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करमजीत कौर ने कहा: महिलाओं को 50% आरक्षण, सशक्तीकरण की ओर ऐतिहासिक मोड़

होशियारपुर  पंजाब के होशियारपुर से आम आदमी पार्टी की लोकसभा प्रभारी चेयरमैन करमजीत कौर ने महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रस्ताव का स्वागत किया है। उन्होंने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और निर्णायक कदम बताया। करमजीत कौर ने समाचार एजेंसी  से बात करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी इस फैसले का पूरी तरह समर्थन करती है और लंबे समय से महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की पक्षधर रही है। उनका मानना है कि यदि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण मिलता है, तो इससे न केवल उनकी राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी बल्कि नीति निर्माण में भी महिलाओं की आवाज अधिक प्रभावी ढंग से सामने आएगी। उन्होंने यह भी बताया कि देश के कई राज्यों में पहले से ही पंचायत और स्थानीय निकाय स्तर पर लाखों महिलाएं आरक्षण के तहत काम कर रही हैं और बेहतरीन नेतृत्व का परिचय दे रही हैं। ऐसे में इस व्यवस्था को संसद व विधानसभा तक विस्तारित करना स्वाभाविक और आवश्यक कदम है। उन्होंने कहा कि इससे समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा और महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में बराबरी का अधिकार मिलेगा। हालांकि, करमजीत कौर ने इस प्रस्ताव के भविष्य को लेकर कुछ आशंकाएं भी जताईं। उन्होंने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह बिल संसद में पास हो पाएगा या नहीं क्योंकि राजनीतिक परिस्थितियां अक्सर ऐसे महत्वपूर्ण फैसलों को प्रभावित करती हैं। फिर भी उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी दल इस मुद्दे पर एकजुट होकर इसे समर्थन देंगे। राजनीतिक असर के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी एक पार्टी, जैसे भारतीय जनता पार्टी के फायदे तक सीमित नहीं है। अगर यह बिल पास होता है, तो इसका लाभ सभी राजनीतिक दलों और उनके कार्यकर्ताओं को मिलेगा। राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद की दौड़ से रोकने के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय को राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। यह महिलाओं के अधिकारों और उनके सशक्तीकरण से जुड़ा मुद्दा है, जिसका सभी को समर्थन करना चाहिए। अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए करमजीत कौर ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने उन्हें एक वॉलंटियर के रूप में आगे बढ़ाकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं, जो पार्टी की महिला सशक्तीकरण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पेट के मोटापे की समस्या: भारत में 10 में से 6 महिलाएं शिकार, कमर के साइज से जानें खतरा

भोपाल  भारत में 30 से 49 साल की हर दस में पांच-छह महिलाओं को पेट की चर्बी की समस्या है. पुरुषों से कहीं ज्यादा महिलाएं इससे जूझ रही हैं. डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम जर्नल में छपी स्टडी के मुताबिक, यह ट्रेंड टीनएजर्स और युवा लड़कियों में भी तेजी से बढ़ रहा है. अर्बन लाइफस्टाइल, ज्यादा कमाई और नॉन-वेज डाइट इसका बड़ा कारण. BMI से बेहतर कमर नापना जरूरी, क्योंकि एशियन इंडियंस में बॉडी फैट ज्यादा होता है. भारत में मोटापे की परिभाषा बदल रही है क्योंकि एक्सपर्ट अब सिर्फ वेट मशीन पर दिखने वाले वजन से ही लोगों को ओवरवेट या मोटापे का शिकार नहीं मान रहे हैं, बल्कि वे अब कमर के बढ़ते साइज से भी मोटापे का पता लगा रहा हैं।  डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम जर्नल में पब्लिश हुई स्टडी के मुताबिक, भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाएं 'एब्डोमिनल ओबेसिटी' यानी पेट के मोटापे का ज्यादा शिकार हो रही हैं. स्थिति इतनी गंभीर है कि 30 से 49 साल की उम्र वाली 10 में से करीब 6 महिलाएं इस समस्या से घिरी हुई हैं।  एक्सपर्ट्स इसे एक मेटाबॉलिक इमरजेंसी मान रहे हैं।  क्या कहती है रिसर्च? आमतौर पर हम मोटापे को बॉडी मास इंडेक्स (BMI) से नापते हैं, लेकिन यह स्टडी बताती है कि BMI शरीर की असल स्थिति छुपा सकता है क्योंकि एशियन इंडियंस में बॉडी फैट ज्यादा होता है. कई बार वजन सामान्य होने के बावजूद पेट पर जमी चर्बी अंदरूनी अंगों के लिए खतरनाक होती है इसलिए कमर की माप मापना सही रहेगा।  स्टडी के मुताबिक, यह ट्रेंड टीनएजर्स और युवा लड़कियों में भी तेजी से बढ़ रहा है. अर्बन लाइफस्टाइल, ज्यादा कमाई और नॉन-वेज डाइट इसका बड़ा कारण है।  स्टडी बताती है कि भारत में महिलाओं में एब्डॉमिनल ऑबेसिटी पुरुषों से ज्यादा है. NFHS-5 (2019-21) डेटा से पता चलता है कि भारत में 40% महिलाएं और 12% पुरुष पेट के मोटापे से ग्रस्त हैं. महिलाओं के लिए 80 सेमी और पुरुषों के लिए 94 सेमी से अधिक कमर का घेरा इस खतरे की श्रेणी में आता है. यह समस्या अब गांवों और मिडिल क्लास तक फैल चुकी है।  फोर्टिस C-DOC के चेयरमैन डॉ. अनूप मिश्रा कहते हैं, 'कमर नापना आसान है. हर डॉक्टर को मेजरमेंट टेप रखना चाहिए. यह डायबिटीज, हार्ट डिजीज और कैंसर का संकेत देता है. BMI एशियंस के लिए सटीक नहीं इसलिए वेस्ट सर्कम्फरेंस (कमर का घेरा) पर फोकस करें. यह ट्रेंड टीनएजर्स में भी दिख रहा, जो बचपन की कुपोषण के बाद फास्ट लाइफस्टाइल से प्रभावित हैं।  कारण और जोखिम रिसर्च के मुताबिक, उम्र बढ़ना, शहरों में रहना, अधिक कमाई और नॉन-वेज खाना महिलाओं में पेट की चर्बी बढ़ा रहा. लीवर-पैंक्रियास के आसपास फैट मेटाबॉलिक रिस्क बढ़ाता है. स्टडी चेतावनी देती है इससे टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की बीमारी और यहां तक कि ब्रेस्ट कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।  खासकर मिड एज की लड़कियों में यह ट्रेंड अधिक देखा जा रहा है जो कम उम्र में खराब न्यूट्रिशन और फिर अचानक बदली हुई लाइफस्टाइल का नतीजा है।  कैसे रोक सकते हैं इस समस्या को एक्सपर्ट्स कहते हैं, टेप से कमर नापें और रूटीन चेकअप कराएं. हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज से इस समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है. अब जनरल ऑबेसिटी नहीं बल्कि एब्डॉमिनल पर भी ध्यान देने की जरूरत है. ये समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ रही है इसलिए शहरी महिलाओं को खास ध्यान देने की जरूरत है. एक्सपर्ट्स अब सलाह दे रहे है कि वजन चेक करने के साथ-साथ अपनी कमर का घेरा नापना भी उतना ही जरूरी हो गया है। 

चार चुनावी राज्यों में महिलाओं के लिए 24 हजार करोड़, तमिलनाडु में समर पैकेज, असम में बिहू बोनस

नई दिल्ली अगले महीने भारत के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इनमें से चार प्रमुख राज्य ऐसे हैं, जिन्होंने चुनावी रणनीति के तहत सीधे कैश ट्रांसफर करने का बड़ा निर्णय लिया है। ये चारों राज्य महिलाओं के बैंक खातों में कुल 24,500 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का वादा कर रहे हैं। इन राज्यों का कहना है कि अगर वे सत्ता में आए, तो यह सहायता चालू रहेगी। तमिलनाडु का समर पैकेज और बिहार बोनस तमिलनाडु में, DMK सरकार ने विशेष समर पैकेज के तहत महिलाओं के खातों में 2-2 हजार रुपये डाल दिए हैं। इस कार्यक्रम को लेने के पीछे सरकार का लक्ष्य है कि महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हों। वहीं, असम की भाजपा सरकार ने बिहू समारोह के लिए महिलाओं को 4-4 हजार रुपये देने का ऐलान किया है, ताकि त्योहार का आनंद बढ़ सके। केरल और बंगाल की योजनाएं केरल में वामपंथी सरकार ने ‘स्त्री सुखम’ नकद योजना शुरू की है, जिसके तहत 10 लाख महिलाएं हर महीने 1,000 रुपये प्राप्त कर रही हैं। दूसरी ओर, बंगाल की तृणमूल सरकार ने लक्ष्मी भंडार स्कीम को लागू करते हुए फरवरी में 500 रुपये की वृद्धि की थी। ममता बनर्जी की सरकार का यह प्रयास अगले चुनाव में एक बार फिर से लाभ हुनाने का है। महिलाओं का प्रभाव और वोटिंग ट्रेंड इन चारों राज्यों में लगभग 4.1 करोड़ महिलाएं इन योजनाओं की लाभार्थी हैं, जो कुल वोटरों का 23% हैं। इसलिए ये योजनाएं चुनावी गणित में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रहीं हैं। पिछले 5 साल में देखा गया है कि महिलाओं को नकद सहायता देने वाले राज्यों की संख्या 1 से बढ़कर 15 हो गई है। इन राज्यों में 13 करोड़ से ज्यादा महिलाएं लाभ उठा रही हैं। राज्य बजट और कैश ट्रांसफर की रुख इतना ही नहीं, झारखंड जैसा राज्य तो अपने ग्रामीण विकास बजट का 81% हिस्सा महिलाओं को कैश ट्रांसफर करने में खर्च कर रहा है। ये सभी योजनाएं जबकि खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के बावजूद लागू हो रही हैं। हालांकि, यह भी देखने को मिल रहा है कि कई राज्य विकास योजनाओं को रोककर नकद स्कीमों पर ध्यान दे रहे हैं। अब 15 राज्य दे रहे महिलाओं को नगद सहायता बीते 5 साल में हुए चुनावों का ट्रेंड देखें तो पता चला है कि महिलाओं को कैश ट्रांसफर देने वाले राज्यों की संख्या एक से बढ़कर 15 हो गई है। ये राज्य 13 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को 2.46 लाख करोड़ रु. तक सालाना नकद पैसा ट्रांसफर कर रहे हैं, जो इन राज्यों के कुल बजट का 0.7% है। झारखंड जैसा राज्य अपने ग्रामीण विकास के कुल बजट का 81% हिस्सा महिलाओं को कैश ट्रांसफर में दे रहा है। लेकिन, ट्रेंड ये भी है कि जो राज्य विकास योजनाओं को रोककर नकद स्कीमों पर खर्च कर रहे हैं, वहां कई योजनाएं शुरू नहीं हो पा रही हैं। नकद स्कीमों के चलते महाराष्ट्र-कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों को अपने अहम खर्चों में कटौती करनी पड़ी है। मुफ्त योजनाएं और अन्य लाभ महत्वपूर्ण बात यह है कि ये कैश ट्रांसफर योजनाएं केवल महिलाओं के लिए नहीं हैं। तमिलनाडु में 2.22 करोड़ राशन कार्डधारकों को मुफ्त फ्रिज, एजुकेशन लोन वेवर और हर साल तीन गैस सिलेंडर मुफ्त प्रदान किए जा रहे हैं। केरल में कल्याण पेंशन स्कीम अब 62 लाख लोगों को लाभ पहुंचा रही है, और पेंशन राशि में भी बढ़ोतरी की गई है। बेरोजगारी से निपटने के प्रयास बंगाल में करीब 1,500 करोड़ रुपये बेरोजगार युवाओं के लिए पेंशन योजना पर खर्च किए जा रहे हैं। इस तरह की योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें नौकरी की तलाश में मदद करना है। इस समय चारों राज्यों में महिलाओं को केन्द्रित करके चुनावी जंग लड़ी जा रही है। इन राज्यों में गेमचेंजर बनीं कैश ट्रांसफर वाली योजनाएं     मध्य प्रदेश: (2023): ‘लाड़ली बहना’ योजना के तहत 1.31 करोड़ महिलाओं को 1250 रुपए/माह; कई सीटों पर बढ़त।     कर्नाटक (2023): ‘गृह लक्ष्मी’ योजना (2000 रु./माह) ने कांग्रेस को जीत दिलाई।     ओडिशा (2024): ‘सुभद्रा’ योजना से भाजपा को पहली बार सत्ता।     महाराष्ट्र (2024): ‘लाड़की बहिन’ योजना (1500 रुपए/माह), बड़ा महिला वोट आधार।     झारखंड (2024): ‘मैया सम्मान’ योजना का चुनावी असर। हेमंत सोरेन की वापसी हुई। चुनावी राज्यों में ये भी ‘मुफ्त’ योजनाएं… तमिलनाडु में 2.22 करोड़ राशनकार्डधारकों को मुफ्त ​फ्रिज, एजुकेशन लोन वेवर और हर साल तीन गैस ​सिलेंडर मुफ्त। केरल में कल्याण पेंशन स्कीम में अब 62 लाख लोग। पेंशन भी 600 रु. बढ़ाकर 2 हजार रु. की। बंगाल में 1500 करोड़ रु. बेरोजगार युवा पेंशन पर खर्च हो रहे हैं।

मध्य प्रदेश की 22.77 लाख महिलाएं लखपति दीदी बनीं, देश के टॉप-5 राज्यों में चौथे स्थान पर

भोपाल  मध्य प्रदेश महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार के 31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत 22,77,814 महिलाएं सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक आय अर्जित कर रही हैं। इसी के साथ मध्य प्रदेश देश में सबसे ज्यादा ‘लखपति दीदी’ वाली सूची में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। उल्लेखनीय है कि एक वर्ष पहले राज्य इस सूची में आठवें स्थान पर था। यह जानकारी संसद में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में सामने आई है। क्या है ‘लखपति दीदी’ योजना यह योजना ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसके तहत स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार से जोड़ने की सुविधा और बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है, ताकि वे सालाना न्यूनतम ₹1 लाख की आय हासिल कर सकें। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 15 अगस्त 2023 को इस योजना की घोषणा की थी। शुरुआत में इसका लक्ष्य 2 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाना था, जिसे बाद में बढ़ाकर 3 करोड़ कर दिया गया। ड्रोन तकनीक से बढ़ी कमाई मध्य प्रदेश ने आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने में भी बढ़त दिखाई है। ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत राज्य को 34 ड्रोन मिले हैं, जिससे यह देश में तीसरे स्थान पर है। राज्य के 89 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। ये महिलाएं अब खेतों में ड्रोन के जरिए तरल उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हो रही है। ड्रोन वितरण के मामले में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्य आगे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। वहीं, ड्रोन ट्रेनिंग के मामले में भी राज्य शीर्ष पांच में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक और वित्तीय सहायता का यह संयोजन ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति बदलने में अहम भूमिका निभा रहा है। मध्य प्रदेश की यह उपलब्धि सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव का संकेत भी देती है। बड़ी संख्या में महिलाएं अब स्वरोजगार से जुड़ रही हैं और परिवार की आय में योगदान दे रही हैं। नमो ड्रोन दीदी को सरकार ने दिए 34 ड्रोन आधुनिक खेती और तकनीक के क्षेत्र में भी मध्य प्रदेश की महिलाएं पीछे नहीं हैं। 'नमो ड्रोन दीदी' योजना के तहत मध्य प्रदेश को 34 ड्रोन उपलब्ध कराए गए हैं, जो इसे देश में तीसरे स्थान (आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के बाद) पर खड़ा करता है। एमपी के 89 स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं ने ड्रोन से संबंधित प्रमाणित तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जिससे वे अब खेतों में लिक्विड फर्टिलाइजर (तरल उर्वरकों) और कीटनाशकों का छिड़काव ड्रोन के जरिए कर रहीं हैं। क्या है 'लखपति दीदी' योजना? इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत हरेक महिला सदस्य को कम से कम चार कृषि ऋतुओं या व्यावसायिक चक्रों के आधार पर सालाना 1 लाख रुपये की न्यूनतम आय सुनिश्चित करने में सक्षम बनाना है । 2023 में पीएम ने किया था योजना का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2023 को लाल किले की प्राचीर से 'लखपति दीदी' योजना की घोषणा की थी, जिसका लक्ष्य शुरुआती चरण में 2 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाना था (बाद में इसे बढ़ाकर 3 करोड़ कर दिया गया)। कैसे काम करती है योजना इस पहल के तहत महिलाओं को वित्तीय सहायता, बाजार लिंकेज, कौशल विकास प्रशिक्षण और बैंक ऋण की सुविधा प्रदान की जाती है । इसमें 'नमो ड्रोन दीदी' जैसी सहायक योजनाएं भी शामिल हैं, जो महिलाओं को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से आय बढ़ाने में मदद करती हैं। नमो ड्रोन दीदी: राज्यों में ड्रोन वितरण (Top 5) (योजना के तहत दिए गए 500 ड्रोनों के आधार पर) टॉप – 5 राज्य (जहां सबसे ज्यादा ड्रोन दिए गए)     आंध्र प्रदेश: 96     कर्नाटक: 82     तेलंगाना: 72     मध्य प्रदेश: 34     उत्तर प्रदेश: 32 नमो ड्रोन दीदी को ड्रोन ट्रेनिंग देने वाले टॉप – 5 राज्य     कर्नाटक: 145     उत्तर प्रदेश: 128     आंध्र प्रदेश: 108     हरियाणा: 102     मध्य प्रदेश: 89 (इन राज्यों में महिला लाभार्थियों/ SHG को ड्रोन चलाने का सर्टिफिकेट मिला)

विधानसभा से पास हुआ संशोधन, गुजरात में बढ़े काम के घंटे, महिलाओं को रात की ड्यूटी की इजाजत

अहमदाबाद  गुजरात विधानसभा (Gujarat Budget Session) में बजट सेशन जारी है। मुख्यमंत्री भूपेश पटेल की मौजूदगी में बजट 2026- 27 पेश किया जाएगा। इससे पहले मंगलवार को विधानसभा में  गुजरात दुकानें और प्रतिष्ठान रोजगार विनियमन और सेवा की शर्तें (संशोधन) विधेयक सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया है। इस बिल को श्रम एवं रोजगार मंत्री कुनवरजी भाई बावलिया ने सदन में पेश किया था। कानून लागू होने पर व्यापार और रोजगार सेवा क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। यह कानून 10 या इससे अधिक वर्कर वाली दुकानों और स्थान पर लागू होगा। जबकि पहले यह कानून 20 या उससे ज्यादा स्टाफ वाले दुकानों या स्थान पर लागू होता था। रोजाना काम करने के रोजाना काम करने के घंटे के लिए में 9 से बढ़कर 10 कर दिया गया है। इन नए नियमों को भी जान लें महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति होगी। हालांकि दुकानदारों और कंपनियों को महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।  इसके अलावा 3 महीने के कम समय में ओवर टाइम काम की ज्यादा से ज्यादा लिमिट 125 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे कर दी गई है। इस संशोधन बिल को आज के दौर के डिमांड और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत पेश किया गया है। श्रम और रोजगार मंत्री का कहना है कि यह वर्कर, ट्रेडर्स मालिकों और नागरिकों सभी के लिए एक वरदान साबित हो सकता है। कृषि भूमि ट्रांसफर के नियम भी बदले  विधानसभा में सौराष्ट्र घरखेड़ एडमिनिस्ट्रेशन सेटलमेंट एंड एग्रीकल्चरल लैंड ऑर्डिनेशन 1949 अमेंडमेंट बिल भी पास हो चुका है। इसे रिवेन्यू स्टेट मिनिस्टर संजय सिंह माहिडा ने पेश किया था। गैर कानूनी ट्रांसफर के मामलों में एक साफ और सिस्टमैटिक प्रक्रिया निर्धारित की जाएगी। जिसके अनुसार कलेक्टर या तो अपनी पहल पर या जमीन में दिलचस्पी रखने वाले किसी व्यक्ति के एप्लीकेशन के आधार पर कार्रवाई शुरू कर सकेंगे। अगर ट्रांसफर गैर कानूनी पाया जाता है, तो कलेक्टर जमीन बेचने वाले से 3 महीने के अंदर जमीन वापस करने को कहेंगे। जिसके बाद खरीदने वाले को जमीन वापस करनी होगी। ऐसा न होंने पर कलेक्टर ट्रांसफर को गैर कानूनी घोषित कर देंगे और ऐसी जमीन सभी तरह के बोझ से मुक्त होकर सरकार के पास चली जाएगी। फिर इसे सरकार बंजर  जमीन के तौर पर बेच देगी। ओइस बदलाव से पेनल्टी लगने पर जो व्यक्ति या संस्थान किसान नहीं है, उसे एक महीने के अंदर जमीन की मौजूद मार्केट वैल्यू का 3 गुना अमाउंट देना होगा। नई परियोजना को मंजूरी मिली  बनासकांठा जिले में पालनपुर और लक्ष्मीपुरा रोड पर मॉडर्न रेलवे ओवर ब्रिज के लिए 46 करोड़ रुपये मंसूर किए गए हैं। 1212.19 मीटर लंबे रेलवे ओवरब्रिज से शहर के लगभग 1.81 लाख लोगों को लाभ होगा। रेलवे ब्रिज के बन जाने से ड्राइवर का समय और ईंधन बचेगा। यह प्रस्ताव मंत्री ऋषिकेश भाई पटेल द्वारा विधानसभा में पेश किया गया था।

दस हजार की मदद से मिली सिलाई मशीन और गाय ने बदली महिलाओं की किस्मत

छपरा. सारण में इन दिनों गांव-गांव एक नई तस्वीर उभर रही है। जिस घर में कल तक मजदूरी की अनिश्चित कमाई थी, आज वहां छोटा कारोबार चल रहा है। जिन महिलाओं को लंबे समय तक घर तक सीमित माना गया, वही महिलाएं अब कमाई की कमान संभाल रही हैं। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत खाते में आए 10 हजार रुपये सारण की हजारों महिलाओं के लिए केवल रकम नहीं बने यह उनके लिए आत्मनिर्भरता का पहला कदम बन गया। दिघवारा प्रखंड की नीतू देवी,जानकी देवी और लालती देवी जैसी महिलाएं अब पूरे जिले में चर्चा का विषय हैं। इनकी कहानी बताती है कि अगर अवसर मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी परिवार की आर्थिक रीढ़ बन सकती हैं। आंकड़ों ने भी कहा- बदल रहा है समय सारण में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का असर अब कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव की गलियों और बाजारों तक पहुंच चुका है। नवंबर 2025 तक 4,93,621 महिलाएं योजना से जुड़ीं थी, जिनमें से 17,608 महिलाओं के खाते में राशि भेजी गई।अब तक कुल 5,11,229 महिलाएं योजना के दायरे में आ चुकी हैं। यानी सारण अब इस योजना में अग्रणी जिलों में गिना जाने लगा है। रामपुर आमी की नीतू देवी टोटो बना परिवार की कमाई का सहारा दिघवारा प्रखंड के रामपुर आमी पंचायत में रहने वाली नीतू देवी कौसर जीविका महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं।नीतू देवी के घर की हालत पहले वैसी थी, जैसी गांव के कई मजदूर परिवारों की होती है कमाई का कोई भरोसा नहीं। उनके पति मजदूरी करते थे, लेकिन काम मिला तो ठीक, नहीं मिला तो घर में चिंता। इसी बीच मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से नीतू देवी को 10 हजार रुपये की सहायता मिली। नीतू देवी ने इसे खर्च नहीं किया, बल्कि इसे पूंजी बनाया। उन्होंने कुछ अतिरिक्त राशि जोड़कर किस्त पर बैटरी चालित टोटो खरीद ली। टोटो चलाने की जिम्मेदारी उनके पति ने संभाली और कुछ ही समय में उनकी रोज की कमाई 700 से 1000 रुपये तक पहुंच गई। घर बैठे काम जानकी देवी ने सिलाई से बना ली पहचान दिघवारा की जानकी देवी जय गणेश स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। उनके पास छह महीने का छोटा बच्चा था। ऐसे में घर से बाहर जाकर काम करना संभव नहीं था। पति दिल्ली में मजदूरी करते थे, लेकिन पिछले छह महीनों से पत्नी-बच्चे की देखभाल के लिए गांव में ही रुक गए थे। इससे कमाई घट गई और घर पर आर्थिक दबाव बढ़ गया। इसी कठिन समय में योजना से मिले 10 हजार रुपये उनके लिए उम्मीद की तरह आए। जानकी देवी ने पहले से सिलाई का प्रशिक्षण ले रखा था। उन्होंने दिघवारा प्रखंड स्थित संस्कार जीविका महिला संकुल स्तरीय संघ के सिलाई प्रशिक्षण केंद्र से यह हुनर सीखा था। अब जानकी देवी घर में रहकर बच्चे की देखभाल भी कर रही हैं और साथ ही अपनी आमदनी भी बना रही हैं। गांव की महिलाओं के कपड़े सिलने से उन्हें धीरे-धीरे पहचान और काम दोनों मिल रहे हैं। मजदूरी से दूध का कारोबार, लालती देवी की मेहनत रंग लाई दिघवारा प्रखंड की लालती देवी जय गणेश जीविका महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। पहले वे खेती से जुड़ी मजदूरी पर निर्भर थीं।गांव में काम मिला तो दिन चलता, नहीं मिला तो घर में तंगी।मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत मिले 10 हजार रुपये से लालती देवी ने एक गाय खरीदी। यह गाय प्रतिदिन करीब 10 लीटर दूध देती है। लालती देवी अब चाहती हैं कि अगर आगे और मदद मिले, तो वे 10–12 गायें खरीदकर अपना पशुपालन बढ़ाएं। सारण में इस योजना का सबसे बड़ा असर यह दिख रहा है कि महिलाएं अब केवल सहयोगी नहीं, बल्कि कमाने वाली मुख्य ताकत बन रही हैं। कहीं टोटो की चाबी महिलाओं के हाथ में है, कहीं सिलाई मशीन की रफ्तार से घर चल रहा है, तो कहीं दूध के डिब्बे के साथ आर्थिक आजादी की नई सुबह आ रही है।

खाना बनाते समय महिलाओं की ये 5 आदतें बन सकती हैं घर की बरकत की दुश्मन

आज से कई सौ सालों पहले आचार्य चाणक्य ने जो बातें कहीं थी, वो आज के जीवन में भी काफी व्यवहारिक हैं। आज भी कई लोग जीवन में सही रास्ते की तलाश में आचार्य चाणक्य की नीतियों का सहारा लेते हैं। इनमें केवल राजनीति, अर्थशास्त्र जैसे विषयों का ही ज्ञान नहीं मिलता बल्कि गृहस्थ जीवन से जुड़ी कई बातें भी सीखने को मिलती हैं। उदाहरण के लिए आचार्य चाणक्य का मानना था कि महिलाओं को खाना बनाते समय कुछ बातें विशेष रूप से ध्यान रखनी चाहिए। ये गलतियां यदि वो दोहराती हैं, तो इसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है और घर में एक नकारात्मकता सी बनी रहती है। उन्होंने इन 5 गलतियों को किसी भी हाल में ना करने की सलाह दी है, आइए जानते हैं। बिना नहाए कभी नहीं बनाना चाहिए खाना आचार्य चाणक्य सलाह देते हैं कि कभी भी महिलाओं को बिना नहाए खाना नहीं बनाना चाहिए। बिना नहाए, गंदे कपड़ों में खाना बनाना अशुद्ध माना जाता है। ऐसा खाना ना सिर्फ सेहत पर बुरा असर डाल सकता है, बल्कि घर में मासिक अशांति का कारण भी बन सकता है। इससे घर में एक नकारात्मक ऊर्जा फैलने लगती है, जिससे घर की बरकत कम हो जाती है। नेगेटिव इमोशन के साथ ना पकाएं भोजन आचार्य चाणक्य कहते हैं कि खाने को आप किस सोच के साथ पका रहे हैं, ये काफी मायने रखता है। यही आप दुखी मन से, उदास हो कर या गुस्से में खाना पकाती हैं, तो ये नकारात्मक सोच भोजन भी ग्रहण कर लेता है। ऐसे में परिवार के अन्य सदस्य जो इसे ग्रहण करते हैं, उनके मन पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। आचार्य सलाह देते हैं कि खाना हमेशा शांत मन से और खुशी के साथ पकाना चाहिए। बासी और खराब सामग्री का इस्तेमाल करना आचार्य के मुताबिक खाना बनाते हुए हमेशा ताजी और शुद्ध सामग्री को ही इस्तेमाल में लाना चाहिए। अगर आप बासी सामग्री या खराब तेल-मसाले इस्तेमाल में लाती हैं, तो ये सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। आचार्य कहते हैं कि भोजन जितना ताजा और शुद्ध होता है, उतना ही मन और शरीर को शक्ति देता है। खाना बनाते हुए इधर-उधर की बातों में उलझे रहना कई महिलाएं खाना तो बनाती हैं, लेकिन उनका ध्यान बातों या फिर दूसरे कामों में लगा रहता है। आचार्य कहते हैं कि इस तरह कभी भी खाना नहीं बनाना चाहिए। जब भी खाना बनाएं, सिर्फ उसपर ही ध्यान रखें। ऐसा करने से भोजन सिर्फ स्वदिष्ट ही नहीं बनता, बल्कि आपके मन का प्रभाव भी उसपर पड़ता है। भगवान को याद ना करना अपनी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि खाना बनाते हुए आपके मन में हमेशा भगवान का स्मरण या आभार की भावना होनी चाहिए। ऐसा करने से खाने में एक सकारात्मक ऊर्जा आती है, जिससे घर में खुशहाली और बरकत बनी रहती है।

नए श्रमिक कानून से उत्तर प्रदेश के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का कवच, महिलाओं को भी नाइट शिफ्ट का अधिकार

डबल इंजन सरकार में प्रत्येक श्रमिक को न्यूनतम वेतन की गारंटी, जोखिमयुक्त काम करने वालों को 100% स्वास्थ्य सुरक्षा बीमा चार नई श्रम संहिताओं के लागू होने से “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’’ को गति, 2047 तक उत्तर प्रदेश  बनेगा विकसित और आत्मनिर्भर  लखनऊ नए श्रमिक कानून से उत्तर प्रदेश के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा गारंटी और न्यूनतम वेतन सुनिश्चित होगा। देश के 29 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर दिया गया है। इसकी जगह अब चार नए श्रमिक कानून लागू किए हैं। नई संहिता आधुनिक कार्यशैली, वेतन, स्वास्थ्य जांच और गिग वर्कर्स के लिए नए प्रगतिशील प्रावधान लेकर आई है। अब श्रमिकों को न्यूनतम वेतन, नियुक्ति पत्र, समान वेतन, सोशल सिक्योरिटी, ओवरटाइम पर डबल वेतन, फिक्स टर्म ग्रेच्युटी और जोखिम वाले क्षेत्रों में 100% हेल्थ सिक्योरिटी की गांरटी मिलेगी। इसके साथ ही महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने का भी अधिकार मिलेगा। वर्तमान आवश्यकताओं के अनुसार नए कानून देश में लागू कई श्रम कानून 1930–1950 के बीच बनाए गए थे। इसमें गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और प्रवासी श्रमिक जैसी आधुनिक कार्यशैली का उल्लेख तक नहीं था। नए लेबर कोड इन सभी को कानूनी सुरक्षा देते हैं। नए श्रम कानून उत्तर प्रदेश की रोजगार व्यवस्था और इंडस्ट्रियल सिस्टम को नई परिभाषा देगें। नए नियमों से उत्तर प्रदेश के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा का दायरा मिलेगा, जो पहले कभी संभव नहीं हुआ था कामकाजी महिलाओं को नाइट शिफ्ट का अधिकार उत्तर प्रदेश की महिलाएं अब सहमति और सुरक्षा प्रबंधों के साथ नाइट शिफ्ट में काम कर सकती हैं। समान वेतन और सुरक्षित कार्यस्थल की गारंटी भी नए कोड में शामिल है। ट्रांसजेंडर कर्मचारियों को भी समान अधिकार मिले हैं। नियुक्ति पत्र अनिवार्य, समय पर वेतन की गारंटी नियोक्ताओं को अब हर कर्मचारी को नियुक्ति पत्र देना होगा। न्यूनतम वेतन प्रदेशभर में लागू हो गया है और समय पर वेतन देना कानूनी बाध्यता होगी। इससे रोजगार में पारदर्शिता और कर्मचारी सुरक्षा बढ़ेगी। 40 वर्ष से अधिक उम्र वाले कर्मचारियों की साल में एक बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच की जाएगी। खनन, केमिकल और कंस्ट्रक्शन जैसे खतरनाक कार्य क्षेत्रों में काम करने वालों को पूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा मिलेगी। केवल एक साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी पहले 5 साल नौकरी के बाद मिलने वाली ग्रेच्युटी अब सिर्फ एक साल की स्थाई नौकरी के बाद मिलेगी। यह प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए बड़ा फायदा है। गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को पहली बार कानूनी मान्यता मिली है। ओला–उबर ड्राइवर, जोमैटो–स्विगी डिलीवरी पार्टनर, ऐप-बेस्ड वर्कर्स अब सामाजिक सुरक्षा लाभ पाएंगे। एग्रीगेटर्स को अपने टर्नओवर का 1–2% योगदान देना होगा। UAN लिंक होने से राज्य बदलने पर भी लाभ जारी रहेगा।   ओवरटाइम का डबल वेतन मिलेगा नए श्रमिक कानून से कर्मचारियों को अब ओवरटाइम का भुगतान डबल रेट पर मिलेगा। इससे ओवरटाइम भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। अब कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को भी न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और काम की गारंटी मिलेगी। प्रवासी और असंगठित क्षेत्र के कामगार भी सुरक्षा ढांचे में शामिल होंगे। सिंगल लाइसेंस और सिंगल रिटर्न सिस्टम लागू होगा। इससे कंपनियों का अनुपालन बोझ कम होगा और उद्योगों को लालफीताशाही से राहत मिलेगी। नए लेबर कोड विकसित उत्तर प्रदेश @2047 के लक्ष्य की दिशा में मजबूत आधार तैयार करेंगे। इससे “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” को भी रफ्तार मिलेगी।

महिलाओं के लिए हैं ये योगासन, पीसीओडी से मिलेगा छुटकारा

पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम या पीसीओडी एक ऐसी बीमारी है जिसके तहत ओवरी में मल्टीपल सिस्ट हो जाते हैं। ये सीस्ट खास किस्म के तरल पदार्थ की थैलियां होती हैं। सिस्ट होने की असली वजह मासिक धर्म में अनियमतता को बताया जाता है। मासिक धर्म में अनियमतता के कारण ओवरी का साइज बढ़ जाता है नतीजतन एंड्रोजेन और एस्ट्रोजेनिक नामक हारमोन भारी मात्रा में प्रोड्यूस होते हैं। पॉलिसिस्टिक ओवरी नार्मल ओवरी की तुलना में आकार में काफी बड़े होते हैं। इसे स्टीन लिवंथन सिंड्रोम भी कहा जाता है। पीसीओडी के कारण गर्भास्था, मासिक धर्म, डायबिटीज जैसी बीमारी में परेशानियों का इजाफा करता है। पीसीओडी के लक्षण : पीसीओडी के लक्षण बेहद खतरनाक ढंग से देखे जा सकते हैं। दरअसल इससे महिलाओं के शरीर में बाल बढ़ जाते हैं, स्तन का साइज छोटा हो जाता है, आवाज में फर्क महसूस होने लगता है, वजन बढ़ जाता है, सिर के बाल पतले होने लगते हैं। इतना ही नहीं जो महिलाएं पीसीओडी से पीड़ित होती हैं, उनमें एंग्जाइटी, डिप्रेशन, वजन बढ़ना जैसी समस्या भी देखने को मिलती है। इन दिनों पीसीओडी वयस्क महिलाओं की कम उम्र की युवतियों में देखने को मिल रही है। इसकी असली वजह काम का तनाव, अस्वस्थ खानपान, एंग्जाइटी, डिप्रेशन, व्यायाम न करना है। साथ ही जो युवतियां कम सोती हैं, उन्हें भी पीसीओडी होने का खतरा रहता है। जो महिलाएं अपनी जीवनशैली के कारण पीसीओडी का शिकार हो रही हैं, वे चाहें तो कुछ आसनों की मदद से स्वस्थ जीवन जी सकती हैं। उनमें पीसीओडी का खतरा भी कम हो जाता है। कपालभाती : कपालभाती शब्द दो शब्दों को जोड़कर बनाया गया है। एक कपाल यानी माथा और भाती यानी चमकना। माना जाता है कि नियमित व्यायाम करने से चेहरे पर ग्लो आता है और शरीर स्वस्थ रहता है। कपालभाती वास्तव में एक शत क्रिया है। यह एक तरह शरीर की क्लीनिंग प्रक्रिया है जिसकी मदद से शरीर से जहरीले पदार्थों को निकाला जाता है। इसके तहत आपको योगिक आसन में बैठना होता है और फिर पूरी प्रक्रिया सांसों के लेने और छोड़ने पर निर्भर करती है। योनि मुद्रा : यह एक ऐसा योगासन है जिसे करते हुए महिला किसी भी रूप में बाहरी दुनिया से जुड़ाव महसूस नहीं करती। इसलिए इसे योनि मुद्रा कहा जाता है। यह हमें अपनी अंदरूनी दुनिया से जोड़ता है इसलिए इसे योनि मुद्रा कहा जाता है। यह गर्भाशय में शिशु के होने का आभास कराता है। पवनमुक्त आसन : पवनमुक्त आसन हमारे पेट के लिए सबसे ज्यादा लाभकारी आसन है। साथ ही यह हमारी पाचन क्रिया को भी बेहतर करता है। पवनमुक्त आसन से एब्डोमिनल और पीठ की मसल्स को मजबूती मिलता है साथ ही रक्त संचार का प्रवाह भी बेहतर होता है। हलासन : हल एक तरह का जमीन जोतने के लिए इस्तेमाल होने वाला उपकरण है जिसे किसान द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। हलासन को सर्वांगासन के बाद ही किया जाता है जो वास्तव में कंधों से जुड़ा हुआ आसन है। यह आसन भी पीसीओडी में राहत देने में मदद करता है। धनुर्सान : यह आसन टेंशन और डिप्रेशन को दूर भगान के लिए किया जाता है। अतः यदि किसी महिला में पीसीओडी के जरा भी लक्ष्ण दिखें या उन्हें जबरदस्त तनाव होता है तो उन्हें यह आसन अवश्य करना चाहिए। इससे पीसीओडी के आशंका में काफी कमी आती है।  

महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वास्थ्य संरक्षण को बढ़ावा देने रायपुर में उठाया गया अहम कदम

रायपुर : महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल नियद नेल्लानार ग्रामों में बीपीएल परिवारों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन में प्राथमिकता रायपुर महिला सशक्तिकरण, स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण परिवारों के स्वास्थ्य संरक्षण के उद्देश्य से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा योजना के अंतर्गत 25 लाख अतिरिक्त एलपीजी गैस कनेक्शन जारी करने की मंजूरी दी गई है। इसके तहत छत्तीसगढ़ के “नियद नेल्लानार योजना” में शामिल ग्रामों के बीपीएल परिवारों को प्राथमिकता से लाभ प्रदान किया जाएगा। खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने तेल विपणन कंपनियों के अधिकारियों की बैठक लेकर योजना के पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि “सुशासन तिहार” और “नियद नेल्लानार योजना” के तहत पात्र 1.59 लाख माताओं-बहनों को उज्ज्वला कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा। सुकमा कलेक्टर श्री देवेश कुमार धु्रव ने संबंधित अधिकारियों को चिन्हांकित ग्रामों में विशेष शिविर आयोजित कर आवेदन प्राप्त करने, लाभार्थियों का सत्यापन करने तथा गैस सुरक्षा संबंधी जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। स्वच्छ रसोई ईंधन की उपलब्धता से महिलाओं को धूम्ररहित रसोई, समय की बचत, स्वास्थ्य सुरक्षा, सुविधा और सम्मानपूर्ण जीवन की दिशा में नई मजबूती प्राप्त होगी।