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नदी जोड़ो परियोजनाओं से बदल रही है किसानों की तकदीर और मध्यप्रदेश की तस्वीर

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश की तीन अंतर्राज्यीय सिंचाई परियोजनाएं किसानों की समृद्धि और प्रदेश की तरक्की का आधार बन रही हैं। इन परियोजनाओं से जब किसान के खेतों तक पानी पहुँचेगा तो मिट्टी सोना उगलेगी। किसानों को भरपूर पानी मिलेगा, जिससे वे एक वर्ष में तीन-तीन फसलें ले सकेंगे। तीन पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के साथ प्रदेश में तीन बड़ी अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं पर तेजी से कार्य हो रहा है। उत्तर प्रदेश के साथ केन-बेतवा लिंक परियोजना, राजस्थान के साथ पार्वती-चंबल-कालीसिंध परियोजना और महाराष्ट्र के साथ मेगा-तापी अंडरग्राउंड वॉटर रिचार्ज परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर मध्यप्रदेश में कृषि, उद्योग, पेयजल के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध होगा। इन परियोजनाओं की विशेषता यह है कि इन पर आने वाली लागत का 90% खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। वर्तमान में मध्यप्रदेश का सिंचाई रकबा लगभग 55 लाख हेक्टेयर है। वर्ष 2028-29 तक इसे 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य मध्यप्रदेश सरकार ने रखा है। "केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना" अंतर्राज्यीय नदियों को जोड़ने की दिशा में केन्द्र सरकार, मध्यप्रदेश एवं उत्तर प्रदेश सरकार मिल कर देश की प्रथम अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना "केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना" का निर्माण कर रही है। इसकी कुल लागत 44,604 करोड़ रूपये है। मध्यप्रदेश के कार्यांश के लिए केन-बेतवा लिंक परियोजना की लागत 24,293 करोड़ रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति मध्यप्रदेश शासन द्वारा अप्रैल 2024 में जारी की गई। परियोजना के प्रथम चरण में दौधन बांध का प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिसंबर 2025 को शिलान्यास किया गया। परियोजना से दो चरणों में मध्यप्रदेश में 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वार्षिक सिंचाई क्षमता विकसित की जानी है। परियोजना में 126 एम.सी.एम. जल से 10 जिलों की 41 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा प्राप्त होगी। इससे 103 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया जायेगा। परियोजना से 10 जिले छतरपुर, पन्ना, दमोह, सागर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रायसेन, शिवपुरी, दतिया एवं विदिशा लाभान्वित होंगे। साथ ही छतरपुर, टीकमगढ़ एवं निवाड़ी के कुल 42 ऐतिहासिक तालाबों का जीर्णोद्धार भी किया जायेगा। संशोधित पार्वती-कालीसिंध चंबल लिंक परियोजना मध्यप्रदेश राज्य की अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना के अंतर्गत संशोधित पार्वती-कालीसिंध चंबल लिंक को धरातल पर लाने के लिए अनुमानित निर्माण राशि 35 हजार करोड़ रूपये है। इस परियोजना से मध्यप्रदेश राज्य में मालवा और चंबल क्षेत्र के 13 जिलों उज्जैन, गुना, शिवपुरी, श्योपुर, भिंड, मुरैना, सीहोर, शाजापुर, देवास, राजगढ़, मंदसौर, आगर-मालवा एवं इंदौर के 2012 ग्रामों की लगभग 6 लाख 15 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई हेतु जल उपलब्ध होगा। मालवा एवं चंबल क्षेत्र के 11 जिलों की 43 लाख आबादी को 61 एम.सी.एम. जल आरक्षित किया जाकर पेयजल की सुविधा प्राप्त होगी। साथ ही परियोजना से उद्योगों हेतु 17.4 मि.घ.मी. जल उपलब्ध होगा। दिसंबर 2024 में जयपुर में "पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना" का अनुबंध सहमति पत्र (मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट) भारत सरकार राजस्थान एवं मध्यप्रदेश के मध्य हस्ताक्षरित किया गया। पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना अंतर्गत परियोजना समूह की लागत 31479.48 करोड़ रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी की गई है। यह परियोजना मध्यप्रदेश के चंबल और मालवा क्षेत्र के जिलों में जल आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से लगभग 7 लाख 84 हजार कृषकों के जीवन में समृद्धि और खुशहाली आएगी। इस लिंक परियोजना के अंतर्गत 22 वृहद सिंचाई परियोजना के निर्माण के साथ ही 60 वर्ष पुरानी चम्बल दांई तट नहर एवं वितरिका तंत्र के आधुनिकीकरण से मुरैना, भिंड, एवं श्योपुर जिलों के 1205 ग्रामों में 3 लाख 62 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों को सिंचाई का सुनिश्चित लाभ मिलेगा। मेगा तापी रीचार्ज परियोजना मेगा तापी रीचार्ज परियोजना पारंपरिक जल भंडारण के स्थान पर भू-गर्भ जल पुर्नभरण योजना है, जिसका उददेश्य मानसून के दौरान तापी नदी के अतिरिक्त जल को नियंत्रित तरीके से भू-जल भरण के लिये उपयोग किया जाकर भू-जल स्तर में वृद्धि किया जाना है। तापी नदी के दाहिने किनारे सतपुड़ा पर्वत माला के तल पर स्थित बजाड़ा जोन में कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण किया जायेगा। परियोजना की लागत 19 हजार 244 करोड़ है, जिससे बुरहानपुर एवं खण्डवा जिले के 01 लाख 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जायेगी। मई 2025 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडणवीस एवं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मध्य इसे राष्ट्रीय परियोजना के रूप में निर्मित किये जाने की सहमति प्रदान की गई। माइक्रो सिंचाई में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी उल्लेखनीय है कि माइक्रो सिंचाई में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्य है एवं इस पद्धति के माध्यम से जल का अधिकतम उपयोग कर पाइप के माध्यम से प्रत्येक किसान के खेत तक पानी पहुंचाया जाता है। साथ ही ऐसे क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, जहां नहरों से पानी पहुंचाना कठिन हो। वर्तमान में प्रदेश में निर्माणाधीन अधिकतम वृहद एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं में इस पद्धति का उपयोग किया जा रहा है।  

यूएनएफपीए की गुडविल एंबेसडर अभिनेत्री कृति सेनन मध्यप्रदेश पुलिस के सामुदायिक पुलिसिंग मॉडल से हुईं प्रभावित

भोपाल. मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा सामुदायिक पुलिसिंग के अंतर्गत भोपाल के महिला थाने में आयोजित एक प्रभावी एवं संवेदनशील कार्यक्रम में United Nations Population Fund (UNFPA) की गुडविल एंबेसडर कृति सेनन ने सहभागिता कर प्रदेश में संचालित जनोन्मुखी पुलिसिंग मॉडल की सराहना की। कार्यक्रम का मुख्‍य उद्देश्य सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों एवं वंचित समुदायों के सशक्तिकरण हेतु किए जा रहे प्रयासों को प्रदर्शित करना था। कार्यक्रम में सामाजिक संगठनों, सर्वाइवर्स, विद्यार्थियों एवं बच्चों की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे यह आयोजन बहुआयामी एवं प्रभावशाली स्वरूप में सामने आया। कार्यक्रम में स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों द्वारा अपने विचार साझा किए गए, जिसमें ‘आरंभ’ संस्था की अर्चना सहाय एवं ‘संगिनी’ संस्था की प्रार्थना मिश्रा ने सामाजिक मुद्दों पर अपने अनुभव एवं सुझाव प्रस्तुत किए। इसके बाद सर्वाइवर्स के साथ संवाद सत्र आयोजित किया गया, जो कार्यक्रम का सबसे संवेदनशील पक्ष रहा। "नातरा प्रथा" एवं विभिन्न प्रकार की प्रताड़ना से प्रभावित महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए। अभिनेत्री कृति सेनन ने उनसे संवाद कर उनके आत्मविश्वास को सुदृढ़ करने का महती प्रयास किया। कार्यक्रम में बीएसएस कॉलेज के ‘मयार ग्रुप’ द्वारा नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया, जिसमें नशा, नातरा प्रथा एवं बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के दुष्प्रभावों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करते हुए जनजागरूकता का संदेश दिया गया। ‘सृजन कार्यक्रम’ के अंतर्गत थाना छोला क्षेत्र की स्लम बस्ती के बच्चों द्वारा मार्शल आर्ट का प्रदर्शन किया गया। कृति सेनन ने बच्चों के उत्साह एवं आत्मविश्वास की सराहना करते हुए एक बालिका से आत्मरक्षा के कुछ गुर भी सीखे, जिससे बच्चों का मनोबल और अधिक बढ़ा। कार्यक्रम के बाद ब्रांड एंबेसडर कृति सेनन द्वारा थाना परिसर का अवलोकन किया गया, जहां उन्हें सामुदायिक पुलिसिंग की विभिन्न पहल, जनसहभागिता आधारित मॉडल एवं संवेदनशील पुलिसिंग के प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी गई। पुलिस अधिकारियों द्वारा समाज में विश्वास निर्माण, सहयोग एवं सहभागिता आधारित पुलिसिंग के महत्व पर प्रकाश डाला गया। कृति सेनन ने समापन पर ‘शक्ति कैफे’ का भ्रमण कर वहां संचालित गतिविधियों की सराहना की तथा मध्यप्रदेश पुलिस की इस पहल को समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के सशक्तिकरण की दिशा में एक सराहनीय एवं अनुकरणीय प्रयास बताया। यह आयोजन मध्यप्रदेश पुलिस की संवेदनशील एवं जनोन्मुखी कार्य प्रणाली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो समाज में विश्वास, सुरक्षा एवं सहभागिता की भावना को सुदृढ़ करते हुए समावेशी, मानवीय एवं भरोसेमंद पुलिसिंग की दिशा में उसकी सतत् प्रतिबद्धता को दर्शाता है।  

कृषि केवल आजीविका नहीं, हमारी संस्कृति और अर्थव्यवस्था की है धुरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषि केवल आजीविका नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा रही है। कृषि हमारी अर्थव्यवस्था की धुरी है और प्रदेश के समग्र विकास का आधार भी है। उन्होंने कहा कि आज कृषि एक नए मोड़ पर खड़ी है, जहां जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़, मृदा की घटती उर्वरता और बाजार की अस्थिरता जैसी चुनौतियां हमें नई सोच और नवाचार की ओर प्रेरित कर रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के कृषि क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए योजनाओं का विस्तार हुआ है, तकनीक को खेतों तक पहुंचाया गया है और नवाचार को जन-आंदोलन का रूप दिया गया है। “ड्रोन दीदी” जैसी पहल के माध्यम से महिलाएं भी आधुनिक कृषि तकनीक से जुड़ रही हैं, वहीं कृषि सखियों के माध्यम से जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी किसानों तक पहुंचाई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “कृषिः मूलं जीवनम्” का भाव हमारे समाज की जीवन-दृष्टि को व्यक्त करता है। कृषि धन्य है, पवित्र है और जीवन का मूल आधार है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए “समृद्ध किसान-समृद्ध मध्यप्रदेश” की थीम पर पूरे वर्ष 2026 को प्रदेश में कृषि उत्सव मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को भविष्य की कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना और कृषि को लाभकारी, स्थायी तथा तकनीक आधारित रोजगार सृजन मॉडल में परिवर्तित करना है। एग्री स्टैक योजना में म.प्र. अग्रणी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के जीवन को आसान बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग कर रही है। एग्रीस्टैक योजना के अंतर्गत किसानों का संपूर्ण डेटा डिजिटल रूप में उपलब्ध कराया जा रहा है और इस योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी रहा है। डिजिटल किसान डेटा इंटीग्रेशन से किसानों की जमीन, फसल और उत्पादन से जुड़ी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो रही है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। मोबाइल और ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से किसानों को मौसम, बाजार भाव और फसल प्रबंधन से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है। कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की भावना के अनुरूप जय जवान-जय किसान के साथ जय विज्ञान जोड़ा गया था और वर्तमान दौर में इसमें “जय अनुसंधान” को भी जोड़ने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती, कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन और बेहतर मार्केट लिंकेज के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में खेती में नवीन पद्धतियों और फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। रसायन मुक्त खेती, जैविक कृषि और प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि अवशेषों अर्थात पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन, मंडियों के आधुनिकीकरण और कृषि उत्पादों को ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफार्म से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए भी पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में कृषि को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे कृषक परिवारों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सके और शहरी परिवारों को ग्रामीण संस्कृति से परिचित होने का अवसर प्राप्त हो। साथ ही फूड प्रोसेसिंग और एग्री इंडस्ट्री को बढ़ावा देकर किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और प्रदेश के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम के माध्यम से दुग्ध उत्पादन और पशुपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज और कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही सैटेलाइट और ड्रोन सर्वे के माध्यम से फसलों की निगरानी भी की जा रही है। प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स का विस्तार, मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा, पर्यावरण संरक्षण के लिए नरवाई प्रबंधन तथा जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2026 को प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीकों, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से किसानों के लिए लाभकारी कृषि का समग्र विकास सुनिश्चित करना है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से सहायता सीधे किसानों के खातों में पहुंच रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य से किसानों को फसलों का उचित मूल्य मिल रहा है और किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से कम ब्याज पर ऋण की सुविधा मिल रही है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से किसानों की फसलों को सुरक्षा प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नवाचार के साथ कृषि को नई दिशा देने का संकल्प ही प्रदेश के किसानों को समृद्ध बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। किसानों के हित में किये जा रहे कार्य पीएम किसान सम्मान एवं मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत 84 लाख से अधिक किसानों के खातों में प्रतिवर्ष 12 हजार रुपये की सहायता । गेहूं उपार्जन पर 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस। धान पर 4 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर प्रोत्साहन राशि। मूंग-उड़द की एमएसपी पर खरीदी तथा उड़द पर 600 रुपये बोनस । आपदा प्रभावित 24 लाख से अधिक किसानों को 2106 करोड़ रुपये की राहत । पहली बार सोयाबीन का एमएसपी पर उपार्जन और भावांतर योजना में 1500 करोड़ रुपये का भुगतान। सरसों को भी भावांतर योजना में शामिल किया गया । किसानों को 0 प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण। 1.79 करोड़ से अधिक किसानों को फसल बीमा की सुरक्षा। पीएम कुसुम योजना के अंतर्गत 32 लाख किसानों को सोलर पंप। सूर्य मित्र … Read more

‘कचुम्बर’ और ‘ढापा’ जैसे नामों से मिलेगी मुक्ति, राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलेगी नई पहचान

जयपुर राजस्थान में अब सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बच्चों की पहचान भी बदलेगी और वो भी सरकारी पहल के जरिए! जयपुर से आई इस खबर ने शिक्षा जगत के साथ-साथ आम लोगों में भी हलचल मचा दी है। क्या सरकार बच्चों के नाम तय करेगी? या ये एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत है? दरअसल, राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने एक ऐसे अभियान की घोषणा की है, जिसने चर्चा और जिज्ञासा दोनों को जन्म दे दिया है। इस अभियान का नाम है ‘सार्थक नाम अभियान’। सुनने में यह पहल सरल लगती है, लेकिन इसके पीछे की सोच और असर कहीं ज्यादा गहरा है। नाम पर क्यों उठी ये पहल? मंत्री दिलावर के अनुसार, राज्य के कई ग्रामीण इलाकों में बच्चों के ऐसे नाम रख दिए जाते हैं जिनका कोई स्पष्ट अर्थ नहीं होता, या जो आगे चलकर बच्चे के लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकते हैं। जैसे ‘कचुम्बर’, ‘ढापा’ जैसे नाम। सरकार का मानना है कि ऐसे नाम बच्चों में हीन भावना पैदा कर सकते हैं और उनके आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकते हैं। इसी सोच के साथ अब शिक्षा विभाग एक कदम आगे बढ़ते हुए ऐसे बच्चों के लिए “सार्थक और सम्मानजनक” नाम सुझाएगा। कैसे चलेगा ‘सार्थक नाम अभियान’? इस योजना के तहत शिक्षा विभाग 2,000 से 3,000 अर्थपूर्ण नामों की एक सूची तैयार करेगा। इसके बाद स्कूलों के माध्यम से उन बच्चों की पहचान की जाएगी जिनके नाम को “अर्थहीन या असहज” माना जाता है। फिर शुरू होगा असली प्रोसेस अधिकारियों और शिक्षकों द्वारा माता-पिता से संवाद। उन्हें समझाया जाएगा कि उनके बच्चे के लिए एक बेहतर, अर्थपूर्ण नाम क्यों जरूरी है। हालांकि, अंतिम फैसला माता-पिता का ही रहेगा। क्या ये बदलाव आसान होगा? यहीं से कहानी में आता है असली ट्विस्ट। नाम सिर्फ एक पहचान नहीं, बल्कि परिवार, परंपरा और भावनाओं से जुड़ा होता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं क्या ग्रामीण परिवार अपने बच्चों के नाम बदलने के लिए तैयार होंगे? क्या यह पहल सामाजिक स्वीकृति हासिल कर पाएगी? सिर्फ नाम नहीं, शिक्षा व्यवस्था में भी बड़े बदलाव इस घोषणा के साथ ही शिक्षा मंत्री ने कई और बड़े ऐलान भी किए हर बच्चे का दाखिला सुनिश्चित: खानाबदोश (nomadic) समुदाय के बच्चों को बिना दस्तावेज के भी स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा। टॉपर्स का सम्मान 2026 बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने वाले छात्रों को उनके स्कूलों में सम्मानित किया जाएगा और उनकी उपलब्धियों को सोशल मीडिया व बैनर के जरिए प्रचारित किया जाएगा। एलुमनाई मीट की शुरुआत: इस साल से हर सरकारी स्कूल में वार्षिक एलुमनाई मीट होगी, ताकि पुराने छात्र स्कूल के विकास में योगदान दे सकें। प्रिंसिपल की जिम्मेदारी तय: सभी प्रिंसिपल्स को रोजाना क्लासरूम निरीक्षण का निर्देश दिया गया है। नशे पर सख्ती के संकेत: शिक्षा विभाग ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार करेगा जो तंबाकू, गुटखा या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। बदलाव की शुरुआत या नई बहस? ‘सार्थक नाम अभियान’ एक तरफ बच्चों के आत्मसम्मान को मजबूत करने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ यह समाज में एक नई बहस को भी जन्म दे रहा है क्या सरकार को व्यक्तिगत पहचान में दखल देना चाहिए? अब देखने वाली बात यह होगी कि यह अभियान जमीनी स्तर पर कितना सफल होता है और क्या वाकई बच्चों की पहचान को एक नई दिशा मिल पाती है या यह सिर्फ एक सरकारी पहल बनकर रह जाएगी। फिलहाल, राजस्थान में नाम को लेकर शुरू हुई यह नई कहानी आने वाले दिनों में बड़ा सामाजिक बदलाव भी ला सकती है।

धान से आगे बढ़ें किसान: दलहन, तिलहन और सब्जी खेती को बढ़ावा, कॉमन्स पर बनी रणनीति

रायपुर आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव बोरा ने कहा कि कॉमन्स पर जनजातिय समुदायों के अटूट विश्वास उनके सशक्तिकरण से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि जल जंगल, जमीन, संस्कृति और पर्यावरण, विरासत संरक्षण एवं संवर्धन में कॉमन्स की प्रभावी भूमिका है। उन्होंने न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन की बात करें तो स्थानीय लोग नीति-कार्यान्वयन में सबसे आगे हैं। उन्होंने कहा कि नीतिगत बदलाव के लिए सरकार एक समर्पित टास्क फोर्स बनाने की प्रक्रिया में है। इस टास्क फोर्स का उद्देश्य पूरे राज्य में अधिक प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (पेसा) और वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के मध्य संतुलित समन्वय सुनिश्चित करना है। कॉमन्स सम्मेलन संवाद में सांस्कृतिक और पारंपरिक दृष्टिकोणों को केंद्र में रखा गया था, जिसकी शुरुआत पद्मपुरस्कार से सम्मानित जागेश्वर यादव और पांडी राम मंडावी तथा गौर मारिया नृत्य कलाकार सुलक्ष्मी सोरी जैसे सम्मानित अतिथियों के प्रारंभिक उद्बोधनों से हुई। साझा प्राकृतिक संसाधनों (कॉमन्स) के सुशासन और सामुदायिक संरक्षण पर केंद्रित दो दिवसीय “छत्तीसगढ़ कॉमन्स कंवीनिंग” का शुभारंभ आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने किया। कार्यशाला नवा रायपुर ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, सेक्टर-24, में आयोजित हो रहा है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ शासन के जनजातीय विकास विभाग के सहयोग से “प्रॉमिस ऑफ कॉमन्स” पहल के अंतर्गत विभिन्न साझेदार संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है। कल 10 अप्रैल को मुख्य सचिव विकास शील जनजातीय नीति पर संवाद में शामिल होंगे। वहीं समापन सत्र में आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम शामिल होंगे। जल जंगल, जमीन, संस्कृति और पर्यावरण विरासत संरक्षण एवं संवर्धन में कॉमन्स की प्रभावी भूमिका बोरा ने कहा कि इसके अलावा प्राकृतिक संसाधनों और जनजातीय विरासत के बीच गहरे जुड़ाव को पहचानते हुए, एक विशेष स्टूडियो स्थापित करने की योजना पर काम कर रहे हैं। जल्द ही यह प्रोजेक्ट सामने आएगा और यह स्टूडियो पारंपरिक लोक गीतों और स्वदेशी वाद्य यंत्रों की धुन, दस्तावेज़ीकरण, पहचान और कॉपीराइट सुरक्षा के लिए समर्पित होगा। इन साझा संसाधनों के संरक्षण के संबंध में, बोरा ने कहा कि वैश्वीकरण और आधुनिक जीवन शैली जैसे चुनौतियों के बीच संतुलित तरीका अपनाते हुए, साझा ज्ञान का विकास कैसे करें और अपनी आकांक्षाओं, विरासत और भविष्य को कैसे बेहतर बनाएँ। राज्य के विशाल प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में सामुहिक देखरेख की महत्वपूर्ण भूमिका आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने कहा कि यह सम्मेलन संवाद के लिए एक विशाल मंच साबित हुआ है, जिसमें छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के विभिन्न हिस्सों से 300 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें विभिन्न संगठनों के नीति विशेषज्ञ, पंचायतों के प्रतिनिधि, शोधकर्ता और समुदाय के समर्पित सदस्य शामिल हैं। यह विविध समूह छत्तीसगढ़ में कॉमन्स (साझा संसाधन) के रूप में वर्गीकृत 70 लाख एकड़ ज़मीन पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए हैं। इस ज़मीन में जंगल, घास के मैदान और जल निकाय शामिल हैं, जो ग्रामीण और जनजातीय आबादी के लिए जीवनरेखा का काम करते हैं। कॉमन्स कन्विनिंग के पहले दिन, विशेषज्ञों ने राज्य के विशाल प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में सामुहिक देखरेख की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया गया।

मोहला : जिले में आयोजित चावल उत्सव, राशन कार्डधारियों को तीन माह का चावल एक साथ वितरित

मोहला : जिले में आयोजित चावल उत्सव, राशन कार्डधारियों को तीन माह का चावल एक साथ वितरित  पारदर्शिता और समय पर राशन सुनिश्चित करने के लिए जिले में उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा चावल उत्सव  हितग्राहियों के ई-केवायसी और राशन वितरण में सुधार के साथ जिले में हो रहा है चावल उत्सव  जिले की 197 उचित मूल्य दुकानों पर 79,439 राशन कार्डधारियों के लिए खाद्यान्न का आबंटन  मोहला  राज्य शासन के निर्देशानुसार जिले की शासकीय उचित मूल्य दुकानों में चावल उत्सव का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाना तथा पात्र हितग्राहियों को समय पर चावल उपलब्ध कराना है।            चावल उत्सव के दौरान उचित मूल्य दुकानों पर राशन कार्डधारियों को निर्धारित मात्रा में चावल, शक्कर, नमक एवं चना वितरित किया गया। साथ ही हितग्राहियों की ई-केवायसी प्रक्रिया भी पूरी कराई जा रही है, ताकि भविष्य में उन्हें विभिन्न योजनाओं का लाभ सहजता से प्राप्त हो सके। जिले में कुल 197 उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से 79,439 राशन कार्डधारियों के लिए खाद्यान्न का आबंटन किया गया है। इन हितग्राहियों को अप्रैल, मई एवं जून 2026 के लिए चावल एकमुश्त प्रदान किया जाएगा। वहीं, एपीएल कार्डधारियों को उनकी मासिक पात्रता के अनुसार अलग-अलग माह में चावल वितरण किया जाएगा।            चावल उत्सव में स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित अधिकारियों की भी उपस्थिति रही, जिन्होंने कार्यक्रम के सफल संचालन में योगदान दिया। इसी कड़ी में बीपीएल कार्डधारी श्री योगेश कुमार ने शासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि शासकीय उचित मूल्य दुकानों से उन्हें समय पर तीन माह का चावल एकमुश्त प्राप्त हो रहा है। आयोजन के दौरान हितग्राहियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे उपयोगी और हितकारी बताया।

प्रधानमंत्री मोदी के 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को लागू करने के लिए उठाए कदम स्वागत योग्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के प्रावधानों को लागू करने की दिशा में बढ़ाए कदमों का हार्दिक स्वागत किया है। आगामी 16 अप्रैल को संसद की बैठक हो रही है। इस बैठक और विशेष सत्र का आयोजन महिलाओं की भूमिका को सशक्त बनाने का माध्यम बनेगा। मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी के मंत्र पर हो रहा निरंतर कार्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नारी सशक्तिकरण की इस यात्रा को अभूतपूर्व गति मिलेगी। हमारी बेटियां आज हवाई जहाज उड़ा लेती हैं और अंतरिक्ष में भी जाती हैं। जीवन के ऐसे क्षेत्रों में बहनें और बेटियां कार्य कर रही हैं, जिसकी हमने कभी कल्पना नहीं की थी। मध्यप्रदेश में उद्योग व्यवसाय के संचालन, पर्यटक स्थलों पर होम-स्टे के संचालन, टोल टैक्स की वसूली और नगरों एवं ग्रामों में मेयर और सरपंच जैसे पदों पर रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए जनकल्याण के कार्यों में बहनें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री जी के महिला सशक्तिकरण के मंत्र पर निरंतर कार्य हो रहा है। संसद की तीन दिवसीय बैठक ऐतिहासिक सिद्ध होगी उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में पहले नारी शक्ति वंदन अधिनियम सभी दलों की  सहमति से पारित किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने एक संदेश में कहा है कि वर्ष 2029 में जब लोकसभा के चुनाव होंगे तब हमारे देश की नारी शक्ति को प्रतिनिधि के रूप में लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत स्थान मिलना ही चाहिए। इसको लेकर देश में एक सकारात्मक माहौल दिख रहा है। इस विशेष कार्य के लिए 16,17 और 18 अप्रैल को संसद की विशेष बैठक हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संसद की यह तीन दिवसीय बैठक महिला सशक्तिकरण की दृष्टि से ऐतिहासिक सिद्ध होगी। आजादी के 100 साल पूरे होने तक विकसित भारत बनाने में नारी शक्ति की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रहने वाली है। 

मध्य प्रदेश में डेयरी और पशुपालन को मिलेगा बढ़ावा, महोत्सव में दिखेगा आदर्श गौशाला मॉडल और उन्नत नस्लों का दम

भोपाल खेती को लाभकारी बनाने, किसानों को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से रायसेन जिले में “उन्नत कृषि महोत्सव-2026” के अंतर्गत प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव तीन दिन तक चलेगा, जिसमें किसानों को देश के प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। महोत्सव के दौरान विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इससे किसानों को उन्नत खेती, नई तकनीकों और बेहतर उत्पादन के तरीकों की जानकारी दी जाएगी। महोत्सव में पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा स्टॉल लगाया जाएगा, जहां पशुपालकों एवं किसानों को केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही उन्नत पशु एवं कुक्कुट प्रजातियों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें गिर, साहिवाल, थारपारकर गाय, मुर्रा भैंस, कड़कनाथ मुर्गी तथा रंगीन बैकयार्ड बर्ड्स शामिल हैं। इसके साथ ही बकरी पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोजत, बीटल, बारबरी, जमुनापारी एवं सिरोही नस्लों का भी प्रदर्शन किया जाएगा। गौ-संवर्धन बोर्ड प्रस्तुत करेगा आदर्श गौशाला मॉडल मध्यप्रदेश गौ-संवर्धन बोर्ड द्वारा महोत्सव में आदर्श गौशाला का मॉडल प्रस्तुत किया जाएगा। इससे गौशाला स्थापना की दिशा में किए जा रहे बहुआयामी प्रयासों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही निराश्रित गोवंश के बेहतर प्रबंधन, स्वावलंबी गौशाला स्थापना नीति-2025 में किए जा रहे कार्यों और उनकी उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला जाएगा। इसके अतिरिक्त गौशाला उत्पादों जैसे पंचगव्य एवं गौ-शिल्प से संबंधित जानकारी भी किसानों और पशुपालकों को उपलब्ध कराई जाएगी। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने एवं पशुपालकों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से विभाग की विभिन्न प्रचलित योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की जाएगी। इनमें डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना, आचार्य विद्यासागर गौ-संवर्धन योजना, क्षीरधारा ग्राम योजना, कृत्रिम गर्भाधान हेतु संचालित हिरण्यगर्भा अभियान तथा दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान शामिल हैं। इन योजनाओं से पशुपालकों को आधुनिक डेयरी प्रबंधन, उत्पादन वृद्धि और आय संवर्धन के लिए आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। म.प्र. राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम तकनीक का करेगा प्रदर्शन महोत्सव में मध्यप्रदेश राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम, भोपाल द्वारा पशुपालकों को जानकारी देने एवं जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से उन्नत तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें भारत सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों जैसे नेशनल लाइवस्टॉक मिशन, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, सेक्स सॉर्टेड सीमन तकनीक एवं एंब्रियो ट्रांसफर तकनीक का प्रदर्शन शामिल रहेगा। इसके अतिरिक्त चलित पशु चिकित्सा इकाई एंबुलेंस वाहन), राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम तथा राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के संबंध में भी विस्तृत जानकारी पशुपालकों को प्रदान की जाएगी।  

हरियाणा में महिलाओं को राहत: लाडो लक्ष्मी योजना की आय सीमा बढ़ी, ज्यादा परिवार होंगे लाभार्थी

चंडीगढ़. हरियाणा की आधी आबादी को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपनी 'लाडो लक्ष्मी योजना' का दायरा बढ़ा दिया है। बुधवार को हुई कैबिनेट की अहम बैठक में सरकार ने उन परिवारों की महिलाओं को भी इस योजना से जोड़ने का फैसला किया है, जिनकी सालाना आय 1.80 लाख रुपये तक है। मुख्यमंत्री ने पिछले महीने विधानसभा बजट सत्र के दौरान इस आय सीमा को बढ़ाने का जो वादा किया था, उसे अब कैबिनेट की मंजूरी के साथ अमलीजामा पहना दिया गया है। इस फैसले के बाद प्रदेश की लाखों नई लाभार्थी महिलाएं इस सरकारी कवच के दायरे में आ जाएंगी। इस योजना की सबसे अनूठी बात इसकी वितरण प्रणाली है। सरकार पात्र महिलाओं के बैंक खातों में कुल 2,100 रुपये की मासिक किस्त डालती है, लेकिन यह पूरी राशि एक साथ खर्च करने के लिए नहीं होती। इसमें से 1,100 रुपये महिला के बचत खाते में जमा किए जाते हैं, जिसे वह अपनी तात्कालिक जरूरतों के लिए हर महीने निकाल सकती है। वहीं, शेष 1,000 रुपये सावधि बैंक खाते यानी आरडी (RD) में जमा होते हैं। यह आरडी खाता 5 साल के लिए संचालित किया जाता है, जिससे एक निश्चित समय के बाद महिलाओं के हाथ में एक मुश्त मोटी रकम आती है, जो उनके भविष्य या बच्चों की जरूरतों के काम आ सके। सरकार ने केवल गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली महिलाओं को ही नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों के परिवारों को भी प्रोत्साहित किया है। संशोधित नियमों के मुताबिक, जिन बच्चों ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 80 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं, उनकी माताओं को भी इस योजना का लाभ दिया जा रहा है, बशर्ते उनकी पारिवारिक आय 1.80 लाख रुपये तक हो। यह कदम समाज में बेटियों और बेटों की पढ़ाई के प्रति एक सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से क्रिकेटर क्रांति गौड़ ने सौजन्य भेंट की

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य क्रांति गौड़ ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर खेल संगठनों के पदाधिकारी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रिकेटर क्रांति गौड़ को आगे भी इसी तरह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कु. गौड़ ने क्रिकेट बाल भेंट की।