरा व अन्य क्षेत्रों को नए आवासीय हब के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां औद्योगिक और आवासीय विकास का संगम दिखेगा। 2. झांसी बायपास (दक्षिण दिशा): शहर का सबसे प्रीमियम विस्तार इसी ओर हो रहा है। वीरपुरा, खरियामोदी, रमौआ, गणेशपुरा और बन्हारपुरा क्षेत्रों में मास्टर प्लान के तहत नई कॉलोनियां विकसित होंगी।     डबरा रोड (दक्षिणपूर्व दिशा): तुरारी, बागौर और भाटखेड़ी क्षेत्रों को नए रिहायशी जोन के रूप में मंजूरी मिली है। यहाँ की कनेक्टिविटी मास्टर प्लान की प्रस्तावित सड़कों से सीधे बायपास से होगी। एक साल बाद बैठक, दो नई नगर विकास योजनाओं को स्वीकृति     टीडीएस-07 (रुद्रपुरा): एयरपोर्ट से साडा लिंक रोड के पास 165.40 हेक्टेयर में विकसित होने वाली इस योजना पर 238 करोड़ खर्च होंगे, जबकि इससे 366 करोड़ के मुनाफे का अनुमान है।     टीडीएस-08 (बड़ागांव): मुरैना-झांसी बायपास को जोडऩे वाली इस योजना में 164.33 हेक्टेयर जमीन विकसित होगी। 181 करोड़ की लागत के मुकाबले 374 करोड़ के लाभ की उम्मीद है। दोनों योजनाओं के लिए प्लानिंग और बिल्डिंग टीमें तैनात कर दी गई हैं। मेला प्राधिकरण और अनुकंपा नियुक्ति व्यापार मेला: ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिससे शहर की व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी। हेल्थ सेक्टर: शताब्दीपुरम फेज-2 और यातायात नगर योजना में हेल्थ सेंटर और हेल्थ ब्लॉक के निर्माण को हरी झंडी मिली। इन सड़कों से सुधरेगी शहर की 'रफ्तार' मास्टर प्लान-2035 के तहत प्रस्तावित कई महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण को बजट में जगह मिली है : भाटखेड़ी-रमौआ मार्ग: ग्राम भाटखेड़ी से ग्राम रमौआ तक विकास कार्य। ललियापुरा अंडरपास: झांसी रोड से ब्लू लोटस कॉलोनी तक नई सड़क का निर्माण। झांसी बायपास कनेक्टिविटी: सिरोल तिराहे से झांसी बायपास तक 30 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण। एयरपोर्ट-साड़ा कोरिडोर: टीडीएस-04 योजना के तहत इस लिंक कोरिडोर के विकास कार्यों के लिए 363.66 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। ये पहले से स्वीकृत है। एयरपोर्ट-साडा लिंक कॉरिडोर को मंजूरी के लाभ ट्रैफिक व्यवस्था और पर्यटन को नई गति देने के लिए नगर विकास योजना टीडीएस-04 (एयरपोर्ट साडा लिंक कॉरिडोर) भविष्य के लिए बेहतर योजना है। फायदा: यह कॉरिडोर शहर के मुख्य हिस्सों को सीधे एयरपोर्ट से जोड़ेगा, जिससे वीआइपी मूवमेंट और आम यात्रियों के समय की भारी बचत होगी। सड़कों का जाल: मास्टर ह्रश्वलान 2035 के तहत सिरोल तिराहे से झांसी बायपास और भाटखेड़ी से रामिया तक 30 मीटर चौड़ी सड़कों के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए कुछ स्थानों पर 60 मीटर चौड़ी सड़कों के निर्माण पर भी मुहर लगी है, जो लिंक रोड की तर्ज पर शहर के बाहरी ट्रैफिक को नियंत्रित करेंगी। शताब्दीपुरम फेज-4: अब जमीन के बदले प्लॉट नहीं जीडीए की योजनाओं में अब तक 'आपसी सहमति' से जमीन के बदले भूखंड देने की जो परंपरा चली आ रही थी, उस पर अब पूरी तरह रोक लगा दी गई है। विशेष रूप से शताब्दीपुरम योजना फेज-4 के तहत अब तक किसानों या जमीन मालिकों को उनकी जमीन के बदले विकसित भूखंड दे दिए जाते थे। मंगलवार को हुई बैठक में स्पष्ट किया गया कि अब ऐसी किसी भी फाइल पर स्थानीय स्तर पर निर्णय नहीं होगा। अब जमीन के बदले मुआवजे या भूखंड के सभी प्रस्ताव 'राज्य शासन' को भेजे जाएंगे।