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लोकभवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए AI प्रशिक्षण सत्र आयोजित

रायपुर  लोकभवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक से अवगत कराने तथा शासकीय कार्यों में नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से  Artificial Intelligence (AI) संबंधी प्रशिक्षण सत्र का आयोजन कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया।         प्रशिक्षण सत्र का आयोजन अवर सचिव  अनुभव शर्मा के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों को AI (Artificial Intelligence) की कार्यप्रणाली, उपयोगिता तथा विभिन्न क्षेत्रों में इसके प्रभावी इस्तेमाल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं। सत्र में ।प् के माध्यम से कार्यों को अधिक सरल, प्रभावी एवं समयबद्ध बनाने के तरीकों पर प्रकाश डाला गया। उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रशिक्षण में उत्साहपूर्वक भाग लेकर आधुनिक तकनीक की उपयोगी जानकारी प्राप्त की।            कार्यक्रम का उद्देश्य शासकीय कार्यप्रणाली में नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना तथा अधिकारियों- कर्मचारियों को डिजिटल दक्षताओं से सशक्त बनाना रहा। इस अवसर पर राज्यपाल के विधिक सलाहकार मती सत्यभामा अजय दुबे, उप सचिव सु निधि साहू,  सुधीर सुलतानिया,  लक्षित त्रिलोक सेठिया,  अनूप अग्रवाल एवं लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

वर्णिका शर्मा ने एम्स रायपुर पहुंचकर जाना बालिका का हाल, उपचार प्रक्रिया हुई शुरू

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने गंभीर रूप से बीमार नाबालिग जोगेश्वरी कड़की मामले में संज्ञान लेते हुए उसके बेहतर उपचार के लिए पहल की, जिसके चलते बालिका का एम्स रायपुर में इलाज शुरू हुआ है। उल्लेखनीय है कि बालिका की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी प्राप्त होने पर डॉ. वर्णिका शर्मा ने 5 जून को दंतेवाड़ा कलेक्टर को पत्र लिखकर बालिका के बेहतर उपचार के लिए तत्काल एम्स रायपुर भेजने और आवश्यक चिकित्सकीय एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। उक्त पत्र की प्रतिलिपि जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ), दंतेवाड़ा को भी आवश्यक कार्यवाही के लिए प्रेषित की गई थी। इसके अतिरिक्त डॉ. वर्णिका शर्मा ने एम्स रायपुर के डायरेक्टर को भी पत्र लिखकर बालिका को समुचित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था। आयोग के सतत प्रयासों, जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के समन्वय से बालिका को उपचार के लिए एम्स रायपुर लाया गया। 15 जून को छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा स्वयं एम्स रायपुर पहुंचीं और उपचाररत बालिका से मुलाकात कर उसका हालचाल जाना। इस दौरान उन्होंने बालिका एवं उसके परिजनों से चर्चा कर स्वास्थ्य स्थिति, उपचार संबंधी व्यवस्थाओं और उनकी आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की। दौरे के दौरान डॉ. वर्णिका शर्मा ने एम्स रायपुर के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट एवं संबंधित चिकित्सक दल से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बालिका की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, उपचार की प्रगति, किए जा रहे चिकित्सकीय परीक्षणों तथा आगामी उपचार योजना के संबंध में जानकारी प्राप्त की। चिकित्सकों ने अवगत कराया कि बालिका को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है। बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए आयोग प्रतिबद्ध इस अवसर पर डॉ. वर्णिका शर्मा ने चिकित्सकीय दल से बालिका के उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहने देने तथा उसे सर्वोत्तम संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बालिका के स्वास्थ्य एवं उपचार से जुड़ा यह मामला आयोग की प्राथमिकता में है। आयोग द्वारा उपचार प्रक्रिया की सतत निगरानी की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर आयोग की ओर से हरसंभव सहयोग एवं समन्वय उपलब्ध कराया जाएगा। डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होना उसका अधिकार है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग बच्चों के अधिकारों की रक्षा एवं उनके समग्र कल्याण के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

18 वर्ष पूरे करने वाले युवाओं के लिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने का अवसर

रांची  एक अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष पूरे करने वाले युवा अपने पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 गणना चरण (30 जून से 29 जुलाई) तक फॉर्म-6 बीएलओ को जमा कर सकेंगे। हालांकि, यह फॉर्म और दस्तावेज दावा एवं आपत्ति अवधि (पांच अगस्त से चार सितंबर) के दौरान भी जमा किया जा सकेगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के अनुसार, वैसे व्यक्ति जो झारखंड या भारत के किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र में मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हैं, उन्हें जन्म तिथि और जन्म स्थान के आधार पर स्वयं, स्वयं और माता-पिता में से किसी एक तथा स्वयं और दोनों माता-पिता के लिए घोषणा पत्र और आवश्यक दस्तावेज के साथ फॉर्म-6 जमा करना होगा आवेदक दस्तावेज के रूप में पिछले एसआईआर में तैयार मतदाता सूची का वह एक्सट्रैक्ट पेज भी जमा कर सकता है, जिसमें उसके माता-पिता का नाम है। यह एक्सट्रैक्ट पेज निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी, सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी तथा बीएलओ के पास उपलब्ध हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, झारखंड की वर्ष 2026 की मतदाता सूची में सम्मिलित वैसे मतदाता जो वर्ष 2003 की मतदाता सूची से अपना या अपने माता-पिता की मैपिंग पूरा कर चुके हैं, लेकिन वह झारखंड के किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित होना चाहते हैं, उन्हें कोई दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं है। इन्हें दावा और आपत्ति अवधि के दौरान केवल फॉर्म-8 जमा करना होगा। इसी तरह, झारखंड से बाहर की वर्तमान मतदाता सूची में सम्मिलित मतदाता, जो झारखंड के किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित होना चाहते हैं, उन्हें दावा और आपत्ति अवधि के दौरान जन्म तिथि और जन्म स्थान के आधार पर स्वयं, स्वयं और माता-पिता में से किसी एक अथवा स्वयं और दोनों माता-पिता के लिए घोषणा पत्र और आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म-8 जमा करना होगा। यह आवेदक भी दस्तावेज के रूप में पिछले एसआईआर में तैयार मतदाता सूची का उद्धरण पृष्ठ जमा कर सकता है, जिसमें उसके माता-पिता का नाम सम्मिलित है।

यूएसएससी ने पाँच वर्षों में खरीद, अनुबंध और विक्रेता प्रबंधन में स्थापित की नई पहचान

नवा रायपुर एनटीपीसी के यूनिफाइड शेयर्ड सर्विस सेंटर (यूएसएससी) का स्थापना दिवस 15 जून 2026 को नवा रायपुर स्थित परिसर में उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। वर्ष 2021 में स्थापित यूएसएससी आज एनटीपीसी की महत्वपूर्ण व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्रीकृत संचालन का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जो खरीद एवं अनुबंध प्रक्रियाओं, विक्रेता प्रबंधन तथा विभिन्न सेवाओं के प्रभावी निष्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए एनटीपीसी के क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (पश्चिम क्षेत्र-II) एवं कार्यकारी निदेशक-यूएसएससी  नीरज जलोटा ने संगठन की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिछले पाँच वर्षों में यूएसएससी ने असाधारण दृढ़ता और कार्यकुशलता का परिचय देते हुए एनटीपीसी के रणनीतिक एवं परिचालन लक्ष्यों को पूरा करने में एक मजबूत स्तंभ के रूप में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के माध्यम से खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि, सक्रिय रेट कॉन्ट्रैक्ट और पंजीकरणों में बढ़ोतरी तथा विक्रेता आधार के विस्तार जैसी उपलब्धियां यूएसएससी की निरंतर प्रगति को दर्शाती हैं।  जलोटा ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजिटल एवं सूचना प्रौद्योगिकी के व्यापक एकीकरण तथा रेट कॉन्ट्रैक्ट और विक्रेता पंजीकरण के विस्तार पर विशेष बल दिया। समारोह के दौरान उत्कृष्ट कार्य निष्पादन करने वाले यूएसएससी के 40 कर्मचारियों को प्रशंसा प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस सम्मान ने कर्मचारियों के उत्साह और मनोबल को नई ऊर्जा प्रदान की। कार्यक्रम की शुरुआत औपचारिक केक कटिंग समारोह से हुई, जिसके बाद कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत इन-हाउस स्कीट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। रंगारंग प्रस्तुतियों ने समारोह को यादगार बना दिया और कर्मचारियों के बीच टीम भावना को और मजबूत किया। इस अवसर पर  राम भजन मलिक, कार्यकारी निदेशक (ऐश मैनेजमेंट एवं एनआई),  बिद्या नंद झा, कार्यकारी निदेशक (ऑपरेशन सर्विसेज),  हर्ष आहूजा, कार्यकारी निदेशक (यूएसएससी सी एंड एम) सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संगठन की उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर भी चर्चा की गई।

गुणवत्ता और समयसीमा पर विशेष जोर, लंबित परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने पर चर्चा

रायपुर छत्तीसगढ़ में ग्रामीण सड़क नेटवर्क को मजबूत और सुगम बनाने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मंत्रालय (महानदी भवन) में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत राज्य स्तरीय स्थायी समिति की 28वीं बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने ग्रामीण सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता न करने और कार्यों में तेजी लाने के कड़े निर्देश दिए हैं। सर्वे और क्लीयरेंस पहले, निर्माण बाद में           मुख्य सचिव ने बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए अधिकारियों को कार्यप्रणाली बदलने के निर्देश दिए। कोई भी सड़क बनाने से पहले उसका जमीनी स्तर पर व्यापक सर्वे किया जाए। सड़क निर्माण शुरू होने से पहले ही भूमि अधिग्रहण और फॉरेस्ट क्लीयरेंस (वन विभाग की अनुमति) से जुड़े सभी कानूनी व प्रशासनिक कार्य अनिवार्य रूप से पूरे कर लिए जाएं। जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने के कारण जो ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, उनका सुधार और मरम्मत कार्य प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने को कहा गया है। PMGSY फेस-4& बिना सड़क वाली सभी बसाहटें जुड़ेंगी         बैठक का सबसे अहम फैसला आगामी चरणों को लेकर रहा। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि पीएमजीएसवाय फेस-4 के अंतर्गत राज्य की ऐसी सभी बसाहटों को चिन्हित किया जाए जहां अब तक पक्की सड़कें नहीं पहुंची हैं। एक व्यापक कार्ययोजना तैयार कर इन सभी बसाहटों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के सहयोग से बनीं 52 सड़कें          बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने अब तक की वित्तीय और भौतिक प्रगति का ब्योरा पेश किया कि राज्य में पीएमजीएसवाय फेस-1, 2 और 3 के तहत अब तक 8 हजार 358 सड़कें और लगभग 447 पुल-पुलिया बनाए जा चुके हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान बस्तर संभाग के धुर नक्सल प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के सहयोग से 52 अपूर्ण सड़कों का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इसके अलावा फेस-3 के तहत 31 बड़े पुलों का निर्माण भी पूरा हुआ। पीएम जनमन (PM JANMAN) योजना की प्रगति          भारत सरकार द्वारा निर्धारित 1,372 किलोमीटर लक्ष्य के मुकाबले राज्य में 1,517 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PGVT) की 872 बसाहटों के लिए स्वीकृत 807 सड़कों में से 366 सड़कों का काम पूरा हो चुका है, जबकि 429 सड़कों पर काम तेजी से चल रहा है।           इस उच्च स्तरीय बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, गृह विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव एवं खनिज सचिव श्री पी. दयानंद, आवास एवं पर्यावरण सचिव श्री अंकित आनंद, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सचिव श्री अब्दुल कैसर अब्दुल हक और छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के सीईओ श्री भीम सिंह सहित वन, परिवहन, लोक निर्माण, वित्त विभाग और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

1 जुलाई तक आवेदन, सर्च कमेटी करेगी हरियाणा आयोग के नए पदों पर चयन

 चंडीगढ़  हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग में मुख्य आयुक्त के साथ ही आयुक्त के एक पद पर नियुक्ति की जाएगी। पहली जुलाई तक आवेदन किए जा सकते हैं। पात्र उम्मीदवारों के नामों पर विचार के लिए प्रदेश सरकार ने सर्च कमेटी गठित कर दी है। यह कमेटी वैधानिक समिति को अपनी सिफारिशें भेजेगी। पिछले महीने आयोग के मुख्य आयुक्त पद से सेवानिवृत्त हुए रिटायर्ड आइएएस टीसी गुप्ता के बाद मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी यह जिम्मेदारी अतिरिक्त कार्यभार के रूप में संभाल रहे हैं।मुख्य सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार आयोग में एक मुख्य आयुक्त तथा चार आयुक्त नियुक्त किए जा सकते हैं। मुख्य आयुक्त पद के लिए हरियाणा के मुख्य सचिव अथवा केंद्र सरकार के सचिव स्तर एवं समकक्ष पद पर कार्यरत या सेवानिवृत्त अधिकारी पात्र हैं। आयुक्त का रिक्त पद हरियाणा सरकार के ऐसे सेवानिवृत्त अधिकारियों में से भरा जाएगा, जिन्होंने प्रशासनिक सचिव अथवा राज्य सेवा में समकक्ष पद एवं दर्जा धारण किया हो। हरियाणा काडर के अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी भी इस पद के लिए पात्र होंगे। चयनित अभ्यर्थी पदभार ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि अथवा 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो भी पहले हो, पद पर कार्य करेंगे। इस पद पर पुनर्नियुक्ति का प्रविधान नहीं है। वेतन, भत्ते एवं सेवा शर्तें हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम 2014 तथा 28 जून 2019 को किए गए संशोधनों के अनुसार लागू होंगी। पात्र एवं इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित प्रारूप में अपने आवेदन सामान्य प्रशासन विभाग के आयुक्त एवं सचिव के कार्यालय में पहली जुलाई तक जमा करवा सकते हैं। केंद्र अथवा राज्य सरकार में कार्यरत अधिकारियों को अपने आवेदन उचित माध्यम से भेजने होंगे।

मध्य प्रदेश सरकार को झटका, SPE विंग पर RTI लागू; सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त की अधिसूचना

भोपाल   सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने उस सरकारी अधिसूचना को रद कर दिया है, जिसके जरिए लोकायुक्त के स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (SPE) को RTI कानून के दायरे से बाहर रखा गया था। अदालत ने स्पष्ट कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाली एजेंसी को इस तरह की छूट देना कानून के अनुरूप नहीं है। 'खुफिया एवं सुरक्षा संगठन' की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (SPE) मुख्य रूप से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामलों की जांच करती है। ऐसे में इसे RTI अधिनियम की धारा 24(4) के अंतर्गत आने वाले 'खुफिया एवं सुरक्षा संगठन' की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। RTI के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता अदालत ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार ने अधिसूचना के माध्यम से RTI कानून में निर्धारित सीमाओं से आगे बढ़कर SPE को छूट देने का प्रयास किया था, जो विधिसम्मत नहीं है। न्यायालय ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भ्रष्टाचार की जांच करने वाली संस्थाओं को RTI के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला बरकरार इस मामले पर फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 20 दिसंबर 2021 के फैसले को बरकरार रखा है. दरअसल, इससे पहले राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें एसपीई को आरटीआई से बाहर रखना गलत माना गया. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब मध्य प्रदेश लोकायुक्त की SPE ब्रांच से भी RTI द्वारा जानकारियां मांगी जा सकेंगी।  मध्य प्रदेश सरकार का 2011 का आदेश रद्द सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेके माहेश्वरी और एएस चंदूरकर की पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया है, जिसमें लोकायुक्त की स्पेशल पुलिस एस्टेबलिशमेंट (एसपीई) को आरटीआई कानून के दायरे से बाहर किया गया था. मध्य प्रदेश सरकार ने 25 अगस्त 2011 को ये अधिसूचना जारी की थी. इसपर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ये अधिसूचना "कानून के हिसाब से गलत" है।  कोर्ट ने आगे कहा, "हमारी राय है कि मध्य प्रदेश राज्य के GAD (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट) का 25.08.2011 का नोटिफिकेशन, जिसमें SPE को 2005 के एक्ट के सेक्शन 24(4) के तहत उसके दायरे से बाहर करने की मांग की गई थी, कानून के हिसाब से गलत होने के कारण रद्द किया जा सकता है, क्योंकि इसमें उन मामलों के लिए भी प्रावधान है जो 1947 के एक्ट के सेक्शन 7 के तहत नहीं आते हैं।  क्यों उठी लोकायुक्त SPE पर आरटीआई की मांग? दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत याचिकाकर्ता कामता प्रसाद मिश्रा के मामले से हुई. कामता प्रसाद मिश्रा मध्य प्रदेश के कटनी जिले के माधव नगर थाने के प्रभारी थे. 11 अप्रैल 2017 को उनपर भ्रष्टाचार मामले में एफआईआर हुई. इसके बाद 2020 में अभियोजन की स्वीकृति मिली. इस दौरान कामता प्रसाद मिश्रा ने आरटीआई आवेदन दायर कर लोकायुक्त से जानकारियां मांगी, जिसे SPE ने खारिज कर दिया।  हाईकोर्ट का खटखटाया दरवाजा इसके बाद याचिकाकर्ता कामता प्रसाद मिश्रा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंचे. 2021 में हाईकोर्ट ने SPE के आदेश को रद्द कर याचिकाकर्ता को मांगी गई जानकारी प्रदान करने के निर्देश दिए, लेकिन एसपीई ने हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दी. हालांकि, 15 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहरा दिया। 

मोहर्रम को लेकर बरेली पुलिस अलर्ट, गांव-गांव ताजियों की ऊंचाई की जांच जारी

लखनऊ मोहर्रम के दौरान इस बार 12 फीट से अधिक ऊंचाई का कोई भी ताजिया नहीं निकलेगा। इसकी निगरानी के लिए यूपी के बरेली में पुलिस फास्ट हो गई है। पुलिसकर्मी गांव-गांव जाकर ताजियों की ऊंचाई नाप रहे हैं और ताजियादारों से संपर्क कर नियमों का पालन करने की अपील कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार मोहर्रम में जिले भर में 1033 ताजिया निकाले जाएंगे। इनमें सबसे अधिक 93 ताजिया नवाबगंज क्षेत्र में निकलेंगे। इसके बाद बहेड़ी में 81, हाफिजगंज में 79, भोजीपुरा व सीबीगंज में 60-60, शाही में 55, फतेहगंज पश्चिमी में 50, शेरगढ़ में 49, देवरनिया में 48, शीशगढ़ में 47, इज्जतनगर में 39, बारादरी में 36, किला व आंवला में 30-30 ताजिया निकाले जाएंगे। सिरौली में 28, क्योलड़िया, मीरगंज व भमोरा में 26-26, कैंट में 25, बिथरी में 24, अलीगंज में 23, भुता में 20, फतेहगंज पूर्व में 19, फरीदपुर में 17, प्रेमनगर में 10 और कोतवाली में तीन ताजिया निकलेंगे। एसएसपी ने इन सभी ताजियों की जांच और निगरानी के लिए एक-एक सिपाही को नोडल अधिकारी नामित किया है। संबंधित थाना प्रभारी इन पुलिसकर्मियों के साथ क्षेत्र में पहुंचकर ताजियों की ऊंचाई का सत्यापन कर रहे हैं। इसके पीछे कारण केवल इतना है कि कोई हादसा न हो। माहर्रम से पहले तैयारी पूरी करने के निर्देश एसएसपी ने त्योहार को सकुशल संपन्न कराने के लिए मोहर्रम से पहले सारी तैयारी पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इनमें पीस कमेटी की मीटिंग, पुराने विवाद की समीक्षा, रूट का निरीक्षण, फोर्स की तैनाती समेत कई बिंदु शामिल हैं। सभी थाना प्रभारियों के साथ ही सीओ को भी रूट का भ्रमण करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही निर्धारित प्रारूप में ताजियादार, गांव समेत अन्य सारी जानकारियां दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। पिछले साल 23 फीट के ताजिया में लगी थी आग अधिकारियों का कहना है कि ताजियों की अधिक ऊंचाई होने पर बिजली लाइनों और अन्य अवरोधों से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसी वजह से 12 फीट की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है। पिछले साल फरीदपुर में गौसगंज के पास 23 फीट का ताजिया निकाला गया था, जो हाइटेंशन लाइन से टकरा गया और उसमें आग लग गई। इस मामले में ताजियादारों पर रिपोर्ट हुई थी और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई थी। आज नजर आएगा मुहर्रम का चांद बरेली। मुहर्रम का चांद मंगलवार शाम को देखा जाएगा। चांद के दीदार के साथ से इस्लामी साल की शुरुआत होगी। यौमे आशूरा (10 मुहर्रम) को मनाया जाएगा। दरगाह आला हजरत के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है। माहे मुहर्रम का चांद 16 जून की शाम को देखा जाएगा। चांद नजर आने के बाद आगाज होगा। दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने कहा कि मुहर्रम मुसलमानों को सब्र और इंसानियत की सीख देता है। एसएसपी अनुराग आर्य के अनुसार मोहर्रम को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सभी ताजियों की ऊंचाई निर्धारित मानक के अनुरूप सुनिश्चित कराई जा रही है। जुलूस मार्गों का निरीक्षण किया जा रहा है और आयोजकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। ताजियादारों से भी लगातार संवाद कर सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।

लखनऊ में सीएम योगी का सख्त संदेश—माफियाओं का अंत तय, 2017 के बाद यूपी में बड़ा बदलाव

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखनऊ में आयोजित डी-3 त्रिवेणी कार्यक्रम में बड़ा बयान दिया। उन्होंने दौरान सभा को संबोधित करते हुए कहा, माफिया का सफाया करना ही मेरा प्रिय विषय है। आगे भी माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करते रहूंगा। एक समय था जब उत्तर प्रदेश में माफियाओं का बोलबाला था और वे समानांतर सरकार चलाते थे, लेकिन आज स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। हमारी सरकार ने पहले दिन से ही यह तय कर दिया था कि जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा। अब यूपी का नाम सुनकर लोग दूरी नहीं, गले लगाते हैं मुख्यमंत्री ने कहा, वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में दंगे, उपद्रव और असुरक्षा का माहौल था। त्योहारों में व्यवधान डाले जाते थे, व्यापारी और बेटियां सुरक्षित नहीं थीं तथा सत्ता में बैठे लोग दंगाइयों को संरक्षण देते थे। अब स्थिति बदल चुकी है। जो भी त्योहारों में खलल डालने की कोशिश करेगा, उसका वर्तमान और भविष्य दोनों समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि अयोध्या में 500 वर्षों के इंतजार के बाद राम मंदिर निर्माण डबल इंजन सरकार की बड़ी उपलब्धि है। पहले रामभक्तों पर लाठियां और गोलियां चलती थीं, अब अयोध्या विश्वस्तरीय धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में विकसित हो रही है।  

नशे के खिलाफ बड़ा अभियान, ANT F अब पूरे राज्य में करेगी तेज कार्रवाई

 रांची  झारखंड के एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) को मजबूत बनाया गया है। पहले से कार्यरत इस बल को सीआईडी झारखंड के एडीजी मनोज कौशिक ने री-स्ट्रक्चर किया है। इसमें न सिर्फ पदाधिकारियों की संख्या बढ़ाई गई है, बल्कि झारखंड जगुआर या स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के 40 कमांडो की एक टुकड़ी को भी इस बल के साथ जोड़ा गया है। ये वही कमांडो हैं, जिन्हें माओवादियों के विरुद्ध अभियान में लगाया गया था। 40 कमांडों का एक पूरा असाल्ट ग्रुप इससे जुड़ा हुआ है। इसे इस कदर मजबूत बनाया गया है, ताकि यह पूरे राज्य में कहीं भी बिना किसी की मदद लिए छापेमारी कर सके और केस दर्ज कर सके। झारखंड में नशे के विरुद्ध मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सख्त निर्देश के बाद राज्य में अफीम, गांजा, ब्राउन शुगर, प्रतिबंधित सीरप, इंजेक्शन व प्रतिबंधित दवाओं के विरुद्ध अब एएनटीएफ का छापामारी अभियान तेज होगा। हाल ही में राज्य सरकार ने नारकोटिक्स के विरुद्ध अभियान, गुप्तचरों के लिए योजनाएं सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर संकल्प जारी किया है। एएनटीएफ व सक्षम एजेंसी की तरह काम करेगी, आरोपितों के विरुद्ध एफआईआर की भी स्वतंत्रता होगी। इस एएनटीएफ की सीधी निगरानी सीआईडी के एडीजी करेंगे। इसका नियंत्री विभाग भी सीआईडी ही होगा। इसमें शामिल अधिकारी सूचना संग्रह कर, अंतरराज्यीय समन्वय, वित्तीय लेन-देन के बिंदु पर काम करेंगे और सभी 24 जिलों के एसएसपी, एसपी के समन्वय से अभियान संचालित करेंगे। राज्य के 14 जिलों में अफीम की खेती एएनटीएफ के रडार पर राज्य के वे 14 जिले हैं, जहां सर्वाधिक अफीम की खेती होती है। इन जिलों में रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, सरायकेला-खरसांवा, पलामू, लातेहार, गढ़वा, हजारीबाग, चाईबासा, चतरा, कोडरमा व देवघर शामिल हैं। एएनटीएफ का मानना है कि नशे के सौदागरों के पास बड़े हथियार भी होते हैं, जिससे वे सूचनादाता से लेकर अभियान में शामिल पदाधिकारियों-जवानों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। यही वजह है कि तेज तर्रार अधिकारियों के अलावा जवानों को भी इसमें शामिल किया गया है। झारखंड का चतरा, खूंटी, पलामू, लातेहार, और रांची के ग्रामीण इलाकों में अफीम की खेती सर्वाधिक होती है। यहां से अफीम को पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली भेजा जाता है। झारखंड में ब्राउन शुगर की खेप मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल (मुर्शिदाबाद और मालदा रूट) तथा उत्तर प्रदेश के बरेली रूट से आता है। पूर्व में बड़ी संख्या में ब्राउन शुगर की जब्ती हुई है।