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मंत्री परमार ने क्लाइमेट चेंज एंड बायोडायवर्सिटी विषयक राष्ट्रीय वेबीनार पर आधारित पुस्तिका का किया विमोचन

भोपाल. उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने भोपाल स्थित निवास कार्यालय पर गुरुवार को शासकीय श्यामाप्रसाद मुखर्जी विज्ञान एवं वाणिज्य महाविद्यालय भोपाल में आयोजित “क्लाइमेट चेंज एंड बायोडायवर्सिटी” विषयक राष्ट्रीय वेबीनार पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया। इस अवसर पर मंत्री परमार ने, महाविद्यालय के शैक्षणिक व बौद्धिक प्रयासों की सराहना करते हुए, इसे विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए प्रेरणादायी पहल बताया। इस अवसर पर मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक अशोक कड़ेल, प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति के अध्यक्ष डॉ रविंद्र कान्हेरे, महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शालिनी सक्सेना, वनस्पति शास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ कीर्ति जैन, गणित विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ राजेश श्रीवास्तव, डॉ. एस डी सिंह एवं डॉ एस के मल्होत्रा उपस्थित थे।

हिन्दी ग्रंथ अकादमी प्रबंधक मंडल की बैठक हुई

भोपाल  हिन्दी ग्रंथ अकादमी की पुस्तकों के माध्यम से महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों तक भारतीय ज्ञान परंपरा का शाश्वत ज्ञान पहुंच रहा है। मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित हिन्दी ग्रंथ अकादमी के प्रबंधक मंडल की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने यह बात कही। मंत्री परमार ने कहा कि इन पुस्तकों में निहित ज्ञान जहां एक ओर विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की नींव तैयार करेगा, वहीं दूसरी ओर उन्हें अच्छे नागरिक और बेहतर इंसान बनने की दिशा में भी अग्रसर करेगा। मंत्री परमार ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि स्नातक प्रथम वर्ष के लगभग सभी प्रमुख विषयों की पुस्तकों में नवीन पाठ्यक्रम के अनुसार भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश किया जा चुका है। उन्होंने निर्देश दिए कि द्वितीय वर्ष की पुस्तकों के लेखन का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए, जिससे विद्यार्थियों को समय पर पुस्तकें प्राप्त हो सकें। बैठक में मंत्री परमार ने विद्यार्थियों में घटती अध्ययन रुचि पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मोबाइल और डिजिटल डिस्टर्बेंस के इस दौर में विद्यार्थी अपना अधिकतर समय मोबाइल और कंप्यूटर पर व्यतीत कर रहे हैं, जिससे अध्ययन में उनकी रुचि कम होती जा रही है। ऐसे में विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों में पुनः अध्ययन के प्रति रुचि विकसित करें। मंत्री परमार ने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में प्रश्न-उत्तर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाए। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के अपर सचिव अनुपम राजन ने कहा कि विभाग के लाखों विद्यार्थियों तक हिन्दी ग्रंथ अकादमी की पुस्तकें पहुंचती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि पुस्तकों के निर्माण में मानक प्रक्रिया का पालन किया जाए तथा विद्यार्थियों से फीडबैक प्राप्त करने के लिए एक व्यवस्थित प्रणाली भी विकसित की जानी चाहिए, जिससे उनकी अपेक्षाओं के अनुसार पुस्तकों में आवश्यक सुधार किए जा सकें। बैठक में अकादमी के संचालक डॉ. अशोक कड़ेल ने अकादमी के वार्षिक बजट की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्नातक प्रथम वर्ष की लगभग सभी प्रमुख विषयों की पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और उन्हें महाविद्यालयों को प्रेषित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि अकादमी द्वारा द्वितीय वर्ष की पुस्तकों के लेखन की प्रक्रिया शीघ्र ही प्रारंभ की जाएगी। प्रयास किया जा रहा है कि शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होते ही ये पुस्तकें विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा सकें। बैठक में पुस्तकों के कागज की गुणवत्ता बढाने पर भी सहमति जताई गई। निर्णय लिया गया कि आगामी वर्ष से पुस्तकों को और अधिक गुणवत्तापूर्ण कागज पर प्रकाशित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त अकादमी से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया और आवश्यक निर्णय लिए गए। बैठक में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, मनोनीत सदस्य, उच्च शिक्षा मंत्री के ओएसडी डॉ. भरत व्यास,हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संयुक्त संचालक डॉ. उत्तम सिंह चौहान एवं सहायक संचालक रामविश्वास कुशवाहा सहित उच्च शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। अकादमी की पुस्तकों का किया विमोचन उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने हिन्दी ग्रंथ अकादमी द्वारा प्रकाशित, स्नातक प्रथम वर्ष की निम्न पुस्तकों का विमोचन किया। इनमें “व्यावसायिक संगठन एवं संचार” (लेखक: डॉ. राकेश खंड, डॉ. दिनेश दवे, डॉ. राजीव नयन, डॉ. प्रज्ञा यादव) “भारत का इतिहास (606 से 1205 ई. तक)” (लेखक: स्नेहा खरे)) “राजनीति सिद्धांत” (लेखक: डॉ. उत्तम सिंह चौहान, डॉ. पुनित प्रताप पाण्डेय, डॉ. मनीष दुबे, डॉ. मंगला गौरी) तथा “भारतीय समाज एवं संस्कृति” (लेखक: डॉ. आलोक कुमार निगम) पुस्तक शामिल रही।  

सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं : मंत्री परमार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में, भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित 'सफलता के मंत्र' कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने सहभागिता कर, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा-2025 में चयनित अभ्यर्थियों को सफल सिविल सेवा एवं उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं प्रेषित की। मंत्री परमार ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 के 'विकसित भारत' की संकल्पना सिद्धि में, आप सभी शिल्पकार बनकर अपनी प्रशासनिक दक्षता, पुरुषार्थ एवं परिश्रम से सहभागिता सुनिश्चित करेंगे। मंत्री परमार ने चयनित अभ्यर्थियों से कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि आपको समाज और राष्ट्र की सेवा करने का पुनीत अवसर मिला है। संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में उत्तीर्ण होना केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रति एक महान उत्तरदायित्व है। मंत्री परमार ने कहा कि अपनी इस असाधारण योग्यता को समाज और देश के उत्थान के लिए समर्पित करने का संकल्प लें। मंत्री परमार ने कहा कि कृतज्ञता ही मानवता का वास्तविक आभूषण है। हम चाहे सफलता के किसी भी शिखर पर पहुँच जाएँ, अपनी माटी का ऋण और अपनों के साथ को कभी नहीं भूलना चाहिए। यही कृतज्ञता का भाव 'लोक-कल्याण' की नींव रखता है। मंत्री परमार ने कहा कि देश की उन्नति का मार्ग गुरुओं के प्रति सम्मान से ही प्रशस्त होता है। शिक्षक चाहे विद्यालयीन शिक्षा के हो अथवा महाविद्यालयीन शिक्षा के हों, उनका स्थान हमारे जीवन में सदैव सर्वोच्च रहना चाहिए। मंत्री परमार ने कहा कि जब हम अपने गुरुजनों का सम्मान करते हैं, तो राष्ट्र स्वतः ही ज्ञान के शिखर की ओर अग्रसर होता है। मंत्री परमार ने कहा कि वास्तविक विकास तभी संभव है जब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का जीवन स्तर सुधरे। ग्रामीण अंचल के विकास की मुख्यधारा से पिछड़े हुए लोगों का हाथ पकड़कर उन्हें आगे बढ़ाना ही हमारा पुनीत कर्तव्य है। सशक्त ग्रामीण भारत ही 'विकसित भारत' की नींव है। मंत्री परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह जैसे महान क्रांतिकारियों के बलिदान को स्मरण करते हुए, राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता पर बल दिया। आइए, हम सब मिलकर समन्वय के भाव से भारत को विश्व का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाने का दृढ़ संकल्प लें और अपनी प्रतिबद्ध सहभागिता से विकसित भारत@2047 की संकल्पना सिद्धि में सहभागिता सुनिश्चित करें। कार्यक्रम में संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा-2025 में चयनित अभ्यर्थियों ने अपनी सफलता के विभिन्न पहलुओं और प्रयासों से अवगत करवाया। साथ ही सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों से संवाद कर, उनकी जिज्ञासाओं पर अपने विचार भी साझा किए। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में, हर वर्ष प्रदेश के अभ्यर्थियों के चयन की संख्या निरंतर बढ़ रही है। सिविल सेवा परीक्षा-2025 में, प्रदेश के 61 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, इनमें से दो अभ्यर्थियों ने देश भर में टॉप 10 में जगह बनाई है।  

सार्थक ऐप पर सुनिश्चित होगी अगले सत्र से विद्यार्थियों की उपस्थिति : मंत्री परमार

सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी (नूतन) महाविद्यालय के वार्षिकोत्सव : स्वयं प्रभा 2026 का शुभारम्भ भोपाल वार्षिक स्नेह सम्मेलन, हर संस्थान में विद्यार्थियों के वर्ष भर की गतिविधियों एवं उपलब्धियों के सार्वजनिक प्रकटीकरण का सशक्त मंच है और महाविद्यालय की प्रतिष्ठा के प्रदर्शन का भी यह सुअवसर है। प्रदेश के समस्त महाविद्यालय बेहतर हों, शैक्षणिक एवं अकादमिक गुणवत्ता में उत्तरोत्तर वृद्धि हो, इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। कक्षाओं, प्रयोगशालाओं एवं पुस्तकालयों के सुदृढ़ीकरण के लिए संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कर रहे हैं और महाविद्यालयों में आवश्यक शैक्षणिक पदों की पूर्ति प्रक्रिया प्रचलन में है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने, सोमवार को भोपाल स्थित सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी (नूतन) महाविद्यालय में, महाविद्यालय के 'वार्षिकोत्सव : स्वयं प्रभा 2026' के शुभारम्भ अवसर पर कही। मंत्री परमार ने बेटियों को विविध महाविद्यालयीन गतिविधियों में प्रतिभागिता करने के लिए बधाई एवं उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं भी दीं। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं उनके हितों से जुड़े समस्त विषयों पर विस्तृत कार्य हो रहा है। परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में, संस्थानों की स्वायत्तता को लेकर भी लगातार कार्य कर रहे हैं ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की दिशा में प्रदेश, देश भर में अग्रणी भूमिका में स्थापित हो सके। परमार ने कहा कि सार्थक ऐप के माध्यम से, प्राध्यापकों की संस्थान में अधिकतम उपस्थिति सुनिश्चित की जा रही है। इस अनुक्रम में विद्यार्थियों की संस्थान परिसर में अधिकतम उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अगले सत्र से, सार्थक ऐप के माध्यम से उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी और विद्यार्थियों को अधिकतम उपस्थिति पर क्रेडिट भी दिया जाएगा। मंत्री परमार ने कहा कि संस्थान पर परिवेश पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण हो, यही हमारा मूल ध्येय है। मंत्री परमार ने कहा कि मूल्यांकन की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल मूल्यांकन की कार्ययोजना पर कार्य हो रहा है। मंत्री परमार ने कहा कि कृतज्ञता ही मानवता का वास्तविक आभूषण है। हम चाहे सफलता के किसी भी शिखर पर पहुँच जाएँ, अपनी माटी का ऋण और अपनों के साथ को कभी नहीं भूलना चाहिए। यही कृतज्ञता का भाव 'लोक-कल्याण' की नींव रखता है। मंत्री परमार ने कहा कि शिक्षा, विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास का मुख्य माध्यम है और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। मंत्री परमार ने वर्तमान परिदृश्य में, शिक्षक-विद्यार्थी परंपरा के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अपने पूर्वजों के परंपरागत ज्ञान के आधार पर, भारत स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, खाद्यान्न सहित हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर होकर, अन्य देशों की पूर्ति में भी सामर्थ्यवान बनेगा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने यह महत्त्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र बिहारी गोस्वामी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए अतिथियों का अभिनंदन किया। प्रो. गोस्वामी ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनकी प्रतिभा को निखारने का सशक्त मंच प्रदान करते हैं। वार्षिकोत्सव "स्वयंप्रभा-2026" के प्रथम दिवस को "पारंपरिक दिवस" के रूप में मनाया गया, जिसमें छात्राओं ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पारंपरिक वेशभूषा के माध्यम से प्रस्तुत किया। "अतुल्य भारत" थीम पर आधारित प्रस्तुति में 21 छात्राओं ने भाग लेकर देश की विविधता और सांस्कृतिक वैभव का आकर्षक प्रदर्शन किया। इस अवसर पर एनसीसी की 28 छात्राओं द्वारा "ऑपरेशन सिंदूर" पर आधारित नृत्य नाटिका ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। साथ ही, प्रदेश की जनजातीय संस्कृति पर आधारित कर्मा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने वातावरण को जीवंत बना दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रंजना उपाध्याय एवं आभार प्रदर्शन छात्रसंघ प्रभारी डॉ. नीना श्रीवास्तव द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं छात्राएं उपस्थित थीं।  

दो दिवसीय “राज्यस्तरीय राष्ट्रीय सेवा योजना सम्मेलन-2026” हुआ सम्पन्न

भोपाल प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के संकल्प विकसित भारत@2047 का ध्येय, राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के निमित्त सभी को एक दिशा की ओर जोड़ना है। स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक भारत को शिक्षा, समाज, अर्थव्यवस्था सहित हर क्षेत्र में विश्वमंच पर अग्रणी बनाने के लिए व्यापक मंथन का दौर चल रहा है। इसके लिए आवश्यक है कि शिक्षा के मंदिरों से समाज एवं राष्ट्र के प्रश्नों का समाधान करने वाले श्रेष्ठ नागरिक सृजित हों। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने मंगलवार को भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित पंडित सुंदरलाल शर्मा केन्द्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान के निनाद सभागृह में, राष्ट्रीय सेवा योजना के क्षेत्रीय निदेशालय के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय "राज्यस्तरीय राष्ट्रीय सेवा योजना सम्मेलन-2026" के समापन सत्र में सहभागिता कर कही। मंत्री  परमार ने राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के संकल्प की सिद्धि में सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए स्वयंसेवकों को प्रेरित किया। मंत्री  परमार ने कहा कि स्वयंसेवक, अपने आचरण से समाज के लिए अभिप्रेरक बनेंगे। इसके लिए स्वयंसेवकों को शैक्षणिक परिसरों में स्वयं स्वच्छता का परिवेश निर्मित कर, अन्य लोगों के लिए प्रेरक बनना होगा। स्वयंसेवकों के द्वारा किए जा रहे कार्यों का, समाज में सकारात्मक एवं सार्थक प्रभाव दिखना चाहिए। मंत्री  परमार ने कहा कि हमारे पूर्वजों के दर्शन वसुधैव कुटुंबकम् से भारत पुनः विश्वमंच पर अग्रणी बनेगा और विश्व कल्याण के भाव से मार्ग प्रशस्त करेगा। पूर्वजों के इस दर्शन को आगे बढ़ाने से ही शिक्षा का उद्देश्य पूरा होगा। मंत्री  परमार ने क्षेत्रीय निदेशालय भोपाल द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन की सराहना करते हुए, इसे प्रदेश के युवाओं के लिए मील का पत्थर बताया। मंत्री  परमार ने सम्मेलन के मुख्य उद्देश्य “संवाद से समाधान” पर जोर देते हुए कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा अपनाया गया ‘संवाद से समाधान’ का मार्ग अत्यंत सराहनीय और समसामयिक है। मंत्री  परमार ने कहा कि जब युवा समाज के साथ सीधा संवाद स्थापित करते हैं, तो वे न केवल समस्याओं को समझते हैं बल्कि उनके व्यवहारिक समाधान भी खोज निकालते हैं। मंत्री  परमार ने कहा कि यह पहल, प्रदेश की राष्ट्रीय सेवा योजना को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक अनुशासन, सेवा और समर्पण की प्रतिमूर्ति हैं और राज्य सरकार उनके माध्यम से समाज के अंतिम छोर तक कल्याणकारी योजनाओं को पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में मंत्री  परमार ने राष्ट्रीय सेवा योजना अंतर्गत प्रदेश भर की गतिविधियों के मासिक संग्रह – डिजिटल न्यूज़लेटर "सेवापथ" का लोकार्पण भी किया। राष्ट्रीय सेवा योजना के क्षेत्रीय निदेशक (मप्र-छग) डॉ. अशोक कुमार श्रोती ने स्वागत उद्बोधन में, सम्मेलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए इसे युवाओं के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। यह दो दिवसीय राज्यस्तरीय राष्ट्रीय सेवा योजना सम्मेलन-2026 न केवल विचारों के आदान-प्रदान का मंच बना, बल्कि युवाओं को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और समाधान की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करने में भी सफल रहा। कार्यक्रम में माधव महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शिवकुमार शर्मा, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अनंत सक्सेना एवं डॉ. भरत व्यास सहित राष्ट्रीय सेवा योजना के विभिन्न पदाधिकारीगण एवं स्वयंसेवक विद्यार्थी उपस्थित थे। मंच संचालन डॉ. शुभम सिंह चौहान एवं आभार प्रदर्शन डॉ. राजकुमार वर्मा ने किया।  

भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा पर गर्व करते हुए आगे बढ़ें : मंत्री परमार

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कार्यक्रम 2026 का किया शुभारंभ भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि भारत देश कभी गरीब नहीं था, बल्कि एक समृद्ध देश था। भारत को सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था। भारत का ज्ञान सर्वश्रेष्ठ था और यहां का किसान आत्मविश्वासी और सामर्थ्यवान था। भारत का समाज, शिक्षित समाज था। भारत की संस्कृति और परंपराएं मजबूत थी। वैज्ञानिक भारतीय समाज की विशेषता थी। भारत की इसी समृद्धि के कारण ही विदेशी लुटेरे, मुगल और अंग्रेज भारत आए तथा समृद्ध भारत को हर स्तर पर लूटने का प्रयास किया। संस्कृति, परंपराओं,वेदों , शिक्षा केंद्रों, खेल परिसरों आदि को नष्ट करने के कार्य के साथ भारतीय समाज के अशिक्षित होने, रूढ़िवादी होने, अंधविश्वासी होने का दुष्प्रचार भी किया। अब समय आ गया है जब हम भारत के महानतम ज्ञान एवं भारतीय समाज के बारे में भ्रांतियां को दूर करने के सशक्त उपाय करते हुए देश की स्वतंत्रता की 100वी वर्षगांठ वर्ष-2047 तक भारत को, विकसित भारत के महानतम लक्ष्य के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के वैशिष्ट्य को पूरी क्षमता से मनाए। मंत्री परमार ने कहा भारतीय समाज की अवधारणा को समझने और पुनः स्मरण करने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान दिवस एक उपयुक्त अवसर है कि जब हम वैज्ञानिक शोध करें और यदि हमें सामाजिक मान्यताओं में रूढ़िवाद, अंध विश्वास दिखे, तो हमें छोड़ना पड़ेगा। हम युगानुकल परिवर्तन के पक्षधर हैं। मंत्री परमार नेसोमवार को महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में आयोजित 2 दिवसीय राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कार्यक्रम 2026 का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। इसके पहले मंत्री परमार ने एविएशन विंग का भ्रमण कर गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। मंत्री  परमार ने उड़ान अकादमी के अधिकारियों से विचार विमर्श कर कार्यक्रम के प्रगति की जानकारी भी ली। कार्यक्रम में महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भारत सरकार, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एस. पी. गौतम एवं अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के कुलगुरु प्रो. राजेंद्र कुमार कुडरिया, अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ आर पी सिंह, पूर्व कुलगुरु प्रो भरत मिश्रा, पूर्व कुलगुरु प्रो कपिल देव मिश्रा सहित शिक्षकगण, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिभागी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

मंत्री परमार ने चित्रकूट स्थित पंचवटी घाट पर किया श्रमदान

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने सोमवार को चित्रकूट प्रवास के दौरान पवित्र पंचवटी घाट पर माँ मंदाकिनी नदी के स्वच्छता अभियान में भाग लेकर श्रमदान किया। मंत्री परमार ने स्वयं घाट परिसर में सफाई करते हुए लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। मंत्री परमार ने कहा कि चित्रकूट धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ बहने वाली माँ मंदाकिनी नदी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए इसकी स्वच्छता बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि स्वच्छता केवल सरकारी अभियान नहीं बल्कि जनभागीदारी से सफल होने वाला जनआंदोलन है। स्वच्छता अभियान में मंत्री श्री परमार ने घाट परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर घाट की सफाई की और लोगों से अपील की कि वे नदी में कचरा न डालें तथा आसपास के वातावरण को स्वच्छ बनाए रखने में सहयोग करें। सभी ने मिलकर माँ मंदाकिनी की स्वच्छता के लिए श्रमदान करते हुए स्वच्छता का संदेश दिया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

मंत्री परमार ने जताई खुशी, कहा—सहयोग और संवेदनाएं ही आनंदम का लक्ष्य

भोपाल राज्य सरकार द्वारा संचालित आनंदम कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में परोपकार, सहयोग और मानवीय संवेदनाओं को प्रोत्साहित करना है। आनंदम सहयोगी समाज के विभिन्न वर्गों तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और सकारात्मक पहल को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को सामाजिक समरसता, सहयोग और सेवा के भाव को मजबूत करने की प्रेरणा दी जा रही है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने रविवार को चित्रकूट स्थित उद्यमिता विद्यापीठ में राज्य आनंदम संस्थान द्वारा आयोजित आनंदम सहयोगी के प्रशिक्षण कार्यक्रम में कही। मंत्री श्री परमार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रतिभागियों को संबोधित किया और समाज में सकारात्मकता, सेवा भावना तथा मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने में आनंदम अभियान की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। मंत्री परमार ने कहा कि समाज में खुशहाली और संतोष की भावना तभी संभव है, जब प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास के लोगों की मदद और सहयोग के लिए आगे आए। श्री परमार ने प्रशिक्षुओं से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और अनुभव को समाज के बीच ले जाकर जनहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएं। इस अवसर पर विधायक चित्रकूट सुरेंद्र सिंह गहरवार, रीवा संभाग के कमिश्नर बी.एस. जामोद, कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस, पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह, सीईओ जिला पंचायत शैलेंद्र सिंह, कुलगुरू महात्मा गांधी चित्रकूट विश्वविद्यालय आलोक चौबे, प्रशिक्षक और विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागी उपस्थित थे।  

छात्र-छात्राओं को भी शोध पत्र लेखन के लिये करें प्रोत्साहित : मंत्री परमार

भोपाल. उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने, भोपाल स्थित निवास कार्यालय में मंगलवार को शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय भोपाल द्वारा संकलित शोध पत्रों पर प्रकाशित शोध जर्नल (RJMLB) का विमोचन किया। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने महाविद्यालय द्वारा प्रकाशित शोध पत्रों एवं उनकी गुणवत्ता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश के अन्य महाविद्यालयों द्वारा भी इस प्रकार के शोध प्रकाशन किए जाना चाहिये। मंत्री परमार ने छात्र-छात्राओं को भी शोध पत्र लेखन के लिये प्रोत्साहित किये जाने को कहा। परमार ने भारतीय ज्ञान परम्परा से संबंधित आलेख का भी समुचित समावेश किये जाने पर जोर दिया ताकि नयी पीढी भारतीय समृद्ध पुरातन ज्ञान एवं संस्कृति से परिचित हो सकें। ज्ञातव्य है कि शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय भोपाल द्वारा पर्यावरण से संबंधित राष्ट्रीय स्तर का वेबीनार का आयोजन किया गया था, जिसमें लगभग 250 से अधिक प्रतिभागी सम्मिलित हुये थे। प्रतिभागियों की ओर से दिये गये शोध पत्रों की समीक्षा उपरांत चयनित शोध पत्र एवं महाविद्यालय द्वारा आमंत्रित अन्य शोध पत्रों का संकलन कर, महाविद्यालय द्वारा शोध जर्नल (RJMLB) प्रकाशित किया गया है। इस अवसर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. प्रवीण तामोट, विभागाध्यक्ष प्राणीशास्त्र डॉ. मीनल फडनीस एवं डॉ. संजय सिंह उपस्थित थे।  

औचक निरीक्षण से हड़कंप: मंत्री परमार पहुंचे सिवनी, आयुष कार्यालय से लेकर पॉलीटेक्निक कॉलेज तक जांच

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने, बुधवार को सिवनी जिले के प्रवास के दौरान, प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय (अग्रणी) स्नातकोत्तर महाविद्यालय का औचक निरीक्षण कर, महाविद्यालयीन गतिविधियों एवं विद्यार्थियों को दी जा रही समस्त सुविधाओं का अवलोकन कर आवश्यक निर्देश दिए। मंत्री श्री परमार ने सर्वप्रथम महाविद्यालय परिसर में स्थित मां भारती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया एवं महात्मा गांधी जी की प्रतिमा पर भी माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। मंत्री श्री परमार ने महाविद्यालय में संचालित कक्षाओं का अवलोकन करते हुए, विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया। संवाद के दौरान विद्यार्थियों से उनके ग्राम, कॉलेज तक आने-जाने के साधनों की जानकारी लेते हुए, महाविद्यालय के प्राचार्य को 15 किलोमीटर की परिधि तक विद्यार्थियों के लिए बस सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। मंत्री श्री परमार ने महाविद्यालय में विद्यार्थियों की अधिकतम एवं नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। साथ ही परिसर में पूर्णरूपेण स्वच्छता बनाए रखने को भी कहा। मंत्री श्री परमार ने महाविद्यालय की लाइब्रेरी का निरीक्षण करते हुए व्यवस्थाओं का अवलोकन किया तथा उपलब्ध पुस्तकों के समुचित वितरण सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन में सुलभ एवं सुगम सुविधा मिल सके। इस दौरान सिवनी के विधायक श्री दिनेश राय मुनमुन, प्रभारी कलेक्टर श्री अनिल राठौर, एसडीएम श्रीमती पूर्वी तिवारी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री श्री परमार ने आयुष कार्यालय का औचक निरीक्षण कर दिए आवश्यक निर्देश मंत्री श्री परमार ने आयुष विभाग कार्यालय सिवनी का निरीक्षण कर, कार्यालय के विभिन्न कक्षों, अभिलेखों एवं कार्यप्रणाली का अवलोकन किया। उन्होंने कार्यालय परिसर में साफ-सफाई, साज-सज्जा, सुव्यवस्थित संधारण व्यवस्था तथा विकसित हर्बल गार्डन का भी अवलोकन किया। मंत्री श्री परमार ने निरीक्षण के दौरान, आयुष विधाओं को आमजन तक अधिक लोकप्रिय, लाभकारी एवं स्वास्थ्यवर्धक बनाने, औषधियों के समुचित संधारण तथा मांग के अनुरूप सेवाओं के विस्तार के लिये आवश्यक मार्गदर्शन एवं निर्देश दिए। मंत्री श्री परमार ने निरीक्षण के पूर्व, सिवनी विधानसभा के विधायक श्री दिनेश राय मुनमुन, प्रभारी कलेक्टर श्री अनिल कुमार राठौर एवं जिला आयुष अधिकारी डॉ. यशवंत माथुर के साथ संयुक्त चर्चा कर, जिले में 50 बिस्तरीय आयुर्वेदिक अस्पताल एवं हर्बल गार्डन की स्थापना के लिये प्रस्ताव तैयार कर विभाग को प्रेषित करने के निर्देश दिए। मंत्री श्री परमार ने पॉलीटेक्निक कॉलेज में शैक्षणिक एवं भौतिक व्यवस्थाओं का किया अवलोकन मंत्री श्री परमार ने शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय का भी औचक निरीक्षण कर, महाविद्यालयीन गतिविधियों एवं विद्यार्थियों को दी जा रही समस्त सुविधाओं की जानकारी प्राप्त कर, आवश्यक निर्देश दिए। मंत्री श्री परमार ने महाविद्यालय की विभिन्न कक्षाओं एवं ट्रेडवार प्रयोगशालाओं का अवलोकन कर, शैक्षणिक एवं भौतिक व्यवस्थाओं की समीक्षा की। मंत्री श्री परमार ने महाविद्यालय परिसर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने और समय-समय पर महाविद्यालय में आने वाले पेयजल की गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए। साथ ही पानी की टंकियों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिये। मंत्री श्री परमार ने महाविद्यालय की लाइब्रेरी, कम्प्यूटर लैब, उपकरणों एवं अन्य सुविधाओं का अवलोकन करते हुए, इन व्यवस्थाओं के उन्नयन के लिये प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिये, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।