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संघर्ष से सफलता तक : बीजापुर की महिलाओं को मिले सपनों के नए पंख

नक्सल मुक्त बीजापुर में विकास की नई सुबह, पुनर्वासित महिलाओं को सिलाई प्रशिक्षण से मिल रहा रोजगार का अवसर रायपुर, कभी नक्सल हिंसा की छाया से प्रभावित रहा बीजापुर अब विकास, विश्वास और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है। माओवाद के अंत के बाद जिला तेजी से मुख्यधारा की ओर बढ़ रहा है। सुरक्षाबलों के साहस, शासन की प्रभावी पुनर्वास नीति और प्रशासन की सतत पहल ने बीजापुर को शांति एवं विकास के नए दौर में प्रवेश कराया है। राज्य शासन की पुनर्वास नीति केवल आत्मसमर्पण या पुनर्वास तक सीमित नहीं रही, बल्कि पुनर्वासित परिवारों को आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बीजापुर जिले की पुनर्वासित महिलाओं को मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत स्थानीय गारमेंट फैक्ट्री में सिलाई प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना से बदल रही जिंदगी मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाएं अब आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। उन्हें आधुनिक सिलाई तकनीक, मशीन संचालन और परिधान निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विशेष बात यह है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिलाओं को उसी गारमेंट फैक्ट्री में रोजगार भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस पहल से महिलाओं को न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। प्रशिक्षण पूर्ण होने के पश्चात उन्हें प्रतिमाह लगभग 5 से 8 हजार रुपये तक का पारिश्रमिक दिया जाएगा।  जिससे वे आर्थिक रूप से निरंतर सशक्त बनी रहें। आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम पुनर्वासित महिलाओं के चेहरे पर अब भविष्य को लेकर नई उम्मीद और आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है। जो महिलाएं कभी हिंसा और असुरक्षा के माहौल में जीवन व्यतीत कर रही थीं, वे आज रोजगार और सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। यह पहल केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए महिलाओं को सम्मानजनक जीवन देने का सशक्त माध्यम बन रही है। बीजापुर बन रहा विकास और विश्वास का प्रतीक बीजापुर में चल रही पुनर्वास एवं कौशल विकास की यह पहल शासन की संवेदनशील सोच और दूरदर्शी नीति का उदाहरण है। जिला प्रशासन द्वारा पुनर्वासित परिवारों को शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नक्सलवाद से मुक्त होकर अब बीजापुर विकास, शांति और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बना रहा है। पुनर्वासित महिलाओं की सफलता यह संदेश दे रही है कि अवसर और सहयोग मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है।

नियद नेल्लानार योजना का असर: पालनार के ग्रामीणों को अब गांव में ही मिल रही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं

रायपुर नियद नेल्लानार योजना: बीजापुर के पालनार में स्वास्थ्य क्रांति, 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' से सुदूर वनांचल के ग्रामीणों को मिल रही नई सौगात मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के कायाकल्प के लिए संचालित 'नियद नेल्लानार' (आपका अच्छा गाँव) योजना अब धरातल पर सार्थक परिणाम दे रही है। जिला बीजापुर के दुर्गम क्षेत्र ग्राम पालनार में आयुष्मान आरोग्य मंदिर के खुलने से 28 जनवरी 2026 से अब तक सैकड़ों ग्रामीणों को उनके घर के समीप ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। रिकॉर्ड ओपीडी और इनडोर सुविधाएं पालनार और आस-पास के गांवों में स्वास्थ्य के प्रति आई इस जागरूकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस अल्प अवधि में ही कुल 747 मरीजों ने ओपीडी (OPD) सेवाओं का लाभ उठाया है। इसके अलावा, आवश्यकतानुसार 16 मरीजों को भर्ती कर उनका सफलतापूर्वक उपचार किया गया। पहले जिन ग्रामीणों को छोटी बीमारियों के लिए भी मीलों पैदल चलना पड़ता था, उन्हें अब विशेषज्ञ परामर्श और निःशुल्क दवाएं स्थानीय स्तर पर ही मिल रही हैं। मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षित प्रसव और त्वरित सेवाएं संवेदनशील क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस केंद्र में अब तक 5 सुरक्षित प्रसव कराए गए हैं। शासन की मंशा के अनुरूप, नागरिकों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने हेतु नवजातों के जन्म प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए। साथ ही, क्षेत्र की 15 गर्भवती महिलाओं (ANC) और 18 धात्री माताओं (PNC) की नियमित स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण सुनिश्चित किया गया है। गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान (NCD स्क्रीनिंग) योजना के तहत गैर-संचारी रोगों (NCD) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पालनार केंद्र में अब तक 250 ग्रामीणों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की गई, जिसमे 25 मरीज उच्च रक्तचाप (Hypertension) से ग्रसित पाए गए। बारह मरीज मधुमेह (Diabetes) से पीड़ित मिले। एक ग्रामीण में ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण मिलने पर तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्र हेतु रेफर किया गया।  पालनार में आयुष्मान आरोग्य मंदिर की सफलता यह दर्शाती है कि शासन की योजनाएं अब अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं। इससे न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है, बल्कि ग्रामीणों का प्रशासन के प्रति विश्वास भी सुदृढ़ हुआ है।

एंटी माओवादी ऑपरेशन में सफलता: बीजापुर में दो नक्सलियों का खात्मा, एसएलआर-इंसास बरामद

बीजापुर बीजापुर जिले के इंद्रावती नदी क्षेत्र में माओवादियों की मौजूदगी की सूचना पर एक संयुक्त टीम ने एंटी माओवादी अभियान शुरू किया। अभियान के दौरान बृहस्पतिवार सुबह इंद्रावती नदी क्षेत्र में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई। बीजापुर एसपी डॉ. जितेंद्र यादव ने बताया कि मुठभेड़ के बाद की गई सर्चिंग में वर्दीधारी दो माओवादियों के शव बरामद किए गए। मुठभेड़ स्थल से एक एसएलआर राइफल, एक इंसास राइफल और एक 12 बोर राइफल सहित विस्फोटक तथा अन्य माओवादी सामग्री बरामद की गई है।  

नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता: बीजापुर में 12 माओवादी हथियारों के साथ पुलिस के सामने झुके

बीजापुर जिले में नक्सल विरोधी अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “नियद नेल्लानार” और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर एक डीवीसीएम सहित कुल 12 सशस्त्र माओवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 08 महिला माओवादी और 04 पुरुष माओवादी शामिल हैं। इन सभी माओवादियों पर कुल 54 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने अपने साथ एक AK-47 और दो SLR राइफल भी पुलिस को सौंपे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले सभी 12 माओवादी फायरिंग, आईईडी ब्लास्ट, आगजनी सहित कई गंभीर नक्सली घटनाओं में शामिल रहे हैं। यह आत्मसमर्पण बस्तर आईजी पी. सुंदरराज, सीआरपीएफ डीआईजी देवेंद्र सिंह नेगी, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यूलेण्डन यार्क, डीएसपी शरद जायसवाल, उप पुलिस अधीक्षक विनीत साहू सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ। आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत अधिकारियों ने प्रत्येक को 50-50 हजार रुपये की नगद सहायता राशि प्रदान की। इस साल अब तक 888 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण पुलिस ने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक कुल 888 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, वहीं 1163 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा 231 माओवादी अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए हैं। पी. सुंदरराज, आईजी, बस्तर ने कहा, सरकार की योजनाएं और पुनर्वास नीति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव ला रही है। लगातार माओवादी मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

बीजापुर में फोर्स ने IED बरामद कर माओवादी बंकर को किया धवस्त

बीजापुर. जिले में माओवादियों के खिलाफ दो बड़े ऑपरेशन हुए, जिसमें सुरक्षा बलों ने भोपालपटनम और एडेड पुलिस स्टेशन के इलाकों में अलग-अलग कार्रवाई करके कई इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) और माओवादियों का एक ठिकाना सफलतापूर्वक बरामद किया। यह बरामदगी दिखाती है कि सुरक्षा बल इस क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ लगातार सतर्क हैं और सक्रिय कार्रवाई कर रहे हैं। पहले अभियान में, माड़ेद थाना पुलिस और बम निरोधक दस्ते (बीडीएस) ने 10-10 किलो वजनी दो कमांड आईईडी बरामद किए। ये आईईडी माओवादियों ने सोमनपल्ली–बांदेपारा कच्ची सड़क पर एक के बाद एक लगाई थीं, ताकि सुरक्षा बलों के काफिले को निशाना बनाया जा सके और आवाजाही में बाधा डाली जा सके। पुलिस और बीडीएस टीम ने सावधानीपूर्वक कार्रवाई करते हुए इन विस्फोटकों को सुरक्षित तरीके से हटाया। बाद में बीजापुर से आई बीडीएस टीम ने सभी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए मौके पर ही इन्हें नष्ट कर दिया, जिससे किसी भी जवान या आम नागरिक को नुकसान न हो। वहीं, दूसरे अभियान में भोपलपटनम थाना क्षेत्र के तहत कैंप कांडलापार्टी-2 से केरिपु 214 बटालियन और जिला बल की संयुक्त टीम ने कोंडापडगु जंगल क्षेत्र में सर्च और डी-माइनिंग अभियान चलाया। इस दौरान टीम को 2-2 किलो वजनी दो प्रेशर आईईडी मिले। केरिपु 214 बीडीडी टीम ने इन्हें तुरंत मौके पर ही नष्ट कर दिया, जिससे किसी बड़ी घटना को टाल दिया गया। इसके अलावा, कोंडापडगु इलाके में तलाशी के दौरान सुरक्षा बलों को जमीन के नीचे दबे हुए दो सफेद ड्रम भी मिले। इन ड्रमों में माओवादियों द्वारा जमा किया गया राशन था, जिसे जंगल में मौजूद उनके कैडरों के लिए रखा गया था। इस राशन की बरामदगी से इलाके में माओवादियों की सप्लाई व्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की बरामदगी से साफ होता है कि माओवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान प्रभावी हैं और सुरक्षा बल उनके नेटवर्क को कमजोर करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बीजापुर के संवेदनशील इलाकों में माओवादी प्रभाव को खत्म करने के लिए लगातार निगरानी और तलाशी अभियान जारी हैं। इन विस्फोटकों को निष्क्रिय करना और माओवादियों के संसाधन जब्त करना सुरक्षा बलों की शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अधिकारियों ने दोहराया कि माओवादी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी और जिले में किसी भी तरह की अशांति फैलाने की कोशिश को सख्ती से रोका जाएगा।

सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता: बीजापुर मुठभेड़ में 5 लाख का इनामी ACM फगनू माड़वी मारा गया

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलियों और जवानों के बीच मुठभेड़ जारी है. भैरमगढ़ एरिया के अडवारा के जंगलों में हो रही मुठभेड़ को लेकर बड़ी अपडेट निकलकर सामने आया है. डीआरजी जवानों ने एक नक्सली को ढेर कर दिया है. मारे गए नक्सली की शिनाख्ती ACM फगनू माड़वी उम्र 35 वर्ष निवासी गोरना के रूप में हुई है. उसपर 5 लाख रुपए का ईनाम घोषित था. दरअसल, भैरमगढ़ अन्तर्गत इन्द्रावती क्षेत्र में आदवाड़ा- कोटमेटा के जंगलों में माओवादियों के मौजूदगी की जानकारी मिली थी. इस इनपुट पर बीजापुर से DRG जवानों की टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया. अभियान के दौरान जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हो गई. शुक्रवार की सुबह से दोनों ओर से रुक-रुककर गोलीबारी हो रही है. कैसे हुई जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ ? पुलिस अधीक्षक, बीजापुर डॉ. जितेन्द्र यादव ने बताया कि इस अभियान के दौरान 19 दिसंबर की सुबह 06 बजे से DRG बीजापुर और माओवादियों के बीच रुक-रुक कर फायरिंग जारी है. अब तक सर्च ऑपरेशन के दौरान मुठभेड़ स्थल से 1 माओवादी का शव, 303 रायफल, 9MM पिस्टल सहित विस्फोटक सामग्री एवं माओवादी सामग्री मौके से बरामद हुई है. बरामद हथियार :-     303 रायफल, 01 मैग्जीन 03 राउण्ड.     9mm पिस्टल, 01 मैग्जीन, 09 राउण्ड.     स्कैनर सेट 02 नग.     रेडियो, मेडिकल किट, कार्डेक्स वायर, माओवादी पिटठू, पिस्टल पोच, माओवादी पर्चा आदि सामग्री बरामद. अंतिम सांसे गिन रहा माओवाद बस्तर रेंज के आईजीपी सुन्दरराज पट्टलिंगम ने कहा कि वर्ष 2025 में सुरक्षा बलों की प्रभावी और  समन्वित कार्रवाई के परिणामस्वरूप बस्तर में माओवाद अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है. उन्होंने कहा कि माओवादी संगठन की पूरी संरचना बिखर चुकी है और हिंसा या दहशत फैलाने के उनके किसी भी प्रयास का अब कोई असर नहीं रह गया है. आईजीपी ने सभी सक्रिय माओवादियों से हिंसा का मार्ग त्यागकर सरकार की आत्मसमर्पण और  पुनर्वास नीति का लाभ उठाने की अपील की. बता दें कि गोलापल्ली के जंगलों में गुरुवार को डीआरडी जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी. जिसमें जवानों ने 3 नक्सलियों को ढेर किया था. एनकाउंटर में माड़वी जोगा उर्फ मुन्ना उर्फ जगत, एरिया कमेटी मेंबर (एसीएम), किस्टाराम एरिया कमेटी, सोधी बंदी, एसीएम, किस्टाराम एरिया कमेटी और नुप्पो बाजनी, एसीएम (महिला), किस्टाराम एरिया कमेटी मार गिराए गए थे.

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सुरक्षाबलों और नक्सलियों आमने-सामने, इलाके में मुठभेड़ जारी

बीजापुर नक्सलवाद पर प्रहार जारी है. लगातार दूसरे दिन डीआरजी जवानों ने कार्रवाई की है. सुकमा के बाद बीजापुर के भैरामगढ़-इंद्रावती के जंगलों में नक्सलियों को जवानों ने घेर लिया है. शुक्रवार की सुबह से नक्सलियों और जवानों के बीच रुक-रुककर फायरिंग हो रही है. जानकारी के अनुसार, भैरमगढ़ – इन्द्रावती क्षेत्र के जंगल पहाड़ों में माओवादियों की मौजूदगी की जानकारी मिली थी. इस इनपुट पर बीजापुर से DRG जवानों की टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया. अभियान के दौरान जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हो गई. शुक्रवार की सुबह से दोनों ओर से रुक-रुककर गोलीबारी हो रही है. बता दें कि गोलापल्ली के जंगलों में गुरुवार को डीआरडी जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी. जिसमें जवानों ने 3 नक्सलियों को ढेर किया था. एनकाउंटर में माड़वी जोगा उर्फ मुन्ना उर्फ जगत, एरिया कमेटी मेंबर (एसीएम), किस्टाराम एरिया कमेटी, सोधी बंदी, एसीएम, किस्टाराम एरिया कमेटी और नुप्पो बाजनी, एसीएम (महिला), किस्टाराम एरिया कमेटी मार गिराए गए थे.

कोर जोन में सुरक्षा का विस्तार: बीजापुर–नारायणपुर के पहुंचविहीन गांव अब जुड़े

जगदलपुर एक ओर जहां जवान नक्सलियों के माड़ में घुसकर उन्हें मुहतोड़ जवाब देने के साथ ही उनके कोर जोन में लगातार सुरक्षा कैम्प का निर्माण कर रहे है, जवानों के इस हौसले और ग्रामीण क्षेत्रो में खुल रहे कैम्प से अब ग्रामीण भी राहत की सास ले रहे है, इसी तारतम्य में जवानों ने  नक्सलियों के सबसे सेफ जोन पल्लेवाया में नवीन कैम्प खोलकर ग्रामीणों को राहत पहुँचाया। बता दें कि दंतेवाड़ा जिले के पल्लेवाया में नवीन सुरक्षा कैम्प खोला गया, जिसके बारे में आला अधिकारियों ने बताया कि अति नक्सल प्रभावित बीजापुर तथा अबूझमाड़ क्षेत्र के ग्राम पल्लेवाया में जिला दंतेवाड़ा पुलिस तथा CRPF 165 वी वाहिनी द्वारा नया फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (F.O.B.) कैम्प खोला गया है, इसे छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजना नियद नेल्लानार के तहत इस क्षेत्र के ग्रामीणों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने एवं शासन की योजनाओं से लाभ पहुँचाने के  उद्देश्य से खोला गया है, यह इलाका कोई समय मे  माओवादियों के कोर जोन के रूप में पहचान बना चुका था, जिसको देखते हुए आला अधिकारियों के द्वारा यह कैंप स्थापित किया गया है, इस कैंप की स्थापना से जिला बीजापुर तथा नारायणपुर के अब तक पहुंचविहीन गांवों को जोड़ा गया है, पल्लेवाया कैम्प से आसपास के ग्रामीणों को अब सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, स्वास्थ्य केंद्र, पीडीएस दुकानें, शिक्षा एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी,  नवीन सुरक्षा कैम्प की स्थापना और वर्तमान में तमाम विपरीत परिस्थिति के बावजूद सुरक्षा बलों द्वारा निर्माण कार्य की गति में कोई कमी नहीं आई है। कैंप स्थापना के दौरान नक्सली स्मारक भी ध्वस्त किए गए, सभी जवान, जनता के हित को ध्यान में रखते हुए दिन-रात मेहनत करके उन्हें सभी आधारभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, यह एफओबी कठिन परिस्थितियों के बीच कैम्प स्थापित किया गया, इस बेस की स्थापना अबूझमाड़ के भीतरी हिस्सों में, जो लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद (LWE) से प्रभावित रहे हैं, सुरक्षा और शासन की पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

रुक-रुककर फायरिंग से तनाव, सर्चिंग के बाद सामने आएगी क्षति का पूरा विवरण

बीजापुर  एक बार फिर नक्सलियों के साथ सुरक्षा बल की मुठभेड़ जारी है. अबकी बार भैरमगढ़ क्षेत्रांर्तगत ग्राम हकवा के जंगलों में मुठभेड़ चल रही है. बीजापुर पुलिस ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि डीआरजी/एसटीएफ/कोबरा की संयुक्त टीम की नक्सलियों के साथ रुक-रुक कर मुठभेड़ चल रही है. इसके साथ ही सुरक्षाबलों जवानों का सर्चिंग अभियान जारी है.

विकास की नई राह: बीजापुर के माओवाद प्रभावित गांवों में पहली बार लगा मेगा हेल्थ कैंप

989 ग्रामीणों को मिला उपचार का लाभ रायपुर, कभी माओवाद की छाया में सिमटे बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक के इन्द्रावती नदी पार बसे गांवों में अब विकास की नई सुबह दिखने लगी है। छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति 2025 के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर नजर आने लगे हैं। बड़ी संख्या में माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद अब इन दुर्गम इलाकों में प्रशासन ने पहली बार सात गांवों में एक साथ मेगा हेल्थ कैंप का आयोजन किया, जिसने ग्रामीणों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगा दी। इस अभियान में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम शामिल रही। टीम ने उसपरी, बेलनार, सतवा, कोसलनार, ताड़पोट, उतला और इतामपार गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाए। कुल 989 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। कैंप में सामान्य जांच के 777, रक्तचाप 371, मुख कैंसर 344, ब्रेस्ट कैंसर 112, नेत्र जांच 199, दंत जांच 154, टीकाकरण 14, संपूर्ण टीकाकरण 8, मलेरिया 156, क्षय रोग 7 तथा उल्टी-दस्त के 24 प्रकरणों की जांच की गई। इनमें 54 वरिष्ठ नागरिक भी शामिल रहे। विशेषज्ञों ने एक बालक को हृदय रोग से ग्रस्त पाया, जिसे ‘चिरायु योजना’ के तहत उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी। कैंप के दौरान बीमार ग्रामीणों का मौके पर ही उपचार कर मुफ्त दवाइयों का वितरण किया गया। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुरूप साहू और डॉ. बी.एस. साहू ने बताया कि अब दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ हो रही हैं, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है। ग्रामीणों में भी अब भय की जगह विश्वास और आशा का माहौल दिखाई दे रहा है। वे शासन-प्रशासन से जुड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के प्रति सजग हो रहे हैं। बीजापुर कलेक्टर श्री संबित मिश्रा ने स्वास्थ्य विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा “शासन के निर्देशानुसार प्रशासन अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए संकल्पित है। ‘नियद नेल्लानार योजना’ के तहत अंदरुनी क्षेत्रों में विकास कार्यों में तेजी आई है और प्रशासन की टीमें पूरी तत्परता से काम कर रही हैं।”जिससे बीजापुर में अब सकारात्मक बदलाव नजर आ रहे है। बीजापुर में यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि अब माओवाद नहीं, मुख्यधारा और विकास ही बीजापुर की नई पहचान बनेगा।