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अप्रूवल, रिजेक्शन और कार्ड डिसेबल जैसी प्रक्रियाओं के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे राजधानी के चक्कर

लखनऊ योगी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी क्रम में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थियों के लिए एक बड़ी राहत भरी व्यवस्था लागू की गई है। अब आयुष्मान कार्ड से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए लाभार्थियों को राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (साचीज) के लखनऊ स्थित कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उनकी समस्याओं का निस्तारण अब जिला स्तर पर ही किया जा सकेगा। सभी सीएमओ को उपलब्ध कराई गई तकनीकी आईडी साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रयास है कि आयुष्मान भारत योजना का वास्तविक लाभ तभी पात्र लोगों तक पहुंचे। उन्हें बिना किसी अनावश्यक परेशानी के समय पर सेवाएं उपलब्ध हों। यही वजह है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे में प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ), नोडल आयुष्मान अधिकारियों तथा जिला कार्यान्वयन इकाई की टीमों को विशेष तकनीकी आईडी उपलब्ध करा दी गई है। इसके माध्यम से अब जिला स्तरीय अधिकारी आयुष्मान कार्ड के अप्रूवल, रिजेक्शन और कार्ड को डिसेबल करने जैसी तकनीकी प्रक्रियाओं का स्थानीय स्तर पर ही त्वरित समाधान कर सकेंगे। इस व्यवस्था से लाभार्थियों का समय और धन दोनों बचेगा तथा सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेजी से उपलब्ध होंगी। राष्ट्रीय औसत से कम है यूपी का दावा निस्तारण एवं भुगतान का टाइम वहीं साचीज ने गुणवत्तापूर्ण उपचार और अस्पतालों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण पहल शुरू की हैं। एजेंसी का उद्देश्य एक ओर मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है तो दूसरी ओर ईमानदारी से कार्य करने वाले अस्पतालों को समय पर भुगतान देकर उन्हें प्रोत्साहित करना भी है। दावों (क्लेम) के निस्तारण और भुगतान प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और तेज बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में भुगतान लंबित होने को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है और लगभग 500 करोड़ रुपये की देयता ही लंबित है। उत्तर प्रदेश में दावा निस्तारण एवं भुगतान का औसत टर्न-अराउंड टाइम लगभग 57 दिन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 73 दिन है। यह उपलब्धि प्रदेश में लागू की गई प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था और तकनीकी सुधारों को दर्शाती है। अनियमितताओं के चलते 200 अस्पतालों पर कार्रवाई साचीज की सीईओ ने बताया कि कई बार अस्पतालों द्वारा आवश्यक दस्तावेज समय पर या पूर्ण रूप से प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण दावे अस्वीकृत हो जाते हैं। इससे अस्पतालों को भुगतान प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को दूर करने के लिए एजेंसी विभिन्न चरणों में ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इन प्रशिक्षणों में अस्पतालों को दावा प्रस्तुत करने की सही प्रक्रिया, आवश्यक अभिलेखों की जानकारी और स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन्स के अनुरूप उपचार एवं दावा प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों से अस्पताल पहली बार में ही सही और पूर्ण दावा प्रस्तुत कर सकेंगे। इससे दावों की अस्वीकृति कम होगी और भुगतान प्रक्रिया और अधिक तेज एवं पारदर्शी बनेगी। इससे मरीजों और अस्पतालों दोनों को लाभ मिलेगा। दूसरी ओर केवल गुणवत्तापूर्ण और लाभार्थी हितैषी अस्पतालों को बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी भी की जा रही है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में गुणवत्ता मानकों का पालन न करने तथा विभिन्न अनियमितताओं के कारण लगभग 200 अस्पतालों को योजना से डी-एम्पैनल किया गया है। यह कार्रवाई स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। 300 अस्पतालों का कराया जा रहा फील्ड ऑडिट करीब 300 अस्पताल ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जिनके विरुद्ध अपकोडिंग अथवा संदिग्ध दावों के माध्यम से अनुचित भुगतान प्राप्त करने की आशंका सामने आई है। ऐसे अस्पतालों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और उनके विरुद्ध विस्तृत फील्ड ऑडिट कराया जा रहा है। जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इससे योजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को और मजबूती मिलेगी। साचीज का स्पष्ट लक्ष्य है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत केवल वही अस्पताल सक्रिय रहें, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान कर रहे हैं। ऐसे अस्पतालों को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा उनके दावों और भुगतान के निस्तारण को और अधिक व्यवस्थित एवं समयबद्ध बनाया जाएगा।

मंत्री वर्मा ने की विकास कार्यों की समीक्षा

​रायपुर राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा ने सारंगढ़ कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिले के विकास कार्यों की व्यापक समीक्षा की। बैठक में सुशासन तिहार, सीएम हेल्पलाइन के आवेदनों के निपटारे और लोक- कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की ज़मीनी हकीकत परखी। मंत्री   वर्मा ने कहा कि सरकार की योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में अधिकारी-कर्मचारी का सामूहिक योगदान होता है, इसलिए सभी अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन करें। राजस्व मामलों में लाएं तेजी, सीमांकन और नामांतरण को दें प्राथमिकता     ​राजस्व मंत्री  वर्मा ने सभी एसडीएम और तहसीलदारों से तहसीलवार लंबित राजस्व प्रकरणों जैसे—सीमांकन, खाता विभाजन और फौती नामांतरण की तुलनात्मक प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि आम जनता को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और राजस्व से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ समय-सीमा में पूर्ण किया जाए। उन्होंने पिछले वर्षों के स्वीकृत प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अपूर्ण और अप्रारंभ कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई और अधिकारियों से इसका कारण पूछा। ​जिला पंचायत सीईओ ने जानकारी दी कि कई मूल हितग्राहियों की मृत्यु हो जाने और उनके वैध नॉमिनी (वारिसदार) न होने के कारण कुछ कार्य अपूर्ण या अप्रारंभ हैं। ​मंत्री  वर्मा ने इस तकनीकी समस्या को जल्द से जल्द दूर कर आवास निर्माण  कार्य को गति देने के निर्देश दिए। जरूरतमंद हितग्राही को योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ मिले        मंत्री  वर्मा ने पीएम ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों से जिले की नई स्वीकृत सड़कों और वर्तमान सड़कों के निर्माण व मरम्मत कार्य का ब्यौरा लिया। उन्होंने बारिश के मौसम को देखते हुए सड़कों की गुणवत्ता और कनेक्टिविटी दुरुस्त रखने की हिदायत दी।उन्होंने कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों के अच्छे कर्तव्य निर्वहन और सेवा भाव से ही अंतिम छोर पर बैठे जरूरतमंद हितग्राही को योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ मिल सकता है। काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। खाद-बीज का भंडारण व सहकारी समितियों में मांग-आपूर्ति की ली जानकारी      ​ बैठक के दौरान  मंत्री ने जिले के विकास और आम जनता से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। जिसमे आयुष्मान कार्ड प्रगति, जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाएँ, जीवनदीप समिति के कार्य,जिले में पेट्रोल-डीजल व रसोई गैस की उपलब्धता, खरीफ सीजन हेतु किसानों के लिए खाद-बीज का भंडारण व सहकारी समितियों में मांग-आपूर्ति की स्थिति,पेंशन योजनाएं, छात्रावासों की स्थिति, अनुकंपा नियुक्ति के मामले और 'सेवा सेतु' के माध्यम से आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र जारी करने की प्रगति,पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना,जल जीवन मिशन के कार्य आदि शामिल है। इसी तरह डीएमएफ के कार्यों, ई-ऑफिस प्रणाली, रोड सेफ्टी, महतारी वंदन योजना और देश में लागू 'भारतीय न्याय संहिता' के तीन नए कानूनों के क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।         बैठक में कलेक्टर मती पद्मिनी भोई साहू, प्रभारी पुलिस अधीक्षक सु निमिषा पाण्डेय सहित जिले के सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। ​

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री सेठ एवं मंत्री सारंग के साथ हजारों युवाओं ने किया योग

भोपाल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व सुबह पर राजधानी भोपाल में आयोजित योग कार्यक्रमों में उत्साह और जनभागीदारी का अद्भुत संगम देखने को मिला। टीटी नगर स्टेडियम में आयोजित योग कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ एवं सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने सहभागिता कर योगाभ्यास किया। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने योग को स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन का आधार बताते हुए नागरिकों, विशेषकर युवाओं से नियमित योग अपनाने का आह्वान किया। मंत्री सारंग बड़ा तालाब स्थित बोट क्लब में आयोजित योग अभ्यास कार्यक्रम में शामिल हुए। प्राकृतिक वातावरण में आयोजित इस योगाभ्यास में भोपाल के हजारों युवा, खिलाड़ी, खेल प्रेमी एवं नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए और सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संकल्प लिया। मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज पूरी दुनिया भारतीय योग परंपरा को अपना रही है। इस योग दिवस पर 21 जून को विश्व के 192 देश सामूहिक योग करेंगे, उन्होंने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और सशक्त जीवन का माध्यम है। युवाओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने यह संदेश दिया कि नई पीढ़ी फिटनेस, स्वास्थ्य और योग के प्रति जागरूक है तथा विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के एक दिन पूर्व आयोजित इन कार्यक्रमों ने पूरे शहर को योगमय वातावरण से सराबोर कर दिया।  

सस्ते फर्नीचर का लालच देकर ठगी का प्रयास, कलेक्टर के नाम से बनाई गई फर्जी प्रोफाइल

 शिवपुरी साइबर ठगों ने मध्य प्रदेश में शिवपुरी जिले के कलेक्टर अर्पित वर्मा के नाम की फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर ठगी का प्रयास किया। कलेक्टर की पहचान का उपयोग कर लोगों से संपर्क किया और उन्हें सस्ते दामों पर फर्नीचर व इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने का झांसा देकर रकम की मांग की गई। मामला संज्ञान में आने पर शिकायत दर्ज कराई गई है। क्या है पूरा मामला शिवपुरी जिले के लालगढ़ गांव निवासी प्रमोद रावत को "अर्पित वर्मा IAS" नाम की एक फेसबुक आईडी से मैसेंजर पर संदेश भेजा गया। संदेश में बताया गया कि कलेक्टर का एक मित्र संतोष कुमार सीआरपीएफ कैंप में अधिकारी है। उसका तबादला हो गया है और वह महज तीन महीने पुराना अपना घरेलू सामान बेहद कम कीमत पर बेच रहा है। इसके लिए वह जल्द ही उनसे संपर्क करेगा। कुछ समय बाद प्रमोद रावत को व्हाट्सएप पर संदेश मिला। उसमें बेड, लैपटॉप, रेफ्रिजरेटर, सोफा सहित अन्य घरेलू सामानों की तस्वीरें भेजी गईं। फर्नीचर और इस सारे सामान की कीमत मात्र 90 हजार रुपये बताई गई। इसे खरीदने के लिए अग्रिम राशि के भुगतान की मांग की गई। अन्य लोगों को भी इसी तरह के संदेश भेजे गए हैं जिला जनसंपर्क अधिकारी प्रियंका शर्मा ने बताया कि मामले की शिकायत साइबर सेल शाखा में दर्ज करा दी गई है। पुलिस विधिक कार्रवाई के लिए फर्जी आईडी संचालित करने वालों की पहचान कर रही है।

राज्यपाल डेका ने मरका गांव के स्कूल को दिए डिजिटल बोर्ड

रायपुर राज्यपाल रमेन डेका ने लोकभवन में बेमेतरा जिले के ग्राम मरका के स्कूल के लिए डिजिटल बोर्ड प्रदान किया।  डेका ने ग्राम पंचायत मरका में संचालित शासकीय मीडिल स्कूल के बच्चों की सुविधा के लिए 65 इंच का यह स्मार्ट बोर्ड अपने स्वेच्छानुदान मद से प्रदान किया है। ग्रामीणों ने बताया कि उनके स्कूल में शिक्षक उपलब्ध है लेकिन स्मार्ट बोर्ड नहीं था। अब यह सुविधा मिलने से स्कूल के बच्चे नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल, प्रयास विद्यालय जैसे उत्कृष्ट विद्यालयों में प्रवेश के लिए तैयारी कर सकेंगे।  ग्रामीणों ने राज्यपाल को जैविक रूप से उत्पादित दाल, चना एवं अन्य सामग्रियां भेंट की।  इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ.सी.आर प्रसन्ना, ग्राम पंचायत के पदाधिकारी, शाला प्रबंधक समिति के अध्यक्ष उपस्थित थे।

परीक्षा केंद्र पर लगे CCTV कैमरे चोरी, महू पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार

महू  नीट परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद रविवार को फिर से नीट की पुनर्परीक्षा आयोजित की जा रही है। परीक्षा के पूर्व महू के शासकीय भेरूलाल पाटीदार स्नातकोत्तर महाविद्यालय स्थित बनाए गए परीक्षा केंद्र से दो सीसीटीवी कैमरे चोरी होने की घटना हुई है। इस मामले में प्रकरण दर्ज कर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर कैमरे बरामद कर लिए हैं। घटना ने परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, हालांकि प्रशासन ने परीक्षा के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए जाने का दावा किया है। कैमरे चोरी की घटना हुई कैद जानकारी के अनुसार डिग्री कॉलेज में दो परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इसमें वाणिज्य संकाय भवन में बनाए केंद्र में 240 और प्रशासनिक भवन में बनाए गए केंद्र में 480 इस तरह कुल 720 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। सुरक्षा के लिए दोनों केंद्रों पर 18-18 कैमरे लगाए गए हैं।  

मध्यप्रदेश प्राकृतिक खेती अपनाने वाले राज्यों में है सबसे अव्वल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि प्रकृति हमारी माता है और हम सब इसकी संतान। अपनी धरती माता को हमें रासायनिक उर्वरकों और हानिकारक कीटनाशकों से बचाना है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का पहला लक्ष्य मिट्टी में जैविक गतिविधियों को बढ़ाना है। यह खेती मिट्टी में केंचुए और सूक्ष्म जीव पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाती है। इससे भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। स्वस्थ मिट्टी ही समृद्ध कृषि की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि किसान भाई अधिक से अधिक प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाएं। इससे हमारी धरती माता की सेहत भी बनी रहेगी और इससे उपजे अनाज के पोषण से हम सब भी स्वस्थ रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को पश्चिम बंगाल से पीएम किसान सम्मान निधि के अंतरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पश्चिम बंगाल के हुगली स्थित तारकेश्वर से देश के 9.40 करोड़ से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किश्त के रूप में कुल 18 हज़ार 880 करोड़ रुपए पात्र किसानों के खातों में अंतरित किए। कार्यक्रम से प्रदेश के 81 लाख से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के रूप में 1640 करोड़ रूपए प्राप्त हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम किसान सम्मान निधि के सभी लाभार्थियों से अपील करते हुए कहा कि हमें धरती माता को बचाना है। हमें अपने बच्चों को बंजर जमीन नहीं देनी है। भारत सरकार खेत बचाओ अभियान चला रही है। हमें प्राकृतिक खेती अपनाकर रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग कम से कम करना है। देशभर के किसान खेत बचाओ अभियान से जुड़ें, दूसरों को भी प्रेरित करें और खेतों की मिट्टी की जांच करवाएं। हम सभी मिलकर धरती मां की रक्षा करें। हम केमिकल से धरती मां को नहीं मार सकते हैं। हमें उसे बचाना ही होगा। केंद्र सरकार ने विकसित भारत @2047 का संकल्प लिया है, इसमें देशवासियों का सहयोग बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के किसानों से कहा कि जिस तरह प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, उसी तरह योग करने से हमारा तन-मन स्वस्थ रहता है। प्रधानमंत्री ने सभी को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) की अग्रिम बधाई देते हुए कहा कि सभी देशवासी योग करें, क्योंकि योग ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरूआत फरवरी 2019 में हुई थी। इसके तहत हर साल छह हजार रूपये, दो-दो हजार की तीन समान किश्तों में किसान भाईयों को दिए जाते हैं। अब तक प्रदेश के किसान भाईयों को 22 किश्तों में 33 हजार 800 करोड़ रूपये मिल चुके हैं। शनिवार को 23वीं किश्त का अंतरण किया गया। पश्चिम बंगाल में हुए इस कार्यक्रम का देशभर में सीधा प्रसारण किया गया। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में साकार होते देख रहे है रामराज्य की संकल्पना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को बरखेड़ीकला स्थित राज्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण संस्थान (सिपेट) में 'प्राकृतिक खेती कार्यशाला सह कृषक संगोष्ठी' में पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी के संपूर्ण संबोधन का श्रवण किया। मुख्यमंत्री ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम रामराज्य की संकल्पना को साकार होते देख रहे हैं। प्रधानमंत्री ने गांव, गरीब, अन्नदाता किसान, युवा और नारी सहित सभी वर्गों के कल्याण से विश्व में भारत की अलग ही पहचान बनाई है। प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश को दो-दो नदी जोड़ो परियोजनाओं की सौगात दी है। इससे प्रदेश के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा और उनके सूखे खेतों में फसलें लहलहाएंगी। आज देश के हर गांव-कस्बे तक बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का जाल बिछ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ही देश के किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि देने की योजना प्रारंभ की है। यह हमारे अन्नदाता के अथक परिश्रम का सम्मान है। मध्यप्रदेश सरकार भी किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषक कल्याण वर्ष मना रही है। हम किसानों के कल्याण के लिए हर जरूरी कदम उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने पीएम किसान सम्मान निधि पाने वाले प्रदेश के सभी किसानों को बधाई दी और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। इस अवसर पर विधायक रामेश्वर शर्मा, जनप्रतिनिधि रविन्द्र यति, अपर मुख्य सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक  बर्णवाल, आयुक्तमती अनुभावास्तव, कलेक्टर भोपाल प्रियंक मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में किसान बंधु उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फसलों में कीटनाशक और रासायनिक खाद का उपयोग नुकसानदेह है। इससे कैंसर जैसी कई घातक बीमारियां जन्म लेती हैं। सरकार ने किसानों को पुन: प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए पहल की है, इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। आज हमारा मध्यप्रदेश देश में सर्वाधिक प्राकृतिक खेती करने वाला राज्यों में अव्वल स्थान पर है। प्राकृतिक खेती की उपज को उचित दाम दिलवाने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। हमारी प्राकृतिक खेती से दुनिया लाभान्वित हों, इसी भाव से कार्य करते हुए प्रदेश में तेजी से गोशालाओं का विस्तार किया जा रहा है। हमारी गौमाता प्राकृतिक खेती में सबसे अधिक मददगार प्राणी है। किसान गोबर और गौमूत्र से खाद बनाकर खेतों में डालें, इसी उद्देश्य से गौपालक किसानों को हमारी सरकार हर महीने 1100 रुपए प्रति गाय की दर से आर्थिक सहायता दे रही है। गौ-आधारित कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को उपज का सही दाम मिले, इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। पहले सोयाबीन पर भावांतर योजना के माध्यम लाभ दिया, उसके बाद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देकर किसानों से गेहूं उपार्जित किया। राज्य सरकार ने किसानों से गेहूं का एक-एक दाना खरीदकर उन्हें प्रति क्विंटल 2625 रुपए भुगतान किया है। हमारी सरकार प्राकृतिक खेती के जरिए किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है। इससे धरती माता की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी और विदेशी रासायनिक खाद पर निर्भरता भी घटेगी। प्रदेश के नागरिकों को प्राकृतिक तरीके से उगाए देसी ज्वार, बाजरा और गेहूं-चना का स्वाद मिलेगा। किसानों को दूध उत्पादन से भी जोड़ा जा रहा है। इसका दोहरा लाभ आय बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक खाद निर्माण में भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है। कम सिंचाई में भी फसल अच्छी होती है। प्राकृतिक खेती … Read more

कुनकुरी में जैविक किसान मेला एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर किसानों की समृद्धि ही विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला है। आधुनिक कृषि तकनीकों, बेहतर फसल चयन, प्राकृतिक एवं जैविक खेती तथा सुदृढ़ बाजार व्यवस्था के माध्यम से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों को समृद्ध बनाए बिना विकास का लक्ष्य पूर्ण नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुनकुरी में आयोजित जैविक किसान मेला एवं खेत बचाओ अभियान अंतर्गत प्राकृतिक एवं जैविक खेती कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता तथा मानव स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि पूर्व में गोबर खाद, ढैंचा एवं अन्य हरी खादों के उपयोग से खेती अधिक टिकाऊ और भूमि अधिक उपजाऊ रहती थी। आज आवश्यकता है कि परंपरागत ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय कर कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और उर्वरकों के आयात पर निर्भरता को देखते हुए नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे विकल्प किसानों के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। इनके उपयोग से उत्पादन लागत कम होती है और मिट्टी की गुणवत्ता भी संरक्षित रहती है। किसानों को मिला आधुनिक तकनीकों से जुड़ने का अवसर कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, आधुनिक कृषि यंत्रों, ड्रोन तकनीक, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने विभिन्न कृषि प्रदर्शनों का अवलोकन कर विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की तथा किसानों से संवाद भी किया। कार्यक्रम में ड्रोन के माध्यम से खेतों में दवा छिड़काव का लाइव प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा। किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और उनके उपयोग से होने वाले लाभों की जानकारी प्राप्त की। साथ ही कृषि नवाचारों, जैविक खेती, पशुपालन एवं मत्स्य पालन से संबंधित जीवंत प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। उत्कृष्ट किसानों का हुआ सम्मान कार्यक्रम में आयोजित किसान प्रतियोगिता के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सम्मानित किया। ग्राम खोंगा (मनोरा) के किसान महेश सिंह को जैविक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। ग्राम लाखाझार के किसान सुखराम को 33 किलोग्राम वजन के कटहल उत्पादन तथा ठेठेटांगर के किसान विजय भूषण को ढाई किलोग्राम वजन के आम उत्पादन के लिए सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने स्वामित्व योजना के तहत कृषक गुप्तेश्वर को भूमि पट्टा भी प्रदान किया। औषधीय एवं सुगंधित फसलों को मिलेगा बेहतर बाजार कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की उपस्थिति में जिला प्रशासन जशपुर एवं सेमिना एग्रो प्राइवेट लिमिटेड के बीच औषधीय एवं सुगंधित फसलों के विपणन के लिए महत्वपूर्ण अनुबंध किया गया। इस पहल से जिले के किसानों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होगा तथा मूल्य संवर्धन और विपणन की नई संभावनाएं विकसित होंगी। इससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। किसानों की खुशहाली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है तथा 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी की व्यवस्था लागू की गई है। सरकार बनने के तुरंत बाद किसानों को दो वर्षों का लंबित बोनस प्रदान किया गया तथा शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। बगिया दाबयुक्त सिंचाई योजना से बदलेगी खेती की तस्वीर मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत चयनित देश की 100 प्रमुख परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ की एकमात्र बगिया दाबयुक्त सिंचाई योजना शामिल है। लगभग 119 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना से 14 गांवों के लगभग 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। पाइपलाइन के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाने वाली इस योजना से भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता भी नहीं होगी। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के लिए देश के चयनित 100 जिलों में छत्तीसगढ़ के केवल तीन जिले—दंतेवाड़ा, कोरबा और जशपुर—शामिल किए गए हैं, जिससे जिले के कृषि विकास को नई गति मिलेगी। सुशासन और डिजिटल सेवाओं से ग्रामीणों को मिल रही सुविधा मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सुशासन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए गुड गवर्नेंस एवं अभिसरण विभाग का गठन किया गया है। अधिकांश शासकीय कार्य अब ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से संचालित हो रहे हैं तथा भ्रष्टाचार के मामलों में दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से 400 से अधिक नागरिक सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनका लाभ लोग घर बैठे प्राप्त कर रहे हैं। प्रदेश की 6 हजार ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहां ग्रामीणों को बैंकिंग एवं डिजिटल सेवाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की जानकारी देते हुए कहा कि अब नागरिक अपनी शिकायतें और समस्याएं सीधे दर्ज करा सकते हैं। 24×7 संचालित इस व्यवस्था से 42 विभागों के 8 हजार से अधिक अधिकारी जुड़े हैं और प्रत्येक शिकायत के समयबद्ध निराकरण की निगरानी की जा रही है। कार्यक्रम में पत्थलगांव विधायक एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्षमती गोमती साय, जशपुर विधायकमती रायमुनी भगत, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार बेसरा, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव,  नगर पालिका जशपुर के उपाध्यक्ष यशप्रतापसिंह जूदेव सहित बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

पीएम किसान योजना: बिहार में किसानों को मिली राहत, 34 हजार नाम लिस्ट से बाहर

पटना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत बिहार के लाखों किसानों का लंबा इंतजार अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। सरकार की ओर से शनिवार को राज्य के लगभग 73 लाख किसानों के बैंक खातों में योजना की राशि सफलतापूर्वक ट्रांसफर कर दी गई है। प्राप्त आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने बिहार के इन लाभार्थी किसानों के लिए कुल 1,463 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जारी की है, जो सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से किसानों के खातों में क्रेडिट हो चुकी है। खेती-किसानी के इस चालू सीजन में बैंक खातों में पैसा आने से बिहार के ग्रामीण इलाकों के किसानों को एक बहुत बड़ी आर्थिक राहत मिली है। किसानों के खाते में पहुंचे दो-दो हजार रुपये इस योजना के नियमों के तहत सभी पात्र और लाभुक किसानों के खातों में दो-दो हजार रुपये की सम्मान राशि भेजी गई है। मालूम हो कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित इस बेहद लोकप्रिय योजना के तहत प्रत्येक वर्ष देश भर के किसानों को हर चार-चार माह के अंतराल पर दो-दो हजार रुपये की तीन बराबर किस्तें सीधे उनके खातों में भेजी जाती हैं। बिहार के किसानों के खातों में आज जो रकम क्रेडिट हुई है, वह इस योजना के तहत मिलने वाली 23वीं किस्त की राशि है। मोबाइल पर मैसेज आते ही बिहार के किसानों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है और वे अपनी अगली फसलों की खाद व बीज की व्यवस्था के लिए बैंकों व सीएसपी केंद्रों का रुख करने लगे हैं। 22वीं किस्त के मुकाबले इस बार 34 हजार किसानों को लगा बड़ा झटका जहाँ एक तरफ 73 लाख किसानों के घरों में इस राशि के आने से उत्साह का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ राज्य के हजारों किसानों को इस बार मायूसी का सामना भी करना पड़ा है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पिछली यानी 22वीं किस्त की तुलना में बिहार के लगभग 34 हजार किसानों को इस बार योजना की राशि नहीं मिल सकी है। गौरतलब है कि 22वीं किस्त के समय बिहार के कुल 73 लाख 34 हजार किसानों के खातों में 1,467 करोड़ रुपये की राशि भेजी गई थी। लेकिन इस बार भू-सत्यापन और ई-केवाईसी जैसी जरूरी तकनीकी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा नहीं करने के कारण राज्य के 34 हजार किसानों के नाम लाभार्थी सूची से बाहर हो गए हैं। कृषि विभाग ने इन वंचित किसानों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपनी त्रुटियों को सुधारें ताकि अगली किस्त में उन्हें इस समस्या का सामना न करना पड़े।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया स्टॉलों का निरीक्षण, नागरिकों से संवाद कर योजनाओं का लाभ लेने का किया आह्वान

रायपुर सेवा, सुशासन और जनकल्याण के 12 वर्ष : अंबिकापुर में पंजीकरण शिविर बना जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ने का सशक्त माध्यम प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेवा, सुशासन और जनकल्याण के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशभर में संचालित “विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के” अभियान के अंतर्गत जनपद पंचायत सभाकक्ष, अंबिकापुर में वृहद पंजीकरण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की तथा योजनाओं से जुड़ने के लिए पंजीयन कराया। कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप से उपस्थित थे। उनके साथ विधायक  प्रबोध मिंज सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। इस अवसर पर मंत्री  अग्रवाल ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया, हितग्राहियों से संवाद किया तथा योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी प्राप्त की। शिविर के दौरान उपस्थित जनसमूह को प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, जनधन योजना, स्वच्छ भारत मिशन सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न लोककल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जुड़ने की प्रक्रिया समझाई तथा मौके पर ही पंजीयन की सुविधा उपलब्ध कराई। इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में देश ने विकास, सुशासन और जनसेवा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। सरकार की प्रत्येक योजना का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारा जा रहा है, जिससे गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्गों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है।  अग्रवाल ने कहा कि “विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के” अभियान केवल उपलब्धियों को बताने का माध्यम नहीं है, बल्कि जनता और शासन के बीच संवाद को और मजबूत बनाने का अवसर भी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे शासन की जनहितैषी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लें तथा अन्य पात्र लोगों को भी इनके बारे में जागरूक करें। कार्यक्रम में विधायक  प्रबोध मिंज ने भी नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की योजनाएं समाज के प्रत्येक वर्ग को सशक्त बनाने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे पंजीकरण शिविरों से पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचती है और उन्हें लाभ प्राप्त करने में आसानी होती है। शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने विभिन्न योजनाओं के लिए आवेदन प्रस्तुत किए। नागरिकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि एक ही स्थान पर विभिन्न विभागों की जानकारी और पंजीयन सुविधा उपलब्ध होने से उन्हें काफी लाभ मिला है। कार्यक्रम के दौरान सेवा, सुशासन और जनकल्याण की भावना के साथ विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने तथा जनभागीदारी को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया गया। अंबिकापुर में आयोजित यह पंजीकरण शिविर जनसंपर्क, जनविश्वास और जनकल्याण का प्रभावी उदाहरण बनकर उभरा। केंद्र में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की दिशा में यह आयोजन महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।