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मंत्री परमार की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान भोपाल की सामान्य परिषद की बैठक हुई संपन्न

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल की सामान्य परिषद की बैठक हुई। बैठक में विद्यार्थियों के हित, शैक्षणिक गुणवत्ता, संस्थान की अधोसंरचना तथा शिक्षकों एवं कर्मचारियों से जुड़े विषयों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, सुरक्षित परिसर और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक के प्रारंभ में पिछली बैठक का पालन प्रतिवेदन एवं कार्यवाही विवरण प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों की सुविधाओं और सुरक्षा को प्राथमिकता बैठक में मंत्री  परमार ने संस्थान में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अग्निशमन उपकरण स्थापित करने का विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए। विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से संबंधित गतिविधियों को सामान्य बजट भाग-1 में शामिल करते हुए वार्षिक गतिविधियों के लिए 50 हजार रुपए का प्रावधान किया गया। वित्तीय वर्ष 2026-27 के विशेष अन्य आकस्मिक व्यय में भी 10 लाख रुपए की वृद्धि की गई, जिससे संस्थान की विभिन्न गतिविधियों का सुचारु संचालन किया जा सकेगा। विद्यार्थियों के अध्ययन की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए स्वामी विवेकानंद पुस्तकालय भवन की व्यवस्थाओं में सुधार तथा अध्ययन कक्ष को वातानुकूलित करने का निर्णय लिया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत संचालित पाठ्यक्रमों में मेजर एवं माइनर विषयों के स्वैप तथा डबल मेजर के लिए विद्यार्थियों से लिए जाने वाले शुल्क के प्रस्ताव को भी सामान्य परिषद ने मान्यता प्रदान की। बीबीए एवं एमबीए प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों से नियमानुसार विश्वविद्यालय नामांकन शुल्क लिए जाने को भी स्वीकृति दी गई। नवाचार, कौशल और रोजगार के अवसरों पर जोर विद्यार्थियों के नवाचार एवं रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए संस्थान के इनक्यूबेशन सेंटर में मानसेवी रूप से सीईओ अथवा मैनेजर नियुक्त करने की अनुमति दी गई। यह अधिकारी इनक्यूबेशन गतिविधियों के साथ प्लेसमेंट संबंधी कार्यों में भी सहयोग करेगा। संस्थान में रिमोट पायलट एवं ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव पर भोपाल स्थित आईआईएसईआर तथा चित्रकूट में संचालित इसी प्रकार के केंद्रों का अध्ययन करने और उनके अनुरूप विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को बजट स्वीकृति के लिए भेजने के निर्देश दिए गए। संस्थान के कृषि विभाग के लिए पर्याप्त कक्षाओं, सेमिनार हॉल तथा विभागाध्यक्ष एवं शिक्षकों के लिए आवश्यक स्थान की व्यवस्था हेतु विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए गए। शैक्षणिक गुणवत्ता और NAAC सुझावों पर निरंतर कार्रवाई संस्थान द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) द्वारा दिए गए सुझावों के अनुरूप निरंतर कार्रवाई की जा रही है। सामान्य परिषद ने इन बिंदुओं पर गंभीरता से कार्य करते हुए संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता एवं व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। शिक्षकों और कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय संस्थान में कार्यरत मानसेवी शिक्षकों की मांगों पर संवेदनापूर्वक विचार करते हुए सामान्य परिषद ने निर्णय लिया कि अब इन्हें ‘अतिथि विद्वान’ के नाम से संबोधित किया जाएगा। उन्हें 13 आकस्मिक अवकाश एवं 3 ऐच्छिक अवकाश दिए जाने के निर्देश भी दिए गए। संस्थान में कार्यरत मानसेवी कर्मचारियों के मानदेय में प्रतिवर्ष 7.5 प्रतिशत वृद्धि करने तथा यह वृद्धि आगामी तीन वर्षों तक जारी रखने का निर्णय लिया गया। कन्या छात्रावास की मैनेजर का मानदेय 22 हजार 374 रुपए से बढ़ाकर 30 हजार 287 रुपए प्रतिमाह करने की भी स्वीकृति दी गई। संस्थान में आमंत्रित विशेषज्ञों को व्याख्यान अथवा बैठक के लिए 1,500 रुपए प्रति व्याख्यान/बैठक तथा कार्यालयीन परामर्श के लिए 700 रुपए प्रति बैठक मानदेय दिए जाने को भी स्वीकृति दी गई। आउटसोर्स कर्मचारियों की सामान्य आवश्यकता की पूर्ति सेडमैप के माध्यम से तथा उच्च कुशलता से अधिक योग्यता एवं विशेष दक्षता वाले कर्मचारियों के लिए संस्थान स्तर पर विज्ञापन जारी कर नियुक्ति करने के निर्देश दिए गए। संस्थान की कार्यक्षमता बढ़ाने प्रशासनिक निर्णय संस्थान में 15 लाख रुपए तक के बजट एवं खरीदी संबंधी प्रस्तावों पर निर्णय लेने के लिए संचालक को अधिकृत किया गया। इससे संस्थान की आवश्यक गतिविधियों और व्यवस्थाओं से संबंधित निर्णयों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा। बैठक के प्रारंभ में संस्थान द्वारा प्रकाशित वार्षिक पत्रिका ‘एक्सेल एसेंस’ का विमोचन किया गया। बैठक में उच्च शिक्षा के अपर मुख्य सचिव  अनुपम राजन, आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा, माधव साइंस कॉलेज उज्जैन के प्राचार्य डॉ. हरीश व्यास, संस्थान के संचालक डॉ. प्रज्ञेश अग्रवाल सहित सामान्य परिषद के अन्य सदस्य एवं विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

गौलाना में ‘प्रतिभा मंदिर प्रकल्प’ का शुभारंभ, 1,751 चयनित विद्यार्थियों का सम्मान; 9 केंद्रों पर होगी निःशुल्क तैयारी

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा है कि गरीब और सामान्य परिवार के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के सपनों के बीच आर्थिक परिस्थितियां बाधा नहीं बनें, यही ‘प्रतिभा मंदिर प्रकल्प’ का मूल उद्देश्य है। सरकार का प्रयास है कि विद्यार्थियों को अपने ही जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध हो। मंत्री  परमार गुरुवार को शाजापुर जिले के गौलाना स्थित डॉ भीमराव अंबेडकर शासकीय सांदीपनि विद्यालय में ‘प्रतिभा मंदिर प्रकल्प’ के शुभारंभ एवं प्रतिभा खोज परीक्षा में चयनित विद्यार्थियों के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने चयनित 1 हजार 751 विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। गरीब पिता की पीड़ा से उपजा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का संकल्प मंत्री  परमार ने कहा कि अच्छे विद्यालयों में पढ़ने का अवसर हर बच्चे का अधिकार है। उन्होंने कहा कि एक गरीब पिता की उस पीड़ा ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया, जब उसकी बेटी ने शहर के बड़े और अच्छे विद्यालय को देखकर वहां पढ़ने की इच्छा व्यक्त की, लेकिन आर्थिक स्थिति के कारण पिता अपनी बेटी का सपना पूरा नहीं कर सका। इसी पीड़ा को समझते हुए सरकार ने ऐसे विद्यालयों और शैक्षणिक व्यवस्थाओं के निर्माण पर जोर दिया, जहां गरीब परिवार के बच्चे भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें।  परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को व्यापक बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से प्रदेश में सीएम राइज एवं सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर अधोसंरचना, सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो रही है। महंगी कोचिंग के आर्थिक बोझ से विद्यार्थियों को मिलेगी मुक्ति मंत्री  परमार ने कहा कि JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनेक विद्यार्थी इंदौर, कोटा सहित बड़े शहरों का रुख करते हैं। महंगी कोचिंग और रहने-खाने का खर्च सामान्य एवं गरीब परिवारों के लिए बड़ी चुनौती होता है। कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी जमीन तक बेचने को मजबूर हो जाते हैं।  परमार ने कहा कि ‘प्रतिभा मंदिर’ के माध्यम से इसी आर्थिक बोझ को कम करने का प्रयास किया गया है। अब विद्यार्थियों को अपने जिले में ही निःशुल्क कोचिंग और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध होगा। 6,600 से अधिक पंजीयन, 1,751 विद्यार्थियों का चयन मंत्री  परमार ने बताया कि प्रतिभा खोज परीक्षा के लिए 6,600 से अधिक विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया था। परीक्षा के परिणाम में 1,751 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। इनमें 937 विद्यार्थी कक्षा 9 की आधारभूत तैयारी, 347 JEE तथा 467 NEET की तैयारी करेंगे। विद्यार्थियों की व्यापक भागीदारी को देखते हुए प्रतिभा मंदिर केंद्रों की संख्या 3 से बढ़ाकर 9 की गई है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता होने पर आगे एक-दो केंद्र और बढ़ाए जाएंगे, ताकि चयनित किसी भी विद्यार्थी को तैयारी के अवसर से वंचित न होना पड़े। कोटा और नई दिल्ली के विशेषज्ञ देंगे मार्गदर्शन प्रतिभा मंदिर की कक्षाएं कोटा एवं नई दिल्ली स्थित स्टूडियो से ऑनलाइन संचालित होंगी। विषय-विशेषज्ञ शिक्षक विद्यार्थियों को JEE और NEET की तैयारी के लिए मार्गदर्शन देंगे। अध्ययन सामग्री डिजिटल माध्यमों के साथ मुद्रित स्वरूप में भी उपलब्ध कराई जाएगी। मंत्री  परमार ने कहा कि यह केवल कोचिंग की व्यवस्था नहीं, बल्कि प्रतिभाओं के निर्माण की एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और भविष्य को गढ़ने का कार्य करते हैं। जिस प्रकार मंदिर के शिल्पकार पत्थर को तराशकर सुंदर प्रतिमा का निर्माण करता है, उसी प्रकार शिक्षक अपने ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों के जीवन को आकार देते हैं। अब महाविद्यालयों में पीएससी की तैयारी की भी होगी व्यवस्था मंत्री  परमार ने कार्यक्रम में घोषणा की कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आने वाले समय में महाविद्यालयों में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (पीएससी) की परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार आवश्यकता के अनुसार इस व्यवस्था पर संसाधन उपलब्ध कराएगी, ताकि विद्यार्थियों को प्रशासनिक एवं अन्य सेवाओं में जाने के लिए अपने ही संस्थानों में बेहतर मार्गदर्शन मिल सके। इसकी शुरुआत शाजापुर जिले से करने का प्रयास किया जाएगा। प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय संकल्प को धरातल पर उतारने का प्रयास मंत्री  परमार ने कहा कि 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के समान अवसर उपलब्ध कराने के राष्ट्रीय संकल्प को मध्यप्रदेश में धरातल पर उतारने की दिशा में ‘प्रतिभा मंदिर’ महत्वपूर्ण पहल है। प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर विद्यार्थियों को यह प्रकल्प समर्पित करना इस संकल्प को सेवा और कार्य के रूप में आगे बढ़ाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से शिक्षा को भारतीय दृष्टि, ज्ञान और आत्मविश्वास से जोड़ने का कार्य किया गया है। विद्यार्थियों में यह भाव विकसित होना चाहिए कि वे केवल अपने भविष्य के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र के निर्माण के लिए भी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। नवाचार और प्रतिभाओं को भी मिलेगा प्रोत्साहन मंत्री  परमार ने बताया कि जिले में विद्यार्थियों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताओं के साथ विज्ञान एवं अन्य क्षेत्रों में किए जा रहे नवाचारों को भी प्रोत्साहित और पुरस्कृत किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यालय और महाविद्यालय स्तर की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाकर उन्हें प्रदेश और देश के विकास से जोड़ना है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि एकाग्रता, परिश्रम और निरंतर सीखने की भावना के साथ आगे बढ़ें। सरकार उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक, ज्ञान आधारित और भारत-केंद्रित परिवर्तन के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। शिक्षा के माध्यम से विकसित भारत के संकल्प को मिलेगी गति मंत्री  परमार ने कहा कि मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे नवाचारों का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है, जो ज्ञान, कौशल, संस्कार और राष्ट्रभाव से संपन्न हों। विद्यालय और महाविद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने के स्थान नहीं, बल्कि श्रेष्ठ नागरिकों के निर्माण के केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना भारत की विशेषता है। हमारे विद्यार्थी ज्ञान … Read more

आयुर्वेद और योग को घर-घर पहुंचाने का आह्वान, आयुष मंत्री परमार बोले- स्वस्थ समाज का यही आधार

"आयुर्वेद और योग को जन-जन तक पहुँचाकर स्वस्थ समाज का निर्माण करें": आयुष मंत्री परमार मंत्री परमार की अध्यक्षता में शासकीय धन्वन्तरि आयुर्वेद महाविद्यालय, उज्जैन की साधारण सभा की बैठक हुई भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में शासकीय धन्वन्तरि आयुर्वेद महाविद्यालय, उज्जैन की साधारण सभा की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में मंत्री परमार ने महाविद्यालय के विकास, आयुर्वेद के संवर्धन तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। आयुष मंत्री परमार ने आगामी सिंहस्थ महापर्व की दृष्टि से शासकीय धन्वन्तरि आयुर्वेद महाविद्यालय की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर बल दिया। मंत्री परमार ने कहा कि सिंहस्थ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद, योग और जीवनशैली आधारित स्वास्थ्य पद्धतियों को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर का उपयोग आयुर्वेद और योग के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा जनजागरूकता के लिए किया जाना चाहिए। मंत्री परमार ने कहा कि योग भारत की अमूल्य धरोहर है और इसे गाँव-गाँव तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने संस्थान से योग को जन-आंदोलन का स्वरूप देने, ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकाधिक योग गतिविधियाँ संचालित करने तथा लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष प्रयास करने का आह्वान किया। मंत्री परमार ने आयुर्वेद को जन-जन तक पहुँचाने के लिए इसे भारतीय रसोई (किचन) से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय भोजन परंपरा स्वयं में आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित रही है तथा दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले मसाले, औषधीय पौधे एवं पारंपरिक खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य संरक्षण के प्रभावी माध्यम हैं। आयुर्वेद को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के लिए इसकी उपयोगिता को प्रत्येक घर तक पहुँचाना आवश्यक है। बैठक में पिछले वर्ष की कार्यकारिणी सभा के निर्णयों के पालन प्रतिवेदन पर चर्चा की गई। मंत्री परमार ने महाविद्यालय परिसर में 500 बिस्तरों वाले आयुर्वेद चिकित्सालय के निर्माण के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। मंत्री परमार ने महाविद्यालय परिसर में नवीन ऑडिटोरियम निर्माण किए जाने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने महाविद्यालय परिसर में अतिथि गृह तथा छात्रावास अधीक्षकों के आवास निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश भी दिए। बैठक में उज्जैन (उत्तर) विधायक अनिल जैन कालूहेडा, उप सचिव आयुष श्रीमती रंजना देवड़ा, आयुष संचालनालय की प्रतिनिधि डॉ. वंदना बोराना, महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. जे.पी. चौरसिया, नीमा जिलाध्यक्ष डॉ अनिल सराफ, पूर्व छात्र डॉ ईश्वर सिंह सिसोदिया सहित अन्य अधिकारी, साधारण सभा के सदस्यगण एवं महाविद्यालय के पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक का संचालन डॉ अजयकीर्ति जैन और आभार प्रदर्शन प्रो. नृपेन्द्र मिश्रा ने किया।  

मंत्री परमार का निर्देश: विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों और आधुनिक कौशल के अनुरूप करें तैयार

विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में कार्य करें : मंत्री परमार उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान की सामान्य परिषद की बैठक हुई भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान की सामान्य परिषद की बैठक सम्पन्न हुई। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने संस्थान के शैक्षणिक, शोध, छात्र कल्याण एवं अधोसंरचनात्मक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्देश दिए। मंत्री परमार ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने जापान सहित भारत के सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों वाले देशों की भाषाओं के प्रशिक्षण पर विशेष बल देते हुए कहा कि इससे युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे तथा वे विदेशों में प्रभावी संवाद स्थापित कर सकेंगे। उन्होंने संस्थान को इस दिशा में नवाचारपूर्ण पहल करने के निर्देश दिए। मंत्री परमार ने छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए परिसर में सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं के लिए स्वच्छ, आधुनिक एवं पर्याप्त शौचालय सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया तथा कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित और सुविधायुक्त परिसर भी उतना ही आवश्यक है। मंत्री परमार ने संस्थान परिसर में वृहद स्तर पर नीम, बरगद, पीपल, जामुन एवं आम जैसे पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्षों के रोपण के निर्देश दिए। उन्होंने संस्थान के हरित वसुंधरा क्लब द्वारा लुप्तप्राय वृक्ष प्रजातियों के संरक्षण एवं रोपण के संकल्प की सराहना करते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को अनुकरणीय बताया। मंत्री परमार ने संस्थान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रस्तुत शोधपत्रों के संकलन एवं संस्थान के वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन का विमोचन भी किया। बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा विभाग अनुपम राजन ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं कल्याण से संबंधित विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया। बैठक में संस्थान के वर्ष 2026-27 के वार्षिक बजट 12 करोड़ 86 लाख 3 हजार 503 रुपये को स्वीकृति प्रदान की गई। साथ ही संस्थान के प्रत्येक संकाय के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को संचालक पदक प्रदान किए जाने तथा सामान्य परिषद के अध्यक्ष के नाम से विशेष पदक स्थापित किए जाने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित किया गया। परिषद ने प्रत्येक संकाय के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के शैक्षणिक शुल्क में राहत प्रदान करने के प्रस्ताव को भी सहर्ष स्वीकृति दी। बैठक में उच्च स्तरीय शोध को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से फोरियर इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोप (FTIR) उपकरण के क्रय के लिये 20 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। साथ ही विभिन्न स्तरों पर उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान किए जाने के प्रस्ताव को भी परिषद द्वारा अनुमोदित किया गया। बैठक में संस्थान के संचालक डॉ. प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल द्वारा सामान्य परिषद को अवगत कराया गया कि वर्ष 2026 में भारतीय वाणिज्य परिषद का राष्ट्रीय सम्मेलन भोपाल में संस्थान द्वारा सेज विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर परिषद ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अपनी सहमति प्रदान की। बैठक में विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी उच्च शिक्षा अनिल पाठक, डॉ दिवा मिश्रा, माधव विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हरीश व्यास, सीए संजय श्रीवास्तव, डॉ. शैलजा दुबे, डॉ. महिपाल सिंह यादव, डॉ. ज्योति सक्सेना, डॉ. रामकृष्ण श्रीवास्तव, डॉ. सभाकांत द्विवेदी, डॉ. स्वामी स्वरूप श्रीवास्तव, डॉ. अमित जैन, डॉ. निधि चौहान, डॉ. रचना सिंह ठाकुर एवं डॉ. अमित मांडले सहित सामान्य परिषद के सदस्य उपस्थित थे।  

तकनीक आधारित शिक्षा से छात्रों के लिए खुलेंगे नए अवसरों के द्वार : उच्च शिक्षा मंत्री परमार

तकनीक आधारित शिक्षा से विद्यार्थियों को मिलेंगे नए अवसर : उच्च शिक्षा मंत्री परमार उच्च शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन को गति देने के लिए इंदौर में आयोजित हुआ ‘डिजी100x मध्यप्रदेश समिट’ उच्च शिक्षा विभाग एवं डिजी के संयुक्त तत्वावधान में उच्च शिक्षा के डिजिटल भविष्य पर हुआ मंथन मंत्री परमार ने किया समिट का शुभारंभ भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग द्वारा  इंदौर के मेरियट होटल में “डिजी100x मध्यप्रदेश समिट” का आयोजन किया गया। उच्च शिक्षा विभाग एवं डिजी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महत्वपूर्ण समिट का शुभारंभ प्रदेश के उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने किया। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन, उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा, आर.आर. कन्हेरे सहित प्रदेश के विभिन्न शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, कुलसचिव, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ तथा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। समिट का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा डिजिटल नवाचारों के माध्यम से शिक्षण एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और आधुनिक बनाना था। कार्यक्रम में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में डिजिटल परिवर्तन की संभावनाओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डेटा आधारित निर्णय प्रणाली, ई-गवर्नेंस, डिजिटल मूल्यांकन तथा भविष्य की शिक्षा व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। मंत्री परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि विभाग उत्तर पुस्तिकाओं के शत-प्रतिशत डिजिटल वैलिडेशन की दिशा में कार्य कर रहा है, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और प्रभावी बन सकेगी। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित शिक्षा केवल प्रशासनिक सुधार का माध्यम नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का सशक्त उपकरण भी है। मंत्री परमार ने बताया कि विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार की जा रही है तथा उन्हें बहुभाषी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तेलुगू, तमिल, मराठी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए डिजिटल तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग है। उच्च शिक्षा संस्थानों को विद्यार्थियों की बदलती आवश्यकताओं तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तकनीकी रूप से सशक्त बनाना होगा। इसके लिए विश्वविद्यालयों को शोध, नवाचार तथा डिजिटल अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कार्यों में गति, पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए तकनीक को अपनाना आवश्यक है। जब तकनीकी विशेषज्ञ, विश्वविद्यालय और शासन मिलकर योजनाओं का स्वरूप तैयार करते हैं, तब शिक्षा एवं मूल्यांकन व्यवस्था को नई दिशा मिलती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग उच्च शिक्षा क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर संसाधन और सीखने के अधिक अवसर उपलब्ध कराएगा। मंत्री परमार ने परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल मूल्यांकन (डिजिटल इवैल्यूएशन) प्रणाली को अपनाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी नवाचारों का उपयोग शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए अनिवार्य हो गया है। उन्होंने विश्वविद्यालयों, तकनीकी विशेषज्ञों तथा शासन के प्रतिनिधियों से इस विषय पर व्यापक विमर्श कर व्यवहारिक और प्रभावी समाधान विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लागू करने से परीक्षा प्रक्रिया की गुणवत्ता में सुधार होगा, परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ेगी तथा विद्यार्थियों को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं मिल सकेंगी। उन्होंने इस कार्यशाला को समयानुकूल और महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह उच्च शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने कहा कि विभाग विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ‘सार्थक ऐप’ आधारित उपस्थिति प्रणाली को लागू करने के प्रयास कर रहा है। उन्होंने वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली में 30 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन और 70 प्रतिशत लिखित परीक्षा के अनुपात का उल्लेख करते हुए कहा कि बदलते शैक्षणिक परिवेश को देखते हुए इसे 40:60 करने पर विचार किया जाना चाहिए। इससे विद्यार्थियों की सतत शैक्षणिक सहभागिता और कक्षा आधारित सीखने की प्रक्रिया को अधिक महत्व मिलेगा। उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज शिक्षा जगत की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुकी है। विद्यार्थियों को एआई आधारित तकनीकों से परिचित कराने के लिए महाविद्यालयों में एआई से संबंधित सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को विद्यार्थियों को एआई टूल्स के रचनात्मक, नैतिक और जिम्मेदार उपयोग के लिए प्रेरित करना चाहिए, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें। समिट में विशेषज्ञों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म, स्मार्ट प्रशासन, ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली, डेटा आधारित प्रबंधन तथा तकनीक आधारित कौशल विकास जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि डिजिटल संसाधनों और नवाचारों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अधिक सुलभ, प्रभावी और समावेशी बनाया जा सकता है। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, विश्वविद्यालय प्रशासकों तथा तकनीकी विशेषज्ञों के बीच सार्थक संवाद स्थापित कर उच्च शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में साझा कार्ययोजना तैयार करना था। समिट में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने उच्च शिक्षा को अधिक नवाचारी, विद्यार्थी-केंद्रित, समावेशी और भविष्य उन्मुख बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव भी प्रस्तुत किए।  

पीड़ित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ी है प्रदेश सरकार

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री तथा पन्ना जिले के प्रभारी मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने बुधवार को अजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम बीहरपुरवा के नयापुरवा पहुंचकर गत मंगलवार को कुआं धसकने की हृदय विदारक घटना में दिवंगत पांच श्रमिकों के परिजनों से भेंट की। मंत्री  परमार ने शोकाकुल परिवारों को ढांढस बंधाते हुए अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की। प्रभारी मंत्री  परमार ने कहा कि यह अत्यंत पीड़ादायक एवं दुःखद दुर्घटना है, जिसने पूरे क्षेत्र को शोकाकुल कर दिया है। दिवंगत श्रमिक अपने परिवारों के बेहतर भविष्य के लिए कठिन परिश्रम कर रहे थे। इस दुःख की घड़ी में प्रदेश सरकार पूरी संवेदनशीलता एवं प्रतिबद्धता के साथ प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। मंत्री  परमार ने आश्वस्त किया कि पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। बेटियों की शिक्षा सहित शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी सुनिश्चित किया जाएगा। मंत्री  परमार ने घटना की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए तथा कहा कि जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी निरंतर पीड़ित परिवारों के संपर्क में रहकर हर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएं। इस दौरान सांसद  विष्णुदत्त शर्मा, विधायक एवं पूर्व मंत्री  ब्रजेंद्र प्रताप सिंह,  बृजेंद्र मिश्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष मती मीना राजे, कलेक्टर मती ऊषा परमार एवं पुलिस अधीक्षक मती निवेदिता नायडू भी उपस्थित थीं। 

“वसुधैव कुटुंबकम्” भारत की आत्मा – विश्व हमारे लिए बाजार नहीं, बल्कि एक परिवार है

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स केवल वित्तीय विशेषज्ञ नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति, पारदर्शिता एवं सुशासन के सशक्त स्तंभ हैं। भारतीय परम्परा में अर्थव्यवस्था का चिंतन केवल लाभ और उपभोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह नैतिकता, लोककल्याण एवं मानवीय मूल्यों पर आधारित एक व्यापक दार्शनिक दृष्टि का प्रतिनिधित्व करता है। “शुभ-लाभ” भारतीय अर्थचिंतन का मूल दर्शन है, जिसमें कमाई ईमानदारी, सदाचार और कर्तव्यनिष्ठा से हो तथा उसका उपयोग समाजोपयोगी कार्यों एवं लोककल्याण के लिए किया जाए। मंत्री  परमार शनिवार को, भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) द्वारा आयोजित दीक्षांत समारोह में नव-योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को संबोधित कर रहे थे। मंत्री  परमार ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण “वसुधैव कुटुम्बकम्” का है, जहाँ दुनिया केवल बाजार नहीं, बल्कि आत्मीयता, सहअस्तित्व और मानवता से जुड़ा एक परिवार है। भारत की यही सांस्कृतिक चेतना, हमें विश्वमंच पर पुनः सिरमौर बनने की संकल्पना को साकार करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने नव-योग्य सीए विद्यार्थियों से अपने ज्ञान, क्षमता एवं कौशल का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखते हुए समाज, राष्ट्र एवं मानवता के कल्याण के लिए समर्पित करने का आह्वान किया। मंत्री  परमार ने युवाओं से जीवन को समाजोपयोगी बनाते हुए राष्ट्रीय पुनर्निर्माण में सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज देश को ऐसे युवा पेशेवरों की आवश्यकता है, जो नैतिक मूल्यों, पारदर्शिता एवं राष्ट्रहित को सर्वोच्च रखते हुए विकसित भारत के निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभाएँ। मंत्री  परमार ने सभी नव-योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को उज्ज्वल एवं सफल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर वरिष्ठ सदस्य सीए अभय छाजेड़ ने भी नव-योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को संबोधित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य, प्रोफेशन में उपलब्ध नई संभावनाओं तथा बदलते समय के साथ निरंतर सीखते रहने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं को प्रोफेशन में उत्कृष्टता प्राप्त करने एवं ICAI की गरिमा को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। दीक्षांत समारोह में भोपाल शाखा के लगभग 80 नव-योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने अपने अभिभावकों के साथ सहभागिता कर उपाधि एवं प्रमाण-पत्र प्राप्त किए। इस अवसर पर भोपाल शाखा के अध्यक्ष सीए आदित्य वास्तव, सचिव सीए अभिषेक जैन, पूर्व अध्यक्ष, पूर्व सचिव, वरिष्ठ सदस्यगण एवं बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय दीक्षांत समारोह में देशभर के 10 हजार 390 नव-योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने एक साथ सहभागिता की। यह समारोह केंद्रीय स्तर पर आयोजित किया गया, जिसमें देश की विभिन्न शाखाओं ने ऑनलाइन माध्यम से भाग लिया। भोपाल शाखा को पहली बार इस गौरवपूर्ण आयोजन की मेजबानी का अवसर प्राप्त हुआ।

विद्यार्थियों के शैक्षणिक दस्तावेजों की डिजिलॉकर में उपलब्धता और स्वयं पोर्टल पर पंजीयन करें सुनिश्चित

भोपाल  विद्यार्थियों का सर्वांगीण हित, हमारी प्राथमिकता है। विद्यार्थियों को सरलता और सुलभता से सुविधाएं उपलब्ध हो, इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। समस्त विश्वविद्यालयों द्वारा विद्यार्थियों की अंकसूची, उपाधि एवं अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों की डिजिलॉकर में उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे विद्यार्थियों को सुरक्षित, प्रमाणित एवं सरल डिजिटल सेवाओं का लाभ मिल सके। साथ ही प्रत्येक विद्यार्थी का स्वयं पोर्टल पर पंजीयन कराते हुए उन्हें उपलब्ध पाठ्यक्रमों में रुचि एवं आवश्यकता अनुसार चयन के लिए प्रेरित कर, शैक्षणिक उन्नयन से जोड़ा जाए। विश्वविद्यालयों के कार्यों का प्रभाव, सामाजिक परिवर्तन की अभिप्रेरणा बने। विश्वविद्यालय, सामाजिक परिवर्तन के वाहक बनें। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने बुधवार को भोपाल स्थित निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सभागार में, (एनएडी-डिजिलॉकर) एवं स्वयं पोर्टल के प्रभावी क्रियान्वयन" विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ अवसर पर कही। मंत्री  परमार ने एनएडी-डिजिलॉकर एवं स्वयं पोर्टल के क्रियान्वयन में, देश भर में प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर संतोष व्यक्त किया एवं देश भर में प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए प्रोत्साहित भी किया। उच्च शिक्षा मंत्री  परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के यशस्वी नेतृत्व में, हमारा प्रदेश उच्च शिक्षा को आधुनिक, नवाचारयुक्त, पारदर्शी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। हमारा लक्ष्य हर विद्यार्थी तक सरल, सुरक्षित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाना है। मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में, यह एक महत्वपूर्ण पहल है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसरण में, नई शिक्षा व्यवस्था में तकनीक केवल सुविधा का ही माध्यम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य का सशक्त आधार है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश का प्रत्येक विद्यार्थी डिजिटल रूप से सक्षम, ज्ञानसम्पन्न एवं वैश्विक अवसरों के लिए तैयार बने। विश्वविद्यालयों में परीक्षा एवं परिणाम को पारदर्शितापूर्ण बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है। डिजिटल मूल्यांकन पद्धति से परीक्षा एवं परिणाम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। मंत्री  परमार ने कहा कि विद्यार्थी को संवेदनशील एवं श्रेष्ठ नागरिक बनाना, विश्वविद्यालयों का दायित्व है। इसके लिए राष्ट्रहित एवं समाज हित में संस्कार रोपित करने की आवश्यकता हैं। मंत्री  परमार ने कहा कि शिक्षकों के आचरण को विद्यार्थी आत्मसात करते हैं, इसलिए शिक्षण व्यावहारिक होना चाहिए। मंत्री  परमार ने कहा कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए, भारतीय दृष्टि के साथ शैक्षणिक परिदृश्य सृजन करना होगा। मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तकनीक आधारित शिक्षण, डिजिटल गवर्नेंस एवं गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देना, हमारी प्राथमिकताओं में समाहित है। एनएडी-डिजिलॉकर के माध्यम से विद्यार्थियों के शैक्षणिक दस्तावेज सुरक्षित, प्रमाणित एवं डिजिटल रूप में सहज उपलब्ध होंगे, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी तथा समय और संसाधनों की बचत होगी। एनएडी-डिजिलॉकर, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता को सुदृढ़ बना रहा है। वहीं (स्वयं) पोर्टल, युवाओं को देश के श्रेष्ठ शिक्षकों एवं संस्थानों से ऑनलाइन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर रहा है। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय, छात्र हित को प्राथमिकता देते हुए एनएडी-डिजिलॉकर एवं स्वयं पोर्टल का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें जिससे विद्यार्थियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।  राजन ने कहा कि विश्वविद्यालय, स्वयं पोर्टल के विनियमन को अपनाते हुए समस्त विद्यार्थियों का स्वयं पोर्टल पर पंजीयन एवं परीक्षा में प्रतिभागिता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालय, अकादमिक कैलेंडर का शत प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें ताकि विद्यार्थियों के शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हों।  राजन ने विश्वविद्यालयों को पारदर्शितापूर्ण प्रशासनिक प्रबंधन के लिए, समर्थ पोर्टल पर शिफ्ट करने के लिए भी प्रेरित किया। उद्घाटन सत्र में स्वागत उद्बोधन देते हुए मप्र निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के चेयरमैन प्रो खेमसिंह डेहरिया ने, कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। विषयविद सु दीक्षा राजपूत संयुक्त सचिव विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली एवं  अभिनव शर्मा क्षेत्रीय समन्वयक एनएडी-डिजिलॉकर ने, कार्यशाला की प्रासंगिकता, आवश्यकता एवं महत्ता के आलोक में अपने विचार साझा किए। कार्यशाला में विभिन्न तकनीकी सत्रों में विषयविद एनएडी-डिजिलॉकर एवं स्वयं पोर्टल के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत संवाद करेंगे और विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी करेंगे। कार्यशाला में आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, मप्र निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के प्रशासनिक सदस्य  महेशचंद चौधरी एवं आयोग के सचिव डॉ देवेंद्र सिंह गुर्जर सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु एवं प्रतिनिधि उपस्थित थे। 

मंत्री परमार ने क्लाइमेट चेंज एंड बायोडायवर्सिटी विषयक राष्ट्रीय वेबीनार पर आधारित पुस्तिका का किया विमोचन

भोपाल. उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने भोपाल स्थित निवास कार्यालय पर गुरुवार को शासकीय श्यामाप्रसाद मुखर्जी विज्ञान एवं वाणिज्य महाविद्यालय भोपाल में आयोजित “क्लाइमेट चेंज एंड बायोडायवर्सिटी” विषयक राष्ट्रीय वेबीनार पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया। इस अवसर पर मंत्री परमार ने, महाविद्यालय के शैक्षणिक व बौद्धिक प्रयासों की सराहना करते हुए, इसे विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए प्रेरणादायी पहल बताया। इस अवसर पर मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक अशोक कड़ेल, प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति के अध्यक्ष डॉ रविंद्र कान्हेरे, महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शालिनी सक्सेना, वनस्पति शास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ कीर्ति जैन, गणित विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ राजेश श्रीवास्तव, डॉ. एस डी सिंह एवं डॉ एस के मल्होत्रा उपस्थित थे।

हिन्दी ग्रंथ अकादमी प्रबंधक मंडल की बैठक हुई

भोपाल  हिन्दी ग्रंथ अकादमी की पुस्तकों के माध्यम से महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों तक भारतीय ज्ञान परंपरा का शाश्वत ज्ञान पहुंच रहा है। मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित हिन्दी ग्रंथ अकादमी के प्रबंधक मंडल की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने यह बात कही। मंत्री परमार ने कहा कि इन पुस्तकों में निहित ज्ञान जहां एक ओर विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की नींव तैयार करेगा, वहीं दूसरी ओर उन्हें अच्छे नागरिक और बेहतर इंसान बनने की दिशा में भी अग्रसर करेगा। मंत्री परमार ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि स्नातक प्रथम वर्ष के लगभग सभी प्रमुख विषयों की पुस्तकों में नवीन पाठ्यक्रम के अनुसार भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश किया जा चुका है। उन्होंने निर्देश दिए कि द्वितीय वर्ष की पुस्तकों के लेखन का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए, जिससे विद्यार्थियों को समय पर पुस्तकें प्राप्त हो सकें। बैठक में मंत्री परमार ने विद्यार्थियों में घटती अध्ययन रुचि पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मोबाइल और डिजिटल डिस्टर्बेंस के इस दौर में विद्यार्थी अपना अधिकतर समय मोबाइल और कंप्यूटर पर व्यतीत कर रहे हैं, जिससे अध्ययन में उनकी रुचि कम होती जा रही है। ऐसे में विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों में पुनः अध्ययन के प्रति रुचि विकसित करें। मंत्री परमार ने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में प्रश्न-उत्तर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाए। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के अपर सचिव अनुपम राजन ने कहा कि विभाग के लाखों विद्यार्थियों तक हिन्दी ग्रंथ अकादमी की पुस्तकें पहुंचती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि पुस्तकों के निर्माण में मानक प्रक्रिया का पालन किया जाए तथा विद्यार्थियों से फीडबैक प्राप्त करने के लिए एक व्यवस्थित प्रणाली भी विकसित की जानी चाहिए, जिससे उनकी अपेक्षाओं के अनुसार पुस्तकों में आवश्यक सुधार किए जा सकें। बैठक में अकादमी के संचालक डॉ. अशोक कड़ेल ने अकादमी के वार्षिक बजट की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्नातक प्रथम वर्ष की लगभग सभी प्रमुख विषयों की पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और उन्हें महाविद्यालयों को प्रेषित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि अकादमी द्वारा द्वितीय वर्ष की पुस्तकों के लेखन की प्रक्रिया शीघ्र ही प्रारंभ की जाएगी। प्रयास किया जा रहा है कि शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होते ही ये पुस्तकें विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा सकें। बैठक में पुस्तकों के कागज की गुणवत्ता बढाने पर भी सहमति जताई गई। निर्णय लिया गया कि आगामी वर्ष से पुस्तकों को और अधिक गुणवत्तापूर्ण कागज पर प्रकाशित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त अकादमी से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया और आवश्यक निर्णय लिए गए। बैठक में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, मनोनीत सदस्य, उच्च शिक्षा मंत्री के ओएसडी डॉ. भरत व्यास,हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संयुक्त संचालक डॉ. उत्तम सिंह चौहान एवं सहायक संचालक रामविश्वास कुशवाहा सहित उच्च शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। अकादमी की पुस्तकों का किया विमोचन उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने हिन्दी ग्रंथ अकादमी द्वारा प्रकाशित, स्नातक प्रथम वर्ष की निम्न पुस्तकों का विमोचन किया। इनमें “व्यावसायिक संगठन एवं संचार” (लेखक: डॉ. राकेश खंड, डॉ. दिनेश दवे, डॉ. राजीव नयन, डॉ. प्रज्ञा यादव) “भारत का इतिहास (606 से 1205 ई. तक)” (लेखक: स्नेहा खरे)) “राजनीति सिद्धांत” (लेखक: डॉ. उत्तम सिंह चौहान, डॉ. पुनित प्रताप पाण्डेय, डॉ. मनीष दुबे, डॉ. मंगला गौरी) तथा “भारतीय समाज एवं संस्कृति” (लेखक: डॉ. आलोक कुमार निगम) पुस्तक शामिल रही।