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योगी सरकार ने मंत्री व अधिकारियों की फ्लीट में 50% कमी का निर्देश दिया

लखनऊ पेट्रोल और डीजल कम खर्च करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद विधानसभा की विभिन्न संसदीय समितियों के पूर्व निर्धारित अध्ययन भ्रमण कार्यक्रमों को अग्रिम आदेशों तक स्थगित कर दिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के निर्देश के बाद प्रमुख सचिव विधानसभा प्रदीप दुबे ने इस संबंध में बुधवार को आदेश जारी किया। इसके मुताबिक देशहित व वर्तमान परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए संसदीय समितियों के सभी अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम तत्काल प्रभाव से स्थगित रहेंगे। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील का सम्मान करते हुए विधानसभा की ओर से यह निर्णय लिया गया है, ताकि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप सभी संसाधनों एवं व्यवस्थाओं का समुचित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। जनप्रतिनिधियों व संस्थाओं की यह जिम्मेदारी है कि वे राष्ट्रहित के प्रत्येक आह्वान में सहभागी बनें और परिस्थितियों के अनुरूप संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी का परिचय दें। मुख्यमंत्री, मंत्रियों आदि की फ्लीट में 50 प्रतिशत की कमी करें: योगी इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से प्रधानमंत्री के आह्वान से जुड़ने की मंगलवार को अपील की है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से कहा कि ईंधन की खपत कम करें और अनावश्यक सोने की खरीद न करें। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान को प्रदेश में व्यावहारिक रूप से अपनाए जाने की अपील की। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव, डीजीपी, सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव की बैठक में निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री व मंत्रियों आदि की फ्लीट में तत्काल 50 प्रतिशत की कमी की जाए। काफिले से अनावश्यक वाहनों को हटाया जाए। वर्क फ्राम होम को दें प्राथमिकता मुख्यमंत्री ने प्रदेश में वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति को भी प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने पीएनजी, मेट्रो, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों आदि के उपयोग पर विशेष बल दिया। मुख्यमंत्री जी का सरकारी बैठकों, सेमिनारों, कॉन्फ्रेंस, वर्कशॉप आदि के वर्चुअली आयोजन पर जोर रहा। औद्योगिक विकास विभाग व आईआईडीसी द्वारा औद्योगिक संस्थानों, बड़े स्टार्टअप्स आदि में वर्क फ्रॉम होम के लिए प्रेरित किया जाए। वहीं जहां बड़ी संख्या में कार्मिक कार्यरत हैं, उन्हें सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की अनुशंसा के लिए राज्य स्तर पर एडवाइजरी जारी की जाए। मंत्री सांसद एक दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें मुख्यमंत्री ने वैश्विक हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री के आह्वान से प्रदेशवासियों को जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुनिया में उथल-पुथल है, ऐसे में सभी को सावधानी बरतनी होगी। प्रधानमंत्री के आह्वान का पालन करने के लिए राज्यों को तैयार रहना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्री, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि सप्ताह में एक दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें। सप्ताह में एक दिन नो व्हीकल डे आयोजित किया जाए। इस अभियान से सरकारी कर्मचारियों, स्कूलों-कॉलेजों के विद्यार्थियों समेत समाज के विभिन्न वर्गों को भी जोड़ें।

जेलों की खाली जमीन पर पेट्रोल पंप, कैदियों को मिलेगी पारिश्रमिक

पटना बिहार की जेलों के कैदी पेट्रोल पंप चलाएंगे। गृह (कारा) विभाग ने इसे लेकर विस्तृत प्रारूप तैयार किया है। जेल प्रशासन की खाली पड़ी जमीन पर पेट्रोल पंप स्थापित किए जाएंगे। इन पेट्रोल पंपों के संचालन का दायित्व उस जेल में रहने वाले कैदियों को दिया जाएगा। गृह (कारा) विभाग ने प्रस्ताव को वित्त विभाग की मंजूरी के लिए भेजा है। इसके बाद विधि विभाग से भी मंजूरी ली जाएगी। राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद यह लागू होगा। राज्य सरकार की मंजूरी के बाद गृह (कारा) विभाग पेट्रोलियम कंपनियों के साथ पेट्रोल पंप संचालन के लिए समझौता (एमओयू) करेगा। कारा विभाग ने हिन्दुस्तान पेट्रोलियम के साथ पहले ही करार करने का निर्णय लिया है। पेट्रोल पंप आवंटन के बाद उसे जेलों की खाली भूमि पर लगाया जाएगा। सुधार प्रक्रिया से जुड़े कैदी संभालेंगे दायित्व जेलों में लंबे समय से सजा भुगतने वाले वैसे कैदी जो सुधार प्रक्रिया में शामिल हैं, उन्हें इसके संचालन का दायित्व दिया जाएगा। जेलों में सजायाफ्ता या विचाराधीन खूंखार एवं गंभीर अपराध के आरोपी कैदियों को संचालन का दायित्व नहीं दिया जाएगा। इन पेट्रोल पंपों पर होने वाली पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री की निगरानी के लिए भी तंत्र विकसित किया जाएगा। 59 जेलों में करीब 60 हजार है कैदी बिहार में आठ केंद्रीय कारागारों समेत कुल 59 जेलों की क्षमता 47,750 है, लेकिन इन जेलों में 61,891 कैदी हैं। इसका मतलब यह हुआ कि जेलों में क्षमता के मुकाबले 30 फीसदी अधिक कैदी हैं। जेलों में उद्यमिता के विकास, योग, ध्यान एवं सुधार के भी कई कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। कैदियों को पारिश्रमिक मिलेगा पेट्रोल पंप के संचालन का दायित्व संभालने वाले कैदियों को पारिश्रमिक का भुगतान किया जाएगा। कैदियों को जेल मैनुअल के अनुसार ही राशि मिलेगी। वर्तमान में, जेलों में विभिन्न प्रकार के उत्पादन कार्यों में जुड़े कैदियों को पारिश्रमिक का भुगतान किया जाता है। जानकारी के अनुसार, बिहार की जेलों में सजायाफ्ता कैदियों को उनके कौशल के आधार पर प्रतिदिन ₹147 से ₹397 रुपए तक का पारिश्रमिक मिलता है। इन्हें 4 श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें अकुशल (4 घंटे कार्य) को ₹147 रुपये, अकुशल को ₹294, अर्द्ध कुशल को ₹309 और कुशल कैदियों को ₹397 रुपये प्रतिदिन का भुगतान किया जाता है।

इमरजेंसी में सफल लोबेक्टॉमी सर्जरी, फेफड़े का संक्रमित हिस्सा काटकर निकाला, बीमारी से दी राहत

 रायपुर  डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने एक अत्यंत जटिल एवं जीवनरक्षक सर्जरी कर 25 वर्षीय युवक की जान बचाने में सफलता प्राप्त की है। मरीज लंबे समय से खांसी के साथ खून आने की गंभीर समस्या से पीड़ित था। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि प्रत्येक बार खांसने पर लगभग 50 से 70 एमएल तक खून निकल रहा था। डॉक्टरों के अनुसार यदि समय रहते ऑपरेशन नहीं किया जाता तो अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मरीज की जान भी जा सकती थी। अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग में छाती एवं फेफड़ों के अधिकांश ऑपरेशन उन्नत तकनीक से की जा रही है। अभनपुर के पास चटौद निवासी 25 वर्षीय युवक को पिछले लगभग 10 वर्षों से खांसी के साथ बलगम में खून आने की शिकायत थी। प्रारंभ में यह समस्या कम थी, लेकिन पिछले एक माह से लगातार बढ़ रही थी। पिछले कुछ दिनों में स्थिति और गंभीर हो गई तथा हर बार खांसने पर अत्यधिक मात्रा में खून आने लगा। मरीज ने पूर्व में टीबी की दवाइयों का सेवन भी किया था तथा उपचार के लिए कई बड़े अस्पतालों में परामर्श लिया, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। जांच के दौरान मरीज का सीटी स्कैन कराया गया, जिसमें दाएं फेफड़े के निचले हिस्से (लोअर लोब) में बड़ी कैविटी बनने एवं उसमें एस्परजिलोमा नामक फंगल संक्रमण होने की पुष्टि हुई। यह बीमारी सामान्यतः टीबी से पीड़ित मरीजों में देखने को मिलती है। सीटी स्कैन रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद डॉ. साहू ने बताया कि मरीज की जान बचाने के लिए तत्काल ऑपरेशन आवश्यक था। इस सर्जिकल प्रक्रिया को मेडिकल भाषा में लोबेक्टॉमी (लोअर लोब ऑफ राइट लंग) कहा जाता है, जिसमें फेफड़े के संक्रमित हिस्से को काटकर निकाला जाता है। यह ऑपरेशन अत्यंत जटिल एवं हाई-रिस्क सर्जरी की श्रेणी में आता है, क्योंकि ऑपरेशन के दौरान फेफड़ों की प्रमुख रक्त वाहिनियों- पल्मोनरी आर्टरी एवं पल्मोनरी वेन, को क्षति पहुंचने का खतरा बना रहता है। परिजनों की सहमति मिलने के बाद मरीज का अगले ही दिन आपातकालीन ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के दौरान अत्याधुनिक लंग स्टेपलर गन तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे ऑपरेशन के बाद एयर लीक जैसी जटिलताओं की संभावना कम हो सके। सफल सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और कुछ दिनों बाद उसे पूर्णतः स्वस्थ होने पर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। यह संपूर्ण उपचार आयुष्मान योजना के अंतर्गत निशुल्क किया गया। डॉ. साहू ने बताया कि खांसी के साथ खून आने की स्थिति को मेडिकल भाषा में हीमोप्टाइसिस कहा जाता है। इसके प्रमुख कारणों में फेफड़ों की टीबी, फेफड़ों का कैंसर, पल्मोनरी एवी मालफॉर्मेशन, ब्रोंकाइटिस तथा अन्य गंभीर फेफड़ा संबंधी रोग शामिल हैं।  पंडित नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी का कहना है कि चिकित्सकों की टीम ने समन्वित प्रयास करते हुए समय पर सफल सर्जरी कर मरीज को नया जीवन दिया। भविष्य में भी हमारा संस्थान इसी प्रकार मरीजों को बेहतर, सुलभ एवं उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।  अम्बेडकर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर कहते हैं कि अस्पताल प्रबंधन का निरंतर यह प्रयास रहा है कि आयुष्मान योजना के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को उच्चस्तरीय एवं निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाए और इस दिशा में हमें सफलता भी मिल रही है। वर्तमान में इस योजना से कई मरीज लाभांवित भी हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार वर्ष 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित आवेदन की अंतिम तिथि 15 जुलाई तक

भोपाल प्रदेश में शासकीय कार्यप्रणाली में नवाचार, सुशासन और जनसेवा के उत्कृष्ट प्रयासों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा “मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार” (नवाचार हेतु) वर्ष 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने जानकारी दी कि यह पुरस्कार मध्यप्रदेश शासन के विभिन्न विभागों, विभागाध्यक्ष कार्यालयों तथा उनके अधीन कार्यरत निगम, मंडल, बोर्ड एवं संस्थाओं के अधिकारी-कर्मचारियों को उनके नवाचार आधारित उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रदान किया जाएगा। यह पुरस्कार 01 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 की अवधि में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिये प्रदान किये जायेंगे। ऐसे कार्य जिनसे प्रशासनिक कार्यप्रणाली, सेवा प्रदाय व्यवस्था अथवा जनहित में सकारात्मक और प्रभावी परिवर्तन आया हो। “मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार” के अंतर्गत नागरिक सेवा प्रदाय, सूचना प्रौद्योगिकी एवं सुशासन, शिक्षा एवं मानव संसाधन विकास, स्वास्थ्य एवं पोषण, अधोसंरचना, सामाजिक समावेश एवं सशक्तिकरण, रोजगार एवं आर्थिक विकास जैसे प्रमुख कार्यक्षेत्रों में किए गए नवाचारों को सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार की संख्या 15 होगी। प्रत्येक पुरस्कार के लिए 1 लाख रूपये का पुरस्कार दिया जाएगा। किसी एक कार्यक्षेत्र में एक से अधिक शासकीय सेवक पात्र पाए जाने पर पुरस्कार राशि समान रूप से वितरित की जाएगी। ऑनलाइन आवेदन 15 जुलाई 2026 किये जा सकेंगे। पुरस्कार से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश एवं आवेदन प्रक्रिया विभाग की वेबसाइट awards.mp.gov.in पर उपलब्ध है।  

किशाऊ बांध और जल प्रबंधन मुद्दों पर मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से मुलाकात की

जयपुर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी से मुलाकात की. मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में यमुना जल समझौते के शीघ्र क्रियान्वयन के लिए समयसीमा तय की गई है.  इसके साथ ही किशाऊ बांध से जुड़े जल प्रबंधन मुद्दों पर भी सकारात्मक चर्चा हुई. रआरटीएस परियोजना की प्रगति की समीक्षा बैठक में दिल्ली-हरियाणा-राजस्थान आरआरटीएस परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री के अनुसार, इन परियोजनाओं से जल प्रबंधन, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, निवेश और आमजन को मिलने वाली सुविधाओं को नई गति मिलेगी. मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने कहा कि डबल इंजन सरकार राजस्थान को सुरक्षित, समृद्ध और आधुनिक बनाने के लिए संकल्पबद्ध है. 10 मई को भी दिल्ली गए थे सीएम सीएम भजनलाल शर्मा ने 10 मई को हुई मुलाकात के बाद नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर लिखा था कि राजस्थान में जल जीवन मिशन की प्रगति, राम जल सेतु लिंक परियोजना और यमुना जल समझौते सहित विभिन्न सिंचाई एवं पेयजल परियोजनाओं पर सकारात्मक चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार 'हर घर जल' के संकल्प को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध.

विद्यार्थियों के शैक्षणिक दस्तावेजों की डिजिलॉकर में उपलब्धता और स्वयं पोर्टल पर पंजीयन करें सुनिश्चित

भोपाल  विद्यार्थियों का सर्वांगीण हित, हमारी प्राथमिकता है। विद्यार्थियों को सरलता और सुलभता से सुविधाएं उपलब्ध हो, इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। समस्त विश्वविद्यालयों द्वारा विद्यार्थियों की अंकसूची, उपाधि एवं अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों की डिजिलॉकर में उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे विद्यार्थियों को सुरक्षित, प्रमाणित एवं सरल डिजिटल सेवाओं का लाभ मिल सके। साथ ही प्रत्येक विद्यार्थी का स्वयं पोर्टल पर पंजीयन कराते हुए उन्हें उपलब्ध पाठ्यक्रमों में रुचि एवं आवश्यकता अनुसार चयन के लिए प्रेरित कर, शैक्षणिक उन्नयन से जोड़ा जाए। विश्वविद्यालयों के कार्यों का प्रभाव, सामाजिक परिवर्तन की अभिप्रेरणा बने। विश्वविद्यालय, सामाजिक परिवर्तन के वाहक बनें। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने बुधवार को भोपाल स्थित निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सभागार में, (एनएडी-डिजिलॉकर) एवं स्वयं पोर्टल के प्रभावी क्रियान्वयन" विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ अवसर पर कही। मंत्री  परमार ने एनएडी-डिजिलॉकर एवं स्वयं पोर्टल के क्रियान्वयन में, देश भर में प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर संतोष व्यक्त किया एवं देश भर में प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए प्रोत्साहित भी किया। उच्च शिक्षा मंत्री  परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के यशस्वी नेतृत्व में, हमारा प्रदेश उच्च शिक्षा को आधुनिक, नवाचारयुक्त, पारदर्शी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। हमारा लक्ष्य हर विद्यार्थी तक सरल, सुरक्षित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाना है। मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में, यह एक महत्वपूर्ण पहल है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसरण में, नई शिक्षा व्यवस्था में तकनीक केवल सुविधा का ही माध्यम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य का सशक्त आधार है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश का प्रत्येक विद्यार्थी डिजिटल रूप से सक्षम, ज्ञानसम्पन्न एवं वैश्विक अवसरों के लिए तैयार बने। विश्वविद्यालयों में परीक्षा एवं परिणाम को पारदर्शितापूर्ण बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है। डिजिटल मूल्यांकन पद्धति से परीक्षा एवं परिणाम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। मंत्री  परमार ने कहा कि विद्यार्थी को संवेदनशील एवं श्रेष्ठ नागरिक बनाना, विश्वविद्यालयों का दायित्व है। इसके लिए राष्ट्रहित एवं समाज हित में संस्कार रोपित करने की आवश्यकता हैं। मंत्री  परमार ने कहा कि शिक्षकों के आचरण को विद्यार्थी आत्मसात करते हैं, इसलिए शिक्षण व्यावहारिक होना चाहिए। मंत्री  परमार ने कहा कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए, भारतीय दृष्टि के साथ शैक्षणिक परिदृश्य सृजन करना होगा। मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तकनीक आधारित शिक्षण, डिजिटल गवर्नेंस एवं गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देना, हमारी प्राथमिकताओं में समाहित है। एनएडी-डिजिलॉकर के माध्यम से विद्यार्थियों के शैक्षणिक दस्तावेज सुरक्षित, प्रमाणित एवं डिजिटल रूप में सहज उपलब्ध होंगे, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी तथा समय और संसाधनों की बचत होगी। एनएडी-डिजिलॉकर, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता को सुदृढ़ बना रहा है। वहीं (स्वयं) पोर्टल, युवाओं को देश के श्रेष्ठ शिक्षकों एवं संस्थानों से ऑनलाइन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर रहा है। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय, छात्र हित को प्राथमिकता देते हुए एनएडी-डिजिलॉकर एवं स्वयं पोर्टल का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें जिससे विद्यार्थियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।  राजन ने कहा कि विश्वविद्यालय, स्वयं पोर्टल के विनियमन को अपनाते हुए समस्त विद्यार्थियों का स्वयं पोर्टल पर पंजीयन एवं परीक्षा में प्रतिभागिता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालय, अकादमिक कैलेंडर का शत प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें ताकि विद्यार्थियों के शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हों।  राजन ने विश्वविद्यालयों को पारदर्शितापूर्ण प्रशासनिक प्रबंधन के लिए, समर्थ पोर्टल पर शिफ्ट करने के लिए भी प्रेरित किया। उद्घाटन सत्र में स्वागत उद्बोधन देते हुए मप्र निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के चेयरमैन प्रो खेमसिंह डेहरिया ने, कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। विषयविद सु दीक्षा राजपूत संयुक्त सचिव विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली एवं  अभिनव शर्मा क्षेत्रीय समन्वयक एनएडी-डिजिलॉकर ने, कार्यशाला की प्रासंगिकता, आवश्यकता एवं महत्ता के आलोक में अपने विचार साझा किए। कार्यशाला में विभिन्न तकनीकी सत्रों में विषयविद एनएडी-डिजिलॉकर एवं स्वयं पोर्टल के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत संवाद करेंगे और विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी करेंगे। कार्यशाला में आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, मप्र निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के प्रशासनिक सदस्य  महेशचंद चौधरी एवं आयोग के सचिव डॉ देवेंद्र सिंह गुर्जर सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु एवं प्रतिनिधि उपस्थित थे। 

विगत दो सप्‍ताह में लगभग 21 लाख रूपये से अधिक की संपत्ति जब्‍त

भोपाल  मध्यप्रदेश रेलवे पुलिस द्वारा रेल यात्रियों की सुरक्षा, संपत्ति संरक्षण एवं जनविश्वास कायम रखने के उद्देश्य से लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में जीआरपी जबलपुर, ग्वालियर एवं इंदौर द्वारा चोरी एवं जेवरात संबंधी मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए 21 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जब्‍त की है। वहीं इंदौर जीआरपी ने ईमानदारी एवं तत्परता का परिचय देते हुए यात्री का जेवरों से भरा बैग सुरक्षित लौटाकर सराहनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। जीआरपी जबलपुर थाना जबलपुर द्वारा रनिंग ट्रेनों एवं रेलवे स्टेशन क्षेत्र में चलाये जा रहे विशेष चेकिंग अभियान के दौरान एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से सोने का मंगलसूत्र, चेन, बाली, लॉकेट एवं चांदी की पायल सहित लगभग 2 लाख 85 हजार रूपये की संपत्ति जब्‍त की है। एक अन्‍य कार्यवाही में जबलपुर की टीम द्वारा एक महिला चोर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से चोरी के आभूषण जप्त किये गये। महिला आरोपी द्वारा यात्रियों की भीड़ का फायदा उठाकर चोरी की वारदातों को अंजाम दिया जाता था। कार्रवाई के दौरान उसके कब्जे से 8 हजार 750 रूपए मूल्य के आभूषण जब्‍त किये गये। जीआरपी ग्वालियर जीआरपी ग्वालियर द्वारा ट्रेनों एवं रेलवे स्टेशन क्षेत्र में जेवरात एवं नगदी चोरी करने वाले गिरोह के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए विभिन्न प्रकरणों में संलिप्त आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों द्वारा अलग-अलग ट्रेनों में यात्रियों के पर्स, नगदी एवं सोने-चांदी के आभूषण चोरी करने की घटनाओं को अंजाम दिया गया था। लगातार निगरानी, मुखबिर सूचना एवं तकनीकी विश्लेषण के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपियों के कब्जे से चोरी गये सोने-चांदी के आभूषण एवं नगदी सहित लगभग 7 लाख 30 हजार रूपये की संपत्ति जब्‍त की है। जीआरपी इंदौर जीआरपी इंदौर ने रेलवे स्टेशन इंदौर से ट्रॉली बैग चोरी का मात्र 24 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्‍जे से लगभग 2 लाख 82 हजार रूपये की संपत्ति जब्‍त की है। इसके अतिरिक्त जीआरपी इंदौर ने ईमानदारी, संवेदनशीलता एवं तत्परता का परिचय देते हुए ट्रेन में छूटे लगभग 8 लाख 50 हजार रूपए मूल्य के जेवरों से भरे बैग को कुछ ही घंटों में सुरक्षित खोजकर संबंधित यात्री के सुपुर्द किया। जीआरपी की इस सराहनीय कार्रवाई से यात्रियों में सुरक्षा एवं विश्वास की भावना और अधिक मजबूत हुई है। यह कार्रवाई रेल पुलिस की जनसेवा, जिम्मेदारी एवं मानवता के प्रति प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है।  

पटना में जदयू दफ्तर में शुरू हुआ सप्ताहिक जन सुनवाई कार्यक्रम

पटना बिहार की सम्राट सरकार में जनता दल यूनाइटेड (JDU) कोटे के मंत्रियों का जन सुनवाई कार्यक्रम फिर से शुरू हो गया है। पटना स्थित जदयू दफ्तर में अब 3-3 मंत्री रोजाना जनता दरबार लगाकर लोगों की शिकायतें सुनेंगे। पार्टी के राष्ट्र्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने जदयू के सभी मंत्रियों की पार्टी दफ्तर में ड्यूटी लगा दी है और कौन 3 मंत्री किस दिन कितने बजे से जन सुनवाई करेंगे, इसकी टाइमिंग भी फिक्स कर दी गई है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की ओर से मंगलवार को कार्यक्रम जारी कर दिया गया। प्रत्येक दिन तीन-तीन मंत्री पार्टी दफ्तर में लोगों की समस्या सुनेंगे। जन सुनवाई कार्यक्रम रोजाना सुबह 11.30 बजे से शुरू होगा। सोमवार और मंगलवार को किसकी ड्यूटी सोमवार को ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह और ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार आम लोगों की समस्याएं सुनेंगे। मंगलवार को डिप्टी सीएम विजय चौधरी, विज्ञान एवं प्रावैधिकी मंत्री शीला मंडल और ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल लोगों की समस्याएं सुनेंगे। निशांत बुधवार को बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, परिवहन मंत्री दामोदर रावत, आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सादा लोगों की समस्या सुनेंगे। गुरुवार को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी, मदन सहनी और समाज कल्याण मंत्री श्वेता गुप्ता जन समस्या सुनेंगी। इसी तरह शुक्रवार को डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव, योजना एवं विकास मंत्री एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री लोगों की समस्या सुनेंगे। चुनाव के चलते स्थगित हुआ था जनता दरबार बता दें कि जदयू दफ्तर में जन सुनवाई कार्यक्रम लंबे समय से चलता रहा है। नीतीश कुमार जब मुख्यमंत्री थे, तब भी वे जनता दरबार लगाकर लोगों की समस्याएं सुनते थे। पिछले साल विधानसभा चुनाव के चलते जन सुनवाई कार्यक्रम स्थगित हो गया था। अब पार्टी की ओर से फिर से इसे शुरू कर दिया गया है। जदयू अध्यक्ष ने पूरे सप्ताह का कार्यक्रम विधिवत घोषित किया है। ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े यहां देखें पूरी लिस्ट सोमवार, सुबह 11.30 बजे से–     श्रवण कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री     लेशी सिंह, भवन निर्माण मंत्री     सुनील कुमार, ग्रामीण कार्य मंत्री मंगलवार, सुबह 11.30 बजे से–     विजय चौधरी, डिप्टी सीएम, जल संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री     शीला मंडल, विज्ञान एवं प्रावैधिकी मंत्री     शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल, ऊर्जा मंत्री बुधवार, सुबह 11.30 बजे से–     निशांत कुमार, स्वास्थ्य मंत्री     दामोदर रावत, परिवहन मंत्री     रत्नेश सदा, आपदा प्रबंधन मंत्री गुरुवार, सुबह 11.30 बजे से–     अशोक चौधरी, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री     मदन सहनी, मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन मंत्री     श्वेता गुप्ता, समाज कल्याण मंत्री शुक्रवार, सुबह 11.30 बजे से–     बिजेंद्र प्रसाद यादव, डिप्टी सीएम, वित्त एवं वाणिज्य कल मंत्री     भगवान सिंह कुशवाहा, योजना विकास मंत्री     जमा खान, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री

चरणबद्ध प्रशिक्षण सम्पन्न शासकीय कार्यों में दक्षता एवं उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष जोर

रायपुर सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा नवा रायपुर स्थित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) में “डिजिटल उत्पादकता एवं एआई एकीकरण विषय पर चरणबद्ध  एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ । कार्यक्रम का उद्देश्य शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की डिजिटल दक्षता बढ़ाना, प्रशासनिक कार्यों में तकनीक आधारित कार्य संस्कृति को प्रोत्साहित करना तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का जिम्मेदारी से उपयोग के प्रति जागरूकता विकसित करना था।           प्रशिक्षण कार्यक्रम में सामान्य प्रशासन विभाग  के 100 से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में कार्यालयीन कार्यों में दक्षता वृद्धि, त्वरित निर्णय प्रक्रिया, दस्तावेज निर्माण, सूचना संक्षेपण एवं कार्य निष्पादन को अधिक प्रभावी बनाने में डिजिटल तकनीकों एवं एआई टूल्स की उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी गई।  प्रशासनिक कार्यों में एआई के व्यावहारिक उपयोग की दी जानकारी           कार्यक्रम के दौरान ट्रिपल आईटी के डायरेक्टर डॉ. ओ.पी. व्यास द्वारा विभिन्न तकनीकी एवं व्यावहारिक सत्र संचालित किए गए। उन्होंने जनरेटिव एआई के उपयोग, उसकी संभावनाओं एवं सीमाओं तथा प्रशासनिक कार्यों में उसकी उपयोगिता पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एआई मानव बुद्धिमत्ता का सहयोगी उपकरण है, जिसका उपयोग कार्यों को अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने में किया जा सकता है।  हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण से अधिकारियों में बढ़ा आत्मविश्वास            प्रशिक्षण का प्रमुख आकर्षण इंटरैक्टिव एवं हैंड्स-ऑन सत्र रहे, जिनमें प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में एआई टूल्स का व्यावहारिक उपयोग किया। अधिकारियों को शासन में एआई के वास्तविक उपयोग मामलों, डिजिटल उत्पादकता समाधानों एवं दैनिक प्रशासनिक कार्यों में तकनीक के प्रभावी उपयोग का अभ्यास कराया गया। इससे प्रतिभागियों में नई तकनीकों को अपनाने एवं उनका उपयोग करने के प्रति आत्मविश्वास विकसित हुआ।  जिम्मेदार एवं विवेकपूर्ण एआई उपयोग पर दिया गया विशेष बल  कार्यक्रम में एआई का जिम्मेदारी एवं विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि एआई एक अत्यंत उपयोगी एवं शक्तिशाली तकनीक है, परंतु यह पूर्णतः त्रुटिहीन नहीं है, इसलिए एआई का उपयोग करते समय मानव निगरानी, समालोचनात्मक सोच एवं बौद्धिक जिम्मेदारी बनाए रखना आवश्यक है।  विशेषज्ञों एवं प्रशिक्षकों की रही महत्वपूर्ण भूमिका            प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में ट्रिपल आईटी के डीन श्री के.जी. श्रीनिवास तथा प्रशिक्षकगण आकांक्षा शर्मा, प्रेमा पटेल, गौरव शर्मा, डॉ. शैलेंद्र मिश्रा एवं उपेंद्र अग्रवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सुशासन एवं अभिसरण विभाग ने भविष्य में भी इस प्रकार के क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का विस्तार करने तथा शासन में डिजिटल नवाचार एवं तकनीक आधारित कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।  

सीएम योगी के ‘एक जिला-एक नदी’ अभियान से कृषि व पर्यावरण क्षेत्र में बड़ा सुधार, सांस्कृतिक पुनर्जागरण भी

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 'एक जिला-एक उत्पाद' की वैश्विक सफलता के बाद अब 'एक जिला-एक नदी' अभियान के जरिए जल संरक्षण और पर्यावरण पुनरुद्धार की नई इबारत लिख रही है। इसके जरिए नदियों को साफ करने, विलुप्त हो चुकी जलधाराओं को पुनर्जीवित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी तंत्र में सकारातमक बदलाव लाने का काम किया जा रहा है। स्वच्छ गंगा मिशन के तहत नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने कई विभागों के साथ मिलकर प्रदेशभर में छोटी नदियों के पुनरुद्धार के लिए परिवर्तनकारी पहल की है। पीलीभीत में 16 ग्राम पंचायतों में फैली 47 किलोमीटर के क्षेत्र में गोमती नदी का पुनरुद्धार किया गया। कई जगहों पर नहर को चौड़ा व गहरा किया गया। साथ ही 23 तालाबों का जीर्णोद्धार करने और घाटों के निर्माण के माध्यम से नदी ने अपना निरंतर प्रवाह फिर से प्राप्त कर लिया है। इससे 1,53,000 से अधिक मानव-दिवस का रोजगार सृजित हुआ, जबकि 500 से अधिक किसानों ने प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाया। घाटों पर शाम की आरती और योग सत्रों ने गोमती को एक पवित्र और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में पुनः स्थापित किया है। बुलंदशहर में ‘वीबी-जी राम जी’ के जरिए 29 किलोमीटर में नीम नदी का पुनरुद्धार किया गया। इसमें किसानों ने भी स्वेच्छा से सहयोग किया। इस पहल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' में सराहना भी की थी। इसके साथ ही कारवान नदी और काली नदी का भी पुनरुद्धार किया गया, जहां दर्जनों ग्राम पंचायतों में गाद निकालने, पौधरोपण और सामुदायिक भागीदारी से घाटों पर सिंचाई, जैव विविधता और सांस्कृतिक प्रथाओं को बहाल किया गया। इसी तरह छोटे-छोटे नालों में बदल चुकी संभल की सोत नदी को जनभागीदारी से जीवनदान दिया गया। रामपुर में रेवती, नाहल और नीली, तीन मौसमी धाराओं को पुनर्जीवित किया गया। यहां नहरों की सफाई, रिचार्ज पिट (वर्षा जल संचयन), फिल्टर कक्ष और पौधरोपण से बड़ा बदलाव आया। पूरे प्रदेश में दिखेंगे बेहतर परिणाम राज्य स्वच्छ गंगा मिशन परियोजना निदेशक जोगिन्द्र सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में छोटी नदियों के जीर्णोद्धार से शानदार परिणाम सामने आए हैं। ये नदियां जो कभी लगभग विलुप्त हो चुकी थीं, अपने वास्तविक रूप में लौट रही हैं। इससे बाढ़ नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। साथ ही सिंचाई के लिए जिलों में बेहतर जल धाराएं उपलब्ध हुई हैं। इन छोटी नदियों और जल संसाधनों को पुनर्जीवित एवं संरक्षित करने के लिए प्रशासनिक विभागों के साथ ‘वीबी-जी राम जी’ को भी जोड़ा गया। इससे रोजगार सृजन से ग्रामीण आजीविका मजबूत हुई। इन जलस्रोतों के जरिए किसानों को आस-पास के क्षेत्र में प्राकृतिक खेती करने में भी मदद मिल रही है। नदियों के पुनरुद्धार के साथ घाटों पर सांस्कृतिक परंपराओं का भी पुनर्जीवन हो रहा है। लगभग सभी जगहों पर अब दैनिक आरती और योग सत्र भी हो रहे हैं। सीएम योगी के विजन 'एक जिला-एक नदी कार्यक्रम' के बेहतरीन परिणाम जल्द ही पूरे उत्तर प्रदेश में देखने को मिलेंगे।