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शराबबंदी पर सरकार सख्त: 100 से ज्यादा शराब माफियाओं की अवैध संपत्ति होगी जब्त

पटना बिहार में शराबबंदी और शराब माफिया दोनों ही अहम मुद्दा है। सरकार यह दावा करती रही है कि राज्य में कई सालों से लागू शराबबंदी को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए वो कटिबद्ध है। दूसरी तरफ शराब माफिया राज्य में शराबबंदी का माखौल बनाने में जुटे रहते हैं। पुलिस-प्रशासन समय-समय पर इन माफियााओं पर नकेल कसती है और माफियाओं को उनके अंजाम तक पहुंचाती है। अब सम्राट चौधरी सरकार ने शराब माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई का प्लान तैयार कर लिया है। जिसके तहत 100 से ज्यादा माफियाओं की संपत्ति जब्त कर ली जााएगी। बिहार में शराब से अवैध संपत्तियां बनाने वाले 127 माफिया को चिह्नित कर लिया गया है। मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो ने इन शराब माफिया की संपत्तियां जब्त करने को लेकर बीएनएसएस की धारा 107 के तहत न्यायालय को प्रस्ताव भेजा है। प्रत्येक माह औसतन 3,50,677 लीटर शराब बरामद की मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के डीआईजी अजय कुमार पांडेय ने सोमवार को प्रेस वार्ता कर बताया कि बिहार की विभिन्न जिलों की पुलिस ने 2026 में प्रत्येक माह औसतन 3,50,677 लीटर शराब बरामद की है, जो वर्ष 2025 के मासिक औसत (3,14,610 लीटर) से 11 फीसदी अधिक है। इसी तरह, मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो ने वर्ष 2026 में औसत प्रतिमाह 1,06,237 लीटर शराब बरामद की, जो वर्ष 2025 के मासिक औसत (85,645 लीटर) से 24 फीसदी अधिक है। 2026 में माह मई तक राज्य पुलिस द्वारा कुल 38,474 लीटर स्पिरिट जब्त की गयी है। मई महीने तक कुल छह ऑपरेशन चलाए गए मद्य निषेध डीआईजी ने यह भी बताया है कि शराब माफिया के खिलाफ 2026 में मई तक कुल छह ऑपरेशन चलाए गए। इनमें पांच ऑपरेशन यूपी में जबकि एक झारखंड में चला। इन ऑपरेशन में पांच करोड़ रुपये से अधिक की शराब और वाहन जब्त हुए। 57 हजार व्यक्तियों की मद्य निशेष अधिनियम के तहत गिरफ्तारी हुई डीआईजी ने इसके साथ ही यह भी जानकारी दी है कि इस साल अब तक 50 हजार से ज्यादा लोगों को अरेस्ट किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि बिहार पुलिस ने इस साल मई तक 19,877 कारोबारी समेत कुल 57 हजार व्यक्तियों की मद्य निशेष अधिनियम के तहत गिरफ्तारी हुई है। इनमें 37,027 पीने वाले रहे। इस दौरान राज्य के अंदर से 569 कारोबारी जबकि अन्य राज्यों से पांच बड़े कारोबारी गिरफ्तार किए गए। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2016 से मई 2026 तक कुल बरामद शराब का 97 फीसदी हिस्सा नष्ट किया जा चुका है।

AI स्किल्स से लैस होंगे यूपी के युवा, रोजगार के बढ़ेंगे अवसर

लखनऊ यूपी में कौशल विकास का प्रशिक्षण ले रहे डेढ़ लाख युवाओं को मुफ्त प्रोफेशनल एआई ट्रेनिंग दिलाई जाएगी। उप्र कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) व आईबीएम स्किल फाउंडेशन के बीच एमओयू किया गया है। यूपीएसडीएम व दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) के 1000 केंद्रों पर प्रशिक्षण ले रहे युवा इससे लाभान्वित होंगे। यूपीएसडीएम के मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि आईबीएम स्किल फाउंडेशन के साथ हुए एमओयू का लाभ युवाओं को रोजगार हासिल करने में मिलेगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं के लिए मेगा जॉब फेयर लगाए जाएंगे और प्लेसमेंट ड्राइव भी चलाई जाएगी। प्रशिक्षण अवधि के दौरान ही रोजगार सहभागिता गतिविधियां आयोजित की जाएगी। जिसके माध्यम से प्रतिभागियों को उद्योग जगत की कार्य प्रणाली, रोजगार बाजार व करियर के अवसरों को बेहतर ढंग से समझाया जाएगा। इंटरव्यू की भी कराएंगे तैयारी रोजगार आसानी से मिले इसके लिए उन्हें इंटरव्यू की तैयारी कराई जाएगी। करियर वर्कशॉप के माध्यम से संचार कौशल, पेशेवर व्यवहार, आत्मविश्वास व कार्यस्थल की अपेक्षाओं से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। युवाओं को सिर्फ पारंपरिक ज्ञान ही नहीं बल्कि एआई जैसी उभरती तकनीकी का ज्ञान देकर उन्हें दक्ष बनाया जाएगा। एमओयू कार्यक्रम के दौरान सोमवार को राजधानी स्थित यूपीएसडीएम मुख्यालय में एआई फॉर पब्लिक सर्विस एंड गुड गवर्नेंस कार्यशाला का आयोजन कर अधिकारियों व कर्मचारियों को एआई के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को 10 मानक लागू कर बनाया जाएगा निपुण वहीं, परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में कक्षा तीन से पांच तक के विद्यार्थियों को भी निपुण बनाने के लिए अभियान शुरू किया जाएगा। 10 मानकों को लागू कर विद्यार्थियों को निपुण बनाया जाएगा। अभी प्री-प्राइमरी से कक्षा दो तक निपुण मिशन चलाया जा रहा था। अब इसका विस्तार किया जा रहा है। विद्यार्थियों के सामाजिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए कक्षा के वातावरण को सहज, सुरक्षित व सकारात्मक बनाया जाएगा। नियमित अभ्यास कार्य दिया जाएगा और उसके आधार पर फीडबैक लिया जाएगा, बच्चों की समझ को परखने के लिए शिक्षक यह देखेंगे कि वह कितना समझ पा रहे हैं और उनका नाम लेकर कक्षा में सवाल पूछे जाएंगे, बच्चों के सीखने के स्तर के नियमित आंकलन के साथ कमजोर बच्चों के लिए कैच-अप अभियान चलेगा, बच्चों को कक्षा में चर्चा में शामिल किया जाएगा, शिक्षण योजना ऐसी तैयार करनी होगी जिससे सीखने के समय को बढ़ाने में मदद मिले। शिक्षक बच्चों को स्वतंत्र रूप से लेखन के लिए अभ्यास कार्य देंगे, छोटे-छोटे छात्र समूह बनाकर उन्हें टास्क दिया जाएगा और गणित के कठिन सूत्रों को समझने के लिए टीएलएम का नियमित प्रयोग होगा। अपर मुख्य सचिव, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव: बिहार सरकार 33 मेडिकल कॉलेजों का संचालन निजी हाथों को सौंपने की तैयारी में

पटना बिहार के सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में जल्द ही प्राइवेट कंपनियों की एंट्री होगी। जी हां, राज्य सरकार जल्द ही कई मेडिकल कॉलेजों की अहम जिम्मेदारियां निजी हाथों में सौंपने के प्लान पर काम कर रही है। इसके लिए बिहार के मेडिकल कॉलेज एंड अस्पतालों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल अपनाने का प्लान बनाया गयाा है। राज्य की सम्राट चौधरी सरकार ने 33 सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के संचालन और उनके विकास के लिए हितधारकों से परामर्श मांगा है। सरकार का मकसद मुख्य निजी स्वास्थ्य सेवा और इस क्षेत्र से जुड़े खिलाड़ियों को बिहार के सार्वजनिक क्षेत्र में लाना है ताकि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को और भी बेहतर किया जा सके। राज्य सरकार की योजना है कि 17 नए मेडिकल कॉलेज ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के तहत और 16 मौजूदा या आगामी संस्थानों को ब्राउनफील्ड के तहत विकसित किया जाए। इसके बाद इन सभी का संचालन वैसे निजी संस्थाओं को सौंपा जाए जिन्हें मेडिकल कॉलेजों और अस्पताल श्रृंखलाओं के प्रबंधन का अनुभव हो। इस संबंध में 17 जून को पटना में एक अहम बैठक भी होगी। स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने हिन्दुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा कि बिहार को वैसे नामचीन प्राइवेट प्लेयरों से भागीदारी की उम्मीद है जिन्हें मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों को चलाने में पूर्व का अनुभव हासिल है। ब्राउनफील्ड मॉडल के तहत हम उन्हें 16 मेडिकल कॉलेज देंग जहां या तो आधारभूत संरचनाओं का निर्माण हो चुका है या फिर अगले छह महीने या एक साल में हो जाएगा। इसी तरह ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट में 17 नए वैसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल हैं जिनके लिए सरकार 60 साल की लीज पर जमीन देगी। ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट में वैसे 16 संस्थानों आएंगे जो अभी चालू हैं, नवनिर्मित हैं या निर्माणाधीन हैं, जिन्हें 30 साल की रियायत अवधि के लिए संचालन और प्रबंधन के लिए दिया जाएगा। स्वास्थ्य सचिव ने कहा है कि सरकार ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड दोनों ही प्रोजेक्ट के लिए अपने विचार रखेगी और संभावित बोलीदाताओं से विभिन्न विषयों पर उनका फीडबैक मांगेगी। इनमें जमीन की आवश्यकता, एकल-खिड़की मंजूरी तंत्र और प्रमाणन समेत अन्य विषय शामिल हैं। राज्य सरकार इन विषयों पर मिले परामर्श के आधार पर इस सेक्टर में अपनाए गए बेहतरीन प्रक्रियाओं जिसमें केद्र सरकार द्वारा पीपीपी को लेकर जारी गाइडलाइन भी शामिल है का गहन अध्य्यन करेगी। इसके बाद ही सरकार अपने दस्तावेज तैयार करेगी। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने आगे बताया कि इसके बाद सरकार एक सलाहकार नियुक्त करेगी जो नियम और शर्तों से संबंधित विस्तृत दस्तावेज तैयार करेंगे। इसमें रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इलाज शुल्क को लेकर अस्पतालों को छूट दी जाएगी कि वो मार्केट आधारित रेट पर इसका संचालन करें। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इलाज के लिए सब्सिडी दिए जाने को लेकर बाद में फैसला लिया जाएगा। सरकार का मानना है कि प्राइवेट-सेक्टर के विशेषज्ञों की एंट्री और इनवेस्टमेंट से मेडिकल कॉलेजों के निर्माण में तेजी आएगी। इससे अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगीं और एडवांस हेल्थकेयर को बल मिलेगा।

जैविक खेती बनेगी किसानों की समृद्धि का आधार, पर्यावरण को भी मिलेगा फायदा: केदार कश्यप

जैविक खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बल – वन मंत्री केदार कश्यप किसानों को जैविक खेती की उन्नत तकनीकों से जोड़ने कृषि कार्यशाला का सफल आयोजन दंतेवाड़ा को जैविक कृषि का मॉडल जिला बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रायपुर,  किसानों और कृषि प्रेमियों को रासायनिक खादों व कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक और टिकाऊ खेती करने के लिए प्रशिक्षित करने हेतु आयोजित की गई है। दंतेवाड़ा जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय जैविक कृषि कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसानों, ग्रामीण युवाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और कृषि विशेषज्ञों ने भाग लिया। जैविक खेती स्वस्थ समाज और समृद्ध कृषि का आधार                कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि दंतेवाड़ा जिले में जैविक खेती की अपार संभावनाएं हैं। यहां की प्राकृतिक परिस्थितियां और किसानों की मेहनत जैविक कृषि के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि जैविक खेती केवल उत्पादन बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से भी जुड़ी है। जैविक खेती अपनाकर किसान भूमि की उर्वरता बनाए रखने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्यान्न उत्पादन कर सकते हैं। किसानों के लिए संचालित हो रही हैं अनेक योजनाएं                वन मंत्री कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार भी किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण और कृषि विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने किसानों से खेतों की मेड़ों पर अधिक से अधिक पौधारोपण करने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे भूमि संरक्षण, जल संवर्धन और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा मिलेगा। जैविक खेती बनेगी दंतेवाड़ा की नई पहचान               क्षेत्रीय विधायक चौतराम अटामी ने कहा कि जिले के किसान जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाकर बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को वैज्ञानिक जानकारी, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराकर खेती को अधिक उन्नत एवं लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने किसानों से कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संचालित योजनाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अधिकतम लाभ लेने की अपील की। वैज्ञानिकों ने दी उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी              कार्यशाला के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने जैविक खेती, हरी खाद, जैव उर्वरक, वर्मी कम्पोस्ट, प्राकृतिक कीट एवं रोग प्रबंधन, मूल्य संवर्धन तथा जैविक उत्पादों के विपणन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी किसानों को दी। किसानों की समस्याओं का समाधान भी विशेषज्ञों द्वारा किया गया। विभिन्न विभागों ने लगाए जानकारी एवं प्रदर्शनी स्टॉल              कार्यक्रम में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, उद्यानिकी विभाग, पशुपालन विभाग, मत्स्य विभाग तथा भूमगादी संस्था द्वारा स्टॉल लगाकर किसानों को विभिन्न योजनाओं, तकनीकों और कृषि नवाचारों की जानकारी दी गई। साथ ही कृषकों को कृषि आदान सामग्री एवं आम के पौधों का वितरण भी किया गया। महिला स्व-सहायता समूहों ने प्रदर्शित की नवाचार क्षमता               कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों द्वारा रागी से तैयार केक का प्रदर्शन किया गया। मुख्य अतिथि ने केक काटकर महिला समूहों के प्रयासों की सराहना की और मूल्य संवर्धन आधारित गतिविधियों को ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।  कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष अरविन्द कुंजाम, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुनीता भास्कर सहित जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी-कर्मचारी तथा जिले के विभिन्न गांवों से आए किसान, ग्रामीण युवा और महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।

गैंगस्टर नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा, गोल्डी ढिल्लों गैंग के पांच सदस्य गिरफ्तार

पटियाला  गैंगस्टरों के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम के तहत पटियाला पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों गैंग के पांच गुर्गों को भारी मात्रा में हथियारों समेत गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 10 पिस्तौल समेत 20 कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक आरोपी पटियाला में जबरन वसूली के लिए किसी टारगेट किलिंग को अंजाम देने की तैयारी में थे। समय रहते आरोपियों की गिरफ्तारी से यह वारदात होने से टल गई।  आरोपियों के खिलाफ दर्ज हैं आपराधिक मामले  आरोपियों के खिलाफ पहले भी कत्ल, कत्ल की कोशिश, लूटपाट और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज हैं। गिरफ्तार आरोपियों में अर्शदीप सिंह निवासी 16 फाटक के पास गांव रसूलपुर सैदा ज़िला पटियाला, जतिंदर गुप्ता निवासी गोपाल कॉलोनी, पटियाला, यशवैद उर्फ़ यौधा निवासी अजूबा पैलेस के पास संगरूर रोड, पटियाला, अभिषेक निवासी गांव सिहसर तहसील नरवाना, जिला जींद (हरियाणा), अखिल अहमद निवासी ऋषि कॉलो, पटियाला शामिल हैं। सभी आरोपियों को पटियाला में साधु बेला रोड के पास एक सुनसान जगह से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने गुप्त सूचना पर की गश्त सोमवार को पत्रकार वार्ता में एसएसपी वरुण शर्मा ने बताया कि सीआईए टीम थाना अर्बन एस्टेट के इलाकों में गश्त कर रही थी। इसी दौरान पुलिस पार्टी को गोपनीय सूचना मिली कि गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों गैंग के गुर्गे अर्शदीप सिंह पुत्र बिंदर, जतिंदर गुप्ता पुत्र रमेश चंद गुप्ता, यशवैद उर्फ यौधा पुत्र अशोक कुमार, अभिषेक पुत्र राजेश कुमार और अखिल अहमद पुत्र हरीश अहमद पटियाला में साधु बेला रोड के पास एक सुनसान जगह पर बैठकर किसी बड़ी वारदात को अंजाम जेने की योजना बना रहे हैं। इस पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में थाना अर्बन एस्टेट पटियाला में मामला दर्ज किया और आरोपियों को साधु बेला रोड के पास सुनसान जगह से गिरफ्तार कर लिया।  हथियार और नशा तस्करों के संपर्क में थे आरोपी  पुलिस ने आरोपियों के पास से 5 पिस्तौल 32 बोर, 4 पिस्तौल 315 बोर और एक रिवॉल्वर 32 बोर (कुल 10 पिस्तौल समेत 20 कारतूस) बरामद किए हैं। एसएसपी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों का अपराधिक रिकार्ड है, इनके खिलाफ कत्ल, कत्ल की कोशिश, लूटपाट और आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज हैं। इन मामलों में ये गिरफ्तार होकर कईं बार जेल जा चुके हैं। जेलों में बंदी के दौरान यह आरोपी पंजाब की सीमा से सटे जिलों के नशा और हथियार तस्करों के संपर्क में आए। आरोपी यशवैद उर्फ यौधा ने जेल से बाहर आकर सोशल मीडिया के जरिये तरनतारन से संबंधित अपने एक साथी से संपर्क किया और उससे हथियारों की खेप मंगवाने का सौदा किया। ये हथियार गिरफ्तार आरोपियों ने विरोधी गिरोहों के साथ गैंगवार करने और गुटबाजी के दौरान वारदातें करके विरोधियों को जानी नुकसान पहुंचाने के लिए मंगवाए थे। पटियाला पुलिस यह भी पता कर रही है कि आरोपियों ने हथियारों की यह खेप मंगवाने के लिए पैसे ट्रांसफर करने के लिए हवाला डीलर या किसी दूसरे वित्तीय माध्यम का इस्तेमाल किया है। 

सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र गोचर, 4 राशियों की चमकेगी किस्मत

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजा सूर्य देव का नक्षत्र परिवर्तन एक बेहद महत्वपूर्ण घटना माना जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 22 जून 2026, दिन सोमवार को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर सूर्य देव मृगशिरा नक्षत्र से निकलकर राहु के नक्षत्र आर्द्रा में प्रवेश करने जा रहे हैं. सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में जाना 'मकर संक्रांति' की तरह ही बेहद खास माना जाता है, क्योंकि इसी दिन से वर्षा ऋतु की औपचारिक शुरुआत भी होती है. राहु के नक्षत्र में सूर्य का यह गोचर सभी 12 राशियों पर गहरा असर डालेगा, लेकिन 4 विशेष राशियां ऐसी हैं जिनके लिए यह गोचर किसी वरदान से कम नहीं होने वाला है. इस दौरान इन राशियों को भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा और करियर से लेकर आर्थिक स्थिति में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है. मेष राशि (Aries) मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर बेहद शुभ रहने वाला है. आपके पराक्रम और साहस में वृद्धि होगी. करियर: कार्यक्षेत्र में आपकी लीडरशिप क्वालिटी की सराहना होगी. सीनियर अधिकारियों का पूरा सहयोग मिलेगा. आर्थिक लाभ: अटके हुए काम पूरे होने से धन लाभ के योग बनेंगे. निवेश के लिए यह समय उत्तम है. मिथुन राशि (Gemini) चूंकि सूर्य आपकी ही राशि में गोचर करते हुए आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, इसलिए इसका सीधा और सकारात्मक प्रभाव आपके व्यक्तित्व पर दिखेगा. मान-सम्मान: समाज और कार्यक्षेत्र में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा. आपकी वाणी का प्रभाव लोगों पर पड़ेगा. भाग्य का साथ: जो काम लंबे समय से रुके हुए थे, वे अचानक गति पकड़ेंगे. कारोबारी यात्राएं लाभदायक सिद्ध होंगी. सिंह राशि (Leo) सूर्य आपकी राशि के स्वामी हैं, इसलिए आपके लिए यह नक्षत्र परिवर्तन विशेष रूप से फलदायी होने जा रहा है. आर्थिक पक्ष: आपकी आमदनी के स्रोतों में वृद्धि होगी. पुराना कर्ज चुकाने में आप सफल रहेंगे. सफलता: नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति (Promotion) या इंक्रीमेंट की खुशखबरी मिल सकती है. सरकारी क्षेत्रों से जुड़े कामों में बड़ी सफलता हाथ लगेगी. धनु राशि (Sagittarius) धनु राशि के जातकों के लिए सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में आना भाग्य के द्वार खोलने जैसा होगा. वैवाहिक जीवन व साझेदारी: व्यापार में नए पार्टनर्स जुड़ सकते हैं, जिससे भविष्य में बड़ा मुनाफा होगा. जीवनसाथी के साथ रिश्ते मजबूत होंगे. भाग्य का सहयोग: किस्मत का पूरा साथ मिलने से आपके सोचे हुए प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे होंगे. पैतृक संपत्ति से भी लाभ होने के संकेत हैं.

वास्तु के अनुसार घर के लिए शुभ पौधे और सही दिशा

 वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के भीतर पेड़-पौधों का सही चयन जीवन में खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा लाता है. सही दिशा में रखे गए पौधे न केवल घर के वातावरण को शुद्ध रखते हैं, बल्कि सुख, समृद्धि और अच्छी सेहत का भी प्रतीक माने जाते हैं. घर के लिए सबसे शुभ पौधे और उनकी दिशा तुलसी (Tulsi): इसे घर में सबसे पवित्र माना जाता है. इसे हमेशा उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए.  इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. मनी प्लांट (Money Plant): आर्थिक उन्नति के लिए इसे दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना सबसे अच्छा माना जाता है. यह धन के नए स्रोत खोलता है. लकी बैम्बू (Lucky Bamboo): सौभाग्य के लिए इसे पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में रखें. यह घर के सदस्यों की समृद्धि बढ़ाता है. स्नेक प्लांट (Snake Plant): यह पौधा हवा को शुद्ध करता है और तनाव दूर करता है. इसे दक्षिण या दक्षिण-पूर्व दिशा में रखने से लाभ होता है. जेड प्लांट (Jade Plant): यदि आप इसे घर के प्रवेश द्वार पर (पूर्व दिशा में) रखते हैं, तो यह व्यापार और सफलता को आकर्षित करता है. एलोवेरा (Aloe Vera): स्वास्थ्य और शांति के लिए इसे पूर्व या उत्तर दिशा में लगाना चाहिए. अरेका पाम (Areca Palm): इसे उत्तर या पूर्व दिशा में रखने से घर में शांति और ताज़गी बनी रहती है. पीस लिली (Peace Lily): घर में शांति और प्यार के लिए इसे बेडरूम की खिड़की के पास रखना बहुत शुभ है. किन पौधों से बचें? वास्तु शास्त्र कुछ पौधों को घर के लिए नकारात्मक मानता है. कांटेदार पौधे (जैसे कैक्टस) से घर के भीतर तनाव पैदा हो सकता है.  इसी तरह, बोनसाई (Bonsai) पौधे प्रगति में बाधक माने जाते हैं, इसलिए इन्हें घर में लगाने से परहेज करना चाहिए. कॉटन प्लांट और इमली जैसे पौधों को भी वास्तु के अनुसार घर के अंदर नहीं लगाना चाहिए. पौधों की देखभाल के जरूरी टिप्स वास्तु का लाभ तभी मिलता है जब पौधे स्वस्थ हों. हमेशा सुनिश्चित करें कि गमलों के आसपास सफाई रहे और कोई भी पौधा सूखने न पाए. यदि कोई पौधा मुरझा गया है, तो उसे तुरंत हटा दें, क्योंकि मृत पौधे नकारात्मकता फैलाते हैं. इसके अलावा, पौधों को सही दिशा में रखने के साथ-साथ उन्हें पर्याप्त धूप और पानी देना भी जरूरी है.

सीएम योगी का बड़ा ग्रामीण रोजगार मॉडल : 7500 गोशालाओं से जुड़ेंगी 40-40 युवाओं की टीमें

गो संरक्षण विशेष गांवों में बनेंगे पंचगव्य क्लस्टर, तीन लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार सीएम योगी का बड़ा ग्रामीण रोजगार मॉडल : 7500 गोशालाओं से जुड़ेंगी 40-40 युवाओं की टीमें. महिला समूहों, किसानों और युवाओं को दी जाएगी प्राथमिकता पंचगव्य से बनेंगे साबुन, पेंट, खाद, औषधियां और अन्य उत्पाद लखनऊ उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण को रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए योगी सरकार बड़ा मॉडल तैयार कर रही है। प्रदेश की 7500 से अधिक गोशालाओं के जरिए गांवों में पंचगव्य क्लस्टर विकसित किए जाएंगे, जहां 40-40 युवाओं की टीमें उत्पादन और उद्यमिता का जिम्मा संभालेंगी। इस पहल से प्रदेश के करीब तीन लाख युवाओं को स्वरोजगार और आय के अवसर मिलने की संभावना है। महिला स्वयं सहायता समूहों, किसानों और ग्रामीण युवाओं को इस योजना में प्राथमिकता दी जाएगी। योगी सरकार का लक्ष्य गोशालाओं को केवल पशु संरक्षण केंद्र तक सीमित न रखकर उन्हें उत्पादन और रोजगार के केंद्र में बदलना है। गांवों में बनने वाले पंचगव्य क्लस्टरों में देसी गायों से प्राप्त दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर के आधार पर जैविक कीटनाशक, जैव उर्वरक, औषधियां, धूपबत्ती, साबुन, पेंट तथा अन्य दैनिक उपयोग की सामग्री तैयार की जाएगी। इन उत्पादों के विपणन की व्यवस्था भी क्लस्टर स्तर पर विकसित की जाएगी। गो आधारित उद्योगों को मिलेगा संगठित स्वरूप उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि पंचगव्य क्लस्टर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने के साथ गो-आधारित उद्योगों को संगठित स्वरूप प्रदान करेंगे। इससे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की लागत कम होगी। साथ ही गांवों में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। ऐसे काम करेगा मॉडल प्रदेश की 7500 गोशालाओं को क्लस्टर से जोड़ा जाएगा और प्रत्येक क्लस्टर में 40 युवाओं की टीम रहेगी। ये टीम उत्पादन से लेकर विभिन्न गतिविधियों की मॉनिटरिंग करेगी। महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई महिलाओं की इसमें सक्रिय भागीदारी रहेगी। टीम स्थानीय स्तर पर उत्पादन से लेकर विपणन तक की व्यवस्था संभालेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में एग्रो सौर पीवी परियोजना के लिए हुआ महत्वपूर्ण एमओयू

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मौजूदगी में एग्रो सौर पीवी के लिए हुआ एमओयू नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग तथा इंडो-जर्मन एग्रीवोल्टाइक परियोजना मिलकर करेंगे काम प्रदेश में एग्री सौर पीवी के विकास में जर्मन कम्पनी जीआईजेड करेगी सहयोग भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रदेश में एग्रो सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की मंशा पर एक और उपलब्धि हासिल हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मौजूदगी में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड तथा जर्मन सरकार समर्थित इंडो-जर्मन एग्री वोल्टाइक सहयोग परियोजना (आईजीसीए) के मध्य सोमवार को मंत्रालय, भोपाल में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर आदान-प्रदान किया गया। एग्री वोल्टाइक, कृषि एवं सौर ऊर्जा के संयुक्त उपयोग को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया एक संगठन है। इसका उद्देश्य कृषि भूमि पर खेती के साथ-साथ उसी खेत में ही सौर ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करना है, जिससे अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता कम हो, खाद्य सुरक्षा बनी रहे तथा भूमि संबंधी विवादों से भी बचा जा सके। इस काम में जर्मन कम्पनी सरकार को सहयोग देगी। यह पहल पीएम-कुसुम 2.0 सहित विभिन्न योजनाओं के अनुरूप राज्य में विशिष्ट एग्रीवोल्टाइक ढांचा विकसित करने, किसानों की आय बढ़ाने, भूमि उपयोग दक्षता सुधारने, उत्पादित ऊर्जा की सुरक्षा सुदृढ़ करने तथा जलवायु-अनुकूल ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने में सहायक होगी। यह गैर-बाध्यकारी समझौता ज्ञापन मई 2030 तक प्रभावी रहेगा। इस अवसर पर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग मनु श्रीवास्तव, प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड अमनवीर सिंह बैंस, भारत में जर्मन दूतावास के पदाधिकारी, एग्री वोल्टाइक संगठन से एलेक्जेंडर, जर्मनी की जीआईजेड कम्पनी के पदाधिकारी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। एग्री सौर पीवी के तहत सरकार किसानों को सब्सिडी देगी। इससे किसान अपनी जमीन के मालिकाना हकदार होंगे। किसान जमीन में खेती करेंगे और उसी खेत में सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा उत्पादन कर अतिरिक्त आय भी अर्जित करेंगे। यह किसानों के लिए डबल सौगात होगी। राज्य सरकार और इंडो-जर्मन एग्री वोल्टाइक सहयोग परियोजना के मध्य हुई इस परस्पर साझेदारी के अंतर्गत कम्पनी द्वारा एग्रीवोल्टाइक परियोजनाओं की पहचान, तकनीकी एवं आर्थिक मूल्यांकन, डिजाइन, वित्तीय व्यवहार्यता और क्रियान्वयन में सहयोग किया जाएगा। इसके तहत प्रदेश के किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, ऊर्जा विकासकर्ताओं, डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनीज (डिस्कॉम) एवं अन्य संबंधित हितधारकों के लिए क्षमता निर्माण और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। कम्पनी द्वारा राज्य में कृषि उत्पादकता एवं खाद्य सुरक्षा को संरक्षित रखते हुए उपयुक्त नीतिगत एवं नियामक ढांचा विकसित करने में भी सहयोग किया जाएगा।  

भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय कर रही है राज्य सरकार : मुख्यमंत्री साय

शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय कर रही है राज्य सरकार : मुख्यमंत्री साय स्कूली शिक्षा में भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों की पुनर्स्थापना का संत समाज ने किया स्वागत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से विभिन्न संत-महात्माओं ने की सौजन्य भेंट, आध्यात्मिक शिक्षा को बढ़ावा देने के निर्णय पर जताया आभार रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर स्वामी राजीव लोचन दास जी महाराज, निर्वाणी अखाड़ा के महंत सुरेंद्र दास जी महाराज, शदाणी दरबार से उदय लाल जी  तथा कबीर आश्रम सोनपैरी के देवकर साहब जी ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर संत-महात्माओं ने छत्तीसगढ़ के विद्यालयों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों एवं नैतिक शिक्षा से जुड़े पारंपरिक श्लोकों और मंत्रों को पुनः शामिल किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया। संतों ने कहा कि पूर्व में विद्यालयों में विद्यार्थियों को "गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर" जैसे मंत्रों एवं भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया जाता था, जिससे बच्चों में संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास होता था। समय के साथ ये परंपराएं शैक्षणिक वातावरण से धीरे-धीरे विलुप्त होती गईं, किंतु अब राज्य सरकार द्वारा इन्हें पुनः स्थापित करने की पहल अत्यंत स्वागतयोग्य है। संत समाज ने कहा कि विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र तथा अन्य प्रेरणादायी वैदिक एवं सांस्कृतिक प्रार्थनाओं का समावेश बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़ सकेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों के विकास का आधार भी है। हमारी सरकार बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र एवं अन्य प्रेरणादायी प्रार्थनाओं के समावेश से विद्यार्थियों में अनुशासन, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना का विकास होगा। यह पहल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए एक संस्कारित, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संत-महात्माओं ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को इस पहल के लिए साधुवाद देते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया तथा कहा कि यह निर्णय प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक विरासत को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।