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इंदौर एयरपोर्ट के सामने जमीन के नीचे उतरेगी TBM नर्मदा, मेट्रो टनल का काम शुरू

इंदौर  इंदौरवासियों के लिए अंडरग्राउंड मेट्रो का सपना अब जमीन पर उतरने जा रहा है। मंगलवार से शहर में मेट्रो टनल की खुदाई का काम आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगा। यह शहर के इतिहास में पहला मौका होगा जब एयरपोर्ट के ठीक सामने टनल बोरिंग मशीन (TBM) जमीन के भीतर खुदाई करेगी। शुरुआती दौर में धीमी रहेगी रफ्तार     जमीन के अंदर मौजूद मिट्टी और चट्टानों की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए, शुरुआत में टीबीएम को 'सॉफ्ट लॉन्चिंग' के तहत बेहद धीमी गति से चलाया जाएगा।     भूमिगत हिस्से के निर्माण के लिए अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने वाली 'मिक्स्ड फेस शील्ड' टीबीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सुरंग जमीन की सतह से लगभग 9 से 28 मीटर की गहराई में बनाई जाएगी। सुरंग को स्थायी मजबूती देने के लिए इसके भीतर प्रीकास्ट आरसीसी (RCC) रिंग्स लगाई जाएंगी। आसपास की इमारतों की 24 घंटे होगी निगरानी     चूंकि एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन तक का यह अंडरग्राउंड रूट घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरेगा, इसलिए सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जा रहा है। मशीन और पूरे निर्माण क्षेत्र में अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं।     जैसे-जैसे टीबीएम आगे बढ़ेगी, ये सेंसर जमीन और आसपास के भवनों में होने वाले किसी भी मामूली बदलाव को रियल-टाइम में दर्ज करेंगे। यदि कोई भी अप्रत्याशित बदलाव नजर आता है, तो इंजीनियरिंग टीम तुरंत आवश्यक कदम उठाएगी। खुदाई के बाद डलेगी रिंग सामान्य बोरिंग मशीन वर्टिकल (सीधी) खुदाई करती है, लेकिन टीबीएम जमीन के समानांतर खुदाई करती है। यह मशीन 'थ्री-टियर सिस्टम' पर काम करती है, जिसमें तीन काम एक साथ होते हैं- पहला ड्रिलिंग, दूसरा प्रीकास्ट सेगमेंटल रिंग (केसिंग पाइप की तरह) डालना और तीसरा मलबा बाहर निकालना।     काम की गति: काम को बिना रोके 24 घंटे चलाने के लिए तीन शिफ्टें तय की गई हैं। सुरक्षा के लिए हर 1 मीटर की खुदाई के तुरंत बाद रिंग लगा दी जाएगी।     रूट और मशीन: टीबीएम 'नर्मदा' एयरपोर्ट से बड़ा गणपति के बीच 3.5 किलोमीटर लंबी सुरंग तैयार करेगी, जिसमें 4 अंडरग्राउंड स्टेशन भी बनेंगे। इस भारी-भरकम टीबीएम का कुल वजन लगभग 410 मीट्रिक टन है। भोपाल की तर्ज पर काम और मलबे का बेहतरीन इंतजाम     जिस तरह राजधानी भोपाल में मेट्रो टनलिंग का काम रोजाना औसतन 1 से 2 मीटर की गति से चल रहा है, उसी तरह इंदौर में भी सुरक्षा के मद्देनजर शुरुआती रफ्तार 1 से 2 मीटर प्रतिदिन या इससे कम ही रखी जाएगी।  टनलिंग के दौरान निकलने वाले करीब 4 लाख टन मलबे को बाहर निकालने के लिए कन्वेयर बेल्ट का इस्तेमाल होगा, जहां से इसे डंपरों में भरकर हटाया जाएगा। शहर में 17.5 किलोमीटर का एलिवेटेड (हवा में) कॉरिडोर पहले ही पूरा हो चुका है। अब अंडरग्राउंड काम के दौरान नागरिकों की सुविधा और सड़क यातायात पर कम से कम असर पड़े, इसके लिए मशीन की रफ्तार को नियंत्रित रखा जा रहा है।  

इंदौर से उज्जैन तक दौड़ेगी रैपिड मेट्रो, महाकाल से पीथमपुर-महू तक कनेक्टिविटी का मेगा प्लान

इंदौर मध्य प्रदेश में इंदौर, उज्जैन, देवास जैसे शहरों को मेट्रो या रैपिड मेट्रो कॉरिडोर से जोड़ने की योजना है. मध्य प्रदेश सरकार और मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के साथ लगभग 84 से 95 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के लिए DPR और सर्वे का काम तेज कर दिया है. वहीं इंदौर-उज्जैन रैपिड रेल कॉरिडोर को सिंहस्थ 2028 के पहले पूरा करने का लक्ष्य है. वहीं इंदौर-पीथमपुर मेट्रो, इंदौर-महू मेट्रो और देवास-मक्सी मेट्रो रूट भी प्लान में है।  इंदौर मेट्रो का रिंग कॉरिडोर इंदौर मेट्रो में येलो लाइन का 31.55 किमी लंबा रिंग कॉरिडोर है, जिसमें 29 स्टेशन प्रस्तावित हैं. इसमें गांधी नगर और सुपर कॉरिडोर के प्रारंभिक चरण के बाद सुपर कॉरिडोर-3 में मालवीय नगर (रेडिसन चौराहा) तक लगभग 17 किमी लंबे और ₹2,850 करोड़ की लागत वाले नए खंड को मेट्रो नेटवर्क 5 सितंबर को जोड़ा गया है. जबकि लवकुश चौराहे से बड़ा गणपति, राजवाड़ा और रेलवे स्टेशन होते हुए राजेंद्र नगर तक का हिस्सा घनी आबादी में भूमिगत स्टेशन बनाए जाएंगे।  1. इंदौर-उज्जैन रीजनल रैपिड मेट्रो कॉरिडोर मध्य प्रदेश सरकार इंदौर और मालवा क्षेत्र के चारों प्रमुख शहरों और औद्योगिक केंद्रों को जोड़ने के लिए रीजनल रैपिड मेट्रो नेटवर्क की तैयारी भी कर रही है. यह मध्य प्रदेश का सबसे हाई प्रायोरिटी रीजनल मेट्रो यानी नमो भारत रैपिड रेल प्रोजेक्ट है. 48 किलोमीटर के रूट पर 10 हजार करोड़ रुपये खर्च आ सकता है.महाकुंभ सिंहस्थ 2028 (मार्च–मई 2028) से पहले इसे शुरू करने का लक्ष्य है. इंदौर के लवकुश चौराहा, एयरपोर्ट से यह इंदौर-उज्जैन 4-लेन हाईवे के समानांतर उज्जैन महाकाल मंदिर तक जाएगा।  प्रस्तावित स्टेशन    1. लवकुश चौराहा (इंदौर इंटरचेंज)   2. भंवरसला, सांवेर रोड   3. बारोली   4. धरमपुरी, सांवेर   5. निनौरा   6. त्रिवेणी घाट   7. नानाखेड़ा ISBT बस स्टैंड   8. उज्जैन रेलवे स्टेशन   9. श्री महाकालेश्वर मंदिर स्टेशन (उज्जैन) एमपी के नगर विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि इंदौर मेट्रो परियोजना का विस्तार किया जाएगा. इसमें पीथमपुर, महू, देवास, मक्सी, उज्जैन शामिल होगा. इंदौर मेट्रो में अगले 10-15 साल में काफी विस्तार हो सकता है।  2. इंदौर-पीथमपुर मेट्रो  इंदौर-पीथमपुर मेट्रो मध्य प्रदेश के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल, फार्मा और इंडस्ट्रियल हब को जोड़ने वाला रूट बनेगा. ये 30 से 35 किलोमीटर लंबा है. फिजिबिलिटी रिपोर्ट और सर्वे के बाद 2029-2030 तक ये तैयार हो सकता है. इंदौर मेट्रो की येलो लाइन (राजेंद्र नगर, एबी रोड) से होकर राऊ होते हुए पीथमपुर सेज (SEZ) तक एलिवेटेड ट्रैक बनाने की योजना है।  प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन   1. राजेंद्र नगर स्टेशन (इंटरचेंज)   2. राऊ चौराहा   3. पिगडंबर   4. पीथमपुर एंट्री गेट, इंडस्ट्रियल एरिया-1   5. पीथमपुर सेज (SEZ)   6. स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क स्टेशन 3. इंदौर-महू मेट्रो विस्तार  इंदौर के मास्टर प्लान (फेज-2) के तहत सैन्य छावनी और डॉ. भीमराव अंबेडकर नगर (महू) को मेट्रो कॉरिडोर जोड़ेगा. 18 से 20 किलोमीटर ये रूट 2029-2031 तक पूरा किया जाना है. देवास नाका, जूनी इंदौर से आगे एबी रोड के साथ वाई शेप ट्रैक के जरिए महू छावनी तक पहुंचेगा।  प्रस्तावित स्टेशन    1. राजेंद्र नगर   2. रेती मंडी   3. आईपीएस एकेडमी    4. श्रमिक कॉलोनी   5. इंदौर बाईपास-2   6. पिगडंबर, उमरिया   7. मां वैष्णोदेवी हॉस्पिटल   8. हरण्याखेड़ी, IIT  इंदौर    9. चिनार रेजीडेंसी   10. महू (डॉ. अंबेडकर नगर स्टेशन) 4. देवास-मक्सी रैपिड मेट्रो विस्तार  औद्योगिक शहर देवास, विक्रम उद्योगपुरी और रेलवे जंक्शन मक्सी को इंदौर रीजनल मेट्रो ग्रिड से जोड़ने की योजना है. इसमें 50 से 55 किलोमीटर लंबा रूट होगा. ये 2031-2033 के रीजनल मेट्रोपॉलिटन मास्टर प्लान का आखिरी चरण का प्लान है. इंदौर के देवास नाका से मांगलिया, क्षिप्रा होते हुए देवास शहर, चामुंडा माता टेकरी की तलहटी, विक्रम उद्योगपुरी औद्योगिक क्षेत्र और मक्सी रेलवे जंक्शन तक ये कॉरिडोर बनेगा।  प्रमुख प्रस्तावित स्टेशन   1. देवास नाका (इंदौर)   2. मांगलिया गांव   3. क्षिप्रा   4. देवास इंडस्ट्रियल एरिया (टाटा एक्सपोर्ट, रसूलपुर)   5. देवास बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन   6. विक्रम उद्योगपुरी SEZ (उज्जैन-देवास बॉर्डर)   7. मक्सी जंक्शन 

इंदौर मेट्रो के सुरंग निर्माण में तेजी, थाइलैंड से पहुंचेंगी 4 अत्याधुनिक TBM

इंदौर  इंदौर के बहुप्रतीक्षित मेट्रो अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट की तैयारियां तेज हो गई हैं। एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन और आगे खजराना तक बनने वाले भूमिगत कॉरिडोर के लिए टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) जल्द इंदौर पहुंचने वाली हैं। खास बात यह है कि, रेलवे स्टेशन से दो मशीनें और आएंगी। ये एक साथ सुरंग निर्माण शुरू करेंगी जो अलग-अलग ट्रैक तैयार करते हुए आगे बढ़ेंगी और बाद में एयरपोर्ट की ओर से आने वाले रूट से जुड़ जाएंगी। मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट में कुल चार टीबीएम काम करेंगी। इनमें से पहली दो मशीनों के जून माह के अंत तक इंदौर पहुंचने की संभावना है। ये अत्याधुनिक मशीनें थाईलैंड से लाई जा रही हैं। इनके पहुंचते ही एयरपोर्ट क्षेत्र में सुरंग निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए आवश्यक तकनीकी तैयारी और सॉफ्टवेयर कॉन्फिग्रेशन का काम भी अंतिम चरण में है। काम की गति बढ़ाने की कवायद अधिकारियों के मुताबिक एयरपोर्ट क्षेत्र में विशेष शाफ्ट तैयार किए जा रहे हैं, जहां से मशीनों को जमीन के नीचे उतारा जाएगा। इसके बाद टीबीएम धीरे-धीरे सुरंग बनाते हुए रेलवे स्टेशन की दिशा में आगे बढ़ेंगी। इस दौरान दोनों ट्रैक समानांतर रूप से विकसित किए जाएंगे, जिससे निर्माण कार्य की गति बढ़ सके। दूसरे चरण में खजराना से रेलवे स्टेशन के बीच बनने वाले अंडरग्राउंड हिस्से के लिए भी दो अतिरिक्त टीबीएम लगाई जाएंगी। ये मशीनें रेलवे स्टेशन से अपना काम शुरू करेंगी और विभिन्न भूमिगत स्टेशनों से गुजरते हुए खजराना तक सुरंग तैयार करेंगी। आपस में जुड़ जाएंगे दोनों अंडरग्राउंड रूट पूरे प्रोजेक्ट की डिजाइनिंग इस तरह की गई है कि, एयरपोर्ट और खजराना की दिशा से बनने वाले दोनों अंडरग्राउंड रूट बीच में आपस में जुड़ जाएंगे। इससे पूरा भूमिगत कॉरिडोर एक सतत नेटवर्क के रूप में तैयार होगा और संचालन में सुविधा मिलेगी। टेंडर जल्द ही हालांकि, मशीनों के संचालन से पहले तकनीकी परीक्षण और टेंडर जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं, लेकिन मेट्रो प्रबंधन ने निर्माण के अगले चरण की विस्तृत योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस रूट के लिए भी जल्दी टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और कंपनी को कम अलर्ट कर दिया जाएगा इसके बाद में कंपनी अपने स्तर पर भी परीक्षण शुरू करेगी।

इंदौर मेट्रो का विस्तार: 21 जून से नए कॉरिडोर पर शुरू होगा संचालन, जल्द तय होगा किराया

इंदौर  इंदौर मेट्रो की येलो लाइन के दूसरे फेज के संचालन का रास्ता साफ हो गया है। आगामी 20 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक के नए रूट का लोकार्पण करेंगे। इसके अगले दिन, यानी 21 जून से यह ट्रैक आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। वर्तमान में भोपाल स्थित मेट्रो कार्यालय में किराए, फेरों और शेड्यूल को लेकर बैठकों का दौर जारी है, जिस पर अगले तीन-चार दिनों में अंतिम फैसला ले लिया जाएगा। 6 लाख से अधिक लोगों को मिलेगा सीधा फायदा सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक का यह नया कॉरिडोर इंदौर मेट्रो का सबसे व्यस्त और अधिक यात्री घनत्व वाला रूट बनने जा रहा है। इस रूट के शुरू होने से सीधे 4 से 6 लाख लोगों को सुगम परिवहन का लाभ मिलेगा।यदि फीडर बसों और अन्य सार्वजनिक साधनों को भी जोड़ लिया जाए, तो यह संख्या 8 से 10 लाख तक पहुंच सकती है। इस रूट पर कई बड़ी कंपनियों के ऑफिस इस रूट के दायरे में टीसीएस, इंफोसिस और यश टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के कैंपस हैं। इसके अलावा एसईजेड, आईटी पार्क, एयरपोर्ट, शैक्षणिक संस्थान, होटल और कई कॉर्पोरेट कार्यालय भी इसी कॉरिडोर के आसपास हैं। केवल टीसीएस और इंफोसिस के कैंपस ही हजारों कर्मचारियों की क्षमता रखते हैं। एक्सपर्ट के अनुमान के अनुसार, मेट्रो संचालन के शुरुआती चरण में इस कॉरिडोर पर रोजाना 25 से 40 हजार यात्री सफर कर सकते हैं, वहीं सुपर कॉरिडोर और आसपास के क्षेत्रों के विकसित होने के बाद यह संख्या 60 हजार से लेकर एक लाख यात्रियों रोज तक पहुंच सकती है। कुल मिलाकर सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक का मेट्रो रूट इंदौर के आईटी हब, एयरपोर्ट क्षेत्र और प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों को जोड़ने वाला अहम कॉरिडोर साबित होगा, जिससे लाखों लोगों को तेज, सुगम और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी। भोपाल में हर रोज बैठकें लोकार्पण से पहले भोपाल के सुभाष नगर स्थित डिपो में हर रोज एमडी एस. कृष्ण चैतन्य बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने इंदौर में तीन दिन तक दौरा भी किया। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, मार्च में कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम ने इंदौर मेट्रो के संचालन को लेकर दौरा किया था। इसके बाद अगले ट्रैक पर मेट्रो को दौड़ाने की हरी झंडी भी दे दी थी। नियम के मुताबिक, सीएमआरएस की रिपोर्ट मिलने के 3 महीने के अंदर मेट्रो का संचालन शुरू करना होता है, वरना फिर से दौरा किया जाता है। पहले 15 जून थी तारीख, अब 20 जून फाइनल मेट्रो प्रबंधन सूत्रों की मानें तो पहले 15 जून को इंदौर में येलो लाइन के सेकंड फेज का लोर्कापण किया जाना था, लेकिन राज्यसभा चुनाव के चलते यह तारीख आगे बढ़ गई थी। अब 20 जून की तारीख फाइनल हुई है। इन कामों पर मंथन मेट्रो के सेकंड फेज के लोकार्पण से पहले मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) शेड्यूल, किराए और फेरे को लेकर मंथन कर रहा है। दरअसल, अभी मेट्रो सिर्फ 1 घंटा ही दौड़ रही है। नए शेड्यूल में गांधी नगर से रेडिसन चौराहे तक कुल 16 स्टेशनों की टाइमिंग, कहां-कितना किराया रहेगा और कितने फेरे लगेंगे? यह सब शामिल रहेगा। 15 जून तक पूरा शेड्यूल सामने आ सकता है। मेट्रो प्रबंधन 17 किलोमीटर पर मेट्रो चलाएगा। शुरुआती चरण में इस रूट पर रोजाना 25 से 40 हजार यात्रियों के सफर करने का अनुमान है, जो भविष्य में बढ़कर एक लाख तक पहुंच सकता है। कई आवासीय क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा यह एलिवेटेड कॉरिडोर गांधी नगर, लवकुश, सुखलिया, विजय नगर, स्कीम-78 और रेडिसन चौराहे जैसे प्रमुख आवासीय व व्यावसायिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा। इस रूट के दायरे में टीसीएस, इंफोसिस और यश टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के कैंपस, आईटी पार्क, सेज (SEZ), शैक्षणिक संस्थान और एयरपोर्ट शामिल हैं, जिससे हजारों कामकाजी पेशेवरों और छात्रों को तेज व आधुनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी। भोपाल के मुकाबले इंदौर मेट्रो आगे मेट्रो विकास के मामले में इंदौर, भोपाल से आगे चल रहा है। इंदौर मेट्रो के पहले फेज का संचालन 31 मई 2025 को ही शुरू हो गया था, जबकि भोपाल में ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर (सुभाष नगर से एम्स) का लोकार्पण 20 दिसंबर 2025 को हुआ था। भोपाल के मुकाबले इंदौर में ऐसे आगे काम इंदौर मेट्रो की येलो लाइन है। इसके पहले फेज में गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर-3 तक मेट्रो 31 मई 2025 को चलाई गई थी, जबकि भोपाल में ऑरेंज लाइन के प्रॉयोरिटी कॉरिडोर सुभाष नगर से एम्स के बीच मेट्रो का 20 दिसंबर-25 को लोकार्पण हुआ था। 21 दिसंबर से लोग मेट्रो में सफर करने लगे, यानी भोपाल मेट्रो से इंदौर मेट्रो 7 महीने आगे रही। अब सेकंड फेज का लोकार्पण हो रहा है, जबकि भोपाल में ऑरेंज लाइन का सेकंड फेज साल 2028 तक पूरा होगा। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि इंदौर में दोनों फेज में एलिवेटेड कॉरिडोर है, जबकि भोपाल में सेकंड फेज में करीब 3 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड रूट भी है। इसलिए सेकंड फेज 2028 में पूरा होगा। इंदौर मेट्रो फेज-2 के यह स्टेशन सुपर कॉरिडोर स्टेशन 2, 1, भौंरासला चौराहा, एमआर 10 रोड, आईएसबीटी, चंद्रगुप्त चौराहा, हीरा नगर, बापट चौराहा, मेघदूत गार्डन, विजय नगर चौराहा और मालवीय नगर चौराहा (रेडिसन होटल)। भोपाल में दो रूट पर चल रहा काम बता दें कि भोपाल में इस समय ऑरेंज लाइन का सुभाष नगर से करोंद और ब्लू लाइन का भदभदा से रत्नागिरि के बीच काम चल रहा है। ऑरेंज लाइन के ही सुभाष नगर से एम्स के बीच प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो पिछले साल दिसंबर से दौड़ने लगी थी। इसके बाद बाकी कामों पर फोकस शुरू हो गया है। 30 मार्च को टीबीएम को जमीन के अंदर 24 मीटर गहराई में उतारा गया था। इसके बाद कुल 3.39 किलोमीटर लंबी सुरंग की खुदाई की जा रही है। इसमें दो स्टेशन भी बनेंगे। मेट्रो अफसरों की मानें तो अगले 2 साल में अंडरग्राउंड रूट का काम पूरा कर लिया जाएगा। हाल ही में मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान अंडरग्राउंड रूट पर भी बात की थी। वहीं इंदौर मेट्रो के अब तक के काम और सेकंड फेज के लोकार्पण पर भी … Read more

घनी आबादी वाले इलाकों तक पहुंचेगी इंदौर मेट्रो, मालवीय नगर तक विस्तार से सफर होगा आसान

इंदौर   मेट्रो अपने संचालन के दूसरे साल में एक बड़े विस्तार की तरफ बढ़ रही है। मध्य प्रदेश के इंदौर में अब तक सुपर कॉरिडोर के अपेक्षाकृत कम आबादी वाले हिस्से में सीमित रहने वाली मेट्रो 18 जून से मालवीय नगर तक पहुंचने जा रही है। इसके साथ ही पहली बार शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में मेट्रो ट्रेन नजर आएगी और यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अनुसार, 31 मई 2025 को व्यावसायिक संचालन शुरू होने के बाद से अब तक करीब ढाई लाख यात्रियों ने मेट्रो में सफर किया है। वर्तमान में मेट्रो गांधीनगर स्टेशन से सुपर कॉरिडोर स्टेशन-3 तक लगभग 6 किलोमीटर के रूट पर संचालित हो रही है। इस क्षेत्र में आवासीय आबादी सीमित होने के कारण नियमित यात्रियों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। रियायती ऑफर समाप्त होने के बाद घटे यात्री शुरुआती महीनों में मेट्रो ने लोगों को आकर्षित करने के लिए विशेष रियायतें और जॉय राइड की सुविधा दी थी। उस दौरान बड़ी संख्या में नागरिकों ने पहली बार मेट्रो का अनुभव लिया। बाद में रियायती ऑफर समाप्त होने और नियमित किराया लागू होने के बाद यात्रियों की संख्या में कमी दर्ज की गई। विस्तारित रूट पर व्यावसायिक संचालन शुरू करने पर सहमति अब मेट्रो का 17 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर मालवीय नगर तक तैयार हो चुका है। 25 मार्च को कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) इस हिस्से के संचालन के लिए आवश्यक अनुमति भी दे चुके हैं।  भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में 18 जून को इस विस्तारित रूट पर व्यावसायिक संचालन शुरू करने पर सहमति बनी है। केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री कर सकते हैं शुभारंभ केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में सुपर कॉरिडोर स्टेशन-3 से मालवीय नगर तक मेट्रो सेवा का शुभारंभ प्रस्तावित है। इसके मद्देनजर मेट्रो रेल निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। शुक्रवार को निगम के प्रबंध संचालक ने इंदौर पहुंचकर अधिकारियों के साथ व्यवस्थाओं की समीक्षा भी की। अधिकारियों का मानना है कि शहर के प्रमुख आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को जोड़ने के बाद मेट्रो केवल आकर्षण का साधन नहीं रहेगी, बल्कि दैनिक आवागमन का महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती है। यही कारण है कि अगले कुछ महीनों में यात्री संख्या में कई गुना वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है। एक नजर में -2.5 लाख यात्री एक वर्ष में कर चुके हैं सफर -31 मई 2025 को शुरू हुआ था कमर्शियल संचालन -वर्तमान में केवल 6 किमी रूट पर चल रही है मेट्रो -18 जून से बढ़कर 17 किमी रूट पर होगा संचालन -25 मार्च 2026 को सीएमआरएस से मिली थी मंजूरी -पहली बार घनी आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचेगी मेट्रो -सुपर कॉरिडोर स्टेशन-3 से मालवीय नगर तक चलेगी ट्रेन क्यों महत्वपूर्ण है मालवीय नगर विस्तार? -शहर के आबादी वाले क्षेत्रों को पहली बार मेट्रो से जोड़ेगा। -दैनिक यात्रियों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी। -निजी वाहनों और सड़क यातायात पर दबाव कम हो सकता है। -भविष्य के पूर्ण मेट्रो नेटवर्क के लिए आधार तैयार होगा। -मेट्रो की व्यावसायिक व्यवहार्यता मजबूत होगी।

यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी, इंदौर मेट्रो का दायरा बढ़ा; रेडिसन चौराहा होगा नया स्टेशन

इंदौर इंदौर में लंबे इंतजार के बाद अब मेट्रो का सफर बढ़ेगा और यात्री भी। अभी तक मेट्रो ट्रेन सात किलोमीटर तक चलती थी, लेकिन अब 17 किलोमीटर तक मेट्रो का संचालन होगा। मेट्रो को हरी झंडी केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर दिखाएंगे। दो माह पहले मेट्रो के कमर्शियल रन की मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन संचालन अब शुरू होगा।  एक साल के इंतजार के बाद अब मेट्रो सुपर कॉरिडोर से आगे बढ़कर रेडिसन चौराहे पर यात्रियों के साथ पहुंचेगी। इंदौर में 18 जून से सुपर कॉरिडोर के गांधी नगर स्टेशन से रेडिसन चौराहे तक मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू होगा। मेट्रो प्रोजेक्ट की समीक्षा बैठक में यह फैसला लिया गया। फिलहाल मेट्रो ट्रेन के किराए की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अधिकतम 80 रुपये तक किराया होगा। बढ़ेगी यात्री संख्या अभी मेट्रो जिस हिस्से में चलती है, वह आबादी क्षेत्र नहीं है। इस कारण मेट्रो को काफी कम यात्री मिलते थे, लेकिन गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक मेट्रो का संचालन होने के बाद यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, क्योंकि सुपर कॉरिडोर की आईटी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी और कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थी इसका ज्यादा उपयोग करेंगे। इसके अलावा एयरपोर्ट तक जाने वाले यात्री भी इसका उपयोग कर सकेंगे, हालांकि उन्हें गांधी नगर से फिर ऑटो रिक्शा या अन्य विकल्प अपनाकर एयरपोर्ट तक जाना होगा।गांधी नगर मेट्रो स्टेशन से रेडिसन चौराहा तक पांच मेट्रो स्टेशन भी बनकर तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा अलग-अलग स्पीड में मेट्रो का ट्रायल रन भी कई बार हो चुका है। 80 की स्पीड से चलेगी मेट्रो ट्रेन 17 किलोमीटर लंबे रूट पर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से मेट्रो चलेगी। गांधी नगर से रेडिसन चौराहे तक आने में मेट्रो को 20 मिनट का समय लगेगा। पहले चरण में मेट्रो ट्रेन का संचालन खजराना चौराहा तक होगा। उसके बाद मेट्रो ट्रेन अंडरग्राउंड होगी। उसका काम भी अभी शुरू नहीं हो पाया है। फिलहाल मेट्रो का संचालन सात किलोमीटर हिस्से में हो रहा है। यहां मेट्रो का किराया अधिकतम 30 रुपये है। 17 किलोमीटर तक के संचालन में अधिकतम किराया 80 रुपये तक होगा। जब 30 किलोमीटर हिस्से में मेट्रो ट्रैक का काम पूरा होगा, तो हर 30 मिनट के अंतराल पर मेट्रो ट्रेन चलेगी। शहर में कुल 28 स्टेशनों से ट्रेन गुजरेगी। 20 से ज्यादा मेट्रो ट्रेनों का संचालन होगा। एक ट्रेन में साढ़े चार सौ यात्री सवार हो सकेंगे। बैठने के अलावा खड़े रहकर सफर करने में भी आसानी होगी। ट्रेन के भीतर लगे पोल में चार ग्रिप दी गई हैं, जिन्हें यात्री पकड़कर सफर कर सकते हैं। मेट्रो ट्रेन बाहरी और आंतरिक रूप से सीसीटीवी कैमरों से लैस होगी।  

पथरीली जमीन बनी Indore Metro प्रोजेक्ट की बाधा, एयरपोर्ट क्षेत्र में शुरू हुई ब्लास्टिंग

इंदौर  इंदौर में मेट्रो ट्रेन के अंडरग्राउंड हिस्से का काम फिलहाल एयरपोर्ट के समीप चल रहा है। यहां मेट्रो स्टेशन भूमिगत होगा और करीब डेढ़ किलोमीटर आगे जाकर ट्रैक एलिवेटेड हिस्से से जुड़ेगा। लगभग आठ माह पहले इस हिस्से में मेट्रो के लिए खुदाई शुरू की गई थी, लेकिन 20 फीट की खुदाई के बाद चट्टानें मिलने के कारण अब नियंत्रित ब्लास्टिंग के जरिए खुदाई की जा रही है।  बीते दो दिनों से पूरे इलाके में विस्फोटों की गूंज सुनाई दे रही है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की टीम नियंत्रित ब्लास्टिंग के माध्यम से चट्टानों को तोड़कर आगे का काम कर रही है। माना जा रहा है कि सिंहस्थ से पहले एयरपोर्ट क्षेत्र में अंडरग्राउंड मेट्रो के हिस्से का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। 10 किमी अंडरग्राउंड ट्रैक बनेगा इंदौर में कुल 10 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड ट्रैक का निर्माण होना है। फिलहाल 20 किलोमीटर लंबे मेट्रो ट्रैक का निर्माण पूरा हो चुका है और उस पर संचालन कभी भी शुरू किया जा सकता है, लेकिन अभी तक इसकी अंतिम मंजूरी नहीं मिल पाई है। खजराना से एयरपोर्ट रोड तक 10 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड ट्रैक का निर्माण प्रस्तावित है, हालांकि इस हिस्से में अभी तक व्यापक स्तर पर काम शुरू नहीं हो पाया है। इस रूट में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के हस्तक्षेप के बाद बदलाव किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप लगभग दो किलोमीटर अतिरिक्त अंडरग्राउंड मेट्रो रूट जोड़ा गया। इससे परियोजना की लागत में करीब 2,000 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। 15,000 करोड़ रुपये है लागत इंदौर मेट्रो परियोजना पर कुल लगभग 15,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वर्तमान में छह किलोमीटर लंबे हिस्से में मेट्रो का संचालन और परीक्षण कार्य जारी है। गांधी नगर मेट्रो स्टेशन से रेडिसन चौराहा तक पांच मेट्रो स्टेशन बनकर तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा विभिन्न गति स्तरों पर मेट्रो का ट्रायल रन भी कई बार सफलतापूर्वक किया जा चुका है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने अभी तक किराए की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, हालांकि अधिकतम किराया लगभग 80 रुपये तक होने की संभावना जताई जा रही है। 

इंदौर का मेट्रो सफर सपना बनकर रह गया, सरकारी औपचारिकताएं और ‘अतिथि’ का इंतजार

इंदौर इंदौर की जनता का अपनी मेट्रो ट्रेन में सफर करने का सपना अब सरकारी औपचारिकताओं और 'अतिथि' के इंतजार में उलझकर रह गया है। गांधीनगर से रेडिसन चौराहे तक मेट्रो ट्रेन चलाने की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) से क्लियरेंस मिलने के 23 दिन बीत जाने के बाद भी ट्रेन का पहिया आम जनता के लिए नहीं घूम सका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार निर्माण कार्य और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया तो समय पर पूरी कर ली गई थी, लेकिन उद्घाटन की तारीख तय न होने से शहरवासियों की उत्सुकता अब निराशा में बदल रही है। मार्च में ही अनुमति ले ली थी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने बीते 26 मार्च को ही सुरक्षा आयुक्त से संचालन की अनुमति प्राप्त कर ली थी। स्थानीय नागरिकों को उम्मीद थी कि पहले रामनवमी और फिर हनुमान जयंती के पावन अवसर पर इंदौर को मेट्रो की सौगात मिल जाएगी, लेकिन यह दोनों ही बड़े अवसर बीत गए और स्टेशनों पर सन्नाटा पसरा रहा। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, मेट्रो के संचालन की अंतिम मुहर अब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के स्तर से लगनी है। राज्य शासन की ओर से पीएमओ को मेट्रो संचालन का प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें प्रधानमंत्री द्वारा वर्चुअली हरी झंडी दिखाने या फिर किसी केंद्रीय मंत्री को मुख्य अतिथि के रूप में इंदौर भेजने की अनुमति मांगी गई है। हांलाकि सूत्रों का कहना है कि इंदौर में मेट्रो का संचालन पांच राज्यों में चल रहे चुनाव के परिणाम आने के बाद ही हो पाएगा। चुनाव परिणाम के बाद ही इंदौर मेट्रो की तारीख की घोषणा की जाएगी। 4 मई के बाद ही शुरू होने की उम्मीद सांसद शंकर लालवानी ने इस मामले में कहा कि मेट्रो का संचालन कब शुरू होगा, यह शासन को तय करना है। आवासन एंव शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा इसके शुभारंभ की योजना बनाई जा रही है। लालवानी ने कहा कि वे केंद्र और राज्य स्तर पर बातचीत कर जल्द से जल्द ट्रेन शुरू कराने का प्रयास करेंगे। सूत्रों की मानें तो इंदौर मेट्रो की तारिखों की घोषणा 4 मई के बाद की जाएगी। इंदौर मेट्रो फेज-2 के स्टेशन सुपर कॉरिडोर स्टेशन 2, 1, भोरासला चौराहा, एमआर 10 रोड, आईएसबीटी, चंद्रगुप्त चौराहा, हीरा नगर, बापट चौराहा, मेघदूत गार्डन, विजय नगर चौराहा और मालवीय नगर चौराहा (रेडिसन होटल)।  

इंदौर मेट्रो की रफ्तार पर सीएमआरएस ने 80 की स्पीड से की जांच, ब्रेक स्पीड टेस्ट चार बार किया

इंदौर  सुपर कॉरिडोर से लेकर रेडिसन तक  80 की स्पीड से मेट्रो दौड़ी। चार बार मेट्रो को दौड़ाकर ब्रेक स्पीड टेस्ट किया गया। इसमें मेट्रो को 80 की स्पीड पर पहुंचाने के बाद रोक कर जांच की गई। दरअसल यह प्रक्रिया कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) नीलाभ्र सेनगुप्ता के निरीक्षण की प्रक्रिया का हिस्सा थी। इसके साथ ही सीएमआरएस का निरीक्षण पूरा हो गया। निरीक्षण रिपोर्ट के बाद सीएमआरएस एनओसी जारी करेंगे। ऐसे में संभावना है कि मार्च के आखरी तक शहर में मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू हो जाएगा। यह प्रक्रिया कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) नीलाभ्र सेनगुप्ता के निरीक्षण की प्रक्रिया का हिस्सा थी। इसके साथ ही सीएमआरएस का निरीक्षण पूरा हो गया। निरीक्षण रिपोर्ट के बाद सीएमआरएस एनओसी जारी करेंगे। ऐसे में संभावना है कि मार्च के आखरी तक शहर में मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू हो जाएगा। सीएमआरएस नीलाभ्र सेनगुप्ता अपने छह सदस्यों के दल के साथ मेट्रो के ग्यारह किमी लंबे रूट का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के तीसरे दिन  मेघदूत, विजयनगर और रेडिसन चौराहे पर बने मेट्रो स्टेशन का निरीक्षण किया। प्रत्येक स्टेशन पर एक-एक घंटे रुके। इस दौरान निकासी गेट, लिफ्ट, एस्कलेटर, पार्किंग एरिया, स्टेशन रूम, दिव्यांगों के लिए मौजूद सुविधाओं का निरीक्षण किया। इसके साथ ही मेट्रो डिपो में कंट्रोल कमांड सेंटर, सिग्नल सेंटर, डिपो में स्टेब्लिंग यार्ड की रेल लाइन का निरीक्षण किया। सीएमआरएस ने एमआर-10 पर बने इलेक्ट्रिक सब स्टेशन का निरीक्षण भी किया। सभी ग्यारह स्टेशन का निरीक्षण पूरा हो चुका है। 80 की स्पीड में चेक हुए ब्रेक शाम से रात तक दौड़ाई मेट्रो सुपर कॉरिडोर के स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक वायडक्ट पर मेट्रो को 80 किमी प्रतिघंटा की गति से दौड़ाई। स्टेशन निरीक्षण के बाद शाम से रात तक चार बार मेट्रो को दौड़ाया गया और स्पीड ब्रेक टेस्ट किया गया। 17 किमी पर संचालन जल्द होगा शुरू सीएमआरएस द्वारा मेट्रो का चार दिनी निरीक्षण प्रस्तावित था, लेकिन यह कार्य तीन दिन में पूरा कर लिया गया। बुधवार को सीएमआरएस दिल्ली रवाना हो जाएंगे। निरीक्षण के आधार पर सुझावों के साथ निरीक्षण रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद मेट्रो प्रबंधन उनके बताए गए सुझावों को पूरा करके रिपोर्ट भेजेगा। इसके बाद सीएमआरएस द्वारा मेट्रो के 11.5 किलोमीटर हिस्से पर कमर्शियल रन शुरू करने की एनओसी जारी की जाएगी। यह संभावना जताई जा रही है कि 26 मार्च के बाद मेट्रो का संचालन रेडिसन चौराहे तक हो सकेगा। इंदौर के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर गांधी नगर स्टेशन से स्टेशन नंबर-2 तक करीब छह किमी में पहले ही संचालन किया जा रहा है। अब स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक 11 किमी हिस्से में मेट्रो का निरीक्षण पूरा हो चुका है। एनओसी जारी होते ही 17 किमी लंबे रूट पर मेट्रो का संचालन होने लगेगा। स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का जायजा सीएमआरएस नीलाभ्र सेनगुप्ता अपने छह सदस्यों के दल के साथ मेट्रो के ग्यारह किमी लंबे रूट का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के तीसरे दिन मंगलवार को मेघदूत, विजयनगर और रेडिसन चौराहे पर बने मेट्रो स्टेशन का निरीक्षण किया। प्रत्येक स्टेशन पर एक-एक घंटे रुके। इस दौरान निकासी गेट, लिफ्ट, एस्कलेटर, पार्किंग एरिया, स्टेशन रूम, दिव्यांगों के लिए मौजूद सुविधाओं का निरीक्षण किया। इसके साथ ही मेट्रो डिपो में कंट्रोल कमांड सेंटर, सिग्नल सेंटर, डिपो में स्टेब्लिंग यार्ड की रेल लाइन का निरीक्षण किया। सीएमआरएस ने एमआर-10 पर बने इलेक्ट्रिक सब स्टेशन का निरीक्षण भी किया। सभी ग्यारह स्टेशन का निरीक्षण पूरा हो चुका है। रात के अंधेरे में मेट्रो का ट्रायल बना आकर्षण शाम से रात तक दौड़ाई मेट्रो सुपर कॉरिडोर के स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक वायडक्ट पर मेट्रो को 80 किमी प्रतिघंटा की गति से दौड़ाई। स्टेशन निरीक्षण के बाद शाम से रात तक चार बार मेट्रो को दौड़ाया गया और स्पीड ब्रेक टेस्ट किया गया। रात्रि में मेट्रो को वायडक्ट पर चलता देखकर विजय नगर और एमआर-10 क्षेत्र में रहने और गुजरने वाले रुककर देखने लगे। एनओसी मिलते ही शुरू होगा 17 किमी पर संचालन सीएमआरएस द्वारा मेट्रो का चार दिनी निरीक्षण प्रस्तावित था, लेकिन यह कार्य तीन दिन में पूरा कर लिया गया। बुधवार को सीएमआरएस दिल्ली रवाना हो जाएंगे। निरीक्षण के आधार पर सुझावों के साथ निरीक्षण रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद मेट्रो प्रबंधन उनके बताए गए सुझावों को पूरा करके रिपोर्ट भेजेगा। इसके बाद सीएमआरएस द्वारा मेट्रो के 11.5 किलोमीटर हिस्से पर कमर्शियल रन शुरू करने की एनओसी जारी की जाएगी। यह संभावना जताई जा रही है कि 26 मार्च के बाद मेट्रो का संचालन रेडिसन चौराहे तक हो सकेगा। इंदौर के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर गांधी नगर स्टेशन से स्टेशन नंबर-2 तक करीब छह किमी में पहले ही संचालन किया जा रहा है। अब स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक 11 किमी हिस्से में मेट्रो का निरीक्षण पूरा हो चुका है। एनओसी जारी होते ही 17 किमी लंबे रूट पर मेट्रो का संचालन होने लगेगा।  

इंदौर मेट्रो परियोजना: बड़ा गणपति स्टेशन के लिए 16 मकान अगले हफ्ते हटेंगे, 28 फ्लैट के लिए दावा

इंदौर  बड़ा गणपति भूमिगत मेट्रो स्टेशन के निर्माण में बाधक पीलियाखाल क्षेत्र के 16 मकानों को अगले सप्ताह हटाया जाएगा। मेट्रो प्रबंधन द्वारा अभी यहां रहने वाले लोगों को रंगवासा क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने ताप्ती परिसर के फ्लैट में शिफ्ट करने का प्रस्ताव जिला प्रशासन को दिया है। मेट्रो प्रबंधन द्वारा अभी यहां रहने वाले 16 परिवारों को दिए जाने वाले फ्लैट के लिए प्रशासन को 1.29 करोड़ रुपये की राशि दी है। 28 परिवारों को 28 फ्लैट की मांग हालांकि रहवासियों की मांग है कि यहां बने 16 घरों में 28 परिवार रहते है। ऐसे में 28 परिवारों को 28 फ्लैट दिए जाएं। इस पर कलेक्टर की अध्यक्षता में आगामी दिनों में होने वाली बैठक में ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। रहवासियों की मांग है कि उनके पास राजीव गांधी आश्रय मिशन के तहत मिले हुए जमीन के पट्टे है। ऐसे में उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए। रहवासियों की परेशानी मकान शिफ्ट हो जाएंगे लेकिन बच्चे के स्कूल का क्या होगा पीलियाखाल में रहने वाले लोगों की परेशानी यह है कि उन्हें रंगवासा शिफ्ट किया जा रहा है। ऐसे में अभी यहां के परिवारों के कई बच्चे शिक्षा के अधिकार के तहत बड़ा गणपति व कालानी नगर के निजी स्कूलों में पढ़ते है। ऐसे में उनकी पढ़ाई में मुश्किल आएगी। रंगवासा से दूरी ज्यादा होने पर बच्चों को बड़ा गणपति क्षेत्र के स्कूलों में लाना मुश्किल होगा। रहवासी भूमि यादव के मुताबिक हमारे क्षेत्र अराध्या, आरव, वंशिका पाल सहित कई बच्चे आरटीई के तहत निजी स्कूलों में पढ़ते है। ऐसे में उनके लिए परेशानी होगी रंगवासा में जिस मल्टी में हमें फ्लैट दिए जा रहे है, वहां लोग नशाखोरी करते है। मेरे पापा हम्माली करते है और मैं भी इस क्षेत्र में काम करती है। ऐसे में हमें भी कामकाज के लिए ज्यादा दूर से आना पड़ेगा। रहवासी बलराम वर्मा के मुताबिक मेरे दो बच्चे कालानी नगर क्षेत्र के स्कूलों में आरटीई के तहत पढ़ते है। ऐसे में रंगवासा जाने पर बच्चों की पढ़ाई छूट जाएगी। इस वजह से हमें बड़ा गणपति क्षेत्र के पास ही आवास दिए जाना चाहिए। विस्थापन के नियमों के तहत ही रंगवास क्षेत्र में दिए जा रहे फ्लैट     मेट्रो प्रबंधन द्वारा अभी पीलिया खाल में रहने वाले 16 परिवारों को रंगवासा में फ्लैट देना तय किया गया है। इन्हें शिफ्ट करने की कार्रवाई जल्द की जाएगी। यहां रहने वाले लोगों जो बच्चे आरटीई के तहत निजी स्कूलों में पढ़ते है। उन्हें उस क्षेत्र के निजी स्कूलों में इसी योजना के तहत पढ़ाने की व्यवस्था करेंगे। पट्टाधारकों के विस्थापन के नियमों के तहत ही उन्हें रंगवासा क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के फ्लैट दिए जा रहे है। नगर निगम व मेट्रो प्रबंधन जल्द ही लोगों के फ्लैट के नंबर तय करेंगे। निधि वर्मा, एसडीएम