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Credit Card Rule Change: 1 अप्रैल से लागू होंगे नए नियम, जानें क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों के लिए क्या हैं बड़े बदलाव

मुंबई  अगर आप भी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो यह जानकारी आपके बहुत काम की है. 1 अप्रैल 2026 से क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में कुछ बड़े बदलाव होने जा रहे हैं. ये बदलाव इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत किए जा रहे हैं. आसान भाषा में कहें तो अब सरकार आपके क्रेडिट कार्ड के खर्चों पर पैनी नजर रखने वाली है।  1. बहुत ज्यादा खर्च किया तो देना होगा हिसाब अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड से साल भर में 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा का पेमेंट करते हैं, तो सावधान हो जाइए. अब बैंक इसकी जानकारी सीधे इनकम टैक्स विभाग को देंगे. यही नहीं, अगर आप विदेश यात्राओं पर मोटा पैसा खर्च करते हैं, तो उस पर भी नजर रहेगी.  मिल सकता है नोटिस भी  पेच कहां है? अगर आपका साल भर का खर्च आपकी कमाई, जो आपने टैक्स रिटर्न में दिखाई है, से बहुत ज्यादा निकला, तो इनकम टैक्स विभाग आपसे पूछ सकता है कि इतना पैसा आया कहां से? और आपको नोटिस भी मिल सकता है।  2. बिना पैन कार्ड के होगी परेशानी 1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड और पैन कार्ड का नियम सख्त होने वाला है. अब बिना पैन नंबर के कोई भी बैंक नया क्रेडिट कार्ड जारी नहीं करेगा. जिनके पास पहले से कार्ड है, उन्हें भी इसे लिंक करना होगा. इसका मतलब है कि आपका हर छोटा-बड़ा खर्च अब आपकी टैक्स प्रोफाइल से जुड़ जाएगा।  3. ऑफिस के कार्ड से पर्सनल शॉपिंग पड़ेगी भारी कई लोगों को अपनी कंपनी की तरफ से क्रेडिट कार्ड मिलता है. अब तक लोग इससे ऑफिस के काम के साथ-साथ कभी-कभार अपना निजी खर्च भी कर लेते थे. लेकिन अब अगर आपने कंपनी के कार्ड से अपनी पर्सनल शॉपिंग, फिल्म की टिकट या पर्सनल ट्रिप का भुगतान किया, तो सरकार उसे आपकी एक्स्ट्रा कमाई मानेगी।  हर बिल रखें संभाल कर! वह पैसा आपकी सैलरी में जोड़ दिया जाएगा और उस पर आपको टैक्स देना होगा. अब आपको हर बिल संभाल कर रखना होगा ताकि साबित कर सकें कि खर्च ऑफिस के काम के लिए था या खुद के लिए।  4. क्रेडिट कार्ड से भरिए इनकम टैक्स अब आप अपना इनकम टैक्स भरने के लिए नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड के चक्कर छोड़कर क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर टैक्स भरने के समय हाथ तंग है, तो कार्ड से पेमेंट कर दीजिए और बाद में बैंक को चुकाते रहिए. याद रखें कि बैंक इस पर प्रोसेसिंग फीस वसूल सकता है और अगर आपने समय पर कार्ड का बिल नहीं भरा, तो भारी ब्याज भी लग सकता है।  5. पते के सबूत के तौर पर इस्तेमाल अगर आपके पास बिजली बिल या कोई और पक्का कागजात नहीं है, तो अब आपका क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट पते के सबूत के तौर पर काम आएगा. अगर आपको पैन कार्ड बनवाना है या उसमें कुछ अपडेट कराना है, तो आप अपना लेटेस्ट क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट दे सकते हैं, बशर्ते उस पर आपका सही पता लिखा हो।  ध्यान रखने वाली बात! अगर आप सामान्य यूजर हैं जो महीने के 20-50 हजार खर्च करते हैं, तो आपको डरने की जरूरत नहीं है. लेकिन अगर आप हाई-वैल्यू यूजर हैं, तो अपने बिल और टैक्स रिटर्न का तालमेल बिठाकर चलें।     

भोजशाला विवाद अब सुप्रीम कोर्ट में, मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट की प्रक्रिया पर सवाल उठाए

धार धार के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में चल रहे विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाली कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच की कार्यवाही से असंतुष्टि जताते हुए देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है।  सुनवाई की तारीख को लेकर आपत्ति मुस्लिम पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष आवेदन प्रस्तुत किया गया है। इस आवेदन में मांग की गई है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 2 अप्रैल को होने वाली प्रस्तावित सुनवाई से पहले, उनकी आपत्तियों पर 1 अप्रैल को ही विचार किया जाए। सोसायटी का मानना है कि उनकी दलीलों को सुने बिना प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उचित नहीं है। सर्वे की वीडियोग्राफी पर अड़ा पेंच मुस्लिम पक्ष का मुख्य तर्क यह है कि 11 मार्च को हाईकोर्ट में प्रस्तुत उनके आवेदन पर 16 मार्च को उचित सुनवाई नहीं हुई। उनकी प्रमुख मांग है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा भोजशाला परिसर में किए जा रहे वैज्ञानिक सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी के फुटेज उन्हें उपलब्ध कराए जाएं। आवेदन में यह भी कहा गया है कि हाईकोर्ट ने पूर्व में उनकी याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना था, जिसके कारण उन्हें शीर्ष अदालत की शरण लेनी पड़ी। सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने बीते 11 मार्च को एएसआई द्वारा किए जा रहे सर्वे की वीडियोग्राफी उपलब्ध कराने की आधिकारिक मांग की थी। मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि 16 मार्च को हुई पिछली सुनवाई के दौरान इस महत्वपूर्ण विषय पर न तो कोई चर्चा की गई और न ही अदालत की ओर से कोई ठोस आदेश पारित किया गया।     जजों के निरीक्षण के बाद बढ़ी सरगर्मी हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी ने भारी सुरक्षा के बीच धार पहुंचकर भोजशाला का बारीकी से निरीक्षण किया था। जजों ने एएसआई के अधिकारियों से सर्वे की प्रगति और परिसर के भीतर मंगलवार को हनुमान चालीसा/पूजा और शुक्रवार को नमाज के आयोजनों की व्यवस्थाओं पर विस्तृत जानकारी ली थी। इस निरीक्षण के तुरंत बाद मुस्लिम पक्ष का सुप्रीम कोर्ट जाना मामले की गंभीरता को दर्शाता है। 2 अप्रैल की सुनवाई क्यों है अहम? हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर 2 अप्रैल को होने वाली सुनवाई ऐतिहासिक साक्ष्यों और एएसआई की प्रारंभिक रिपोर्ट पर केंद्रित हो सकती है। मुस्लिम पक्ष चाहता है कि इस सुनवाई से पहले 1 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट उनकी दलीलें सुन ले, ताकि हाईकोर्ट की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। यह मामला न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि एएसआई की कार्यप्रणाली और डिजिटल साक्ष्यों की स्वीकार्यता पर भी बड़ा कानूनी सवाल खड़ा करता है। याचिका की वैधता पर उठाए सवाल कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा दायर की गई मूल याचिका की वैधता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका तर्क है कि यह याचिका सुनवाई के योग्य ही नहीं है, इसके बावजूद मामले की कार्यवाही को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है। इन्हीं तकनीकी और कानूनी आधारों को मुख्य बिंदु बनाते हुए अब सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई है। वर्तमान में सभी की निगाहें सर्वोच्च न्यायालय के आगामी निर्णय पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाता है।

PM E-Drive योजना: इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए सरकार ने बदले सब्सिडी के नियम

 नई दिल्ली देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. अब आम लोगों को इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर खरीदने पर मिलने वाली सब्सिडी का फायदा पहले से ज्यादा समय तक मिलेगा. इस फैसले से न सिर्फ ईवी खरीदना सस्ता होगा, बल्कि बाजार में इसकी मांग भी और तेज होने की उम्मीद है।  क्या हुआ है बदलाव सरकार ने प्राइम मिनिस्टर इलेक्ट्रिक ड्राइव रेवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल इन्हैंसमेंट (PM E-Drive) स्कीम के तहत सब्सिडी की समय सीमा में बदलाव किया है. भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी नए नोटिफिकेशन के अनुसार, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर मिलने वाली सब्सिडी अब 31 जुलाई 2026 तक दी जाएगी. वहीं, इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के लिए यह लाभ 31 मार्च 2028 तक मिलता रहेगा. यह योजना पहले 31 मार्च 2026 तक खत्म होने वाली थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 2028 तक कर दिया गया है. खास बात यह है कि टू-व्हीलर के लिए 4 महीने का एक्स्ट्रा टाइम दिया गया है।  अक्टूबर 2024 में शुरू हुई इस स्कीम का कुल बजट 10,900 करोड़ रुपये रखा गया है. इसका मकसद इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, बस, ट्रक और एंबुलेंस की खरीद को बढ़ावा देना है. साथ ही देश में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना भी इसका अहम हिस्सा है. इस योजना के तहत 3,679 करोड़ रुपये सीधे सब्सिडी के रूप में दिए जाने हैं, जबकि 7,171 करोड़ रुपये पब्लिक चार्जिंग और ई-बस जैसी सुविधाओं पर खर्च किए जाएंगे।  सब्सिडी में कटौती जहां एक तरफ सरकार ने सब्सिडी की समय-सीमा बढ़ाई है, वहीं इसकी रकम में कटौती भी की है. जिसका सीधा आम लोगों के इलेक्ट्रिक वाहन खरीदारी पर पड़ेगा. 1 अप्रैल 2025 से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर सब्सिडी घटाकर 2,500 रुपये प्रति kWh कर दी गई है, जो अधिकतम 5,000 रुपये है. यानी इलेक्ट्रिक स्कूटर या बाइक खरीदने वालों को ज्यादा से ज्यादा 5,000 रुपये तक का लाभ मिलेगा. पहले यह 5,000 रुपये प्रति kWh और अधिकतम 10,000 रुपये तक थी. आमतौर पर बाजार में उपलब्ध इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कम से कम 2kWh बैटरी पैक के साथ आते हैं. ऐसे में लोगों को वाहनों पर कम से कम 10,000 रुपये तक का बेनिफिट जरूर मिल जाता था।  इसी तरह, इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर पर भी सब्सिडी कम कर दी गई है. अब यह 2,500 रुपये प्रति kWh और अधिकतम 12,500 रुपये प्रति वाहन है, जो पहले 25,000 रुपये तक मिलती थी. इसलिए सब्सिडी की समय सीमा भले ही बढ़ी हो लेकिर सब्सिडी के रूप में मिलने वाली रकम कम हो गई है. दरअसल, सरकार सिलसिलेवार ढंग से सब्सिडी खत्म पर विचार कर रही है. इसलिए धीमें-धीमें इसे कम किया जा रहा है।  भारी उद्योग मंत्रालय ने 5 फरवरी 2026 तक PM E-Drive योजना के तहत वाहन निर्माताओं को 1,182.32 करोड़ रुपये की राशि वापस की है. यह पैसा उन इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर दी गई छूट के बदले लौटाया गया है, जो 1 अप्रैल 2024 के बाद रजिस्टर्ड हुए हैं. अब तक 14,39,224 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर इस योजना का लाभ उठा चुके हैं।  कितने वाहनों को मिलेगा फायदा इस योजना के तहत देश भर में 24.79 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, 3.16 लाख थ्री-व्हीलर और 14,028 बस और ट्रक को सपोर्टै देना है. इसके साथ ही देशभर में 88,500 चार्जिंग स्टेशन लगाने का भी टार्गेट रखा गया है. 27 जनवरी 2026 तक इस योजना के तहत 22.12 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बिक चुके हैं. इनमें 19.19 लाख टू-व्हीलर और 2.93 लाख थ्री-व्हीलर शामिल हैं. इसके लिए कंपनियों को अब तक 1,703 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा चुकी है।  इलेक्ट्रिक बस और चार्जिंग इंफ्रा पर जोर सरकार इलेक्ट्रिक बसों और चार्जिंग नेटवर्क को भी तेजी से बढ़ा रही है. 4,391 करोड़ रुपये की लागत से 14,028 इलेक्ट्रिक बसें बड़े शहरों में चलाई जाएंगी. इनमें बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणे और सूरत जैसे शहर शामिल हैं. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत 22,100 फास्ट चार्जर, 1,800 बस चार्जर और 48,400 टू और थ्री-व्हीलर चार्जिंग पॉइंट लगाने का टार्गेट है।