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सरकारी खर्चों पर लगाम की तैयारी, सीएम काफिले में वाहनों की कटौती पर विचार

 भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पेट्रोल-डीजल उपयोग का उपयोग कम करने की अपील का असर मध्य प्रदेश सरकार में दिखने लगा है। राज्य सरकार ने तय किया है कि अब शासकीय कार्यों में उपयोग के लिए निजी एजेंसी के माध्यम से पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) को टैक्सी के रूप में लिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने काफिले में से वाहनों की संख्या कम कर सकते हैं। इसके अलावा वित्त विभाग ने शासकीय सेवकों की विदेश यात्रा पर भी रोक लगा रखी है। मुख्यमंत्री के काफिले में बदलाव की तैयारी मुख्यमंत्री के काफिले में लगभग 13 गाड़ियां हैं। इसमें से पांच से छह गाड़ियां कम की जा सकती हैं। सुरक्षा के हिसाब से कुछ वाहन काफिले में खाली चलते हैं, इन्हें कम किया जा सकता है। इसके अलावा मुख्यमंत्री जहां भी दौरे पर जाते हैं उनके स्वागत के लिए वाहनों से जुटने वाली भीड़ पर भी रोक लगाई जा सकती है। इस बीच, वन विभाग और पुलिस को छोड़कर सभी विभागों में नए वाहन क्रय करने पर रोक लगा दी गई है। खर्चों में कटौती के सख्त निर्देश जल्द ही कम खपत वाले वाहनों के उपयोग के निर्देश जारी किए जाएंगे। वित्त विभाग यह भी निर्धारित करने जा रहा है कि प्रदेश में पेट्रोल-डीजल का कितना और कब उपयोग हो, जल्द ही इसको लेकर निर्णय लिया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के आग्रह के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने मंत्रियों से कहा है कि पेट्रोल-डीजल के मद में खर्च कम करें और खुद के खर्चों में भी कटौती करें। मंत्रियों के काफिले पर स्थिति केवल जनता से पेट्रोल-डीजल के किफायती उपयोग की अपील की जा रही है, लेकिन मंत्रियों के काफिले में वाहनों की संख्या घटाने पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। प्रदेश में मुख्यमंत्री और दो उप मुख्यमंत्रियों को मिलाकर कुल 30 मंत्री हैं। मंत्रियों के काफिले में तीन से चार वाहन चलते हैं। स्टेट गैराज से इन्हें वाहन आवंटित होता है और पेट्रोल-डीजल भी मिलता है।  

जल गंगा संवर्धन अभियान में खंडवा अव्वल: अब सड़कों से बहने वाला पानी भी होगा संरक्षित

खंडवा  जल संरक्षण और भूजल संवर्धन की दिशा में खंडवा नई पहचान बना रहा है. जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जिले में वर्षा जल के अधिकतम संचयन के लिए अनोखी पहल की जा रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में पहाड़ों पर लाखों कंटूर खोदने के बाद अब सड़कों के किनारों पर भी कंटूर (गड्ढा) खोदकर जल संरचनाएं तैयार की जा रही हैं, ताकि बारिश का पानी व्यर्थ बहने के बजाय जमीन में समा सके और भूजल स्तर में वृद्धि हो। प्रदेश में खंडवा का पहला स्थान जल संचय जन भागीदारी अभियान में खंडवा ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी रैंकिंग में खंडवा देशभर में दूसरे स्थान पर पहुंचा है, जबकि जल गंगा संवर्धन अभियान में खंडवा पूरे मध्य प्रदेश में प्रथम स्थान पर चल रहा है. खंडवा में प्रशासन द्वारा जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के उद्देश्य से लगातार व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। मिशन मोड में चल रहा अभियान वर्षा जल संरक्षण और जल बचाने के लिए जिला प्रशासन मिशन मोड में अभियान चला रहा है. कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि "जिले में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है. खेत तालाब, कुएं रिचार्ज पिट, अमृत सरोवर, रिचार्ज शाफ्ट, बोरवेल रिचार्ज सिस्टम और रूफटॉप वर्षा जल संचयन जैसी योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है। सड़कों के किनारों पर भी कंटूर पुराने तालाबों, जलाशयों और गड्ढों को भी नए तरीके से ठीक किया जा रहा है. अब सड़कों के किनारों पर भी कंटूर बनाए जा रहे हैं, जिससे बारिश का पानी सीधे नालों में बहने के बजाय जमीन में रिस सके. इससे आने वाले समय में भूजल स्तर में सुधार होने के साथ जल संकट से भी राहत मिलने की उम्मीद है। अब तक एक लाख कंटूर खोदे जिले में अब तक एक लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है, जबकि करीब ढाई लाख संरचनाएं तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. वर्ष 2025 में भी खंडवा ने जल संचय करने वाले जिलों में देश में पहला स्थान हासिल किया था. प्रशासन का मानना है कि जनभागीदारी और सतत प्रयासों से खंडवा आने वाले वर्षों में जल संरक्षण का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है।

‘डॉलर’ बचाने की तैयारी में सरकार? विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर बढ़ी चिंता, क्या लग सकता है बड़ा बैन

नई दिल्ली ईरान युद्ध का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इस संकट से बचने के लिए सरकार कुछ इमरजेंसी कदम उठाने पर विचार कर रही है। सरकार का मुख्य लक्ष्य देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचाना है। इसके लिए सोने और इलेक्ट्रॉनिक सामानों जैसी गैर-जरूरी चीजों के आयात पर रोक लगाई जा सकती है। इसके अलावा, देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ाई जा सकती हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारियों के बीच इस संभावित संकट को टालने के लिए कई अहम चर्चाएं हुई हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर भारत के पास कितने दिनों का विदेशी मुद्रा भंडार (डॉलर) बचा? संकट के बीच कौन से बड़े कदम उठाने की तैयारी में सरकार? ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी चर्चा में सबसे प्रमुख प्रस्तावों में से एक ईंधन की कीमतों में वृद्धि करना है। यदि ऐसा होता है, तो ईरान युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बढ़ोतरी होगी। हालांकि, अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए गैर-जरूरी आयात पर रोक अधिकारियों की एक बड़ी चिंता बढ़ता चालू खाता घाटा है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए सरकार सोना और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे गैर-जरूरी सामानों के आयात पर प्रतिबंध या सख्ती लगाने पर विचार कर रही है। यदि स्थिति नहीं सुधरती है, तो अधिकारी गैर-जरूरी कार्यों, जैसे विदेश यात्रा के लिए विदेशी मुद्रा निकालने पर भी अस्थायी रूप से रोक लगा सकते हैं। भारत पर ईरान युद्ध और तेल संकट का सीधा असर भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सप्लाई रुकने और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें बढ़ने से भारत को भारी नुकसान हो रहा है। रुपये पर दबाव महंगे कच्चे तेल को खरीदने के लिए भारत को भारी मात्रा में डॉलर (विदेशी मुद्रा) चुकाना पड़ रहा है। इस कारण भारतीय रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। इस साल अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 5.6% टूट चुका है, जो इसे प्रमुख एशियाई मुद्राओं में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बनाता है। भारत के पास कितना विदेशी मुद्रा भंडार बचा? RBI के आक्रामक कदम रुपये को लगातार गिरने से रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) कई अहम कदम उठा रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति: 1 मई तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर 690.7 बिलियन डॉलर रह गया है, जो एक महीने से अधिक समय में सबसे निचला स्तर है। हालांकि, यह भंडार अभी भी 10 से 11 महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है। सट्टेबाजी पर लगाम: RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी रोकने के लिए बैंकों की दैनिक सीमा को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित कर दिया है। भविष्य के नियम: RBI आयातकों के लिए 'करेंसी हेजिंग' के नियम बदल सकता है और निर्यातकों को निर्देश दे सकता है कि उन्हें विदेशी व्यापार से मिलने वाले डॉलर वे तुरंत देश वापस लाएं। प्रधानमंत्री की जनता से अपील रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से इस संकट की घड़ी में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिए कि:     ईंधन बचाने के लिए लोग सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें और 'वर्क फ्रॉम होम' करें।     लोग सोना खरीदना बंद करें (क्योंकि सोना भारत के सबसे बड़े आयातों में से एक है)।     गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचें। विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम की यह चेतावनी भविष्य में किसी भी संभावित कमी से निपटने की तैयारी का हिस्सा है। वियतनाम और थाइलैंड जैसे अन्य एशियाई देशों ने भी डॉलर और ईंधन बचाने के लिए ऐसे ही 'वर्क फ्रॉम होम' के निर्देश दिए हैं। सख्त फैसले लेने की मजबूत राजनीतिक स्थिति हाल ही में पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी और उनके सहयोगी दल अब भारत के दो-तिहाई राज्यों को नियंत्रित करते हैं। इस मजबूत राजनीतिक स्थिति के कारण सरकार के लिए देश हित में इस तरह के सख्त आर्थिक फैसले लेना आसान हो गया है। संक्षेप में कहें तो ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल महंगा हो गया है, जिससे भारत का खजाना (विदेशी मुद्रा) तेजी से खाली हो रहा है और रुपया कमजोर पड़ रहा है। इससे बचने के लिए सरकार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने, सोना व इलेक्ट्रॉनिक्स का आयात रोकने और जनता से ईंधन व डॉलर बचाने की अपील करने जैसे आपातकालीन उपाय कर रही है।

Census Rules सख्त: संपत्ति की गलत जानकारी देने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान

लखनऊ जनगणना में किसी तथ्य को जानबूझकर छिपाने पर जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 के तहत एक हजार रुपये जुर्माना एवं तीन साल की सजा का प्रावधान है। इस मामले में उत्तरदाता एवं प्रगणक के लिए दंड का एक समान प्रावधान है, जबकि जनगणना में प्राप्त तथ्यों को कोई प्रगणक बाहर साझा करता है तो आरोप साबित होने पर भी दंड का प्रावधान है। जनगणना में बुधवार  को सातवें दिन भी स्वगणना हुई। स्वगणना के दौरान कुछ लोगों के तथ्यों को छिपाने की चर्चा के बीच प्रगणक एवं पर्यवेक्षक भी सतर्क हो गए हैं। उनमें जनगणना अधिनियम के प्रावधानों की बातें हो रही हैं। यदि हाउस लिस्टिंग ब्लॉक में ज्यादा अनियमितता पाई जाएगी तो प्रगणक जिम्मेदार होंगे। वहीं किसी ब्लॉक में रहने वालों की संख्या बहुत कम होगी तो संदेह के आधार पर फिर पुनरीक्षण कराया जा सकता है। गोरखपुर में चार्ज अधिकारी/एसडीएम सदर दीपक गुप्ता ने बताया कि जनगणना में प्रगणक घर-घर जाएंगे और भौतिक सत्यापन करके ही फीडिंग करेंगे। यदि किसी का बड़ा मकान है और उसने कमरे की संख्या कम बता दी है तो जनगणना कर्मी उसकी जांच करेंगे। यदि किसी के घर में दो या तीन कारें हैं और मकान मालिक उसमें एक ही कार को अपना बता रहा है तो हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट सहित अन्य माध्यम से भी जांच की जाएगी। जनगणना में तथ्य छिपाया तो होगी तीन साल की जेल इसे लेकर जिला जनगणना अधिकारी विनीत कुमार सिंह ने बताया कि जनगणना में किसी को चल-अचल संपत्ति छिपाने की आवश्यकता नहीं है। इसके तथ्यों से आयकर एवं अन्य सुविधाओं का कोई सरोकार नहीं है। जनगणना के दौरान किसी विवाद के बाद आरोप साबित होने पर जनगणना अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। जनगणना फॉर्म में हैरान कर देने वाले सवाल वहीं, जनगणना के लिए भरे जाने वाले फॉर्म में कई सवाल और सही विकल्प हैरान कर देने वाले हैं। 34 सवालों में से एक सवाल यह भी है कि आपकी पत्नी कितनी हैं? अगर पत्नी दो होंगी तो डबल फैमिली यानी दो दंपति का विकल्प भरना होगा। अगर एक महिला के दो पति हों तो सिंगल फैमिली यानी एक दंपति माना जाएगा। किसी भी परिवार में दंपति की गणना पत्नी की संख्या से ही निर्धारित होगी। जितनी पत्नियां, उतने ही दंपति। परिवार में दादा-दादी, पिता-माता और पुत्र-बहू हों तो इसका मतलब यह नहीं कि मुखिया वही होगा जो बड़ा होगा। यानी जरूरी नहीं है कि दादा या पिता ही मुखिया हों, कोई भी हो सकता है। परिवार के सदस्य जिसे मुखिया बताएंगे, वही फॉर्म में भरा जाएगा। जनगणना के लिए फॉर्म पूरी स्टडी से तैयार किया गया है। परिवार में चाहे जितने पुरुष और चाहे जितने उम्रदराज लोग हों, उन्होंने कहा कि बहू, पत्नी, दादी या पुत्री मुखिया है तो उसका ही नाम भरा जाएगा। परिवार की मुखिया उस परिवार की कोई भी महिला हो सकती है। मुखिया के लिए उम्र की सीमा नहीं है।

LPG पर सरकार सख्त: समय पर जवाब नहीं देने वालों की सब्सिडी हो सकती है बंद

LPG सब्सिडी को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अगर आप भी LPG सब्सिडी ले रहे हैं और आपकी आय ज्यादा है, तो अपने फोन के इनबॉक्स पर नजर रखें। जी हां, क्योंकि गैस एजेंसियां कभी भी आपकी सब्सिडी खत्म कर सकती हैं। आइए इसको विस्तार से समझते हैं। नईदिल्ली बढ़ती वैश्विक ऊर्जा कीमतों और सरकारी खजाने पर बढ़ते बोझ के बीच केंद्र सरकार ने रसोई गैस (LPG) सब्सिडी को लेकर एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। अब सरकारी तेल कंपनियां (Oil Marketing Companies) जैसे इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) इनकम टैक्स विभाग के डेटा का इस्तेमाल करके उन लोगों की पहचान कर रही हैं, जो सब्सिडी पाने के हकदार नहीं हैं। इन लोगों की पहचान करने के बाद कंपनियां जल्द से जल्द इनकी सब्सिडी बंद करेंगी। अगर ग्राहक को लगता है कि वो सब्सिडी के पात्र हैं, तो उन्हें 7 दिनों का मौका मिलेगा। आइए इसको विस्तार से समझते हैं। क्या है नया नियम और कार्रवाई? 'मिंट' की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार उन उपभोक्ताओं की सब्सिडी बंद करने की तैयारी में है, जिनकी सालाना आय ₹10 लाख या उससे ज्यादा है। सरकार का मानना है कि संपन्न परिवारों को सब्सिडी देने के बजाय इस पैसे का इस्तेमाल गरीबों की मदद और देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए किया जाना चाहिए। इस दिशा में तेल कंपनियों ने नीचे दिए गए कुछ कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। SMS के जरिए चेतावनी कंपनियों ने उन ग्राहकों को मैसेज भेजना शुरू कर दिया है जिनके टैक्स रिकॉर्ड बताते हैं कि उनकी या उनके परिवार के किसी सदस्य की ग्रॉस टैक्सेबल इनकम (Gross Taxable Income) निर्धारित सीमा से अधिक है। 7 दिन का अल्टीमेटम मैसेज में साफ कहा गया है कि अगर ग्राहक को लगता है कि डेटा गलत है, तो वह 7 दिनों के अंदर आपत्ति दर्ज करा सकता है। ऐसा न करने पर उनकी गैस सब्सिडी स्थायी रूप से बंद कर दी जाएगी। शिकायत का मौका उपभोक्ता कंपनियों की टोल-फ्री हेल्पलाइन या उनकी आधिकारिक वेबसाइट (पोर्टल) पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। क्यों सख्त हो रही है सरकार? यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) पर दबाव बढ़ रहा है। सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। जहां एक तरफ सब्सिडी का बढ़ता खर्च है, तो वहीं दूसरी तरफ राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) है। इससे पहले भी तेल कंपनियों ने सब्सिडी बचाने के लिए कई कदम उठाए थे, जो नीचे दिए गए हैं।     नए कनेक्शन पर अस्थायी रोक:- फिलहाल नए गैस कनेक्शन देने की रफ्तार धीमी कर दी गई है।     रिफिल बुकिंग की अवधि बढ़ाना:- गैस सिलेंडर दोबारा बुक करने के बीच के समय को बढ़ाया गया है ताकि खपत पर नियंत्रण रहे। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए 'इमरजेंसी' तैयारी खबरों की मानें तो प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), वित्त मंत्रालय और RBI के अधिकारियों के बीच हाल ही में कई बैठकें हुई हैं। सरकार न केवल ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी पर विचार कर रही है, बल्कि सोना और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे 'गैर-जरूरी' सामानों के आयात पर भी प्रतिबंध लगाने की योजना बना रही है ताकि डॉलर को बचाया जा सके।

सोना खरीदने वालों के लिए बड़ा सवाल: 2027 तक Gold Price कहां पहुंचेगी, अभी खरीदें या करें इंतजार?

मुंबई  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपील की कि वे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक साल तक सोना न खरीदें. भारत दुनिया का सबसे बड़ा सोने का आयातक है और त्योहारों और शादियों के मौसम में विदेशों से टन सोना आता है. नतीजतन, देश का विदेशी मुद्रा भंडार कम हो रहा है और रुपये के मूल्य पर बहुत दबाव डाल रहा है. इसी पृष्ठभूमि में मोदी ने देश की आर्थिक ताकत बढ़ाने के लिए यह पहल की है।भारत को सोना आयात करने के लिए हर साल लाखों करोड़ रुपये विदेशी कंपनियों को देने पड़ते हैं. इससे देश का चालू खाता घाटा बढ़ेगा. सरकार का हिसाब है कि अगर लोग सोने में निवेश करने के बजाय बैंक योजनाओं या शेयर बाजार में निवेश करेंगे तो उस पैसे का इस्तेमाल देश के विकास के लिए होगा। जैसे ही हम सोने की खरीद कम करते हैं, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कीमत मजबूत हो जाती है. जब बाजार में डॉलर की मांग घटेगी तो रुपये का अवमूल्यन होगा और आयातित पेट्रोल और गैस की कीमतों में भी गिरावट आएगी. इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव आम आदमी की जेब पर पड़ता है। बाजार के जानकारों के मुताबिक, अगर भारतीय मोदी की सलाह पर ध्यान देते हैं और एक साल के लिए सोना खरीदना बंद कर देते हैं तो मांग में गिरावट आ सकती है और कीमतों में अस्थायी गिरावट आ सकती है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए 2027 तक 10 ग्राम सोने की कीमत 85,000 रुपये से 95,000 रुपये के दायरे में पहुंचने की उम्मीद है।सरकार चाहती है कि लोग डिजिटल गोल्ड या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का विकल्प चुनें, न कि इसे भौतिक रूप से घर पर रखें. इससे सोने का आयात कम होगा और उपभोक्ताओं को सुरक्षित निवेश के साथ-साथ वार्षिक ब्याज भी मिलेगा. यह देश और निवेशक, दोनों के लिए फायदेमंद होगा। पीएम मोदी के आह्वान से ज्वैलर्स में चिंता पैदा हो गई है. यह उन लाखों परिवारों को प्रभावित कर सकता है जिनकी आजीविका शादियों और त्योहारों के दौरान सोने के व्यापार पर निर्भर है. हालांकि, सरकार कह रही है कि यह केवल एक साल का अस्थायी अनुशासन है जो देश को लंबे समय में आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगा। 2027 तक बाजार में सोने की आपूर्ति और मांग का संतुलन लोगों के फैसलों पर निर्भर करेगा. अगर यह एक साल का 'गोल्ड फास्ट' सफल होता है तो इसमें कोई शक नहीं है कि भारत आर्थिक रूप से दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. उस समय कीमत चाहे जो भी हो, भारत की क्रय शक्ति अधिक होगी।प्रधानमंत्री का संदेश है कि सोने का लालच छोड़कर देश के विकास के लिए हाथ मिलाएं. अगर आप एक साल तक सोना नहीं खरीदते हैं तो इस पैसे का इस्तेमाल देश में सड़क, रेलवे और शिक्षा के लिए किया जा सकता है. 2027 में सोने की कीमत के बारे में चिंता करने के बजाय, अब असली मंत्र यह है कि देश की अर्थव्यवस्था को कैसे उठाया जाए।

भारत दौरे को लेकर सक्रिय हुआ बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड, BCCI से लगातार संपर्क में अधिकारी

ढाका भारत और बांग्लादेश के बीच क्रिकेट रिश्तों को लेकर पिछले कुछ महीनों से लगातार विवाद और तनाव की खबरें सामने आती रही थीं. लेकिन अब पूर्व बांग्लादेशी कप्तान और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के मौजूदा अध्यक्ष तमीम इकबाल ने दोस्ताना बयान देकर माहौल बदलने की कोशिश की है। तमीम इकबाल ने साफ कहा है कि अब भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) और बीसीबी के बीच कोई बड़ा मुद्दा नहीं बचा है और भारत का बांग्लादेश दौरा दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दे सकता है. भारत को अगस्त 2025 में बांग्लादेश दौरे पर ODI और T20I सीरीज खेलनी थी. लेकिन दोनों देशों के बीच बढ़े राजनीतिक तनाव के कारण यह दौरा टाल दिया गया और इसे सितंबर 2026 तक शिफ्ट कर दिया गया। मुस्ताफिजुर को बाहर करने पर बिगड़े हालात इसके बाद दोनों बोर्ड्स के संबंधों में उस वक्त तल्खी आई, जब बीसीसीआई के निर्देश पर इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स ने मुस्ताफिजुर रहमान को अपने स्क्वॉड से रिलीज कर दिया. हालात इतने खराब हो गए थे कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने खिलाड़ियों की सुरक्षा का हवाला देते हुए आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 से अपना नाम वापस ले लिया था. हालांकि बाद में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई और अब भारत सितंबर 2026 में बांग्लादेश दौरे पर 6 मुकाबले खेल सकता है। तमीम इकबाल ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि उनके मौजूदा बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास के साथ काफी अच्छे रिश्ते हैं. उन्होंने कहा कि दोनों ने आईपीएल में एक साथ क्रिकेट खेला है और मिथुन कई बार ढाका लीग खेलने भी बांग्लादेश आ चुके हैं। तमीम इकबाल ने भारतीय टीम की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा बयान दिया. तमीम ने साफ कहा कि बांग्लादेश में भारतीय टीम की सुरक्षा को लेकर कभी कोई खतरा नहीं रहा. तमीम कहते हैं, 'जब भारत बांग्लादेश आता है तो पूरा स्टेडियम भर जाता है. लोग इस मुकाबले को बेहद पसंद करते हैं. मुझे नहीं लगता कि अब बीसीबी और बीसीसीआई के बीच कोई वास्तविक समस्या बची है। भारत का बांग्लादेश दौरा सिर्फ क्रिकेट सीरीज नहीं होगा, बल्कि दोनों देशों के क्रिकेट रिश्तों को फिर से मजबूत करने का बड़ा मौका साबित हो सकता है. अगर यह सीरीज तय कार्यक्रम के अनुसार होती है, तो यह लंबे समय बाद दोनों बोर्ड्स के बीच रिश्तों में आई खटास को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा। भारत का बांग्लादेश दौरा (2026) 1 सितंबर- पहला वनडे, मीरपुर 3 सितंबर- दूसरा वनडे, मीरपुर 6 सितंबर- तीसरे वनडे, चटगांव 9 सितंबर- पहला टी20, चटगांव 12 सितंबर- दूसरा टी20I, मीरपुर 13 सितंबर- तीसरा टी20I, मीरपुर

बायपास पर राहत: रालामंडल ब्रिज दोबारा चालू, लेकिन बिजली के पोल अब भी नहीं लगे

इंदौर राऊ-देवास बायपास पर अर्जुन बड़ौद ब्रिज के बाद रालामंडल के समीप बना ब्रिज भी ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया है। दोनों ब्रिजों पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने डेढ़ सौ करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की है। दोनों ब्रिजों को बिना लोकार्पण के शुरू कर दिया गया है। रालामंडल ब्रिज डेढ़ माह पहले ट्रायल के लिए खोला था, लेकिन चार दिन बाद उसे फिर बंद कर दिया गया, क्योंकि ब्रिज का लोड टेस्ट नहीं हुआ था और रेलिंग के बाद कुछ गलत निर्माण भी हो गए थे। गलती समझ में आने पर बाद में अफसरों ने उसे तुड़वा दिया था। ब्रिज की दोनों भुजाएं ट्रैफिक के लिए बंद होने के कारण वाहन को सर्विस रोड से गुजरना पड़ रहा था। कई बार ट्रैफिक जाम के कारण वाहनों की कतार लग जाती थी। राऊ से देवास के बीच 35 किलोमीटर के बायपास पर तीन जगह ब्रिजों का निर्माण चल रहा है। दो स्थानों पर ब्रिज ट्रैफिक के लिए खोल दिए गए हैं, लेकिन एमआर-10 जंक्शन पर बन रहे ट्रिपल लेयर ब्रिज के शुरू होने में छह माह से अधिक का समय और लगना है। यहां मध्य हिस्से को तो ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया है, लेकिन अभी अंडरपास और फ्लायओवर का काम बाकी है। इस ब्रिज के बनने से बायपास से इंदौर शहर में प्रवेश करने वाले वाहनों को आसानी होगी। अभी बोगदों से होकर वाहनों को आना पड़ता है, जबकि भारी वाहन तो बोगदों से आए ही नहीं पाते हैं। इस ब्रिज के बनने से शहर में एंट्री आसान होगी।रालामंडल ब्रिज ट्रैफिक के लिए तो खोल दिया गया, लेकिन ब्रिज पर बिजली के पोल नहीं लगाए गए हैं। यहां ट्रैफिक अंधेरे में ही चलेगा, जबकि बायपास के दूसरे ब्रिजों पर विद्युत पोल लगाए गए हैं।  

आज 13 मई को मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे नरसिंहपुर से 1835 करोड़ का अंतरण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 13 मई को नरसिंहपुर से 1835 करोड़ की राशि का अंतरण 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों को मिलेगी 36वीं किश्त नरसिंहपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज 13 मई को मध्यप्रदेश की करोड़ों महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सम्मान के लिये नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ की 36वीं किश्त जारी करेंगे। प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1,835 करोड़ 67 लाख 29 हजार 250 रूपये की राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की जाएगी। लाड़ली बहना योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और सम्मान का आधार बन चुकी है। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं की परिवार के निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है, पोषण एवं स्वास्थ्य स्तर में सुधार हुआ है और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भूमिका मजबूत हुई है। योजना की शुरुआत से अब तक सशक्तिकरण की यात्रा निरंतर जारी वर्ष 2023 जून में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना में अप्रैल 2026 तक 35 मासिक किस्तों का सफलतापूर्वक अंतरण किया जा चुका है। मई 2026 में जारी की जा रही राशि योजना की 36वीं किश्त जारी होगी। जून 2023 से अप्रैल 2026 तक महिलाओं के खातों में कुल 55,926.51 करोड़ रूपये की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से जमा की जा चुकी है। राशि में क्रमिक वृद्धि: 1,000 से बढ़कर 1,500 रूपये प्रतिमाह योजना के प्रारंभ में प्रत्येक पात्र महिला को 1,000 रूपये प्रतिमाह प्रदान किए जाते थे। अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 1,250 रूपये प्रतिमाह किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः वृद्धि कर इसे 1,500 रूपये प्रतिमाह कर दिया गया। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत कम राशि प्राप्त करने वाली महिलाओं को भी इस योजना के माध्यम से अतिरिक्त सहायता देकर कुल देय राशि सुनिश्चित की जा रही है। महिला कल्याण के लिए वित्तीय प्रतिबद्धता लाड़ली बहना योजना पर राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14,726.05 करोड़ रूपये, वर्ष 2024-25 में 19,051.39 करोड़ रूपये तथा वर्ष 2025-26 में 20,318.53 करोड़ रूपये की राशि व्यय की गई। वर्ष 2026-27 में अप्रैल 2026 तक 1830.54 करोड़ रूपये की राशि की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लाडली बहना योजना में 23,882.81 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है, जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। करोड़ों महिलाओं के जीवन में आया व्यापक परिवर्तन मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने मध्यप्रदेश में महिला कल्याण के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित की है। यह केवल आर्थिक सहायता योजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन गई है। योजना से प्रदेश की महिलाओं के जीवन में व्यापक और सकरात्मक परिवर्तन आए है। नियमित आर्थिक सहायता ने महिलाओं को घरेलू खर्चों के प्रबंधन ने अधिक आत्मनिर्भर बनाया है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक प्रभावी ढंग से खर्च कर पा रही है। योजना से प्राप्त राशि ने अनेक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों, लघु उद्योगों और स्व-रोजगार गतिविधियों से जुड़ने के लिये प्रेरित किया है। इससे उनकी आय के अतिरिक्त स्त्रोत विकसित हुए है। आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ महिलाओं के परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है और उनकी राय को अधिक महत्व मिलने लगा है। बैंक खातों में सीधे राशि अंतरण की व्यवस्था ने महिलाओं को औपचारिक बैंकिग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ा है। इससे उनमें वित्तीय साक्षरता और आर्थिक आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ग्रामीण और शहरी महिलाओं के लिए समान रूप से उपयोगी योजना का लाभ ग्रामीण, आदिवासी, शहरी, कल्याणी, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाओं सहित व्यापक वर्ग को मिल रहा है। पात्र महिलाओं के सक्रिय और आधार-लिंक्ड बैंक खातों में राशि सीधे जमा होने से प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और त्वरित बनी है। राज्य सरकार ने विभिन्न विशेष अवसरों और त्योहारों पर अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर महिलाओं के जीवन में उत्साह और खुशियों का संचार किया है। इससे योजना केवल नियमित सहायता तक सीमित न रहकर भावनात्मक संबल का भी माध्यम बनी है।

तपती गर्मी के बीच खुशखबरी: आ रहा है मॉनसून, मौसम विभाग ने जताई बारिश की संभावना

नई दिल्ली बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम की वजह से देश के अधिकांश हिस्सों में मौसम सक्रिय हो गया है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियां दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में मॉनसून की समय से पहले दस्तक के लिए बेहद अनुकूल बन रही हैं. बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में एक कम दबाव का क्षेत्र यानी लो प्रेशर एरिया बन गया है, जो अगले कुछ घंटों में और अधिक मजबूत होने की संभावना है. इस सिस्टम के प्रभाव से दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी. साथ ही इस सिस्टम से मॉनसून उत्तरी दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। उत्तर भारत में आज आंधी-बारिश का अलर्ट यूपी-बिहार समेत पांच राज्यों में आज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. बिहार और उत्तराखंड के सभी जिलों में जबकि उत्तर प्रदेश के 38 जिलों में बारिश होने की संभावना जताई गई है. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में आंधी-तूफान और बारिश से जनजीवन प्रभावित है. इस बीच मौसम विभाग ने अगले दो दिन के लिए प्रदेश में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का दौर दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहने वाला है. मौसम विभाग के अनुसार, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में 14 से 17 मई के बीच भारी बारिश हो सकती है. वहीं, असम, मेघालय और मणिपुर सहित अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भी कई जगहों पर अच्छी बारिश की संभावना है. बंगाल की खाड़ी में बने इस सिस्टम का असर ओडिशा में भी साफ दिखाई देगा, जहां राज्य के कई हिस्सों में अगले 6 दिनों तक बारिश का अनुमान है. ओडिशा के 20 जिलों में बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। कब होगी मॉनसून की एंट्री? भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां तेजी से अनुकूल होती जा रही हैं. सप्ताह के अंत तक दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कुछ इलाकों में मॉनसून की एंट्री हो सकती है. इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश, आंधी, बिजली गिरने, ओलावृष्टि और कुछ क्षेत्रों में भीषण गर्मी का मिश्रित असर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और श्रीलंका के उत्तरी तट के पास बना कम दबाव का क्षेत्र अब उत्तर दिशा की ओर बढ़ रहा है. इसके चलते अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की आशंका है। उत्तर भारत में मौसम में बदलाव DTE के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ ऊपरी हवाओं में चक्रवाती रूप में बना हुआ है. इसके प्रभाव से 12 से 15 मई तक दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. गरज-चमक के साथ हवाओं की रफ्तार 30 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. पूर्वी राजस्थान में धूल भरी आंधी चलने का भी अंदेशा है। मौसम विभाग ने खराब मौसम में खुले में न निकलने की सलाह दी है.  पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश व बर्फबारी जारी रह सकती है. कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की भी संभावना है, जिससे फलों और सब्जियों की फसलों को नुकसान हो सकता है। पूर्वी भारत में बारिश और तेज हवाएं बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और ओडिशा में अगले कुछ दिनों तक बारिश और तेज हवाओं का असर रहेगा. बिहार में ओलावृष्टि, झारखंड और ओडिशा में गरज के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. सिक्किम और उत्तर बंगाल के पर्वतीय इलाकों में भारी बारिश (64.5-115.5 मिमी) का येलो अलर्ट जारी है। दक्षिण भारत में बारिश और हवाएं तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल में भी बारिश व गरज-चमक का दौर रहेगा. कई जगहों पर 30-50 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। कहां चलेगी लू और भीषण गर्मी? डाउन टू अर्थ की खबर के मुताबिक, एक तरफ जहां कई राज्यों में बारिश से राहत मिल रही है. वहीं, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है. पश्चिम राजस्थान और गुजरात में 12 से 17 मई तक लू चलने की संभावना है. पूर्वी राजस्थान, पश्चिम मध्य प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है।